Harry Potter and the Deathly Hallows Chapter 2 हैरी पॉटर और मौत के तोहफ़े —— जे.के रॉलिंग

 




——Harry Potter and the Deathly Hallows  

 Chapter 2 हैरी पॉटर और मौत के तोहफ़े —— जे.के रॉलिंग




अध्याय    2



हैरी के हाथ से खून निकल रहा था। अपने दाएँ हाथ को बाएँ हाथ में पकड़कर मन ही मन गालियाँ देते हुए उसने कंधे से धक्का देकर अपने बेडरूम का दरवाज़ा खोला। चीनी मिट्टी की किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ आई : उसका पैर ठंडी चाय के कप पर पड़ गया था, जो उसके बेडरूम के दरवाज़े के बाहर फ़र्श पर रखा था।


‘लानत है – ?’


उसने इधर-उधर देखा। प्रिविट ड्राइव के मकान नंबर चार की


सीढ़ियाँ वीरान थीं। शायद डडली ने उसके मज़े लेने के इरादे से दरवाज़े के ठीक सामने चाय का कप रख दिया होगा। हैरी ने खून बहते हाथ को ऊपर उठाया और दूसरे हाथ से कप के टुकड़े बटोरकर लबालब भरे कूड़ेदान में डाल दिए, जो उसके बेडरूम के दरवाजे के भीतर दिख भर रहा था। फिर वह अपनी उँगली नल के पानी के नीचे धोने के लिए बाथरूम की तरफ़ भागा। उसे यह बात मूर्खतापूर्ण, निरर्थक, बहुत चिढ़ाने वाली लग रही थी कि वह अब भी चार दिन तक जादू नहीं कर सकता लेकिन उसे यह स्वीकार करना पड़ा कि उसकी उँगली में हुआ घाव उसकी योजना गड़बड़ा सकता था और उसे जादू से घाव ठीक करना नहीं आता था। उसे एहसास हुआ कि उसकी जादुई शिक्षा में यह एक गंभीर कमी थी, ख़ास तौर पर उसकी भावी योजनाओं के संदर्भ में। उसने फैसला किया कि वह हर्माइनी से में इसका तरीक़ा ज़रूर पूछेगा। फिर उसने टॉयलेट पेपर का एक बड़ा टुकड़ा लिया और उससे फैली हुई चाय जैसे-तैसे साफ़ कर दी। इसके बाद अपने बेडरूम में लौटकर उसने ज़ोर से दरवाज़ा लगा लिया।


हैरी ने सुबह अपने स्कूल के संदूक को छह साल बाद पहली बार 



हैरी पॉटर


पूरा ख़ाली किया था। अब तक तो हर साल स्कूल शुरू होते समय वह इसमें ऊपर रखे तीन-चौथाई सामान को बाहर निकालकर उसमें से कुछ चीज़ों को बदल देता था, हटा देता था या नई चीजें रख लेता था। नीचे का सामान – पुरानी क़लमें, बीटल की सूखी आँखें, छोटे पड़ गए मोज़े – ज्यो का त्यों संदूक में ही पड़ा रहता था। कुछ मिनट पहले हैरी ने इसी ढेर में अपना हाथ डाला था। फ़ौरन उसके दाहिने हाथ की चौथी उँगली में तेज़ दर्द हुआ और जब उसने उँगली बाहर निकाली, तो यह खून में लथपथ थी।


 अब वह थोड़ी ज़्यादा सावधानी से यह काम करने लगा। उसने एक बार फिर घुटनों के बल बैठकर संदूक की तलहटी टटोली। उसमें से एक पुराना बैज निकला, जिस पर सेडरिक डिगोरी हीरो है लिखा था, जो बीच-बीच में पॉटर जीरो है में बदल रहा था। तलहटी में हैरी को एक टूटा हुआ और घिसा-पिटा मुखबिर यंत्र भी मिला। इसके अलावा ‘आर.ए.बी.’ नामक जादूगर के संदेश वाला सुनहरा लॉकेट भी था और आखिरकार उसे वह नुकीली चीज़ मिल ही गई, जिससे उसकी उँगली कटी थी। वह उसे देखते ही फ़ौरन पहचान गया। यह उस जादुई आईने का दो इंच लंबा टुकड़ा था, जो उसके मृत गॉडफादर सिरियस ने उसे दिया था। हैरी ने उसे एक तरफ़ रखकर सावधानी से बाक़ी का संदूक टटोला, लेकिन संदूक में सबसे नीचे चमकती धूल की तरह पड़े काँच के चूरे को छोड़कर सिरियस के आख़िरी तोहफ़े का और कोई अवशेष नहीं था।



हैरी ठीक से बैठकर उस नुकीले टुकड़े की जाँच करने लगा, जिससे उसकी उँगली पर घाव हुआ था। उसे उसमें अपनी चमकती हरी आँखों के प्रतिबिंब के सिवाय और कुछ नज़र नहीं आया। फिर उसने उस टुकड़े को सुबह के दैनिक जादूगर के ऊपर रख दिया, जो पलंग पर बिना खुला पड़ा था। उसने कटु यादों के अचानक आए तूफ़ान को रोकने की कोशिश की। टूटे आईने की यादों और अफ़सोस की टीमों को दबाने के लिए उसने संदूक में भरे बाक़ी अटाले पर हमला कर दिया।


