Hawas ka ghulam ( हवस का गुलाम )
गर्मियों के मौसम को झेलने के बाद बारिश का मौसम कुछ ज़्यादा ही सुहाना लगता है. सावन जो शुरू हो चुका है. आज जल्दी सुबह से ही काले मेघों ने अपनी हुंकार लगानी शुरू करदी. हरे भरे पेड़ों के हरे पत्तों से पानी की बूंदे अठखेलियाँ करते हुए ज़मीन मे समा जाती है. और ये बारिश अपनी मिट्टी की खुश्बू इस कदर फैला जाती है कि माहॉल एक तरह से रोमांचित हो उठता है.ये तो कुदरत का एक अनोखा करिश्मा है कि 1 साल मे कुदरत अपने की रंग दिखाती है, कभी आसमान से बर्फ बन कर तो कभी आसमानी आग बन कर, कभी झड़ते पत्तों का खेल, तो कभी आग और पानी का मेल, कभी बारिश बरसाती है तो कही बीजूरी कडकाती है, कहीं आग बरसाती है, तो कही…
कितना बताऊ कुदरत के बारे मे. इंसान भी इसी कुदरत की तरह है कभी भी कुछ भी कर देता है, कभी प्यार तो कभी तकरार, कभी झगड़ा तो कभी भांगड़ा. औरत का मन और इंसान की फ़ितरत कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. जैसे कि इसी घर मे देखलो,
अंजलि,
अंजलि यार मेरा रुमाल कहाँ है,
भाभी मेरे नाश्ता तैयार हुआ कि नहीं प्लीज़ भाभी जल्दी कर दो ना मैं लेट हो रही हूँ,
अंजलि:- जी लाई, कोमल तुम्हारा नाश्ता टेबल पर है जल्दी करो, टिफिन किचन मे है बॅग मे रख लेना याद कर के,
बहू… बहू,,
अंजलि: जी माँ जी
सुलोचना: बहू ज़रा मुझे मंदिर तक ले चलो ना.. मुझे ठाकुर जी के दर्शन करने है..
अंजलि: जी माँ जी चलिए.
अंजलि जल्दी आओ, मैं ऑफीस मे लेट हो जाउन्गा.
सुलोचना: अरे बस भी करो तुम सब के सब एक नन्हीं सी जान के पीछे पड़े हो. कभी खुद भी अपना काम कर लिया करो. या फिर कोई नौकर लगवा लो घर मे जब देखो अंजलि ये करो अंजलि वो करो… सब के सब आलसी होगये हैं…
१- अंजलि:-
अंजलि एक आड्वोकेट है, इसने हैदराबाद से एलएल.बी पूरी की थी. फिर इसके पिता ने इसकी शादी एक पोलीस ऑफीसर से करदी, एसीपी देवराज सिंग. अंजलि के हज़्बेंड है
अंजलि की उमर अभी कोई 24 साल है, फिगर 34डी , हिरनि सी कमर 28 और आस 38. हैदराबाद मे अंजलि ने 2 साल से लगातार ब्यूटी कॉंटेस्ट जीती थी. अंजलि की हाइट भी किसी मॉडेल की तरह ही है 5’8 है.. चेहरे पर एक खुशनुमा मुस्कान, आँखों मे चंचलता, और जब चलती है तो हिरानी की तरह लहराती हुई बिजलियाँ गिराती है.
२- एसीपी देवराज सिंग:
जी हां इन्होने अपनी मेहनत से एसीपी की पोस्ट हासिल की. ऐसा नहीं है कि शहर मे डाकू घूमते है तो ये महाशय घर से बाहर ही रहते है..हहहे जी नहीं हाँ लेकिन इनको समय की कदर करना पसंद है ये ऑफीस वक़्त पर पहुँचना और अपना काम ख़तम करना चाहते है ताकि कोई भी कल को इनके काम पर उंगलियाँ ना उठाए. इनकी हाइट है 5’11, जिम करने से इनकी बॉडी एक दम फिट है, और इनकी उमर कुछ ज़्यादा नहीं है केवल 26 साल के है. शहर मे इनको कोई नहीं जानता क्यूकी आज तक कोई भी ऐसा काम नहीं किया इन्होने कि इनको दुनिया जाने या फिर यू कहूँ कि आज तक कोई ऐसा काम आया ही नहीं, इनकी शादी को अभी 6 या 7 महीने ही हुए है. इसलिए ना तो कोई संतान है इनकी और ना ही इनके पिताजी अब इस दुनिया मे है. इनकी शादी के बाद एक एसीडेंट मे इनके पिताजी की डेत हो गई थी उसी एक्सीडेंट मे इनकी माँ के पैरों मे और पीठ पर चोट लगी जिस से उन्हे चलने फिरने मे थोड़ी तकलीफ़ होती है.. लेकिन डॉक्टर ने कहा था कि 3 4 महीनो मे ये अच्छी होने लगेंगी.
