राम और सीता

                            राम और सीता


आज सुबह से सीता बहुत खुश थी क्योंकि इकलौता बेटा राम दस साल के बाद घर वापिस लौट रहा था। इन सालों के दौरान दोनो के बीच बहुत कम बात हुई क्योंकि बेटा हॉस्टल में रहता था।

दरअसल सीता के पति की मौत गांव में डॉक्टर ना होने की वजह से हो गई थी इसलिए वी बुरी तरह से टूट गई थी और उसने उसी दिन फैसला किया था कि वो अपने बेटे को हर हाल में एक डॉक्टर बनाएगी ताकि फिर गांव में किसी की मौत डॉक्टर ना होने की कमी के चलते ना हो सके। उसने अपने बेटे से कसम ली थी कि जब तक वो एमबीबीएस का एग्जाम पास नहीं करेगा वो उसकी शक्ल तक नहीं देखेगी।
कल ही सीपीएमटी का रिजल्ट आया था जिसमें उसके बेटे ने टॉप किया था और बस अब कुछ साल में अंदर ही उसका डाक्टर बन जाना तय था।

सीता जानती थी कि उसने अपने मासूम से बेटे पर बहुत ज़ुल्म किए हैं लेकिन वो गांव की भलाई के चलते मजबुर थी और ये उसके बाप की भी इच्छा थी कि उसका बेट एक डॉक्टर बने। शाहनवाज की शादी रहमान से मात्रा 17 साल की उम्र में हो गई है और अगले ही साल उसने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया था। लेकिन उनकी ये खुशी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई और एक एक्सिडेंट में उसके पति की मौत हो गई थी, गांव से शहर तक ले जाते उसने दम तोड़ दिया था। काश उस वक़्त गांव में अस्पताल होता तो आज उसका पति जिंदा होता। सीता के पति एक शाही राजघरानों से थे। राज पाट तो चले गए लेकिन उनकी शानो शौकत अभी तक जिंदा थी। घर में पीछे छुट गई थे उसके सास ससुर जी की अब पूरी तरह से कमजोर होकर बेड का सहारा ले चुके थे। बस उनकी सेवा में लगी रहती थी, घर वालो और रिश्तेदारों ने दूसरी शादी का बहुत दबाव दिया लेकिन उसने अपने बेटे के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया और शादी ना करने का फैसला किया था। बेचारी नाज बचपन से लेकर अब तक दुख ही झेलती अाई थी, छोटी सी उम्र में ही मा का इंतकाल हो गया था, बाप ने दूसरी शादी कर ली और सौतेली मा ने नाज को बहुत परेशान किया जिस कारण वो सिर्फ 12 तक ही पढ़ सकी थी।

एक दिन राम के बाप की नजर उस पर पड़ी तो उन्हें लगा कि उन्हें अपने बेटे के लिए जिस परी की तलाश थी वो उन्हें मिल गई हैं बस फिर उसकी शादी हो गई।

पूरे घर को सजाया गया था और एक बहुत ही बड़ी पार्टी का आयोजन किया गया था क्योंकिदब ने एमबीवीएस का एग्जाम पास कर लिया था इसलिए पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

सीता सुबह जल्दी उठी और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। उसने अपना बुर्का बाहर ही उतार दिया था और अब सिर्फ सूट सलवार पहने हुए थी। शाहनवाज एक गोरे बदन की भरी हुई औरत थी, दूध में चुटकी भर सिंदूर मिला दो तो ऐसा गजब का रंग था, एक दम चांद सा खुबसुरत चेहरा, गहरे काले घने बाल मानो ऐसे लहराते थे कि सावन की घटाए भी पनाह मांगती थी।उसके भरे हुए सुंदर गाल मानो कोई खूबसूरत सेब, गालों की लाली देखते ही बनती थी, उसकी बड़ी बड़ी प्यारी खूबसूरत बोलती हुई आंखे, छोटी सी प्यारी सी नाक जो उसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देती थी। उसके होंठ बिल्कुल शबनम की बूंद की तरह से नाजुक, हल्का सा लाल रंग लिए हुए मानो कुदरत ने खुद ही उसके होंठो को सजाकर भेजा हो,एक दम पतले पतले होंठ मानो किसी गुलाब की आपस में जुड़ी हुई लाल सुर्ख फूल की दो पंखुड़ियां।

बस उसका ये कातिल चेहरा ही आज तक सभी ने देखा था क्योंकि वो अपने आपको पुरी तरह से ढक कर रखती थी। वो एक मर्यादा में रहने वाली औरत थी और उसने अपनी मर्यादा को कभी लांघने की कोशिश नहीं करी थी क्योंकि उसके संस्कार हमेशा आड़े अा जाते थे। वो इतनी शर्मीली थी कि आज तक किसी के आगे पूरी तरह से नंगी नहीं हुई थी यहां तक की सुहागरात को भी उसने अपने पति को पूरे कपड़े निकालने से साफ इंकार कर दिया था क्योंकि उससे ये सब नहीं हो सकता था। नहाते हुए भी हमेशा अपनी आंखे बंद करके ही नहाती थी क्योंकि उसमे इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वो अपने आपको खुद ही नंगा देख सके। आंखो की हया और खुदा का डर उसके उपर हमेशा हावी रहा।

उसने अपने कपड़े धीरे से एक एक करके बंद आंखो के साथ निकाले और जल्दी ही नहा धोकर तैयार हो गई। ब्रा पेंटी पहन लेने के बाद उसने एक काले रंग का सूट सलवार पहना और फिर बुर्का पहनकर एयरपोर्ट जाने के लिए तैयार हो गई।

