कली और फूल – दो बहनों की दास्ताँ Part 2

     




               कली और फूल – दो बहनों की दास्ताँ  Part 2






कोमल को उसके रूम में छोड़ कर आने के बाद अंकिता अपने रूम में आ गई | हॉल में लगी घडी ११ बार घंटी बजा रही थी , वहा बेड पे आलोक फ़ोन पे किसी से बात करने में लगा था | अंकिता ने अलमारी से एक K Y Jelly की शीशी निकाली | आलोक के सामने ही लहंगा नीचे से खींच के निकाल दिया | चोली इतनी टाइट थी की कई बार कोशिश करने के बाद भी अंकिता हुक नहीं खोल पा रही थी , आलोक बेड पे लेटे लेटे ही कान पे फ़ोन लगाए ये सब देख रहा था | अंकिता ने आँख से इशारा किया


“ठीक है संध्या , मैं कल ऑफिस में तुमसे डिस्कस करता हूँ इस बारे में ! ओके ? “


“संध्या है क्या ? बात कराना तो मेरी ! ” आलोक से फ़ोन लेकर अंकिता ने कमर, आलोक की तरफ कर दी |


संध्या आलोक की असिस्टेंस थी , ऑफिस और आलोक की जिम्मेदारी उसके ऊपर ही थी | घरवाले तो उसे आलोक की ऑफिस वाइफ बुलाते थे | आलोक के हर एक मिनट का हिसाब किताब , अपॉइंटमेंट, मीटिंग्स, यहाँ तक की पैसे का हिसाब भी वही सम्हालती थी | आलोक भी उसे बहुत मानता था |


“ये तुम दोनों की क्या बाते चल रही है इतनी रात में ? ४ दिन के लिए मायके क्या गई तुम दोनों गुल खिलाने लगे !” अंकिता ने संध्या को छेड़ते हुए कहा | दोनों की आपस में नोकझोक चलती रहती थी | दोनों बहुत अच्छी फ्रेंड थी | 


“कहा यार अंकिता ! मैंने तो कई बार अपने दोनों गुल आलोक को खिलाने की कोशिश की लेकिन उनको सिर्फ आपके बड़े – बड़े तरबूज ही पसंद आते है , मेरे गुल खाना ही नहीं चाहते !” संध्या ने अपनी आवाज में थोड़ी मादकता लाते हुए अंकिता के मजाक में साथ दिया |


“साली कमीनी , अपनी ही बॉस की सौतन बनाना चाहती है न ? मिल इस बार बताती हूँ  तुझे !”


“अरे हां आओ न ऑफिस , बहुत दिन हो गए है यार मिले हुए , चलते है कही घूमने या खरीददारी पे , और कोमल भी आई है न तुम्हारे साथ उसे भी लेते आना “


“ठीक है जानेमन , तुम कहती हो तो इस वीक में ही ऑफिस आती हूँ मैं ! मुझे भी तो इनके पैसे का हिसाब देखना है कही सारा पैसा अपने अस्सिस्टेंस पे ही तो नहीं उड़ा रहे है |”


“ही ही ही मेरे ऊपर तो आलोक सर को पैसे उड़ाने की जरुरत नहीं है , वो बस एक बार बोल के तो देखे मैं ऐसे ही उनके नीचे लेट जाउंगी !!”


“कुत्ती – कमीनी बेशरम ” अंकिता ने आलोक के हाथ से चोली लेकर अलमारी में डाली और आलोक को अंडरवियर भी निकलने को बोला | आलोक ने अंकिता के अंडरवियर को उसकी जांघो से नीचे फिसलया और बेड पे उछाल दिया | 


“ही ही ही अच्छा ठीक है , अभी तुम दोनों के प्यार का टाइम हो रहा होगा तो मैं डिस्टर्ब नहीं करना चाहती , एन्जॉय करो ऑफिस में मिलते है !” संध्या ने फ़ोन पर बोला 


“ठीक है संध्या , मिलते है तो बात करते है ऑफिस में,  ओके बाय !” अंकिता ने फ़ोन कट करके बेड पे फेक दिया |


“अरे मैं यह पूरी नंगी खड़ी हूँ और अभी तक तुम कपडे पहने हुए हो, निकालो जल्दी ना ” अंकिता ने आलोक का टीशर्ट ऊपर खींचते हुए बोला 


“पैंट निकलकर बाथरूम में आओ !” अंकिता के इस आर्डर को सुनकर आलोक ने अंकिता का हाथ पकड़ा 


“यार इतने दिन बाद कर रहे है अंकिता !! थोड़ा सॉफ्ट वाला करते है न पहले , थोड़ा प्यार तो करने दो पहले “


“सॉफ्ट माय फुट !!” अंकिता ने आलोक का हाथ झटका और बाथरूम में घुस गई 


थक हारकर आलोक ने भी पैंट और अंडरवियर निकली और बाथरूम में आ गया | शावर के नीचे खड़ी अंकिता का बदन पानी में किसी हीरे की तरह चमक रहा था | धीरे से अंकिता ने बालो को खोला और आलोक को अपनी तरफ खींचा | आलोक ने अंकिता के पानी में भीगे होंठो पर अपने होंठो को रखा और अच्छे से किस करने लगा | अंकिता का बदन गरम होने लगा था , साँसे गरम होकर सीने के उभार को तेज़ी से ऊपर नीचे कर रहे थे | 


अंकिता ने आलोक के सर को अपने चेहरे से हटाकर अपने उभारो के सामने रखा और बाये तरफ के स्तन को पकड़ के आलोक के मुँह में डाल दिया | आलोक बच्चे की तरह अंकिता के उभारो को पीने लगा |


“काटो हलके से !! ” अंकिता ने आलोक के सर पे हाथ फेरते हुए कहा 


“लेकिन.. तुम्हे दर्द.. ?”


“मैंने कहा ना, काटो इसे !!” अंकिता ने आवाज ऊँची करते हुए आलोक को आर्डर सा दिया |


आलोक अच्छे से जानता है की घर के किसी भी काम में अंकिता, उसकी या घर के किसी भी सदस्य की बात मान लेगी लेकिन सेक्स के मामले में वो सिर्फ अपनी सुनती है और अपने मन की ही करती है | जिस दिन उसका जो मन रहेगा वो उस दिन वही करेगी | कभी उसे नार्मल पोजीशन में टाँगे फैला कर चुदना पसंद आता है तो कभी घोड़ी बनकर आलोक को अपने ऊपर चढ़वाती है , कभी कभी आलोक को पुरे सेक्स के दौरान वो नीचे ही रखती है और खुद उसके लिंग के ऊपर उछलती रहती है | लेकिन अंकिता की इसी अनिश्चितता और पागलपन का, आलोक दीवाना है | हर दिन अंकिता उसे कोई ना कोई नया सरप्राइज देती थी | कभी वो बेइंतहा प्यार करने वाली पत्नी बन जाती थी , तो कभी क्रूर सेक्स मशीन  | जिस दिन उसे जानवरो की तरह चुदना रहना रहता है , उस दिन वो आलोक से अपने मन की बात बताती है और आलोक भी उस दिन उसे किसी मांस के लोथड़े की तरह ट्रीट करता है , जानवरो की तरह बिना किसी रहम के लगातार अपने स्टील जैसे लिंग से घंटो तक सिर्फ धक्के लगाता है , कभी कभी तो अंकिता दर्द के मारे रोने भी लगती है लेकिन आलोक को बिना रुके चोदते रहने का आदेश पहले से मिला रहता है तो वो भी बिना किसी रहम के अंकिता के बदन के हर एक पोर को तोड़ कर रख देता है | किसी दिन वो आलोक को हाथ भी नहीं लगाने देती, सिर्फ मुँह, जीभ और शब्दों का इस्तेमाल करके वो आलोक को स्खलित कर देने में माहिर हो गई थी | आलोक सेक्स के मामले में खुद को सिकंदर समझता है , ना जाने कितनी लड़किया उसके पेड़ के पतले तने जितने मोटे और स्टील जैसे मजबूत लिंग के ताकत और साइज का लोहा मानती है लेकिन अंकिता के साथ मामला कुछ और ही रहता है यहाँ आलोक शांत होकर सिर्फ अंकिता को फॉलो करता है और अंकिता उसे हर दिन एक नई दुनिया में घुमाने ले जाती है | इतने दिन के रिलेशन में आलोक और अंकिता ने कई तरह के सेक्स पोजीशन , दवाओं यहाँ तक की ड्रग्स का भी इस्तेमाल किया है लेकिन अंकिता को जो तरीका सबसे ज्यादा पसंद आया है वो है दर्द भरा सेक्स ! ऐसा सेक्स जिसमे मर्द औरत को दर्द देकर उसे यौन सुख दे ! चाहे वो BDSM स्टाइल सेक्स हो ,गला चोक करना हो या खूंखार जानवर की तरह बिना किसी फीलिंग के बस चोदते रहना,  जहा भी अंकिता को सम्बन्ध बनाने में पीड़ा होती है वही उसका फेवरेट सेक्स हो जाता है | शुरू शुरू में तो आलोक तक भी हल्का डरने लगा था लेकिन अंकिता के कई बार रिक्वेस्ट करने और बार बार वही प्रैक्टिस करने पे आलोक भी इस चीज का मास्टर हो गया है | अब वह अंकिता के एक इशारे पे समझ जाता है की अंकिता क्या चाहती है और यही सबसे बड़ी वजह है दोनों के खुशहाल दांपत्य जीवन की |  



आलोक ने दातो के बीच फसे निप्पल पे अपना प्रेशर और बढ़ाया और अंकिता की आह निकल गई | अंकिता  जब से मायके गई थी तब से वो आलोक के इस ताकत से भरे बाहो के कसाव को याद कर रही थी | वो जानती थी की आलोक भी उसके लिए तड़प रहा है और आज पहले दिन वो प्यार की शुरुवात हलके फुल्के छेड़छाड़ और नार्मल सेक्स से करना चाहता था | लेकिन अंकिता जानती थी की इस नार्मल सेक्स से , उसकी भूख नहीं मिटने वाली , अंकिता का जिस्म चीख चीख कर से चुदने के लिए चिल्ला रहा था | उसने किसी तरह अभी तक तो अपनी वासना की आग दबा कर रक्खी  थी लेकिन आज आलोक को अपने सामने देख कर वो अपने दहकते जिस्म को ठंडा कर देना चाहती थी | अंकिता की हालत ये थी की अगर कुछ दिन और उसे आलोक से दूर रहना पड़ता तो वो दुनिया के किसी भी मर्द से चुद जाती , आज वो बस चुदना चाहती थी , कोई फीलिंग नहीं , कोई इमोशन नहीं , आज वो चाहती थी की आलोक उसे अपने ताकतवर  शरीर में जकड कर, उसके अंग का पोर पोर तोड़ दे | जिसकी शुरुवात आलोक ने , अंकिता के निप्पल पे हल्का घाव लगाकर कर दिया था | दोनों स्तनों को रगड़ रगड़ के पीने के बाद आलोक ने अंकिता की पीठ को  बाथरूम की दीवार के हाई क्लास इटैलियन टाइल्स से सटा दिया , अंकिता ने अपनी दोनों टाँगे फैलाई , आलोक ने अपनी ताकत की नुमाइश करते हुए अंकिता को दीवाल के सहारे अपने लिंग के बराबर की ऊंचाई पर उठा दिया | दीवाल से अंकिता की पोस्टर की तरह चिपकी हुई थी और अंकिता को पकड़ के आलोक उसकी नाभि में अपनी जीभ चलाये जा रहा था , ऊपर से शावर की बौछार उन दोनों के प्यार की गर्मी को और भी बढ़ा रही थी | आलोक का लिंग जो की अभी तक अपनी नेचुरल पोजीशन में था अब अंगड़ाई लेने लगा |






सामने शिकार देखकर उसने भी सर उठाकर अंकिता की खुली हुई योनि जो की दोनों टाँगे फैलने की वजह से पूरी तरह से खुल गई थी, को सलाम किया , ७ इंच ४ सेंटीमीटर का वह लिंग किसी मनुष्य के अंग जैसा तो बिलकुल नहीं लग रहा था | आलोक का रंग गेहूवा होने के बावजूद भी उसका लिंग काले रंग का था | ऐसा तभी होता है जब लिंग का इस्तेमाल अत्यधिक किया गया हो | रगड़ की वजह से त्वचा का रंग बदल जाता है, काले पन की रंगत लिए जब वो विकराल लिंग तन कर खड़ा हुआ तो पानी में भीगे हुए काले नाग की तरह चमक रहा था | लिंग के चारो तरफ फूली हुई नसे उसे किसी युद्ध में जा रहे यौद्धा की तरह तैयार दिखा रही थी  | पूरी तरह से खड़ा होने पे लिंग, आलोक के नाभि को छु रहा था और तनाव की वजह से लिंग के सुपाड़े को ढकने वाली स्किन पीछे की तरफ खींच गई थी जिसकी वजह से वो गुलाबी रंग का टोपा पानी में भीगे  हुए किसी छोटे सेब की तरह दिख रहा था | लिंग के दैत्याकार रूप की वजह से  उसके नीचे अंडो पर किसी का ध्यान ही ना जाये | अंकिता ने अपने स्कूल और कॉलेज लाइफ में कई अलग अलग तरह के लिंग का दर्शन किया था, लेकिन आलोक जितना बड़ा और ताकतवर लिंग उसने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा था | जितनी बार भी वो आलोक के लिंग को अपने सामने खड़े होते हुए देखती थी हर बार उसे अपने आप पर यही शक होता था की उसे ले पायेगी की नहीं , एक बात तो अंकिता अच्छे से जानती थी की आलोक का लिंग किसी कुँवारी लड़की के लिए नहीं बना है , अच्छी से अच्छी अनुभवी और खेली खिलाई लड़किया और औरते भी एक बार इसे अंदर लेने से कतराएगी तो फिर कोई कुँवारी लड़की तो मर ही जायेगी और अगर बच भी गई तो उसकी योनि में इतना बड़ा छेद होगा की कोई लिंग उस पे असर ही नहीं कर पायेगा | एक तरह से आलोक से चुदने के बाद कोई भी लड़की बस उसके लिंग की गुलाम बन के रह जाएगी |


यहाँ अपने रूम में लेटी कोमल की आँखों से नींद कोसो दूर थी | उसने कई बार आँख बंद करके सोने की कोशिश की लेकिन नींद कभी जबरदस्ती नहीं बुलाई जा सकती | इधर से उधर करवट बदलने के बाद उसने थोड़ा घूमने का निर्णय लिया | कमरे की लाइट जलाकर, आलमारी से एक ब्लू कलर का गाउन निकलकर बदन पे डाला , इस वक़्त उसने एक मात्र ड्रेस गाउन ही पहना था , अंदर कुछ भी नहीं, केवल गाउन पहनने से बदन पे रेशम के कपडे की रगड़ कोमल को अलग से फील हो रही थी जो की थोड़ा अजीब भी लग रहा था लेकिन यहाँ उसे किसी भी तरह की कोई परवाह नहीं थी | वो कुछ भी पहनने के लिए आजाद थी, शूज रैक में रखे दर्जनों स्लीपर्स में से पिंक फ्लावर वाला स्लीपर पहनकर कोमल अपने रूम से बाहर आ गई , सारे कपडे , सैंडल्स , स्लीपर्स,  शूज़ , टॉवेल्स सब उसके साइज के हिसाब से थे , जैसे पहले ही उसका नाप लेकर सब कुछ डिज़ाइन किया गया हो फिलहाल गैलरी में दूर दूर तक कोई नहीं दिख रहा था रात के लगभग १२ बजने वाले थे | गैलरी में कोमल के रूम से १० कदम आगे अंकिता का बैडरूम था , और उसके ५० कदम आगे बालकनी थी जहा से बंगले के बाहर का नजारा दीखता था | कोमल ने थोड़ी देर बालकनी में बिताने की सोची 

सब सो रहे होंगे , हर कोई उसकी तरह जाग थोड़े रहा है |


घनी काली अंधेरी रात, और उस रात के अंधियारे से लड़ते हुए बंगले के मद्धिम मद्धिम रोशनी वाले मिनी स्ट्रीट लैंप , लॉन की घास में पानी देता हुआ आटोमेटिक फव्वारा अपनी पूरी प्रेशर से चारो तरफ पानी फेक रहा था | कोमल को बाहर चलकर लॉन की घास में नंगे पाँव घूमने का ख्याल अच्छा लगा लेकिन उसे पता नहीं थी की इतनी रात को वो बाहर जा सकती है या नहीं ?


मेन गेट तो शायद लॉक कर दिया गया होगा , लेकिन उसे क्या ? वो तो मालकिन है इस घर की ! अगर वो कहेगी तो आधी रात को भी गेट खुल जायेगा , आखिर यही तो आजादी है न जिसकी बात हर कोई करता है इस घर में | लेकिन शायद मुझे दीदी से एक बार पूछ लेना चाहिए , पहली बार कुछ बोलू और गड़बड़ न हो जाए , अगर दीदी बोल देंगी तो फिर मैं चाहे जितनी बार अपनी मर्जी से अंदर बाहर जा सकती हूँ | इस ख्याल के साथ कोमल अंकिता के रूम के सामने खड़ी हो गई | एक बार को उसको लगा की पहले डोर बेल बजानी चाहिए लेकिन फिर उसने सोचा की कही दीदी और जीजू सो न रहे हो और वो दोनों को डिस्टर्ब कर दे | कोमल के दिमाग में या ख्याल आया ही नहीं की उसके दीदी और जीजू एक पति पत्नी भी है| दरवाजा हल्का सा खुला देखकर कोमल ने अपनी आँखे उतने गैप में गड़ा दी |


“अंदर बेड तो खाली है ? ये दोनों कहा चले गए इतनी रात को ? ” कोमल जैसे ही वापस जाने के लिए मुड़ी , उसे जीजू की आवाज सुनाई दी | 


“अंकिता एक बार चूस दो ना , फुल टाइट जो जायेगा “


“मैंने बोला ना आलोक , अभी कुछ नहीं , ये सब कल होगा अभी जो कह रही हूँ वो करो “


कोमल ने फिर से अंदर झाँका तो बाथरूम की LED जल रही थी और उसके दीदी और जीजू शायद अंदर थे  | इतनी समझदार तो कोमल थी की उसे पता चल गया की अंदर क्या चल रहा है | कोमल ने झट से अपना सर गेट से बाहर निकला और अपने रूम की तरफ चल दी | रूम में आते ही उसने खुद को बेड पर फेका और अपनी दिल की धड़कनो को शांत करने के लिए लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी |


हे राम !! क्या करने जा रही थी वो ? अपने दीदी और जीजू को इस हालत में देख लेती तो क्या होता ? क्या इतनी पागल हो गई है की अपने दीदी की पर्सनल लाइफ में दखलंदाजी दे रही है ? कोमल ने थोड़ा बहुत गाने और मूवीज में ये सब देखा था लेकिन कभी कोई पोर्न मूवी या सेक्स सीन नहीं देखा था | देखती भी कहा से ? मम्मी पापा की तरफ से मोबाइल की सख्त मनाही थी | लेकिन वो सब तो यहाँ , अभी, सब कुछ हक़ीक़त में हो रहा है | वो चाहे तो वो सब कुछ देख सकती जिसे वो कब से चाहती थी | आखिर कैसे एक पति पत्नी प्यार करते है ? और किस तरह से करते है  ? अगर वो चाहे तो ये सब कुछ अभी जाकर देख सकती अपनी आँखों से ! अपने सामने ! बिलकुल लाइव !!!


