तारक मेहता का नंगा चश्मा
दया :- फोन उठाइए….उठाते क्यूँ नही..
जेठालाल :- तेरे में अकल है….नॉनसेन्स….फोन सोफे के अंदर है कैसे उठाऊ…
दया :- पता नही कौन है फालतू जो सुबह सुबह फोन कर रहा है..
जेठालाल :- फालतू…अरे ज़रूरी काम होगा तभी फोन कर रहा है ना…
दया :- सॉरी..
बापूजी :- जेठा क्यूँ बहू पे गुस्सा कर रहा है…
जेठालाल :- बापूजी इसे देखिए ना..कैसे वाहियात….
बापूजी :- छुउऊुउउ…शांत रह बस…बहुत हो गया…
तभी वहाँ से सोढी घर के अंदर आ जाता है…और सब को नमस्ते करता है…
और जेठालाल का फोन फिर से बज उठता है…
जेठालाल :- ये लो…पता नही कौन फोन कर रहा होगा…
सोढी :- जेठा प्रा आपका फोन बज रहा है …आप उठा क्यूँ नही रहे हो…
जेठालाल :- सोढी कैसे उठाऊ..ये टप्पू ने फोन सोफे के अंदर डाल दिया है…
सोढी :- ये लो बस इतनी से बात अभी निकाल देता हूँ….चंपक चाच्चा आप ज़रा खड़ा होना…
और सोढी सोफे को उपर उठाता है…और नीचे से सोफे के कवर को फाड़ देता है…और फोन को निकाल देता है…
सोढी :- ये लो जेठाप्रा फोन…और हाँ इसका खर्चा 500 रुपये हैं…
जेठालाल :- थॅंक यू सोढी…थॅंक यू..
और सोढी जाने लगता है..
जेठालाल :- अरे सोढी…कहाँ जा रहा है…कोई काम से आया होगा ना…
सोढी :- अरे हाँ वो तो में भूल ही गया था…में ये कॅलंडर देने आया हूँ…अच्छा जी चलता हूँ…
और सोढी चला जाता है…
जेठालाल अपने फोन में देखता है…12 मिस्ड कॉल होती हैं…वो फटाफट फोन लगाता है…..
जी हमरेश भाई…. … वो क्या था ना फोन मेरे बेटे से सोफे के अंदर चला गया था..इसलिए फोन नही उठा पाया… हाँ बोलो…..
अच्छा….अच्छा….हाँ हाँ बिकलूल….हाँ हम रेडी ही हैं…ओहकक…फिर…
और जेठालाल अपना हँसता हुआ चेहरा बना कर….मज़ा आएगा….
क्या बात हुई जेठालाल की फोन पे….नेक्स्ट अपडेट में….!!!!
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फोन मिलने और उस पर बात करने के बाद जेठालाल काफ़ी खुश लग रहा था…और वो कुछ बताने मेहता साहब के घर निकल पड़ा था….
सीडियाँ से उतरते हुए…वो नीचे कॉंपाउंड पे पहुँच चुका था…सामने भिड़े बोर्ड पर सुविचार लिख रहा था…
जेठालाल :- आई भिड़े….भिड़ी…
भिड़े :- हाँ जेठालाल…
जेठालाल :- ज़रा इधर तो आना…
भिड़े :- हाँ आता हूँ..
और भिड़े जेठालाल की तरफ चल देता है..
भिड़े :- हाँ बोलो जेठालाल …. आज सुबह सुबह मुझे कैसे याद किया तुमने…
जेठालाल :- आई चपली….ज़रा शांत रख ना….मुझे सिर्फ़ ये बताना है…
और वो भिड़े को फोन पे की हुई बातें बता देता है…
भिड़े सुन के खुश हो जाता है…
भिड़े :- अरे वाहह जेठालाल….तुमने सुबह सुबह मस्त न्यूज़ दे दी…अच्छा तो में सोढी और अईयर को बता दूँगा..
जेठालाल :- हाँ ठीक है…और में पोपटलाल और मेहता साहब को बता दूँगा….
और फिर जेठालाल मेहता के गेट के पास पहुँच के बेल बजाने ही वाला होता है कि अंदर से…..
अंदर से अहह…ओह….तराक्क…
अहहाहहा…..औरर्र तेज़्ज़्ज़…..ह्म…
आवाज़ें आ रही थी…
जेठालाल मन में….ये आज कल मेहता साहब को क्या हो गया है…सुबह सुबह के चालू हो जाते हैं…और गेट भी बंद नही करते….अंदर झाँक के देखूं क्या..नही नही…मेहता साहब को बुरा लग जाएगा….
नही बुरा लगेगा …बोल दूँगा..गेट खुला था … हाँ..यही ठीक रहेगा..
और फिर जेठालाल हल्का सा गेट खोल के अंदर झाँकता है…अंदर का नज़ारा देख के जेठालाल का लंड अंडरवेर के अंदर जाग कर खड़ा हो जाता है…और पैंट के उपर से सॉफ दिखाई देने लगता है…..
अंदर का नज़ारा इस तरह था…
अंजलि गेट के सामने वाले सोफे पर थी…उसकी टाँगे सोफे के दोनो साइड पर थी..उसकी पाजामी नीचे थी पंजो तक..और तारक की पैंट नीचे थी…और वो अंजलि के उपर चढ़ा हुआ था..
तारक अंजलि की चूत में बहुत तेज़ी से धका धक धक्के लगा रहा था…अंदर बाहर अंदर बाहर…
तारक :- अंजलि..आह….उफफफ्फ़….मज़ा आ रहा है…
अंजलि :- अहह तारक…..मज़ाअ…..अरे….स्वर्ग्ग जैसीए आनंद मिल रहा हाइईइ…..और तेज़्ज़…..ओह…ह्म….और तेज़्ज़्ज़..अहह……उफफफफफफफ्फ़…
तारक की स्पीड बढ़ जाती है….और वो अब बहुत तेज़ी से लंड को अंदर बाहर करने लगता है….लंड पूरा अंदर और पूरा बाहर आने लगता है…
तारक :- अंजलि…में आ रहा हुन्न…अह्ह्ह्ह
अंजलि :- तारक में भी…गेयीयी….
और दोनो चीखते हुए अपना रस पान कर देते हैं….और हान्फते हुए एक दूसरे के उपर गिर जाते हैं…
तभी पीछे से आवाज़ आती है…मेहता साहब…!!!!
उस वक़्त तारक अंजलि को और अंजलि तारक को घूर घूर के देख रहे थे…..
अंजलि धीमी अवज़ में…..तारक कौन आ गया….हे भगवान….अब क्या करें..जो भी है उसने हमे देख लिया है…
तारक भी धीमी आवाज़ में…अंजलि घबराव मत देखता हूँ कौन है तुम ऐसे ही लेटी रहो…
वो क्या था कि अंजलि जिस तरह पड़ी थी वो देख नही सकती थी.कि तारक के पीछे कौन है….और तारक तो सिर्फ़ अंजलि को ही देख सकता था….
तभी फिर से आवाज़ आई…..मेहता साहब…आज फिर से आपने गेट खुला छोड़ दिया……कम से कम गेट तो बंद कर के ये काम किया करो…
और इतना बोलते ही तारक समझ जाता है कि पीछे कोई और नही…जेठालाल खड़ा है….और वो अंजलि को बोलता है…
तारक :- अंजलि जेठालाल है..
अंजलि :- थॅंक गॉड…कम से कम कोई और तो नही है…लेकिीन फिर भी तारक मुझे तो बहुत शरम आ रही है..उस दिन तो हम इस हालत में नही थे..एक काम करो..आप सीधे खड़े हो जाओ मेरे सामने आकर….इतनी देर में अपना पाजामा उपर कर लूँगी…
तारक हाँ में मुन्डी उठाता है…
जेठालाल :- अरे मेहता साहब आप आराम से कपड़े पहन लो में उल्टा मूड जाता हूँ…
और जेठालाल उल्टा मूड जाता है…
ये देख के अंजलि और तारक को थोड़ी राहत की सांस मिलती है…और दोनो अपने फटाफट कपड़े पहन लेते हैं…
तारक :- हाँ तो भाई जेठालाल आज सुबह सुबह कैसे आना हुआ…
जेठालाल मुड़ते हुए….मेहता साहब..आप भी ना..गेट तो बंद कर लिया करो…और आज सुबह सुबह…मूड में आ गये…
अंजलि जेठालाल की बात सुन के शर्मा जाती है….और बोलती है….क्या जेठा भाई आप भी…
तारक :- अरे काहे का रोमॅन्स सुबह सुबह…वो क्या है ना जेठालाल आज मुझे सेक्स पे आर्टिकल लिखना था…और वो फील नही आ रहा था इसलिए बॅस वो फील लाने के लिए करना पड़ा….
अंजलि ये सुन के आग बाबूला हो जाती है…
अंजलि :- अच्छा तो मेरे उपर एक्सपेरिमेंट किया जा रहा था….जेठा भाई इन्होने मुझे चुहिया बना रखा है चुहिया…
जेठालाल :- चुहिया…..ग़लत बात मेहता साहब…
अंजलि :- हाँ अब आना रात को बताउन्गी…और अपना मुँह टेडा कर के अंदर चली जाती है…
तारक :- अंजलि अंजलि…सुनो तो यार…
लेकिन अंजलि उसकी एक नही सुनती..
जेठालाल :- नाराज़ कर दिया आपने भाभी को..
तारक :- ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है…क्या ज़रूरत थी ये पूछने की मेहता साहब सुबह सुबह रोमॅन्स कर रहे हो..
जेठालाल :- सॉरी मेहता साहब..
तारक :- अरे मज़ाक कर रहा हूँ…छोड़ो…अच्छा ये बताओ…यहाँ कैसे आना हुआ..
जेठालाल :- अरे हाँ वो तो बताना भूल गया….मेहता सुबह सुबह एक गुड न्यूज़ है..
तारक :- पार्टी की डेट पता चल गई है ना…
जेठालाल :- अरे आप तो अंतर्यामी हो…हाँ परसो की है डेट…मेने आपको बता दिया है…आप पोपटलाल को बता देना …बाकी को पता है..
तारक :- अरे बिल्कुल ….. अब आज रात को सोढी की दुकान पे सारी बातें क्लियर कर लेंगे….
जेठालाल :- बिल्कुल….और हाँ भाभी को मना लेना…
तारक :- उसकी चिंता मत करो..अंजलि का गुस्सा अभी शांत हो जाएगा….
और फिर जेठालाल तारक के घर से बाहर निकल जाता है…दुकान जाने के लिए……!!!!
जेठालाल दुकान के लिए निकल गया था…
जैसे ही वो बाहर कॉंपाउंड में आया…उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा…जी हाँ…सामने बबीता खड़ी थी…
और बबीता को देख के तो जेठालाल की हालत ऐसी हो जाती है…जैसे किसी भूके को खाना मिल गया हो..
वो भागता हुआ..बबीता के पास पहुँचा…
जेठालाल :- बबीता जी…गुड मॉर्निंग..
बबीता :- मुस्कुराते हुई..गुड मॉर्निंग जेठा जी…..
जेठालाल :- और तो कहाँ चली सवारी सुबह सुबह…
बबीता :- जीई बॅस वो एक फ़्रेंड के यहाँ जा रही हूँ…
जेठालाल :- ओहू…अईयर भाई भी जा रहे हैं…आपके साथ…
बबीता :- नही अईयर तो आज घर पे नही है..इसलिए में अकेली ही जा रही हूँ…
जेठालाल ये सुन के फूले नही समाता …. वो सोचता है….कि आज फिर से वो बबीता जी के साथ ऑटो में जाएगा….
जी हाँ बताना तो भूल गया…वैसे आज बबीता ने एक चेक की शर्ट पहनी थी..जिसका उपर का बटन खुला था…और नीचे जीन्स पहनी थी…जो काफ़ी चिपकी हुई थी उसके बॉडी से…और उसकी जाँघ और गान्ड काफ़ी उभर के नज़र आ रही थी…
बबीता :- चुटकी बजाते हुए…..कहाँ खो गये जेठा जी आप….
जेठालाल :- सोच में से निकलते हुए…नही…बॅस…तो कहाँ जाना…
बबीता :- वो मुझे ****** रोड पे जाना है…
जेठालाल का मुँह लटक जाता है…क्यूँ कि वो उसकी दुकान के दूसरी तरफ था….
जेठालाल :- ओफूऊ….
बबीता :- क्यूँ क्या हुआ??
जेठालाल :- आप को लिफ्ट दे देता तो मेरा भी टाइम पास हो जाता…
बबीता शर्मा जाती है…उसे उस दिन की ऑटो वाली बात याद आ जाती है…
बबीता :- ओह्ह्ह…नेक्स्ट टाइम आप लिफ्ट दे दीजिएगा….ओके…अब में चलती हूँ..लेट हो रही है..ब्बबयए…
जेठालाल :- ओहकक बयए……
और मन में सोचता है….आज वो अईयर इडली नही था..आराम से मज़े करता बबीता जी के साथ…लेकिन उनको कहीं और जाना था…चलो जैसे जिसकी किस्मत…
और ऑटो पकड़ के वो भी दुकान पे पहुँच जाता है…
जेठालाल :- ओहकक बयए……
और मन में सोचता है….आज वो अईयर इडली नही था..आराम से मज़े करता बबीता जी के साथ…लेकिन उनको कहीं और जाना था…चलो जैसे जिसकी किस्मत…
और ऑटो पकड़ के वो भी दुकान पे पहुँच जाता है…
दुकान के अंदर पहुँचते ही…देखता है…बाघा फोन ठीक कर रहा होता है….और नट्टू काका नही होते दुकान पे…
जेठालाल :- आई बाघा नट्टू काका कहाँ है..
बाघा :- आ गये सेठ जी….गुड मॉर्निंग…और वो नट्टू काका…गॉडाउन में गये हुए हैं..काफ़ी देर हो गई है उन्हे…
जेठालाल :- अच्छा….गॉडाउन में क्या कर रहे हैं….ज़रा बुला के ला उन्हे…मुझे कुछ काम है उनसे..
