कली और फूल – दो बहनों की दास्ताँ
मैं अभी कहानी लेखन में बहुत ही नई कलम हु। मैंने इसके पहले कभी कोई कहानी या कविता नही लिखी.. ये मेरी प्रथम कहानी होगी इस मंच पर.. इससे पहले की मैं थ्रेड स्टार्ट करू कुछ बाते है जो मैं अपने पाठक-गण को बताना चाहता हु..
Note : इस कहानी के सभी पात्र 18 साल से ऊपर के है
1. मैं , ये कहानी किसी तरह का अवार्ड या प्रशंशा पाने के लिए नही लिख रहा अतः कहानी के अपडेट, साइज और समय मेरे कम्फर्ट के हिसाब से होगा।
2. मेरे निजी जीवन और परिवार के कार्य भार के चलते मैं कहानी सिर्फ सप्ताह के अंत मे और 2 या 3 घंटे ही लिखता हूं तो हो सकता है कि अप्डेट्स आपको देर में मिले।
3. ये कहानी मुख्यतः INCEST Relationship (पारिवारिक संभोग जैसे भाई-बहन, पिता-पुत्री, माँ-बेटे, माँ-बेटी) पर बेस्ड होगी इसलिए अगर आपको ऐसी कहानी नही पसंद है तो ये स्टोरी नही पढ़े क्योकि ये कहानी इन्ही सब के इर्द गिर्द घूमेगी।
4. इस कहानी में किशोर (Teen Age) और जवान उम्र के कई किरदार हो सकते है, अगर young erotica नही पसंद तो ये कहानी ना पढ़े ।
5. इस कहानी के सभी पात्र 18 साल से ऊपर के है । Forum के नियम के हिसाब से मैं 18 से कम उम्र नही लिख सकता. तो इस बात का ध्यान रखे और मुझसे किसी किरदार विशेष की असली उम्र बताने का आग्रह ना करे। आप अपने मन मे किरदार की उम्र घटा-बढ़ा सकते है
6. इस कहानी में इन्सेस्ट + अडल्ट्री है | मतलब परिवार के अंदर भी सम्भोग हो सकता है और परिवार के बाहर भी जानने या ना जानने वाले लोगो के साथ भी सेक्स हो सकता है | सिर्फ परिवार के अंदर ही सेक्स चाहने वालो के लिए कहानी थोड़ा निराशाजनक हो सकती है |
7. सबसे महत्वपूर्ण आपका सुझाव और आपकी आलोचना है , जिससे कि मैं अपनी कहानी को सही दिशा मैं ले जा रहा हूं कि नहीं यह मुझे पता चलता रहेगा, कहानी अगर अच्छी लगे तो, आपके प्यार, वोट्स, रेप्स, आलोचना और सुझाव का इंतजार रहेगा ।
सारी तस्वीरे मैंने बस एक मोटा मोटा आकृति बनाने के लिए डाला है । ये पूरी तरह से कैरेक्टर्स को पेश नही करते है । इसलिए अगर आप किसी करैक्टर को अलग तरीके से देखते है या कल्पना करते है तो आप अपनी जगह सही है । हर इंसान का अनुभव और सोच अलग अलग होता है । इसलिए ये मत सोचे कि ये कैरेक्टर्स बिल्कुल फ़ोटो में दिख रहे मर्द या पुरुष की तरह ही दिखता होगा ।
कोमल की पिक इसलिए नही डाल रहा हु ताकि आप अपनी कल्पना में उसकी इमेज बना सके। कोमल हर घर मे होती है । अगर मैं कोई रंग या रूप दे दूंगा तो वो उसी बंधन में बंध जाएगी । इसलिए आप अपने कल्पनाओ के घोड़े दौड़ाइये और मेरे शब्दों से उसकी इमेज बनाइये ।
अंकिता : हमारे हमारे कहानी का मुख्य किरदार जो कि इस कहानी के टाइटल कली और फूल में फूल को प्रस्तुत करती है अंकिता ने अभी अभी जवानी के उन्नीसवें बसंत में कदम रखा है । चंचल स्व्भाव, तीखे नैन- नक्श और नागिन की तरह बलखाती कमर ने अंकिता को पूरे गांव की रानी बना के रखा था । क्या बूढ़े क्या जवान हर कोई उसकी एक झलक , एक मुस्कुराहट को देखने के लिए पागल रहता था । अंकिता से खूबसूरत लड़की शायद ही कोई थी । हर किसी के सपनों की रानी और हर किसी की चाहत । लेकिन कहते है ना कि घर मे एक जवान लड़की अपने बाप के ऊपर चावल के बोरे के बराबर वजन रखती है । राममूर्ति ने माहौल देख कर अंकिता की शादी 20 साल में ही कर दी । वैसे तो अंकिता का मन तो अभी नही था लेकिन मा बाप से लड़ने की हिम्मत भी नही थी। शादी के बाद अंकिता ने खुद को अपने परिवार के आस पास ही समेट लिया और एक आदर्श बहु बन गई । अंकिता अपने पति, आलोक का बहोत अच्छे से ध्यान रखती है बहोत प्यार करती है। ससुराल में भी उसे सब अपनी बेटी की तरह ही मानते है और प्यार देते है ।
कोमल : अंकिता की छोटी बहन । हमारी कहानी की कली । अभी किशोरावस्था में ही है और बोर्ड क्लास में जाने वाली है। बहोत ही सीधी शांत और सरल स्वभाव की लड़की है, बिल्कुल अंकिता के विपरीत । लड़को से कोसो दूर रहने वाली, माँ बाप की लाडली और आदर्श बेटी । स्कूल में सबसे होशियार और हर परीक्षा में अव्वल रहने वाली कोमल हमेशा अपने माँ बाप का कहा मानती है और घर के सारे काम मे हाथ बटाती है । मासूमियत और खूबसूरती का संगम, अगर अंकिता के अलावा कोई दिखने में अच्छा था तो वो खुद कोमल ही थी । साधारण कपड़े और कोई मेकअप न करके भी वो किसी कली की तरह ही मदमस्त और काम उम्र में ही यौवन से भरपूर लगती थी । शरीर अभी अंकिता की तरह भरा हुआ नहीं था लेकिन या यौवन दरवाजे पर दस्तक दे रहा था । सीने के उठान, नीचे भारी होती हुई कमर सब उसे एक लड़की होने का एहसास करा रहे थे ।
अंकिता कोमल और मम्मी पापा चार सदस्यों का परिवार रहता था अंकिता की शादी हो जाने के बाद सिर्फ 3 सदस्य बचे थे ।
आलोक : शहर के सबसे अमीर खानदानों में एक खानदान है आलोक का। उम्र अभी 24 साल है लेकिन अपने बिज़नेस चलाने की काबिलियत और लगन से उसने अपनी इज़्ज़त और भी बढ़ाई है। शहर के सबसे आलीशान घर मे परिवार के साथ रहता है । बड़े लड़के होने की वजह से मा बाप का बहोत लाड प्यार मिला । हैंडसम और चार्मिंग लुक मेंटेन करना पड़ता है इसलिए जिम और फिटनेस का बड़ा शौक है । नामी बिजनेसमैन होने के साथ-साथ आलोक के शोक भी बहुत बड़े-बड़े थे । ब्रांडेड कारे, एक्सपेंसिव एक्सेसरीज के साथ साथ आलोक का फ्रेंड सर्कल भी ऐसे ही लोगों से भरा हुआ था लेट नाईट पार्टीज ,घर लेट से आना , दोस्तो के साथ हर मंथ फॉरेन ट्रिप्स पर जाना । हर वक्त लड़कियों के साथ गिरी रहने के बावजूद भी आलोक ने अभी तक शादी के बारे में कुछ नहीं सोचा था लेकिन अंकिता से मिलने के बाद आलोक को लगा अंकिता ही उसकी हमसफर बन सकती है । 2 महीनों की बातचीत के बाद ही आलोक ने अंकिता से शादी के लिए हां बोल दी थी। राममूर्ति मारे खुशी के उछल पड़े थे जब उनको पता चला कि उनकी बेटी इतने अमीर घराने में जा रही है ।
खुशबू : आलोक की बहन और अंकिता की ननद, MBBS की 4 साल हॉस्टल में रहकर पढ़ाई के बाद फाइनल ईयर की practice करने के लिए घर पर ही आ गई थी । अभी किशोरावस्था के लास्ट स्टेज पे खड़ी है. अंकिता से 1 साल ही छोटी है इसलिए खुशबू की अपनी भाभी यानी अंकिता से खूब अच्छे से बनती है । ससुराल में सबकी लाडली बचपन से ही खुशबू का हर शौक पूरा किया गया है महंगे शौक फालतू खर्चे और चापलूस दोस्तों ने खुशबू की आदत बिगाड़ रखी है भाभी अंकिता को छोड़कर और किसी की नहीं सुनती है।
अयान : आलोक और खुशबू का छोटा भाई और अंकिता का देवर अभी 12th पास किया है और शहर के सबसे फेमस कॉलेज इम्पीरियल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया है | शुरू से ही काफी शर्मीले स्वभाव का है बहुत ही कम दोस्त बनाए हैं घर में भी सिर्फ अंकिता से खुल कर बात करता है | एक माँ की तरह प्यार करती है अंकिता अयान से, या शायद उससे भी ज्यादा और अयान भी अपनी हर खुशी और प्रॉब्लम अंकिता से शेयर करता है|
“मुझे तो कोमल के भविष्य की चिंता हो रही है” अंकिता की माँ ने चावल की थाली में कंकड़ बीनते हुए कहा ।
अंकिता कुछ दिनों के लिए अपने मायके आई हुई थी तो उसकी मम्मी अंकिता की छोटी बहन कोमल की पढ़ाई के बारे में अंकिता से बात कर रही थी ।
अंकिता हॉल में लगे सोफे पे बैठी हुई थी, तन पे एक पीली कुर्ती और नीचे सफ़ेद रंग का टॉवल लपेट रखा था और पैरों में नेल पॉलिश लगा रही थी।
कुर्ती के गहरे गले से दूध जैसे गोरे – गोरे स्तन बाहर निकलने को उतारू थे | भीगे हुए बाल अभी अभी नहाकर निकलने की गवाही दे रहे थे | शादी के बाद से अंकिता का वजन थोड़ा बढ़ गया था जो की उसके शरीर को और भी गदरीला बना रहा था |
पीली कुर्ती में अंकिता बला की खूबसूरत लग रही थी | आखिर इसी खूबसूरती की वजह से ही तो अंकिता को अलोक जैसे पति मिला था | शहर के सबसे अमीर खानदानो में से एक, वरना अंकिता के पापा राममूर्ति की इतनी औकात कहा थी को वो अपनी बेटी का रिश्ता इतने अमीर घर में करने की सोच पाते | वो तो कॉलेज के सेमिनार में अंकिता और आलोक की आँखे चार हुई थी और 2 महीने बातचीत के बाद ही अलोक ने अंकिता के पापा से अंकिता का हाथ मांग लिया था | शादी के बाद अंकिता ने ससुराल के पैसे से ही मायका सम्हाला था | कोमल की पढ़ाई का खर्चा , घर की दैनिक जरूरतों का सामान, पापा का आधा कर्ज चूका दिया था अंकिता ने | अगर राममूर्ति का कोई बेटा भी होता तो इतना न कर पता जितना अंकिता ने किया था | घर में अंकिता की हैसियत एक बेटे से भी बढ़कर थी |
” यहां न तो ढंग के स्कूल है ना तो कोई कोचिंग अच्छा है सब लूटने वाले भरे पड़े है पढ़ाई के नाम पे ” मम्मी ने अंकिता की तरफ देखते हुए कहा ।
” बस 7 दिनों की ही तो बात है मम्मी , जैसे ही कोमल का 11th का मिडिल एग्जाम ख़त्म होता है मैं उसे अपने ससुराल लेकर चली जाउंगी | वहा एक से बढ़कर एक कॉलेज और कोचिंग सेण्टर है | अयान (अंकिता का देवर ) ने भी तो इम्पीरियल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया है पता है इंडिया में 4th रैंक है उस यूनिवर्सिटी की | वो कोमल को अच्छे से गाइड भी कर देगा “
हॉल से सटे बगल वाले कमरे में कोमल टेबल पे अपने किताबो में डूबी हुई थी | हाई स्कूल के रिजल्ट में बहोत अच्छा करने के बाद उसे अब इंटरमीडिएट के पढ़ाई की टेंशन थी | उसका ध्यान इस वक़्त किताबो में कम, मम्मी और दीदी की बातो में ज्यादा था | अंकिता की शादी के पहले तो कोमल का मन काम काज और पढाई में अच्छे से लगता था लेकिन बड़ी बहन के चले जाने के बाद वो खुद को अकेला महसूस करती थी | घर में पापा काम पे निकल जाते थे | मम्मी कमर के दर्द की वजह से एक जगह ही बैठी रहती थी | सारा काम कोमल के ही जिम्मे आ गया था | सुबह जल्दी उठना, पानी भरना , कपडे धुलना , झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाना और उसके साथ साथ अपनी पढ़ाई पे भी ध्यान देना | दिन भर किसी मशीन की तरह खटती थी कोमल | जब अंकिता की रानी की तरह कार से आती थी और घर में अपने पति के दिए हुए पैसे उड़ाती थी तो उसका भी मन करता था की काश उसके पास भी अपनी दीदी की तरह ढेर सारा ऐशो आराम हो वो भी किसी रानी की तरह आये – जाए और मम्मी पापा उसकी भी ऐसी ही रेस्पेक्ट करे जैसे अंकिता दीदी की करते है | क्या वो इंसान नहीं है ? क्या उसका मन नहीं करता अच्छा खाने का, अच्छा पहनने का , नई नई जगहों पे घूमने का | उसके भी तो कुछ सपने है | उसकी क्लास में लगभग हर लड़की का बॉयफ्रेंड है सिर्फ उसे छोड़ कर | इस किशोर उम्र में ही तो ये सब मन करता है ,अभी नहीं करेगी तो और कब करेगी ये सब
इन्ही सब चीजों को देख कर एक दिन वो अंकिता के सामने फुट फुट कर रोने लगी | अंकिता ने उसे बैठकर उसकी प्रोब्लेम्स पूछी तो कोमल ने अपने दिल का हाल उसके सामने रख दिया और उसे अपने साथ उसके ससुराल ले जाने की जिद करने लगी | अपनी छोटी बहन की रोनी सूरत देख कर अंकिता का दिल भी पसीज गया | पहले तो अंकिता 2 दिन तक इस बारे में सोचती रही और उसने और अलोक से भी बात की | आलोक को मनाना तो उसके बाए हाथ का खेल था | बहोत सोचने के बाद अंकिता भी कोमल को ले जाने के लिए राजी हो गई और मम्मी पापा से इस बारे में बात करने के लिए तैयार हो गई |
आज उसी के बारे में अंकिता और मम्मी की बहस हो रही थी हाल में जिसे कोमल कान लगाए गौर से सुन रही थी |
दीदी और मम्मी के बीच हो रही बातचीत को उसके खड़े कान बड़े ध्यान से सुन रहे थे। कोमल का मन दीदी के साथ उनके ससुराल में जाकर रहने और वही पढ़ने को करता था और दीदी ने कई बार इसके लिए पहले भी बात की थी मम्मी और पापा से लेकिन वो दोनों तैयार ही नही होते थे ।
हमेशा दो मुद्दों पे बात अटैक जाती थी :
पहला की अगर दोनों बेटिया चली जायेगी तो तो माँ बाप की सेवा कौन करेगा ?