नहीं नहीं !! ये बिलकुल सही नहीं है ! आखिर अपनी ही दीदी के सेक्स लाइफ में क्यों झांकेगी भला ? अभी उसकी उम्र नहीं है ये सब देखने की ! सही टाइम आएगा तो खुद ही पता चल जायेगा सब कुछ, इतनी क्यों परेशान हो रही वो इतना !!


लेकिन करने को कौन बोल रहा है ? बस देखना ही तो है इसमें किसी का कुछ नुक्सान नहीं है और वो तो किसी से बताने वाली भी नहीं ! देखा और भूल गई !! भला इसमें क्या खराबी ? किसी को कानोकान खबर नहीं होगी !!


रूम में AC बंद हो गई थी जिसकी वजह से गर्मी बढ़ गई | मजबूर होकर कोमल को रूम से बाहर निकलना ही पड़ा लेकिन बालकनी के रास्ते में पड़ रहे दीदी के रूम की तरफ जाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी | बाहर बालकनी में खड़े होकर बाहर का नजारा देखने लगी | खुद को उसमे ही बिजी रखने की कोशिश की लेकिन दीदी के रूम से छन छन कर आती बाथरूम की लाइट बार बार उसका ध्यान भटका रही थी |


कोई भी तो नहीं है यहाँ आस पास , अगर होता तो अब तक उसने ने नोटिस कर लिया होता, अकेली ही तो है वो फिर किस बात से डर रही है , उसके मन की उत्सुकुता उसे बार बार अंकिता के कमरे की तरफ धकेल रही थी | आखिरकार समझदार कोमल ने , किशोर कोमल के सामने समर्पण कर दिया और कोमल ने दीदी के रूम में अंदर जाने का निर्णय किया | 

गेट को बहुत हलके से खोलकर कोमल रूम के अंदर घुस गई और बाथरूम वाली दीवार से सटकर आगे बढ़ने लगी , बाथरूम तक का गेट दीदी ने नहीं बंद किया था आखिर इतने लापरवाह कैसे हो सकते है ये लोग | पुरे कमरे की लाइट बंद थी सिर्फ बाथरूम की लाइट जल रही थी जिसकी वजह से अगर कोई रूम के अंदर आता भी तो वो अँधेरे में रहता और बाथरूम में क्या हो रहा है ये आसानी से देख सकता था | कोमल बेड की उस साइड में जाकर खड़ी हो गई जहा से बाथरूम का दरवाजा साफ़ दिख रहा था | अंदर का नजारा देखकर उसकी आँखे फटी रह गई | जीजू ने दीदी को के दोनों पैरो को को पकड़ के दीवार पे टिका रखा था और अपने लिंग को दीदी के छेद पे हलके से बार बार टच करा रहे थे जिससे शायद दीदी को बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए वो जीजु के बालो को पकड़ कर के खींच रही थी | 


“आलोक अब डाल भी दो ना , क्यों तड़पा रहे हो ? ” अंकिता ने अपनी कांपती आवाज से आलोक से रिक्वेस्ट की 


कोमल ने अपने जीजू का लिंग पहली बार देखा था | जीजू का ही नहीं , उसने हक़ीक़त में किसी मर्द का ही लिंग पहली बार देखा था  “हे राम इतना बड़ा , ये तो जैसे कोई छोटी गदा हो ” बरबस ही कोमल के मुँह से निकल पड़ा | लेकिन उसकी आवाज बाथरूम के शवर में कही दब गई | कोमल ने एक नजर अपने हाथ और फिर आलोक के तने हुए लिंग पर डाली , इतनी दूर से भी कोमल एक बार में बता सकती थी की उसके हाथ से डेढ़ बार नापने पे आलोक का लिंग आएगा, और उस पर से इतना फूला हुआ , क्या सबका इतना ही बड़ा होता है ? या सिर्फ जीजू का ऐसे है ? और ये और ज्यादा बड़ा कैसे होता जा रहा है ? क्या जीजू कण्ट्रोल कर सकते है इसे ? उस एक दृश्य के साथ अनगिनत सवाल कोमल के मन में उछलने लगे |


“अच्छा कोई सेफ वर्ड तो बताओ , अगर तुम्हे ज्यादा दर्द हुआ तो कब रुकना है इसके लिए ” आलोक ने अपनी कमर को हलके से हिलाकर हिलाकर वार्मअप किया |


आलोक ने अंकिता को दीवार से सटाकर काफी ऊपर उठा रखा था जिससे अंकिता को आलोक की आँखों में देखने के लिए नीचे देखना पड़ रहा था | अंकिता ने आलोक के सर को बालो से खींचकर अपनी चेहरे की तरफ किया 


“आज कोई सेफ वर्ड नहीं है मेरे राजा ! आज तुम अपनी फुल पावर से मुझे चोदो , चाहे कुछ भी हो जाए , मुझे कितना भी दर्द हो या तकलीफ हो तुम्हे रुकना नहीं है , अगर मैं तुमसे रुकने के लिए बोलू तब भी नहीं !!” अंकिता ने अपने होंठो को कस के भींच रखा था 


“लेकि .. लेकिन अंकिता कही अगर तुम्हे कोई .. चटाककक  !!” अंकिता के जोरदार तमाचे की आवाज के साथ आलोक का गाल लाल हो गया |


रूम में खड़ी कोमल को भी उस चाटे की आवाज अच्छे से महसूस हुई , पहले से ही डरी हुई कोमल, की मानो जान निकल गई , ऐसा लगा चांटा उसे पड़ा हो , वो समझ ही नहीं पा रही थी की दीदी और जीजू आखिर किस तरह का प्यार कर रहे है  उसे लगा की जीजू , दीदी दोनों की लड़ाई हो गई |


चाटे से आलोक का चेहरा एक तरफ हो गया था लेकिन उसके साथ ही उसके चहरे पर एक हल्की मुस्कान खेलने लगी | अंकिता के इस इशारे को वो अच्छी तरह से समझ गया था 


आलोक का रिएक्शन देखकर कोमल हैरान थी आखिर जीजू को क्या हो गया ? दीदी की इस हरकत पे तो जीजू को गुस्सा होना चाहिए था लेकिन यहाँ तो उनका लिंग और भी ज्यादा टनके मारने लगा 


आलोक ने अपनी कमर को थोड़ा सा शांत किया और अपने उस सेब के अकार के टोपे को अंकिता की योनि के प्रवेश द्वार पे रखा और अंकिता की आँखों में झाका

कोमल को यकीन नहीं था की उसकी दीदी इतने विशालकाय लिंग को अपने अंदर ले पायेगी , वो क्या इस दुनिया की कोई भी लड़की इसे बर्दास्त नहीं कर पायेगी | उस लिंग के गोले के आगे तो दीदी का छेद छुप जा रहा है , शायद इतना ही करना होता है , सहलाना ही प्रोसेस है , लिंग और योनि के आकार के अंतर की वजह से कोमल कोमल ये सोच ही नहीं पायी की लिंग, योनि में प्रवेश भी कर पायेगा 


आलोक ने अपनी पूरी ताकत से झटका लगाया और ७०% लिंग अंकिता की योनि के अंदर | अंकिता की चीख निकल गई और चीख इतनी तेज थी की कोमल को अपने कान बंद करने पड़े , उसे डर लगने लगा की घर के बाकी सदस्य जागकर रूम में ना आ जाये |


जैसे ही कोमल ने दुबारा बाथरूम की तरफ देख, योनि के अंदर घुसे लिंग को देख कर कोमल ने अपने मुँह पे दोनों हाथ रखकर खुद की चीख रोकी , आलोक के विशालकाय शैतानी लिंग का सिर्फ ३० % हिस्सा ही बाहर दिख रहा था बाकी अंकिता की कोख में समां चुका था, कोमल को एक बार लगा की उसकी अंकिता दीदी आज गई जान से, अंकिता आँखे बंद करके अपने चीख को रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी ,गर्दन की सारी नसे फटने पे उतारू थी, आलोक की पकड़ से हाथ छुड़ाने की बेकार कोशिश कर रही थी लेकिन आलोक पे तो जैसे भूत सवार हो गया था | अंकिता ने उसके अंदर के जानवर को जगा दिया था , सब कुछ भूलकर उसने अंकिता को अच्छी तरह से अपनी कैद में जकड रखा था, अंकिता की योनि किसी अंगूठी के रिंग की तरह आलोक के लिंग पे कसी हुई थी जैसे छोटे रबड़ को किसी मोटे लोहे की रॉड को पहना दिया गया हो, एक दम टाइट, किसी भी तरह आगे या पीछे करने की कोशिश बेकार लग रही थी, आलोक ने अंकिता की आँखों में झाँका और उसे आने वाले दूसरे धक्के के लिए चेतवानी दी, अंकिता की आंख से आंसू की एक बूँद इसके दर्द से लाल हो रहे गाल में भाग निकला, आलोक ने अपने पाँव उठाकर अंकिता के गाल से उस बूँद को अपनी जीब से चाट लिया, अंकिता की आँखों में हवस के लाल लाल डोरे साफ़ नजर आ रहे थे , दर्द का एहसास सबसे ज्यादा था , लेकिन उस दर्द के पीछे आ रहे आनंद को अंकिता बिलकुल मिस नहीं कर रही थी, आलोक का लिंग उसे अपने बदन में साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था, अंकिता की सांसे धौकनी की तरह तेज़ थी और उससे भी तेज़ वही कुछ कदम दूर पे अँधेरे में खड़ी कोमल की साँसे चल रही थी |


इस वक़्त उसे जीजू पे बहुत गुस्सा आ रहा था , ऐसे भी भला कोई करता है क्या, कैसे जानवरो की तरह व्यवहार कर रहे है, पति पत्नी का प्रेम तो आपसी समझ और सामंजस्य पे टिका रहता है लेकिन यहाँ तो जीजू, दीदी की जान पे ही उतारू हो गए थे , इतना बड़ा जीजू को “वो ” भी तो है, धीरे धीरे तो डालना चाहिए , एक झटके में ही पूरा, ये सोचकर खुद कोमल की योनि में खिचाव होने लगा, उसे ऐसा लग रहा था जैसे जीजू ने अपना “वो” दीदी के अंदर नहीं खुद उसके अंदर डाला , ये तो दीदी थी जो बर्दाश्त कर गई, अगर वो खुद दीदी की जगह होती तो कसम से मर ही जाती, अरे ये क्या अनाप शनाप सोचे जा रही है वो, वो भला दीदी की जगह कैसे हो सकती है, जीजू कभी भी उसके साथ ऐसा नहीं करेंगे, और वो ही क्यों वो खुद उनके साथ ऐसा कभी नहीं करेगी , वो साली है उनकी , अपनी दीदी के साथ इतना बुरा करने की कभी सोच भी नहीं सकती वो , अंकिता की आवाज धीरे धीरे दर्द की चीख से , चुदाई की आह में बदल रही थी !! आलोक ने थोड़ा गैप देकर पहले अंकिता को अपने अंदर सब कुछ सेट करने का वक़्त दिया और अपनी कमर को हलके हलके मूव करता रहा !! एक बार दर्द थोड़ा कम होने पर आलोक ने फिर से अंकिता के जांघो को पे गृप टाइट की और अंकिता के नाभि में एक हलकी किस दी, अंकिता ने भी खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पे तैयार किया, पलक झपकते ही बाकी का ३०% हिस्सा, आलोक ने अंदर कर दिया, दोनों हाथो से अपने मुँह को दबाये अंकिता अपनी चीख नहीं रोक पायी और धीरे धीरे चीख रोने की आवाज में बदल गई अंकिता किसी बच्चे की तरह फफक-फफक के रोये जा रही थी | आँख से लगातार बहते आंसू होने वाले दर्द का एहसास अंकिता को करा रहे थे | 


अपनी दीदी को इस तरह रोते देखकर, कोमल की आँखों में भी आंसू आ गए, बिना कुछ सोचे समझे उसके कदम बाथरूम की तरफ अपनी दीदी को बचाने के लिए बढ़ चले , बस बहुत हो गया अब उससे ये सब नहीं देखा जायेगा, कोई इतना बेरहम कैसे हो सकता हैं, वो तो अपने जीजू को एक हीरो समझ रही थी लेकिन यहाँ तो कहानी ही उलटी निकली, आखिर जीजू कैसे अपनी खुद की बीवी को दर्द दे सकते है, उसे तो लगता था की जीजू उसकी दीदी को बेइंतहा प्यार करते है फिर ये वो क्या देख रही है ? लेकिन क्या उसका इस तरह अचानक उन दोनों के सामने आ जाना सही है ? अगर प्रॉब्लम होगी तो दीदी खुद अभी ये सब छोड़ कर निकल आएगी , क्या उसे इस तरह दोनों को रोकना सही है ? अभी तो वो दीदी को बचा लेगी लेकिन जब उससे पूछ जायेगा की वो इतनी रात को उनके रूम में क्या कर रही थी तो वो क्या जवाब देगी ? सबको पता है की घर के सारे दरवाजे साउंडप्रूफ है और और अगर गेट खुला भी तो मैं बिना घंटी बजाये क्यों अंदर आई ? बाथरूम की तरफ बढ़ते कोमल के कदम, ये सोचकर ही रुक गए , तो क्या वो दीदी के ऐसे ही रोने के लिए छोड़ दे ? दर्द के मारे अंकिता का बदन काँप रहा था, आखिर कैसे वो अपनी दीदी को इस तरह अपनी आँखों के सामने रोते हुए देख सकती है, उधेड़बुन में फसी कोमल तय नहीं कर पा रही थी की कदम आगे बढाए या नहीं , इधर अंकिता ने, आलोक के कमर में अपने नाखून गड़ा रखे थे , किसी तरह वो उस होने वाली पीड़ा को पीने की कोशिश कर रही थी, आंसू की वजह से पुरे गाल पे काजल फ़ैल गया था, आलोक के जिस्म में लिंग का कही नामोनिशान नहीं दिख रहा था , दिख रहे थे तो सिर्फ छोटे रसगुल्लों के साइज के अंडे, वो भी योनि से बिलकुल सटे हुए, कोमल को देखने से ऐसा लग रहा था की अगर आलोक का बस चलता तो वो एक धक्का और मारकर अंडे भी अंकिता के अंदर कर देते ,


“आलोक प्लीज , बाहर निकाल लो न , बहुत दर्द हो रहा है ” अंकिता ने रोते हुए ही आलोक से कहा 


“बस थोड़ी देर और जान फिर सब ठीक हो जायेगा ” आलोक ने लिंग को हलके से बाहर निकला 


“आआह्ह्ह्हह ” दर्द से अंकिता का बुरा हाल हो रहा था , कोमल को ये नहीं समझ आ रहा था जीजू रुक क्यों नहीं रहे , उन्हें परवाह नहीं क्या , दीदी की जान जा रही है और ये अभी भी अपना वो.. वो निकाल नहीं रहे है |


आलोक ने आधा लिंग बाहर निकला , अंकिता की यौन रास में भीगा वो काला नाग अलग ही चमक लिए हुए था जैसे तलवार की धार तेज़ करने पे चमक आती है वही चमक इस वक़्त आलोक के लिंग से आ रही थी , लिंग के बाहर के निकलने से अंकिता ने थोड़ी रहत की सांस ली ही थी की आलोक ने फिर से पूरा लिंग अंदर कर दिया !!! 