संदूक को पूरी तरह ख़ाली करने और उसमें रखी बेकार चीजें हटाने में उसे एक घंटा और लग गया। बचे हुए सामान को उसने दो ढेरों में जमा दिया। एक ढेर में वह सामान था, जिसकी उसे आगे ज़रूरत थी। दूसरे में वह सामान था, जिसकी अब उसे आगे ज़रूरत नहीं पड़ेगी। स्कूल और क्विडिच के दुशाले, कड़ाही, चर्मपत्र, कलमें तथा उसकी ज़्यादातर पुस्तकें, जिन्हें वह यहीं छोड़कर जाने वाला था, एक कोने में पहुँच गईं। उसने सोचा कि उसके अंकल-आंटी इन चीज़ों के साथ जाने क्या सलूक करेंगे। शायद  रात के अंधेरे में उन्हें जला देंगे, जैसे वे किसी भयंकर अपराध का सबूत हों। उसने अपने मगलू कपड़े, अदृश्य चोगा, काढ़ा बनाने का सामान, कुछ ख़ास पुस्तकें, हैग्रिड का दिया एलबम, कुछ चिट्ठियाँ और छड़ी एक पुराने बैग में जमा लीं। बैग के सामने वाली जेब में हॉगवर्टस का नक्शा और ‘आर.ए.बी.’ वाला लॉकेट था। लॉकेट को यह सम्मानित जगह इसके क़ीमती होने के कारण नहीं दी गई थी – यह बिलकुल मूल्यहीन था – बल्कि इसलिए दी गई थी, क्योंकि इसे हासिल करने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई गई थी।


सामने हैरी की डेस्क पर अख़बारों का काफ़ी बड़ा ढेर रखा था, जिसके पास उसकी सफ़ेद उल्लू हेडविग बैठी थी। ये अख़बार तभी से प्रतिदिन इकट्ठे हो रहे थे, जब से हैरी गर्मियों में प्रिविट ड्राइव में रहने आया था।


उसने खड़े होकर अंगड़ाई ली और डेस्क तक गया। जब वह अख़बारों को सरसरी तौर पर देखकर एक-एक करके कचरे के ढेर में फेंकने लगा, तो हेडविग ने कोई हलचल नहीं की। हेडविग या तो सो रही थी या फिर सोने का नाटक कर रही थी। वह हैरी से नाराज़ थी, क्योंकि वह इन दिनों उसे पिंजरे से बहुत कम समय बाहर रहने दे रहा था।


अख़बारों के ढेर के अंत में पहुँचने के बाद हैरी ने अपनी रफ़्तार कम कर ली। उसे एक ख़ास अख़बार की तलाश थी, जो उसके प्रिविट ड्राइव में रहने आने के कुछ समय बाद ही आया था। उसे याद था कि उसके पहले पन्ने पर हॉगवर्ट्स में मगलू अध्ययन विषय की टीचर चैरिटी बरबेज़ के इस्तीफे की छोटी सी खबर थी। आखिरकार उसे वह अख़बार मिल गया। पेज नंबर दस को पलटते हुए वह कुर्सी पर बैठकर उस लेख को दोबारा पढ़ने लगा, जिसकी उसे तलाश थी। .


एल्वस डम्बलडोर की याद एल्फ़ियस डोज


मैं ग्यारह साल की उम्र में एल्बस डम्बलडोर से पहली बार मिला था, तब हम दोनों पहली बार हॉगवर्ट्स जा रहे थे। हम एक-दूसरे की ओर तत्काल आकर्षित हो गए, क्योंकि उस वक्त हम दोनों ही खुद को बाहरी मान रहे थे। स्कूल आने से कुछ समय पहले ही मुझे ड्रैगन पॉक्स हो गई थी। हालाँकि हॉगवत् पहुँचने तक संक्रमण का ख़तरा नहीं बचा था, लेकिन




हैरी पॉटर


मेरे चेहरे पर मौजूद दानों के निशानों और हरी रंगत के कारण ज़्यादातर लोग मेरे पास आने में झिझक रहे थे। उधर एल्बस अनचाही कुख्याति के बोझ के साथ हॉगवर्ट्स गए थे। बमुश्किल एक साल पहले उनके पिता पर्सिवल ने तीन मगलू बच्चों पर खूखार हमला कर दिया था और इस अपराध के लिए उन्हें सज़ा सुनाई गई थी।


एल्बस ने कभी इस बात से इंकार करने की कोशिश नहीं की कि उनके पिता (जिन्होंने बाद में अज्काबान में दम तोड़ दिया था) ने वह अपराध किया था। जब मैंने हिम्मत करके उनसे इस बारे में पूछा, तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके पिता में यक़ीनन अपराधी थे। उसके बाद डम्बलडोर ने उस दुखद घटना के बारे में कभी बात नहीं की, हालाँकि उनसे ऐसा करवाने की काफ़ी कोशिशें की गईं। दरअसल, कुछ लोग तो उनके पिता के काम को प्रशंसा भरी नज़रों से देखते थे और यह सोचते थे कि एल्बस भी मगलू-विरोधी होंगे। उन लोगों की सोच बिलकुल गलत थी। जैसा एल्बस को जानने वाला कोई भी व्यक्ति गवाही दे सकता है, उन्होंने जीवन में कभी भी मगलू-विरोधी नज़रिया नहीं दिखाया। सच तो यह है कि मगलुओं के अधिकारों की प्रवल हिमायत की वजह से बाद के वर्षों में कई लोग उनके दुश्मन बन गए।