दूसरा की कच्ची उम्र की बिटिया को अगर किसी और घर में भेज देंगे तो समाज क्या कहेगा ? कही अगर कुछ उंच नीच हो गया तो ?
लोग तो ये कहेंगे की जब पालने की औकात नहीं थी तो काहे पैदा किये ? राममूर्ति समाज में क्या मुँह दिखायेगा ?
” लोग तो कुछ ना कुछ कहते ही रहेंगे माँ , किस किस का मुँह पकड़ोगे आप ? और अगर मैं कोमल को नहीं भी ले जाती हु तभी भी तो लोग कहेंगे की घर में अकेली जवान लड़की बैठा रक्खी है ना जाने क्या गुल खिला रही होगी ? ” अंकिता ने माँ को समझाते हुए कहा
” कोमल मेरे साथ रहेगी तो मैं उसका अच्छे से ख्याल रख पाऊँगी | किसी चीज की कोई कमी नहीं होगी वहा | आप कल की सोचो अगर वो किसी अच्छे से कॉलेज में जाएंगी तो उसका खर्चा कौन उठाएगा और अगर वह मेरे साथ रहेगी तो कम से कम मैं आलोक से बोलने लायक तो रहूंगी उसके खर्चे के लिए “
” मैं तो बोल रही हु तेरे पापा से, लड़कियों को इतना पढ़ाने लिखाने की जरुरत नहीं है | 12th पास करने के बाद हाथ पीले कर के ससुराल भेज दो ” माँ की आवाज में एक आवेश था , एक लड़की के व्याह की जिम्मेदारी का |
” और हाथ पीले करने में जो खर्चा आएगा वो कौन भरेगा | सारा बचाया हुआ पैसा तो पापा ने अपने परिवार और चाचा के इलाज में खर्च कर दिया है | पहले ही काफी कर्जे में डूबे है हम | अभी जब तक अलोक को बुरा नहीं लग रहा है तब तक मैं भी दे पा रही हु | अगर कोमल मेरे साथ रहेगी तो कोमल की शादी की जिम्मेदारी अपने आप मेरे ससुराल वालो पर आ जाएगी, बात को समझ माँ ,थोड़ा ठन्डे दिमाग से सोच ” अंकिता ने ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था बिलकुल सटीक निशाने पर, माँ भी मानती दिख रही थी मजबूरी और हालात सब कुछ करवा सकते है ये बात अंकिता अच्छे से जानती थी
माँ के मौन धारण ने बता दिया थी की अब सिर्फ पिता जी को मनाना है | अगर वो मान गए तो कोमल उसके साथ चल सकती है | चिड़िया घोसला छोड़कर उड़ने को तैयार | अंदर कोमल के होंठो पे मुस्कराहट खेल रही थी | उसे अच्छे से पता था की उसकी दीदी अगर किसी काम में लग गई तो उसे कर के ही दम लेती है | अपने वादे पे अटल रहती है | इस वक़्त उसे इस जेल से सिर्फ उसकी दीदी अंकिता ही उसे आजाद करा सकती है
इतने में बाहर दरवाजे पे दस्तक हुई और राममूर्ति अपनी मित्र मंडली के साथ अंदर आते है | अंकिता अभी भी कुर्ती और टॉवल में ही बैठी थी | राम मूर्ती के साथ उसेक दोस्त श्याम लाल और वेदप्रकाश भी थे |
” नमस्ते भाभी जी” श्यामलाल और वेदप्रकाश ने एक सुर में अंकिता की मम्मी का अभिवादन किया
” नमस्ते बैठिये बैठिये” अंकिता की मम्मी ने अपना पल्लू सर पे डालते हुए उन्हें बैठने का इशारा किया |
अंकिता सोफे छोड़कर किचन के दरवाजे के पास जाकर खड़ी हो गई | अंकिता के मम्मी ने उसे सीने पे दुपट्टा डालने का इशारा किया |
और बोलती भी क्यों ना भला , इतना गहरा गला था की उसमे से अंकिता के स्तन लगभग बाहर ही थे | अंकिता ने अंदर कमरे से कोमल का दुपट्टा सीने पे रख लिया |
” इनके लिए चाय पानी का इंतजाम करो अंकिता , मै तुम्हारे पापा को दोपहर की दवा दे देती हु ” अंकिता की मम्मी कमरे से दवा लेने चली गई और राममूर्ति हाथ पाँव धोने बाथरूम में चले गए |
इतने में अंकिता पानी का ग्लास लेकर श्यामलाल और वेदप्रकाश के सामने टेबल पर रखने के लिए झुकी तभी अंकिता का दुपट्टा सरक गया और उसमे से दूध की तरह गोर गोर स्तन बहार झाकने लगे | अचानक हुए इस घटना से दोनों मर्द सकपका गए अंकिता ने जल्दी से अपना दुपट्टा उठाया और उसे सही से फिर से अपने सीने पे रख लिया | दोनों मर्दो की घाघ नज़रे अभी भी अंकिता के छाती पे ही टिकी हुई थी |
” लगता है ससुराल में बहोत अच्छे से हमारी बिटिया का ख्याल रखा जा रहा है सेहत काफी अच्छी लग रही है क्यों अंकिता बेटा ? ” वेदप्रकाश के इस कमेंट से अंकिता का चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया | वो दोनों की आदत अच्छे से जानती थी वो उसके पिताजी के दोस्त इसीलिए बने थे ताकि राममूर्ति के दोनों बेटियों के यौवन का नजारा कर सके , और अंकिता पे तो उनकी बहोत दिन से नजर रहती थी | अंकिता और कोमल ये बात अच्छे से जानती थी इसलिए दोनों इन्हे ज्यादा भाव नहीं देती थी | उम्र में तो दोनों उसके पिताजी के बराबर थे | लेकिन दोनों की आँखों में हवस तैरती रहती थी | अधेड़ उम्र और हसी मजाक की वजह से अंकिता को इनसे जयादा खतरा महसूस नहीं होता था इसलिए कभी इनकी शिकायत माँ या पिताजी से नहीं की |
” हां सही कहा अपने चाचा जी, खाना तो इतना अच्छा खिलाते है की मै मना ही नहीं कर पाती, दिन भर में तो ३ – ४ बार खिला ही देते है | शुरू शुरू में तो थोड़ी थोड़ी दिक्कत होती थी लेकिन अब आदत हो गई है | उसी वजह से शरीर थोड़ा बढ़ गया है | क्यों मै अच्छी नहीं लग रही क्या चाचा जी ? ” अंकिता ने ये बात टेबल पर झुक कर पानी का ग्लास रखते हुए और अपने जौवन का भरपूर दर्शन देते हुए कही | दोनों की आँखे अंकिता के स्तनों के भारीपन का आंकलन करने में लगी थी | ये देख कर अंकिता अपनी हसी नहीं रोक पा रही थी | मर्द की कमजोरी अंकिता को बहोत अच्छे से पता थी और उसका फायदा उठाना उससे भी ज्यादा अच्छे से |
” अरे नहीं बिटिया , तुम तो उर्वसी और रम्भा को भी फेल कर दो इतनी खूबसूरत हो | इसमें कोई शक नहीं है ” बोलते हुए श्यामलाल की जबान काँप रही थी
” अरे आप तो बेवजह ही इतनी तारीफ कर रहे है चाचा जी , बस आपका आशीर्वाद रहे आपकी अपनी इस भतीजी पर, मै चाय लाती हु तब तक आपके लिए ”
कहकर अंकिता बड़ी अदा से अपने कूल्हे मटकाते हुए किचन की तरफ चल दी | जब तक अंकिता उनकी नजरो से ओझल नहीं हो गई दोनों किसी कुत्ते की तरह लार टपकाते हुए अंकिता के कूल्हे पे नजर गड़ाए रहे | कोमल अपने कमरे से खड़ी ये सब देख रही थी , वो भी किचन में अंकिता का हाथ बताने के लिए चल दी |
किचन में पहुंचते ही दोनों बहनें आपस में ठहाके मार के हसने लगी |
” दीदी क्या मिलता है आपको उन बेचारो के ऐसे तड़पकर | अब तो शादी हो गई है अब तो छोड़ दो उन बेचारो को ” कोमल ने गैस पे पानी चढ़ाते हुए कहा |
” काहे के बेचारे ? अंदर इतनी हवस भरी है की एक कच्ची कली दे दो तो रात भर में उसे फूल बना देंगे | बेचारी की जान निकल दे इतने प्यासे है कमीने , और जो मजा एक मर्द को अपनी जवानी की लालच से तड़पाने में है वो और किसी चीज में नहीं है ” अंकिता उनकी हालत सोचकर मुस्कुराये जा रही थी
” अब कुछ हेल्प भी कराओगी या नाम करने के लिए किचन में आ गई हो ” कोमल ने अंकिता की टांग खींचते हुए बोला ।
” अच्छा महारानी जी, अब मुझसे काम करायेगी मकड़ी, मेरे साथ चलना नहीं है क्या , ज्यादा चु-चा करेगी ना यहीं छोड़ कर चली जाऊंगी रहना इन बुड्ढों के साथ, ज्यादा जबान चल रही तेरी ” अंकिता ने कोमल के कान को मरोड़ा ।
” अरे नहीं दीदी सॉरी मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी आप तो सीरियस ले लेते हो अब कान छोड़ो ना बहुत दर्द हो रहा है प्लीज ” कोमल ने अपना कान अंकिता के हाथ से छुड़ाने की कोशिश की ।
” अच्छा दीदी पापा आ गए ना अब उनसे बात कर लो ना मुझे अपने साथ ले जाने की यही सही वक्त है आप बोलोगे तो मान जाएंगे, मम्मी पहले ही मान चुकी है, आप तो जानते ही हो मेरा मन नहीं लगता है यहां , मुझे आपके साथ जाना है यहां पड़े पड़े तो मुझे जेल सा लगने लगा है मैं आपके साथ जाना चाहती हूं प्लीज आप एक बार पापा से बोलो ना प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ ” कोमल किसी बच्चे की तरह अंकिता से जिद करने लगी
” अरे हां बाबा मैं कह रही हूं ना मैं बात कर लूंगी तू टेंशन ना ले मैं कहूंगी तो पापा मान जायेंगे मैं संभाल लूंगी सब , चल अब चाय बना दे जल्दी से में उन कामचोरों को भी चाय पिला दूँ “
चाय की ट्रे लेकर अंकिता किचन से हॉल में लाती है वेद प्रकाश और श्याम लाल दोनों ही अंकिता की तरफ देख रहे थे वहीं पर अंकिता के पापा राम मूर्ति और अंकिता की मम्मी बैठी थी चाय पीकर और हल्की फुल्की बातें करके श्यामलाल और वेद प्रकाश दोनों ही आनन-फानन में निकल लिए । इस वक्त अंकिता अपने मम्मी पापा और कोमल के साथ घर में अकेली थी मौका सही देख कर अंकिता ने कोमल के बारे में पापा से बात करने की सोची
पापा आपसे एक बात करनी थी कोमल की फ्यूचर के बारे में कोमल सोफे पर बैठते हुए बोली
” हां बेटा बताओ तुम्हारी मम्मी भी कुछ बोल रही थी किसी बात के बारे में “
उधर कोमल किचन के गेट के सामने थोड़े ओट में आकर खड़ी हो गई हालांकि वो अपनी नजरें मम्मी और पापा से चुरा रही थी लेकिन वह भी होने वाले डिस्कशन को सुनना चाहती थी ।
अंकिता ने शुरुआत की
” पापा नेक्स्ट वीक कोमल का ग्यारहवीं का मिड टर्म ख़त्म हो जायेगा और जल्द ही उसका रिजल्ट आ जाएगा जहां तक मैंने उसका पोस्ट टेस्ट लिया है उससे लगता है कि उसका रिजल्ट बहुत ही अच्छा आएगा हमारे इस इलाके में आगे की पढ़ाई के लिए कोई भी एक अच्छा सा यूनिवर्सिटी या कॉलेज नहीं है तू आपने क्या सोचा है उसकी पढ़ाई के लिए ”