बाघा :- अच्छा सेठ जी … ये फोन बस ठीक होने ही वाला है….उसके बाद बुला के लता हूँ….
जेठालाल :- रहने दे भाई..में ही जाता हूँ…तू ठीक कर फोन..
उधर गॉडाउन में…
गोडोवन् में नट्टू काका खड़े थे…और कुछ कर रहे थे…कोई उन्हे देख नही सकता था कि वो क्या कर रहे हैं…
तभी उनकी आवाज़ आई….आहह……अफ…मयी गॉड्ड्ड…
जी हाँ नट्टू काका…मूठ मार रहे थे…उन्होने पैंट की जिप नीचे कर के अपना लंड हाथ में ले रखा था और वो उसे हिला रहे थी…
अह्ह्ह्ह…..आपकी चूत बहुत अच्छी है…आहह…..सो मच ऑफ वॉटर कौमिंग आउट फ्रॉम युवर चूत….मज़ा आ रहा है…..
नट्टू काका किसी की चूत के बारे में सोच सोच कर मूठ मार रहे थे….
वो झड्ने के बेहद करीब थे…उनके मुँह से उस औरत का नाम निकला जिसकी चूत के बारे में सोच के वो मूठ मार रहे थे…की तभी पीछे से आवाज़ आई….
नट्टू ककाअ…..
नट्टू काका आवाज़ सुन के घबरा गये…उनकी हालत खराब हो गई…उनको लगा आज तो गये काम से….
किसकी आवाज़ थी….ह्म…अगले अपडेट में पता चलेगा…कि नट्टू काका का क्या होगा अब और कौन है वो औरत जिसकी बारे में वो सोच रहे थे….!!!!!
जैसे ही पीछे से आवाज़ आई..नट्टू काका…..
वो हड़बड़ाते हुए पीछे मुड़े…..उनका तना हुआ लंड …अब डर की वजह से मुरझा गया था…
वो जैसे ही पीछे मुड़े ….. उनके सामने खड़ा था….बाघा…..
नट्टू काका :- ओह्ह माइ डियर भतीजे…तूने तो आज मेरी जान हे निकाल दी थी….मुझे लगा सेठ जी आ गये हैं..
बाघा :- नट्टू काका ये आप गॉडाउन में क्या कर रहे हो….और उसने नट्टू काका के लंड पे अपनी उंगली से इशारा करते हुए कहा..
नट्टू काका अपना लंड अंदर करना ही भूल गये थे…बाघा के इशारे को समझते हुए….फटाफट उन्होने अपना लंड अंदर कर लिया….
बाघा :- नट्टू काका ये सब क्या है…दुकान पे ये सब..कोई देख लेता तो…घर पे टाइम मिलता तो है…
नट्टू काका :- बाघा बॉय…..आज कल घर पे में नही कर पा रहा ….और आज किसी की याद आ गई तो में अपने आप को नही रोक पाया….तुझे तो पता है ना..मुझसे कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है….
बाघा :- वो में जानता हूँ ….. कि आपसे कंट्रोल नही होता..लेकिन फिर भी यहाँ अगर कोई देख लेता तो गड़बड़ हो जाती..
नट्टू काका :- लेकिन तू आया ना…सेठ जी तो नही आए ना तो फिर्र..
बाघा :- सेठ जी आ चुके हैं…और वो मुझसे पहले गॉडाउन जाने के लिए निकल गये थे….
नट्टू काका :- क्या……कहीं तुझसे पहले उन्होने मुझे ऐसे द्देख तो नही लिया…ओह्ह माइ गॉड…ये तो गड़बड़ हो गई…
बाघा :- आप टेन्षन मत लीजिए…उन्होने नही देखा है…
नट्टू काका :- टेल मी इन क्लियर वे माइ बॉय…
बाघा :- ओके नट्टू काका…..
वो हुआ यूँ था कि में मोबाइल ठीक कर रहा था…तो सेठ जी ने बोला कि में ही चला जाता हूँ गॉडाउन में आपको बुलाने…..और वो दुकान से बाहर निकल गये…
मेने अपना काम ख़तम किया…और सोचा चलो थोड़ी देर बाहर ही खड़ा होता हूँ….जब बाहर आया तो देखा…कि सेठ जी वहीं दुकान के बाहर खड़े थे और वो ढंजी सेठ हैं ना उनसे बात कर रहे थे…में तभी सेठ जी के पास गया और उनसे पूछा…
सेठ जी आप नही गये नट्टू काका को बुलाने..
जेठालाल :- तुझे नही दिख रहा है भाई…में यहाँ बात कर रहा हूँ…तू जा और बुला के ला…
और फिर में आ गया…और देखा कि आप यहाँ ये सब कर रहे हैं..
नट्टू काका :- थॅंक गॉड…..बच गये आज तो…
बाघा :- हाँ नट्टू काका आप आज तो बच गये…लेकिन हर बार नही बचोगे…इसलिए आज से घर पे ही करिएगा यहाँ नही…
नट्टू काका :- हाँ बिल्कुल…नेक्स्ट टाइम..आइ डू इन होम ओन्ली…
बाघा :- वैसे नट्टू काका….में जब अंदर आया तो आपने उस औरत का नाम लिया..लेकिन मुझे कुछ ढंग से समझ नही आया….बताइए ना……
नट्टू काका :- किसी को बताएगा नही ना माइ बॉय….
बाघा :- बिल्कुल नही…
नट्टू काका :- वो है ना अपनी पद्मिनी भोजनालय की मालकिन …पद्मिनी …. उसको सोच के…
बाघा :- हाहहहः….ओह्ह्ह्ह क्या बात है नट्टू काका….वैसे वो है भी बहुत मस्त…..शादी भी नही हुई है उसकी…मस्त चूत होगी उसकी…
नट्टू काका :- देख बाघा…अब दुबारा गरम मत कर…नही तो गड़बड़ हो जाएगी…चल फटाफट दुकान चलते हैं…सेठ जी इंतेज़ार कर रहे होंगे…..
और दोनो दुकान की तरफ चल देते हैं…..
उधर सोसाइटी में….!!
दया :- बापूजी में ज़रा हाथी भाई के घर जा रही हूँ…
बापूजी :- क्या हुआ बहू …तबीयत खराब है क्या तेरी…
इससे पहले दया कुछ बोल पाती…फोन बज जाता है…और बापूजी फोन उठाते हैं…
बापूजी :–
हेलूओ…!!!
हाँ नंजी बोल…
अच्छा…
हाँ हाँ बिल्कुल…
बस आधे घंटे में …मिलता हूँ…
पार्क में..
ठीक है….
हाँ भाई .. सब रख लूँगा…
चल ठीक है…!!!!
फोन की कन्वर्जन ख़त्म हो जाती है…
दया :- क्या हुआ बापूजी….
बापूजी :- वो में अपने यंग ओल्ड ग्रूप के साथ ******* के दर्शन के लिए जा रहा हूँ…तो 5 दिन के बाद आउन्गा…..
दया :- अरे वाह बापूजी…अच्छे से दर्शन कीजिएगा…
बापूजी :- में जेठिया को बता देता हुन्न..
दया :- बापूजी आपको देर हो रही होगी…आप जाइए में बता दूँगी…अच्छा तो बापूजी में जाऊ हाथी भाई के घर पे..
बापूजी :- अरे हाँ तेरी तबीयत खराब हो गई है क्या बहू..
दया :- नही बापूजी…..वो आज सारी लॅडीस लोग वहाँ मिल रहे हैं…तो इसलिए…
बापूजी :- अच्छा अच्छा…हाँ हाँ जा बहू..
दया :- बापूजी आपको कोई समान की ज़रूरत तो नही है ना…
बापूजी :- नही बहू तू जा आराम से मेरा सारा समान निकला ही हुआ है….
दया :- ठीक है बापूजी….********
बापूजी :- ********* बहू….!!!!
और दया हाथी के घर की तरफ निकल पड़ती है…..!!!!!
बापूजी का फोन आया और वो कहीं जाने के लिए निकल पड़ा…और उधर दया डॉक्टर हाथी के घर के लिए निकल पड़ी….अब आगे…
दया सीडियो से उतर के डॉक्टर. हाथी के अपार्टमेंट की तरफ जाने लगी…सफ़ी औरतें उसके घर के बाहर ही खड़ी थी और आपस में बात चीत कर रही थी….
सभी दया को देख के…बोल पड़ी..
दया भाभी कहाँ रह गये थे आप..
दया :- सॉरी….वो क्या है ना बापूजी अपने ग्रूप के साथ जा रहे हैं तो इसलिए थोड़ी देर हो गई .. सॉरी..
अंजलि :- कोई बात नही दया भाभी..अब चलें अंदर…
इधर डॉकटर हाथी के घर के अंदर का माहौल 10 मीनल पहले कुछ ऐसा था…
आज डॉक्टर हाथी का लंड अपने पूरे उफान पे था….उसका लंड आज पूरी तरह खड़ा था…कम से कम 10 इंच और 6 इंच मोटा था…
लेकिन अपने भारे शरीर के कारण सिर्फ़ 6 इंच ही अंदर जा सकता था….लेकिन 6 * 6 का लंड बहुत होता है….
कोमल को जब पता चला कि उनका आज पूरा खड़ा है..तो वो पागल हो गई..
कोमल :- हंस आज तो कमाल हो गया…अब यही सोच के में बहुत गरम हो चुकी हूँ…अब फटाफट मेरी इस चूत की प्यास भुजा दो..
डॉक्टर हाथी :- क्यूँ नही कोमल… और अपनी पेंट को उतार देता है…
कोमल अपने सार कपड़े उतार देती है…वो पूरी नंगी हो जाती है…
उसका नंगा शरीर ऐसा लग रहा था…जैसे किसी ने उसके आगे…2 बड़े बड़े साइज़ के तरबूज़ लगा दिए हों..इतने बड़े चुचे हैं उसकी…और पीछे का इतना बड़ा था कि उसमे एक बच्चा समा जाए…….
वो फटाफट बिना लंड को चूसे सीधे जाके धडाम से उसके लंड पे बैठ गई…जिससे कोमल के मुँह से हल्की सी आह निकली…….और डॉक्टर हाथी के मुँह से भी हल्की सी आहह निकली….
दोस्तों एक ही बार में इतना मोटा लंड कोमल अपने अंदर ले चुकी थी….हैरान क्यूँ है…
कोमल की चूत का साइज़ भी तो इतना बड़ा था…तभी तो एक हाथी का लंड ले पा रही है…
वो इतने दिन की प्यासी थी…कि वो ढका धक उछल रही थी…..कुर्सी पूरी तरह हिल रही थी….जब दो दो इतने मोटे लोग एक ही कुर्सी पर होंगे तो सोचिए कि कुर्सी का क्या होगा…
कोमल अब उपर नीचे हो रही थी…उसके चुचे बुरी तरह हिल रहे थे…डॉक्टर हाथी ने फिर अपना मुँह उसके चुचों पे घुसा दिया…और अपने मुँह से मसलने लगे..
कोमल :- अहह…ओह्ह्ह…उईईई…आहू….मज़ा आ गया हंस….आहह…बहुत दीनो के बाद ऐसा सुकून मिल रहा है…अहह…
डॉक्टर हाथी :- कोमल में बस झड्ने वाला हूँ….और तेज़ हिलो..आह..मज़ा आ रहा हाईईईईई….
कोमल :- में भी हंस बस झड्ने वाली हूँ…. और वो और तेज़ी से लंड पे उछलने लगती है….
अब 10 मिनट के बाद…सारी औरतें..अंदर आने को होती हैं…
बात चीत करते हुई…वो लोग अंदर आते हैं….
माधवी :- कोमल भाभी…कोमल भाभिइ…
और वो लोग जाके लिविंग रूम में पहुँच जाते हैं…तभी….
तभी…उनको एक बहुत तेज़…धडाम की आवाज़ आती है…सभी लोग घबरा जाते हैं….
ये आवाज़ क्लिनिक से आई होती है…
वो सारे उस तरफ भागते हैं…
और क्लिनिक के अंदर पहुँच जाते हैं..
और अंदर का हाल देखते ही…एक साथ…चीख पड़ते हैं…कोमल भाभी….ये सब क्य्ाआआआ……
किस चीज़ की आवाज़ थी….जिसे सुन के सब अंदर आ गये…जिसकी वजह से कोमल और हाथी का सेक्स दर्शन हो गया सबको…
सभी लॅडीस हाथी के घर पे आई हुई थी…उधर क्लिनिक में हाथी और कोमल चुदाई कर रहे थे….तभी वहाँ से एक बहुत ज़ोर की आवाज़ आती है…और सभी लेडीज़ क्लिकनिक में पहुच जाती है…अब आगे……
सभी लॅडीस हाथी के क्लिनिक में आके चौंक जाती है…
सभी के हाथ उनके मुँह पर चले जाते हैं….कुछ मिनट तक सन्नाटा सा छा जाता है…
कोमल सभी लॅडीस को एक टक देख रही थी…और सभी लॅडीस कोमल को एक टक देखे जा रही थी….
तभी अंजलि ने चुप्पी थोड़ी..
अंजलि :- ये क्या कोमल भाभी….आप ठीक तो हो ना..
दया :- हाँ…आपको कहीं लगी तो नही..और ये सब…
माधवी :- हाँ कोमल भाभी…लगी नही ना आपको…..और ये आवाज़ कैसी थी..
कोमल :- ओह माइ गोद…आप लोग यहाँ … एक काम कीजिए आप लोग बाहर बैठिए … में अभी कपड़े पहेन के आती हूँ…
सभी लॅडीस बाहर चली जाती है…
दया :- हंसते हुई…..अंदर देखा कोमल भाभी को…
रोशन :- हाँ रे बावा….देखो तो कोमल भाभी को..और वो भी हँसने लगती है…
अंजलि :- आप लोग ऐसे क्यूँ हंस रहे हैं….ठीक है…कोमल भाभी भी तो औरत है…
माधवी :- हंसते हुए….हाँ वो ठीक है अंजलि भाभी…लेकिन अपने देखा नही अंदर का नज़ारा….
