बहना का ख्याल मैं रखूँगा

बहना का ख्याल मैं रखूँगा

आज लगभग दस महीने हुए हैं मेरे साथ मेरी छोटी बहन शालिनी को रहते हुए, हमारे शहर के मकान में…
मैं पिछले चार साल से यहां रहता हूँ, बी.एस.सी करने के बाद मैं एक कम्पनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव की जाब करने लगा हूं, हमारा गांव यहां से 150 किमी की दूरी पर है, घर पर मां सरोजिनी और बहन शालिनी रहतीं हैं। मां पिता जी की जगह अनुकम्पा जाब पर बैंक में सहायिका हैं, खेती बाड़ी भी पर्याप्त है। खैर मैं नौकरी के साथ साथ इग्नू से पढ़ाई भी कर रहा हूं, मैं दो वर्ष ब्वायज हास्टल में रहने के बाद दो कमरों वाला छोटा मकान नगर निगम की स्कीम में मिल गया किस्तों पर और पिछले दो साल से मैं अपने निजी मकान में रहने लगा।

जिंदगी मस्त कट रही थी और मैं अपने गांव जाने वाला था ,,,

मेरी बहन शालिनी का इंटरमीडिएट का रिजल्ट आने पर मैंं घर आया तो मां ने बताया कि यह अब शालिनी BSc ही करेगी, और तुम्हारे शहर से ही करना चाह रही है तो मैंने कहा अच्छी बात है फार्म तो पहले ही डाल रखें हैं, देखते हैं कि किसी अच्छे कालेज में एडमिशन मिल जाये । मां ने कहा कि इसे अपने साथ ही ले जाओ और इससे तुम्हारे खाने पीने की भी सहूलियत हो जायेगी, मैं तुम लोगों से मिलने महीने पन्द्रह दिन में आती रहूंगी ।

शालिनी ने बहुत मेहनत से पढाई की और 89% मार्क्स लायी थी, मैंने देखा कि वह बहुत खुश है और उसने लेक्चरर बनने की इच्छा जाहिर की।
मेरी उम्र इस समय 24साल और शालिनी की 19 साल है, हम लोगों का रहन सहन का स्तर गांव के अन्य परिवारों से थोड़ा बेहतर है, घर पर मां साड़ी पहनती हैं और शालिनी सलवार सूट या स्कर्ट् टाप । मैं पांच साल से शहर में रहता हूँ इसलिये शालिनी और मेरे बीच कभी कोई तू तू मैं मैं नहीं हुई। हर रोज हम लोगों की फोन पर बात होती थी।

घर पर खाना खाते हुये रात में,

सरोजिनी – सागर बेटा, मैंने शालिनी की पैकिंग कर दी है, सुबह कितने बजे निकलना है।

सागर- मम्मी आज कल गर्मी बहुत हो रही है इसलिए सुबह 5 बजे वाली बस से निकलना ठीक रहेगा।

सरोजिनी- बेटा, जितने भी अच्छे कालेज हैं सभी में अप्लाई कर रखा है आनलाइन तूने पर देखना अगर अपने घर के पास ही एडमिशन मिल जाये तो बहुत ही अच्छा रहेगा।

शालिनी- भाईजी, कालेज अच्छा हो चाहे पास हो या दूर

सागर- ठीक है इसी हफ्ते में सभी कालेजों की लिस्ट जारी होगी, देखते हैं ।

सरोजिनी- और हां सागर, शालिनी को पहले जाकर थोड़ी शापिंग करा देना, कुछ डेलीवियर और कालेज जाने के लिए…

शालिनी- मां … वो भाई से वो भी

सागर- क्या बात है बहना

सरोजिनी- अरे कुछ नहीं सागर , शालिनी काफी दिनों से जीन्स वगैरह पहनना चाह रही है, मैंने कहा था जब बाहर पढऩे जाओगी तब पहनना, इसे इसकी पसंद के ही कपड़े दिलाना..