” अब मैं क्या बताऊं बेटा मैं तो यही चाहता हूं कि बोर्ड के बाद कोमल किसी एक अच्छे यूनिवर्सिटी या कॉलेज में जाए लेकिन तुम्हें यहां के हालात तो पता है कोई भी एक ढंग का कॉलेज नहीं है एक ही बेटी बची है इसे भी दूर भेज दिया तो हमारी देखभाल कौन करेगा और अब इसकी भी उम्र हो गई है तुम्हारी ही तरह किसी एक अच्छे खानदान को देख कर इसकी शादी कर देंगे “
राममूर्ति ने चाय की सिप ली।
यह सुनते ही कोमल के चेहरे का रंग उड़ गया । आखिर उसका डर सच में बदलने लगा था , जो वह नहीं चाहती थी वही हो रहा था, पापा उसे कहीं बाहर निकलने देने के लिए तैयार ही नहीं थे जबकि उसे आगे बढ़ना था, पढ़ना था , कुछ करके दिखाना था , ऐसे तो उसका कॉलेज जाने का ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा। अभी शादी नहीं करनी है उसे , अभी तो बहुत से ख्वाब पूरे करने हैं, दुनिया देखनी है , देश विदेश घूमना है । क्या उसकी जिंदगी पर उसका कोई हक नहीं है । वहीं उसकी अंकिता दीदी अपनी जिंदगी खूब अच्छे से जी रही थी हर वह चीज जो एक लड़की सोच सकती है उसकी अंकिता दीदी को हासिल थी घर, गाड़ी, बंगला, नौकर-चाकर, प्यार करने वाला पति, भरा पूरा परिवार, सुख संपत्ति, करोड़ों की जायदाद सब कुछ तो था उसकी अंकिता दीदी के पास फिर उससे यह हक क्यों छीना जा रहा है ।
” आपको यहां का माहौल अच्छे से पता है पापा आप यह जानते हैं कि यहां पर कोई भी अच्छी यूनिवर्सिटी या कॉलेज नहीं है मैं तो यही कहूंगी कि अगर आप चाहते हैं कि कोमल अच्छे से पढ़ाई कर पाए और आगे चलकर कुछ बड़ा करें तो उसे बाहर निकलना ही पड़ेगा , विजयनगर (अंकिता का ससुराल ) में बहुत अच्छे अच्छे कॉलेज और बड़ी से बड़ी यूनिवर्सिटीज है आपको पता है बाहर से लोग आते हैं अपने बच्चों को पढ़ाने बहुत बड़े अमीर खानदान के बच्चे आते हैं वहां अगर आप लोग बोलो तो मैं आलोक से बात कर लेती हूं वहां के इम्पीरियल यूनिवर्सिटी में कॉलेज के साथ स्कूलिंग भी है | बोर्ड ख़त्म होने के बाद कॉलेज में एडमिशन हो जायेगा | अयान भी उसी कॉलेज में है अगर रैंक अच्छी नहीं आती है तब भी एडमिशन के लिए डोनेशन का इंतजाम हो जाएगा, आलोक के लिए कोई बड़ी बात नहीं है । उनकी पहचान वहां के कई लोगों से है बस आपकी परमिशन चाहिए ” अंकिता ने एक सांस में सब कह डाला |
” कितने तक का खर्चा आ जाएगा बेटी “
” यूं ही कोई 12 से 15 लाख तक हो जाना चाहिए ” अंकिता ने थोड़ा सोचते हुए कहा अंकिता ने जान बूझकर पैसा ज्यादा बताया था ताकि पिताजी की हिम्मत टूट जाये और वो परमिशन दे दे , पैसा सुनते हैं राम मूर्ति का मुँह खुला का खुला रह गया
” बेटी इतना पैसा हम तो 7 जन्म में भी नहीं दे पाएंगे “
” आपसे पैसे देने के लिए कौन कह रहा है आपकी बेटी किस दिन काम आएगी ससुराल वालों के पास बहुत पैसा है, पैसों का समंदर है उसमें से दो चार बूंदे निकल जाएंगे तो उससे कुछ फर्क नहीं पड़ता वह सब मैं देख लुंगी, आप बस इजाजत दीजिए “
राममूर्ति कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे मदद के लिए उन्होंने अपनी बीवी की तरफ देखा अंकिता की मम्मी नजरो से उन्हें मान जाने के लिए बोल रही थी |
” लेकिन बेटी इतना पैसा मांगना सही रहेगा दामाद जी को हो सकता है बुरा लगे तुम्हारे सास ससुर क्या कहेंगे एक बेटी पहले से थी दूसरे को भी भेज दिया” इस बार सवाल अंकिता की मम्मी की तरफ से आया
” मैं हूं ना मम्मी मैं सब संभाल लूंगी ऐसा कोई कुछ नहीं कहेगा मुझसे प्यार करते हैं सब , आखिर मेरा भी तो हक बनता है मेरे ससुराल वालो पे, इतना तो मैं अपने घर वालों के लिए कर ही सकती हूँ ” कुटिल मुस्कान के साथ अंकिता ने जवाब दिया , जंग पहले ही जीती जा चुकी थी अब तो बस समझौता हो रहा था |
” लेकिन बेटी लोग क्या कहेंगे इस तरह जवान लड़की को किसी और के घर भेज दिया समाज क्या कहेगा “
” पापा आप पहले यह सोच लीजिए कि आपको समाज देखना है यहां अपने बेटी का भविष्य ”
अंकिता की बात सुनकर मम्मी पापा दोनों ही कंफ्यूज हो गए आखिर अंकिता की भी बात अपनी जगह सही थी कोमल की पढ़ाई भी अपनी जगह जरूरी है आखिरकार अंकिता जो सुनना चाहती थी वो शब्द उसके कानो में पड़ ही गए
” जैसा तुम्हें सही लगे अंकिता तुम्हारे भरोसे मैं कोमल को छोड़ रहा हूं अगर तुम्हें लगता है कि वहां के कॉलेज पढ़ाई के लिए ज्यादा अच्छे हैं तो इसका एडमिशन वही करा दो , आखिर हम दोनों बुड्ढों के साथ बेचारी क्यों फसी रहे तुम्हारे साथ रहेगी तो उसका मन लगा रहेगा ” राममूर्ति ने भरे मन से जवाब दिया
इतना सुनते ही कोमल कोमल मानो सातवें आसमान पर उड़ने लगी वह किचन से दौड़ती हुई आई और अपने पापा के गले से चिपक गई
” थैंक यू पापा “
राममूर्ति की भी आंखों में आंसू आ गए
” अरे पगली मान तो मै पहले ही गया था वो तो तुझे परेशान करने के लिए मैं झूठ मुठ की बातें बना रहा था मुझे अंकिता बेटी ने कल ही यह बात बता दी थी और मैंने कल ही हां कर दी थी अभी तो हम तुझे सिर्फ परेशान करने के लिए यह झूठ मूठ का नाटक कर रहे थे ” राममूर्ति ने मंद मंद मुस्कुराते हुए कहा
कोमल अपने पापा के गले से लगे हुए ही हंसने लगी उसने मुड़ के देखा अंकिता की तरफ जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी अचानक कोमल ने बगल के सोफे पर रखा तकिया उठाकर अंकिता की तरफ फेंक दिया
” तूने मुझसे झूठ क्यों बोला ? ” अंकिता ने तकिए से खुद को बचाया
” तुझे परेशान करके मुझे अच्छा लगता है मकड़ी देख कैसे बच्चों की तरह रोए जा रही है ”
दोनों बहनों की आपस की लड़ाई देख कर अंकिता और कोमल के मम्मी और पापा दोनों हंसने लगे कोमल ने मम्मी की गोद में जाकर अपना सर रख दिया |
” मम्मी मेरे बिना आप कैसे यह सब कुछ संभालोगे ”
” सही कह रही है ऐसा करते हैं कि तुझे रोक लेते हैं ” यह सुनते ही कोमल फिर से सीरियस हो गई अब हसने की बारी कोमल के मम्मी की थी |
” उसके लिए मैंने नौकरानी का इंतजाम कर दिया है | वो घर का सारा कर देगी और इस वाली नौकरानी की तरह नखरे भी नहीं करेगी ” अंकिता ने माहौल को हल्का करने के लिए कोमल को फिर से छेड़ा | सब हलके हलके हसने लगे , घर में खुशिया दौड़ रही थी हर कोई खुश और थोड़े गम में भी , बिटिया की बिदाई से पहले बिदाई |
कली और फूल
अंकिता के मायके के घर के बाहर एक ब्लैक कलर की मर्सिडीज बेंज क्लास फर्स्ट की गाड़ी खड़ी थी | सफ़ेद चमचमाते प्रोफेशनल ड्रेस में खड़ा ड्राइवर रामु आस पास खड़े बच्चो को रोक रहा था की कही वो कार में कोई स्क्रैच ने लगा दे | आलोक सर की फेवरेट में से एक थी ये वाली जिसे वो सिर्फ अपने फॅमिली के लिए इस्तेमाल करते थे | सूटकेस और एक ट्रॉली बैग भरने के बावजूद भी अंकिता का काफी कुछ छूट जा रहा था | कपडे तो उसने आधे छोड़ दिए थे | कोमल ने अपना बैग गाडी के बैक साइड में डाल दिया था और कार के साथ खड़ी होकर अपने दोस्तों के सामने शो ऑफ करने की कोशिश कर रहे थी | आस पास के घर वालो अपने दरवाजे और दुछत्ती से अंकिता के शानोशौकत को निहार रहे थे |
” सुना है राममूर्ति ने बड़ी वाली का व्याह किसी करोड़पति के यहाँ किया है ” आधी घूघंट में एक औरत अपने बगल में खड़ी दूसरी औरत को बोल रही थी |
” हां बहन गाडी और कपडे देख के तो लग रहा है की ससुराल वाले बहोत अमीर है “
” लेकिन राममूर्ति ने ये रिश्ता किया कैसे , न कोई सरकारी नौकरी , ना कोई पैतृक संपत्ति , क्या देख कर उन लोगो ने हाथ थामा होगा इसकी बेटी का “
” सबसे बड़ा खजाना तो इसकी बड़ी वाली बेटी है, कहते है वो किसी जगह पढ़ने के लिए ३ दिन के लिए गई थी वही उस लड़के से आँखे चार कर लिया | कुछ न कुछ तो किया होगा इसकी लड़की ने तभी तो 2 महीने में ही शादी के लिए तैयार हो गया | “
” सही कहा बहन, मुझे तो इसकी बड़ी वाली बेटी के चाल चलन अच्छे नहीं लगते | शिल्पी मुझे इंटरनेट पे इसके फोटो दिखा रहे थी , ये पूरा पेट निकाल निकाल के दिखा रही थी , कुछ तो नाम तो किलोग्राम या इंस्टाग्राम ऐसा कुछ “
” गाडी तो बहोत महँगी वाली लग रही है “
“अरे ये किसकी गाडी है कोमल ? बुक किया है क्या ? ” मन में हो रही उथल पुथल को ना सम्हाल पाने पर उस औरत ने आखिरकार कोमल से पूछ ही लिया
” नहीं चाची, मेरे जीजू की है | वैसे तो उनके पास 8 और गाडी है लेकिन ये सिर्फ घरवालों के लिए है ” ‘हम’ शब्द पे काफी जोर डालकर कोमल ने जवाब दिया |
बगल में खड़ा ड्राइवर मंद ही मंद अपनी मुस्कराहट को कण्ट्रोल कर रहा था | 4 की जगह 8 बताकर कैसे अपने पड़ोसियों को जलाया जाए ये तो इस बच्ची से सीखा जा सकता है |
इतने में अंकिता अंदर से तैयार होकर घर से बाहर आई | लाल रंग के लहंगे में अंकिता नई दुल्हन लग रही थी | गोरे बदन पे लाल रंग, हाथ और पैरो में मेहंदी , गहरे गले की चोली , और नेट वाला डिज़ाइनर लहंगा , उस धुप में भी अंकिता का रूप सोने की तरह चमक रहा था |