बहरहाल, कुछ ही महीनों में एल्वस की ख्याति उनके पिता की कुख्याति से आगे निकल गई। फ़र्स्ट ईयर ख़त्म होते-होते वे वे मगलू-विरोधी जादूगर के बेटे के रूप में नहीं, बल्कि स्कूल के अब तक के सबसे होनहार विद्यार्थी के रूप में मशहूर हो गए। उनका दोस्त बनना हमारी खुशकिस्मती थी, क्योंकि उनकी मिसाल से हमें लाभ हुआ। साथ ही उनकी मदद और प्रोत्साहन से भी, जो वे हमेशा उदारता से देते थे। स्कूल से निकलने के बाद उन्होंने मुझे बताया कि उस वक़्त भी उन्हें एहसास था कि सिखाने में उन्हें सबसे ज़्यादा खुशी मिलती है।


उन्होंने स्कूल का हर पुरस्कार ही नहीं जीता, बल्कि जल्दी ही उस दौर के उल्लेखनीय जादूगरों के साथ नियमित पत्राचार भी करने लगे, जिनमें मशहूर कीमियागर निकोलस फ्लामेल, चर्चित इतिहासकार बाथिल्डा बैगशॉट और जादुई सिद्धांतकार 


एडलबर्ट वैफ़लिंग शामिल थे। रूपांतरण आज, सम्मोहन की चुनौतियाँ और व्यावहारिक काढ़ा-निर्माता जैसे महत्वपूर्ण प्रकाशनों में उनके कई शोधपत्र छपे। डम्बलडोर का कैरियर बेहद उज्ज्वल नज़र आ रहा था और इकलौता सवाल यही था कि वे कब जादू मंत्री बनेंगे। हालाँकि बाद के वर्षों में भी अक्सर उनके मंत्री बनने की अटकलें लगाई गईं, लेकिन उनके मन में मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा कभी थी ही नहीं।

 हॉगवर्ट्स में हमारे पढ़ाई शुरू करने के तीन साल बाद एल्बस का भाई एबरफ़ोर्थ भी वहाँ आ गया। उन दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क था। एबरफ़ोर्थ की पढ़ाई में ख़ास दिलचस्पी नहीं थी। वह एल्बस की तरह तर्कपूर्ण बातचीत से नहीं, बल्कि कुश्ती लड़कर मतभेद सुलझाना ज़्यादा पसंद करता था। बहरहाल, यह कहना बिलकुल गलत है, जैसा कइयों ने कहा है कि दोनों भाइयों में दोस्ती नहीं थी। उनके आपसी संबंध अच्छे थे, जितने कि दो इतने अलग किस्म के भाइयों के हो सकते थे। एबरफ़ोर्थ के नज़रिए से देखें, तो एल्बस की छाया में रहना कोई आरामदेह अनुभव नहीं था। हर क्षेत्र में एल्बस से पीछे रहना उनके आपस में दोस्त बनने के बीच स्पष्ट जोखिम था और भाई के रूप में भी यह ज़्यादा आनंददायक नहीं हो सकता था।


हॉगवर्ट्स से निकलने के बाद एल्बस और मैं एक साथ दुनिया का पारंपरिक भ्रमण करना चाहते थे। अपना कैरियर शुरू करने से पहले हम विदेशी जादूगरों से मिलना-जुलना चाहते थे। बहरहाल, किस्मत को यह मंजूर नहीं था। हमारी यात्रा शुरू होने के एक दिन पहले ही एल्बस की माँ केंड्रा की मौत हो गई और एल्बस परिवार के मुखिया बन गए। केंड्रा की अंत्येष्टि में शामिल होने और श्रद्धांजलि देने के लिए मैंने अपनी यात्रा कुछ दिनों के लिए टाल दी और इसके बाद मैं अकेले ही दुनिया की सैर करने चल दिया। एल्बस को अपने छोटे भाई और बहन की देखभाल करनी थी। इसके अलावा पैसों की तंगी भी थी, इसलिए एल्बस के मेरे साथ जाने का सवाल ही नहीं था।


यह हमारे जीवन का ऐसा दौर था, जिसमें हमारे बीच बहुत

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कम संपर्क रहा। मैं एल्बस को पत्र लिखता रहा और शायद थोड़ी असंवेदनशीलता से अपनी यात्रा के रोचक प्रसंग बताता रहा, जिनमें ग्रीस में दैत्यों से बाल-बाल बचने से लेकर मिस्र के कीमियागरों के प्रयोगों तक के वर्णन शामिल थे। उनके पत्रों से मुझे उनकी दिनचर्या के बारे में बहुत कम जानकारी मिली, हालाँकि मुझे अंदाज़ा था कि इतने प्रतिभाशाली जादूगर को घरेलू ज़िंदगी कितनी कुंठाजनक और बोझिल लग रही होगी। मैं दुनिया की सैर का लुत्फ़ उठा रहा था। बहरहाल, एक साल लंबी यात्रा के अंत में मुझे यह दहशत भरी ख़बर मिली कि डम्बलडोर परिवार में एक और हादसा हो गया था। डम्बलडोर में की बहन एरियाना भी चल बसी थी।