ड्राइवर ने गाड़ी निकाली और जल्दी ही वो एयरपोर्ट पर खड़ी हुई थी। वो बाहर निकलते लोगो पर नजर गड़ाए हुए थी उसकी बेचैनी इस कदर बढ़ गई थी कि उसे आने वाले हर लड़के में अपना बेटा नजर अा रहा था। अपने लख्ते जिगर को वो कैसे पहचानेगी ये सोच सोच कर वो परेशान थी। एयरपोर्ट पर जाने वाले एक मात्र रास्ते पर उसका ड्राइवर उसके बेटे के नाम की तख्ती लिए खड़ा हुआ था।

खुले कपडे पहने के बाद ही उसके जिस्म का हर उभार साफ नजर आता था। कपड़ों के ऊपर से ही उसकी भरी हुई भारी भरकम गांड़, एक दम उभरी हुई, बिल्कुल बाहर की तरफ निकली हुई ऐसे लगती थी मानो जबरदस्ती अंदर कैद की गई हो। उसकी गांड़ की मस्त गोलाई देख कर लोगो के लंड सलामी देने लगते थे और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। उससे थोड़ी दूर खड़े हुए दो मनचले बहक गए और उनमें से एक बोला:’

” ओए उधर देख, क्या माल है यार, उफ्फ ऐसी तगड़ी उभरी हुई गांड़ आज तक किसी की नहीं देखी, लंड खड़ा हो गया।

दूसरा:” हान भाई, क़यामत हैं क़यामत, काश इसकी नंगी गांड़ देख पाता,मसल मसल कर लाल कर देता मैं, साली ने लंड को तड़पा दिया।

सीता उनके बाते सुनकर हैरान हो गई, इतनी थोड़ी सी उम्र में ये लड़के बिगड़ गए हैं, क्या जमाना अा गया है। लेकिन लडको की बाते सुनकर वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठी अपनी तारीफ सुनकर और उसके जिस्म में हलचल सी हुई।

पहला लड़का:” उसकी गांड़ का एक उभार तेरे दोनो हाथो में भी नहीं आएगा, तुझसे नहीं हो पाएगा, इसके लिए तो कोई सांड जैसा तगड़ा लड़का चाहिए।

तभी राम दूर से आता हुआ दिखाई दिया तो लड़को की नजर उस पर पड़ गई, छह फीट लंबा चौड़ा खूबसूरत जवान, एक दम अपनी मां की तरफ गोरा, चौड़ी छाती, आंखो पर काला चश्मा,।

उसे देखते ही पहले वाला मनचला बोल उठा:” वो देख यार, क्या खूबसूरत लड़का हैं, बिल्कुल सांड के जैसा मोटा तगड़ा, मेरे हिसाब से इस औरत के लिए ये सही है, हाथ देख उसके कितने बड़े और मजबूत लग रहे हैं। इसकी गांड़ तो वो ही ठीक से मसल सकता हैं।

मनचले की बात सुनकर सीता की नजर अपने आप उस राम की तरफ उठ गई। सच में खूबसूरत था वो, दूर से आता हुआ बिल्कुल कामदेव के जैसा लग रहा था, एक बार तो उसे देखकर सच में सीता का दिल धड़क उठा और नजरे गड़ाए उसे ध्यान से देखती रही। जैसे जैसे वो पास आता जा रहा था सीता की आंखे मस्ती से चोड़ी होती जा रही थी और पूरे जिस्म में कंपकपी सी दौड़ रही थी।

जैसे ही वो उसके सामने आया तो दोनो की आंखे टकराई और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए तो राम आगे बढ़ा और बोला:”

” अम्मी मैं राम, आपका बेटा,

सीता तो जैसे ख्वाबों से बाहर अाई और उसे पहचान लिया और एक दम से अपनी बांहे फैला दी तो बेटा अपनी मा की बांहों में समा गया। दोनो एक दुसरे की धड़कन सुनते रहे और बेटा पूरी तरह से अपनी मा को कसकर अपनी बांहों में भर लिया था और मा भी प्यार से अपने बेटे की कमर थपथपा रही थी।

थोड़ी देर बाद सीता ने उसे पुकारा:” बेटा बस छोड़ अब मुझे, घर चले, तेरे दादा दादी तेरा इंतजार कर रहे होंगे।

राम जैसे भावनाओ के आवेश से बाहर आया और अपनी मा की तरफ देखते हुए कहा:”

” हान अम्मी चलो, घर

बाहर आकर दोनो गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी घर की तरफ चल पड़ी। सीता को अपना बेटा बहुत प्यारा लगा और वो बार बार उसे ही देखे जा रही थी। उसे रह रह कर उन मनचलों की बाते याद अा रही थी कि इसकी गांड़ को थामने के लिए तो इस लड़के जैसे मोटे और तगड़े हाथ चाहिए। ये बात मन में आते ही ना चाहते हुए भी सीता की नजर अपने बेटे के हाथो पर पड़ी। सच में उसके बेटे के हाथ बहुत तगड़े और मोटे ताजे थे। सीता का पूरा वजूद कांप उठा और उसकी सांसे अपने आप तेज गति से चलने लगी और माथे पर हल्का सा पसीना उभर आया। उफ्फ मैं ये क्या सोचने लगी, सीता को एक तेज झटका सा लगा और वो अपनी कल्पना से बाहर अाई और आगे की तरफ देखते हुए चुप चाप बैठ गई। ना चाहते हुए भी बीच बीच में रह रह कर उसकी नजर अपने बेटे के हाथो पर पड़ रही थी। खैर कुछ देर के बाद वो घर पहुंच गए।