और सभी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगते हैं….तभी..
तभी कोमल वहाँ लिविंग रूम में आ जाती है….वो अपना सर नीचे कर के आ रही थी..
दया :- क्या हुआ कोमल भाभी…
सभी लॅडीस उसे छेड़ने लगती है…
कोमल परेशान होकर..
कोमल :- ओह्ह्ह कम्मोन….. आप लोग तो ऐसे बोल रहे हैं..जैसे अपने कुछ भूत सा देख लिया हो….आज इतने दिनो के बाद हंस मूड में आए थे…तो रहा नही गया…
दया :- ओहू…क्या बात है कोमल भाभी … आज तो आपके मज़े आ गये…
कोअमल :- ओह्ह दया भाभी आप भी ना…..
माधवी :- लेकिन कोमल भाभी….वो नज़ारा जो हमने देखा वो कैसे हुआ….और वो आवाजज…
कोमल :- आप सबको जानना है कि कैसे हुआ…
सभी एक साथ बोलते हैं…हाँ..
कोमल :- ठीक है..
वो क्या हुआ था…कि हम लोग एक हे कुर्सी पर थे….और…
वो शर्मा रही थी बताने में…लेकिन फिर भी धीरे धीरे बता रही थी…
एक कुर्सी पर थे…वजन बहुत ज़्यादा हो गया था..लेकिन उस वक़्त ध्यान नही दिया…और में…और में…कुछ ज़्यादा तेज़ उछलने लगी…जिसकी वजह से कुर्सी टूट गई और हम दोनो नीचे गिर गये…और आप लोगों को वो आवाज़ सुनाई दे गई..
माधवी :- और उस आवाज़ से हमे भी पता चल गया … कि अंदर क्या कार्य चल रहा है…
और सब हँसने लगते हैं..
अंजलि :- अच्छा ये सब छोड़ो अब….चलो काम की बातें कर लेते हैं…
कोमल :- हाँ अंजलि भाभी आप ठीक बोल रहे हो….
वो बात को बदलना चाहती थी…
सभी समझ गये…और अब कुछ नही बोले…और वहाँ सोफे पे बैठ के बात करने लगे…
दया :- वैसे बहुत दिन हो गये…हम लोगों ने शॉपिंग नही की है..
अंजलि :- हाँ बिल्कुल सही बोल रहे हो दया भाभी आप….मुझे तो बहुत सारा समान खरीद के लाना है…
माधवी :- हाँ मुझे भी कुछ ज़रूरी समान खरीदना है…
रोशन :- हाँ बावा…मुझे भी घर का कुछ समान लेना है…
अंजलि :- तो ठीक है फिर कल चलते हैं…सब …एक साथ…
दया :- हाँ बिल्कुल…कल ठीक रहेगा..बापूजी भी घर पे नही है..तो जल्दी कम निपट जाएगा घर का…
माधवी :- तो ठीक है 12 बजे चलते हैं….कोमल भाभी क्या हुआ आप क्यूँ चुप…अरे भूल जाओ….हम लोगों से क्या शरमाना…
सभी बोलते हैं हाँ कोमल भाभी…अब आप ठीक हो जाइए…
अब कोमल कुछ नॉर्मल होती है..
कोमल :- थॅंक यू…में तो बहुत डर रही थी..
अंजलि :- उसमे क्या है…आप परेशान मत होइए…
अच्छा तो कल चल रहे हैं ना.
कोमल :- वो आक्च्युयली में कल नही चल सकती…
सभी एक साथ….क्यूँ???
उधर जेठालाल की दुकान पर…
जेठालाल :- आई नट्टू काका वो…. 21 इंच के एलसीडी के कितने पीस बचे हैं…गॉडाउन में..
नट्टू काका :- जी 30 है सेठ जी..
जेठालाल :- अच्छा…और वो बाघा आया कि नही..चेक लेके अभी तक…
उधर से आवाज़ आती हुई…..आ गया सेठ जीईई…बाघा दुकान के अंदर एंटर होते हुए…..
जेठालाल :- बड़ी देर लगा दी भाई…और हाँ ..चेक मिल गया..
बाघा :- आपको तो पता है ना सेठ जी…वो सेठ कितना टाइम लगते हैं….3 घंटा मगज मारी की तब जाके के चेक दिया उन्होने…
जेठालाल :- चल दे तो दिया ना…ला दे…
और जेठालाल बाघा से चेक ले लेता है…..
तभी वहाँ से एक पोलीस वाला दुकान के अंदर घुसता है….
पोलीस वाला :- यहाँ का सेठ कौन है..
जेठालाल :- जी में हूँ सेठ…..बोलिए क्या बात है इनस्पेक्टर साहब ..क्या हुआ…
इनस्पेक्टर :- देखिए…हम यहाँ एक टेररिस्ट ग्रूप को ढूँढ रहे हैं…
जेठालाल :- तो यह क्या आपको टेररिस्ट दिख रहे हैं…हम सब.
इनस्पेक्टर :- देखिए हमारा ये मतलब नही था….हमारा मतलब ये है…ये कुछ लोग यहाँ घूम रहे हैं…जिनपे हमे टेर्रोरिस्ट होने का शक़ है….और उनमे से एक आपकी दुकान के आस पास देखा गया है…..
जेठालाल :- देखिए अब हमे कैसे पता कि कौन टेररिस्ट है..या कौन नही..
इनस्पेक्टर :- देखिए आपको उल्टे जवाब देने की आदत है….
वो इंस्पेक्टर कड़क आवाज़ में बोलता है..
इस बार जेठालाल की हालत पतली हो जाती है…और वो घबराता हुआ बोलता है..
जेठालाल :- नही…हहाः…वो मेरा मतलब ऐसा था कि…अब हमे अगर किसी पे शक़ हुआ तो आपको ज़रूर बता देंगे…
इस बार जेठालाल की हालत पतली हो जाती है…और वो घबराता हुआ बोलता है..
जेठालाल :- नही…हहाः…वो मेरा मतलब ऐसा था कि…अब हमे अगर किसी पे शक़ हुआ तो आपको ज़रूर बता देंगे…
इनस्पेक्टर :- ठीक है…ध्यान रखिएगा..वो कोई भी हो सकता है…..एक आदमी या एक औरत..या फिर एक बच्चा…कोई भी..
जेठालाल :- ओके..बिल्कुल ध्यान रहेंगे…थॅंक यू
और वो इनस्पेक्टर चला जाता है..
जेठालाल :- हाशह….
बाघा उसकी तरफ देख रहा होता है..
जेठालाल :- क्या है भाई…जा जाके काम कर..
बाघा :- क्या काम करूँ..
जेठालाल :- गुस्से में…जा वहाँ जाके खड़ा हो जा…
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रात के 9:30 बजे….
हाहहहहः….हाँ ये सही है…हाहः…अच्छा था मेहता साहब..
जी हाँ सभी जेंट्स अब्दुल की दुकान पे सोडा पी रहे थे….
तभी पीछे से जेठालाल आता है…
जेठालाल :- और मेहता साहब क्या हुआ..क्यूँ सब हंस रहे है…
तारक :- अरे जेठालाल आज तुम लेट हो गये काफ़ी…और यार बस ऐसे ही वो जोक सुनाया था…तो हंस रहे थे….
जेठालाल :- अरे वो क्या हुआ मेहता साहब आज दुकान में पोलीस आई थी…
बस इतना ही बोलता है..कि हर बार की तरह अईयर भाई चुप रहे बिना नही मानते..
अईयर :- क्यूँ जेठालाल ….. क्या गड़बड़ कर दी तुमने..
जेठालाल :- अईयर भाई आप साइंटिस्ट हैं ना..
अईयर :- हाँ तो..
जेठालाल :- तो एक काम करो..एक रॉकेट बनाओ..और उसमे बैठ के उड़ जाओ…
सभी जेठालाल की बात सुन के हँसने लगते हैं…
अईयर गुस्से में जेठालाल..
जेठालाल :- क्या जेठालाल :- कुछ पता है नही….फिर बीच में क्यूँ बोल रहे हैं आप…शांति रखिए..
तारक :- ओहू..अईयर तुम भी ना…शांत रहो…जेठालाल को बोलने तो दो..
अईयर :- सॉरी मेहता साहब..
जेठालाल :- ये अईयर भाई भी ना हुह…
हाँ तो हुआ क्या मेहता शाब….
और दुकान पे इनस्पेक्टर वाली सारी बात बता दी..
तारक :- ओह्ह्ह…ये तो बहुत गंभीर समस्या है…जेठालाल ध्यान रखना भाई..
पोपटलाल :- अच्छा….इसके बारे में एक आर्टिकल लिखूंगा…में इन टेररिस्ट के खिलाफ एक जबरदस्त आर्टिकल लिखूंगा…..में दुनिया हिला दूँगा…!!
सोढी :- अरे मुझे तो ये लोग मिल जायें..तो में इनको मार मार के…इनका कचूमर निकाल दूं..
भिड़े :- सही बात है….मगर जेठालाल ध्यान रखना भाई…ये लोग कहीं भी बॉम्ब रख देते हैं…
जेठालाल :- आई भाई क्या बोल रहा है तू….
तारक :- ओफूओ भिड़े .. कैसी बात कर रहे हो…देखो जेठालाल ऐसा कुछ नही होगा…तुम टेन्षन मत लो…अच्छा ये छोड़ो….
पार्टी की बात करते हैं..थोड़ा मूड भी ठीक हो जाएगा….
जेठालाल :- हाँ मेहता साहब …आपने ठीक कहा….ट्टो बहियूं…सब तैयार है ना….पार्टी के लिए…
सभी एक साथ बोलते हैं…हाँ…बट एक इंसान ना बोल देता है…..!!!!!!!
देखते हैं कौन है जो पार्टी के लिए नही जाना चाहता …. नेक्स्ट अपडेट में..!!!!
अब्दुल की दुकान पे सब पार्टी में जानने की बातें कर रहे थे…तभी किसी ने ना बोला…अब आगे….!!
जेठालाल ने सबको पार्टी में जाने के लिए बोला….तभी किसी ने वहाँ ना कहा..
पोपटलाल :- क्यूँ…हाथी भाई…
तारक :- हाथी भाई आप पार्टी में जाने के लिए मना कर रहे हो….मेरे कान तो ठीक हैं ना..
डॉक्टर हाथी :- हाँ मेहता साहब …आप ने बिल्कुल ठीक सुना…
भिड़े :- लेकिन क्यूँ??
डॉक्टर हाथी :- भिड़े मास्टर….वो मुझे और कोमल दोनो को कल …. हॉस्पिटल मेरे भाई के पास जाना है…गाओं में…उनके बेटे की तबीयत थोड़ी खराब है …..
जेठालाल :- ओहू….हाथी भाई…हम आपको बहुत मिस करेंगे…
हाँ ये बात तो है…सभी बोल पड़ते हैं..
जेठालाल :- मेहता साहब एक और मुसीबत है….
तारक :- क्या..
जेठालाल :- बापूजी…..
सब बापूजी का सुन के टेन्षन में आ जाते हैं….
जेठालाल :- हम अपनी बीवियों को तो बेवकूफ़ बना देंगे..लेकिन में बापूजी के सामने झूठ नही बोल पाता…
तारक :- ये बात तो ठीक है तुम्हारी…एक काम करते हैं…सब आज रात सोचते हैं कि क्या बहाना मारना है….फिर देखते हैं…क्या करना है…ठीक है दोस्तों..
भिड़े :- हाँ मेहता साहब .. आप ठीक बोल रहे हैं…कुछ तो सोचना पड़ेगा….चलो फिर चलते हैं…और सोचते हैं..
फिर सब अब्दुल को गुड निट बोल के निकल जाते हैं…
जेठालाल घर पहुँचते हुए…..अपने लिविंग रूम में एंटर करता है….और यूयेसेस दया दिखाई देती है…जो कि डाइनिंग टेबल पे कुछ कर रही थी..इसलिए वो जेठालाल को नही देख सकती…
जेठालाल दया को पीछे से उसकी गान्ड को देख के गरम हो जाता है…और दौड़ता हुआ…पीछे से जाके उससे चिपक जाता है…और दबोच लेता है…
दया डर जाती है..
दया :- उईइ माआ….टप्पू के पापा ये आप क्या कर रहे हैं..
जेठालाल :- अपनी बीवी से प्यार…
और उससे ….अपनी तरफ सीधा कर लेता है…
दया :- टप्पू के पापा आप भी ना…खाना खा लीजिए…पहले…फिर कमरे में आराम लेंगे…कोई आ जाएगा..
जेठालाल :- अर्रे बापूजी और टप्पू के अलावा कौन आएगा…और वैसे भी आज लेट हो गया तो वो दोनो सो ही गये होंगे…
जेठालाल बोलते बोलते दया के चुचों के उपर घुमा रहा था…दया मदहोशी में जाने लगी थी…
लेकिन वो होश में आती हुई…टप्पू के पापा मुझे कुछ बताना है…
जेठालाल :- हाँ पता है भाई..
दया :- अच्छा आपको कैसे पता चला..मेने तो आपको बताया नही..
जेठालाल :- अरे अभी अब्दुल की दुकान पे पता चला…
दया :- हीइन….मगर मेने तो अब्दुल भाई को नही बताया…ओह्ह..अच्छा वो सभी लॅडीस को मेने बताया था …शायद उनसे पता चल गया होगा..
जेठालाल :- तूने किससे कहा….और तेरे कहने से थोड़ी डॉक्टर हाथी और कोमल भाभी गाओं जाएँगे…
दया :- ओह्ह्ह अच्छा तो इन दोनो की बातें कर रहे थे….लेकिन में तो कुछ और बता रही थी..
जेठालाल :- बाद में बताना…
और अब जेठालाल अपना मुँह दया की चुचियो पे रख देता है…और उसमे अपना मुँह रगड़ने लगता है…
दया :- उई माँ….अहह….मत कीजिए ना अभीइ….उफ़फ्फ़…..अरे मेरी बात बहुत ज़रूरी है..
जेठालाल अपना मुँह हटाते हुई….अच्छा फिर बता..