” फचच्च्चाक ”  लिंग का धक्का इतना तेज़ था की अंकिता दीवार से सटी हुई ही ऊपर की तरफ फिसल गई , अगर आलोक ने अंकिता को अच्छे से पकड़ा न होता तो अंकिता का सर शावर हेड से जा लगता | अंकिता की योनि ने पानी का हल्का सा फव्वारा छोड़ कर लिंग का साथ देने की रजामंदी दी | आलोक ने लगातार ऐसे ही शॉट्स लगाकर लगाकर अंकिता को पूरी तरह से पस्त कर दिया | अंकिता ने अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ दिया और आलोक को पूरा कण्ट्रोल दे दिया , आलोक ने शॉट्स की गिनती और ताकत दोनों बढ़ा दी और पूरी ताकत के साथ अपने लिंग को अंदर बाहर करने लगा |


अपने जीवन में पहली बार सेक्स देख रही कोमल ने सामने हो रहे घटनाक्रम में दर्द, आंसू और जबरदस्ती के साथ एक और चीज नोटिस की, वो थी आलोक की ताकत | अंकिता का वजन कम से कम ५० से ५५ के किलोग्राम के बीच तो होगा ही होगा | आमतौर पे एक गैस सिलिंडर का वजन १४.२ किलोग्राम होता है जिसे उठाने में काफी ताकत लगती है, वो खुद तो सही से हिला भी नहीं पाती थी , घर पे पापा ही सिलिंडर उठा कर किचन में रखते थे | लेकिन आलोक जीजू ने दीदी तो किसी खिलौने की तरह दीवार पे टांग रखा था और चहरे पे शिकन तक नहीं थी !! लग ही नहीं रहा था की वो कोई मेहनत कर रहे है, इतना तो वो समझ रही थी की दीवार पे फिसलन पानी की वजह से हो रहा था लेकिन दीदी को तो वो सिर्फ अपने लिंग के धक्के से ही ऊपर फेक दे रहे थे, हाथ से सिर्फ उनको अगल बगल से सहारा दे रहे थे , आलोक के ताकत का लोहा तो तो कोमल अच्छे से मान रही थी, अगर जीजू दीदी को इस तरह से खिलौने की तरह उछाल दे रहे है तो उसे तो वो किसी कागज की तरह ही मसल सकते है , हो सकता है एक हाथ से उठा दे, अरे ये क्या सोचने लगी वो , खुद को दीदी की जगह क्यों रखने लगती है वो हमेशा, और जीजू भला उसे उठाने क्यों आएंगे | छी-छी !! क्या हो गया है उसे , इतने गंदे ख्याल क्यों ला रही है वो अपने मन में ? लेकिन ये सब सोचकर कोमल को अपने जीजू पे नाज तो हो रहा था !! वैसे तो वो हर मामले में ही बेस्ट है , गुडलुकिंग है , ४ तरह की तो लैंग्वेज बोल लेते है , अंधा पैसा कमाते है, और ताकत का अंदाजा तो उसे आज हो ही रहा था लेकिन जिस तरह से वो दीदी को दर्द दे रहे थे वो चीज उसे बिलकुल अच्छी नहीं लग रही थी, आखिर क्यों ? और उससे भी ज्यादा उसे ये बात अजीब लग रही था की दीदी भी उन्हें पूरी तरह से रोक नहीं रही थी | लगभग ५ मिनट तक दीवार पर टीकाकार लगातार धक्के मरने के बाद आलोक ने अंकिता को नीचे उतारा और फ्लोर पे घोड़ी बना दिया | अंकिता का मुँह बाथरूम के दरवाजे की ओर हो गया था | कोमल अपनी ही जगह पे जड़ हो गई थी| उसके दिमाग ने ये सब हो रहे घटना क्रम को मानने से इंकार कर दिया था | वो यहाँ से बाहर निकलना चाहती थी लेकिन उसके पैर उसका साथ नहीं दे रहे थे 


” चटाक !!” आलोक ने कोमल के नितम्बो पे जोर से मारा | अंकिता के बालो को अपने मुठी में फसकर पीछे से मशीन की चाल से धक्के मारने शुरू कर दिया | अंकिता की मदमस्त आवाज से कोमल ध्यान फिर से बाथरूम की तरफ गया , ये सब देखकर उसके मन में भी कौतहूल मच रहा था, उसके शरीर पर उसका कण्ट्रोल खोता जा रहा था , आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ उसके साथ ऐसा | पूरे शरीर पर जैसे चींटिया रेंग रही थी ,आँखे हलकी हलकी भारी हो रही थी , मन में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी , दीदी और जीजू को इतनी देर इस हालत में देखने के बाद अब उसका मन भी ऐसा ही कुछ करने के लिए मचलने लगा , कोमल समझ गई की अगर अभी के अभी वो रूम से बाहर नहीं गई तो ना जाने वो क्या गड़बड़ कर बैठेगी ,अब वो अपने होश में नहीं थी |

 

आलोक ने २५ – ३० धक्के लगाने के बाद एक धक्का इतनी जोर से मारा  की अंकिता का सर बाथरूम के गेट से जा लगा , गेट पूरा खुल गया और अंकिता फिसलते हुए बाथरूम से थोड़ा बाहर निकल आयी , कोमल की तो काटो तो खून नहीं वाली हालत हो गई , उसकी और दीदी की नजरे एक दूसरे से मिल गई , हालाँकि अभी भी वो अंधेर में ही खड़ी थी लेकिन बाथरूम की लाइट गेट खुलते हलकी हलकी पुरे रूम फ़ैल गई थी जिसकी वजह से उसे लगा की दीदी ने उसे रंगे हाथो पकड़ लिया है, कोमल अपने जगह पे बिना हिले खड़ी रही , अंकिता ने अपने सर पे हाथ लगाकर ब्लीडिंग चेक की फिर बाथरूम का गेट वापस बंद किया और फिर से घोड़ी बन गई, आलोक ने बिना वक़्त गवाए यौन क्रिया फिर से शुरू कर दी | रूम में लगे पॉवरफुल AC का १८ डिग्री का तापमान भी कोमल के माथे पे आये उस पसीने को नहीं रोक पा रहा था, उसे लगा की वो पकड़ी गई थी लेकिन अंदर लाइट ज्यादा था और बाहर अँधेरा तो दीदी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था ये बात वो अब समझी , कोमल ने पूरी रफ़्तार से रूम के बाहर दौड़ लगा दी, अपने रूम में पहुंच कर उसने गेट लॉक किया और धम्म से खुद को बेड पे फेक दिया , बेड ने उसे एक बार उछाला और फिर सब कुछ शांत !! कोमल का दिल अभी भी १२० की रफ़्तार से दौड़ रहा था ,आज तो बाल बाल बची वो , क्या होता अगर दीदी ने उसे ये सब देखते हुए पकड़ लिया होता , क्या सोचती वो अपनी छोटी बहन के बारे में, जिसे वो घर पे मम्मी पापा को एक अच्छे भविष्य का भरोषा देकर लायी है, वो इन सब कामो में लगी है, और जीजू ? उनकी तो नजरो में ही गिर जाती वो ! उनके सामने तो वो अपनी मासूमियत खो देती | ये सब सोच के ही उसके जिस्म के रोये खड़े हो गए थे, अचानक कोमल को अपनी जांघो में पानी पानी जैसा एहसास हुआ, 



अरे ! लगता है ड्रेस, पानी से भीग गया ! लेकिन पानी तो मैंने टच भी नहीं किया फिर कैसे लग गया ? उसने अपने जांघो पे हाथ लगाया, उंगलिया पानी से भीग गई, कोमल ने रूम की लाइट जलाई और नाईट गाउन खोल कर जांघो के बीच हाथ लगाया तो उंगलियों पे कुछ चिपचिपा सा लग गया , उंगलिया नाक पे लगाकर परखने लगी ,  कुछ अलग तरह की महक थी , पानी तो नहीं था , तभी पानी की एक और धार उसकी जांघो से होते हुए पैरो पे जा गिरी , कोमल ने दोनों हाथो से अपनी यौन पंखुडिया फैलाई तो अंदर सब कुछ गीला हो चुका था और सारा पानी वही से आ रहा था | ऐसा इस बीच उसके साथ कई बार हो चुका था लेकिन आज तो कुछ ज्यादा ही हो गया, हाथ धुलने के बाद , कोमल वापस बेड पे लेट गई | दिमागी थकान और और तेज़ दिल की धड़कन ने उसे जल्दी ही नींद की आगोश में डाल दिया |

 कली और फूल 


सुबह के सात बज चुके थे | परदे से छन कर के आ रही धुप कोमल के चहरे पे पड़ रही थी ,घडी की आवाज से कोमल की नींद टूटी, एक आँख खोल के सूरज की रोशनी का जायजा लेते हुए कोमल ने मखमली कम्बल फिर से चेहरे पे डाला और आंखे बंद कर के सोने की कोशिश करने लगी,  लेकिन नींद अब तक कोसो दूर जा चुकी थी और कल रात का वो नजारा कोमल की आँखों के सामने घूमने लगा, उसके आने के बाद कितनी देर तक दीदी और जीजू ने किया होगा ? क्या सारी रात वैसे ही ? नहीं नहीं ! आखिर इंसानी जिस्म की भी सीमाएं होती है ! लेकिन जीजू तो उस वक़्त इंसान तो लग ही नहीं रहे थे और ना ही उनका लिंग इंसानी लग रहा था, भला इतना बड़ा भी होता है क्या किसी का ? क्या सभी मर्दो का इतना ही बड़ा होता है ? इतना मोटा की बेचारी औरत की जान निकल जाये ? और दीदी , भला वो कैसे अंदर ले पा रही थी जीजू को ? क्या एक दिन उसे भी ऐसे ही अपने पति का अंदर लेना पड़ेगा ? नहीं बाबा, उससे तो ना हो पायेगा ये सब, हलके से सर दर्द या चोट लगने पे वो रोने लगती है, उस हालत में तो मर ही जाएगी, सोचकर ही कोमल सिहर उठी | 


कोमल का हाथ अपने आप गाउन के अंदर चला गया , जांघो के बीच हाथ फेरते हुए वो सोचने लगी अभी तो वो बहुत छोटी है , कहा जीजू का वो शैतानी दैत्याकार काला भूरा नाग और कहा मेरा छोटा सा छेद , बाल के हलके हलके रोये भी पूरी तरह से नहीं आये थे अभी तो , अभी तो उसका लड़कपन है , ये सब तो शादी के बाद होता होगा जब पति पत्नी आपस में प्रैक्टिस करते होंगे , अरे यार वो फिर से जीजू और अपने बारे में सोचने लगी , वो भी सुबह आँख खोलते ही, क्यों वो बार अपने जेहन में ये गलत ख्याल लाती है | 


कोमल को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था , और अपने जीजू पर भी , कल रात की जीजू की दीदी के साथ दरिंदगी भरे बर्ताव ने उसके मन गुस्सा भर दिया था ,


“ट्रिंग ट्रिंग !!” रूम की घंटी की आवाज से कोमल हलकी सी चौकी , सुबह सुबह कौन हो सकता है भला , कम्बल एक तरफ करके कोमल ने गाउन के अंदर खुद को अच्छे से लपेटा, कोमल ने गाउन के अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था , एक अंडरवेअर थी जो कल रात सोने से पहले ही निकाल दिया था और ब्रा अभी वो पहनती नहीं थी,एक दो बार उसने अपने साइज की ब्रा पहनने की कोशिश की लेकिन दीदी ने मना कर दिया और वैसे भी ब्रा से उसे अच्छा फील नहीं होता था , साँसे घुटने लगती थी उसकी , अभी उसके उभार इतने नहीं थे की ब्रा की जरुरत पड़े, हालाँकि की उसकी कुछ दोस्त जो की उसके क्लास में ही थी डेली ब्रा पहनती थी , उनके स्तन देखकर कोमल के मन में भी चाहत उठती थी की काश उसके भी इतने बड़े हो जाते तो उसे भी स्त्रीत्व का एहसास होता लेकिन दीदी ने बताया था की हर किसी का शरीर अलग अलग तरीके से विकास करता है, दरवाजे का लॉक खोलकर कोमल ने बाहर झाँका तो सफ़ेद ड्रेस में एक आदमी चाय की ट्रे लेकर खड़ा था |


“गुड मॉर्निंग मैंम !”


“गुड मॉर्निंग ! ” कोमल ने थोड़े असमंजस के साथ जवाब दिया 


“आप चाय लेना पसंद करेगी या कॉफ़ी ? ” चेहरे पर फुल स्माइल लाते हुए उस आदमी ने कोमल से सवाल किया 


“कॉफ़ी , नहीं नहीं चाय !! ” कोमल ने ख़ुशी से उछलते हुए सेलेक्ट किया


कड़क खौलती हुई चाय की महक ने कोमल को तरोताजगी से भर दिया , उसे किसी फाइव स्टार वाले होटल की फीलिंग आ रही थी , अल्ट्रा सॉफ गद्दा , बाहर हरियाली से भरा नजारा , आलीशान कमरा , और बेड पे ही लेटे लेटे सर्व होती चाय, किसी महारानी वाली फीलिंग हो रही थी उसे  ,


“ये लीजिये मैंम ” उस आदमीं ने चाय कोमल की तरफ बढ़ाया


“आपका नाम क्या है अंकल ? ” कोमल ने दोनों हाथो से चाय का कप पकड़ा


“बहादुर !! ” बहादुर ने ट्रे उठाकर बाहर निकलते हुए कहा


“चाय बहुत अच्छी बनी है बहादुर अंकल ! थैंक यू !!”


“खाने पिने में आपका जो भी मन करे, आप उस फ़ोन से 2 नंबर डायल करके मुझे बोल सकती है , आधे घंटे में बना कर आपके सामने हाज़िर कर दूंगा , छोटे साहब और मालकिन ने मुझे स्पेशली आपके खाने पिने की जिम्मेदारी सौपी है !” बहादुर ने स्माइल के साथ दरवाजा बंद कर दिया


कोमल ने बेड के साथ अटैच्ड टेबल पर रक्खा लैंडलाइन टेलीफोन देखा , उस पे हर एक सर्विस के लिए स्पीड डायल लगाया हुआ था, 1 इमरजेंसी , 2 फ़ूड, 3 लॉन्ड्री , 4 ड्राइवर, 5 अंकिता 6 अलोक , 7 , 8 और 9 पे कुछ नहीं लिखा था, कोमल को अभी तक यकीन नहीं हो रहा था की वो ये सब सुख सुविधाएं हासिल कर चुकी है  और उनका उपभोग भी कर रही है | जिस्म से मखमल का कम्बल एक बार फिर से अलग करके कोमल ने बेड छोड़ा और रूम से बाहर आ गई , उसके रूम से बालकनी तक पहुंचने के लिए लगभग ५० कदम चलना पड़ता था , बीच में ही अंकिता का रूम पड़ता था जिसे बालकनी तक पहुंचने के लिए क्रॉस करना पड़ता था | अंकिता के रूम के सामने पहुंचते ही कोमल के कदम ठिठक गए , कल रात का नजारा उसकी आँखों के सामने घूम गया | हलके हाथ से गेट पे धक्का दिया लेकिन गेट अंदर से लॉक था | न जाने दीदी का क्या हाल किया होगा जीजू ने, फिलहाल वो ये सब सोचकर अपना सुबह का मूड ख़राब नहीं करना चाहती थी इसलिए उसके कदम बालकनी की तरफ बढ़ गए , रेशम का गाउन उसके बदन पे चलने की वजह से काफी रगड़ खा रहा था , बिना अंडरवियर के कोमल को थोड़ा अजीब लग रहा था , अपने घर में तो उसकी कभी हिम्मत ही नहीं होती इस तरह से घर में घूमने की | लेकिन दीदी ने ही तो बताया है की अब यही मेरा घर यही और इस घर में कोई बंधन नहीं है वो चाहे तो बिना कपड़ो के भी पूरे घर में घूम सकती है और कोई एक शब्द भी नहीं बोलेगा , हे राम बिना कपड़ो के ? भला कौन घूमना चाहेगा |


बॉलकनी से सुबह का नजारा मन्त्रमुक्ध कर देने वाला था , लॉन में माली घास काटने वाली मशीन से घास की कटाई कर रहा था , बंगले के सबसे कोने में बने मंदिर से सुबह की आरती की आवाज आ रही थी ,  

गुलाब और चमेली के फूलो की मिली जुली खुशबु , प्रकृति का ये नजारा उसके एक में बंद रूम से कही ज्यादा अच्छा लग रहा था , इन सब के बीच चाय की हर एक घूँट उसे अमृत के बराबर लग रही थी | अचानक कंधे पर एक भारी हाथ ने उसका ध्यान खींचा तो बगल में आलोक मात्र एक टॉवल में खड़ा था, हाथ में चाय का कप लिए बाहर की तरफ देख रहे थे | अलोक के इस तरह अचानक आने से कोमल सकपका गई , हाथ से चाय गिरते गिरते बची


“अरे जी.. जीजू आप ? ” कोमल ने खुद को सम्हालते हुए पुछा


“अरे तुम इतना क्यों डर गई ? ” अलोक ने कोमल की घबराहट पकड़ ली थी


“अरे नहीं !! वो आप अचानक पीछे से आ गए तो ” बात सम्हालते हुए कोमल ने अलोक को ऊपर से नीचे तक निहारा |


सुबह की धुप में अलोक की बॉडी और भी ज्यादा कड़क और स्ट्रांग लग रही थी | ६ पैक्स जैसे किसी ने छोटे छोटे रोल बनाकर उनके पेट में लगा रखा हो , बड़े बड़े बाइसेप्स जो की उसकी जांघो से भी ज्यादा मोटे थे और जिनकी ताकत कोमल ने पिछली रात ही देख ली थी , घने और ऊपर की ओर तने काले बाल , टॉवल बेचारी बस किसी तरह बदन से लटकी हुई थी , बिलकुल किसी पत्थर से तराशी हुई मूर्ती लग रहे थे इस वक़्त जीजू , लेकिन कोमल का ध्यान बार बार टॉवल में छिपे उस शैतान के ऊपर ही जा रहा था , क्या अभी भी उसी हालत में होगा वो , या फिर जीजू ने कण्ट्रोल करके छुपा दिया होगा ? उसे क्या पता भला , अधूरा ज्ञान ही तो था उसके पास | लेकिन यही पुरुषत्व ही तो कल रात उसकी दीदी को दर्द दे रहा था | भले ही वो दुनिया के सबसे कूल जीजू हो लेकिन वक़्त आने पर जानवर भी तो बन जाते है , भला वो कैसे भूल सकती है वो सब ?


“कोमल ? कहा खो गई ?” अलोक ने कोमल को झंझोड़ते हुए पुछा


“मैं वो .. कुछ और .. नहीं कुछ नहीं जीजू ” कोमल ने बात छुपाने की नाकाम कोशिश की |


“अरे कल मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट लाया था यार , लेकिन तुम्हारी दीदी ने आज देने के लिए बोला था , इतना भी बड़ा कुछ ख़ास नहीं है, लेकिन तुम्हे पसंद आएगा ” अलोक ने एक बॉक्स कोमल की तरफ बढ़ा दिया |


बॉक्स देखकर कोमल को अपनी आँखों पे यकीन नहीं हो रहा था , आई फ़ोन X ? ये तो दुनिया में सबसे महंगे फ़ोन में से एक है ! इतने महंगे गिफ्ट को जीजू कुछ ख़ास नहीं बोल रहे है ? इसके लिए ही तो उसके दोस्त पागल रहते थे और हमेशा इसको खरीदने के सपने देखते थे | और उसके जीजू उसको ये ऐसे ही गिफ्ट कर दे रहे है | ना चाहते हुए भी कोमल के हाथो ने उस बॉक्स को थाम लिया, अच्छी तरह से बॉक्स को देखने के बाद कोमल ने वापस अलोक के हाथ में पकड़ा दिया, अलोक के चेहरे पे हलकी सही शिकन झलकने लगे , आज की तारिख में शायद ही कोई स्कूल या कॉलेज का लड़का / लड़की हो जो आई फ़ोन लेने से मना कर दे, और यहाँ उनकी साली साहिबा बिना फ़ोन देखे ही लौटा दे रही है , उसे तो लगा की कोमल मारे ख़ुशी के उछलने लगेगी , लेकिन यहाँ तो माजरा ही कुछ और है ? आखिर ऐसा क्या हो गया ?