एक पिंक कलर की टॉप और डार्क ब्लू जीन्स में कोमल को, इस उम्र में भी बहोत सेक्सी बना रही थी | उस पर से सलीके से बंधे बाल जिसमे कुछ लट उसके चहरे पे बार बार आ रही थी | कोमल बड़ी अदा से उन्हें बार बार अपने कान के पीछे लगा रही थी | टॉप से उसके हलके हलके निकलते उभार अभी उसके कच्चेपन को आगे रख रहे थे | इस चिड़िया का आज घोसले में आखरी दिन था | इसके बाद वो आजाद हो जाएगी | जो मन में आएगा वो करेगी | कोई रोकने टोकने वाला नहीं | मम्मी की डांट और पापा के कई रूल्स और रेगुलेशन से आजादी , ये सोचकर ही कोमल के शरीर में एक झुरझुरी हो रही थी | स्कूल और पढ़ाई सब यही छोड़ के जा रही थी वो , शायद फिर कभी वापस ना आने के लिए | ड्राइवर ने सारा सामान गाड़ी के बैक में डाला |
अंकिता ने मम्मी पापा के पैर छुए, कोमल मम्मी के गले लिपट कर रो पड़ी , उसे खुद भी नहीं पता था कि वह |इतना मिस करेगी अपनी मम्मी को| भरी आंखों से मम्मी पापा ने कोमल को गाड़ी में बिठाया | गाड़ी चलने लगी उसके साथ साथ कोमल का दिल भी भरी आंखों से उसने पीछे पलट के देखा मम्मी पापा दूर से हाथ हिलाते नजर आ रहे थे | अंकिता ने कोमल का सर गाड़ी के अंदर खींचा, अपनी गोद में रख लिया | अंकिता के चहरे पे गम का नामोनिशान नहीं था | हलकी मुस्कराहट के साथ उसने कोमल के सर पे अपना हाथ फिराया | आखिरकार वो कोमल को अपने साथ ले ही आई | जो वो अपने लिए नहीं कर पाई वो अपनी इस छोटी कली कोमल के लिए करेगी | अपने हिसाब से उसे एक महकते फूल में बदलेगी | अंकिता से इशारा पाते ही रामु ने गाडी को टॉप गियर में डाला और स्पीड बढ़ा दी |
3 घंटे के सफर के बाद कार के ब्रेक ने अंकिता और कोमल की नींद तोड़ी | अंकिता ने कोमल को इशारा किया वो पहुंच चुके हैं नींद से कोमल की पलकें भारी हो रही थी | दाहिने साइड का गेट खोल कर अंकिता सबसे पहले बाहर निकली फिर कोमल ने भी अपने पैर बाहर निकला सामने का नजारा देख कर उसकी आंखें खुली की खुली रह गई |
इतना बड़ा बंगला उसने आज तक अपनी जिंदगी में भी कभी नहीं देखा था जहां तक उसकी आंखें देख सकती थी वहां तक वह सफेद रंग का बंगला नजर आ रहा था कम से कम ३ – ४ किलोमीटर में तो फैला ही होगा |
जैसे किसी राजा महाराजा का महल हो | दूर-दूर तक सिर्फ उस बंगले की आकृति ही दिखाई दे रही थी । सामने किसी किले के दरवाजे के बराबर दरवाजे , 9 फ़ीट ऊंची दीवारे, सिक्योरिटी के लिए दीवारों पे 3 लेयर की वायर्स
कोमल आंख फाड़े बंगले की खूबसूरती निहारे जा रही थी । क्या ये सब अब उसका है ?
हा उसी का तो है अगर उसके दी और जीजू का है तो उसका भी तो हुआ ना | क्या अब वो उस छोटे से मकान को छोड़कर इस बंगले में रहेगी ?
सब कुछ सपने जैसा लग रहा था | कोमल को ये डर लग रहा था की अभी कही ये सपना ख़त्म ना हो जाए |
कही फिर से वो अपनी उसी दुनिया में वापस ना लौट जाए | खुद को चिकोटी काटने में उसके हाथ काँप रहे थे | लेकिन वो अपनी आँखों पे यकीन करना चाहती थी | अगर ये सपना था तो वो इसे यही पे ख़त्म कर देना चाहती थी | दर्द से कोमल की आँखे बंद हो गई और जब उसने आँखे खोली तो वही विशालकाय सफ़ेद बंगला उसकी आँखों के सामने सीना तान के खड़ा था | मारे ख़ुशी के कोमल वही पे जड़ हो कर खड़ी हो गई थी | आखिर अब उसे घर के काम खुद करने की जरुरत नहीं है , उसके लिए तो इस बंगले में कई नौकर चाकर लगे है | उसे किसी बात की कोई फ़िक्र करने की जरुरत नहीं थी |
ध्यानमग्न कोमल के हाथ से कब बैग निकल गया उसे पता ही नही चला उसने अपने दहिनी तरफ देखा तो सफेद शर्ट और सफ़ेद पैंट में एक आदमी उसे सल्यूट करते हुए खड़ा था । कोमल को समझते देर न लगी कि ये बंगले के नौकर है । इतने में बंगले के गेट पूरी तरह से खुलता है और उसमें से दर्जन भर नॉकर मार्च करके निकलते है । कार से सामान निकाल कर सबने अंकिता को सल्यूट किया और बगल में खड़े हो गए ।
” अब अंदर भी चलेगी या बाहर ही खड़ी रहेगी “
अंकिता के हाथ अपने कंधे पे महसूस करके कोमल अपने दिवास्वप्न से बाहर निकली और कदम उसके साथ बढ़ा दिए । अंदर अंकिता का पूरा ससुराल उसके स्वागत के लिए खड़ा था | लेकिन कोमल का ध्यान तो अंदर बने स्विमिंग पूल के नीले पानी से हट ही नहीं रहा था | इतना बड़ा ? इसमें लोग नहाते भी होंगे भला ? साफ़ तो बहुत दिख रहा है , शायद शो ऑफ के लिए रखा होगा |
अंकिता के ससुर रघुवीर वर्धन ने इस उम्र में भी अपने आप को काफी हुष्ट पुष्ट रखा है | लम्बा कद , चौड़ी छाती , और मेहनत से तराशे हुए शरीर उन्हें अपने उम्र से काफी कम दिखा रहे थे | पुरे बिज़नेस को उन्होंने अपने दम पर अकेले खड़ा किया था | अगर आलोक और उन्हें एक साथ खड़ा कर दिया जाए तो कोई नहीं कह सकता की उनमे बाप बेटे का रिश्ता है |अंकिता की सास सुमित्रा ने भी खुद को वैसे ही मेन्टेन किया है | उम्र का असर ना तो चहरे पर , ना ही बदन पर पड़ने दिया है उन्होंने , छाती और कूल्हों पे भराव और पतली कमर | पहली बार में देख कर कोई भी नहीं कह सकता था की वो ३५ से ज्यादा उम्र की है | ३ बच्चे होने के बावजूद उन्होंने खुद को स्लिम ट्रिम बना रखा है |
अंकिता ने सबसे पहले अपने ससुर रघुवीर के पैर छुए
” भगवान् तुम्हे हमेशा ऐसे ही खुश रखे बेटा ” रघुवीर ने अंकिता के बैक पे अपना हाथ काफी अच्छे से फिराते हुए कहा |
” पापा , आपने तो एकदम से फिट रखा है खुद को , मुझे लगा मै नहीं रहूंगी तो थोड़ा बहोत वजन बढ़ ही जायेगा आपका ” अंकिता ने झुके हुए ही रघुवीर के आँखों में आँखे डालते हुए कहा | अंकिता शायद भूल गई थी की उसने गहरे गले की चोली पहनी हुई थी जिसमे में से उसके स्तन अंदर तक अपने दर्शन दे रहे थे |
” मुझे तो फिट रहना ही पड़ेगा बेटा वर्ना अलोक को कम्पटीशन कौन देगा इस घर में ” रघुवीर ने मुस्कुराते हुए अंकिता की चोली में अपने आँख गड़ा के जवाब दिया |
” आप क्यों खुद को आलोक से कॉम्पेयर करते है | आप अलोक से 4 गुना जयादा फिट है ” अंकिता ने भी सवाल का जवाब मुस्कुरा कर ही दिया |
” अभी तुमने हमारा फिटनेस देखा ही कहा है वैसे मायके में जाकर तुम्हारा वजन थोड़ा बढ़ गया है “
” हां पापा , दरअशल वहा पे इतना ध्यान नहीं दे पाती मै , वैसे बहुत जल्दी नोटिस कर लिया आपने “
” वजन सही जगह हो तो अच्छा लगता है बेटा, इस उम्र में, इतना वजन तो तुम्हारे लिए सही है “
बगल में खड़ी कोमल को ये हसी मजाक थोड़ा अजीब लगा | अंकिता दीदी अपने ससुर से इस तरह की बात कर रही थी जो की शायद एक औरत अपने देवर से भी न करे | रघुवीर और अंकिता का इस तरह से एक दूसरे को छेड़ना कोमल को थोड़ा अलग लग रहा था लेकिन साथ ही साथ आँखों में प्यार और साफ़ दिल व्यवहार देख कर उसको लगा की वही ज्यादा सोच ले रही है | बड़े लोग है खुले विचारो के है तो इतना तो चलता होगा | शायद वो ही कुछ ज्यादा छोटा सोच ले रही है , एक मिडिल क्लास फॅमिली से होने का कुछ नुक्सान भी तो है और अभी तो ये सब मेरे लिए नया – नया है इसलिए सब कुछ अलग – अलग सा लग रहा है |
इससे पहले की ससुर और बहु में नोक झोक और बढ़ती, सुमित्रा ने दोनों को आँखों तरेर कर कोमल के मौजूद होने का एहसास कराया |
अंकिता ने बात ख़त्म होने से पहले ही अपनी सास सुमित्रा के पैरो को छुआ और सुमित्रा ने आरती की थाली से अंकिता की आरती उतारकर गले से लगा लिया |
” तुम दोनों कही भी शुरू हो जाते हो , कोमल तो अभी अभी आई है उसे कितना अजीब लग रहा होगा , पागल !” सुमित्रा ने अंकिता के कानो में फुसफुसाया और अंकिता के चहरे को अपने हाथो में लेते हुए कहा ” कितनी खूबसूरत लग रही है मेरी बहु “
” आपके जितना तो फिर भी नहीं हु मम्मी | ” सुमित्रा के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर अंकिता की नजरे झुक गई |
” चल अब आ गई तू , तो मेरी आधी जिम्मेदारी ख़त्म | मै अकेले ही इन सब को क्यों झेलू “
” हा मम्मी, अब आप आराम से अपनी सारी जिम्मेदारी मुझसे बात लीजिये | मै सब सम्हाल लुंगी |”
सास बहु की नोक झोक देख कर पूरा परिवार हंस रहा था | कोमल भी उनके साथ ही मुस्कुरा रही थी | सारे नए चेहरे होने के बावजूद उसे सब अपने घर वाले ही लग रहे थे | ये शायद इन सब का मिलनसार व्यवहार ही था |
कोमल ने भी अपनी दीदी के स्टेप्स दोहराये और अंकिता के सास ससुर के पैर छुए |
” भाई मैंने तो तय कर लिया , अंकिता के बाद अगर कोई इस घर में बहु आएगी तो वो कोमल ही होगी | इतनी खूबसूरत लड़की तो सिर्फ वर्धन खानदान में ही आनी चाहिए ” रघुवीर ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा |
रघुवीर के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर कोमल मारे शर्म के पानी पानी होने लगी | नजर जमीन में गड गई |
” क्यों बेचारी को तंग कर रहे हो | अभी अभी तो आई है | नन्ही जान को थोड़ा सांस तो लेने दो |” सुमित्रा ने रघुवीर को टोका और कोमल की आरती उतारने लगी |
खुशबु ने अपनी भाभी अंकिता के पैर छुए और दोनों किसी बहन की तरह गले मिली | अयान और खुशबू ने कोमल से हेलो बोले और नार्मल बातचीत करके घर के अंदर ले आये |
” भाभी यार मैंने बहोत मिस किया आपको, आप बोले थे की आप कल ही आ जाओगे फिर एक दिन लेट क्यों किया ? “
” अरे यार तुम्हारे मम्मी की गलती है सब , मै तो कल ही तैयार थी लेकिन उन्होंने शुभ मुहूर्त आज के लिए बताया तो एक दिन लेट हो गया | अब बताओ इसमें मेरी कोई गलती है ? “