सीता गाड़ी से उतरी और घर के अंदर की तरफ चल पड़ी। राम भी उसके साथ ही था। दोनो जैसे ही दरवाजे के अंदर दाखिल हुए तो राम के उपर छत पर से फूलो की बरसात होने लगी और लोगो ने माला पहना कर उसका स्वागत किया। गांव की औरतें और जवान लड़कियां उसे देख कर आंहे भर रही थी। इस सम्मान के बाद राम अपनी मा के साथ घर में चला गया और दोनो मा बेटे दादा दादी के कमरे की तरफ बढ़ गए। राम पीछे पीछे चल रहा था और सीता की गांड़ इतनी ज्यादा उछल रही थी कि ना चाहते हुए भी उसकी नजर अपनी मां की गांड़ पर जमी हुई थी। कर कदम पर सीता की गांड़ उपर नीचे हो रही थी और बुर्के में से साफ़ नजर आ रही थी। राम को अच्छा नहीं लगा रहा था अपनी सगी मा की गांड़ के इस तरह देखना इसलिए वो तेजी से चलता हुआ अपनी मा से आगे निकल गया। सीता के होंठो पर मुस्कान आ गई और बोली:”

” क्या बात हैं बेटा, बहुत जल्दी ही अपने दादा दादी से मिलने की तुझे जो इतनी तेजी से चल रहा है !!

राम ने मुड़कर अपनी मा की तरफ देखा तो उसकी नजर फिर से अपनी मा के खूबसूरत चेहरे पर पड़ी और वो मुस्कुरा दिया। सीता जैसे जैसे उसके पास आती जा रही थी राम की नजर एक पल के लिए ही सही लेकिन उसकी तनी चूचियों पर पड़ गई जो कि पूरी तरह से कपड़ों के ऊपर से ही उभरी हुई नजर आ रही थी।

राम की आंखे फिर से खुली की खुली रह गई। उफ्फ वो तो इसलिए आगे निकला था कि अपनी मा की गांड़ देखने से बच जाए लेकिन चूचियों का नजारा तो गांड़ से भी ज्यादा मादक था। राम जैसे अपने होश ही खो बैठा और एकटक अपनी मा की तरफ देखता रहा। सीता चलती हुई उसके पास पहुंची और उसकी आंखो के आगे चुटकी बजाई तो जैसे नींद से जागा ।

सीता:” क्या हुआ बेटा कहां खो गए थे? तबियत तो ठीक हैं तुम्हारी ?

राम हकलाते हुए:” हान अम्मी, ठीक हैं सब, बस आपको देख रहा था कि मेरी अम्मी कितनी खूबसूरत है, बहुत दिनों के बाद देखा आपको ।

सीता:” हान बेटा मैं भी तरस गई थी तुझे देखने के लिए, चल पहले तेरे दादा दादी से मिल लेते है, वो बेचारे नहीं तेरी एक झलक के लिए बेचैन हैं, हम तो बाद में भी बात कर लेंगे आराम से उपर जाकर !!

दोनो मा बेटे एक साथ आगे बढ़ गए और दादा दादी के कमरे में पहुंचे तो दोनो के चेहरे आपके इकलौते पोते को देख कर खुशी से खिल उठे। राम ने उन्हें सलाम किया तो उसकी दादा दादी ने उसे अपनी बांहों में भर लिया। राम भी अपनी दादी मा से लिपट गया।

दादी पूरी तरह से भावुक हो गई थी इसलिए भर्राए गले के साथ बोली:”

” आंखे तरस गई थी तुझे देखने के लिए मेरे बच्चे, अब जाकर सुकून मिला हैं। कितना बड़ा हो गया है तू, अल्लाह तुझे सलामत रखे बेटा।

दादा:” बेटा अगर दादी से मन भर गया तो अपने दादा के भी गले लग जा एक बार ताकि मुझ बूढ़े को भी थोड़ा सुकून मिल सके।

राम पागलों की तरह अपने दादा से लिपट गया तो ये देख कर दादी और सीता की आंखे छलक उठी। थोड़ी देर के बाद राम अलग हुआ और उन्हें अपने हॉस्टल की बात बताने लगा। सभी ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे और राम बीच बीच में मजाक भी कर रहा था जिससे अब माहौल थोड़ा बदल चुका था। उसकी बाते सुनकर सीता बार बार मुस्कुरा रही थी जिससे उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।

सीता अपने ससुर से पर्दा नहीं करती थीं क्योंकि उसके ससुर ने उसे मना कर दिया था और उसे अपनी सगी बेटी की तरह प्यार करता था। सीता भी जानती थी कि सास ससुर का उसके सिवा इस दुनिया में कोई नहीं है इसलिए उसने भी अपने ससुर की बात मान ली थी और अपने ससुर से पर्दा खोल दिया था।

खैर दादा दादी खाना खा चुके थे। धीरे धीरे बाहर अंधेरा होने लगा और दादा दादी ने राम को बोला:

” बेटा उपर जाकर खाना खाकर तू भी आराम कर ले, थक गया होगा सारे दिन के सफर से। जा बेटा सुबह बात करेंगे क्योंकि तेरी अम्मी सीता भी सुबह से भूखी हैं तेरे लिए।

राम ने अपने दादा की बात सुनकर प्यार से अपनी अम्मी की देखा तो सीता ने उसे एक प्यारी सी स्माइल दी और दोनो मा बेटे एक साथ उपर की तरफ चल पड़े। घर थोड़े दिन पहले ही फिर से बनाया गया था इसलिए आगे आगे सीता चल रही थी और सीढ़ियों पर चढने की वज़ह से उसकी गांड़ उछल उछल पड़ रही थी और राम फिर से अपनी मा की गांड़ को थिरकते हुए देखने से खुद को नहीं रोक पाया और उसके लंड में हलचल सी होने लगी।