३-कामया:
काम्यादेवराज की छोटी बेहन.. बी.कॉम कर रही है.. पढ़ लिख कर सी.ए बन ना चाहती है. इसकी उमर 22 साल है.
कामया का फिगर कुछ इस तरह से है 34सी-30-36डी . अगर कामया सीधी खड़ी होजाए तो ये समझलो कि इसका फिगर अँग्रेज़ी के “स” वर्ड की तरह नज़र आएगा.
कामया का नेचर तो आप कहानी के साथ ही जान जाएँगे.. तो अभी आगे बढ़ते है एक और खामोश शक्स से मुलाकात करने के लिए..
जी ये खामोश शक्स कोई और नहीं देवराज की छोटी बेहन है, आरती
आरती घर मे खामोश रहती है ऐसा नहीं है सबसे ज़्यादा खेल खुद और घर वालो को परेशान करने मे अव्वल नंबर. है इसका बस ये ज़रा नहीं नहीं ज़रा नहीं पूरा कुंभ करण की कार्बन कॉपी है. जब तक इसे कोई उठाने नहीं आता उठती ही नहीं है. घर मे सब की लाडली है. इसे साड़ी और सलवार सूट पहन ना बहुत पसंद है
ये है आरती इसकी उमर अभी 19 साल है, लेकिन कमाल की बात ये है कि इस उम्र मे इसे साड़ी पहनना पसंद है. वो आपको बाद मे पता चलेगा कि क्यूँ पसंद है.
आरती का फिगर कुछ इस तरह से है 32बी 28 35डी..फिलहाल तो ये जीन्स टी शर्ट मे रहना पसंद करती है लेकिन फंक्षन मे हमेशा ये साड़ी मसालेदार सूट पहन ना पसंद करती है..
दोस्तो ये पूरा परिवार फिलहाल देल्ही मे रहता है…
आज के लिए बस इतना ही बाकी का अपडेट लेकर आउन्गा. प्लीज़ आप लोग कमेंट करना ना भूले..
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देवराज का ऑफीस..
देवराज:-बांके जी वो पुरानी फाइल लाना , ऑस्कर माल मे चोरी वाली.
-बांके: क्या साब उस फाइल मे अपने को 3 महीने बीत गये और आप हो कि उधर ही अटके हो. मैं तो बोलता हूँ कोई छोटा मोटा चोर पकड़ कर बता देते है कि यही है चोर..
देवराज: -बांके जी आप उमर मे इतने बड़े हो फिर भी मुझे ऐसी बाते सीखा रहे हो .. आप फाइल मुझे ला दो मे देखलूंगा बाकी
-बांके: जैसी आपकी मर्ज़ी
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उधर घर पर….
कामया: भाभी मैं कॉलेज निकल रही हूँ… आप मुझे ड्रॉप करदोगी… प्लीज़ भाभी
अंजलि: प्लीज़ ..? हे हहहे चलो ठीक है रिक्वेस्ट तो की तुमने..
कामया: भाभी आप भी ना…
अंजलि: माजी मैं ऑफीस जा रही हूँ रास्ते मे कामया को कॉलेज ड्रॉप कर दूँगी. आरती अभी भी सो रही है..
सुलोचना: वो तो कुंभ करण है 11 बजे से पहले कहाँ उठे गी.. ठीक बेटा जाओ लेकिन आराम से ध्यान से जाना …
अंजलि ऑर कामया दोनो एक साथ घर से बाहर निकल जाती है.
अंजलि कार निकाल कर लाती है और कामया को बिठा कर उसके कॉलेज निकल जाती है..
आज अंजलि साड़ी मे नहीं बल्कि पेंट शर्ट मे है वही वकिलो वाली ड्रेस.. वाइट शर्ट, ब्लॅक पॅंट, ब्लॅक शूस….ब्लॅक ब्लेज़र, लेकिन अंजलि तो कुछ भी पहन ले क़यामत तो लगनी ही है..
चलो कहानी पर आते है..