– हालाँकि एरियाना काफ़ी समय से बीमार थी, लेकिन माँ के बाद उसके भी दुनिया से चले जाने से दोनों भाइयों पर गहरा प्रभाव पड़ा। एल्बस के सबसे करीबी लोग – और मैं खुद को उन खुशनसीब लोगों में गिनता हूँ – सहमत हैं कि एरियाना की मौत और इस बारे में एल्बस के व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के एहसास (हालाँकि ज़ाहिर है, इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी) ने उन पर अमिट छाप छोड़ी।


लौटने पर मुझे एक ऐसा युवक दिखा, जो अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा दुख झेल चुका था। एल्बस पहले से ज़्यादा गंभीर हो गए थे। उनकी बातों से हँसी-मज़ाक़ गायब हो चुका था। उनका दुख इस बात से और भी बढ़ गया कि एरियाना की मौत से दोनों भाइयों के संबंध प्रगाढ़ होने के बजाय टूट गए। (आगे चलकर यह दरार भर गई – बाद के वर्षों में उनका रिश्ता दोबारा ठीक हो गया। हालाँकि इसे प्रगाढ़ तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन निश्चित रूप से यह सामंजस्यपूर्ण तो था ही।) बहरहाल, उसके बाद डम्बलडोर अपने माता-पिता या एरियाना के बारे में बहुत कम बातें करते थे और उनके दोस्तों ने भी उनके परिवार का ज़िक्र करना छोड़ दिया।


इसके बाद के वर्षों की विजय यात्रा के वर्णन का काम मैं दूसरे लोगों पर छोड़ता हूँ। जादूगरों के ज्ञान के क्षेत्र में डम्बलडोर के असंख्य योगदान भावी पीढ़ियों को लाभ पहुँचाएँगे, जिनमें ड्रैगन के खून के बारह प्रयोगों की उनकी खोज शामिल है। इसके अलावा जादूगर न्यायसभा के प्रमुख वारलॉक के रूप में उन्होंने अपने कई निर्णयों में असाधारण ज्ञान का परिचय दिया। आज भी लोग यह मानते हैं कि 1945 में डम्बलडोर और ग्रिन्डेलवाल्ड के बीच हुआ द्वंद्वयुद्ध अतुलनीय है। इसे देखने वालों ने लिखा है कि इन दोनों असाधारण जादूगरों को युद्ध करते देखकर उन्हें दहशत और आश्चर्यमिश्रित श्रद्धा का मिला-जुला एहसास हुआ। डम्बलडोर की विजय और जादूगरों की दुनिया पर पड़े इसके परिणामों को जादुगरों के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है – गोपनीयता के राष्ट्रीय अधिनियम या तुम-जानते-हो-कौन के पतन की ही तरह।


एल्बस डम्बलडोर कभी घमंडी या बड़बोले नहीं रहे। वे हर व्यक्ति में अच्छे गुण खोज सकते थे, चाहे वह कितना ही महत्वहीन या दीन-हीन दिख रहा हो। मेरा मानना है कि शुरुआती झटकों के कारण वे बहुत मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण बन गए थे। मुझे उनकी कमी कितनी खलेगी, यह मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता, लेकिन मेरी क्षति जादूगर संसार को हुई क्षति की तुलना में कुछ भी नहीं है। इस बारे में कोई सवाल ही नहीं किया जा सकता कि वे हॉगवर्ट्स के सबसे प्रेरक और लोकप्रिय हेडमास्टर थे। वे उसी तरह मरे, जिस तरह वे हमेशा जिए थे : बहुसंख्यक लोगों की भलाई करते हुए। आख़िरी समय तक वे दीन-दुखियों की तरफ़ मदद का हाथ बढ़ाने के उतने ही इच्छुक थे, जितना मुझसे पहली मुलाक़ात वाले दिन वे ड्रैगन पॉक्स के शिकार छोटे बच्चे की ओर हाथ बढ़ाने के : इच्छुक थे।


1 हैरी ने पढ़ना खत्म कर दिया, लेकिन श्रद्धांजलि के साथ छपी तस्वीर को निहारता रहा। डम्बलडोर के चेहरे पर जानी-पहचानी, प्यारी मुस्कान थी, लेकिन जब वे अपने आधे चाँद के आकार के चश्मे के ऊपर से झाँके, तो हैरी को लगा, जैसे वे उसका एक्स-रे कर रहे हों।


हैरी को लगता था कि वह डम्बलडोर को बहुत अच्छी तरह जानता है, लेकिन इस श्रद्धांजलि को पढ़ने के बाद उसे यह मानना पड़ा कि वह उन्हें के बिलकुल भी नहीं जानता था। एक बार भी उसने बच्चे या जवान डम्बलडोर की कल्पना नहीं की थी। उसे लगता था, वे हमेशा ऐसे ही रहे 