खैर जल्दी ही वो उपर पहुंच गए और राम नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।

सीता अपने बेटे के लिए खाने की चीज टेबल पर सजाने लगीं। उसने सब कुछ अपने बेटे की पसंद का बनाया था ताकि उसके बेटे को खुशी महसूस हो। टेबल सजाते समय उसके मन में विचार उठ रहे थे कि उसका बेटा सच में बहुत खूबसूरत जवान बन गया है, एक दम किसी फिल्मी हीरो की तरह से सुन्दर, ऐसे ही पति की कल्पना वो किया करती थी जो कि इसके सपनों का राजकुमार था। कैसे सारे गांव की औरतें और लड़कियां उसके बेटे को आंखे फाड़ फाड़ कर देख रही थी ये सब याद आते ही उसने अपने बेटे की चिंता हुई और उसने अपने बेटे की नजर उतारने का फैसला किया।

थोड़ी देर बाद राम नहाकर बाहर अा गया और उसने एक सफेद रंग का ढीला कुर्ता पजामा पहन लिया ताकि कुछ सुकून मिल सके। बेटे के बाहर आते ही वो बोली :”

शाद बेटे जरा पहले इधर अा तेरी नजर उतार दू, कहीं किसी की नजर ना लग गई हो मेरे बेटे को। सब तुझे अपने गौर से देख रहे थे।

राम के होंठो पर मुस्कान अा गई और उसने अपनी मम्मी से कहा:”

” क्या मम्मी आप भी इन बातो को मनाती हैं? ऐसा कुछ नहीं होता हैं

सीता:” तुम ज्यादा मत सोचो और इधर आओ मेरे पास, मेरे दिल को तसल्ली नहीं मिलेगी जब तक कि तेरी नज़र नहीं उतर देती मैं।

राम अपनी अम्मी की खुशी के लिए आगे बढ़ गया और उनके सामने खड़ा हो गया। सीता ने कुछ लाल मिर्च ली और उसे राम के सिर पर से उतार कर गैस पर जला दी तो वो धुं धूं करके जलने लगी। लेकिन किसी को मिर्च के जलने की वजह से खांसी या धसका नहीं हुआ तो सीता बोली:”

” देख बेटे कितनी ज्यादा नजर थी तुझे, मिर्च कैसे आराम से जल गई और हमे कुछ नहीं हुआ !!

राम को अपनी अम्मी पर बड़ा प्यार आया क्योंकि वो उसकी बहुत फिक्र कर रही थी इसलिए अपनी मा की हान में हान मिलाते हुए बोला:”

” हान अम्मी सच में, आपने बहुत अच्छा किया जो मेरी नजर उतार दी, आप कितनी अच्छी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो।

सीता अपने बेटे की बात से खुश हो गई और आगे बढ़ कर उसका माथा चूम लिया और बोली :” बेटा भगवान तुझे हमेशा बुरी नजर से बचाए।मेरा बेटा वैसे भी कितना सुंदर है तो ऐसे में नजर तो लग ही सकती हैं !!.

ऐसा कहकर वो अपने बेटे को एकटक देखने लगी तो राम ने अपनी अम्मी को मजाक में बोला : अम्मी अगर आप मुझे ऐसे देखती रहेगी तो और का तो मुझे पता नहीं लेकिन आपकी नजर जरूर लग जाएगी !!

सीता: बेटे एक मा की नजर अपने बेटे को कभी नहीं लगती हैं, मैं तो बस ये देख रही थी कि तुम सच में बहुत खूबसूरत दिखते हो!

राम अपनी मा की बात पर झेंप सा गया और बात को बदलते हुए बोला:”

” अम्मी मुझे बहुत तेज भूख लगी हैं,अगर आपकी इजाज़त हो तो खाना खाया जाए !!

सीता थोड़ा फिक्र करते हुए:” अरे तेरी नजर उतारने के चक्कर में मैं तो भूल ही गई थी कि मेरा लाडला बेटा भूखा हैं, अा जा चल जल्दी खाना खाते हैं।

उसके बाद दोनो मा बेटे खाने की टेबल पर बैठ गए और सीता ने खाने का एक निवाला बनाया और राम के मुंह के करीब लाते हुए बोली: इतने साल के मेरा बेटा आया हैं अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी तुझे।

राम अपनी मा का इतना प्यार देखकर खुश हो गया और बड़े प्यार के साथ अपना मुंह खोल कर निवाला खा लिया। एक के बाद एक निवाले बनाकर सीता अपने बेटे को खिलाने लगी।

राम को अपनी अम्मी का ख्याल आया और वो भी अपने हाथ से निवाला बनाकर अपनी मा के लाल सुर्ख होंठो के पास ले गया तो सीता ने अपना मुंह खोलते हुए निवाला खा लिया। दोनो मा बेटे बहुत प्यार के साथ एक दूसरे को खाना खिला रहे थे।

राम खाना खाते हुए:” अम्मी ये सब इतना जायकेदार खाना आपने खुद बनाया हैं क्या ?