दया :- बात ये है…कि…..बापूजी..घर ….पे…..नही…..है…..वो अपने यंग ओल्ड ग्रूप के साथ **** के लिए गये हैं…
दया की बात सुन के जेठालाल बहुत ही ज़्यादा खुश हो जाता है….और दया को छोड़ देता है…..
दया चौंक जाती है..कि टप्पू के पापा ने उसे छोड़ कैसे दिया…
दया :- क्या हुआ टप्पू के पापा आपने मुझे क्यूँ छोड़ दिया..
जेठालाल:- घबराता हुआ…नही वो क्या है..बापूजी नही है…तो तू खाना लगा फिर रात में मस्त मज़ा करेंगे…मज़ा आएगा..
दया शरमाते हुई…अच्छा ठीक है..में खाना लगाती हूँ..
जेठालाल दया के जाने का इंतेज़ार करता है…और जैसे ही दया चली जाती है…वो मेहता साहब को फोन करता है…
जेठालाल :- मेहता साहब एक गुड न्यूज़ है…
तारक :- क्या जेठालाल…
जेठालाल :- मेहता साहब….बापूजी 2 या 3 दिनो के लिए बाहर गाओं गये….अब कोई टेन्षन नही है…
तारक :- अरे वाहह जेठालाल तुमने तो बहुत बड़ी खुशख़बरी दे दी…में अभी सबको बता देता हूँ ओके….
जेठालाल :- ओके मेहता साहब…बाइ…
और फोन कट कर देता है..
और फिर बोलता है..
अब तो पार्टी का मज़ा आएगा…बस अब दया को कोई कहानी बनानी है…पहले आज उससे इतना खुश कर देता हूँ…कि कल वो कोई सवाल ही ना पूछे…!!!!
जेठालाल कल की पार्टी में जाने के लिए दया से झूठ बोलने वाला था…शायद इसलिए….वो आज दया को अच्छी तरह से खुश करना चाहता था…..जिससे कल वो उससे आना कानी ना करे…..
लेकिन जैसे ही जेठालाल कमरे में पहुँचा देखा तो दया सोने की तैयारी कर रही थी…
जेठालाल :- थोड़ा परेशान होते हुए…दया तू सो क्यूँ रही है..
दया :- भोली बनती हुई…क्यूँ क्या हुआ..कुछ काम है आपको..
जेठालाल :- लुच्ची ऐसे बोल रही है..जैसे तुझे पता नही हो कि में क्या चाहता हूँ..
दया :- शरमाते हुई…टप्पू के पापा आज नही कर सकते क्यूँ कि मुझे कल शॉपिंग पे जाना है…तो जल्दी सोना है..
जेठालाल :- ओफू दया …कितना मन था मेरा आज..
जेठालाल के मन में ये चल रहा था कि कहीं ..कल किसी को पता ना चल जाए..कि हम पार्टी में जा रहे हैं..
दया :- सॉरी टप्पू के पापा….
और फिर दया लेट जाती है..
जेठालाल कुछ सोचने लगता है…और तभी पूछता है..
जेठालाल :- अच्छा दया वैसे तू कितने बजे जाएगी….और कितने बजे तक वापिस आएगी..
दया :- क्यूँ आप ऐसा क्यूँ पूछ रहे हैं…
जेठालाल चलते चलते ..पलंग के पास आके बोलता है…तू बता ना भाई..
दया :- अच्छा…हम सब सारी लॅडीस कल 12 बजे कॉंपाउंड में मिलेंगे…और शाम को 5 बजे तक आ जाएँगे..
जेठालाल :- इससे ज़्यादा तो लेट नही होगा ना…
दया :- नही इससे ज़्यादा नही होगा..वैसे आप क्यूँ पूछ रहे हैं..
जेठालाल :- तेरे लिए सर्प्राइज़ है इसलिए…
दया :- सर्प्राइज़…अच्छा..टप्पू के पापा बताइए ना…
जेठालाल :- अरे डोबी अगर अभी बता दूँगा तो सर्प्राइज़ कैसा..
दया :- ओफू..टप्पू के पापा…मुझे तो नींद ही नही आएगी अब..
जेठालाल उसके माथे को सहलाता हुआ बोलता है…सो जा दया…सो जा…
और थोड़ी देर में दया खर्राटे मारने लगती है..
जेठालाल :- बोलो ज़रा…अभी बोल रही थी…कि नींद नही आ रही है..और सो भी गई…..
चलो कल का सर्प्राइज़ …में कल सुबह मेहता साहब को बता दूँगा….ह्म….मज़ा आएगा….!!!!
अगली सुबह…..गुड मॉर्निंग…गोकुलधाम…!!!!
अईयर के घर पे…
अईयर सोफे पे बैठ के सोच रहा था कि आज पार्टी के लिए क्या झूठ बोला जाए बबीता से..जिससे उसको कुछ शक़ ना हो….
लेकिन उसको कुछ सूझ नही रहा होता है..
तभी वहाँ से बबीता कॉफी लेके आती है..और अईयर को देती है…लेकिन अईयर तो ख्यालों की दुनिया में था…
बबीता :- अईयर…अईयर…अईयर…
3 बार बुलाने के बाद वो होश में आता है…
अईयर :- हाँ ..क्या हुआ..
बबीता :- अईयर कहाँ खो गये थी…क्या हुआ..
अईयर :- घबराता हुआ…कुछ नही बस वो लॅब के कुछ काम के बारे में सोच रहा था…
…………………………………..
वही हाल उधर भिड़े भाई साहब का भी था…
वो भी सोच में डूबे पड़े थे कि क्या करूँ…क्या आइडिया सोचूँ…एक शिक्षक के लिए कितना मुश्किल है झूठ बोलना…क्या करूँ…..कुछ समझ नही आ रहा..
उधर से माधवी चाइ लेके आती है..
माधवी :- आहू…चाइ…
भिड़े नही सुनता…
माधवी :- अहूओ..कहाँ खो गये..
भिड़े :- होश में आता हुआ…हाँ कुछ नही माधवी बॅस…ऐसे ही इस साल के बजेट के बारे में सोच रहा था…
माधवी :- ओहू..आप भी ना..चलिए जल्दी से चाइ पी लीजिए…फिर आचार की डिलेवेरी भी करने जानी है….
भिड़े :- हाँ ठीक है माधवी…और चाइ पीते पीते फिर सोच में चला जाता है…
जेठालाल नहा धो कर….डाइनिंग टेबल पे बैठा होता है…दया किचेन में उसके लिए चाइ बना रही होती है..
तभी वो मेहता साहब को फोन लगाता है…
तारक :- हाँ जेठालाल बोलो….आज सुबह सुबह कैसे याद कर लिया…
जेठालाल :- बॅस मेहता साहब …. अच्छा तो आपने आइडिया सोच लिया आज रात के जाने के बारे में….
तारक :- अरे कहाँ यार..कुछ सूझ ही नही रहा..
जेठालाल :- ले आप लेखक होके नही सोच पा रहे हैं..
तारक :- सही कहा तुमने जेठालाल..इस बार तो कोई आइडिया नही आ रहा है..
जेठालाल :- चलो कोई बात नही….
तारक :- जेठालाल तुम बोल रहे हो ये…ह्म…इसका मतलब तुमने कुछ ज़रूर सोच लिया है…
जेठालाल :- अरे आप तो अंतर्यामी हो गये हैं…सही पहचाना आपने बिल्कुल…
और वो सारा आइडिया… बता देता है…
तारक :- अरे वाहह…जेठालाल तुमने तो कमाल ही कर दिया है..
जेठालाल :- अच्छा मेहता साहब में क्या कहता हूँ…कि हम सब सोसाइटी के नाके पे मिल जाते हैं…तो उससे क्या होगा कि सबको सॉफ सॉफ समझ आ जाएगा…
तारक :- हाँ ये सही रहेगा..में सबको फोन कर देता हूँ..और 15 मिनट बाद हम वहीं मिलेंगे…
और फोन कट हो जाता है…
जेठालाल :- अब स्टार्ट होगा..मिशन पार्टी…..!!!!!!
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दोस्तो मिशन पार्टी मे क्या क्या हंगामे होंगे जानने के लिए पढ़ते रहिए तारक मेहता का नंगा चश्मा .
जेठालाल सब को फोन पे सोसाइटी के नाके पे आने को मिलता है….अब आगे…!!
कुछ 15 मिनट बाद सभी के सभी….सोसाइटी के नाके पे इकट्ठा हो जाते हैं…
पोपटलाल :- भाई जेठालाल… इतनी जल्दी में क्यूँ बुलाया है….बताओ…
जेठालाल :- हाँ बताता हूँ भाई…वो बात ये है..
बॅस इतना ही बोल पाता है…कि अईयर भाई साहब अपनी आदत से मजबूर…
अईयर :- हाँ जेठालाल बोलो…क्यूँ बुलाया है….हमको कितने काम है …ऑफीस जाने के लिए लेट हो रहा है..
जेठालाल गुस्से में :- अईयरर्र भाई….आप निकलो यहाँ से…मेहता साहब इस यहाँ से भागाओ…बुलाना ही नही चाहिए था…तुम जाओ भाई…तुम पार्टी में मत आना तुम जाओ…चपली कहीं के…
तारक :- जेठालाल गुस्सा मत करो…और अईयर तुम…तुम कुछ देर शांति नही रख सकते…कुछ ज़रूरी काम होगा तभी तो जेठालाल ने हमे यहाँ बुलाया है….
अईयर :- सॉरी मेहता साहब…और सॉरी जेठालाल…
अब जेठालाल बोलने लगता है..लेकिन फिर से उसे कोई टोक देता है…इस बार हमारे भिड़े भाई साब होते हैं…
भिड़े :- बताओ जेठालाल…
जेठालाल :- तू थोड़ी शांति रखेगा तभी तो बताउन्गा…सब के सब चपली है यहाँ पे…
पोपटलाल :- भाई जेठालाल केंसिल करो…में चपली नही हूँ..
जेठालाल :- ये एक और आया….तू शांत रहेगा..पोपट…मेहता शाब इसे क्यूँ बुलाया है आपने…इसकी तो शादी भी नही हुई है…
पोपटलाल :- जेठालाल इसमे मेरी शादी कहाँ से आ गई…
तारक :- तुम लोग शांति रखोगे…जेठालाल को बोलने तो दो..
सोढी :- अब कोई भी बोला…जेठा प्रा के अलावा…तो पटक दूँगा उसे…
जेठालाल :- थॅंक यू सोढी…
देखो मेने पार्टी में जाने का और अपनी अपनी बीवियो को झूठ बोल के जाने का आइडिया सोच लिया है..कोई शक़ भी नही करेगा….
भिड़े :- अच्छा वो कैसे..
जेठालाल :- हाँ भाभी वही बता रहा हूँ..ज़रा शांति रखो..
और बताना शुरू करता है…. और अपना सारा आइडिया बता देता है…
भिड़े :- अपरतिम आइडिया है जेठालाल..
सोढी :- बहुत वाडिया जेठा प्रा…
जेठालाल :- थॅंक यू सोढी….
उन में से एक शख्स को ये आइडिया पसंद नही आता …और वो बोल पड़ता है…
एक दम बकवास आइडिया है ये जेठालाल….जी हाँ हर बार जेठालाल से चिडने वाले…एक ही हैं…अईयर भाई…
जेठालाल :- अईयर भाई..आप..
तारक:- बीच में रोकते हुए…जेठालाल तुम शांत रहो..में बात करता हूँ…
तुम्हारे पास इससे बेहतर आइडिया है अईयर…तो बताओ..
अईयर सोच में पड़ जाता है..और कुछ मिनट बाद बोलता है..
अईयर :- सॉरी मेहता साहब…ठीक है…ये आइडिया ही सही है..
जेठालाल :- हमेशा बिना सोचे कुछ भी बोल देते हो…
अईयर भाई कोई गड़बड़ मत करना..
अईयर:- चिंता मत करो जेठालाल..कोई गड़बड़ नही होगी…
जेठालाल :- ठीक है….तो फिर अभी चलते हैं अपने अपने काम पे…और ठीक सब बताए हुए टाइम से सब सोसाइटी में आना शुरू कर देना…बहाना तो पता है ना..कि क्या मारना है..कि जल्दी क्यूँ आ गये हो…..
सभी एक साथ हाँ…
जेठालाल :- तो ठीक है…ऑल दा बेस्ट …. आज तो हम पार्टी में जा के रहेंगे…..
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दोपहर के 12 बजे….
सारी लॅडीस सोसाइटी कॉंपाउंड में खड़ी थी…और माधवी का इंतेज़ार कर रही थी….
दया :- ये भिड़े बहेन कहाँ रह गयी हैं…
अंजलि :- आती होंगी दया भाभी….
तभी रोशन बोल पड़ती है..
रोशन :- बबीता आज अईयर भाई ऑफीस नही गये…
बबीता :- नही गये हैं क्यूँ??
रोशन :- देख ज़रा पीछे से आ रहे हैं..
बबीता मुड़ती है और अईयर को देखती है…
बबीता :- अईयर तुम आज इतनी जल्दी कैसे आ गये..
अईयर :- वो बबीता मेरी थोड़ी तबीयत खराब हो गई तो आ गया..
बबीता :- ओह्ह…अच्छा तो में नही जाती शॉपिंग पे…
अईयर :- नही बबीता में अब थोड़ा ठीक फील कर रहा हूँ..थोड़ी देर सो जाउन्गा तो ठीक हो जाउन्गा…तुम जाओ..
बबीता :- अच्छा … अगर तुम बोल रहे हो तो में चली जाती हूँ….वैसे अगर कोई प्राब्लम हो तो फोन कर देना…..
अईयर :- हाँ बिल्कुल कर दूँगा…तुम एंजाय करना…
बबीता :- ओके बाइ…
अईयर :- बाइ..
और उपर चला जाता है…
जब तक माधवी वहाँ आ चुकी होती है…
माधवी :- चलें….
और सभी बोलते हैं….हाँ चलते हैं…
और वो सब के सब…शॉपिंग के लिए निकल जाते हैं….