हैरी पॉटर


होंगे – सफ़ेद बालों वाले, सम्मानजनक और बूढ़े। किशोर डम्बलडोर की कल्पना करना उतना ही अजीब था, जितना मूर्ख हाइनी या दोस्ताना विस्फोटक अग्निडंक की कल्पना करना।


> उसके मन में कभी डम्बलडोर से उनके अतीत के बारे में पूछने का ख्याल ही नहीं आया था। बेशक उसका पूछना अजीब और उदंडतापूर्ण लगता, लेकिन आख़िर सभी जानते थे कि डम्बलडोर ने ऐतिहासिक द्वंद्वयुद्ध में ग्रिन्डेलवाल्ड को हराया था, फिर भी हैरी ने डम्बलडोर से इसके बारे में कभी कुछ नहीं पूछा था। उसने उनके बाक़ी मशहूर कारनामों के बारे में भी कभी सवाल नहीं किया था। नहीं, डम्बलडोर और हैरी ने तो हमेशा हैरी, हैरी के अतीत, हैरी के भविष्य, हैरी की योजनाओं के बारे में बातचीत की थी तथा अब हैरी को ऐसा लग रहा था कि उसके भविष्य के इतने ख़तरनाक तथा अनिश्चित होने के बावजूद वह कई ऐसे अवसर चूक गया था, जब वह डम्बलडोर से उनके बारे में ज्यादा जानकारी हासिल कर सकता था। उसने अपने हेडमास्टर से ज़िंदगी में सिर्फ एक ही व्यक्तिगत सवाल पूछा था और उसका अंदाज़ा था कि डम्बलडोर ने उसका जवाब ईमानदारी से नहीं दिया था :


‘जब आप दर्पण में देखते हैं, तो आपको क्या दिखता है?’ ‘मुझे? मैं देखता हूँ कि मेरे हाथ में मोटे ऊनी मोज़े हैं।’


कुछ पलों तक ख्यालों में खोए रहने के बाद हैरी ने दैनिक जादूगर में छपी उस श्रद्धांजलि को काटकर सावधानी से तह किया और उसे व्यावहारिक सुरक्षात्मक जादू और गुप्त कलाओं के विरुद्ध उसके प्रयोग पुस्तक में रख लिया। फिर उसने बाक़ी बचा अख़बार कचरे के ढेर में फेंक दिया और कमरे की तरफ़ देखने लगा। अब यह काफ़ी साफ़ दिख रहा था। सिर्फ दो ही चीज़े करीने से नहीं जमी थीं – आज का दैनिक जादूगर, जो अब भी पलंग पर पड़ा था और उसके ऊपर रखा टूटे आईने


का टुकड़ा। हैरी ने पलंग के पास जाकर आईने के टुकड़े को अख़बार पर से हटाकर अख़बार खोला। सुबह उल्लू से अख़बार लेते समय उसने सिर्फ हेडलाइन देखकर ही अख़बार एक तरफ़ फेंक दिया था, क्योंकि हेडलाइन में वोल्डेमॉर्ट के बारे में कुछ नहीं छपा था। हैरी को पूरा यक़ीन था कि मंत्रालय वोल्डेमॉर्ट की ख़बरें न छापने के लिए दैनिक जादूगर पर दबाव डाल रहा होगा। यही वजह थी कि वह इस ख़बर को नहीं देख पाया था। पहले


पेज के नीचे वाले आधे हिस्से में डम्बलडोर की तस्वीर थी।



डम्बलडोर थोड़ी उलझन में दिख रहे थे और तस्वीर के ऊपर हेडलाइन थी: डम्बलडोर – आखिर सच्चाई पता चल ही गई? +


अगले सप्ताह उस दोषपूर्ण जादूगर की सनसनीखेज़ कहानी प्रकाशित हो रही है, जिसे कई लोग उनकी पीढ़ी का महानतम जादूगर मानते हैं। इस जीवनी में रीटा स्कीटर डम्बलडोर की शांत, सौम्य बुद्धिमत्ता वाली लोकप्रिय छवि की बखिया उधेड़कर उनके उथल-पुथल भरे बचपन, दिग्भ्रमित युवावस्था, द्वेषों और स्याह रहस्यों का खुलासा करती हैं। जब वे जादू मंत्री बन वे सकते थे, तो फिर वे सिर्फ़ हेडमास्टर बनकर ही क्यों संतुष्ट रहे ? मायापंछी का समूह नाम के खुफ़िया संगठन का असली मकसद क्या था? डम्बलडोर की मौत की हक़ीक़त क्या थी?