“क्या हुआ कोमल ? गिफ्ट पसंद नहीं आया ? ” अलोक ने कोमल की आँखों में आंखे डालकर सच पुछा !


“नहीं जीजू , ऐसी बात नहीं है , गिफ्ट तो बहुत अच्छा है और बहुत महंगा भी लेकिन मैं इसे नहीं ले सकती ” कोमल ने किसी तरह दिल पे पत्थर रखकर ये बात बोली |


“अच्छा , कोई बात नहीं , शायद तुम्हे मेरे हाथो से देना ना अच्छा लगा हो ! अंकिता को बोल दूंगा,  वो अपने हाथो से दे देगी ” अलोक बॉक्स के साथ अपने रूम की तरफ चल दिया | अलोक का ये शब्द कोमल के दिल को चीरते हुए निकल गया , कितनी कठोर और निर्दई हो गई है वो , जीजू इतने प्यार से उसके लिए गिफ्ट लाये, और वो भी इतना कीमती, लेकिन उसने अपने जिद पे अड़े रहकर उसे ठुकरा दिया , उनके ही घर में रहकर उनके ही सामने इतना ईगो दिखाना और उस पर भी बेचारे बिना जोर जबरदस्ती किये चले गए, कोमल को अब अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था , बात सिर्फ गिफ्ट की नहीं थी बात थी उसके जीजू उसके लिए कुछ लाये और उसने बिना किसी बात के मना कर दिया, कोमल ने मुड़कर देखा तो दीदी रूम से बाहर निकल रही थी और जीजू उन्हें अपने कंधे का सहारा दे रहे थे , शायद दीदी सही से चल नहीं पा रही थी , लेकिन कल तक तो बिलकुल ठीक ठाक थी अचानक क्या ?? अच्छा तो जो कल जीजू ने दीदी को प्यार किया था ये उसका परिणाम था ,


“यार अंकिता, देखो क्या हाल बना लिया तुमने अपना , जब मैं मना कर रहा था उस तरह से करने के लिए तब तो तुमने थप्पड़ मार कर मुझे करने के लिए उकसाया , अब देखो ये क्या हाल हो गया है ” अलोक ने अंकिता को अच्छे से पकड़े हुए कहा ,


“आप चुप करिये जी ! एक सुहागन अगर अपने रूम से लंगड़ाते हुए ना निकली तो उसका सुहाग किस काम का ” अंकिता के गालो की लाली और आँखों की थकावट बता रही थी की अलोक के प्यार का नशा अभी तक उसके ऊपर चढ़ा हुआ था |


इससे पहले अंकिता कुछ और बोलती अलोक ने उसे कोमल की मौजूदगी का एहसास कराया 


“अरे कोमल, बड़ी जल्दी उठ गई तू तो, रुक मैं भी चाय लेकर आती हु फिर नहाने जाउंगी ! ” अंकिता ने अलोक को अपनी चाय का कप लाने का इशारा किया|


“हाँ  मैं चाय लाता हु और कुछ दर्द की दवाये भी, और हां अब कम से कम 2 सप्ताह तक तुम मुझसे अपना ये हाल करने के लिए बिलकुल भी नहीं बोलोगी !!” अलोक अंकिता को झिड़कते हुए रूम के अंदर से चाय लेने चले गए |


इधर कोमल दोनों की बात सुनकर अचम्भे में पड़ गई, तो क्या दीदी ने खुद जीजू को इतनी बेरहमी दिखाने के लिए बोला था , और वो थप्पड़ , वो थप्पड़ दीदी ने इसलिए मारा था ताकि जीजू और भी दरिंदगी से व्यवहार करे और वो अभी तक जीजू के बारे में इतना भला बुरा सोचे जा रही थी जबकि वो बेचारे तो पूरी तरह से बेक़सूर लग रहे थे , इसी चक्कर तो उसने गिफ्ट को भी ना कर दी , इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है वो ? बेचारे जीजू !! ना जाने उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे | एक साथ ना जाने कितने ख़याल कोमल के दिमाग में नाचने लगे ,


तब तक अंकिता बालकनी में आ गई थी और अलोक , अंकिता को सहारा देते हुए खड़े थे ,


“अंकिता, ये गिफ्ट बॉक्स , मैं कोमल के लिए लाया था, लेकिन कोमल को मेरे हाथो से लेना शायद पसंद नहीं है तो इसलिए तुम दे देना ” कहकर अलोक अंकिता को रेलिंग्स के सहारे छोड़कर खुद नीचे हाल में चले गए |


कोमल का मन हुआ की वो अभी जीजू का हाथ पकड़कर उन्हें जाने से रोक ले और माफ़ी मांग ले लेकिन इस तरह से इतनी जल्दी मान जाने से कही वो ये न सोच ले की मैं सिर्फ इस महंगे गिफ्ट के लालच में कर रही हैं  !


“क्या हुआ कोमल , अलोक से गिफ्ट क्यों नहीं लिया ? ” अंकिता ने चाय की सिप लेते हुए कोमल से पुछा |


“अरे नहीं दीदी , मैंने कुछ और ही सोच लिया था , पागल हु न मैं ” कोमल की आवाज में बेताबी साफ़ झलक रही थी |


संडे होने की वजह से हर कोई लेट से ही उठ रहा था , अंकिता और कोमल बालकनी में खड़े होकर चाय पी रहे थे, आलोक हाल में बैठकर टीवी पर कुछ देख रहा था |  उसके गिफ्ट को कोमल ने इस तरह से ना कह दिया इसका उसे बुरा लगा था | टीवी पे कोई इंग्लिश मूवी आ रही थी 


 रघुवीर और सुमित्रा भी आपने बैडरूम से निकलकर हाल में आ गए | 


“गुड मॉर्निंग मम्मी , मॉर्निंग पापा !! ” अंकिता ने सुमित्रा के पैर छुए 


“मॉर्निंग अंकिता बेटा !! ” सुमित्रा ने अंकिता के गालो पे हलके से किस किया !!


“कितनी खिली खिली लग रही है मेरी बच्ची !! ” रघुवीर ने अंकिता के गालो पे किस करके, कसकर गले लगाया 


रघुवीर ने हलके से अंकिता के नितम्बो पे अपने हाथ का दबाव बनाया , अंकिता ने रघुवीर के हाथ को अपने नितम्बो से हटाकर अपने हाथो में ले लिया , ये इशारा रघुवीर को कोमल की मौजूदगी का दिलाने के लिए अंकिता ने किया | रघुवीर ने अंकिता के होंठो पे अपने होंठो से हलके से किस किया , कोमल, जिसका ध्यान अभी इन दोनों पर ही था मन ही मन सोच रही थी की एक बहु और ससुर को इतना फ्रैंक उसने पहली बार देखा है !! शारीरक छेड़छाड़ और बातचीत में सबकुछ खुलकर ही करते है | अब तक कोमल इन सब छोटी मोटी चीजों की आदि हो गई थी | हालाँकि अंकिता को रघुवीर का होंठो पे किस करना और उस पर अंकिता का नॉर्मली किस को एक्सेप्ट करना अभी भी उसे कंफ्यूज कर रहा था लेकिन अब उसे पहले जितनी परेशानी नहीं होती थी | कोमल वही आलोक के साइड में बैठ कर टीवी देखने लगी |


सुमित्रा ने आलोक को होंठो पे किस किया और आलोक के बढ़ रहे हाथ को अपने हाथ से मार के रोक दिया 


“शैतान !! ” सुमित्रा ने टीवी का रिमोट आलोक से लेते हुए चैनल चेंज किया |


“खुशुबू नहीं उठी अभी तक ? और अयान ? ” सुमित्रा ने अंकिता से पुछा 


अंकिता ने कोई जवाब नहीं दिया जिसका मतलब अभी तक वो दोनों सो ही रहे थे , 


“क्या करू मैं इन नालायको का ? “


“खुशबु !! खुशबु बेटा !! ” सुमित्रा ने वही से खुशबु के कमरे की तरफ आवाज दी 


“आ रही हु मम्मी ” अपने रूम से खुशबु निकल कर हाल में आ गई ! खुशबु को देखकर कोमल की आँखों की पुतलिया चौड़ी हो गई  | खुशबु मात्र एक ब्रा और पैंटी में थी | पिंक कलर की ब्रा जो की मुश्किल से उसके स्तनों को थामे हुए थी, लग रहा था अभी फट के निकल जाएगी और नीचे ब्लू कलर की पैंटी | आधी नींद में अलसायी सी खुसबू जम्हाई लेते हुए सुमित्रा के पास आकर उसकी सर में गोद रख कर लेट गई | पहले तो कोमल को लगा की की खुशबु नींद में गाउन पहनना भूल गई होगी और जब उसे याद आएगा तो शर्म से पानी पानी हो जाएगी | 


“मम्मी यार !! आप इतनी सुबह सुबह उठा देते हो , मेरी नींद भी पूरी नहीं होती ” खुशबु ने बच्चे की तरह सुमित्रा से शिकायत की | 


“महारानी जी सुबह के ८:३० बजने वाले है , धुप निकल आई है और तुम्हे जल्दी लग रहा है कोमल को देखो , इतनी सुबह उठकर हमारे साथ चाय पी रही है !!” खुशबु ने अधखुली आँखों से कोमल की तरफ देखा 


“मॉर्निंग कोमल !!” खुसबू ने कोमल को देखकर बोला |


कोमल जवाब में सिर्फ अपना सर हिला पायी  , वो अभी भी खुशबु के बदन को घूरे जा रही थी | शायद खुशबु को इस बात का एहसास था की आलोक और रघुवीर दोनों यही पर है | 


लेकिन फिर इस हालत में ? ऐसे कपड़ो में ? अपने भाई और पापा के सामने ? सुमित्रा खुशबु के बालो में उंगलिया कर रही थी | अंकिता , कोमल के मन की बात अच्छे से समझ रही थी , उसे अभी ये सब अजीब लग रहा है लेकिन समय के साथ वो सब समझ जाएगी | 


“कोमल जरा मेरी हेल्प करना तो !! ” कोमल को थोड़ा सहज करने के लिए अंकिता ने अपने पास बहाने से बुलाया 


कोमल अंकिता के पास आ गई 


“हाँ दीदी ? क्या हुआ ? “


“क्या हुआ ? इतना क्या सोच रही है ? “


“नहीं वो खुशबु दीदी इस तरह आलोक जीजू और अयान भैया के सामने ? उन कपड़ो में ? “


“तो क्या हुआ ? आलोक भाई है खुशबु के !! ये तो नार्मल बात है !! ” अंकिता अच्छी तरह से जानती थी की ये सब नार्मल सिर्फ इस घर में है लेकिन कोमल के सामने इस चीज को ऐसे रखना चाहती थी ताकि कोमल को ये सब नार्मल लगे , धीरे धीरे कोमल को इस घर के हिसाब से सेट करने के लक्ष्य में ये बहुत जरुरी था, अगर अभी से वो कोमल को ये सब नहीं दिखाएगी या समझाएगी तो कोमल हमेशा अपने पुराने वाले सोच में ही रह जाएगी | उसे कोमल को इस घर के हिसाब से ढालना था और अभी जितना कोमल देख रही थी वो तो कुछ भी नहीं था, आगे चलकर जब उसे इस घर के रहन सहन के बारे में मालुम होगा तब तो परेशान हो जाएगी , सब कुछ गलत मान बैठेगी , इसलिए अभी से थोड़ा थोड़ा उसे इस माहौल से परिचित करवाना जरुरी था |


“लेकिन दीदी , इस तरह अपनी पापा और भाई के सामने बिना कपड़ो के ये तो , मतलब क्या खुशबू दीदी को अजीब नहीं लग रहा ? मेरा मतलब उन्हें शर्म या संकोच नहीं फील हो रहा ? “


“किस बात की शर्म ? किस बात का संकोच ? अपने पिता से ? जिन्होंने उसे जन्म दिया है ? पापा ने तो सबकुछ देखा है खुशबु का !! फिर उनसे क्या छुपाना ? ” कोमल शांत मन से कोमल के हर एक सवाल का जवाब दे रही थी |


“और आलोक जीजू से ? वो तो भाई है ना उनके ? अपने भाई के सामने  ? ” कोमल ने थोड़ा सोच कर बोला 


“वही भाई जो बचपन में बिना कपड़ो को उसके साथ खेल चूका है ? जिसने उसके साथ रात एक बिस्तर में गुजारी है , साथ में नहाये है , एक साथ उसी माँ के स्तन से दूध पिया है ? वो तो पिता से भी ज्यादा करीब है ! ” अंकिता ने जवाब दिया |


कोमल अब सोच में पड़ गई , आखिर बात तो दीदी सही कह रही है आखिर पिता से तो जन्म होता है उससे तो कभी कुछ भी नहीं छुपाया जा सकता और भाई तो दोस्त होता है वो हर एक राज बचपन से जानता है फिर वो राज जिस्म या कपड़ो का ही क्यों न हो !! लेकिन उसने आज तक इस नजरिये से कभी सोचा ही नहीं | उसे तो बस इतना पता है की जब लड़की जवान होने लगे तो उसे किसी भी मर्द के सामने, सीने पे दुपट्टा डालना पड़ता है फिर वो मर्द चाहे पिता या भाई ही क्यों न हो ! लेकिन इस घर में ये पर्दा नहीं है क्योकि उनसे क्या छुपाना जो पहले से ही सब कुछ जानते हो !! वो भले खुशबु को अभी इस हालत में देखकर अलग महसूस कर रही हो लेकिन रघुवीर , आलोक और अयान तो खुशबु को हमेशा से देख रहे है तो उनके लिए ये कोई अजीब बात नहीं होगी | अजीब सिर्फ उसके लिए है क्योकि वो उस घर से आती है जहा औरत को परदे में रखना एक रिवाज है, रिवाज एक पिछड़ी सोच का , गरीबी का , और औरत को हमेशा पीछे रखने का | 


“अच्छा दीदी, ये तो मान लिया की इस घर की लड़किया या औरते घर के मर्दो के सामने किसी तरह का पर्दा नहीं रखती लेकिन क्या टच करना और किस करना ये सब भी सही है !! एक भाई या पिता कैसे अपनी बहन या बेटी को इस हालत में बिना कपड़ो के टच कर सकता है !! “


“बिलकुल कर सकता है, आखिर वो उसकी खुद की बेटी है और अपनी बेटी को टच करने में भला किसी को क्या एतराज हो सकता है बल्कि किसी भी लड़की पर तो पहला हक़ उसके पिता का ही होता है और ठीक वैसे ही भाई का भी , जब तक किसी लड़की की शादी नहीं हो जाती , मर्द के नाम पर उसके पास पिता और भाई ही तो होते है ” अंकिता ने नाप तौल कर अपनी बात रक्खी |


“तो क्या एक लड़की अपने पिता से या भाई से वैसे ही व्यहार कर सकती है जैसे वो अपने पति या बॉयफ्रेंड के साथ करती है ? ” कोमल ने पुछा 


अंकिता जानती थी की अगर इस सवाल का उसने डायरेक्टली जवाब दे दिया तो कोमल कभी भी उसके जवाब को स्वीकार नहीं करेगी ! यहाँ पे अंकिता को सोच समझ कर ही कुछ बोलना था | उसे कोमल को ये नहीं जाहिर होने देना था की वो कोमल को कुछ करने के लिए बोल रही है या आलोक , पापा या खुशबु जो कर रहे है वो पूरी तरह से सही है और उसे भी ऐसे ही करना चाहिए , वो चाहती थी की कोमल खुद अपने मन में इस सवाल का जवाब लाये ताकि उसे लगे की उसने खुद से इस बात को सोचा है, किसी के कहने से नहीं तभी वो इस घर के माहौल में खुद को ढाल पायेगी ||


“मेरी प्यारी बहन , इस बात का कोई डायरेक्ट जवाब नहीं है , मैं भी जब व्याह करके इस घर में लायी गई थी तो मैं भी तुम्हारी तरह अपने उस पुराने घर के कई बंधनो में बंधी थी लेकिन आलोक या मम्मी पापा ने कभी भी मुझे जबरदस्ती कुछ नहीं करने दिया , तब मैं भी इन लोगो के प्यार दुलार , परवरिश और रहन सहन पे ऐसे ही सवाल उठाती थी – क्या ये सही है ? क्या वो गलत है ? क्यों ये लोग इतना खुश रहते है ? क्यों ये बाकी परिवार की तरह समाज के बनाये बंधन में बंध के नहीं रहते ? वगैरह वगैरह !! लेकिन जब मैंने करीब से इस परिवार को देखना शुरू किया , इनके दिल में झाकने के काबिल हुई तब मुझे पता चला की परिवार का प्यार क्या होता है !! जब घर का हर एक सदस्य हर किसी की प्रॉब्लम्स और ख़ुशी शेयर करता है , तुम्हारे हर मुसीबत में तुम्हारा साथ देता है तब महसूस होता है की घर ऐसे ही होना चाहिए ! जहा तुम्हे किसी से कुछ छुपाना ना पड़े , किसी से शर्माना न पड़े , बिना समाज की परवाह किये खुल कर अपनी जिंदगी जी सको शायद इसे ही तो परिवार कहते है !! ” अंकिता ने कोमल की आँखों को पढ़ने की कोशिश की ||