सागर- ओ के , मम्मी कपडों के अलावा भी काफी चीजें लेनी पड़ेंगी, मेरा तो अकेले कैसे भी चल जाता था, बाथरूम भी ठीक कराना है और पीछे कमरे की साफ-सफाई भी, शालिनी पीछे वाले कमरे में रहेगी जिससे इसकी पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो।

खाने के बाद मां ने कहा बच्चों जल्दी सो जाओ सुबह निकलना भी है, हम दोनों मां के ही बेड पर दायें बायें उनको लिपटकर सो गए ।
सुबह हम लोग जल्दी ही तैयार हो कर हाईवे पर आकर बस में बैठ गए, कगले कस्बे से भीड़ बढ़ती गई और आस-पास काफी लोग बस में खड़े खड़े सफर कर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक आदमी लगातार हमारी तरफ घूर रहा है, शालिनी विन्डो साइड बैठी बाहर देख रही थी,

जब मैंने गौर से देखा तो शालिनी का दुपट्टा खिसकने की वजह से उसके सीने के उभार का काफी हिस्सा दिख रहा था, मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूँ?
उस आदमी को टोकने से कोई फायदा नहीं था वह हटता तो दूसरा आ जाता।। कुछ देर सोचने के बाद मैंने धीरे से शालिनी के कान में कहा- अपना दुपट्टा ठीक करो बेटा…

बस अपनी रफ्तार से चली जा रही थी, शालिनी ने अब अपना दुपट्टा ठीक कर लिया था और हम लोग थोड़ी बहुत बातें करते हुए शहर आ गए, आटो लेकर अपने घर आ गए।

कालोनी के मकान को आगे हिस्से पर मैंने बड़ा गेट लगवा दिया था जिससे गेट बंद होने पर पूरा घर सुरक्षित था, मैंने गेट खोला और आटो से सामान उतारकर अंदर ले आया और गेट बंद कर लिया, गेट बंद होने पर बाहर से हमारे घर के अंदर का कुछ नहीं दिखता था.. । अंदर का रूम खोल कर जल्दी से मैंने कूलर चलाया, क्योंकि हम दोनों पसीने पसीने हो रहे थे गर्मी के कारण।

शालिनी आज हमारे मकान में पहली बार आयी थी तो उसने पीछे वाला कमरा, किचन, बाथरूम सब घूम घूम कर देख रही थी और हम लोग बातें कर रहे थे। मैंने गर्मी के कारण अपनी जीन्स शर्ट निकाल दी और अंडरवियर बनयान में बिस्तर पर लेट गया। शालिनी भी आगे बरामदे से पीछे कमरे तक कई चक्कर लगाकर हाथ मुंह धोकर मेरे पास ही बेड के साइड में बैठ गई। और हम लोग बात करने लगे।।

सागर- शालिनी, तुम भी कपड़े चेंज करलो और थोड़ा आराम करलो फिर हम लोग दोपहर बाद मार्केट चलेंगे।

शालिनी- नहीं नहीं भाई, मैं ऐसे ही ठीक हूं, और चेंज करके भी सूट ही पहनना है तो यही ठीक है

सागर- क्यों ? कोई हल्के कपड़े नहीं है क्या, नाईटी वगैरह

शालिनी- नहीं भाई

सागर- अच्छा कोई बात नहीं तुम ऐसा करो अभी मेरा बरमूडा और टीशर्ट पहन लो, शाम को हम लोग नये कपड़े लेंगे ही ।।

मेरी लम्बाई 5′ 10″ और शालिनी की 5′ 7″ । रंग हम दोनों का ही गोरा है, मैने उठकर पीछे कमरे से लाकर उसे कपड़े दिये और कहा ये पहन लो थोड़ा गर्मी कम लगेगी । शालिनी ने कपड़े लिए और पीछे कमरे मे जाकर चेंज करके मेरे पास आकर बैठ गई,

सागर- ओ हो.. कपड़े लेने की कोई जरूरत नहीं है, मेरा ही साइज फिट आ रहा है… (शालिनी ने टीशर्ट और नेकर पहली बार पहना था) ,

ये सुनकर शालिनी हंसने लगी और खड़े होकर मुझसे कहने लगी कि ये कपड़े तो बहुत आरामदायक हैं भैय्या, कितना फ्री लग रहा है ।।

मैंने उससे कहा अब तुम भी आराम कर लो, यहींं लेट जाओ अभी तुम्हारे लिए पीछे कमरे को साफ करके उसमें कूलर लगवा दूं,
शालिनी वहीं मेरे साथ ही लेट गई, सफर की थकान से हम दोनों जल्दी ही सो गए ।।।

सफर की थकान से हम दोनों एक ही बिस्तर पर सो रहे थे, दो छोटे दीवान जोड़ कर एक बेड जैसा बन गया था जिस पर दो लोग आराम से सो सकते थे। पीछे कमरे में एक सिंगल दीवान पड़ा था।