अयान ने अंकिता की आँखों में झाका और फिर अंकिता के सीने से लिपट गया | अंकिता ने भी अयान को अपने सीने से कस कर लगा लिया , जैसे कोई माँ अपने बेटे को अपने छाती से चिपका लेती है |
” आलोक नहीं दिख रहे है , बात हुई थी की आज घर पे ही रहेंगे ? ” अंकिता ने खुशबू से सवाल किया
” अरे उनका आप अच्छे से जानते हो , एक फ़ोन आया नहीं की तुरंत गायब, बाजार में गए है आधे घंटे में आ जायेंगे बोला था “
आरती उतारने के बाद अंकिता ने चावल से भरा लोटा गिराया और गृह प्रवेश किया |
थोड़ी बहुत छेड़-छाड़ के बाद अंकिता अपने कमरे में आ गई थकान के मारे उसकी भी आँखे भारी हो रही थी तो बिना ड्रेस चेंज किये ही वो अपने बेड पे गिरी और कुछ ही देर में उसकी आँख लग गई ।
इधर खुशबू ने कोमल को उसका पर्सनल रूम दिखाया । रूम नही उसे तो हॉल कहना चाहिए इतना बड़ा था । उसका तो बाथरूम भी उसके पापा के घर से बड़ा था । कोमल ने कपड़े बदले बदन पे हल्के हरे रंग का सूट उसके साथ चूड़ीदार सलवार पहन सलीके से दुपट्टा डाला । बदन के उठते उभार को अच्छी तरह छुपाते हुए कोमल अपने दीदी अंकिता के रूम के तरफ चल दी |
तब तक अंकिता नहाकर अपने बालों को टॉवल में लपेट कर ड्राई कर रही थी । तभी कोमल ने गेट पे नॉक किया
” अरे तूने नहा भी लिया ” ड्रायर से लिपस्टिक के शेड्स निकलते हुए अंकिता ने कोमल से पुछा
” हा “
अंकिता का ध्यान कोमल के दुपट्टे पर गया जिसे उसने बहोत ही सलीके से रखा था | ना चाहते हुए भी कोमल की हँसी निकल गई
” क्या ? ” कोमल , अंकिता की उस हसी के पीछे छुपे हुए उस व्यंग को अच्छे से देख पा रही थी जिसे कोई भी बहन समझ जाएगी |
” कुछ नहीं ” अंकिता ने वापस आईने की तरफ देखा
” बताओ ना दीदी , क्या मै बेकार लग रही हु क्या ? ” कोमल में मन में कुलबुलाहट हो रही थी |
” आ यहाँ मेरे पास बैठ ,कुछ बात करनी है ” अंकिता ने बेड के ऊपर हाथ रख के इशारा किया |
कोमल थोड़े डरे मन के साथ चुपचाप बेड पे आकर बैठ गई | ना जाने दीदी क्या कहने वाली है | कही उससे कुछ गलती तो नहीं हो गई | किसी बात पे नाराज है शायद, या फिर शायद उनका मन बदल गया है मुझे, अपने साथ रखने का | सोच के ही कोमल के मन में सिरहन होने लगी | वो फिर वापस नहीं जाना चाहती उस जंजाल में | आखिर अभी अभी तो उसे ये ख़ुशी मिली थी | क्या सिर्फ कुछ पल में ही ये सब ख़त्म हो जायेगा ?
” अरे तेरा मुंह क्यों बन गया ? ” अंकिता ने कोमल के मन में चलते तूफ़ान को भाप लिया |
” कुछ गलती हुई क्या दीदी ? प्लीज माफ़ कर दो अगर अनजाने में मैंने कुछ ऐसा कर दिया हो जो आपको न पसंद आया हो “
” पागल है क्या तू ? ऐसा कुछ नहीं हुआ है | इतना सब सोचने की जरुरत नहीं है | अपने इस छोटे से दिमाग में इतना बोझ डालने की जरुरत नहीं है ” अंकिता ने हलके से कोमल के सर पे एक चपत लगाईं |
मानो सैकड़ो किलो का बोझ उतर गया हो कोमल के मन से | एक पल को लगा की सब कुछ बिखर ही जाएगा | लेकिन वो अपनी दीदी को अच्छे से जानती थी | वो कभी उसके साथ ऐसा नहीं करेगी , वो कभी भी उसका साथ नहीं छोड़ेगी |
” नहीं वो मुझे लगा की आप शायद अपने फैसले पे दुबारा सोच रहे हो तो मै थोड़ा डर गई थी ” कोमल ने अपनी दिल की बात अंकिता के सामने रख दी |
” ही ही , बेटा एक बार मेरे साथ यहाँ आ गई ना, अब अगर तू खुद भी जाना चाहेगी तो भी मै नहीं जाने दूंगी ” अंकिता की हसी ने कोमल के चहरे पर मुस्कराहट वापस ला दी | “
” तो फिर आप किस बात के लिए बोल रही थी ? ” कोमल ने पुछा |
” हां तो बात ये है की मै तुझे इस घर के कुछ नियम कायदे बताना चाहती थी | जैसे तू मम्मी पापा के साथ रहती थी तो उनके बनाये कायदो पे चलना पड़ता था , यहाँ मत जाओ , उससे मत मिलो , ये मत खाओ , ये मत पहनो , इतनी जोर से मत हसो वगैरह वगैरह “
” हां और घर से ६ बजे के बाद मत निकलो , जहा जाओ बताकर जाओ ” कोमल ने अंकिता की बात में अपनी बात जोड़ी
” हां , लेकिन यहाँ पे ऐसा कोई कुछ नहीं है , हर कोई आजाद है , जो मन में आये वो कर सकते हो | कोई किसी की पर्सनल लाइफ में दखल नहीं देता है जब तक की कोई प्रॉब्लम ना हो ” अंकिता ने होंठो पे हलके से लिपग्लॉस का टच देते हुए कहा |
“अच्छा आपके सास ससुर , वो कुछ नहीं कहेंगे अगर आप लोग सब अपने मन मर्जी करोगे तो ? ” कोमल ने उत्सुकतावश अंकिता से पुछा
” अरे मेरी भोली नादान छुटकी, उन्ही ने तो ये सब प्रोटोकॉल्स बनाये है और जो इस घर में हमारे साथ रहता है उसे ये सारे प्रोटोकॉल फॉलो करना पड़ता है “
” अच्छा और कौन कौन से रूल्स है जो मुझको फॉलो करने पड़ेंगे , अभी से बता दीजिये ताकि उन्हे मेरी किसी बात का बुरा ना लगे “
” ऐसा कोई किताब विताब थोड़ी लिख रखा है की खोला और पढ़ा दिया , धीरे धीरे घर वाले सब बताते रहेंगे , अब जैसे सबसे पहला नियम – इस घर की लड़किया सीने पे दुपट्टा नहीं डालती ” अंकिता ने अपने आप को आईने में निहारते हुए बताया |
” दूप.. दुपट.. दुपट्टा तो एक लड़की के लिए जरुरी होता है ना दीदी , मम्मी तो हमेशा टोकती रहती है दुपट्टा डालने के लिए ” लड़खड़ाती जुबान कोमल के चौकने का सबूत दे रही थी |
” हां वही तो मै बता रही हु यहाँ पर मम्मी का डर नहीं है , है तो सिर्फ आजादी और उस आजादी की शुरुआत तुम अपने बदन से ये दुपट्टा हटाकर कर सकती हो “
” लेकिन दीदी दुपट्टा तो कुवारी लड़की का गहना होता है और ये तो अपने सलीके और तमीज के लिए पहना जाता है “
” दुपट्टा होता है बाहर के लोगो की गन्दी नजरो से अपने बदन को ढकने के लिए , लेकिन यहाँ तो सब अपने है तो किस बात का पर्दा ? और किससे ? इस घर में कोई कुछ भी पहन सकता है लेकिन दुपट्टा या ऐसी कोई भी चीज जिसे तुम्हे खुद को छुपाना पड़े , मना है “
2 मिनट तक तक गहराई में सोचने के बाद कोमल ने जवाब दिया –
” जैसा आप कहे दीदी , अगर इस घर का यही कायदा है तो मुझे मंजूर है, लीजिये हटा दे रही हु इसे अपने बदन से और वैसे भी आप सही कह रहे हो भला अपने घर में ही किससे पर्दा ? अगर घर की बेटियों को अपने ही घर में पर्दा करना पड़े तो फिर कही कुछ गलत है ” कोमल ने अपने सीने से दुपट्टा निकल कर अंकिता के हाथ में दे दिया
” अच्छा अब जाकर थोड़ा आराम कर ले , रात को खाने में सब एक साथ डाइनिंग टेबल पे खाते है , वह आज तुझे बुलाया जायेगा “
” ठीक है दीदी , वैसे भी मई काफी थक गई हु ” कहकर कोमल किसी हिरणी की तरह दौड़ते हुए अपने रूम की तरफ भाग गई |
अंकिता के हाथ में वो दुपट्टा , उसके लिए किसी इनाम से कम नहीं था | कोमल को कली से फूल बनाने की तरफ ये बहुत ही महत्वपूर्ण कदम था | बिना कोई जबरदस्ती किये वो, कोमल को अपने हिसाब से ढालने में कामयाबी की तरफ बढ़ रही थी और ये सबसे पहला कदम बहुत ही कामयाब रहा | अंकिता ने दुपट्टा अपनी अलमारी में डाला और खुद तैयार होने लगी |
“अरे वाह , खुशबु तो बहुत अच्छी आ रही है मुकुंद भैया, आज तो मजा आ जायेगा ” डाइनिंग टेबल पर सजे हुए खाने को देखकर खुशबु के मुँह में पानी भर आया
खाना लगा रहा एक सावले रंग का जवान लड़का जिसकी उम्र अभी २४-२५ के आस पास होगी, अपनी तारीफ सुनकर फूले नहीं समा रहा था | २ साल से मुकुंद इस घर में खाने की जिम्मेदारी सम्हाल रहा था | खाना बनाने में उसका लोहा खुद सुमित्रा भी मानती थी जो की खुद एक कुशल गृहणी थी |
मुकुंद, खाना बनाने का महारथी हमेशा से था | रघुवीर उसे अपनी कंपनी से लेकर आये थे | ऑफिस में एक बार गलती से कैफेटेरिया में आग लग जाने की वजह से उसे बाहर निकाल दिया गया था | हालांकि रघुवीर अगर एक बार कह देते तो किसी की हिम्मत नहीं थी मुकुंद को बाहर निकालने की लेकिन कंपनी के कर्मचारी , मुकुंद से ज्यादा महत्त्व रखते थे इसलिए रघुवीर ने कुछ नहीं कहा | मुकुंद , रघुवीर के पैरो पे गिर पड़ा था आखिरकार उनसे एक गरीब के आंसू बर्दाश्त नहीं हुए और उसे अपने घर लाकर रसोइया बना दिया | तब से मजाल है जो घर के खाने में नमक का एक दाना भी काम हुआ हो | पूरा परिवार रात के समय एक साथ बैठ कर खाना खाता था | खाते समय सिर्फ घर के सदस्य ही रहते थे | नौकरो को खाना परोसने या खिलाने के लिए मन किया गया था | यही तो दिन भर में एक टाइम था जब सारा परिवार इकठ्ठा होता था और सब एक दूसरे से अपनी बाते शेयर कर पाते थे | प्राइवेट टाइम में किसी भी तरह की दखलंदाजी रघुवीर और सुमित्रा दोनों को नहीं पसंद थी |
“हां खुशबू जी , आप को अच्छा लगा तो उम्मीद है मालिक को भी अच्छा लगेगा ” मुकुंद ने बोलते हुए एक बार भी खुशबु की तरफ नजर उठा कर नहीं देखा |
“अरे तुम्हारे मालिक को नहीं भी अच्छा लगा तब भी हम जबरदस्ती खिला देंगे ” कोमल ऐसे ही मुकुंद को छेड़ती रहती थी | अपनी बातो से उसे मुकुंद को असहज करने में बड़ा मजा आता था |
“अरे ऐसा क्यों बोल रही है आप , कही उन्होंने सुन लिया तो आफत आ जायेगी , और अगर कुछ चाहिए होगा तो मांग लीजियेगा , किचन में रहूँगा मै ” मुकुंद ने खाली प्लेट्स टेबल पे रखा और किचन की तरफ चल दिया |
खुशबू ने चेयर्स अरेंज्ड की और सबको आवाज लगाया खाने के लिए | ” पापा.. मम्मी .. भाभी .. जल्दी आइये खाना लग चुका है ..”
