Aaga Peechha Munshi Premchand आगा-पीछा मुंशी प्रेम चंद
Aaga Peechha Munshi Premchand आगा-पीछा मुंशी प्रेम चंद रूप और यौवन के चंचल विलास के बाद कोकिला अब उस कलुषित जीवन के चिह्न को आँसुओं से धो रही थी। विगत जीवन की याद आते ही उसका दिल बेचैन हो जाता और वह विषाद और निराशा से विकल होकर पुकार उठती हाय ! मैंने संसार … Read more