दोपहर के 2 बजे….
जेठालाल खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था…वो बार बार घड़ी की तरफ ही देखे जा रहा था…
उधर सारी लॅडीस बड़े मज़े से शॉपिंग कर रही थी….उनको तो पता नही था..कि घर पे आज क्या होने वाला है उनके साथ….तभी अंजलि का फोन बज उठता है..
अंजलि :- हाँ तारक..
अंजलि :- अच्छा…हाँ हम तो शॉपिंग पे गये हुए हैं.
अंजलि :- हाँ वहीं डोर मॅट के नीचे..
अंजलि :- लेकिन आप इतनी जल्दी कैसे आ गये…
अंजलि :- अच्छा बाबा….ठीक है..हाँ..ओके….
और फोन कट हो जाता है…
दया :- क्या हुआ अंजलि भाभी…
अंजलि :- वो तारक घर पे आ गये हैं..तो घर की चाबी के बारे में पूछ रहे थे…
दया :- अच्छा अच्छा…वैसे आज इतनी जल्दी कैसे आ गये..
तारक :- बोल रहे थे..कि एक इंपॉर्टेंट आर्टिकल लिखना है..इसलिए आ गये..
दया :- अच्छा…चलिए वहाँ चलते हैं..वहाँ देखते हैं….
इन लोगों को क्या पता…कि आज उनके पति घर टाइम से पहले क्यूँ आ रहे हैं…
प्लान ही इतना बढ़िया है जेठालाल का … कि किसी को कोई शक़ नही हो रहा है…!!!!!
जेठालाल दुकान पे बार बार टाइम देख रहा था…
उधर अब अईयर के अलावा तारक भी पहुँच चुका था….भिड़े तो हमेशा की तरह घर पे ही था…
दोपहर के 3 बज चुके थे….
जेठालाल दुकान पे सिर्फ़ क्लॉक पे नज़र गढ़ाए बैठा था…लेकिन अब उससे सब्र नही हो रहा था…तो उसने घर जाना ही बेहतर समझा….और वो नट्टू काका बो बोलने लगा…
जेठालाल :- नट्टू काका मेरी तबीयत थोड़ी ठीक नही लग रही है ..में घर जा रहा हूँ…
नट्टू काका :- ठीक है सेठ जी..
और जेठालाल घर की तरफ निकल जाता है….और करीब 3:30 बजे सोसाइटी कॉंपाउंड में पहुँच जाता है…जैसे ही वो ऑटो वाले को पैसे देने लगा …उसने देखा स्कूटी से सोसाइटी कॉंपाउंड में एक शख्स एंटर हुआ ..उसने हेल्मेट पहना हुआ था…
अब जेठालाल पैसे दे चुका था…और ऑटो वाला जा चुका था…
जैसे ही उस शक़्स ने हेल्मेट उतारा …. तो जेठालाल को एक लड़की दिखी….
उसने सोचा अब उससे पहले वो उसे देखे वो अपने घर की तरफ निकल पड़ता है..
मगर पीछे से आवाज़ आती है….जेठा भाई…आज दुकान से इत्ति जल्दी..
जेठालाल दुखी मन से मुड़ता है…
जेठालाल :- रीता तू..आज इतने दिनो के बाद दिखाई दी है..कहाँ थी…
रीता :- बस जेठा भाई…कुछ काम था तो इसलिए ऑफीस के कम से बाहर ही रहती थी..आप इतनी जल्दी कैसे..
जेठालाल :- अच्छा…..बस वो थोड़ी तबीयत खराब थी तो इसलिए आ गया..
रीता :- अच्छा ..ओके…यू टेक केयर हाँ..में चलती हूँ बाइ..
जेठालाल :- ओके…बाइ…
और वो अपने घर की तरफ निकल जाता है..और बोलता है..हाशह…!!!!
वो घर पहुँच के मेहता साहब को फोन करता है..
जेठालाल :- मेहता साहब आप घर आ गये…और बाकी के भी आ गये..
तारक :- हाँ भाई में आ गया…बस सोढी रह गया है…और उसको मेने फोन किया था वो कुछ ही देर में पहुँचने वाला है….एम्म्म्म मिनट रूको सोढी का फोन आ रहा है..
जेठालाल :- ठीक है..
तारक :- हाँ सोढी पहुँच गये तुम…
सोढी :- हाँ मेहता साहब पहुँच गया हूँ..बस अपनी विंग पे जा रहा हूँ…
तारक :- अच्छा तो अपनी बाल्कनी में बाहर आके मिलना…
सोढी :- ओके मेहता साहब…
तारक :- जेठालाल तुम बाल्कनी में आओ…में सबको फोन करके वहीं बुलाता हूँ..
जेठालाल :- ठीक है मेहता साहब …
और कुछ 5मिनट बाद सभी बाल्कनी में आ जाते हैं…
जेठालाल :- हाँ तो भाई लोगों सब कुछ तैयार कर लिया है…
भिड़े :- हाँ बॅस..अब्दुल आता ही होगा…
तारक :- लो आ गया अब्दुल..
जेठालाल :- अब्दुल कमाल कर दिया .. सारा समान ले आया ना..
अब्दुल :- हाँ जेठा भाई … सब लिया…
जेठालाल :- अच्छा तो सबके घर में पहुँचाना शुरू कर दे..
तारक :- हाँ भाई जल्दी कर…और हाँ सभी लोग ध्यान से सुन लो..अपनी बीवियों को बिल्कुल भी शक़ नही होने देना है….चाहे कुछ भी हो जाए….
और अब्दुल सबसे पहले अईयर के घर पे समान देने निकल जाता है…
और तभी…भिड़े को वो दिखता है..जिससे उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है…
तारक भिड़े की तरफ देखते हुई..क्या हुआ भिड़े…
भिड़े :- मेहता साहब वो दिखिए बच्चे…गार्डेन से आ रहे हैं..उनका क्या करना है ये तो सोचा ही नही है…
तारक बोलता उससे पहले बोल पड़े फिर से अईयर भाई..उन्हे तो मौका चाहिए जेठालाल की खिचाई का…
अईयर :- आत्मराम..मेहता साहब से क्या पूछ रहे हो…जेठालाल से पूछो ..उसका ही प्लान था…मुझे तो पहले से ही पता था ये प्लान कॅन्सल होने वाला है..
सोही :- आईयर तू पोपटलाल मत बन..शांति रख…जेठा प्राह दासू इनका क्या करना है..
उस वक़्त बच्चे कॉंपाउंड में आ जाते हैं…लेकिन वो लोग अभी उन पर ध्यान नही देते…
जेठालाल फटाफट बोलता है…तुम सारे लोग अंदर जाओ…तभी सोढी अईयर और भिड़े अंदर चले जाते हैं..मेहता साब वहीं चेयर पे बैठ जाते हैं…
तभी टप्पू जेठालाल को देखता है..
टप्पू :- पापा आप दुकान से इतनी जल्दी..
जेठालाल :- बॅस बेटा वो कुछ काम नही था…तुम खेलो बेटा..
टप्पू :- नही पापा अब में थक गया हूँ..तो उपर आ रहा हूँ..
जेठालाल की गान्ड फट गई..उसके प्लान की माँ बहन एक होने वाली थी…तभी उसके दिमाग़ की बत्ती जली गोली को देख कर..
जेठालाल :- टप्पू बेटा…गोली के घर पे कोई नही है ना बेटा…तो वो अकेले कैसे रहेगा…तू एक काम कर आज उसके साथ ही रह…क्या है उसका भी मन लगा रहेगा…
गोली :- जेठा अंकल ठीक बोल रहे हैं..
टप्पू :- ठीक है…में वहाँ चला जाता हूँ…तो फ्रेंड्स तुम भी चलो साथ में मस्ती करेंगे…
सभी बोलते हैं..ठीक है…और सभी चले जाते हैं…
जेठालाल को शांति मिलती है…और वो तारक की तरफ देख के मुस्कुरा देता है…और तारक भी मुस्कुरा देता है..और वो दोनो भी अंदर चले जाते हैं…
टाइम..शाम के 4:45 मिनट…सारी लॅडीस कॉंपाउंड में आ चुकी थी…वो सभी बहुत ज़्यादा खुश दिखाई दे रही थी…हँसी खुशी वो बात कर रही होती है..जिससे सभी जेंट्स को उनके आने का पता चल जाता है…
सब एक दूसरे को बाइ बोल कर अपने अपने घर के लिए निकल जाती है…..
सबसे पहले सोढी के घर…
रोशन घर पहुँचती है…और वो ताला खोलने लगती है..लेकिन जैसे ही टला खोलने लगती है..गेट खुल जाता है..
रोशन :- अरे गेट अपने आप खुल गया..लगता है रोशन घर आ चुका है बावा..देखती हूँ…रोशन..रोशन….
और वो कमरे में पहुँच जाती है….जैसे ही कमरे में पहुँचती है…उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है…
वो देखती है..सामने बेड पर..बहुत सारे गुलाब के फूल पड़े थे…हर तरफ सजावट दिखाई दे रही थी..वो काफ़ी खुश हो गई..
तभी पीछे से उससे सोढी आ के पकड़ लेता है…
सोढी :- रोशन मेरी जान कैसा लगा…
रोशन :- बहुत सडू…लेकिन तूने ये सब क्यूँ किया..आज कुछ स्पेशल है क्या…
सोढी :- क्यूँ स्पेशल होना ज़रूरी है सोनिये…आज में तुझे खुश करना चाहता हूँ….
और उसके हाथ से समान खीच के साइड में रख देता है…
और रोशन को उठा के…पलंग पे अपने साथ ले जाता है..और उसे वहाँ रख देता है..और खुद उसके साइड में लेट जाता है..
रोशन :- ये क्या कर रहा है..
बॅस इतना ही बोल पाती है..और सोढी उसके मुँह पे हाथ रख देता है…
सोढी :- तू कुछ नही बोलेगी आज तो में करूँगा …तो बस मज़े लेगी…
और अपने होंठ..उसके होंठ से मिला देता है..और एक बेहतरीन चुंबन चालू हो जाता है..दोनो एक दूसरे के लिप्स को बेपनाह चूस रहे थे…और सोढी भी…रोशन की स्कर्ट के उपर से ही उसकी चूत को सहला रहा था..
जिसकी वजह से रोशन बहुत ज़्यादा गरम हो चुकी थी…
अब दोनो की साँसें फूलने लगी थी..इसलिए रोशन ने सोढी को पीछे धकेल दिया…
रोशन :- बॅस कर बावा…आहह…आज तो तू कुछ ज़्यादा रोमॅंटिक है…
सोढी :- मेरी जान तू कुछ मत बोल ना…
और सोढी रोशन का टॉप निकाल फेंकता है…और उसकी ब्रा को भी फाड़ देता है…अब उससे सब्र नही हो रहा था..और वो रोशन के चुचों पे टूट पड़ता है…और उन्हे पूरी तरह से चूस्ता है…
रोशन ज़ोर ज़ोर से अह्ह्ह्ह..सोढी…आहह..मज़ा आ गया….
सोढी अब चुचो को छोड़ के रोशन की स्कर्ट और पेंटी उतार के पेंक देता है…और अपना मुँह उसकी चूत पे रख देता है..जो पहले से बहुत ज़्यादा गीली होती है…
सोढी रोशन की चूत चाटना चालू कर देता है…वो बहुत तेज़ी से उसे चांट रहा था..जैसे उसे उसकी फेव आइस क्रीम मिल गई हू..
रोशन:- अहह…मरीइ गियूऊ….रोशान्णन्न्.तुनी…..बहुत्त मज़ाअ आ रहा हाईईइ..ओह…उई…अह्ह्ह्ह…
सोढी अपना मुँह हटा लेता है..और अपने कपड़े फटाफट उतार फेंकता है…
और अपना बड़ा सा लंड हाथ मे लेके..हिलाना चालू कर देता है..और रोशन की चूत के पास ले जाता है..
रोशन की चूत के पास ले जा कर…उसकी तरफ झुकता है…और एक ही बार में पूरा लंड उतार देता है..
रोशन :- अहह..रोशहनन्न….ओह्ह्ह
आराम्म से बावााअ..आहह..
अब सोढी फटाफट धक्के लगा रहा होता है….और रोशन भो अपनी गान्ड उठा उठा के उससे चुदवा रही होती है..औरे कमरे में पच पच की आवाज़ें आ रही थी….
सोढी :- रोशन मेरी जान में आने वाला हूँ..
रोशन :- में भी गयी बावा….
और झड जाती है….और सारा रस छोड़ देती है…
सोढी भी रोशन के रस को सह नही पाता है…और अपना सारा रस अंदर ही उसकी चूत में डाल देता है..
और हांफता हुआ…रोशन के उपर गिर जाता है….
उधर तारक के घर..
अंजलि डोर बेल बजाने लगती है….लेकिन जैसे ही गेट पे हाथ रखती है..गेट खुल जाता है…
और वो गेट खोल के अंदर चली जाती है…जैसे ही वो अंदर देखती है…वो चौंक जाती है…और अंदर का नज़ारा देख के उसके दिल में एक ख़ुसी की लहर दौड़ जाती है…
अंदर कमरे में…अंधेरा कर रखा होता है…वैसे तो दिन की रोशनी थी….पर फिर भी काफ़ी अंधेरा था…लाइट सारी बंद थी…
बस छोटी छोटी सुंदर सुंदर कंडेल्स जल रही थी…जिससे घर जगमगा रहा था…
वो देख के अंजलि के मुँह से निकल गया…
अंजलि :- वाहह…..वऊओ…ये सब क्या है…
बॅस इतना ही बोलती है कि तभी वहाँ से तारक एक रोमॅंटिक गाना गाते हुए आता है……उसके हाथ में रोज़ होते हैं…और वो उन्हे हवा में उछालते हुए आता है…और अंजलि के पास आकर…अपना गाना जारी रखता है…और सारे फूल उसके उपर डाल देता है……और अपना एक हाथ अंजलि के कमर पर…और दूसरा हाथ उसके हाथ में पकड़ कर…गाना गाते हुए डॅन्स करने लगता है…
बहुत ही रोमॅंटिक सीन था वो…अंजलि बहुत ही ज़्यादा खुश थी….और उसकी वो खुशी उसकी आँखों में सॉफ झलक रही थी…उसका दिल …उसके काबू से बाहर हो गया था….