खुशबु ने कढ़ाई दार सूट पहना था जिसमे आसमानी और गुलाबी रंग का कॉम्बिनेशन था | कानो में मैचिंग रिंग्स, हाथ में सिल्वर प्लेन चुडिया डाली थी | घर में दुपट्टा पहनने की मनाही थी इसलिए खुशबु का उछाल मारता हुआ यौवन उस सूट में और भी ज्यादा मादक दिख रहा था |
अंकिता ने ग्रीन कलर का ब्लाउज और येलो कलर का लहंगा पहना था | ब्लाउज से अंकिता के स्तन ढंकने के बजाय दिख ज्यादा रहे थे | अंकिता का साइज भले ३४ डी कप था लेकिन उसके सारे कपडे ३० या ३२ साइज के ही थे | टाइट कपड़ो से अंकिता की भरी हुई छाती , किसी नयी बनी हुई माँ के स्तनों को भी मात दे रहे थे और उसमे से पतली कमर और भरे हुए कूल्हे भर भर के दिख रहे थे |
सारे लोग डाइनिंग टेबल पे इकठ्ठा हो गए | कोमल ने खुशबु के बगल वाली चेयर ले ली | रघुवीर और सुमित्रा हमेशा एक साथ बैठते थे | अयान , अंकिता के बगल में बैठता था | खाने के टेबल पर खाना देखकर ही कोमल की भूख बढ़ गई थी | ५ अलग अलग तरह की सब्जी, घी का बड़ा सा भगोना जो की लबालब भरा हुआ था | सफ़ेद चावल, पुलाव, बिरयानी सब सलीके से सजा कर टेबल पे रखे हुए थे |
“इतना सारा खाना ? ” बरबस ही कोमल के मुँह से निकल गया |
अंकिता ने पहली वाली सब्जी से थोड़ी सी सब्जी कोमल के प्लेट में डाली ” यहाँ खाने के इतने शौकीन लोग है की इतना भी कम पड़ जाता है और वैसे भी हमारे खाने के बाद घर के सारे नौकरो के लिए भी खाना यही से जाता है |”
अंकिता और खुशबु दोनों सबके लिए खाना परोसने लगे | अयान मोबाइल में लगा हुआ था |
“मैडम छोटे साहब आ गए है “
तभी हॉल से अंदर आते हुए हीरा जो की बंगले में नाईट गॉर्ड का काम करता था , ने अंकिता को आवाज दी |
“अच्छा चाचा जी | बहुत सही टाइम पे आ गए , हमने खाना शुरू ही किया था अभी तो ” अंकिता एक और प्लेट में खाना लगाने लगी | तभी हॉल का गेट खोलकर एक ६ फुट २ इंच के आदमी ने एंट्री की | बॉडी पे लेदर की जैकेट , हाथ में ऑडी कार की चाभियाँ, जिसे वो लगातार अपनी ऊँगली में घुमा रहा था , परफेक्ट फिटिंग जीन्स, स्पाइक्ड किये हुए हेयर्स , हार्डकोर जिम में मेहनत से तराशा हुआ शरीर , आत्मविश्वास से भरा हुआ चेहरा , संतुलित और गंभीरता वाली चाल और शरीर छेदकर रूह तक को झांक लेने वाली वो तीखी निगाहे , किसी की भी नजरे रोक लेने के लिए काफी थी | कोमल ने अपने जीजू को कई बार देखा था | शादी में , कई बार दीदी और अपने बर्थडे पर ,फोटोज में, हर बार उतनी ही रोचकता ,और हो भी क्यों ना आखिर कोमल के सीक्रेट क्रश थे वो , इतने सीक्रेट की अंकिता को भी इस बारे में नहीं बताया था कोमल ने, शादी में तो वो अलोक की बेस्ट फ्रेंड बन गई थी , उनका हाथ पकड़ पकड़ कर अपने सारे फ्रेंड्स से मिलवा रही थी और वो भी बिना किसी रोक टोक के सबसे मिल रहे थे | हर बार एक नयापन , जितनी बार भी वो अलोक से मिलती थी तो ऐसा लगता था की वो उसके जीजू कम और दोस्त जयादा है | हमेशा की तरह आज भी उसके अलोक जीजू किसी भी बॉलीवुड हीरो को मात दे रहे थे | उसे पता था की अगर अलोक जीजू बिज़नेस मैंन नहीं होते तो पक्का एक्टर होते | अंदर आते ही अलोक की आँखों ने सबसे पहले जिसे नोटिस किया वो कोमल थी , कोमल ने अपने बाल को हाथ लगाकर सही करने का दिखावा किया, आलोक से नजर मिलकर उसने धीरे से नजरें निचे कर ली | चाहकर भी वो अलोक की सामना नहीं कर पा रही थी |
आते ही अलोक ने सबसे पहले अपनी मम्मी सुमित्रा के गाल पे किस किया , खुशबु के सर पे एक चपत लगाई और अंकिता जो की खाना परोसने में लगी हुई थी , को अपनी तरफ खींच कर उसके होंठो पे होंठ रख दिया | कोमल का तो मुँह खुला का खुला रह गया |
इस तरह ? घरवालो के सामने ? आखिर सब लोग क्या सोच रहे होंगे की इतना भी धीरज नहीं है क्या ? क्या सिर्फ उसे ही अजीब लग रहा है ये सब ? कोई कुछ बोल क्यों नहीं रहा |
दिमाग में कौंधते ढेर सारे सवालों के साथ कोमल ने अपनी नजर चारो तरफ डाली | खुशबु खाने की प्लेट , अयान की तरफ बढ़ा रही थी | सुमित्रा और रघुवीर आपस में किसी बात पे डिस्कशन कर रहे थे | अयान खाने के बजाय अभी भी मोबाइल पे लगा था | सब कुछ तो नार्मल था , किसी को कुछ अजीब नहीं लग रहा था | ऐसा लग रहा था की जैसे सब कुछ नॉर्मल हो , रोज की बात हो , कुल मिलकर सिर्फ वो खुद बची थी जो ये देख कर अलग फील कर रही थी | क्या उसके साथ ही कुछ गलत है या सच में ये चीज़ थोड़ी अजीब थी | वही अंकिता भी , अलोक की बाहर निकलती जबान को अच्छे से खींच खींच के पी रही थी जैसे कोई आइसक्रीम हो | कोमल को पूरा यकीन था की अंकिता दीदी अपने मायके में ऐसा कभी नहीं करती | ससुराल में ही ये बदलाव देख रही थी वो | कोमल का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था | उसने अपना ध्यान पूरी तरह से सामने रखे खाने के प्लेट पे लगाया | २ मिनट बाद अंकिता ने अलोक की पीछे धकेला तब अलोक कोमल के बगल में आकर बैठ गया | कोमल ने अपनी नजरें निचे गदा रक्खी थी | अंकिता ने कोमल की तरफ देखते हुए कोमल के दूसरे साइड में चेयर पे बैठ गई और टिश्यू से अपने लिप्स पे लगे अलोक के मुँह के लार को साफ़ करने लगी |
“कोमल ! तुम तो काफी बड़ी हो गई हो यार !! ” कोमल को तो जैसे साप सूंघ गया था | चाहकर भी उसके हलक से शब्द निकल नहीं रहे थे |
अंकिता और अलोक दोनों कोमल की हालत अच्छी तरह से समझ रहे थे , बाकी घर वालो के लिए ये सब नार्मल हो सकता है लेकिन कोमल तो अभी अभी नयी – नयी आई थी तो अभी उसके लिए ये सब कुछ नया था | उसे एडजस्ट होने में अभी थोड़ा टाइम लगेगा ये बात अभी सब जानते थे |
“अरे कोमल बेटी , तुम कुछ खा नहीं रहे हो ? क्या हुआ ? खाना अच्छा नहीं लग रहा क्या ” रघुवीर ने वाइन की ग्लास से थोड़ा सा वाइन पीते हुए पूछा |
“नहीं पा..” अचानक से अपने दीदी के ससुर को पापा बोलना भी कोमल को अजीब लग रहा था, उसकी जबान आधे में ही रुक गई |
“तुम मुझे पापा बोल सकते हो बेटे , अंकिता तो पापा ही बोलती है तो इस हिसाब से तुम्हारा भी पापा ही हुआ ना ” रघुवीर ने कोमल को सहज करने के लिए प्यार से अपनी बात रक्खी |
“नहीं पापा , खाना तो बहुत अच्छा है , वो मैं कुछ सोचने लगी तो.. ” कोमल ने रोटी का टुकड़ा मुँह में डाला |
“तो मैं इस बात को मान लू की मुझे जानबूझकर इग्नोर किया जा रहा है ? ” अलोक ने बिना कोमल की तरफ देखते हुए कहा |
ये सुनकर कोमल को एहसास हुआ की उसने अभी भी अलोक की बात का कोई जवाब नहीं दिया | आखिर क्या हो गया उसे ? पति पत्नी में तो यही तो रिश्ता होता है फिर वो इतना क्यों सीरियस ले रही है ? आखिर कोई अनजान थोड़ी है अलोक उसके दीदी के लिए | पति है वो उनके ! फिर इतना वो क्यों सोच रही है |
“मैं बताती हु ! कोमल , भैया और भाभी का किस देख कर थोड़ ऑकवर्ड फील कर रही है, है न कोमल ? ” खुशबु ये पूछते हुए मुस्कुरा रही थी |
“नहीं नहीं , दीदी ऐसी बात नहीं है !” आखिर और क्या बोलती कोमल , बात तो सच ही थी न !