दोपहर के तीन बजे मेरी नींद खुली तो मुझे बहुत भूख लगी थी, मैं उठकर बाहर बरामदे में बेसिन में हाथ मुंह धोकर मैगी नूडल्स बनाने लगा ।फिर मैंने शालिनी को आवाज लगाकर जगाया, पर वह नहीं उठी।मैगी बनाने के बाद मैं कमरे में आकर शालिनी को हाथ लगाकर उठाने ही जा रहा था कि मैं एकदम से रुक गया। शालिनी इस वक्त करवट लेटी थी और उसके दोनों दूध के बीच की घाटी का काफी हिस्सा मेरी वी गले की टीशर्ट से दिख रहा था। हर बार सांस लेने के बाद उसके दूध भी फूल-पिचक रहे थे। मैं उसे जगाने के बजाय उसके पूरे बदन को उपर से नीचे की ओर देखने लगा । निक्कर में उसकी गोरी सुडौल भरी भरी जांघें और नीचे हल्के भूरे रंग के रोंयें से पैरों में ।अब मुझे एहसास हुआ कि मेरी बहन शालिनी बहुत ही खूबसूरत है और मां की ही तरह उसका शरीर भी हर हिस्से से खूबसूरत कटाव लिए है,,मैं शालिनी से बस कुछ इंच की दूरी पर खड़ा हुआ वहीं पर जैसे फ्रीज हो गया था । अचानक मुझे सुबह बस की बात याद आ गई कि कैसे वो आदमी शालिनी का दुपट्टा खिसकने के बाद उसके दूधों को घूर रहा था और यहां अब मैं खुद अपनी बहन के दूधों को हर सांस के साथ उठते बैठते देख रहा था।।मुझे बहुत अजीब सा लगा कि मैं ये क्या कर रहा हूं अपनी ही सगी बहन को मैं एक लड़की/औरत की तरह कैसे देखने लगा ।। मैंने बाहर बरामदे में आकर फिर से मुंह धोया और अंदर आकर शालिनी के दाहिने पैर को हिलाकर उसे जगाया …शालिनी को मैंने जगाया, उठते ही उसने एक अंगड़ाई ली और दोनों हाथ सिर के पीछे लेजाकर उसने अपने बालों को ठीक किया । एक बार फिर मेरी नजर बहन के बड़े बड़े स्तनों पर टिक गई जो उसके बाल संवारने से और भी बड़े दिख रहे थे। शालिनी उठकर टायलेट करके फ्रेश होकर आई और हमलोग ने नाश्ता किया,मैं- शालिनी तुम ऐसा करो कि अभी किचन में जरूरत की चीजों की लिस्ट बना लो, मैं तो ऐसे ही कुछ भी कहीं भी खा लेता था।हम लोग इधर से जाते समय किरानास्टोर पर दे देंगे और शापिंग से वापस आते में लेते आयेंगे।शालिनी- जी भाईजी,मैंं अभी भी चड्ढी बनयान मे ही था, असल मे अकेले रहने के कारण गर्मी के दिनों में मैं कम से कम कपड़ों में या नंगे रहना ही पसंद करता था, अकेले रहने के अपने मजे हैं,खैर शालिनी की मौजूदगी में नंगे रहने का सवाल ही नहीं था। मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया, हमारा बाथरूम और लैट्रीन ज्वाइंट है और उपर छत पर जाने वाले जीने के नीचे बना है, बाहर बरामदे में ही दूसरी साइड अपनी अपाचे बाईक रखता था और कपड़े भी वहीं सुखा लेता था मैं नहाकर वैसे ही चड्ढी बनयान पहनकर कमरे के अंदर आया तो शालिनी ने लिस्ट मेरे हाथ में दे दी, उसने इन 15 मिनट में ही किचन से लेकर डेलीयूज की लगभग सभी चीजों की लिस्ट बना दी थीं, हम दोनों ने आपस में बात करके लिस्ट फाईनल कर ली, ।मैंने शालिनी से कहाकि तुम भी जल्दी से नहाकर तैयार हो जाओ, शालिनी ने अपना बैग उठाकर बेड पर रखा और अपने लिए कपड़े निकालने लगी, मैं इस बीच कमरे की अलमारी में लगे बड़े आईने में अपने बाल खींच रहा था, शालिनी ने एक ग्रीन कलर का सूट निकाला और साथ में एक काली चड्ढी और सफेद समीज( स्लिप) निकाली, और मुझसे बोली – भाई मैं टावेल नहीं लाई हूं पुरानी थी काफी, अभी आपकी ही ले लूं !