तभी तारक गाना ख़तम करता है..और घुटनो पे बैठ के अंजलि का हाथ पकड़ता है…और उसपे एक प्यारी से किस कर देता है…
अंजलि के बदन एक प्यार भरी लहर दौड़ जाती है….वो आज इतनी खुश थी..कि वो बस अपने मूँह से बयान नही कर पा रही थी…फिर भी वो मदहोश आवाज़ में बोलती है…
अंजलि :- तरक्कक…ये सब क्या…
तारक :- क्यूँ मेरी जान…अच्छा नही लगा क्या…
अंजलि :- अच्छा..नही लगा…
बहुत ही ज़्यादा अच्छा लगा…मुझे तो आज से पहले इतनी खुशी नही हुई…अपने मेरे लिए इतना सब कुछ किया…
और फिर वो तारक को उपर उठा लेती है…और कस कर ..अपने सीने से चिपका लेती है…
सीने से चिपकने की वजह से …अंजलि के चुचे तारक की छाती में धँस जाते हैं…और तारक भी अपने हाथ अंजलि के पीछे कस लेता है…
कुछ देर ऐसे रहने के बाद….तारक बेकाबू हो जाता है….वो अंजलि के …शोल्डर पे किस करने लगता है…और फिर अपने आप को थोड़ा पीछे करते हुए…उसकी गर्दन…फिर उसके शोल्डर पर..अपने चुंबनों की बोछार कर देता है…
अंजलि बॅस आहह ओह्ह तारक..आ..कर रही थी…
तभी तारक अंजलि की गर्दन को छोड़ कर उसके मुँह की तरफ बढ़ता है..और पहले उसके गाल..माथे…और आखरी में…उसके होंठ…चूसने लगता है..
अब वो दोनो एक दुरसे को चूमने लगे थे..एक दूसरे के होंठो को…शायद पूरी सोसाइटी में इनसे बढ़िया लिप किस कोई नही कर सकता था….
अब वो दोनो पागलों की तरह एक दूसरे के लिप्स्स को चूस रहे थे…और अपनी जीभ एक दूसरी की जीभ से खेल रहे थे……करीब 10 मिनट तक चलता रहा इनका चुंबन…फिर तारक ने खुद छोड़ा…क्यूँ कि उसकी सांस फूलने लगती थी…
बट जब तारक ने अंजलि को छोड़ा…तो अंजलि उसको अजीब सी निगाहों से देख रही थी..मानो बोल रही हो..छोड़ क्यूँ दिया…
इस वक़्त उसके दिल में जो प्यार उमड़ रहा था…उसको बुझाना बहुत मुश्किल था….
जब एक औरत प्यार करने पर आ जाए..तो कोई भी मर्द उसकी हवस को नही बुझा पाता है..वही हाल इस वक़्त अंजलि का था…
तारक ने बिना देरी करे…अपने पहले कपड़े उतार दिए..और सिर्फ़ एक अंडरवेर में खड़ा हो गया…उसका लंड अंदर से खड़ा हुआ था और बाहर से ही सॉफ सॉफ दिख रहा था…
अपने कपड़े उतारने के बाद…. उसने अंजलि की उपर की कमीज़ उतार दी…और ब्रा भी उतार दी….लेकिन जैसे ही वो उसके चुचों पे हाथ रखने के लिए बढ़ा….अंजलि ने उसका हाथ पकड़ लिया…
तारक:- क्या हुआ अंजलि तुम नही चाहती क्या..
अंजलि :- आप पहले से ही बहुत कुछ कर चुके हो….इस वक़्त में पहले आपको खुश करना चाहती हूँ…
और नीचे बैठ जाती है..और तारक का अंडरवेर नीचे कर देती है..और उसके लंड को अपने हाथ से उपर नीचे करने लगती है…
तारक को स्वर्ग जैसा एहसास होना शुरू हो जाता है…
अब अंजलि तारक के लंड को मूह में लेके चूसना चालू कर देती है..
वो तारक का लंड आधा मुँह में लेती है..और फिर बाहर निकाल देती है…
तारक को बहुत मज़ा आ रहा था…उसके मूँह से हल्की सेी आह निकल रही थी….
फिर अंजलि ने स्पीड बढ़ा दी….और अपना लंड मुँह में अंदर बाहर करना चालू कर दिया…लंड गले तक जाता और फिर बाहर आ जाता….इतनी ज़ोर से चूसने की वजह से अंजलि के बूब्स बुरी तरह आगे पीछे हो रहे थे…
तभी तारक अपना हाथ पकड़ के … अंजलि के मुँह को पीछे धकेल देता है…
अंजलि :- क्या हुआ तारक…मज़ा नही आया क्या…
तारक :- अंजलि मज़ा..पूछो मत…निकलने वाला था….इसलिए पीछे हटाया है…
अंजलि :- अहहः….
तारक :- अंजलि अब मुझसे रुका नही जा रहा है..
अंजलि :- शरमाते हुई…तो कौन बोल रहा है रुकने का…
बॅस इतना ही बोलती है….कि तारक अंजलि को उपर उठाता है..और उसकी सलवार को उसकी पैंटी के साथ ही नीचे कर देता है…
अब दोनो पूरी तरह नंगे हो चुके थे…अंजलि की चूत में से तो रस बहना शुरू हो चुका था…
तारक से रहा नही जा रहा था..तो वो अंजलि की चूत को चूसना नही चाहता था…बस अपने हाथ को चूत पे रख के उसे मसल दिया…
अंजलि के मुँह से बस….उईईईईईईई माँ…ही निकल के रह गया…
तारक अंजलि को दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया…
अंजलि :- चलो ना बैठ के करते हैं…
तारक :- बैठ के और लेट के तो रोज़ करते हैं…आज ऐसे ही करेंगे…
अंजलि :- ऐसे …पर कैसे करेंगे…
तारक :- अभी दिखाता हूँ…
और तारक अंजलि के एक पैर को हवा में उठा लेता है…और अपने लंड को ऊट पे सेट कर के…अंजलि की तरफ़ देखता है…जिसकी आँखों में आज बेपनाह प्यार होता है…
और अपने लंड को चूत में धकेल देता है….आधा लंड चूत में उतर जाता है..
अंजलि :- अहह…ओह….
बस इतना ही निकलता है..क्यूँ कि अब की बार तारक के धक्के से…पूरा का पूरा लंड अंदर चला जाता है….
और बिना रुके जबरदस्त धक्के लगाना शुरू कर देता है…और लंड अंदर बाहर करने लगता है….धक्के इतने ताबड तोड़ थे…कि अंजलि बुरी तरह हिल रही थी…
अंजलि :- अजहह अतरक्कक……अह्ह्ह्ह..ऊहह..माँ
मॅर गैिईईईईईईईई…..और तेज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़…अहह…हन्णन्न्..और तेज़्ज़….
तारक का लंड पूरा चूत में जाता …और फिर बाहर आ जाता….
पूछ क्पुच…पच अपच..जैसी ही आवाज़ें आ रही थी…..
दोनो पसीने पसीने हो चुके थे….
तारक के धक्के अब और रफ़्तार पकड़ चुके थे…..
अंजलि :- तारक बॅस में गई……में नही झेल सकतिईइ और्र्र्र्र्ररर….
तारक :- अंजलि में भी आना वाला हूँ….मुझसे तो रहा नही जा रहा…
और अपना सारा रस अंजलि की चूत के अंदर छोड़ देता है…4 या 5 झटके लगते रहते हैं….अंजलि तारक के गरम रस को सहन नही कर पाती…और अपना ढेर सारा पानी छोड़ देती है….
दोनो काफ़ी थक गये थे…तारक अंजलि के पैरों को नीचे रख देता है…और उससे लिपट जाता है…कुछ मिनट बाद…दोनो फिर से होंठों का रस पान करने लगते हैं…
तारक :- अंजलि मज़ा आया ना..
अंजलि :- तारक ऐसा मज़ा..आज तक नही आया…
और दोनो फिर से एक दूसरी की बाहों में सिमट जाते हैं…..
तारक और अंजलि अपनी चुदाई कर चुके थे….दोनो एक दूसरे के उपर पसरे हुए थी…अब आगे…
उधर बबीता घर पे पहुँच के गेट खोलती है और अंदर चली जाती है…
बबीता :- अईयर….अईयर….
लेकिन कोई रेस्पॉन्स नही आता…
फिर वो सोचती है शायद वो कमरे में होगा…
जैसे ही वो कमरे में पहुँचती है अईयर सोया पड़ा होता है…
बबीता :- अईयर तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना…
अईयर चादर में से मुँह बाहर निकालता हुआ.
अईयर :- हाँ बबीता बिल्कुल ठीक है..वो तो में बोर हो रहा था…तो इसलिए सो गया…
बबीता :- तुम्हे इतना पसीना क्यूँ आ रहा है…और तुमने ये फॅन क्यूँ बंद कर रखा है…
रूको में ऑन कर देती हूँ..
और वो फॅन ऑन कर देती है…
और वो जैसे ही फॅन ऑन करती है….पूरे कमरे में गुलाब के फूल बिखर जाते हैं…और नीचे खड़ी बबीता के उपर बरसने लगते हैं…
इतनी शॉपिंग करने के बाद बबीता काफ़ी थक गई थी…मगर जैसे ही उसने ये सब देखा उसकी सारी थकान दूर हो गई…वो काफ़ी खुश हो चुकी थी…
बबीता :- अईयर ये सब तुमने किया है…वऊओ…कितना बढ़िया है….
अईयर :- हाँ बबीता डार्लिंग..ये सब तुम्हारे ले ही है…
बबीता :- ओह्ह यू आर सो स्वीट….इसलिए तुम इतनी देर से बिना फॅन ऑन करे बैठे थे…वाऊ..थॅंक यू सो मच…!!
अईयर :- इसमे थॅंक यू क्या…
और पलंग से उठ के बबीता के पास आ जाता है…और एक दम से बबीता के होंठ पे अपने होंठ रख देता है…और एक प्यारा सा चुंबन दे देता है..
बबीता इसके लिए तैयार नही होती और वो चौंक जाती है….
बबीता :- थोड़ा पीछे हाते हुए….अईयर आज क्या हो गया है तुम्हे…बड़ा प्यार आ रहा है…
अईयर :- बबीता डार्लिंग….प्यार तो रोज़ आता है…अच्छा अब बातें मत करो..
बबीता :- इरादा क्या है…
मन में सोचती है…लगता है आज अच्छे से मेरी चुदाई होगी…
अच्छा तो कहाँ से शुरुआत करनी है..
अईयर अपनी पेंट खोल देता है…और अपना अंडरवेर भी उतार देता है….और उंगली से इशारा करता है..यहाँ से…
बबीता :- नहिी अईयर…हर बार में करती हूँ..और तुम अपने आप को रिलीफ करके निकल जाते हो…
अईयर :- बबीता डार्लिंग…आज में तुम्हारे लिए ही तो आया हूँ…
प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज आ जाओ ना…
बबीता कुछ सोचती है और फिर बोलती है..
बबीता :- ओके..लेकिन अगर आज भाग गये..तो मुझसे बुरा कोई नही होगा…
और अपना हाथ आगे बढ़ा के लंड पे रख देती है..अईयर के मुँह से हल्की सी आहह निकल जाती है..
अईयर :- डार्लिंग..बॅस अब फटाफट मुँह में लेलो….
अईयर से सब्र नही किया जा रहा था…
अईयर के उतावले पन को देख के…बबीता हल्की सी मुस्कुरा देती है…और अपना मुँह अईयर के लंड पे रख देती है…
और आधा मुँह में ले लेती है..और उसे चूसना चालू कर देती है..
अईयर :- बॅस..अहह.ओह्ह…बबीताआ…मज़ा आ रहा है…
बबीता लंड को नीचे से पकड़ के…उपर से आधा मुँह में लेके अंदर बाहर करने लगती है….
कमरे में पुच पच की आवाज़ आ रही थी…उसकी शकल इस वक़्त किसी रंडी से कम नही लग रही थी…
वो लंड को ऐसे चाट रही थी..जैसे..कोई लोलीपोप चूस रही हो..और वो भी उससे 10 साल के बाद मिली हो…
इतनी प्यासी थी कि…उससे रहा नही जा रहा था…वो फटाफट मुँह अंदर बाहर कर रही थी…
अईयर तो वैसे ही उतावला था…उससे तो रहा नही गया…और बोलता हुआ..
अईयर :- अहह…..ओह…बबीताआ…आइ आम कमिंग…..
और अपना सारा रस बबीता के मुँह के अंदर छोड़ देता है…और पीछे बेड पर गिर जाता है…
बबीता उठती है…उसने सारा रस पी लिया होता है…
बबीता :- अईयर …तुमने अपना इरादा तो नही बदल लिया ना
अईयर फ़ौरन उठता है….उसे आज तो बबीता को खुश करना ही था…कोई और दिन होता तो वो कब का भाग जाता अपना लंड चुस्वा के….उसमे स्टॅमिना नही है…एक बार उसका रस निकल जाए…उसके बाद उसकी हिम्मत नही होती कुछ करने की…मगर आज कुछ बात तो अलग थी…
अईयर :- बबीता डार्लीग ऐसा थोड़ी हो सकता है…
और उसके करीब जाता है…और बूब्स को कस के दबा देता है..
बबीता :- ओह्ह्ह्ह अईयर….तुम्हे पता है..कितने दिन से इसके लिए में बेकरार थी…
अईयर बबीता का टॉप निकाल देता है…और उसे पलंग पे लिटा देता है….
बबीता भी मदहोशी में पागल हुई जा रही थी…वो सोच रही थी..आज तो मुझे जन्नत का एहसास होने वाला है..