कोमल की हालत देख कर पूरा परिवार हसने लगा |
“तुम्हे इन सब चीज़ से परेशान होने की जरुरत नहीं है बेटे ! ” सुमित्रा ने कोमल की तरफ देखते हुए बोलै
“इस घर में ये सब नार्मल चीजे है ! हम कोई भी चीज परदे में नहीं रखते चाहे वो कोई ख़ुशी की बात हो या गम की | और भला आपस में प्यार करने में कैसा पर्दा ? आखिर रिश्ता होता ही तो इसीलिए है , अपनों से प्यार करने में कैसी शर्म भला ? “
कोमल ध्यान से सुमित्रा की बाते सुन रही थी | आखिर सही ही तो कह रही है मम्मी जी | अपने ही घर में अपनों से ही शर्माना पड़े तो क्या फर्क है परिवार और बाहर के समाज में | कही न कही उसकी सोच ही काफी छोटी है | संकीर्ण मानसिकता ने उसके दिमाग में घर कर लिया था और हो भी क्यों ना , आखिर घर से कभी बाहर निकली ही नहीं तो कहा से होगी सोच बड़ी | यहाँ सब खुले दिमाग के है तो वो खुद इन्हे गलत समझ रही है | लेकिन अब नहीं , अब वो खुद को बदलेगी , अपनी सोच को बड़ा बनाएगी | वो भी अब खुले दिमाग की सोच रखेगी | इस घर के जो भी कायदे है उन्हें पूरी तरह से निभाएगी | असहजता के साथ कोमल के दिल की धड़कन भी कम हो रही थी | इस निर्णय के साथ ही कोमल का मन धीरे धीरे हल्का हो गया था | उसकी भूख अब और भी बढ़ गई , पनीर के कुछ टुकड़े के साथ रोटी बहुत अच्छी लग रही थी |
“मैं तो सिर्फ बड़ी हो रही हु , आप तो दिन ही दिन और यंग होते जा रहे है जीजू ” कोमल ने पहली बार अलोक की आँखों में आँखे डालकर उसके सवाल का जवाब दिया |
“अब जिसके पास तुम्हारे दीदी जैसी एनर्जी बूस्टर हो , वो तो हमेशा यंग रहेगा ना ” अलोक ने कोमल को अपनी तरफ खींचते हुए कहा |
“अरे आपकी शर्ट , आयल लग गया ये देखिये !” कोमल ने अलोक के पॉकेट की तरफ इशारा किया जैसे ही अलोक ने अपनी शर्ट की तरफ देखा , कोमल अलोक के शिकंजे से निकल गई | घर वाले दोनों की नोकझोक और कोमल को हसते हुए देखकर खुद भी साथ दे रहे थे | रघुवीर की थाली में सब्जी ना देख कर अंकिता ने थोड़ी सी सब्जी डालते हुए पुछा
“सब्जी ज्यादा तीखी है क्या पापा ? “
“मेरी बहु से ज्यादा नहीं ” रघुवीर ने ऊँगली में लगे खाने को कोमल के गाल पे लगाते हुए जवाब दिया |
“मैं भाभी के हाथ से खाऊंगा ” अयान ने खुशबु के हाथ को सामने से हटाते हुए कहा |
“साहब जी के जलवे ही नहीं कम होते , भाभी है वो बीवी नहीं जो हर समय खातिरदारी करे तुम्हारी ” खुशबु ने अयान को ताना मारा |
“अगर मेरे देवर जी को खिलाने के लिए मुझे इनकी बीवी भी बनाना पड़े, तो बन जाउंगी ” अंकिता ने अयान को अपने सीने से चिपका लिया और वैसे ही थाली से खाना निकलकर अपने हाथ से खिलाने लगी |
“अंकिता मैं बाहर खा कर आया हु तो ज्यादा भूख नहीं है | आप लोग खा लो और मैं रूम में हु ओके ?”
अंकिता ने हां में सर हिलाया
“और आपसे मैं कल अच्छे से बात करूँगा कोमल ! अब तो हमें साथ रहना है तो किसी बात की जल्दबाजी नहीं है . है न ?”
कोमल ने ख़ुशी ख़ुशी सर हिलाया |
खाना हो जाने के बाद घर के नौकर बचे हुए खाने को किचन में ले जा रहे थे | वहा से खाना घर के नौकरो में बाँट दिया जाता था |
“यहाँ हमारे गांव में लोग २ जून की रोटी के लिए भूखे मर रहे है , और इन अमीरजादों को देखो इतना खाना बनवाकर फेक दे रहे है ” महेश ने खाने की थालिया सिंक में डालते हुए अपने साथी सोनू से कहा |
“अरे ! धीरे बोल नाश्पीटे , अगर कही साहब या मालकिन ने सुन लिया तो खाने के साथ तुझे भी घर के बाहर फेकवा देंगे |” सोनू ने आंखे तरेर कर महेश को चुप कराया |
“अच्छा ये छोड़ , आज छोटी मालकिन को देखा , उफ़ इतना गदराया बदन , जान ही निकाल देती है यार ऐसे ऐसे ड्रेस पहनती है , एक बार छोटी मालकिन का भोग मुझे लगाने दे | जबसे मायके से आई है ,और भी ज्यादा सेक्सी हो गई है |”
“बात तो तू सही कह रहा है , लेकिन मेरी फेवरेट तो खुशबु मैडम है , एक दम टाइट माल लगती है | कभी जीन्स में गांड देखी है उनकी ? “
“है तो टाइट मॉल यार, छाती देखकर तो मैं कसम से बता सकता हु की बाहर बहुत चुदी है रांड साली | यहाँ तो अपने बाप और भाई के सामने भी ऐसे घूमती है जैसे उन्हें न्योता दे रही हो की आओ और अपनी बहन को चोद दो ! अपनी बेटी की चूत मार लो | कपडे देखे है कैसी पहनती है इस घर की औरते !” महेश ने बर्तन धुलते हुए हलकी आवाज में कहा |
“हमें क्या , हमें तो पैसे से मतलब है , जितना पैसा यहाँ मिलता है शायद ही कही किसी के यहाँ मिले , इसलिए मैं तो बहुत सावधान रहता हु की कोई गलत कदम न उठा लू और अगर किस्मत ने साथ दिया तो एक दिन पैसे के साथ छूट भी ले ही लेंगे ” सोनू भी अपने दिल की बात रख रहा था |
“चूत भी लेंगे ? भोसड़ी के शकल देखी है अपनी कभी आईने में ? कहा वो सुकुमार कोमल फूल जैसे लड़किया और कहा तू खड़ूस दर्रा दानेदार शकल वाला गरीब ” महेश ने सोनू को चिढ़ाते हुए कहा
“जब चूत में आग लगती है न सोनू तो वो लंड की शकल और रंगत नहीं देखती , देखती है तो बस उस लंड का दम और उसकी रफ़्तार ”
“चल पहले अपने हाथो का दम और रफ़्तार यहाँ बर्तनो पे दिखा ”
खाने पीने का कार्यक्रम समाप्त हो चूका था , डाइनिंग रूम के बाद घर के सारे सदस्य एक साथ बैठकर टीवी देख रहे थे | टीवी पे कॉमेडी मूवी ग्रैंड मस्ती आ रही थी कोमल भी टीवी की तरफ एक टक निगाह लगाए हुए थी लेकिन उसका ध्यान मूवी के बजाय टीवी के साइज पर था | इतनी बड़ी टीवी उसने पहली बार अपनी आँखों के सामने देखी थी, हर एक सीन बिलकुल क्लियर और बड़ा दिख रहा था | सुमित्रा और रघुवीर सोफे पे बैठे हुए थे , खुशबु अपना सर सुमित्रा की गोद में रख के आधी लेटी हुई थी अंकिता दूसरे सोफे पे अयान के साथ बैठी हुई थी और अंकिता के दूसरी तरफ कोमल थी | सोफे की सॉफ्टनेस , कोमल को अपने घर के गद्दे से भी ज्यादा अच्छी लग रही थी , इस पे तो आराम से सोया जा सकता है इतना ज्यादा बड़ा है | लाख रुपये से कम का नहीं होगा इतना तो कोमल भी जान रही थी |
इधर रघुवीर , सुमित्रा के बदन पे हलके हलके हाथ लगा रहे थे जिसे सुमित्रा अपने हाथो से झटक दे रही थी | रघुवीर का ये इशारा बेडरूम में चलने के लिए था , जिसे सुमित्रा समझ रही थी
“थोड़ा सबर रखो , अभी बच्चे जाग रहे है , अभी चल देंगे तो क्या सोचेंगे ?” सुमित्रा ने फुसफुसाते हुए कहा
रघुवीर ने ये सुनकर मुँह बनाया और फिर से सुमित्रा के कमर पे हाथ लगाने लगे |
“लगता है पापा को अब दूसरी वाली भूख लग गई है मम्मी ! ” खुशुबू ने टीवी की तरफ ही देखते हुए हलकी सी मुस्कान के साथ कहा |
अरे नहीं ऐसी बात नहीं खुशबु , अभी मूवी ख़त्म हो जाएगी तब चले जायेंगे सुमित्रा ने थोड़ा सा झेपते हुए कहा
“मेरी बेटी भी तुमसे ज्यादा समझदार हो गई है लेकिन तुम अभी बच्ची की बच्ची ही हो ” रघुवीर ने कोमल का चहरे पर हाथ फेरते हुए कहा
रघुवीर की बात सुनकर सुमित्रा का चेहरा लाल हो गया , इस तरह सबके सामने बाप बेटी उसे इशारे कर रहे थे बेडरूम में जाने के लिए | हालाँकि इसके पहले भी ये सब कई बार हो चूका था लेकिन तब कोमल नहीं थी , आज सुमित्रा, कोमल की वजह से थोड़ा अजीब फील कर रही थी की कही वो या न सोच ले की इस उम्र में भी ये दोनों डेली सेक्स करते है | और आखिर हो भी क्यों न , रघुवीर ने खुद को इतना मेन्टेन कर रखा था की एक नया लड़का भी इतना स्टैमिना ना ला पाए | आज भी हर दूसरे – तीसरे दिन सुमित्रा की चीखे निकल ही जाती है | आखिर इस सेक्स ने ही तो सुमित्रा को भी अभी तक जवान रखा था | सुमित्रा को भी सेक्स की लत ऐसे ही लगी थी शादी के दिनों से लेकर बेटे और बहु के आने तक रघुवीर सेक्स में २ दिन से ज्यादा गैप नहीं दिया था | मजाल है की कोई शादी या किसी समारोह की वजह से उनके प्यार में कोई रुकावट आई हो | अगर कोई फंक्शन २ दिन से ज्यादा चला तो उसी फंक्शन में ही कोई खाली जगह देखकर रघुवीर ने सुमित्रा का बदन तोडा है | अब तो ये हाल था की अगर सुमित्रा को एक दिन भी सेक्स न मिले तो उसे बैचेनी होने लगती थी | जिस उम्र में औरते अपने मन को मारकर बेटे – बेटी के घर परिवार में ध्यान देती है उस उम्र में सुमित्रा अपने बेटे – बेटी और बहु से कम्पटीशन में लगी थी |
“अच्छा ठीक है मूवी बहुत हो गई अब सबके सोने का टाइम हो गया है ” अंकिता ने माहौल देखते हुए खुशबु से रिमोट लेकर टीवी ऑफ कर दिया |
“अरे क्यों भाभी ? अभी तो वो बहुत हॉट सीन आने वाला था ” अयान ने मुँह बनाते हुए अंकिता से रिमोट छीनने की कोशिश की
“अयान ! आपके रूम में तो टीवी है ना , वहा भी मैं यही वाला चैनल लगा दूंगी, देख लेना , अभी चलिए अपने रूम में ” अंकिता ने अयान के सर को सहलाते हुए कहा |
“बेटा जल्दी से पापा को गुड नाईट बोलो और तुम भी रूम में जाओ ” सुमित्रा ने खुशबु के सर को चूमते हुए प्यार से सहलाया |
खुशबु सोफे से उठ गई और रघुवीर की तरफ देखने लगी |
“क्या ? ” रघुवीर ने सवालिया निगाहो से खुशबु की तरफ देखा
“पापा यार, आप जानते हो फिर भी डेली यही करते हो , हाथ तो हटाओ सही से मैं कैसे गुड नाईट बोलूंगी ?”