सीता खुश होते हुए:” बिल्कुल बेटा, अपने लाडले के लिए मैंने खुश तेरी पसंद का सभी कुछ बनाया हैं।

राम :” ओह अम्मी, मन करता है कि आपके हाथ चूम लू।

इतना कहकर राम ने अपनी अम्मी के हाथो को चूम लिया तो सीता खुश के मारे फूली नहीं समाई और अपने बेटे को खीर खिलाते हुए बोली :”

” बेटा खीर कैसी लगी तुझे ? बचपन में तो तुझे बहुत पसंद थीं, रोज खीर खाया करते थे तुम

राम :” अच्छी बनी हैं अम्मी, मुझे पहले से ही दूध और उससे बनी चीज़े बहुत पसंद हैं।

दोनो मा बेटे बात करते हुए खाना खा रहे थे कि तभी सीता को एक झटका सा लगा और राम ने तेजी से पानी का गिलास अपनी अम्मी की तरफ उठा कर बढ़ा दिया तो जल्दबाजी में वो पूरा ग्लास सीता की छाती पर गिर गया जिस कारण उसका बुर्का पूरी तरह से भीग गया। राम ने दूसरा ग्लास उठा कर जल्दी से अपनी अम्मी को पिलाया तो उसे कुछ सुकून मिला और वो थोड़ा नॉर्मल हुई।

पानी से गीला हो जाने के कारण सीता का बुर्का उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपक गया था जिस कारण उसकी चूचियो का उभार साफ़ नजर आने लगा और उनकी बनावट पुरी तरह से उभर रही थी जिससे साफ़ पता चल रहा था कि उसकी चूचियां सच में बहुत तगड़ी और मस्त है। राम की नजरे एकदम से अपनी अम्मी के सीने पर पड़ी तो उसकी सांसे तेज गति से चलने लगी। सीता को जैसे ही अपने बेटे की नजरो का आभास हुआ तो उसने अपनी चुचियों की तरफ देखा तो उसे बहुत शर्म महसूस हुई और तेजी से उठकर अंदर कमरे में भाग गई। उसकी सांसे तेज गति से चल रही थी और गला पूरी तरह से सूख गया था। उसका चेहरा शर्म के मारे लाल सुर्ख हो चुका था और चूचियां तेज सांसों के साथ उपर नीचे हो रही थी। उसने अपना बुर्का उतार दिया और उसके नीचे से गीला सूट भी उतार कर एक दूसरा सूट पहन लिया और उसके बाद फिर से बाहर की और चल पड़ी जहां उसका बेटा बैठा हुआ था। सीता के पैर बुरी तरह से कांप रहे थे और वो बहुत बड़ी उलझन में थी कि उसके इस तरह भागने से राम क्या सोच रहा होगा।

खैर कांपते हुए कदमों के साथ वो फिर से अपने बेटे के सामने टेबल पर बैठ गई और उसके कुछ भी बोलने से पहले खुद ही सफाई देने लगीं:

” बेटा वो पानी गिरने के कारण कपडे गीले हो गए थे जिस कारण मुझे ठंड लग रही थी इसलिए मैं एक दम से चली गई थी।

राम तो डर रहा था कि कहीं उसकी अम्मी उसे डांट ना करे क्योंकि वो अपनी मा की चूचियां घूरते हुए पकड़ा गया था। अपनी अम्मी की बात सुनकर राम ने सुकून की सांस ली और खीरे खाने लगा। दोनो मा बेटे जानते थे कि सीता के भागने की असली वजह क्या थी लेकिन दोनो ही डरे हुए थे इसलिए किसी की हिम्मत आगे सवाल पूछने की नहीं हो रही थी। राम के मुकाबले सीता की हालत ज्यादा खराब थी क्योंकि वो बहुत ज्यादा शर्मीली जिस्म की औरत थी इसलिए जब से अाई थी उसकी नजर एक बार भी राम से नहीं मिल पाई थी और वो चुपचाप मुंह नीचे किए हुए खीर खा रही थी और उसके हाथ कांप रहे थे। राम की नजर अपने आप ही ना चाहते हुए भी बार बार फिर से अपनी अम्मी के सीने पर पड़ रही थी लेकिन इस बार उसे पहले की तरह कुछ नजर नहीं आ रहा था।

राम :” अम्मी आप ठीक तो हो ? क्या हुआ आपके हाथ इतने क्यों कांप रहे है ?

अपने बेटे की बात सुनकर शर्म के मारे सीता का चेहरा शर्म से एक दम बिल्कुल लाल हो गया और उसे लगा जैसे उसकी सांसे रुक सी गई है। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी हिम्मत बटोरकर नीचे ही मुंह किए हुए कहा:” बेटा वो पानी गिरने से ठंड ठंड लग गई थी ना शायद इसलिए!

कमरे में एसी चल रही थी और तापमान बिल्कुल ठीक था इसलिए सर्दी लगने का तो कोई सवाल नही था, राम को भले ही सेक्स और जिस्म के बारे में कुछ नहीं पता था लेकिन इतना वो जरूर समझ गया था कि उसकी अम्मी ठंड की वजह से नहीं बल्कि किसी और वजह से कांप रही है।

राम को अपनी अम्मी की फिक्र हुई और वो खड़ा होकर ठीक उसके सामने पहुंच गया और अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया तो सीता का रोम रोम कांप उठा। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई और उसके रोंगटे खड़े हो गए। राम ने देखा कि उसकी अम्मी का हाथ तो ठंडा नहीं है फिर तो अम्मी को कांपना नहीं चाहिए।

राम ने कहा:” अम्मी आपका हाथ तो एक दम ठीक है, फिर आपको ठंड क्यों लग रही है ?
देखो ना बिल्कुल भी ठंडा नहीं है !!

ऐसा ऐसा कहकर वो अपनी मा के हाथ पर अपनी उंगलियां फिराकर देखने लगा। उफ्फ सीता को काटो तो खून नहीं, बेशक उसने ऐसे ही अपने सपनों के राजकुमार की कल्पना की थी और राम की उंगलियां उसके जिस्म को रोमांचित कर रही थी।

राम:” अम्मी मेरी तरफ देखो ना एक बार ? क्या हुआ आप ठीक तो हैं ?