इतने में अईयर बबीता के लेग्गी…और उसके पैंटी को खीच के उतार देता है…
बबीता की चूत पूरी तरह गीली हुई होती है…वो तो बस चुदने की तैयारी में होती है…
अईयर अपना मुँह उसकी चूत के पास ले जाता है…..और…!!!!,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दोस्तो क्या आईयर बबीता की प्यास बुझा पाया या बबीता को उसने प्यासा ही छोड़ दिया . अब बबिता किससे चुदवायेगी ये जानने के पढ़े रहें और मेरा साथ देते रहें
बबीता अईयर के लंड को चूस के उसका रस निकाल चुकी थी…और अब वो सिर्फ़ ब्रा में बिस्तर पे लेट चुकी थी..और अब अईयर उसकी चूत की तरफ बढ़ चुका था…अब आगे…….!!!!!
अईयर बबीता की चूत पे अपना मुँह ले जाता है…बबीता मदहोश हुई होती है…आज बहुत दिनो के बाद उसकी प्यास मिटने वाली थी…
और तभी उसके मुँह से हल्की सी आहह..निकल जाती है…क्यूँ कि अईयर ने अपना मुँह उसकी चूत पे रख दिया होता है….
बबीता कुछ पल के लिए तो काफ़ी मदहोशी में चली जाती है..लेकिन फिर वो अपने आप को सम्भालते हुए बोलती है..
बबीता :- अईयर…. चूस क्या रहे हो….अपना लंड्ड डालो ना…
अईयर :- मुँह चूत पे से हटता हुआ…बबीता डार्लिंग तुम्हे तो पता है ना…मेरा एक बार निकलने के बाद…खड़ा नही हो पता…तो में कैसे करूँगा…..लेकिन तुम फिकर मत करो…आज तुम्हे में ऐसे चूसूंगा कि तुम पागल हो जाओगिइइ…
बबीता गुस्से में बोलने ही वाली होती है … कि वो अपने मन में सोच पड़ती है….
बबीता जो मिल रहा है वो ही ठीक है…कम से कम एंजाय तो कर ही लूँगी…
और फिर बॅस इतना ही बोलती है..
बबीता :- ओके…बट अब करो..मुझसे रहा नहिी जराहााआअ….
बस अईयर इतना सुनते ही…अपना मुँह फिर से चूत पे रख देता है…
और फिर उसकी गीली पड़ी चूत को चाटने लगता है….पच पच पच जैसी आवाज़ें आनी लगती है….क्यूँ की चूत काफ़ी गीली होती है…
अईयर मस्ती में चूत को चाटने में लगा हुआ था….बबीता का हाथ अईयर के बालों में घूम रहा था…..उसकी कमर बार बार हवा में उछल रही थी…
काफ़ी दिनो एक बाद उससे काफ़ी सुखद एहसास मिल रहा था…
अब अईयर चूत को खोल के अपनी जीभ उसके अंदर डाल चुका था…और वो बहुत तेज़ी से उसे अंदर से चूस रहा था…
अब बबिता से रहा नही गया और उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी…
बबीता :- अहह ओह्ह्ह्ह…एसस्स्स्सस्स…..एससस्स…लिकक्क मीईई…उफफफफफफफफ्फ़..मययी गॉडड्ड्ड…….अहह….
अईयर उसकी सिसकियों पे ध्यान नही देता …बस वो तो आज एक ही मकसद में लगा था..किसी भी तरह बबीता को खुश करना है…..
वो चूत को अंदर ऐसे चाट रहा था…जैसे इडली सांभर की कोत्री रखी हुई हो…..
बबीता बस सिसीकियाँ भर रही थी..
बबीता :- ओह्ह्ह्ह एसस्स्स्स्सस्स…..जेठा जी…..लिकक्कक इट देयर….ओह्ह मययी गॉड्ड…..यू आर सो गुड…जेठा जी…अह्ह्ह्ह…
काफ़ी हल्की सिसकियाँ ले रही थी..
लेकिन जब उसने दूसरी बार जेठा जी बोला….तो अईयर के कान फड़कने लगे..
वो फ़ौरन अपना मुँह चूत से हटाता हुआ….
अईयर :- बबीता …. तुमने अभी जेठालाल का नाम लिया…
बबीता घबराते हुए….मन में सोचती है…कहीं मेने सच में तो जेठा जी का नाम नही ले लिया…शायद हो सकता है….उस वक़्त इतना ज़्यादा मज़ा आ रहा था कि पता नही चला होगा…और अईयर से बोलती है..
बबीता :- मदहोशी भरी आवाज़ में…अईयर तुम रुक क्यूँ गये…और जेठा जी कहाँ से आ गये बीच में…तुम करो ना..मुझसे सब्र नही हो रहा हाीइ…
अईयर भी सोचता है…शायद मेरे कान बज रहे होंगे…और फिर से अपने काम में जुट जाता है…
नीचे अईयर बबीता की चूत अपने मुँह से चोदने में लगा हुआ था…उपर बबीता का बुरा हाल था….उसका दोनो हाथ अपने बॉम्ब जैसे चुचों पे चल रहे थे…..उसकी जीभ बाहर निकली हुई….जैसे कि वो अपने विचारों में जेठालाल के साथ एक लिप लॉक कर रही हूँ….
अईयर अब चूत चाट चाट कर थक गया था..लेकिन अभी तक बबीता झडि नही थी…उसने फिर रुकने का फ़ैसला किया…और वो बबीता के बगल में आके लेट गया….
जब बबीता को लगा कि अईयर अब उसकी चूत को नही चांट रहा है…तो उसकी तरफ गुस्से की नज़र से देखती है…
अईयर :- बबीता डार्लिंग…यू डोंट वरी…वो में थोड़ा थक गया हूँ..इसलिए…
और इतना बोलते ही उससे चिपक जाता है…और अपने होंठ उसके होंठों पे रख देता है…और उसके होंठो को चूसना चालू कर देता है…
बबीता बड़े प्यार से उसके होंठ चूस रही थी…लेकिन अईयर बड़ी बेरहमी से चूस रहा था….
बबीता को दर्द होना शुरू हो जाता है..तो वो अईयर को धक्का दे देती है..
अईयर :- क्या हुआ डार्लिंग…
बबीता :- ऐसे जन्गलियो की तरह कर रहे हो तो क्या करूँ…
वो झल्ला के बोलती है उससे…
अईयर :- कूल डाउन बेबी….
और बबीता की ब्रा खोल देता है…अब बबिता पूरी नंगी होती है …पलंग पर…
इस वक़्त वो एक अप्सरा लग रही होती है….नंगा गोरा बदल..मखमली स्किन…कोई भी आदमी उससे इतना प्यार करे कि एक रात भी कम पड़ जाए…लेकिन हमारा अईयर..उन्हे तो इस रेशम की कोई कदर हे नही थी…
अईयर ब्रा खोल के बबीता के चुचों पे अपना मुँह रख देता है…और उन्हे चूसना चालू कर देता है…साथ ही साथ अपनी दो उंगलियाँ चूत पे ले जाके एक ही बार में अंदर घुसा देता है…चूत इतनी गीली होती है ..कि आराम से दोनो उंगलियाँ अंदर चली जाती है….
बबीता की हल्की सी कमरा हवा में उठ जाती है….
अब अईयर फटाफट अपनी उंगलियाँ अंदर बाहर करना चालू कर देता है…
बबीता :- अहह…एससस्स….फुक्कक मीईईई…..गूओद्द्द्दद्ड…ओह्ह्ह्ह…
ओह…..दो लिक्ीईई..दिस्सस्स..अहह…..
अईयर थक गया होता है…इसलिए वो अब 3 उंगलियाँ एक साथ अंदर डाल देता है…इस अब्र उसकी ये चालाकी काम आ जाती है..
बबीता :- अईयरर्र्र्र्र्ररर…..अह्ह्ह्ह..ओह्ह्ह…माइ गॉड्ड………आइ कंटत्त्टटतत्त कंट्रोल…..आइ आम कमिनग्ज्ज्ज्ज्ज्ज….
और झड जाती है…और अपना ढेर सारा पानी अईयर की उंगलियों पे ही छोड़ देती है…
बबीता बुरी तरह से हाँफ रही होती है…उसका बदल पसीना पसीना हो गया होता है…उससे कुछ आराम मिलता है..मगर वो आराम नही मिलता जो लंड से चुदने के बाद मिलता है..
वो अईयर की तरफ देखती है..
बबीता :- अईयर … कम से कम तुम मेरा ये रस तो पी लिया करो…मुझे अच्छा लगता है…
अईयर :- नेक्स्ट टाइम बबीता….और फिर मन में सोचता है…ये तुम्हारे पानी की वजह से तो उंगली से किया था..
अईयर भाई साहब को बबीता की चूत का पानी बिल्कुल पसंद नही है…
अईयर :- लेकिन तुम्हे आज अच्छा तो लगा ना..
बबीता :- दूसरी तरफ मुँह कर लेती है..और चादर ओढ़ कर बोलती है..हाँ..ठीक था…
और अपनी आँखें बंद कर लेती है..
अईयर भी सोचता है…कि आज मेने कितना बढ़िया काम किया है…बबीता को सॅटिस्फाइ कर के..
हाँ कितना बड़ा काम किया है अईयर ने…वो तो सिर्फ़ बबीता ही जानती है…इनकी कहानी में तो बस इतना ही था…
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चलिए चलते हैं….अगले कॅंडिडेट के पास..
बबीता और अईयर एक दूसरे को सॅटिस्फाइ कर के पड़े थे…जितना भी किया था…कर तो दिया हे था थोड़ा सा…अब आगे….!!
उधर भिड़े के घर पे…..
माधवी घर पहुँचती है….गेट खोल के अंदर जाती है…तो सब कुछ नॉर्मल होता है…
वैसे बता दूं….हमारे भिड़े भाई साहब थोड़े कंजूस हैं…तो उन्होने ज़्यादा कुछ नही किया…उनके मुताबिक वो बिना इस सजावट के भी माधवी को खुश कर सकते हैं….
माधवी अंदर आके….
माधवी :- आहूऊ…..आहूओ….आ गए में..किधर हो…
लेकिन भिड़े नही सुनता है…
माधवी कमरे में जाती है….वहाँ पे भी आवाज़ लगा ती है..
तब उससे भिड़े की आवाज़ आती है…
भिड़े :- आया माधवी रूको थोड़ा सा..
माधवी :- लेकिन आप हो कहाँ … दिखाई नही दे रहे…मिस्टर इंडिया बन गये हो क्या..
भिड़े :- अरे बाथरूम में हूँ माधवी..
माधवी :- हंसते हुई…हो बाबा…पता है..अच्छा आ जाओ..
और तभी भिड़े बाथरूम से बाहर निकलता है…
भिड़े :- देखो माधवी कैसा लग रहा हूँ में…
माधवी पीठ घुमाए खड़ी थी…इसलिए वो उससे नही देख सकती थी…
माधवी :- बोल तो ऐसे रहे हैं..जैसे हीरो बन चुके हैं…
और पीछे मुड़ते हुए देखती है…
माधवी :- अगूऊ बाईईईई……और अपना हाथ अपने मुँह पे रख लेती है…
ऐसा वो इसलिए करती है…क्यूँ कि भिड़े के सर पे बाल आ गये थे….
माधवी :- अरे कितने सुंदर लग रहे हैं आप…क्या मस्त लग रहे हो….
भिड़े :- मस्त लग रहा हूँ ना….
जी हैं कन्फ्यूज़ मत होइए….भिड़े के बाल नही उगे थे…उसने तो विग लगा रखी थी…
माधवी उसके करीब आते हुए बोलती है..
माधवी :- सच में आप बहुत हॅंडसम लग रहे हैं….
और अपने होंठ भिड़े के होंठ पे रख देती है…
भिड़े भी पीछे रहने वाला कहाँ था…वो भी बड़ी मस्ती से माधवी के होंठ को चूसने लगता है…
दोनो 2 मिनट तक एक दूसरे के होंठो का रस पीते हैं…और फिर माधवी पीछे हटते हुए बोलती है….में अभी आई..और बाथरूम में घुस जाती है….
भिड़े मन में सोचता है….
मुझे पता था…मेरी इस नकली विग से ही माधवी खुश हो जाएगी..बेकार में क्यूँ खर्चा करने का….
तभी माधवी बाथरूम से निकलती है…इस बार मुँह पे हाथ रखने की बारी भिड़े की थी…
क्यूँ कि उस वक़्त माधवी ने…एक ट्रंपारेंट नाइटी से पहनी हुई थी..जो उसके घुटनो तक ही थी….उस नाइटी में उसका पूरा शरीर दिखाई दे रहा था….उसकी रेड ब्रा..और रेड पैंटी सॉफ दिखाई दे रही थी….गोरी गोरी जांघे…और गोरे गोरे शोल्डर्स दिखाई दे रहे थे….
इसे देख कर भिड़े का तंबू खड़ा हो गया था…जीन्स के अंदर से…और वो सॉफ दिखाई दे रहा था…..
वैसे माधवी ये ड्रेस रात में पहनने के लिए लाई थी…लेकिन महॉल इतना गरम हो चुका था..कि उसने अभी इसे पह्न लिया…
कुछ मिनट तक वहाँ बिल्कुल सन्नाटा छा जाता है….तभी भिड़े उस सन्नाटे को चीरता हुआ बोलता है…
भिड़े :- माधवी…अपरतीम…क्या मस्त इते लग रही हो..
माधवी ये सुन के हंस देती है…और आगे बढ़ने लगती है…
और आगे बढ़ते ही..भिड़े की जीन्स के उपर से उसके लंड को दबोच लेती है..
भिड़े :- आह माधवीई….
मुझसे अब कंट्रोल नही हो रहा है..बहुत दर्द हो रहा है…जीन्स के अंदर…मुझे अपनी जीन्स खोलने दो ना…
माधवी :- इसके लिए आप क्यूँ कष्ट कर रहे हैं..में खोल देती हूँ..
और फिर माधवी भिड़े की जीन्स और उसका अंडरवेर नीचे कर देती है…और उसका लंड देख कर मुस्कुरा देती है….
क्यूँ कि भिड़े का लंड अपना विकराल रूप ले चुका होता है….