मैं – मैंने कहा हां ले लो बाहर ही है । उसे समझाते हुए कहा कि अब यहां कोई भी चीज के लिए पूछना नहीं न ही किसी चीज में शर्म हिचक रखना, जैसे चाहो, मस्त होकर रहो और पढ़ाई करो ।वह कपड़े लेकर नहाने बाथरूम में चली गई और मैं कपड़े पहनने लगा । कपड़े पहनने के बाद मैंने एक चीज ध्यान की, कि शालिनी ने ब्रा नहीं निकाली, ब्रा का खयाल मन में आते ही एक अजीब सी फीलिंग हुई। मुझे लगा वो शायद भूल गई है और पता नहीं क्या सोचकर मैं उसके बैग में ब्रा ढूंढने लगा, वो ज्यादा कपड़े नहीं लायी थी क्योंकि उसे नये स्टाइलिश लुक वाले कपड़े यहीं लेने थे। उसके बैग मे ब्रा नही मिली, मैंने बैग बंद कर बेड के नीचे रख दिया ।बाथरुम से शावर चलनेकी आवाज आ रही थी, मुझे अजीब सी उत्तेजना हो रही थी ।मैंने टीवी चला ली और न्यूज देखने लगा।शालिनी नहाकर कमरे में आयी तो एक अजीब सी सुगंध जैसी फैल गई, उसने सलवार सूट पहन रखा था और उसका सूट काफी टाईट फिटिंग का था जो उसपर बहुत अच्छा लग रहा था, वो आईने के सामने आ कर बाल ठीक करने लगी, बाल बनाते बनाते वह पूछने लगी कि आपको भी शापिंग करनी है अपने लिए ना ।मैं- नहीं अभी आज सिर्फ तुम्हारे लिए जरूरी कपडे ले लेते हैं फिर एडमिशन के बाद ले लेंगे। तुम बताओ क्या क्या लेना है।शालिनी- घर के डेलीवियर और कालेज जाने के लिए दो सेट ।मैंने बाइक निकाली और गेट लाक कर हम लोग मार्केट के लिए निकल लिए, धूप बहुत तेज थी तो शालिनी ने अपना दुपट्टा पूरे चेहरे पर बांध लिया था और दोनों साइड पैर करके बैठ गई ।।   शालिनी दूसरी बार शहर आयी थी और रास्ते में वो काफी चीजों के बारे मे पूछती रही और मैं बताता रहा, बातें करते करते हम लोग शापिंग माल पहुंच गए, बाइक पार्क करके हम दोनों अंदर आ गए,, अंदर एअर कंडीशन होने से थोड़ा गर्मी से राहत मिली।हम दोनों काफी देर यूं ही माल में घूमते रहे, मैं तो अपने रेगुलर काम में लग गया मतलब माल में आयी हुई एक से बढ़कर एक सेक्सी माल लड़कियां और भाभियों को शालिनी से नजर बचाकर ताड़ता रहा । फिर हमने आइसक्रीम खाई और शालिनी से मैंने कहा चलो अब कुछ खरीदी भी कर लें, मुफ्त की ठंडी हवा काफी खा चुके हैं,,,मेरे ऐसा कहने से शालिनी हंसने लगी । हंसते हुए वह बहुत खूबसूरत दिख रही थी, हंसते समय उसके दूध भी हिल रहे थे, जो उसे और आकर्षक बना रहे थे, न जाने क्यों पर मेरी बार बार नजर शालिनी के बड़े बड़े स्तनों पर ही जा रही थी । सामने एक जींस शोरूम में जाकर हम जींस देखने लगे,,,एक सेल्स गर्ल आयी और उसने कहा, सर मे आई हेल्प यू इन सेलेक्शन ??हां जी , ये मेरी सिस्टर है इसके लिए जींस टाप सेलेक्ट कराईये।।सेल्स गर्ल- मैम आपको शायद 28 जींस आयेगी और टाप ?शालिनी- मुझे नहीं पता, प्लीज आप चेक कर लें ।।एक दूसरी सेल्सगर्ल ने शालिनी को चेंजिंग रूम की ओर बुलाया और कहा, मैम आप इधर आ जायेंं , स्टैट्स चेक कर लें।दो मिनट बाद वो सेल्सगर्ल शालिनी के शरीर को इंचीटेप से इधर उधर नापने के बाद हंसते हुए बोली, इट्स 34″/28″/36 ।।