ऐसा नहीं था की कोमल, अंकिता की हर एक बात से सहमत थी | लेकिन अंकिता बताये हुए हर एक लफ्ज में उसे कुछ गलत नहीं लग रहा था | थोड़ी बहुत चीजे अगर वो छोड़ दे तो इस परिवार का माहौल , उसके घर से लाख गुना बेहतर था | सबसे अच्छी चीज उसे आजादी लगी थी , आजादी कुछ भी पहनने की , कुछ भी खाने की | यहाँ के नियम कायदे , रहन सहन , घर वालो का एक दूसरे से व्यवहार बाकी समाज से थोड़ा अलग जरूर था लेकिन शायद गलत नहीं | वो अलग को गलत से मिला दे रही है | जरुरी नहीं की जो अलग हो वो गलत ही हो !! हाँ ये बात जरूर थी की कुछ चीजे वो लाख कोशिश करने पर भी उसका दिल नहीं मानता था जैसे खुशबु और रघुवीर का आपस में इतना खुल कर एक दूसरे को टच करना !! लेकिन इसमें शायद उसकी खुद की सोच ज्यादा जिम्मेदार है , उसके पुराने घर के संस्कार उस पर अभी भी अपना असर दाल के बैठे है , उसे कुछ समय चाहिए , ये सब कुछ पचने के लिए , ये सब कुछ मानने के लिए , एक बाप – बेटी का रिश्ता इतना फ्रैंक हो सकता है अभी उसे एडजस्ट करने के लिए टाइम चाहिए , उसे इस ‘ अलग ‘ को अपने दिमाग में बैठाना होगा और अपने घर के उस बंधन से आजाद होना होगा जो इसे किसी और के बनाये नियम पर चलने के लिए मजबूर करते है | 


अंकिता , कोमल को भरपूर समय दे रही थी सोचने के लिए , वो चाहती थी की कोमल अपने हिसाब से, अपने कम्फर्ट से  से इस घर के साथ जुड़े , वो किसी भी तरह की कोई  जबरदस्ती नहीं करना चाहती थी | 


“आप सही कह रही है दीदी !! शायद मेरे घर के बनाये नियम कानून मुझे अभी तक बाँध कर के रक्खे हुए है जिनसे मैं अब तक आजाद नहीं हो पायी हु ! “


“इसमें तेरी कोई गलती नहीं है पागल ! हर व्यक्ति अपनी परवरिश अपने साथ लेकर चलता है , और मैं तुझे ये नहीं कह रही की तू अभी सब कुछ भूल कर इस घर के हिसाब से रहने लगे ! नहीं ! बल्कि मैं कहूँगी की अगर तुम्हे कुछ नहीं अच्छा लगती  तो तुम्हे बिलकुल करने की जरुरत नहीं है !! यहाँ पर जिसे जो अच्छा लगता है वो वही करता है “


“हाँ ये चीज तो मुझे भी पसंद आयी दीदी , वरना आपको तो पता है घर पे पापा कितना रोक टोक करते थे ” कोमल ने अंकिता को याद दिलाया 


“हाँ और यहाँ पे तुम्हे कभी किसी भी बात पे कोई रोक टोक नहीं करने वाला ” अंकिता ने कोमल के बालो को सहलाते हुए बोला 


“मैं बस सबकी एक्टिविटी देखती हूँ तो मुझसे बिना उस बारे में सोचे रहा नहीं जाता , इसलिए मैं आपसे इतना सवाल करती हु दीदी ” 


“तू मुझसे किसी भी बारे में कभी भी पूछ सकती है , बेझिझक , बल्कि मुझसे ही नहीं किसी से भी पूछ सकती है और मुझे उम्मीद है की हर कोई तुम्हारे हर सवालों का जवाब अच्छे से देगा !!”


“आपको पता है न दीदी , मुझे इस घर के किसी भी कायदे से कोई परेशानी नहीं है लेकिन मैं खुद ये सारे रूल्स तभी मान पाउंगी जब मेरा मन करेगा , कोई और करे मुझे देखने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन मैं खुद तभी कर सकती हु जब मैं कम्फर्टेबले फील करुँगी !! जैसे उस दिन आपने दुपट्टा ना लगाने वाला रूल बताया था , वो मैंने इसलिए मान लिया क्योकि मैं खुद मानना थी !! ” कोमल ने आखिरकार अपना डर अंकिता को बता ही दिया !!


“एक दम सही !! मैं भी बल्कि यही कहूंगी की जब तुम्हे लगे की तुम भी बाकी घर वालो की तरह पूरी आजादी से जीना चाहती हो तभी तुम ये सारे कायदे मानना नहीं तो तुम जैसे मम्मी पापा के साथ रहती थी वैसे ही रहो कोई कुछ भी नहीं कहगा !! अब खुश ?? “


“हाँ , बहुत खुश ” कोमल अंकिता के गले लिपट गई , उसके मन का सारा संशय ख़त्म हो गया था , अब उसे किसी भी बात से डरने की जरुरत नहीं थी | उसे घर की किसी भी रूल को जबरदस्ती फॉलो करने की कोई जरुरत नहीं थी जब तक की उसका मन ना हो 


” मुझे इतनी जल्दी उठा दिया और अयान अभी भी सो रहा है ”  खुशबु ने सुमित्रा से शिकायत की |

तब तक कोमल भी वापस सोफे पे आ गई थी | 


सुमित्रा के अयान को बुलाने से एक बारगी कोमल की लगा की कही अयान भी बिना कपड़ो के ? लेकिन अयान को फुल गाउन में देखकर उसने चैन की सांस ली | अयान भी सुमित्रा के पास आकर कंधे पे सर रखकर बैठ गया, वैसे आलोक के लिंग प्रदर्शन के बाद कोमल के मन अयान के लिंग को देखने की प्रबल इच्छा हो रही थी लेकिन अपनी इस कौतुहलता को मन की किसी कोने में दबाकर रखा था | 


क्या अयान का भी अलोक जीजू जितना बड़ा ही होगा, लेकिन बॉडी के फर्क से उसे लगता तो नहीं था , कहा आलोक जीजू बिलकुल किस बांके मर्द की तरह गठीले जिस्म के मालिक और कहा अयान मासूमियत और पतले शरीर के साथ बच्चो वाली शकल लेकर माँ के साथ लिपटा हुआ मासूम बच्चा , दोनों की कोई तुलना ही नहीं थी या फिर हो सकता समय के साथ एक दिन अयान भी आलोक जीजू के तरह ही !! क्या क्या सोचे जा रही है वो ये सब, और कुछ उसके दिमाग में क्यों नहीं आता उन सब बातो के आलावा !! कोई अगर उसके दिमाग में झाँक ले तो क्या सोचेगा की दिन भर यही सब गन्दी गन्दी बाते सोचती है कोमल ने हलके से सर झटक कर ख्यालो को मन से हटाया और टीवी की तरफ निगाह लगाई |


“अंकिता एक ग्लास पानी देना तो ” आलोक ने अंकिता को आवाज लगाई जो की अंदर रूम में कपड़ो को तह कर रही थी | 


“आलोक कोमल से मांग लो न मैं अभी यहाँ फसी हु ” अंकिता ने अंदर से आवाज दी 


बगल में बैठी कोमल से आलोक को बोलने में थोड़ा संकोच महसूस हो रहा था | अलोक ने खुद ही उठकर पानी लेना बेहतर समझा जैसे ही आलोक ने सोफे छोड़ा एक छोटे से हाथ ने उसे मजबूत हाथो को पकड़ के रोका 


“मेरे सुबह वाली बात से आपको बुरा लगा है न जीजू !!” कोमल ने आलोक का हाथ पकडे हुए ही बोला 


“अरे ऐसे बात नहीं है कोमल, तुम्हे जैसे लग रहा था तुमने वैसे ही किया , शायद मुझसे ही कुछ गलती हो गई होगी जिससे तुम्हे बुरा लगा हो !!” आलोक ने हलकी सी स्माइल के साथ कोमल को जवाब दया 


आलोक की धूर्त भेड़िये जैसी आँखे इस वक़्त कोमल को दुनिया की सबसे प्यारी आँखे लग रही थी | उसे पता था की इन आँखों की के पीछे बहुत सी चालांकिया है , अंदर झूंठ भरा हुआ है, लेकिन वो आज उन सब झूंठ पे यकीन कर लेना चाहती थी | उसे कोई फर्क नहीं पड़ता की वो उसे बहका रही है या फुसला रही है, आज वो सबकुछ मानने के लिए तैयार थी |


“मैं लाती हु ” कोमल ने आलोक को सोफे पे वापस बैठाया और खुद पानी लेने चली गई |


आलोक अभी तक नहीं समझ पा रहा था आखिर ये हुआ क्या ? अभी तो सुबह कोमल ने उससे ऐसे व्यवहार किया जैसे उससे कोई गुनाह हो गया हो, फिर अभी वो इतने अच्छे से कैसे बात कर रही है,  क्या सभी में लड़कियों को समझना इतना मुश्किल है | कोमल ने कांच की ग्लास में पानी आलोक को पकड़ाया | पानी पीने के बाद आलोक ने ध्यान दिया की कोमल ने अपना हाथ उसकी तरफ फैलाया हुआ था 


“क्या ? ” आलोक ने , कोमल को ऐसे खड़े देख कर पूछा 


“मेरा गिफ्ट  ! ” कोमल ने अपने आई फ़ोन X के बारे में पुछा जो की सुबह आलोक उसे दे रहा था और उसने किसी ग़लतफ़हमी में उसे लेने से मना कर दिया था |


“एक ग्लास पानी के लिए ? ” आलोक चौंक कर बोला 


“जीजू मजाक नहीं , लाइए मेरा गिफ्ट !! “


आलोक ने ज्यादा परेशान करना ठीक नहीं समझा और सोफे के साइड में रखे आई फ़ोन के बॉक्स को कोमल के हांथो में रख दिया 


“और मेरा गिफ्ट ? ” आलोक ने बॉक्स अपनी गोद में रक्खा और कोमल के दोनों हांथो को पकड़कर बोला 


“मेरे पास तो कुछ भी नहीं है आपको देने के लिए !! ” कोमल ने अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा वो, वो अच्छी तरह से जानती थी की उसके आलोक जीजू कितने बड़े शैतान है , दीदी को भी वो ऐसे ही परेशान करते है  


“अरे आपके पास ही तो सब कुछ है मेरी साली साहिबा , फिलहाल एक किश से काम चला लूंगा !!” आलोक ने कोमल की आँखों में आंखे ड़ालकर कहा 


किस का नाम सुनते ही कोमल का रंग बदलने लगा , सोफे के रेड कवर से भी ज्यादा लाल हो रहे गाल और आलोक की नजरो से खुद को छुपाते हुए कोमल की जबान हलक में ही फसी हुई थी | 


“अगर पता होता की गिफ्ट के बदले मुझे इतना मुश्किल काम करना पड़ेगा तो शायद मैं इसे ना लेती ” कोमल के हाथ अभी भी आलोक के हाथ में थे और नजरे जमीन में गड़ी हुई |


“लेकिन अब तो ले लिया है ना !! और अब तो मैं वापस भी नहीं लेने वाला सो कीमत तो चुकानी पड़ेगी ” कोमल की असहजता देखकर आलोक के चेहरे पर मुस्कान खेल रही थी |

 कली और फूल 

 

“लेकिन दीदी क्या सोचेंगी ? उन्हें कितना बुरा लगेगा की मैं उनके पीठ पीछे, उनके पति के साथ ये सब कर रही हु !! “



“पहली बात तो अंकिता को बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा क्योकि मैं तुमसे कोई गलत काम करने के लिए नहीं बोल रहा हु | जीजा और साली के बीच मजाक का रिश्ता होता है और साली पे जीजा का आधा हक़ होता है मतलब तुम मेरी आधी घरवाली हो | लेकिन अगर तुम्हे ऐसा लगता है की अंकिता को बुरा लगेगा तो उसे बताने की जरुरत ही क्या है ? वो तो अंदर रूम में है बाकी सब टीवी देखने में मगन है, कोई भी हमारी तरफ नहीं देख रहा है “


कोमल ने अपनी नजर चारो तरफ दौड़ाई , जीजू सही बोल रहे थे इस वक़्त उन दोनों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा था और  अंकिता दीदी भी कमरे में थी |


समाज के सामने किसी चीज के लिए मना करना आसान होता है , दिखावे , तारीफ और डर  की वजह से लोग समाज के सामने वही करते है जो समाज सुनना या देखना चाहता है | परीक्षा तो एकांत में होती है जब कोई देखने वाला न हो, ज्यादातर लोग यही पर ही टूट जाते है , बदल जाते है , अपने असली रूप में आ जाते है , कोमल भी उन लोगो में से ही एक थी , उसकी उम्र के हिसाब से तो वो सबसे पहले नम्बर पे थी | एक चिंगारी जिसे बस कोई भड़काने वाला चाहिए और इस वक़्त ये चिंगारी, आलोक भड़का रहा था |


“अच्छा ठीक है लेकिन मेरी 2 शर्तें हैं  !! ” कोमल ने आलोक की बात मानते हुए कहा


“फरमाइए मैडम !! ” आलोक ने अपना सर झुकाकर कोमल को बोला


“पहले तो दीदी को बिलकुल पता नहीं चलना चाहिए की मैंने आपको किस दी है “


“और दूसरी ? “


“दूसरी की आप मुझे खूब ढेर सारी शॉपिंग कराएँगे और दीदी को ये बोलेंगे की आप अपनी मर्जी से इतना खर्चा कर रहे है ” कोमल ने आलोक की बेसब्री को समझते हुए मौके का फायदा उठाया |


कोमल की बात सुनकर आलोक अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था, आखिर लड़कियों का शॉपिंग से ऐसा क्या रिश्ता है ? और कोमल की चालाकी और सूझबूझ देख कर वो थोड़ा हैरान भी हो रहा था जिस तरह उसने एक मर्द की बेसब्री को समझ कर अपने फायदे में बदला है और अपने हिसाब से उसे इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है ऐसा तो खेली खिलाई लड़किया ही कर पाती है जिसे कई लड़को को घूमने का एक्सपीरियंस हो , और कोमल तो ये बिना किसी एक्सपीरियंस के ही कर रही है | दौलत किसी भी इंसान को खरीद सकती है फिर कोमल तो अभी बच्ची थी और उसका इस तरह से शॉपिंग के लिए जिद करना , आलोक और बाकी घर वालो के इस तरह अमीरी और शानो शौकत दिखाने का ही परिणाम ही था और आलोक के लिए ये एक तरह से अच्छा भी हो रहा था , चाहे लड़का हो या लड़की अगर उसे अथाह पैसे और फ़िज़ूल खर्चे का शौक लग गया तो उसे पैसे देने वाला अपनी मन मर्जी कुछ भी करा सकता था , कोमल ठीक उसी रास्ते पे अपना कदम बढ़ा रही थी | घर वालो के इस तरह से शो ऑफ करने का मकसद भी यही था की कोमल बेहिचक पैसो का इस्तेमाल करे और धीरे धीरे उसे इस तरह की लाइफ स्टाइल का चस्का लग जाए |


कोमल ने भी ये बात अचानक से बोल दी थी लेकिन मन ही मन वो दर भी रही थी | आखिर ये क्या करने जा रही है वो ? अचानक से कैसे उसने इस तरह शॉपिंग की डिमांड कर दी ? आखिर उसे यहाँ पर मौज मस्ती या एन्जॉय करने के लिए उसकी अंकिता दीदी थोड़ी लायी है ? वो तो यहाँ पढ़ाई लिखाई और करियर बनाने के लिए आयी है  फ़िज़ूल के पैसे उड़ाने थोड़ी ! उसने आलोक जीजू से ये बात बोली ही क्यों भला ? क्या सोचेंगे की पढ़ने के बहाने आकर अब मैडम शॉपिंग की डिमांड कर रही है ! सोच रहें होंगे की कितनी लालची है ये ? और दीदी से छुपाना पड़े ऐसा काम कर ही क्यों रही है वो  ? अगर उन्हें पता चल गया की मैं उनके पीठ पीछे ये हरकते कर रही हु तो क्या सोचेंगी वो ?

लेकिन इतनी ज्यादा धन दौलत तो है इस घर में और अगर इसमें से थोड़ा मैंने अपने लिए खर्च कर भी लिया तो भला क्या फर्क पड़ेगा इन लोगो को ? हर कोई तो खुद पर इतने रूपये खर्च करता है , दीदी खुद 30000 की साड़ी , लाखो रुपये की ज्वेलरी , खुशबु दीदी के इतने महंगे महंगे डिज़ाइनर वाले कपडे, और वो इम्पोर्टेड अंडर गारमेंट्स जो वो पहन कर अभी अभी आई है , उस प्लास्टिक स्ट्रिंग वाले ब्रा का दाम उसने टीवी के ऐड में देखा था , 1000 से कम का सेट नहीं आता है उसका , मम्मी के एक लॉरिअल लिपस्टिक का दाम ही 5000 के पार है इतना सब कुछ तो ये लोग खर्चा करते है अपने ऊपर,  मैं तो बस एक शॉपिंग के लिए ही तो बोल रही हु ज्यादा से ज्यादा 15 से 20000 का खर्चा होगा इतना तो अयान भैया और खुशबु दीदी पॉकेट मनी में उड़ा देते होंगे ! और जीजू एक किस ही तो मांग रहे है भला इसमें क्या बुराई है और वैसे भी घर वाले सुबह सुबह तो एक दूसरे को लिप किस करते ही है फिर इसमें क्या बुराई है और अगर दीदी ने पकड़ भी लिया तो मैं बोल दूंगी की जीजू ने खुद ही करने के लिए बोला था मैंने नहीं !! वो फसेंगे मैं नहीं !!


“बस इतनी सी बात ? ” आलोक ने अभी भी कोमल के दोनों हाथ नहीं छोड़े थे !


“ठीक है , आँखे बंद करिये !!”


“अरे !! फिर मैं तुम्हे कैसे देखूंगा ? “


“इसीलिए तो बंद करने के लिए बोल रही हु ! आप देखेंगे तो मैं नहीं कर पाउंगी “


आलोक ने आँख बंद करने में ही भलाई समझी !!