सीता ने बड़ी मुश्किल से अपना चेहरा उपर की तरफ उठाया और जैसे ही उसकी नजर अपने बेटे के खुबसुरत चेहरे से होती हुई उसकी आंखो से टकराई तो हया के मारे उसकी पलके अपने आप नीचे गिर गई।

राम अपनी अम्मी का चेहरा पहली बार इतने पास से देख रहा था। एक दम खुबसुरत, बिल्कुल किसी परी की तरह, शर्म के मारे उसकी आंखे हल्की सी लाल हो गई थी और उसके सुर्ख लाल होंठ कांप रहे थे और अपने आप ही हल्का हल्का सा खुल रहे थे।

राम ऐसे ही अपनी अम्मी को देखता रहा। सीता ने बीच में हल्की सी अपनी पलके उठाई और देखा कि उसका बेटा फिर से उसके चेहरे को बड़े प्यार से देख रहा था तो उस बड़ी शर्म महसूस हुई और उसके गाल एक दम गुलाबी हो उठे और वो सीधी खड़ी हो गई जिससे उसके और राम के बीच की दूरी और कम हो गई और उसे राम की गर्म सांसे अपने चेहरे पर महसूस हुई तो शहनाज़ का दिल जोर जोर से धड़कने लगा और पूरा शरीर एक एहसास से और ज्यादा कांपने लगा। शादाब ने अपनी अम्मी के खूबसूरत चेहरे को अपने इतने पास पाकर खुद पर से काबू खो दिया और एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी अम्मी के गाल पर रख दिया तो राम की आंखे इस मस्ताने एहसास से अपने आप बंद हो गई। उसके चेहरे पर हल्की सी स्माइल अा गई और होंठ अपने आप उपर की तरफ आते हुए हल्के से खुल गए।

राम उसके गाल पर अपने हाथ फिराते हुए बोला:” अम्मी आपके गाल तो एक दम गर्म हैं लेकिन हाथ कांप रहे थे।

सीता की तो जैसे आवाज ही गुम हो गई थी। उसके जिस्म ने उसका साथ पूरी तरह से छोड़ दिया था। राम ने अपनी अम्मी के गालों को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा:”

” अम्मी आपके गाल सचमुच बहुत खूबसूरत हैं, आप दुनिया की सबसे खुबसुरत मा हो।

नारी सुलभ स्वभाव के कारण अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर सीता अंदर ही अंदर खुश हुई और राम के हाथो की छुवन उससे बर्दाश्त नहीं हुई और उसके पैर कांपने लगे तो अपने अपने सिर को राम के कंधे पर टिका दिया। अपने बेटे के कंधे पर सिर टिकाते ही उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। शादाब के हाथ अपने आप अपनी अम्मी के गाल पर से हट गए और उसकी कमर पर जा लगे और उसकी कमर को सहलाना शुरू कर दिया। सीता भी एक पल के लिए अपने होश खो बैठी और कसकर अपने बेटे से चिपक गई।

राम को इससे बहुत हौसला मिला और उसने अपनी अम्मी के कान में कहा:”

” अम्मी में बहुत तड़पा हूं आपकी मोहब्बत के लिए, अब कभी मुझे अपने आप से जुदा मत करना।

अपने बेटे की बात सुनकर सीता को उस पर बहुत प्यार आया और वो उसकी कमर को थपथपाते बोली:”

” मैं भी तेरे लिए बहुत तड़पी हूं मेरे लाल, बस अब सब ठीक हो जाएगा। अच्छा छोड़ मुझे अब, रात बहुत हो गई हैं, सोना चाहिए अब।

राम अपनी अम्मी को छोड़ना नहीं चाहता था लेकिन पकड़े रखने का कोई बहाना भी नहीं था इसलिए ना चाहते हुए भी उसने अपने हाथ हटा लिए और दोनो अलग अलग हो गए।

सीता :” बेटा तुम कमरे में चलो, तब तक मै काम निपटा कर आती हूं।

राम:” नहीं अम्मी, मैं भी आपकी मदद करूंगा काम खत्म करने में, आप अकेली नहीं करेगी।

सीता अपने बेटे की बात सुनकर खुश हुई और मुस्कराते हुए बोली:”

” बेटा आज तुम थके हुए हो इसलिए आराम करो, वैसे ही एक डॉक्टर का बर्तन साफ करना अच्छा नहीं लगेगा।

राम:” अम्मी मैं अभी डाक्टर बना नहीं हूं, और एक बेटे का सबसे बड़ा फर्ज़ होता हैं अपने अम्मी का ध्यान रखना और मदद करना, आज मै आपकी बात मान जाता हूं लेकिन कल से सारा काम हम दोनों साथ में करेंगे।

अपने बेटे की बात सुनकर सीता बर्तन उठा कर किचेन में धोने के लिए के गई और राम कमरे में चला गया। राम पूरे दिन का थका हुआ था लेकिन नींद उसकी आंखो से कोसो दूर थी, उसे रह रह कर अपनी अम्मी का खुबसुरत चेहरा याद आ रहा था। अम्मी कैसे कांप रही थी आज खाने के टेबल पर, सच में उसकी अम्मी जितनी खूबसूरत हैं उससे कहीं ज्यादा नाजुक हैं बिल्कुल एक दम छुईमुई की तरफ।
अम्मी अभी भी एक दम फिट हैं पूरी तरह से, इतना पैसा और जमीन जायदाद होने के बाद भी वो घर का सारा काम खुद ही करती है शायद इसलिए।