इन जैसे बहुत से सवालों के जवाब आपको इस नई हंगामाखेज़ जीवनी में मिलेंगे, जिसका शीर्षक है एल्बस डम्बलडोर का जीवन और झूठ का सिलसिला। इस जीवनी की लेखिका रीटा स्कीटर से बेट्टी ब्रेथवेट का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, पेज 13 पर।


हैरी ने अखबार के पन्ने तेज़ी से पलटे और पेज 13 पर पहुँच गया। लेख में ऊपर एक और जानी-पहचानी तस्वीर थी : एक महिला, जो रत्नजड़ित चश्मा पहने थी, जिसके बाल घुघराले तथा सुनहरे थे, जिसके दाँत दिख रहे थे और जो विजयी अंदाज़ में मुस्कराती हुई उँगलियों से उसकी ओर इशारा कर रही थी। इस भयानक छवि को नज़रअंदाज़ करने की पूरी कोशिश करते हुए हैरी पढ़ने लगा।


रीटा स्कीटर का व्यक्तित्व बहुत ही भावुक और दयालु है, जो भंडाफोड़ करने वाली उनकी मशहूर छवि से मेल नहीं खाता है। अपने आरामदेह घर के हॉल में मेरा स्वागत करते हुए वे मुझे वे एक कप चाय, केक और नवीनतम गपशप के लिए सीधे किचन में ले गईं।


रीटा स्कीटर ने कहा, ‘ज़ाहिर है, डम्बलडोर हर जीवनी-लेखक के लिए वरदान हैं। इतना लंबा और घटनापूर्ण जीवन! मुझे पूरा यकीन है कि मेरी पुस्तक के बाद भी उनकी बहुत सी जीवनियाँ प्रकाशित होंगी।’



हैरी पॉटर


स्कीटर ने निश्चित रूप से यह काम बहुत फुर्ती से किया है। डम्बलडोर की जून में हुई रहस्यमयी मौत के सिर्फ चार हफ्ते बाद ही उनकी नौ सौ पेज की पुस्तक पूरी हो गई। मैंने स्कीटर से पूछा कि उन्होंने यह काम इतनी तेज़ी से कैसे कर लिया।


‘ओह, अगर आप इतने लंबे समय से पत्रकार हों, जितनी कि मैं हूँ, तो डेडलाइन पर काम पूरा करना आदत बन जाता है। मैं जानती थी कि जादूगर दुनिया डम्बलडोर की पूरी कहानी जानने के लिए बेताब है और मैं इस आवश्यकता को पूरी करने वाली पहली लेखिका बनना चाहती थी।’


इस पर मैंने जादूगर न्यायसभा के विशेष सलाहकार और एल्बस डम्बलडोर के पुराने मित्र एल्फ़ियस डोज की बहुप्रचारित टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने इस जीवनी के बारे में कहा है, ‘स्कीटर की पुस्तक में चॉकलेट मेंढक कार्ड से भी कम सच्चाई है।’


स्कीटर सिर झटककर हँस दीं।


‘बेचारा डॉजी! मुझे याद है कि कुछ साल पहले मैंने जलमानुषों के हक़ों के बारे में उसका इंटरव्यू लिया था। वह सठिया चुका है। उसे लग रहा था कि हम विंडरमियर झील की तलहटी में बैठे थे। मुझे बार-बार ट्राउट से सावधान करता रहा।’


एल्फ़ियस डोज जैसी बात कई और लोगों ने भी कही है कि इस पुस्तक में ज़्यादा दम नहीं है। क्या स्कीटर को यह नहीं लगता कि डम्बलडोर के लंबे और असाधारण जीवन की पूरी तस्वीर हासिल करने के लिए सिर्फ चार हफ्ते का समय बहुत कम है?


स्कीटर मुस्कराते हुए और प्यार से अपनी उँगलियाँ टेबल पर बजाते हुए कहती हैं, ‘देखिए, आप और मैं दोनों ही अच्छी तरह जानते हैं कि गैलियनों से भरे मोटे थैले, “नहीं” शब्द को सुनने की अनिच्छा और अच्छी तीव्र-कथन क़लम के इस्तेमाल से लोगों से कितनी ज़्यादा जानकारी उगलवाई जा सकती है! वैसे लोग डम्बलडोर पर कीचड़ उछालने के लिए लाइन लगाए खड़े थे। जानते हैं, हर कोई उन्हें महान नहीं मानता है – उन्होंने


बहुत से महत्वपूर्ण लोगों को अपना दुश्मन बना लिया था। लेकिन डोज को हवाई-गरुड़अश्व से नीचे उतर आना चाहिए, क्योंकि मैंने एक ऐसे सूत्र से जानकारी उगलवा ली है, जिसके लिए ज्यादातर पत्रकार अपनी छडी देने तक को तैयार हो जाएँगे। इस सूत्र ने पहले कभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, हालाँकि वह डम्बलडोर की युवावस्था के सबसे उथल-पुथल भरे और गड़बड़झाले वाले दौर में उनके क़रीब रही थी।’


 स्कीटर की जीवनी के पूर्व-प्रचार से यह स्पष्ट है कि जो लोग डम्बलडोर के जीवन को बेदाग मानते हैं, उन्हें इसमें बहुत सी सदमे भरी ख़बरें मिलने वाली हैं। मैंने उनसे पूछा कि इस जीवनी में सबसे आश्चर्यजनक भंडाफोड़ कौन से हैं।