कोमल का दिल धाड़ धाड़ करके अपने पिंजड़े में बज रहा था , सामने एक बांके मर्द को उसके किस के लिए आँखे बंद करके इंतज़ार करते हुए देखकर उसकी बैचेनी बढ़ रही थी | उसने अपना मुँह आलोक के बाए वाले गाल के पास किया और अपने होंठो को गाल पे रख दिया , छोटी छोटी दाढ़ी के बाल उसके उसके होंठो पे चुभ रहे थे | आलोक ने  कोमल का हाथ छोड़कर उसके कमर को पकड़ लिया था , धीरे धीरे हाथ कोमल के नितम्बो पे ला रहा था | आलोक कोमल के बदन पर फिसलते गाउन को नोटिस कर रहा था | शायद कोमल ने गाउन के अंदर कुछ भी नहीं पहना था ,कोमल के झुकने की वजह से गाउन ऊपर निचे हो रहा था और उसके साथ ही आलोक के हाथ भी  ,आलोक ने अपने दोनों हाथ कोमल के नितम्बो पे रख दिया और हलके हलके उसे सहलाने लगा | 30-40 सेकण्ड्स होने के बाद भी कोमल ने आलोक के हाथो को नहीं रोका था जिसका मतलब था की कोमल को आलोक का स्पर्श अपने बदन पे अच्छा लग रहा था 


कोमल ने जल्दी से किस को ख़त्म किया और कमर से आलोक के हाथ को निकल कर गोद में रक्खे बॉक्स को उठाकर भागने लगी | गाल पे कोमल के  होंठ हटते ही आलोक ने आँखे खोल दी , कोमल नजरो से गायब हो चुकी थी |


“ये देखो मेरा नया फ़ोन ” कोमल ने बाकी घर वालो को चिल्लाकर अपने गिफ्ट के बारे में बताया |


“ओह माय गॉड आई फ़ोन X !! ” अयान और खुशबु दोनों ने कोमल के हाथ से बॉक्स छीनकर उसे अनपैक करने लगे


कोमल ने मुड़कर आलोक की तरफ देखा ,आलोक , कोमल को बदला लेने के इशारे वाले अंदाज में ऊँगली दिखा रहा था  और अपने होंठो पे ऊँगली रखकर कोमल को इशारा कर रहा था , कोमल भी जानती थी की आलोक उससे होंठो पे किस करने की उम्मीद कर रहे थे लेकिन उसने उन्हें बेवकूफ बना दिया था | अपने जीजू की इस हालत को देख कर कोमल अपनी हंसी नहीं रोक पा रही थी और उसने अपना ध्यान फ़ोन की तरफ लगा दिया | इधर आलोक ने अपना सर घुमाया तो अंकिता अपने रूम के सामने खड़ी होकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी , अंकिता अपना सर हिलाकर आलोक को पूछ रही थी की कैसे लगा , आलोक ने अपनी एक आँख दबाकर बताया की उसका कोमल से उसका पहला किस बहोत अच्छा गया |

 कली और फूल 

 

” थोड़ा सा लिप आगे करो , हाँ ऐसे ही , और ये क्लिक का बटन  ” खुशबु , कोमल को उसके नए आई फ़ोन से सेल्फी लेना सीखा रही थी | कोमल को बटन क्लिक करने में उतनी प्रॉब्लम नहीं हुई जितनी डक फेस बनाने में हो रही थी | आखिर हर लड़की सेल्फी लेते टाइम मुँह बनाती ही क्यों है ? सिंपल फेस में क्या प्रॉब्लम है ? 



” कई बार करेगी तो सीख जाएगी ” खुशबु ने १, २ पिक क्लिक की और कोमल को फ़ोन पकड़कर अपने से खींचने के लिए बोला 


थोड़ा बहुत ब्लर शॉट लेने के बाद कोमल ने सीख लिया | फ़ोन के चक्कर में उसने अभी तक अपन गाउन भी नहीं चेंज किया था , खुशबु भी अभी तक सिर्फ अंडरवियर और ब्रा में ही घर में घूम रही थी | कोमल के साथ सेल्फी भी वैसे ही ली थी | 


” कोमल को जब से फ़ोन मिला है तब से फोटो ही खींचे जा रही है ” सुमित्रा ने कोमल के सर पे हाथ फेरते हुए कहा 


” हाँ मम्मी , बल्कि खुशबू दीदी ने तो मेरा फेसबुक अकाउंट , इंस्टाग्राम अकाउंट भी बना दिया है , अब मैं जो भी फोटो क्लिक करू उसे वह पे शेयर भी कर सकती हु ! ” कोमल सुमित्रा के बगल में बैठकर सारे डिटेल्स बताने लगी | 


“अच्छा ” 


“और इसमें नेटफ्लिक्स , हॉटस्टार और प्राइम का सब्सक्रिप्शन भी है मैं जो चाहे वो मूवी या सीरियल देख सकती हु ” कोमल की ख़ुशी उसकी बातो में साफ़ झलक रही थी |  


“अच्छा ठीक है , अब फ़ोन बहुत चला लिया , जाओ जल्दी से नहा लो , मैं नाश्ता लगाती हु , आज हम सब कही बाहर चलेंगे ” अंकिता ने कोमल और खुशबु को टॉवल पकड़ाया 


“कहाँ जा रहे है हम भाभी ? ” अयान ने मोबाइल से ध्यान हटाकर अंकिता से पुछा | 


“कैरात वाले फॉर्महॉउस पे , जब से हम लोग आये है कही बाहर नहीं गए , कोमल भी थोड़ा बाहर घूम लेगी और उसके बहाने हम लोग भी ” 


“अरे वाह !! बहुत दिन हो गए वहां गए तो , मैं भी तैयार हो जाता हूँ ” अयान ने भी मोबाइल सोफे पे फेंका और बाथरूम की तरफ जाने लगा | 


“अयान तुम्हारा मसाज बाकी है, पहले वो हो जाए फिर नहाने जाना |” अंकिता ने अयान को याद दिलाया 


“अरे भाभी कल कर लेंगे ना , आज स्किप कर देते है ” अयान ने झुंझलाते हुए कहा 


“बिलकुल नहीं , ऐसे ही रोज तुम बहाना बनाते हो , मम्मी बता रही थी मुझे , जबसे मैं गई हु तुमने गईं के ३-४ बार ही कराया है | ” अंकिता ने अयान को उसके बेडरूम में जाने का इशारा किया | अयान ने भी आगे बहस नहीं की और रूम में चला गया | 


अयान भैया को मालिश की क्या जरुरत है ? वो तो अच्छे खासे हेल्थी हैं , सोचते हुए कोमल अपने बाथरूम की तरफ चल दी | 


” मम्मी वो आयल की शीशी कहा है , मैं अयान की मालिश करके जल्दी से कोमल को भी तैयार कर दूंगी नहीं तो आलोक लेट करने पे गुस्सा होने लगते है , और आप भी पापा को तैयार कर दीजिये , १ घंटे में निकल जाएंगे हम लोग ” अंकिता ने सोफे के तकिये को सही करते हुए और टीवी ऑफ करने के बाद सुमित्रा से बोला 


सुमित्रा ने टीवी के बगल वाले ड्रायर से एक छोटी सी, किसी आयर्वेदिक नाम वाले तेल को निकला और अंकिता के हाथ में पकड़ा दिया | 


” अंकिता बेटा, ये वाला, रघुवीर हिमालय के निचे बैठने वाले  प्रसिद्ध वैद्य से बनवा कर लाये है | ये वही वैद्य है जिनकी दवा वर्धन खानदान में कई पीढ़ियों से चली आ रही है, खासकर अयान के लिए उन्होंने ये बनाया है और विशेष हिदायत दी है की मालिश सिर्फ तुम्हारे हाथो से ही हो, अयान भी मेरी बात उतनी नहीं मानता जितनी तुम्हारी मानता है इसलिए … ” 


” अरे आप बिलकुल फ़िक्र मत करिये , मैंने कहा  ना आपसे मई सब सम्हाल लुंगी और जहां तक अयान की बात रही तो मैं उसे किसी दवा के बिना ही मर्द बना सकती हूँ , ये तेल तो मैं आपकी संतुष्टि के लिए लगाती हूँ, आप बस देखते जाइये , मैं उससे जो कहूँगी वही करेगा , भाभी का तो देवर पे पूरा हक़ होता हैं उसकी शादी से पहले !! ” अंकिता ने सुमित्रा की बात बीच में ही काटते हुए समझाया | 


शादी के बाद ससुराल में आने के बाद सुमित्रा ने ये राज अंकिता को बताया था की वर्धन खानदान के पीढ़ी में जितने भी मर्द हुए है उन सब का पुरुषत्व, शारीरिक बल और अंगो का आकार हमेशा से एक सामान्य मर्द से कही ज्यादा रहा है , खासकर लिंग का आकार | पीढ़ी दर पीढ़ी लिंग के आकार में परिवर्तन एक ख़ास वैद्य के दिए हुए तेल और घर की औरतो के हाथ से की गई विशेष मालिश की वजह से ही बढ़ता रहा है | सुमित्रा की सास ने अपने बेटे रघुवीर की मालिश हमेशा से उसी तेल से की थी और सुमित्रा के आने के बाद उसे तरीका समझया था ,  सुमित्रा ने भी इस राज को अंकिता से बांटा था , अंकिता को दो मर्दो की जिम्मेदारी मिली थी जिसमे आलोक का लिंग तो अपने बेस्ट फॉर्म में पहुंच चुका था, चिंता उसे अयान की थी , लेकिन अयान की अभी उम्र ही कितनी थी , कॉलेज जाना अभी उसने स्टार्ट ही किया था और अभी से अयान की तुलना आलोक से करना ज्यादती थी इसलिए सुमित्रा ने अंकिता को अयान की जिम्मेदारी दी थी ताकि अभी से अयान अपने फुल कैपेसिटी पे आ सके | दरअसल उस तेल को बनाने में इस्तेमाल किये गए कई जंगली तत्वों की वजह से जब शरीर पे रगड़ा जाता था तो हल्की सी पीड़ा और जलन का अनुभव होता था लेकिन वही पीड़ा और जलन मर्द के उस मांस वाले हिस्से को लोहा बना देते थे और धीरे धीरे ऐसा कई बार करने पे वो मर्द जब तक चाहे अपना स्खलन रोक सकता है , लिंग को असामान्य तरीके से टाइट कर सकता है और बहुत ही ज़ोर के झटके मार सकता है | उस तेल का राज जानने के बाद अंकिता को आलोक के ताकत का राज पता चला | लेकिन अयान तो अभी कच्चा था इस खेल में, जैसे ही सुमित्रा उसके लिंग पर तेल डालती थी अयान या तो सुमित्रा को रोक देता था या खुद उठ कर चला जाता था | इसलिए सुमित्रा ने अंकिता को ये जिम्मेदारी दी थी | 


” मम्मी आप अयान की टेंशन मत लीजिये , अयान मालिश करवाएगा और इसी तेल से करवाएगा ये मेरा आपसे वादा है और साल भर के अंदर अंदर मैं आपके बेटे को ऐसा मर्द बनाउंगी की अपनी माँ की भी कोख भर देगा “


” धत्त पागल !! ” सुमित्रा ने अंकिता का कान पकड़ा और उसे अयान के रूम की तरफ धकेल दिया | 


कोमल ने गेट बंद किया , मोबाइल बेड पे फेंका और बाथरूम में शावर खोल दिया | बाथरूम एक उसके हाइट  से भी ज्यादा बड़े अकार का शीशा लगा था | ढेर सारे विंडो थे जिसमे नहाने का हर एक सामान नाम के साथ रखा था | शैम्पू वाले विंडो में १० अलग अलग ब्रांड की शैम्पू की बोतल राखी हुई थी | वैसे ही सोप बार, कंडीशनर , ब्रश, शावर कैप, के अलग अलग सेक्शन रखे हुए थे | कोमल ने पहले शीशे में खुद को निहारा , काफी बदल गई थी वो यहाँ आकर, सुबह से उसने एक बार भी अपने बाल नहीं सवाँरे , एक बार भी खुद को आईने में नहीं देखा जबकि अपने घर पे वो बार बार खुद को निहारा करती थी की कही कुछ ख़राब तो नहीं दिख रहा है 


खुद को आईने में निहारते हुए ही कोमल ने अपना गाउन खोला , इस वक़्त कोमल के बदन कुछ भी नहीं था , संपूर्ण प्राकृतिक अवस्था , बालो के हलके झटके से गर्दन पे गिराया और अपने बदन के हर एक कोने को निहारने लगी , गर्दन से निचे नजर जाते ही खुद कोमल को लाज आने लगी , सीने का उठान जिसे अभी स्तन कहना उचित नहीं नहीं होगा , निम्बू के अकार में बाहर निकले हुए उभार और दाहिने तरफ के हिस्से में छोटे से दाने बराबर निप्पल . कोमल का हाथ अपने आप उस निप्पल पे चला गया और उसके चारो तरफ हलके से दबाव की वजह से और बाहर निकल रहा था , बाए तरफ का उभर भी बिलकुल दायी तरफ की तरह थी था लेकिन निप्पल का आकार थोड़ा अलग था | बाए तरफ का निप्पल अंदर की ओर घुसा हुआ था , दिख रहा था तो सिर्फ निप्पल के चारो तरफ डार्क सर्किल का घेरा लेकिन निप्पल अंदर की तरफ मुदा था | कोमल ने कई बार उसे हाथो से दबाकर चेक किया था की शायद ऐसे ही बाहर निकल जाए लेकिन जैसे वो हमेशा से ही इसी तरह बना था | कमर पे ध्यान दिया जो की अभी बहुत पतली थी | कोमल के फिगर का शेप अंकिता के फिगर से बहुत मिलता था | छाती का हिस्सा बहुत बड़ा और चौड़ा था फिर अचानक से पतली कमर आती थी और फिर कमर के निचे से पतली टाँगे | अंकिता की तरह ही कोमल की भी कमर बहुत पतली थी | फर्क इतना था की अंकिता की छाती अच्छी तरह से भरी हुई थी और कोमल का अभी उठान ही शुरू हुआ था | खुद में खोयी कोमल का ध्यान अचानक से शीशे में चमक रहे रेड कलर के एक डॉट पे गया , कोमल ने पीछे मुद के उस डॉट की तरफ देखा तो   वहा पे एक कैमरा लगा था और ऐसे ४ कैमरे बाथरूम के चारो कोनो पे लगे थे | कोमल ने झट से निचे पड़े गाउन को अपने बदन पे डाला और बाथरूम से बाहर आ गई | कोमल ने ध्यान से देखा तो बेडरूम में भी हर कोने पे कैमरे का सेटअप था जिससे रूम में मौजूद किसी भी व्यक्ति को हर एक एंगल से देखा जा सकता था | भला मेरे पर्सनल कमरे में कैमरा क्यों लगा है ? और बेडरूम में तो फिर भी ठीक है , बाथरूम में कैमरे क्यों लगे है, तो मतलब अभी तक उसने जो कुछ भी किया वो सब रिकॉर्ड हो रहा था | कल तो उसने टॉयलेट भी उसे किया था और बिना कपडे के नहायी थी | हे भगवान् मतलब उसकी सारी नंगी वीडियो इस वक़्त कैमरे में कैद है | दीदी से पूछना सही रहेगा, पता नहीं कैमरे का एक्सेस किस किस को होगा और अभी तक वो अनजाने में उस कैमरे के सामने अपना सब कुछ दिखा रही थी |


अयान अपने रूम में बेड पे बैठा था | अंकिता हाथ में एक छोटी शीशी लिए रूम में आ जाती है |


“चलिए जल्दी कीजिये देवर जी, हमें निकलना भी है , टाइम कम है !! ” अंकिता ने शीशी की बोतल खोलते हुए अयान से कहा |


“भाभी क्या इसके बिना नहीं चल सकते क्या ? इतना भी क्या जरुरी है .. शाम को कर लेंगे ना ” अयान ने रिक्वेस्ट किया


“अरे !! जरुरी क्यों नहीं भला !! वर्धन खानदान की सालो से चली आ रही परंपरा को ऐसे कैसे तोड़ दे !! और वैसे भी तुमने कई सप्ताह की मालिश नहीं करवाई है , मुझे उन सब की भरपाई करनी है मम्मी ने बोला है , चलो जल्दी से पैंट निकालो और सीधे लेट जाओ | ” अंकिता ने तेल दोनों हाथो में अच्छी तरह से मिक्स किया |


अयान ने बेड पे खड़े पैंट और अंडरवेअर निकाल दी और दोनों पैरो को हलके से फैला कर लेट गया | अंकिता अयान के पैरो के बगल में बैठ गई और अयान के मुरझाये हुए, गोर शिश्न को हाथ में लेकर चेक करने लगी |


“लास्ट टाइम जब मैंने देखा था तब से थोड़ा बड़ा लग रहा है लेकिन मोटाई अभी भी उतनी ही है , थोड़ा सा रिवर्स मसाज करना होगा फिर देखो कैसे लोहे के रॉड की तरह मोटा होता है ” अंकिता ने हलके हाथो से अयान के शिश्ना के मांस को पीछे किया और तेल का लेप लगाने लगी | अंकिता का हाथ लगते ही अयान के मुँह से आह निकल गई |


“बस आह वाह ही करोगे या इसको खड़ा भी करोगे, तुम्हे पता है जब तक खड़ा नहीं होगा तब तक मालिश नहीं हो पायेगी ” अंकिता ने अयान के पैंट पे हलकी थपकी दी |


“आपको देख कर अपने आप ही खड़ा हो जाता है भाभी .. आपको तो पता है की हाथ से करते हुए मैं आपको ही याद करता हूँ ” अयान का शिश्ना धीरे धीरे लिंग में बदल रहा था | २ – ३ अंगड़ाई के साथ अपने असली रूप में आ गया | गोरा लेकिन मजबूत , अयान का लिंग चौड़ाई में भले आलोक से काम हो लेकिन लम्बाई में ज्यादा फर्क नहीं था | और लम्बाई तो तेल की मालिश से आ ही जाएगी अंकिता को अच्छे से पता था |


“शैतान !! जरा भी लाज शर्म नहीं है ना , अपनी भाभी को भी नहीं छोड़ेगा ” अंकिता ने प्यार से अयान के तने हुए लिंग पे एक चपत लगाईं