अंजलि कार ड्राइव करते हुए कामया के कॉलेज पहुँच जाती है. घर से कॉलेज तक के सफ़र मे दोनो ने कोई बात नहीं की कामया मोबाइल मे बिज़ी, और अंजलि ड्राइविंग मे..
कामया: थॅंक यू भाभी.. आप कितनी अच्छी हो .. कामया झुक कर अंजलि को किस करने कर देती है…
अंजलि: अच्छा इतना प्यार आ रहा है मुझ पर तो अपने पति को क्या दोगि जानू…
कामया: भाभी आप भी ना..
अंजलि : हाहहहाहा अच्छा चलो मैं जाती हूँ.. तुम भी ध्यान से रहना मस्त लगता ही है तुम्हारी फिगर.. कही कोई निचोड़ ना ले..हहहे
कामया: भाभी मेरा तो निचोड़ेगा तब की तब देखेंगे लेकिन आप की तो रोज ही….
अंजलि;: भाग यहाँ से बदमाश.. कुछ भी बोलती है..
अंजलि कामया को ड्रॉप करने के बाद गाड़ी आगे बड़ा देती है और गाड़ी मे लगी घड़ी मे टाइम देखती है तो 9.45…
अंजलि: ओह गॉड मर गई आज तो.. अंजलि जल्दी से गियर चेंज करके स्पीड बढ़ाती है कि तभी साइड वाली नुक्कड़ से एक स्कूटर पर बुड्ढ़ा आ रहा था जो अंजलि की गाड़ी से टकरा कर नीचे गिर जाता है और बेहोश हो जाता है.. अंजलि तुरंत गाड़ी से बाहर आकर देखती है.. बुड्ढ़ा गया कि अभी है…
भीड़ वहाँ इकट्ठी हो गई थी.. अंजलि को वकील की ड्रेस मे देख कर कुछ लोगो ने तो ज़्यादा कुछ नहीं कहा और कुछ उल्टा उस बुड्ढे की ग़लती बता रहे थे.. बट अंजलि तो जानती थी कि उसने स्पीड बढ़ाते हुए नज़र सड़क पर नहीं घड़ी पर रखी थी..
अंजलि: प्लीज़ कुछ लोग हेल्प करके इन्हे मेरी गाड़ी मे बिठा दीजिए इन्हे हॉस्पिटल ले जाना है.
पब्लिक ने तुरंत बुड्ढे की उठा कर अंजलि की गाड़ी मे पीछे की तरफ पटक दिया..
अंजलि गाड़ी लेकर हॉस्पिटल की ओर बढ़ ही रही थी कि बुड्ढ़ा उठ जाता है.
समान का क्या हुआ.. ये ये तू कॉन कहा कहाँ ले जा रही है मुझे…
अंजलि: देखिए आप मेरी गाड़ी से टकरा गये थे तो आपको मैं अपने साथ ले जा रही थी हॉस्पिटल मे..
बुड्ढ़ा: तेरी माँ की चूत बेहन की लोडी गान्ड मारके बोल रही है दर्द का इलाज करने ले चल रही हूँ.. आह इस की माँ की चूत छिल गयी कोहनी मेरी..
अंजलि: पूरी तरह से गुस्से मे थी.. देखिए आप ज़रा तमीज़ से बोलिए.. आपको अभी हॉस्पिटल ले चलती हूँ सब ठीक हो जाएगा…
(बुड्ढ़ा गुस्से से मन मे.. तेरी माँ को चोदु एक तो तोड़ दिया उपर से तमीज़ सिखाती है… तेरी तो मैं माँ बेहन ना चोद दूं तो बोल भोसड़ी की)
बुड्ढ़ा: ओह सॉरी दर्द की वजह से कुछ समझ नहीं आया कि क्या बोल रहा हूँ मैं..
वैसे तुम्हारा नाम क्या है…?
अंजलि: जी अंजलि, अंजलि सिंग, आप कॉन है?
बुड्ढ़ा: मैं.. मेरा नाम है सलीम.. मैं एक टेलर हूँ, दुकान पर ही जा रहा था कि .. किस्मत ने मार कर दी..
अंजलि: दुखी होते हुए.. सॉरी सलीम जी मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ़ उठानी पड़ी..
(अब तो बुड्ढे का नाम पता चल गया तो उसे सीधे नाम से बुलाते है)
सलीम: तुम क्या करती हो? मेरा मतलब कोई टीचर हो या बॅंक मे काम करती हो..