“अच्छा ठीक है मेरा बच्चा ” रघुवीर ने खड़े होकर दोनों हाथो को फैलाया |
खुशबु किसी छोटे बच्चे की तरह अपने पापा की बाहो में ऐसे समा गई जैसे अब उसे अपने पापा से कोई अलग नहीं कर सकता था | सुमित्रा और अंकिता दोनों की नजरो में बाप बेटी की प्यार के लिए ममता दिख रही थी लेकिन कोमल एक बार फिर से उसी उधेड़बुन में फंस गई थी , आखिर एक बाप और बेटी किस हद तक सहज हो सकते है | १० – १२ साल तक तो समझ आता है की बच्चे नादान होते है वो अपने माता पिता से लिपट कर प्यार जता सकते है लेकिन जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही कुछ दायरे बढ़ जाते है खासकर बाप और बेटी में | एक जवान बेटी , अपने बाप से सिर्फ बातो में प्यार जता सकती है , लिपटना और चिपकना , शरीर में बदलाव के बाद कम या बंद हो जाता है ऐसा ही बेटे और माँ के साथ भी होता है क्योकि तब उस बेटे या बेटी में बहुत बदलाव आ चुके होते है , कई अलग तरह के एहसास जाग चुके होते है और अपने माँ बाप के लिए किसी तरह की शारीरिक चाहत ना पैदा हो इसलिए प्यार जताने का तरीका सिर्फ बातो तक सिमित कर दिया जाता है , यही तो नियम है समाज का , ऐसे ही तो घर चलते है , लेकिन वो सारे कायदे क़ानून , नियम , अनुशाशन , कोमल यहाँ टूटते हुए देख रही थी यहाँ तो बाप बेटी के रिश्ते में आज भी उतनी ही गर्मजोशी है जितनी एक छोटी बेटी अपनी कम उम्र में अपने पिता से करती है | वही लिपटना, चिपटना , बिना जिस्म की छुआ छूत की परवाह किये कसकर गले लग जाना , बिना इस बात की परवाह किये की खुशबु के स्तन , उसके पिता रघुवीर की चौड़ी छाती से पूरी तरह से दबे हुए है | अपने घर में तो कोमल ये सोच भी नहीं सकती , पहले तो वो खुद ही अपने पिता को इस तरह गले नहीं लगा पायेगी और अगर उसने कोशिश भी की तो उसके पिता उसे दूर धकेल देंगे | उसी नियम को ही तो वो आज तक मान रही थी जिसे वो यहाँ , इस घर में टूटते हुए देख रही थी |
खुशबु के स्तन पूरी तरह से दबकर चपटे अकार में फैले हुए थे जिससे रघुवीर की ताकत का अंदाज कोमल को हो रहा था | ऐसा लग रहा था की अगर रघुवीर ने अपना दबाव थोड़ा सा भी और बढ़ाया तो खुशबु के स्तन कही फट न जाए | रघुवीर ने , खुशबु के गाल में हलके से किस किया और कान में कोई बात कही जिसे खुशबु ने अपनी गर्दन ना में हिलाकर इंकार कर दिया | कोमल को थोड़ा सा अटपटा लगा , आखिर इस हालत में जहा कुछ भी हो सकता है वाला माहौल बना है उस बात पे खुशबु का किसी बात पे इंकार करना, कोमल बहुत ही बैचेनी से इस बात को जानना चाहती थी | रघुवीर ने खुशबु को खुद से अलग किया और चहरे को अपने हाथो में लेकर फिर से वही बात दुहराई | सुमित्रा और अंकिता आपस में कुछ बात कर रही थी , उनका ध्यान रघुवीर और खुशबु की तरफ से हट गया था , उनके लिए जैसे ये एक रोज की बात हो | नजरें तो इस वक्त सिर्फ कोमल ही गड़ाए हुए थी | अब तक ये सब कुछ इसलिये दरकिनार कर रही थी की कही घरवाले उसकी इस तरह से घूरने की हरकत से बुरा न मान जाये , लेकिन अब उसके मन में इस घर के रहन सहन तौर तरीको को और अच्छे से जानने के लिए बैचेनी बढ़ गई थी | इस घर की हर दिनचर्या और हरकत को वो नोटिस कर रही थी | और उसके इस तरह से देखने या घूरने की वजह से किसी को कोई प्रॉब्लम भी नहीं हो रही थी तो इसलिए उसने अब तय कर लिया था की वो सब कुछ अच्छे से जानकार ही रहेगी | खुशबु ने अपनी झुकी हुई निगाहो को को अपने पिता रघुवीर की निगाहो से मिलाया और अपना मुँह हलके से खोल दिया | ये देखकर कोमल की दिल की धड़कने बढ़ गई , कोमल का मुँह अपने आप खुल गया और आश्चर्य उसके चेहरे पर साफ़ साफ़ दिखने लगा | रघुवीर ने खुशबु के खुले मुँह में अपनी जीभ डाली और खुशबु के जीभ को जकड कर चूसने लगे | किस इतना जोरदार था की खुशबु के मुँह से लार की कुछ बुँदे उसके सूट से बाहर झांकते स्तनों पे आ गिरी | खुशबु का पूरा बदन काँप रहा था और रघुवीर ने खुशबु के कमर को अपने हाथ से पकड़ रखा था ताकि वो पीछे न जा सके | किस २ मिनट तक चला खुशबु ने आखिरकार हार मान ली और अपनी जीभ अंदर लेते हुए रघुवीर के हाथो को अपनी कमर से हटा दिया | कोमल तो जैसे दिवास्वप्न से बाहर निकली |
” गुड नाईट पापा ! ” खुशबु ने खुद को सम्हालते हुए रघुवीर के प्यार के खुमार में डूबी अपनी लाल आंखे मारे लाज के निचे करते हुए बोली
” गुड नाईट मेरा बच्चा ” रघुवीर अपने बेडरूम की तरफ चल दिए |
अयान ने अपनी मम्मी सुमित्रा को गाल पे किस किया और गुड नाईट कहा | कोमल को अब ये भी अजीब लगने लगा | एक तरफ पापा और बेटी में इतना रस भरा गुड नाईट और एक तरफ मम्मी और बेटे में नार्मल गुड नाईट ? ऐसा क्यों ? लेकिन यही तो सही है ना ? अगर सही यही है तो उसे इतना क्यों अजीब लग रहा है ? गलत नार्मल और सही उसे अजीब क्यों लग रहा है ? कोमल अपने आप में ही उलझ गई थी | आखिर हो क्या रहा है उसके साथ | सब कुछ बदल क्यों रहा है ?
“भाभी अगर आप अपने बेडरूम में जा रही है तो मैं कोमल को रूम तक छोड़ दू ? ” खुशबु ने अंकिता से पुछा
“नहीं खुशबु , तुम जाकर आराम करो , मैं कोमल को रूम में छोड़ कर आती हु , मुझे कुछ बात करनी है कोमल से “
“ठीक है भाभी .. गुड नाईट !” शीला की जवानी गाना गुनगुनाते हुए खुशबु किसी बच्चे की तरह उछलते हुए अपने रूम की तरफ चली गई |
“कोमल ? ” खुशबु की तरफ टकटकी लगाए हुए कोमल को अंकिता ने बुलाया
“हाँ दी.. दीदी ” कोमल ने अंकिता की तरफ देखा
“चल तेरे रूम में चलते है “
कोमल का रूम एक लड़की के हिसाब से ही सजाया गया था | बड़ी बड़ी दिवालो पे डिज्नी प्रिंसेस के कार्टून वाले बड़े बड़े पोस्टर, पिंक कलर की छत पे लाइटिंग, उसी पिंक कलर से मैच करते हुए परदे, बेडशीट, और तकिये | बिलकुल किसी राजकुमारी की तरह | ६५ इंच का दीवाल पे टंगी हुई स्मार्ट टीवी , गेम खेलने के लिए बेड के साइड में हाई एन्ड पर्सनल कंप्यूटर | जो जो कोमल सोच सकती थी वो सब कुछ इस रूम में मौजूद था | एक दो बार कोमल ने कंप्यूटर को चलने की कोशिश की लेकिन इससे पहले उसने कभी पास से कंप्यूटर देखा भी नहीं था तो डर के मारे उसने वही छोड़ दिया |
अंकिता ने बेडशीट सही से सेट की , तकिये को अपने जगह पे लगाया , कोमल ने टीवी का रिमोट उठाया और ज़ी सिनेमा लगाकर बेड पे कूद गई |
“दीदी कितना सॉफ्ट बेड है न , लगता ही नहीं की बेड है जैसे कोई मखमल हो न ? ” बेड पे उछल उछल के कोमल अंकिता को बता रही थी |
“हाँ , मैं भी जब पहली बार आई थी तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा था ” अपने घर के हालात से अंकिता अच्छे से परिचित थी तो वो कोमल के मन के भाव समझ रही थी |
“अच्छा दीदी आप से एक बात पूछनी थी , प्रॉमिस करो की आप डाटोगे नहीं ? ” कोमल ने अपना हाथ अंकिता की तरफ बढ़ाया
“अगर मैंने कभी किसी बात पे तुमको डांटा तो तुम मेरी शिकायत यहाँ पे मम्मी पापा या अपने जीजू से कर सकती हो , वो मेरी बैंड बजा देंगे | यहाँ बच्चे चाहे जितने बड़े हो जाए, घर के बड़े उन्हें डाट या मार सकते है |”
“अरे वाह ! सच्ची में ? अब तो पक्का मैं आपको आपकी सासु माँ से डाट पड़वाउंगी ” कोमल ने अपनी ख़ुशी का इजहार किया |
“अच्छा बेटा ! मेरी बिल्ली मुझसे ही म्याऊ ” अंकिता ने कोमल को अपनी तरफ खींचा और उसको गुदगुदी करने लगी |
“तो क्या पूछने वाली थी महारानी जी ? ” अंकिता ने कोमल को याद दिलाया
“अरे हां , आज आपने खुशबु दीदी और पापा को देखा ? वो दोनों क्या कर रहे थे ? “
“क्या कर रहे थे ? गुड नाईट बोल रहे थे शायद एक दूसरे को ” अंकिता ने कोमल के बालो को सहलाते हुए जवाब दिया
“लेकिन दीदी , क्या आपको नहीं लगता की एक बाप बेटी के रिश्ते में ये कुछ अजीब है ? मेरा मतलब गले लगाना और हल्का फुल्का टच करना ये तो चलता है लेकिन मुँह में मुँह डालकर और वो भी अपनी ही बेटी के , ये कुछ अटपटा नहीं लगा आपको ? ” कोमल ने अपने दिल की बात अंकिता से कह दी |
“ही ही ही तो इतने ध्यान से देख रही थी मैडम ? शैतान , यहाँ आकर और भी बिगड़ गई है न ” अंकिता ने पहले कोमल के चेहरे से शिकन हटाया |
“देखो कोमल , बात थोड़ी गहरी है लेकिन मुझे लगता है की तुम अब इतनी बड़ी हो गई हो की समझ सको , एक पिता होना अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी है , पापा ने इस घर में पूरी कोशिश की की है की हम , जो मन में आये कह सके और कर सके | किसी भी चीज का कोई बंधन नहीं है , किसी बात से डरने की जरुरत नहीं है और सबसे बड़ी बात समाज का भय नहीं है , जिस बात से हमें ख़ुशी मिलती है हम वही करते है | “
कोमल बड़े ध्यान से अंकिता की बात सुन रही थी | वो जानती थी की जब उसकी दीदी इस तरह से उससे कुछ बताती है तो बात बहुत सीरियस होती है इसलिए वो कुछ मिस नहीं करना चाहती थी |
“पापा और मम्मी ने अपने बच्चो को जिस तरह से पाला है , वो उसी तरह से व्यवहार कर रहे है , अब चूँकि हम एक मध्यम वर्गीय परिवार , जिसकी सोच समाज और रिश्तेदारों की सोच के साथ ही चलती है , से है इसलिए ये सब तुम्हे थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन परिवार में इतना खुलापन इसलिए रखा गया है ताकि अगर तुम्हे कल को कोई भी प्रॉब्लम आये तो घरवालों के साथ खुलकर शेयर कर सको | आज जो तुमने पापा और खुशबु के बीच होते हुए देखा वो इसी प्यार और परवरिश का हिस्सा है | अगर तुम्हारा मन किसी के लिए प्यार जताने को कर रहा है तो तुम बेझिझक उससे प्यार जता सकते हो | आलोक भी अपनी मम्मी से ऐसे ही प्यार करते है | अयान भी अपने मम्मी से ऐसे ही प्यार करते है , खुशबु और मैं पापा से उतना ही प्यार करते जितना पापा हमें करते है | इसमें कुछ भी गलत नहीं है “
“और अगर कोई हेल्प चाहिए हो तो किसी से भी मांग सकते है ” कोमल ने अंकिता की बात का समर्थन किया |
” हां एकदम सही बात ! अब मैं तुम्हे एक उदहारण देती हु , घर में जवान होते बच्चे अगर माँ बाप के डर से अपने साथ होने वाली घटनाओ को छुपाने लगे तो माँ बाप का लिए मुश्किल होगा की नहीं “
“हां बात तो सही है दीदी “
“बस इसीलिए किसी भी माँ बाप को अपने बच्चो का दिल जीतना पड़ता है और वही इस घर में हो रहा है , अभी तुम्हारे लिए ये सब चीजे थोड़ी नयी हो सकती है लेकिन धीरे धीरे हर चीज की प्रैक्टिस हो जाएगी फिर तुम्हे यही चीजे अच्छी लगनी लगेगी “
“हां दीदी , मुझे तो अभी से ये घर बहुत अच्छा लगने लगा है , मतलब इतनी सुख सुविधाएं , नौकर चाकर सब कुछ तो है यहाँ “
“हां सही कहा , अच्छा ठीक है अब सो जाओ , अलोक तुम्हारे लिए गिफ्ट लाये है , सुबह सुबह तुम्हे खोलना है ” अंकिता ने कम्बल कोमल के ऊपर डालते हुए कहा |
“अभी खोल सकती हु दीदी ? प्लीज ना ” कोमल ने अंकिता का हाथ पकड़ कर उसे बाहर जाने से रोका
“जी नहीं ! कहा न कल तो कल, अब चुपचाप सो जाओ ताकि कल जल्दी उठा पाओ “
“गुड नाईट दीदी ”
“गुड नाईट छिपकली ” अंकिता ने एक हलकी मुस्कान के साथ कोमल का गेट बंद कर दिया |
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