एक और आह के साथ अयान का बदन गर्म होने लगा था |


“भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती है , मम्मी और खुशबु दीदी से भी ज्यादा ” अयान ने अधमुंदी नजरो से अंकिता की तरफ देखा जो मंद मंद मुस्कुराये जा रही थी |


“तारीफ के शुक्रिया देवर जी, और हाँ भाभी माँ सामान होती है और ये सब काम में अपनी भाभी को याद करना मतलब अपनी मम्मी को याद करना तो इस तरह से तुम हो गए मादरचोद ” अंकिता ने किसी तरह अपनी हंसी दबाकर अयान को बताया |


“मैं कुछ भी बनाने के लिए तैयार हु भाभी बस आप एक बार मुझे अपने ऊपर गिराने दो .. मैंने कई बार सोचा है की आप अपने घुटनो के बल बैठी हो और मैं अपने हाथ से आपके फेस पर अपना वीर्य गिरा रहा है .. बस एक बार !!” अयान ने अपनी गर्दन उठा कर अंकिता की आँखों में उम्मीद भरी निगाहो से देखा


“अगर ऐसी बात है तो चलिए मैं आपकी बात मान लेती हूँ लेकिन एक शर्त पर ” अंकिता ने तेल लिंग के सुपाड़ी पे अच्छी तरह से फैलाया


“हर शर्त मंजूर है भाभी ” अयान ने अपने हाथ से अंकिता के स्तनों को चूना चाहा जिसे अंकिता ने अपने हाथो से धीरे से रोक लिया |


“शर्त ये है की मम्मी ने मुझे आपकी मर्दाना ताकत बढ़ानी की जिम्मेदारी दी है .. अभी के हिसाब से आप १२० से १५० सेकंड में ही झड़ जाते है जो की इस घर के मर्दो के एवरेज से बहुत नीचे है , अब चूँकि मई तेल के मालिश से आपके लिंग को और भी ज्यादा मजबूत , लम्बा और चौड़ा बना रही हु तो इसकी वजह से आपका स्टैमिना भी बढ़ जाना चाहिए .. तो अगर आज आप मेरे मालिश करने पे २०० सेकंड तक थम गए तो मैं आपके सामने अपने घुटनो पे बैठ जाउंगी और अप्पको जितना भी वीर्य मेरे चेहरे पे गिरना है , गिरा सकते है ” अंकिता ने सोच समझ कर शर्त अयान के सामने रखा |


अयान अच्छी तरह से जानता था की अंकिता भाभी के हाथो से मालिश कराने पर वो २०० क्या १०० सेकंड भी नहीं थम पायेगा लेकिन कोशिश करने पे क्या हर्ज था उसने हाँ में अपना सर हिलाया और अंकिता को मालिश स्टार्ट करने का इशारा दिया | अंकिता ने तेल को लिंग के सुपडे से लेकर अंडकोष तक अच्छे से फैलाया , और हलके दबाव के साथ मुठी में बांधकर हलके हलके दबाना शुरू कर दिया | अयान ने आँखे मूंदकर अपना ध्यान स्खलित ना होने पर लगा दिया था | अंकिता अयान के बगल में ही लेट गई , अपना चेहरा अयान के चेहरे के बिलकुल पास रख दिया और हाथ की स्पीड थोड़ी बढ़ा दी | अयान ने घडी के टाइमर की तरफ देखा तो अभी १७ सेकंड ही हुए थे और वो अपने चरम सुख पे पहुंचने लगा था | अंकिता ने अयान के दाए वाले अंडकोष को हलके से दबा दिया और हाथ वापस लिंग पर लाकर हस्तमैथुन करने लगी |

अयान का शरीर ऐठने लगा और वो अपनी कमर उठा उठा कर उस यौन सुख का आनंद लेने लगा जिसे अंकिता बिना किसी मेहनत के ही किये जा रही थी | आखिरकार ७० से ८० सेकण्ड्स के अंदर ही अयान के लिंग ने हार मान ली और वीर्य का एक तेज झटका सीधे अयान और अंकिता के चहरे पे आ गिरा | अयान के मुँह से एक तेज़ आह निकली और उसका शरीर शिथिल पड़ गया | अंकिता अयान की हालत देखकर अपनी हसी नहीं रोक पा रही थी |


“आज तो आप और भी जल्दी झड़ गए देवर जी | ऐसे कैसे चलेगा, कल को हमारी देवरानी आएगी तो बेचारी इस ७० – ८० सेकण्ड्स में क्या करेगी | उसे तो कही और ही देखना पड़ेगा ” अंकिता ने अपने चेहरे पे पड़े अयान के वीर्य के छींटे ऊँगली अपने होंठो पे रख के उसका स्वाद लेते हुए बोला |


“अगली बार इससे अच्छा होगा भाभी ” किसी हारे हुए योद्धा की आवाज में अयान ने जवाब दिया |


“कोई बात नहीं , प्रैक्टिस से ही सब कुछ होता है ” अंकिता ने तेल की शीशी उठाई


“वैसे देवर जी आपका टेस्ट बहुत अच्छा है ” जाते जाते अंकिता ने ऊँगली पे लगी वीर्य की एक बूँद को चाटते हुए बोला 


अयान के होंठो पे हंसी खेलने लगी और वो नहाने के लिए बाथरूम चला गया |


अयान के रूम से बाहर निकलते हुए ही अंकिता को कोमल दिख गई |


“क्या हुआ तू अभी तक नहाई नहीं ? “


“दीदी वो बाथरूम में कैमरा लगा हुआ है “


“तो क्या हुआ ” अंकिता ने ऐसे पूछा जैसे ये बहुत ही नार्मल चीज थी


“वो अगर मैं कैमरे के सामने नहाउंगी तो पता नहीं कौन कौन देखेगा |”


“घर के सारे कैमरों का कण्ट्रोल सिर्फ घर के मेंबर्स के पास है , और वो भी सबके फ़ोन में , कोई नहीं देखेगा चलो अब जल्दी से नहाओ इतना लेट हो रहा है यार, और हाँ नहाने के बाद अपना वो सूट न टांक लेना , मैंने नए कपडे लाये है वो पहनना है आज !! “


“ठीक है दीदी ” अनमने मन से कोमल ने सर हिलाया और अपने रूम में चली गई |


वापस बाथरूम में आकर कोमल ने पूरा कपड़ा नहीं उतारा और उस पर ही नहाने लगी | नहाकर उसने एक टॉवल लपेटा और अंकिता के रूम की तरफ चल दी |


“दीदी .. ” कोमल ने अंकिता को रूम में ना देखकर आवाज दी


इतने में आलोक रूम के अंदर आ जाता है और कोमल को टॉवल में खड़े देखकर वही खड़ा हो जाता है |


कोमल थोड़ा सकपका जाती है , इस तरह से बिना कपड़ो के वो अपने जीजू के सामने कभी नहीं आई थी | अचानक से इस तरह खुद को सिर्फ टॉवल में आलोक के सामने पाकर उसकी नज़रे नीचे हो गई ,


“जीजू वो मैं दीदी कहाँ है ? ” कोमल ने अपनी घबराहट छुपाए हुए आलोक से पुछा


“जब सामने तुम्हारी दीदी से भी ज्यादा खूबसूरत सामान खड़ा हो तो भला तुम्हारी दीदी को क्यों देखूंगा यार !! ” आलोक ने अपनी नज़ारे कोमल के भीगे बदन पे अच्छे से गदा रक्खी थी |


आलोक की नजरो का भार कोमल भी महसूस कर रही थी | जैसे उसकी बॉडी को किसी मशीन से स्कैन किया जा रहा हो | आलोक के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर कोमल को मन ही मन अच्छा लग रहा था लेकिन उसके मन डर भी था की कहीं अचानक दीदी ना आ जाए और उसे और आलोक को इस तरह देख कर कुछ गलत न समझ लें !


“जीजू वो दीदी आये तो बता दीजियेगा की कोमल आई थी ” कोमल जाने के लिए मुड़ी


“मैं क्यों बताऊँ भला ? इसमें मेरा क्या फायदा है ? ” आलोक ने बात में थोड़ा गुस्सा लाकर कहा


कोमल समझ गई की जीजू उसके ना रुकने से गुस्सा हो रहे हैं चाहकर भी अपने चहरे पे मुस्कान आने से नहीं रोक पा रही थी कोमल | किसी भी लड़की के लिए मर्द की तड़प बहुत मायने रखती है भले वो ना जताये और इस वक़्त ये तड़प कहीं ना कहीं कोमल आलोक के अंदर महसूस कर रही थी |


“हर चीज में फायदा नहीं देखते जीजू !! ” कोमल ने मुँह गेट की तरफ किये ही जवाब दिया


“इस मतलबी दुनिया में अगर अपना फायदा नहीं देखा तो कुछ हासिल नहीं होता ” आलोक हलके कदमो से कोमल की तरफ बढ़ने लगा |


सिर्फ २ सेकंड लगता उस वक़्त कोमल को गेट खोलने में और बाहर जाने में लेकिन ना जाने किस ताकत ने उस वक़्त उसके कदमो को रोक रक्खा था | वो अच्छी तरह से जानती थी की आलोक जीजू अगर पास आ गए तो या तो वो कुछ गलत कर बैठेंगे या फिर वो खुद कुछ गलत कर देगी लेकिन ये जानते हुए भी वो अपनी जगह पर बिलकुल जड़ खड़ी थी | आलोक  इस वक़्त कोमल के बिलकुल करीब आ चूका था , लम्बाई में कोमल , आलोक के कमर से थोड़ा ऊपर ही आती थी जिससे उसे बार बार अपनी निगाह उठाकर आलोक की आँखों में देखना पड़ रहा था | कुछ तलाश रही थी वो आलोक की निगाहों में , आखिर क्या चाहती हैं ये आँखे उससे | सब कुछ साफ़ क्यों नहीं दीखता उसे , ये लुका छिपी वाला खेल क्यों ? आलोक ने कोमल के बदन पर लिपटे एक मात्रा टॉवल के एक किनारे को पकड़ लिया | अब तक कोमल समझ चुकी थी की अगर उसने अब आलोक को नहीं रोका तो आलोक आज उसे अपने सामने ही नंगा कर देंगे लेकिन उसके मुहं से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था | आखिर क्या हो गया उसे ? क्या उसका भी मन यहीं चाहता है क्या ? नहीं नहीं !! ये गलत है ! जीजू के कदम भले बहक जाएँ लेकिन वो कैसे भूल सकती है की वो उसके जीजू है | उसके दीदी के पति !! कोमल ने अपने दोनों हाथो से टॉवल को कसकर अपने बदन पे चिपका लिया | वो जानती थी की अगर आलोक चाहेंगे तो एक झटका ही काफी है उसके बदन से टॉवल अलग करने के लिए और एक तरह से वो इसके लिए तैयार भी थी हुआ भी वही | आलोक ने टॉवल के किनारे को हल्का झटका दिया और एक साइड से टॉवल ने कोमल का साथ छोड़ दिया | दूसरे साइड से किसी तरह कोमल ने पकडे रखा और टॉवल के खुलते ही झट से वापस लपेट लिया |


“जीजू प्लीज !! ” कोमल की आवाज में विरोध काम और निमंत्रण ज्यादा लग रहा था | आँखे जो की हलकी हलकी मुंद रही थी , कह रही थी जैसे इतना क्या सोच रहे हो , एक बार में ही खींच कर क्यों नहीं खोल देते ! और आलोक ये अच्छे से समझ रहा था | जैसे ही आलोक ने अपना हाथ फिर से बढ़ाया पीछे से अंकिता की आवाज सुनाई दी |


“कोमल !! नहा लिया तूने ? ” एक पल में ही कोमल का नशा हवा में गायब हो गया | उसे लगा की अंकिता दीदी ने उसे ये सब करते हुए देख लिया | जल्दी से उसने टॉवल को सही किया और आलोक के बगल से निकलकर अंकिता  के पास आ गई |


“हाँ दीदी, वो वो .. मैं जीजू से पूछ रही थी की आप कहाँ गए ? आपने बोला था न की आपने कोई ड्रेस रखा है मेरे लिए ” कोमल अपनी घबराहट छिपाने की पूरी कोशिश कर रही थी |


“आलोक आप भी तैयार हो जाइये हम लोग आज फार्म हाउस पे जा रहे है | “


“हिल पॉइंट वाले पे क्या ? ” आलोक ने पुछा


“हाँ !! वैसे भी काफी दिन हो गए हैं , घर से कोई गया नहीं वहां कई दिनों से, घूम भी लेंगे और प्रॉपर्टी का जायजा भी ले लेंगे | ” अंकिता ने आलमारी से एक डेनिम की हॉटपैंट और ब्लैक कलर की ट्यूब टॉप निकलते हुए बोली |


“जो हुकुम मालकिन ” आलोक अंकिता को छेड़ते हुए बोला और रूम से बाहर चला गया |


 

“दीदी ये मेरा ड्रेस हैं ? ” कोमल ने डेनिम की हॉटपैंट हाथ में लेते हुए पुछा







“नहीं तो क्या इतनी छोटी साइज की मैं पहनूंगी क्या ? पागल !! ” अंकिता ने कोमल के बदन से टॉवल हटाया |


“लेकिन ये तो कुछ ज्यादा ही छोटी है और टाइट भी काफी लग रही हैं ! ” कोमल ने हॉटपैंट अपने नंगे जिस्म पे बाहर से नापते हुए चेक किया |


“हॉटपैंट्स ऐसे ही होते है बुद्धू !! बॉडी पे फिट होने के लिए डिज़ाइन होता है , अब ज्यादा ना नुकुर नहीं जल्दी से पहनो  ” अंकिता ने टॉप के हलके से झटका |


“लेकिन दीदी अंडरवियर तो लायी नहीं मैं ! “


“इसपे नो अंडरवियर ! पहले से काफी टाइट होती है , डायरेक्ट होता है ये | “


“लेकिन बिना अंडरवियर के तो अजीब लगेगा ना , उस पर से ये रफ़ जीन्स है , रगड़ होगा बहुत ” कोमल ने मुहं बनाते हुए शिकायत की |


“अब जो कपड़ा जैसे पहना जाता है वैसे ही तो पहनेंगे न | मैडम के लिए फैशन थोड़ी बदल जायेगा | “


कोमल जानती थी की दीदी से बहस में वो नहीं जीत पायेगी , थक हार कर उसने हॉटपैंट में पैर डाला और किसी तरह खींच खींच कर उसे ऊपर किया | कोमल की पतली कमर होने के बावजूद , पैंट काफी टाइट हो रही थी , आखिरकार किसी तरह कोमल ने पैंट ऊपर चढ़कर उसका बटन बंद कर लिया और बगल में लगे आदम कद आईने में खुद को निहारने लगी | पैंट उसके बदन पे बहुत टाइट फिट हो रही थी जिसकी वजह से उसके नितम्ब जो की अभी बहुत भारी नहीं थे , भरे भरे और बाहर निकले नजर आ रहे थे | और सामने की तरह चैन वाले हिस्से पे जीन्स उसके योनि से बिलकुल सटी हुई थी जो की चलने पर उसके योनि से बार बार टच हो रही थी जो की कोमल को एक अजीब एहसास दे रहा था | घर में तो बिना अंडरवियर के घूमना ठीक था लेकिन बाहर इस तरह , सबके साथ तैयार होकर बिना अंडरवियर के जाना उसे अभी थोड़ा अजीब लग रहा था | काले रंग की ट्यूब टॉप जो की ब्लू कलर की डेनिम हॉटपैंट के कॉम्बिनेशन में जाँच रही थी , को कोमल ने पहना कर फिर से आईने में चेक किया तो उसे टॉप सच में अच्छा लगा | उसके गोर रंग पे टॉप बहुत ही जच रहा था |


“ये तो सच में बहुत अच्छा लग रहा हैं दीदी !!”