अंजलि: हल्के से हंसते हुए जी नहीं नहीं.. मैं की टीचर विचर नहीं हूँ. मैं एक वकील हूँ.. वही ऑफीस मे जा रही थी..
अभी तक सलीम के मन मे अंजलि के प्रति कोई बुरा विचार नहीं आया था हाँ गुस्से मे गालियाँ ज़रूर बक रहा था..मन ही मन..
इतने मे गाड़ी हॉस्पिटल आकर रुक जाती है.
अंजलि: लीजिए हॉस्पिटल आगया..
सलीम: ये लो ये मेरा कार्ड है.. कभी टेलर वाले काम की ज़रूरत पड़े तो याद करना.. वैसे तुम रहती कहाँ हो..
अंजलि: जी मैं .. वो अप्सरा कॉलोनी मे रहती हूँ
सलीम: अरे वाह वहीं तो मैं रहता हूँ… लेकिन मैं नुक्कड़ पर रहता हूँ अप्सरा और सूरज कॉलोनी के बॉर्डर पर..
अंजलि;: नीचे देखते हुए.. जी वो हॉस्पिटल .. आपका इलाज..
सलीम: नहीं ज़रूरत नहीं है.. ठीक हो जाएगा इतना भी नहीं छिला कि डॉक्टर की 100 200 रुपये. थमा दूं..
तभी सलीम गाड़ी से उतरता है तो अंजलि भी गाड़ी से उतरती है.. अंजलि को देख कर सलीम अपने होश भी खो बैठा था…
उस वकिलो की ड्रेस से अंजलि की चूंचिया गदर मचा रही रही थी, उपर से एक बटन भी खुला छोड़ा था..
अंजलि : जी मैं जाउ फिर
सलीम: इतनी जल्दी…
अंजलि : चौंकाते हुए … जीयियी
सलीम: जी मेरा मतलब मुझे इतनी दूर छोड़ कर.. अगर आप मुझे वापस वही छोड़ दे तो..1 किमी तक मैं पैदल तो नहीं जा सकता ना..
अंजलि: थोड़ा सा झुंझला कर जी चलिए..
अंजलि:बिना बोले सलीम को वापस ड्रॉप करके ऑफीस के लिए निकल जाती है..
सलीम अभी भी अंजलि के ख्वाबों मे ही खोया हुआ है…
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धर देवराज….
देवराज:-बांके जी क्या कोई नोकर मिल सकता है घर के काम करने वाला.. दरअसल मेरी वाइफ पूरा काम करती है तो माँ ने बोला था एक नोकर के लिए जो जो मुझे भी कुछ ठीक लग रहा है.. बस कोई विश्वास के लायक हो..
-बांके जी:- साब चोरी तो नहीं करेगा.. बाकी पता नहीं.. लेकिन बंदा ईमानदार है.. अपने मालिक की इच्छा के बगैर कुछ नहीं करता..
देवराज: चोरी तो नहीं बाकी क्या..
-बांके जी : अब बाकी तो बहुत कुछ है.. खाना खाले,काम मे नखरे करे या पैसे ज़्यादा ले..
देवराज: वो सब प्राब्लम नहीं है.
-बांके : तो फिर ठीक है साब वो अपना सलीम मिया है..ना.. उसे रखलो काम पर.. बिचारा टेलर था पहले बहुत नाम था उसका लेकिन लड़की बाजी के कारण आजकल कोई नहीं जाता उसके पास..तो कोई ऑर काम की सोच रहा था वो..
देवराज: ठीक है आप उसे मेरे यहाँ भेज दीजिएगा.. बट हाँ उससे हम खाना नहीं बनवा सकते.. वो क्या है ना वो मुस्लिम है तो मेरी माँ उससे खाना नहीं बनवाएगी.. हां वो हम सब के लिए खाना बना सकता है..
-बांके जी: जी जैसा आप ठीक समझे. मैं उसे कल आपके घर भेज दूँगा.. आप पैसो की बात कर लीजिएगा..
देवराज: जी बहुत अच्छे.. चलो अभी मैं निकलता हूँ.. कल मैं मेरी वाइफ के साथ शॉपिंग पर जा रहा हूँ तो लेट आउन्गा….
-बांके : जी साब..
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डींग डॉंग डींग डॉंग.
अंजलि: आरहि हूँ…
दरवाजा खोलते ही..