उधर बर्तन धोती हुई सीता भी अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी। उसे बार बार अपने बेटे का खूबसूरत चेहरा याद आ रहा था, बिल्कुल मुझ पर ही गया हैं मेरा बेटा। सीता समझ नही पा रही थी कि वो ज्यादा खुबसुरत है या उसका बेटा। ये तो बिल्कुल उस शहजाद की तरह से दिखता है जिसके मैं सपने देखा करती थी। उफ्फ हाय अल्लाह माफ करना मुझे, मैं ये क्या सोचने लगी थी। लेकिन वो भी तो कितने प्यार से मेरी तरफ देख रहा था, और मेरी कैसे तारीफ कर रहा था, ऐसे तो आज तो किसी ने भी नहीं करी। सीता को तभी एयरपोर्ट पर उन मनचले की बात याद आ गई तो उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। क्या मेरी गांड़ सच में इतनी खूबसूरत और उभरी हुई हैं जो किसी को भी आशिक बना सकती हैं, उफ्फ क्या कहा था उस पागल लड़के ने कि मेरी गांड़ को सिर्फ मेरा बेटा ही अच्छे से संभाल कर मसल सकता हैं। हाय ये ख्याल मन में आते ही सीता की धड़कने तेज हो गई और उसकी चूचियां उपर नीचे होने लगी, सारे जिस्म ने मीठा मीठा खुमार छा गया। जैसे तैसे करके उसने अपने बरतन धोए और उन्हें किचेन में ही रख कर जल्दी से अंदर कमरे की तरफ चल पड़ी।
उसने देखा की राम आराम से बेड पर लेता हुआ छत की तरफ देख रहा था।

सीता:” बेटे नींद नहीं आ रही है क्या ? क्या सोच रहे हो ?

राम:” अम्मी इतने सालो के बाद घर आया हूं, आपने सब का कितना ख्याल रखा, दादा दादी आपको बहुत मानते हैं। बस ये ही सोच रहा था कि आप दिल की कितनी अच्छी हो!!

सीता:” बेटा वो तो मेरे फ़र्ज़ हैं, खैर छोड़ तू ये बता तेरा मन लग जाता था क्या हम सबके बिना?

राम:” बिल्कुल भी नहीं अम्मी, आपकी सबसे ज्यादा याद आती थी, खैर अब सब ठीक हो जाएगा।

सीता:” बेटा कल हमने एक छोटी सी पार्टी रखी हैं जिसमें गांव के लोग और सब रिश्तेदार भी आएंगे, तेरी बुआ रेशमा तो तुझे बहुत याद करती थी

राम:” अच्छा अम्मी, कल मैं सबसे मिलूंगा, और सबसे ढेर सारी बातें करूंगा।

सीता:” अच्छा बेटा तुम अब सो जाओ, ये कमरा अब तुम्हारा होगा, मैं चलती हूं बेटा सुबह जल्दी उठना होगा!! सब्बा खैर मेरे बच्चे !!

राम:” ठीक हैं अम्मी, शब्बा खैर!!

सीता एक बार हसरत भारी निगाहों से अपने बेटे के खूबसूरत चेहरे के देखती है और फिर उसे अच्छी सी स्माइल देकर अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
अम्मी के जाते ही राम ने नाईट बल्ब जला दिया और पूरा कमरा उसकी हल्की रोशनी से गुलाबी हो गया। शादाब सोचते सोचते ही थोड़ी देर बाद सो गया क्योंकि वो पूरे दिन का थका हुआ था।

दूसरी तरफ सीता अपने कमरे में घुस गई और अपने भारी भरकम कपड़ों को उतार कर एक ढीली सी काले रंग की मैक्सी पहन ली और बेड पर लेट गई। उसकी आंखो के सामने फिर से दिन भर हुई घटनाएं घूमने लगी। राम किस तरह से उसके चूचियो को घूर रहा था, ये ख्याल मन में आते ही उसकी नजर मैक्सी के उपर से ही अपनी चूचियों पर पड़ गई जो कि एक दम उठी हुई साफ नजर आ रही थी और बीच में से उसकी चूचियों के बीच की गहरी रेखा भी नजर आ रही थी। बेड पर बिखरे हुए उसके काले लम्बे बाल उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।

सीता को एक बार से उन मनचलों की बात याद आ गई कि कितनी मस्त और उभरी हुई गांड़ हैं इसकी, इसकी गांड़ को थामने और ठीक सेमसलने के लिए तो कोई जवान तगड़ा सांड जैसा लड़का चाहिए, उफ्फ राम को देखते ही कह रहे थे कि यहीं उसकी गांड़ को अच्छे से रगड़ कर संभाल सकता है। सीता को अपने बेटे के बड़े बड़े हाथ याद आ गए तो उसका जिस्म आग की भट्टी की तरह सुलगने लगा। सीता की आंखे अपनी उपर नीचे होती चुचियों पर पड़ी तो ये सब देख कर सीता का गला सूखने लगा और आंखे लाल हो गई। उसकी धड़कन बहुत तेजी से चलने लगी जिससे चुचिया पूरी तरह से उभरने लगी। सीता की आंखे मस्ती से अपने आप बंद हो गई थी और उसका हाथ अपनी चूचियों पर पहुंच गया। जैसे ही चूचियों पर उसकी हाथ की उंगलियों का स्पर्श हुआ तो सीता के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल गई।उसका जिस्म पूरी तरह से कांपने लगा और वो अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़न लगी। कमरे में फैली गुलाबी रंग की रोशनी में उसका किसी शोले की तरह भड़कता हुआ जिस्म कमरे में आग लगा रहा था। सीता ने हल्के से अपनी चूचियों को मैक्सी के उपर से ही दबाया तो इसके पूरे जिस्म में मस्ती भरी लहर दौड़ गई और उसके मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