“जब तक कपड़ा पहनते नहीं हैं तब तक बेकार ही लगता है , बाल ऐसे ही खुले रहने दो , सूखने पे कोंब कर दूंगी मैं  ” अंकिता ने कोमल के बालो में उंगलिया फेरी |


“मैं खुशबु दीदी को अपनी ड्रेस दिखा कर आती हूँ ” कोमल दौड़ती हुई बाहर निकल जाती हैं | 


अंकिता ने खुद के लिए एक लाइट येलो कलर की साड़ी निकाली और आईने में खुद के ऊपर रख कर चेक करने लगी |


खुशबु ने एक स्लीवलेस टॉप और एक पेन्सिल जीन्स पहन रखी थी | जीन्स में उसका फिगर और भी ज्यादा बाहर निकल कर आ रहा था | सुमित्रा ने एक ब्लू कलर की साड़ी और उससे मैचिंग इयररिंग्स चुडिया और पर्स ले रखा था , रघुवीर हमेशा की तरह फिट शर्ट और आर्मी ट्रॉउज़र में थे जो की उनके फिट बॉडी पे सूट कर रहा था और उस पर से ब्लैक ग्लासेज उनके चेहरे पे एक एंग्री लुक ला रहा था | अयान ने एक वाइट कलर की टी शर्ट और शार्ट जीन्स पहन रक्खी थी जो की उसे एक फंकी लुक दे रहा था और साथ में गले में लटका प्रोफेशनल कैमरा जो की केनन का DSLR लग रहा था उसे और भी ज्यादा स्मार्ट बना रहा था | कोमल को लग रहा था की सिर्फ वो ही अपने ड्रेस में सबसे बेस्ट लग रही थी लेकिन यहाँ बाहर हाल में हर कोई बॉलीवुड स्टार बना घूम रहा था |


“अरे वाह !! डेनिम में तो मस्त लग रही है कोमल तू तो !! ” खुशबु ने कोमल को देखकर कॉम्पलिमेंट दिया |


“लेकिन आप तो मुझसे से भी ज्यादा अच्छे लग रही है दीदी ” कोमल ने खुशबु के टॉप को टच करते हुए बोला


“चल सेल्फी लेते हैं ! फ़ोन दो अपना ” कोमल ने अपने बैक पॉकेट से फ़ोन निकला और खुशबु को दे दिया |


खुशबु ने ढेर सारी पिक्स क्लिक की , कुछ डक फेस वाली, कुछ में कोमल उसके गाल पे किश कर रही है कुछ में वो कोमल के गाल पे | अयान ने मंकी फेस बनाकर सेल्फी ली , सुमित्रा और रघुवीर ने साथ में | अभी सब इन सब में बिजी थे ही की ऊपर से निचे आ रहे अंकिता और आलोक ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा | वाइट कलर की स्लिम फिट शर्ट में आलोक सचमुच में किसी हीरो की तरह लग रहे थे और अंकिता तो पीली साड़ी में कहर ही ढा रही थी | दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ रक्खा था और साथ में सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे | दोनों को देखकर खुशबु ने एक जोर की सीटी मारी  , सुमित्रा और रघुवीर गर्व के साथ अपने बेटे और बहु की तरफ देख रहे थे | वर्धन खानदान ने एक ग्रुप पिक क्लिक की और कार में बैठ गए |


ड्राइविंग सीट पे आलोक बैठ गया , ड्राइवर के साइड वाली सीट पे अंकिता बैठ ही रही थी की सुमित्रा ने अंकिता को रोक दिया


“आज तुम्हारे पापा तुम्हारे साथ बैठना चाहते हैं , तुम खुशबु और कोमल के साथ पीछे बैठ जाओ , मैं आगे आलोक के साथ बैठ जाती हु | “


“जी मम्मी !! ” अंकिता ने आगे वाला गेट छोड़ कर पीछे वाला गेट खोला और राइट साइड में विंडो के पास वाली सीट पे बैठ गई | अंकिता के बाद रघुवीर , रघुवीर के बाद खुशबु और फिर कोमल लेफ्ट साइड की विंडो वाली सीट पे बैठ गई | अयान हमेशा की तरह गाडी की सबसे पीछे वाली सीट पर | गाड़ी स्टार्ट हो चुकी थी , आलोक ने पेडल पे प्रेशर बढ़ाया और गाडी मूव करने लगी |


बीच में सीट ३ की ही थी लेकिन ४ लोग के बैठने से थोड़ा टाइट हो रहा था |


“कोमल बेटा तुम्हे प्रॉब्लम तो नहीं हो रही हैं न ? ” रघुवीर ने जगह थोड़ा एडजस्ट करते हुए पुछा


“नहीं पापा मैं आराम से बैठी हु ” कोमल ने थोड़ी प्रॉब्लम के बावजूद झूठ बोला |

 कली और फूल 

 

“खुशबु तुम थोड़ा और पास आ जाओ कोमल को थोड़ी जगह मिल जाएगी ” रघुवीर ने खुशबु को थोड़ा अपनी तरफ खींचा, उसकी वजह से रघुवीर ने अंकिता को और दबा दिया लेकिन रघुवीर के इरादे अंकिता और खुशबु दोनों अच्छी तरह से समझ रहे थे इसलिए अंकिता ने कुछ नहीं बोला | गाडी के धक्के मुक्के से थोड़ देर में हर कोई अपनी जगह पे फिक्स हो गया था | कोमल विंडो से बाहर का नजारा देख रही थी, बहुत ही अच्छी रोड साइड सीनरी थी , किनारे लगे हुए पेड़ और उनसे गिरते फूल उसे रोड नहीं किसी गार्डन की तरह लग रहे थे | रोड भी बिलकुल साफ़ | कुछ ही देर में हरियाली की जगह बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स और कंक्रीट के फुटपाथ ने ले लिया | सुमित्रा ने पीछे की तरफ देखा तो रघुवीर तीनो लड़कियों के बीच बड़ी शान से बैठे हुए थे जैसे कोई राजा अपनी रानियों के साथ दरबार में बैठा हो |



“आज तो जरूर तेरे पापा न सुबह उठते ही मेरा मुँह देखा होगा जो इनका दिन इतना लकी जा रहा है , दो दो जवान लड़कियों के बीच बैठ कर कैसे मजे ले रहे है देख आलोक ” सुमित्रा ने रघुवीर अंकिता और खुशबु की तरफ देख कर रघुवीर को छेड़ा |


“क्यों मम्मी आप भी तो इतने हैंडसम लड़के के साथ बगल में बैठी हुई है , हमने तो कुछ नहीं कहा फिर आपको क्यों जलन हो रही हैं ? ” अंकिता ने रघुवीर के हाथ को पकड़ते हुए और खुशबु को आँख मारते हुए बोली


कोमल भी बाहर का नज़ारे से ध्यान हटाकर इनकी नोकझोक देखने लगी | खुशबु ने अपना सर , रघुवीर के कंधो पर रखा था और अंकिता ने अपना हाथ रघुवीर की जांघो पर | रघुवीर ने अपना एक हाथ अंकिता के कंधे पर और दूसरा हाथ खुशबु के कंधे पर रखा था |


“अरे पापा, आपसे एक बात कहनी थी | ” खुशबु ने रघुवीर के हाथ पे अपना हाथ रखते हुए बोला , रघुवीर समझ गया की खुशबु को जरूर कोई काम है इसलिए इतना प्यार से बोल रही हैं , महीने में ३ से ४ बार ऐसे ही वो अपने पाप रघुवीर से पॉकेट मनी लेती थी |


“अच्छा जी , लगता है मैडम की पॉकेट मनी ख़त्म हो गई है ” रघुवीर ने मुस्कुराते हुए सुमित्रा की तरफ देखा


“क्या पापा ! आपको लगता है की मैं सिर्फ पॉकेट मनी के लिए ही आपसे पूछती हूँ क्या ? ” खुशबु ने झूठ मूठ की नाराजगी जताते हुए कहा |


“अरे नहीं बाबा !! मैंने ऐसा कब कहा ? अच्छा अगर पैसे नहीं चाहिए तब क्या ” रघुवीर ने खुशबु के सर को सहालते हुए पुछा |


“वो मुझे नई अंडर गारमेंट्स चाहिए थे तो , पुराने काफी टाइट हो रहे है तो उसके लिए शॉपिंग करनी थी तो उसी के लिए …” खुशबु ने जान बूझकर बात बीच में ही छोड़ दी |


“उसी के लिए क्या ? ” बात समझते हुए भी रघुवीर ने खुशबु से पुछा |


“थोड़ा पॉकेट मनी और मिल जाती तो.. ” खुशबु ने शर्म से आँखे बंद कर ली और डांट खाने का इंतज़ार करने लगी |


“अरे अभी १० दिन पहले ही तूने मुझसे ब्रा और अंडर वियर लेने के नाम पर ४५००० रुपये लिए थे , क्या हुआ उसका ? ” सुमित्रा ने आँखे फैलाकर खुशबु की तरफ देखा , उसके साथ गाडी में बैठा हर एक शक्श खुशबु की तरफ देखने लगा


“अरे मम्मी वो सब छोटे हो गए ना, मैंने बताया तो अभी अभी ” खुशबु ने आँखे चुराई


“छोटे हो गए ? १० दिन में छोटे हो गए ? इतनी तेज़ी से बढ़ रहे है क्या मेरी बेटी के स्तन ? ” रघुवीर ने मजाक मजाक में सुमित्रा की तरफ देखा और हर कोई हसने लगा |


“अपने से तो नहीं बढ़ सकते जरूर इसमें किसी का हाथ हैं !! ” अंकिता भी अब खुशबु को चिढ़ाने लगी


“यार भाभी आप भी इन लोगो का साथ दे रहे हो !! ” अंकिता ने रघुवीर के पीछे सर छुपा लिया |


“क्या साइज है मेरी बेटी का ” रघुवीर ने खुशबु के स्तनों की तरफ झांकते हुए पुछा |


“लो इन्हे अपनी ही बेटी की साइज के बारे में नहीं पता ! ” सुमित्रा ने सर पे हाथ रखते हुए बोला


“हाँ तो अभी देख लीजिये ना पापा ” अंकिता ने रघुवीर को खुशबु के टॉप का साइज देखने का इशारा किया



रघुवीर ने खुशबु के टॉप के साइज को देखने के लिए हाथ बढ़ाया तो खुशबु ने झुककर अपना शरीर निचे कर लिया, खुशबु ने अंदर ब्रा नहीं पहन रक्खी थी रघुवीर ने कोमल को इशारा किया किया की वो खुशबु को कसकर पकड़ ले जिससे रघुवीर खुशबु के टॉप को देख पाए , पहले तो कोमल हिचकिचाई , देखना अलग बात थी और शामिल होना अलग लेकिन उस वक़्त हंसी ख़ुशी का माहौल देख कर कोमल ने भी पार्ट लेना सही समझा , कोमल ने खुशबु को पकड़ कर कार की सीट से सटाने की कोशिश की , वैसे तो खुशबु कोमल से कही ज्यादा स्ट्रांग और बड़ी थी लेकिन उस वक़्त खुशबु ने बहुत ज्यादा विरोध नहीं किया | जैसे ही खुशबु का शरीर कार की सीट से लगकर सीधा हुआ , रघुवीर ने एक झटके में खुशबु का टॉप ऊपर खींच दिया , खुशबु के बड़े बड़े स्तन बाहर लटकने लगे, कोमल का मुँह खुला रह गया उसे लगा उससे ये क्या हो गया , इधर रघुवीर ने टॉप को किसी ट्रॉफी की तरह नचाया, उसका साइज का लेबल देखा और कार के पिछले हिस्से में अयान के पास फेक दिया , खुशबु ने अपने दोनों हाथो से स्तन को ढँक लिया | जैसे जैसे कार हिचकोले खा रही थी वैसे वैसे खुशबु के स्तन में भी हिचकोले लग रहे थे |

कोमल को छोड़कर हर किसी का हंस हंस कर बुरा हाल हो रहा था | कोमल थोड़ी चौंक गई थी क्योकि ये सब अचानक हुआ और उसे पता नहीं थी की रघुवीर , खुशबु के साथ ऐसा भी कर सकते है | हालाँकि अब वो किसी भी चीज के लिए अपने मन को तैयार कर चुकी थी लेकिन हर बार कुछ न कुछ ऐसा हो जाता था जिससे वो तुरंत नहीं एक्सेप्ट कर पाती थी |


“हमारी बेटी पर तो मदमस्त जवानी छाई हुई है सुमित्रा .. 36 C हाँ ? ” खुशबु मारे शर्म के लाल हो गई थी और सुमित्रा , अंकिता , अयान और आलोक अभी भी अपनी हंसी दबा रहे थे |


“पापा ये चीटिंग हैं, आपने सिर्फ साइज देखने के लिए बोला था अपने तो टॉप ही निकल दिया ” कोमल ने अभी भी अपने एक हाथ से स्तनों को छुपा रखा थे और एक हाथ से अयान से टॉप छीनने की कोशिश कर रही थी जो की अयान गोल गोल नचा रहा था |


“वही तो देख रहा हूँ !! इनके लिए तो फिर ४५ हजार भी बहुत कम हैं , आज हमारी बेटी ने दिल खुश कर दिया , इसलिए ये पॉकेट मनी मंजूर हुई ” रघुवीर ने आलोक को कार के फ्रंट डैशबोर्ड से कॅश निकलने के लिए बोला , आलोक ने ड्रायर में से एक २००० के नोटों की एक गड्डी निकाली और पीछे रघुवीर की तरफ उछाल दी , कोमल का ध्यान नोटों से भरे ड्रायर की तरफ था, पूरा ड्रायर नोट की गद्दियों से भरा था , भला इतना पैसा कौन ऐसे ही गाडी में रखता है |


खुशबु ने अब तक टॉप पहन लिया था | रघुवीर गड्डी से ५००००  गिनकर निकालने लगे |


“पापा पूरा दे दीजिये ना , गिनने की क्या जरुरत हैं ? ” खुशबु लालच भरी निगाहों से नोटों की तरफ देख रहीं थी |


“इसकी आदत बिगड़ती जा रही है पापा , लालची बन्दर ” आगे से आलोक ने खुशबु को चिढ़ाया |


“तू आगे रोड पे ध्यान दे ना , गधा ड्राइवर ” खुशबु ने आलोक को वापस चिढ़ाया |


“क्यों भाई अभी तो ४५००० बोला अपने अभी पुरे २००००० ? इतना फर्क कैसे ? ” रघुवीर ने नोटों की गड्डी हवा में लहराते हुए पूंछा


“जरुरत तो पड़ती रहती हैं पापा , और आपको गिनने में भी तो मेहनत लगेगी ना ” खुशबु अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी पुरे पैसे लेने की |


“जी नहीं मैं गिन लूंगा , थैंक यू ” रघुवीर ने गड्डी की रबर निकाल दी और एक एक कर के नोट गिनने लगे |


“अच्छा ठीक हैं आप अपने हाथ से ही दे दीजिये पापा ” खुशबु ने आखिरी दांव मारा


“मैं कुछ समझा नहीं ? ” रघुवीर ने ना समझने के बाद पुछा


खुशबू ने अपने टॉप को हलके से निचे की तरफ तान दिया जिससे उसके स्तन के ऊपरी भाग अच्छे से दिखने लगे , रघुवीर खुशबु का इशारा समझ गया


“अच्छा ठीक है बाबा , ये लो ” रघुवीर ने खुशबु के टॉप को हाथ से सामने की तरफ खींचा और दूसरे हाथ जिसमे की गड्डी थी , टॉप के अंदर डाल दिया और पूरा नोट अंदर ही छोड़ के खुशबु के एक स्तन को इतने जोर से दबाया की की खुशबु की चीख निकल गई | लेकिन पैसे मिलने की ख़ुशी खुशबु के चेहरे पर तब भी टिकी रही | खुशबु का पूरा टॉप नोटों से भर गया थे जिसे वो अपने हाथ से निकालने लगी कुछ नोट निचे भी गिर गए थे |


“हाँ ऐसे ही आप बच्चो की आदत बिगाड़ के रखिये . बेफिज़ूल खर्चे की आदत डाल दीजिये इनकी ” सुमित्रा ने रघुवीर की तरफ देख कर स्माइल के साथ कहा |


“इन्ही का तो हैं सब कुछ सुमित्रा , एन्जॉय करने दो ” रघुवीर ने जवाब दिया और अंकिता की तरफ देख कर पुछा “तुम्हे भी पैसो की जरुरत हैं बेटे ? “


“नहीं पापा, अभी तो नहीं हैं जब होंगे तो मैं खुद ही आपसे मांग लूंगी ” रघुवीर ने अंकिता के गालो पे हलके से हाथ फिराया | कोमल तो सिर्फ पैसे देख कर ही दंग थी | भला २ लाख कौन पॉकेट मनी देता है और वो भी महीने में ३ – ४ बार | हाँ , टॉप उतारने और रघुवीर को खुशबु के स्तन दबाने जैसे मामले छोटे लगने लगे थे कोमल को , और पैसे वाला मामला बड़ा लगने लगा था |


सफर १ घंटे का हो चूका थे , आलोक को छोड़कर बाकी सभी बोर हो रहे थे | अयान और खुशबु दोनों मोबाइल में लगे थे , सुमित्रा कोई पत्रिका पढ़ रही थी और अंकिता विंडो से बाहर की तरफ देख रही थी और कोमल बाकी सबको नोटिस कर रही थी |


“क्यों न हम सब अंत्याक्षरी खेले ? बड़ा बोरिंग – बोरिंग हो रहा है , अभी तो १ घंटा और लगेगा न जीजू ” कोमल ने ख़ामोशी तोड़ी और आलोक से सवाल किया


“गुड आईडिया !! अभी तो टाइम है पहुंचने में !! ” खुशबु ने मोबाइल एक तरफ रखते हुए बोला “ठीक हैं २ टीम रहेगी, एक में मैं , पापा और अयान , दूसरी टीम में कोमल मम्मी और खुशबु !! ” अंकिता ने भी इंटरेस्ट लेते हुए बोला


“ठीक हैं ” कोमल ने जवाब दिया |


“लेकिन पहले ये तय कर लो की जितने वाले को क्या मिलेगा और हारने वाले को क्या मिलेगा | ” आलोक ने गाडी को 4th  गियर में डालते हुए कहा |


“हाँ सही कहा जीजू ने ! तो जो भी टीम हारेगी उसे वो करना पड़ेगा जो जितने वाली टीम कहेगी | ” कोमल ने नियम बताया


“सोच लो फिर बाद में पलट न जाना ” अंकिता ने कोमल से कन्फर्म होने के लिए बोला |


“हाँ जब हारेंगे तब ना ” कोमल ने अंकिता को जवाब दिया


“अच्छा जी इतना गुरूर !! ” अंकिता ने हसते हुए बोला


“बैठे बैठे क्या करे करना है कुछ काम, शुरू करो अंत्याक्षरी लेकर प्रभु का नाम , म से गाइये ” कोमल ने अंकिता की टीम की तरफ बोला |


“मिले हो तुम हमको बड़े नसीबो से , चुराया हैं मैंने किस्मत की लकीरो से , स से “


धीरे धीरे सारे गानो की लिस्टिंग ख़त्म होने लगी , और अंकिता की टीम , कोमल की टीम पर भारी पड़ने लगी | हालाँकि कोमल ने पूरी कोशिश की और अच्छी खासी टक्कर भी दी लेकिन वो अंकिता की चाल नहीं समझ पायी , दरअसल अंकिता ने पीछे बैठे अयान को मोबाइल से सांग सर्च करने के लिए पहले ही बोल दिया था , अयान मोबाइल से सर्च करके सांग अंकिता को बता रहा था और अंकिता वही सांग गाये जा रही थी जिसकी वजह से उसने कोमल को आसानी से फसा लिया


“मम्मी, दीदी आप लोग बताइये ना कोई सांग ड़ से ” कोमल ने सुमित्रा से हेल्प मांगी , दोनों ने ही ना में सर हिलाकर जवाब दिया | आखिरकार कोमल ने हार मान ली और अंकिता को इशारा किया गाने का


“डिंग दांग डिंग १ २ ३ ४ ५ ६ ७..” अंकिता अयान और रघुवीर तीनो एक साथ गा रहे थे , गाने से ज्यादा ख़ुशी तो जीत की थी |


कोमल ने मुँह फुलाकर विंडो की तरफ कर लिया |


“ऐसे नहीं चलेगा मैडम , अपना ही बनाया नियम तो मानना ही पड़ेगा | ” अंकिता और अयान ने कोमल और खुशबु को चिढ़ाया |


 

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