जी आप..??? आप यहाँ कैसे.. देखिए मैं आपसे पहले ही माफी माँग चुकी हूँ फिर आप मुझे परेशान करने यहाँ आगये..मेरे घर तक.. जो कुछ हुआ अंजाने मे हुआ था…
सलीम:- अरे अरे सुनिए तो.. मेने कब कहा कि मैं आपका पीछा करते हुए यहाँ आया हूँ.. आप कुछ भी बोले जा रही है.. वो क्या है ना कल मुझे -बांके ने बताया था कि किसी को घर के काम करने वाला कोई नोकर चाहिए.. तो मैं यहाँ चला आया.उसने यही अड्रेस दिया था..
अंजलि:लेकिन यहाँ तो कोई काम करने वाला…
तभी देवराज आता है..
देवराज: अंजलि मेने ही इसे बुलाया था.. कल माँ ने बोला था ना नोकर के लिए तो मुझे भी ज़रूरत महसूस हुई …तुम जाओ तैयार हो जाओ.. वी आर ऑलरेडी गेटिंग लेट..
अंजलि: लेकिन देव..
देवराज: तुम यार बहुत टाइम खराब कर देती हो बोला ना लेट हो रहे है शॉपिंग के लिए तो यहाँ क्यूँ सर खफा रही हो
अंजलि: गुस्सा होकर वहाँ से चली जाती है.. ( इन्हे अभी किसी और के सामने डाँटने की क्या ज़रूरत थी.. जब देखो एसीपी बने घूमते है कभी पति तो बनते नहीं)
देवराज: हाँ भाई तुम्हारा क्या नाम है?
सलीम: जी सलीम, वो -बांके जी ने…
देवराज: हाँ उसे मेने ही बोला था.. मैं हूँ एसीपी देवराज सिंग… और तुम्हे यहाँ काम करना है.. देखो मेरी माँ के लिए खाना तुम मत बनाना.. बाकी सब का खाना और अदर काम तुम्हारी ज़िम्मेदारी होगी. समझ गये ना..
सलीम: जी साहेब…
देवराज: फिलहाल तो घर मे हम 5 मेंबर है तुम्हे खाना सिर्फ़ 4 मेंबर का बनाना है.. ओके. तो बताओ कितना सॅलरी लोगे…
सलीम: जी 8000रुपये.
देवराज: देखो मैं तुम्हे 2000रुपये ज़्यादा देता हूँ …10000 महीने का.. बस काम ईमानदारी से काम वरना ..
सलीम: जी आप बिल्कुल भी फिकर ना करे मैं सब देख लूँगा..
तभी अंजलि की एंट्री होती है साड़ी का पल्लू सही करते हुए..
अंजलि: चलें… (देवराज को देखते हुए) वैसे सलीम जी आपने तो कहा था आप एक टेलर है फिर…
सलीम: मेड्म अभी नये ज़माने में कों सिलाई करवा कर कपड़े पहनता है.. इक्का दुक्का लोग आते है.. और 100 150 रुपये. दिन भर का कमा पाते है तो दूसरा काम तलाश ने में लग गया था और देखो मालिक के करम से आपके यहा काम मिल गया..
अंजलि: ओह ओके बहुत अच्छा किया.. वैसे आपकी चोट कैसी है..
सलीम : सब अच्छा होगया मेम साहेब..
अंजलि चोन्कती है कि ये बुड्ढ़ा कल तो गाड़ी में तू तकारे से बात कर रहा था आज अचानक से मेम साहेब…
अंजलि: ह्म
देवराज: कैसी चोट भाई ( घड़ी हाथ में पहनता हुया..)
अंजलि: अरे बताया तो था वो कल एक्सीडेंट हो गया था..
सलीम: साहेब मेरी ही ग़लती थी.. में जल्द बाजी में नुक्कड़ से मूड रहा था..
अंजलि सलीम की ओर आश्चर्य से देखती रहती है..
देवराज: अभी अच्छा है ना.. चलो बढ़िया है.. सुनो सलीम तुम काम आज से बल्कि अभी से जाय्न कर्लो..हम लोग शॉपिंग करके आ रहे है तब तक तुम घर का ख्याल रखना…और खाना बना लेना.. उपर मेरी बहनें है और वहाँ साइड में नीचे वाले कमरे में माँ है उन्हे कोई भी काम हो ती करदेना.. अंजलि 4-5 अवर्स मे वापस आ जाएगी..
सलीम :जी साहेब.. साहेब खाने में क्या बनाऊ.. नोन वेज या वेज…
देवराज: आज यार वेज फुड ही बना दो..
चलो तुम काम करो तब तक हम आते है..
सलीम:जी साहेब..
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