वैसे भिड़े क्या उस वक़्त अगर कोई और भी होता तो माधवी को देख के उसका खड़ा हो ही जाता ..इतनी हॉट लग रही थी वो…
माधवी फिर उसके लंड को एक बार अपने हाथ से उपर नीचे करती है…
और एक बार पूरा अंदर लेके बाहर निकाल देती है..जिससे उसका लंड गीला हो जाता है….
भिड़े :- अहह……
बस इतना ही निकलता है…
और वो माधवी को उठा के ..पलंग पे ले जाता है……..
देखते हैं आज ये दोनो हॉट कपल…पलंग पे क्या गुल खिलाते हैं…!!!!
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माधवी ने ट्रस्सेपरेंट नाइटी पहनी हुई थी…जिसे देख कर भिड़े का लंड आसमान को छूने लगा था…भिड़े माधवी को उठा के पलंग पे ले जाता है….अब आगे….!!
पलंग पे लिटा के भिड़े माधवी के उपर आ जाता है…..और उससे धीरे से कानो के पास आके के बोलता है…
भिड़े :- माधवी … आज तुम कयामत लग रही हो….
माधवी बस शर्मा के रह जाती है…और अपनी गर्दन दूसरी तरफ फेर लेती है….
भिड़े उसके गर्देन पे किस करते हुए…उसके नीचे बस थोड़ा चुचों के उपर किस करने लगता है…
माधवी के मुँह से हल्की सी आहह निकल जाती है…
माधवी अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी..उससे रहा नही जा रहा था…वो झिझकते हुए भिड़े से बोलती है…
माधवी :- हन्जी……..बस..स…….अब…नहिी…रहा…जा रहा…..वो सारी बात अटक अटक के बोल रही थी….
भिड़े ये सुन के उसकी तरफ देखता है…उन दोनो की नज़रे मिलती है….भिड़े एक कातिल मुस्कान देता है…
वो भी टाइम नही वेस्ट करना चाहता था…उसका भी बुरा हाल हो रखा था…
लेकिन फिर भी वो थोड़ा सा आराम से करना चाहता था…मास्टर जी जो ठहरे..हर कम आराम से करने का और पूरे डीसीप्लेन से करने का होता है….
वो माधवी की गोरी सॉफ्ट जांघों के पास पहुँचता है…और अपनी जीभ बाहर निकाल के उन्हे चाटने लगता है…
माधवी इस वार को सह नही पाती और चीख पड़ती है….अहह….ओह्ह…आईयू..क्या कर रहे हो….मुझसे अब नही रहा जा रहा..जल्दी कर्रू ना….
मगर भिड़े तो अपने में मस्त था…
वो धीरे धीरे…माधवी की चूत की तरफ बढ़ता है….और पेढू के उपर से चूत को मुँह से दबोच लेता है…
माधवी :- अहह……माँ…
उसकी पूरी पैंटी गीली हो चुकी थी…और बाहर तक उसके पानी का असर देख सकते थे…
भिड़े के मुँह में भी पानी का टेस्ट आ चुका होता है…अब उससे कंट्रोल करना मुश्किल हो चुका होता है…
वो अपने मन में सोचता है…भाड़ में गया डीसीप्लेन….अब तो मुझे बिल्कुल नही रहा जा रहा….
वो फटाफट माधवी की पैंटी को एक ही झटके में नीचे कर देता है…
उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती है..जब वो माधवी की चूत को देखता है….
क्यूँ कि माधवी की चूत में से पानी का झरना बह रहा था…और वो बार बार खुल बंद खुल बंद हो रही थी….एक दम शेव्ड चूत थी माधवी की…क्यूँ कि उसने सुबह ही आज बाल सॉफ करे थे…
भिड़े अपनी जीभ अपने होंठो पे घुमाता है….और अपना कुर्ता उतार देता है….नीचे से तो वो ऑलरेडी नंगा ही होता है….
वो माधवी की तरफ बढ़ता है….और उसके पास जाके उसके होंठो पे अपने होंठ रख देता है…और उन्हे चूसने लगता है…दोनो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे साथ साथ में उन्हे पी भी रहे थे…
फिर माधवी अपनी जीभ भिड़े के मुँह में डाल देती है…अब दोनो एक दूसरे का स्वाद चख रहे थे…
भिड़े का हाथ उसके चुचों पे चले जाते हैं…और वो उन्हे कस कस के दबाने लगता है….
फिर कुछ मिनट बाद वो अलग होते हैं…और दोनो हाँफ रहे होते हैं….भिड़े बोलने ही वाला होता है..कि माधवी उसके होंठो पे उंगली रख के बेड से खड़ी हो जाती है….
और भिड़े को कामुक स्माइल दे देती है…और पीछे ले जाके अपनी नाइटी का धागा खोल देती है …और एक ही झटके में नाइटी नीचे गिर जाती है….और फिर मूड जाती है…और हल्की सी खुल जाती है…अपनी गान्ड को बाहर निकाल कर….
भिड़े ये देख के पागल हो जाता है…और उसकी तरफ भागता हुआ…पीछे से पकड़ लेता है…और उसके गान्ड को कस के दबा देता है….
माधवी :- अहह……आराम ससीईए..
भिड़े अपने होंठ पूरी पीठ पे फिरा रहा था….
अब दोनो के सब्र का बाँध टूट चुका था…
भिड़े :- माधवी आज….
बॅस इतना ही बोलता है..माधवी बोल पड़ती है..
माधवी :- जो करना है वो करो…बॅस कर दूओ..मुझसे और रहा नही जा रहा है…
और फिर भिड़े माधवी की एक टाँग उपर उठा लेता है…माधवी का फेस वॉल की तरफ होता है….
माधवी जब तक अपनी ब्रा खोल चुकी होती है..अब दोनो पूरी तरह से नंगे हो चुके थे….
भिड़े अपना लंड पे हाथ रखता है…और बसस्सस्स…….ख्टकककककककककक…..एक ही झटके में आधा अंदर……..
माधवी :- तकरीबन चिल्लाते हुई….अहह….ओह…
मररर्र्र्र्र्ररर दियाआआ……उईईईई..अह्ह्ह्ह…..
जी हाँ जब गान्ड में आधा एक बार में घुसता है ना..तो ऐसी ही चीख निकलती है…
भिड़े एक और झटका लगाता है…और अब पूरा अंदर…..
माधवी फिर से एक बड़ी सी अहझहह…..मुँह से निकाल देती है…..
आगे से चूत पूरी तरह गीली थी….भिड़े ने अपनी 2 उंगलियाँ एक साथ चूत में भी डाल दी थी…
अब पीछे से धक्के लगने शुरू हो गये….गान्ड की अच्छी तरह पिलाई हो रही थी….उधर चूत में उंगली अंदर बाहर….अंदर बाहर…हो रही थी….
माधवी तो आज सातवे आसमान में थी…वो तो बस…अहह/…..ओह्ह्ह्ह….उईईई…ओहमा…
आाअगगगूऊव बाईईईईई…आईसीईए हीए….और्र्रर तेज़्ज़्ज़्ज़…..
धक्कों की रफ़्तार बढ़ चुकी थी…गान्ड इतनी टाइट थी..कि भिड़े से अब रहा नही जा रहा था……वो बस कुछ ही धक्कों के बाद…..थोड़ा थक सा गया था….उधर उंगली भी काम पे लगी हुई थी….
पूरे कमरे मे माधवी की सिसकियों के अलावा…पच पच….पच पच…..जैसे आवाज़ें आ रही थी…
तभी भिड़े बोलता हुआ…आइ अम्म्म कमिनंग्ज्ग…माधवी….और अपना सारा रस गान्ड में उडेल देता है…
माधवी भी आब बर्दाश्त नही कर पाती…और अपनी चूत का रस बहा देती है..जो उसकी जांघों से होते हुए..नीचे चला जाता है….
माधवी :- अहह….मज़ा आ गया आज तो….
और भिड़े अपना वेट माधवी पे डाल के हाँफने लगता है….माधवी भी हाँफ रही थी…….
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उधर जेठालाल के घर पे….
दया सीडियों से उपर चढ़ के….गेट का लॉक खोलने लगती है..लेकिन उसे पता चलता है…कि गेट तो खुला हुआ है…
और मन में सोचती है….शायद टप्पी बेटा ने खोला होगा..उसे कोई आइडिया नही होता..कि जेठालाल आ चुका होता है…
और वो अंदर की तरफ चल देती है….
अंदर पहुँचती है…और देखते ही……………..
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भिड़े और माधवी एक मस्त चुदाई के बाद हाँफ रहे थे…उधर दया घर पहुँचती है..और देख के चौंक जाती है…अब आगे…!!!
जैसे ही दया अपने कदम ..लिविंग रूम की तरफ बढ़ती है…वहाँ का नज़ारा देख के चौंक जाती है…..
पूरे फ्लोर पे…गुलाब की चादर थी….जो चल के जाने के लिए बनाई गई थी…
दया ये देख कर थोड़ी कन्फ्यूज़ और हैरान होती है…कि ये सब किया किसने है…
लेकिन फिर वो धीरे धीरे फूलों के उपर चलती हुई जाती है..जो उसके कमरे के दरवाजे पे ख़तम होती है..
दरवाजा बंद होता है…वो कुछ देर सोचती है…और गेट को अपनी तरफ़ खिचती है…उसके कमरे का गेट…बाहर की तरफ खुलता है इसलिए…
जैसे ही गेट को खिचती है….उसके सर पे….फूलों की बरसात हो जाती है….
दया ये सब देख के ..बहुत ही ज़्यादा खुश होती है….तब उसे लगता है..शायद टप्पू के पापा ने किया होगा ये सब…वो चिल्लाती है..
दया :- टप्पू के पापा…..टप्पू के पापा..आब यहीं पर हैं ना…..
तभी……
तभी पीछे से आके उसको ..पीछे से कोई पकड़ लेता है….दया की सांस रुक जाती है…वो घबरा जाती है..कि कौन आ गया…
लेकिन कुछ सेकेंड्स बाद वो निर्मल हो जाती है…क्यूँ कि वो समझ जाती है..कि पीछे जेठालाल खड़ा है…
वो अपने ग्रिप को ढीला बनाती है..और पीछे मूड कर देखती है…जेठालाल एक कातिल मुस्कान के साथ खड़ा होता है…
दया :- नटखट….
जेठालाल कुछ नही बोलता…बस उसे देखता ही रहता है…..
दया :- ये सब करने की क्या ज़रूरत थी…जब वो ये बोल रही थी..तो उसकी आँखे नीचे थी..और वो अपने नखुनो के साथ खेल रही थी…
जेठालाल अब कुछ नही बोलता है..और उसकी तरफ ऐसे ही देखता रहता है…
दया :- अपना सर उपर करके…अरे ऐसे क्यों खड़े हैं…कुछ बोलिए…बोलते क्यूँ नही है…एक ही सांस में बोल देती है…
जेठालाल अब भी कुछ नही बोलता…
लेकिन….
इस बार वो अपने होंठ दया के होंठ पे रख के एक प्यारी सी पप्पी ले लेता है…
दया इसके लिए तैयार नही होती..और अपने आप को छुड़ाने के लिए पीछे भागती है…
दया :- हाई दैया….ये क्या कर रहे हैं…और शरमाने लगती है…फिर कुछ देर बाद बोलती है….टप्पू आ जाएगा…
जेठालाल इस बार बोल पड़ता है…
जेठालाल :- वो नही आएगा….
और अपनी कातिल मुस्कान दया को दिखा देता है..
दया बस दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी…शर्म के मारे…..
तब जेठालाल उसके करीब आके…अपना हाथ पीछे कमर पे ले जाता है…और खीच कर अपने सीने से लगा लेता है…
दया :- आह….टप्पू के पापा…
बॅस इतना ही बोल पाती है….कि तभी जेठालाल अपने होंठ दया की गर्दन पे रख के … वहाँ चूमने लगता है…
दया अब मदहोशी में चली जाती है..
लड़कियों की सबसे कमजोर जगह होती है उनकी गर्दन..वहाँ किस करने से वो काफ़ी मदहोश हो जाती है…..और यही जेठालाल ने दया के साथ किया…
जेठालाल अपने चूमने में लगा हुआ था…कभी गर्दन..कभी होंठ…तो काफ़ी गाल…चुचों के उपरी हिस्से को वो बस चूमे जा रहा था….
फिर वो हटा…कुछ सेकेंड रुका…और दया का पल्लू नीचे गिरा दिया…अब उपर से सिर्फ़ उसका ब्लाउस था…उसने बिना वक़्त गँवाए ब्लाउस भी खोल दिया….अब उपर से वो सिर्फ़ ब्रा में थी….
जेठालाल ने बाहर निकली चुचियों पे अपने होंठ लगा दिए…और वहाँ चूमने लगा…इश्स वक़्त दया के मुँह से बॅस…
दया :- टप्प्प्ुऊउ कीए पपपा…..आह…यही निकल रहा था..
जेठालाल एक फिर फिर पीछे हटा…दया की आँखें बंद थी..वो दोनो अभी भी वैसे ही खड़े थी….इस बार जेठालाल ने ब्रा पकड़ी और खोलने लगा….
लेकिन उससे खुल नही रही थी…वो काफ़ी कॉसिश करता है..लेकिन उससे खुल नही रही थी….
जेठालाल :- कम्बख़्त…खुल जा…एयेए…लेकिन नही खुलती …
दया ये सब देख कर हंस पड़ती है…
जेठालाल तू क्या हंस रही है….मदद कर मेरी….वो झल्लाते हुए बोलता है…
दया :- में क्यूँ खोलो…अपने आप खोल लीजिए…और फिर हँसने लगती है….
जेठालाल को गुस्सा आ जाता है…और वो खोलने की वजाय…उसे फाड़ देता है…
दया :- ये क्या किया…अपने मेरी इतनी प्यारी…
अहह…..
जी हाँ…जेठालाल ने अपने होंठ दया के चुचों पे लगा दिए थे…और उन्हे चूस रहा था….दया के निपल्स हार्ड हो चुके थे….