आज सीता के जिस्म की दबी हुई आग अपने सगे बेटे को देख कर पूरी तरह से भड़क उठी और और उसे कोई होश नहीं था कि वो कहां हैं और क्या कर रही है। उसने अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़ते हुए एक हाथ को अपनी मैक्सी के अंदर घुसा कर अपनी चूची को दबा दिया तो मस्ती से उसका जिस्म लहरा उठा। सीता ने अपनी चूची के निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच में पकड़ कर जोर से भींच दिया तो उसके मुंह से एक तेज मस्ती भरी आह निकल पड़ी। राम अभी पूरी तरह से गहरी नींद में नहीं था इसलिए अपनी अम्मी की सिसकी सुनकर उसकी आंख खुल गई और उसे अपनी अम्मी की बड़ी फिक्र हुई तो उसके कदम अपने आप सीता के कमरे की तरफ बढ़ गए।

जैसे ही वो गेट के बाहर पहुंच गया तो उसने दरवाजे को हल्का सा खोला तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गईं। उसे सामने बेड पर अपनी सगी अम्मी मदहोश पड़ी नजर आईं जिसकी मस्ती से आंखे बंद थी और उसका जिस्म बेड पर उधर इधर लहरा रहा था। उसने सिर्फ एक काले रंग की मैक्सी पहनी हुई थी जिसमें से उसकी चूचियों का आकार पूरी तरह से साफ नजर आ रहा था। सीता ने अपनी चूची को दबाते हुए अपनी टांगो को थोड़ा सा खोल दिया जिससे उसकी गोरी चिकनी जांघें साफ नजर आने लगी। उसने अपनी मैक्सी को उतार दिया और एक हाथ को अपनी चूची पर से लाते हुए अपनी चूत की तरफ बढ़ान लगीं

लिया। जैसे ही उसके हाथ चूत पर पड़े तो जिस्म हवा में लहराने लगा और चूची मैक्सी को फाड़ कर बाहर निकलने पर आमादा हो गई। सीता ने अपनी गांड़ और कंधो को बेड पर रगड़ना शुरू कर दिया और अपनी रसीली मीठी जीभ निकाल कर अपनी हाथ को कोहनी के उपर से चाटने लगी। मस्ती से उसकी आंखे पूरी तरह से बंद थी और वो जीभ निकाल निकाल कर अपनी बांह को चाट रही थी

राम अपने अम्मी के इस सेक्सी कामुक अवतार को देख कर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया और उसके लंड ने भी अपना सिर उठाना शुरू कर दिया और राम के हाथ उसके लंड को थामने लगे।

सीता ने पेंटी के उपर से ही अपनी चूत को सहला दिया और जोर जोर से अपनी इधर उधर फेंकने लगी। मजे से उसका मुंह खुल गया और उसने और मजे लेने के लालच में अपनी एक ऊंगली को पेंटी के अंदर घुसा दिया और अपनी चूत की फांकों को सहलाने लगी। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था, मचल रहा था, उछल रहा था। सीता की चूत में चिंगारी सी उठ रही थी इसलिए उसने अपनी एक अंगुली को अच्छे से चूत रस से भिगोकर अपनी चूत के मुंह पर दबा दिया तो जैसे ही चूत का मुंह खुला तो शहनाज़ के जिस्म में एक दर्द भारी लहर दौड़ गई और उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। आज 18 साल के बाद उसकी चूत पर किसी चीज का स्पर्श हुआ था। चूत का पुरी तरह से टाइट होकर बंद हो गया था जिस कारण उंगली हल्की सी घुसते ही उसे दर्द का एहसास हुआ था और उंगली अपने आप बाहर निकल गई।

” उफ्फ मा, हाय मेरे खुदा, कितना दर्द होता है, पूरी कसी हुई हो गई है। आज नहीं !!

राम ने जैसे ही अपनी अम्मी की सिसकियां सुनी तो उसके लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली और पूरी तरह से खड़ा हो गया। राम ने कब अपने पायजामा का नाड़ा खोल दिया उसे पता ही नही चला और उसका लंड उछल कर बाहर आ गया। राम ने आज तक मूठ नहीं मारी थी क्योंकि उसे पता नहीं था कि कैसे मारी जाती हैं। राम की नजर एक पल के लिए अपनी अम्मी से हटकर अपने लंड पर टिक गई। उसने लंड को ध्यान से देखा, हाथ में पकड़े होने के बाद भी आधे से ज्यादा बाहर था और आगे का मोटा सुपाड़ा लाल होकर दहक रहा था।

सीता अपनी चूत को उपर से ही उंगली से मसलने लगी और उसकी सिसकियां ऊंची होती चली गई। सीता भी अपनी अम्मी की चूची और चूत को मैक्सी के उपर से ही देख कर अपना लंड मसल रहा था। तभी सीता का जिस्म पूरी तेजी से उछलने लगा और उसकी उंगली की स्पीड बढ़ गई। उसके जिस्म में हलचल मच गई और उसकी जीभ खुद ही अपने होंठो को चाटने लगी। तभी सीता के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकली और उसने पूरी ताकत से अपनी टांगो को भींच लिया जिससे उसकी उंगलियां उसकी चूत पर कसती चली गई और उसका जिस्म ठंडा पड़ता चला गया। सीता बेड पर पड़ी हुई इस महान आनंद को महसूस करती हुई गहरी गहरी सांस ले रही थी। जैसे ही उसकी सांसे दुरुस्त हुई तो उसने बाथरूम जाने की सोची और अपनी मैक्सी को ठीक किया और उठ गई।


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