 स्कीटर ने हँसते हुए कहा, ‘छोड़ो भी बेट्टी, मैं अपनी पुस्तक की सारी बातें नहीं बताने वाली, वरना पुस्तक कौन ख़रीदेगा! लेकिन मैं इतना वादा ज़रूर करती हूँ कि जो लोग डम्बलडोर के जीवन को उनकी दाढ़ी की तरह पाक़-साफ़ मानते हैं, उन्हें नींद से जाग जाना चाहिए! मैं इतना ज़रूर बता देती हूँ, तुम जानते-हो-कौन के ख़िलाफ़ उनकी जोशीली बातें सुनने वाला कोई व्यक्ति सपने में भी नहीं सोच सकता था कि अपनी जवानी में उन्होंने भी गुप्त कलाओं में हाथ-पैर मारे थे! जिस जादूगर ने बुढ़ापे में सहनशीलता की वकालत की, युवावस्था में उसकी मानसिकता कोई ख़ास उदार नहीं थी! जी हाँ, एल्बस डम्बलडोर का अतीत बहुत दागदार था और उनका परिवार बड़ा अजीब था। वैसे इन बातों को छिपाने की उन्होंने काफ़ी कोशिश की थी।


मैंने पूछा कि क्या स्कीटर का इशारा डम्बलडोर के भाई एबरफ़ोर्थ की तरफ़ था, जिसे न्यायसभा ने पंद्रह साल पहले जादू के दुरुपयोग के लिए सज़ा दी थी और जिससे छुटपुट सनसनी फैली थी।


‘ओह, एबरफ़ोर्थ तो गोबर के ढेर का सिर्फ ऊपरी हिस्सा है,’ स्कीटर ने हँसते हुए कहा। ‘नहीं, नहीं, बकरियों पर जादू करने वाले दीवाने भाई से ज़्यादा बुरी बात है, मगलू-विरोधी पिता से भी ज़्यादा बुरी बात है – हालाँकि डम्बलडोर इन दोनों को भी गोपनीय नहीं रख पाए और न्यायसभा ने दोनों को 


हैरी पॉटर


सज़ा दी। नहीं, मैं तो उनकी माँ और बहन को लेकर उलझन में थी। थोड़ी छानबीन करने पर वहाँ मुझे बुराई का घोंसला मिला लेकिन, जैसा कि मैंने कहा है, विस्तृत जानकारी के लिए आपको इस पुस्तक के अध्याय नौ से अध्याय बारह तक पढ़ने का इंतज़ार करना होगा। इस वक्त तो मैं इतना ही कह सकती हूँ कि इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि डम्बलडोर ने कभी यह क्यों नहीं बताया कि उनकी नाक कैसे टूटी।’


परिवार के गड़े-मुर्दे उखाड़ने के अलावा क्या स्कीटर डम्बलडोर की प्रतिभा को नकारती हैं; आख़िर उन्होंने इतनी महत्वपूर्ण जादुई खोजें की हैं ?


‘उनमें दिमाग तो था,’ स्कीटर ने स्वीकार किया, ‘हालाँकि कई लोग अब सवाल करते हैं कि क्या उन्हें उनकी तमाम तथाकथित उपलब्धियों का सचमुच पूरा श्रेय मिलना चाहिए। जैसा कि मैंने अध्याय सोलह में खुलासा किया है, आइवर डिलॉन्सबाई का दावा है कि ड्रैगन के खून के आठ उपयोग उसने पहले ही खोज लिए थे और उसकी गलती यह थी कि उसने अपना शोधपत्र डम्बलडोर को “पढ़ने को” दे दिया था।’


मैंने कहा, लेकिन डम्बलडोर की कुछ उपलब्धियों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। जैसे, ग्रिन्डेलवाल्ड की मशहूर पराजय?


स्कीटर ने खुलकर मुस्कराते हुए कहा, ‘ओह, मुझे खुशी है कि आपने ग्रिन्डेलवाल्ड का ज़िक्र कर दिया। मुझे डर है कि डम्बलडोर की भव्य विजय पर जिन लोगों की आँखें खुशी से नम हो जाती होंगी, उन्हें बम के धमाके के लिए तैयार हो जाना चाहिए – या शायद गोबर बम के धमाके के लिए। बहुत ही घटिया झमेला था। मैं यहाँ बस इतना ही कहूँगी, दरअसल कोई ज़बर्दस्त द्वंद्वयुद्ध हुआ ही नहीं था। मेरी पुस्तक पढ़ने के बाद लोग इस नतीजे पर पहुँचने के लिए विवश होंगे कि ग्रिन्डेलवाल्ड ने अपनी छड़ी की नोक से एक सफ़ेद रूमाल निकाला था और चुपचाप हार मान ली थी!’


स्कीटर ने इस दिलचस्प विषय पर आगे कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। हमने बात उस विषय की ओर मोड़ दी, उनके पाठकों को बेशक बाक़ी मुद्दों से ज़्यादा रोचक लगेगा। जो

 स्कीटर ने तेज़ी से सिर हिलाते हुए कहा, ‘ओह हाँ, मैंने पॉटर-डम्बलडोर संबंध पर एक पूरा अध्याय लिखा है। बहुत से लोग उनके संबंध को अस्वस्थ, यहाँ तक कि भयानक भी मानते हैं। एक बार फिर, पूरी कहानी जानने के लिए पाठकों को मेरी पुस्तक ख़रीदनी होगी, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि डम्बलडोर ने शुरू से ही पॉटर में अस्वाभाविक रुचि ली। मुद्दे की बात यह है कि क्या यह उस लड़के के हित में था। ज़ाहिर है, हम सभी जानते हैं कि पॉटर ने किशोरावस्था में काफ़ी मुश्किलें झेली हैं।’


