Aaga Peechha Munshi Premchand आगा-पीछा मुंशी प्रेम चंद

  Aaga Peechha Munshi Premchand आगा-पीछा मुंशी प्रेम चंद रूप और यौवन के चंचल विलास के बाद कोकिला अब उस कलुषित जीवन के चिह्न को आँसुओं से धो रही थी। विगत जीवन की याद आते ही उसका दिल बेचैन हो जाता और वह विषाद और निराशा से विकल होकर पुकार उठती हाय ! मैंने संसार … Read more

Abhilasha Munshi Premchand अभिलाषा मुंशी प्रेम चंद

  Abhilasha Munshi Premchand अभिलाषा मुंशी प्रेम चंद कल पड़ोस में बड़ी हलचल मची। एक पानवाला अपनी स्त्री को मार रहा था। वह बेचारी बैठी रो रही थी, पर उस निर्दयी को उस पर लेशमात्र भी दया न आती थी। आखिर स्त्री को भी क्रोध आ गया। उसने खड़े होकर कहा, बस, अब मारोगे, तो … Read more