मैंने स्कीटर से पूछा कि क्या वे अब भी हैरी पॉटर के संपर्क में हैं, जिसका चर्चित इंटरव्यू उन्होंने पिछले साल लिया था : जिसमें पॉटर ने पहली बार खुलासा किया था कि तुम-जानते-हो-कौन लौट आया है।


‘ओह हाँ, हमारे बीच बहुत क़रीबी संबंध है,’ स्कीटर कहती हैं। ‘बेचारे पॉटर के बहुत कम सच्चे दोस्त रहे हैं और हमारी मुलाक़ात उसके जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में हुई थी – जादूगरी का त्रिकोणीय टूर्नामेंट। मैं शायद उन चुनिंदा जीवित लोगों में से हैं, जो यह दावा कर सकते हैं कि वे असली हैरी पॉटर को जानते हैं।’ 


इसके बाद हमने उन अफ़वाहों के बारे में बातें कीं, जो डम्बलडोर के आख़िरी घंटों के बारे में फैली हुई हैं। क्या स्कीटर का मानना है कि डम्बलडोर की मौत के वक्त पॉटर वहीं था ? ,


‘देखिए, मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहती – सब कुछ पुस्तक में बताया गया है – लेकिन हॉग महल के भीतर के गवाहों ने डम्बलडोर के गिरने, कूदने या धक्का खाने के बाद पॉटर को वहाँ से भागते हुए देखा था। बाद में पॉटर ने सीवियरस स्नेप के खिलाफ़ बयान दिया था, जिससे उसकी पुरानी दुश्मनी थी। क्या पॉटर की बात सच है? यह फैसला करना जादूगर समुदाय के हाथ में है – मेरी पुस्तक पढ़ने के बाद।’


इस दिलचस्प मोड़ पर मैंने स्कीटर से विदा ली। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने एक बेस्टसेलर पुस्तक लिख डाली है। इस वक्त डम्बलडोर के बड़ी संख्या में मौजूद प्रशंसक यह सोच-सोच



हैरी पॉटर


कर काँप रहे होंगे कि इसमें उनके प्रिय हीरो के बारे में जाने क्या भंडाफोड़ होने वाले हैं।


लेख पूरा पढ़ने के बाद भी हैरी सूनी आँखों से अख़बार के पन्ने को घूरता रहा। उसके भीतर हिकारत और गुस्सा उबलने लगा। उसने अख़बार को मुट्ठी में मरोड़कर गोल किया और पूरी ताक़त से दीवार पर फेंक दिया, जहाँ यह लबालब भरे कूड़ेदान के बाक़ी कूड़े में शामिल हो गया।


 वह अंधों की तरह कमरे में आगे बढ़ा। उसने कई ड्रॉअर खोलकर पुस्तकें निकाली और वापस वहीं रख दीं। उसे ज़रा भी पता नहीं था कि वह क्या कर रहा है। उसके दिमाग में तो बस रीटा के लेख के वाक्य गूंज रहे थे : पॉटर-डम्बलडोर संबंध पर एक पूरा अध्याय… बहुत से लोग उनके संबंध को अस्वस्थ, यहाँ तक कि भयानक भी मानते हैं … जवानी में उन्होंने भी गुप्त कलाओं में हाथ-पैर मारे थे मैंने एक ऐसे सूत्र से जानकारी उगलवा ली है, जिसके लिए ज़्यादातर पत्रकार अपनी छड़ी देने तक को तैयार हो जाएँगे …


‘झूठ!’ हैरी चिल्लाया और उसने खिड़की से अपने पड़ोसी को देखा, जो अपने लॉनमोअर को दोबारा चालू करने के लिए रुक गया था तथा घबराकर ऊपर देख रहा था।


हैरी धम्म से अपने पलंग पर बैठ गया। आईने का टूटा हुआ टुकड़ा उससे दूर उछल गया। उसने उसे दोबारा उठाया और अपनी उँगलियों में घुमाने लगा। वह डम्बलडोर के बारे में सोच रहा था और उन झूठों के बारे में, जिनसे रीटा स्कीटर उन्हें बदनाम कर रही थी 


एक नीली झलक। हैरी ठिठक गया और उसकी कटी हुई उँगली एक बार फिर आईने की नुकीली नोक पर फिसली। उसे वहम हुआ होगा, हाँ, ज़रूर यही हुआ होगा। उसने पीछे पलटकर देखा, लेकिन दीवार पेटूनिया आंटी के चुने हुए पीच रंग की थी। वहाँ ऐसी कोई चीज़ नहीं थी, जिससे आईने में नीली झलक दिख सके। उसने आईने के टुकड़े में दोबारा देखा, लेकिन उसे अपनी चमकती हरी आँख के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दिया। 1


उसे ज़रूर वहम हुआ होगा। और कुछ हो ही नहीं सकता। इसलिए वहम ही हुआ होगा, क्योंकि वह अपने मृत हेडमास्टर के बारे में सोच रहा था। अगर यक़ीन के साथ कुछ कहा जा सकता था, तो वह यह था कि एल्बस डम्बलडोर की चमकती नीली आँखें उसे दोबारा कभी नहीं दिखेंगी।


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