और उस सेल्सगर्ल ने शालिनी को जींस और टीशर्ट टाप पसंद कराये उसके साइज के और शालिनी से ट्रायल करनेको कहा,शालिनी कपड़े लेकर ट्रायल रूम में चली गई, मैं ट्रायल रूम के बाहर खड़ा हो गया,पांच मिनट बाद शालिनी ने दरवाजा खोला और मुझे दिखाते हुए बोली, भाईजी फिट है ना।।मैंने उसे उपर से नीचे तक एक सरसरी निगाह से देखा, उसने ब्लैक जींस और ग्रीन टी पहनी थी, जींस टाप में अब उसके शरीर का हर कटाव साफ जाहिर हो रहा था, लम्बाई अच्छी होने से उसके पैर काफी लम्बे और सीने के उभार और बड़े लग रहे थे, इतने में ट्रायल रूम में लगे आईने मे देखते हुए शालिनी पीछे घूम गई…. और मुझे उसके भारी नितम्ब भी दिख गए,,, सलवार सूट मे यह सब उतना जाहिर नहीं होता है, शालिनी का पीछे का शरीर भी गजब का आकर्षक था,,उसने कहा भाई दूसरी जींस भी ट्राई कर लेती हूं और दरवाजा बंद कर लिया।।दुबारा दरवाजा खुला तो मैंने अब शालिनी को ब्लूजींस और व्हाइट टाप मे देखा, ये ड्रेस भी उस पर बहुत अच्छी लगरही थी, इस बार भी उसने आगे पीछे घूम कर आईने में देखा और आंखों ही आंखों में मुझसे मेरी राय पूछी तो मैंने उसे ऊंगली का गोल छल्ला बनाकर बताया कि जबरदस्त है…. मेरे ऐसा करनेसे वो थोड़ा शर्मा गई और नीचे देखने लगी और बोली – दोनों ड्रेस ठीक है यही ले लेते हैं, मैं चेंज कर लेती हूं,,मैं- अरे ,अब चेंज की क्या जरूरत है जब ये ले ही लिया है तो इसी को पहने रखो… आओ बाहर.दूसरे कपड़े और उसके पुराने कपड़े पैक कराकर पेमेंट देकर हम शाप से बाहर आ गए ।लोग गलत बोलते हैं कि लड़कियों/औरतों को शापिंग कराना मुश्किल और पकाउ काम है, मेरी बहन शालिनी ने तो फटाफट पसंद करके ले लिया,,,शालिनी से मैंने कहा , अब क्या लेना हैशालिनी- दद्दा ,वो घर मे पहनने के लिए आप जैसे कम्फर्टेबल कपड़े ही लेने हैं,,बातें करते हुए हम माल की दूसरी फ्लोर पर आ गए और बिग बाजार में प्रवेश किया,,, क्योंकि एवरेज बजट में डेलीवियर वहां काफी अच्छे मिल जाते हैं।हमने थोड़ी ही देर में शालिनी के लिए दो निक्कर और दो 3/4 कैप्री पसंद कर लिए इनके ट्रायल की जरुरत नहीं थी, अब हम लाइट टीशर्ट देख रहे थे तो मैंने एक स्लीवलेस बनयान टाईप टीशर्ट शालिनी को दिखाते हुए कहा ये कैसी रहेगीशालिनी ने उसे हाथ में लिया और अपने सीने पर उपर से ही रख कर वो देखने लगी, फिर बोली– ठीक है, इसमे गर्मी कम लगेगी।तो हम दो स्लीवलेस और दो नार्मल हल्की टीशर्ट सेलेक्ट करके वहां से निकले, अब तक शाम के सात बज चुके थे।मैंने मां को वीडियो काल करी और बताया कि हम लोग शापिंग कर रहे हैं, मैंने शालिनी की ओर कैमरा करके मां को दिखाया,,,मां- बेटा तुम लोग ठीक हो ना ,शालिनी- हां, मम्मी, हम लोग ठीक हैं और थोड़े कपडे़ भी ले लिए हैं, अब घर निकल रहे हैं।मां- सागर बेटा, जरा मोबाइल मे शालिनी को पूरा दिखा तो सही,,,मैंने मोबाइल थोड़ा दूर कर दिया जिससे शालिनी की पूरी बाडी मम्मी को दिखने लगी,,,मां- शालिनी बेटा, तुम बहुत अच्छी लग रही हो, सागर बेटा… तुमने अच्छे कपडे़ दिलाये हैं। अब तुम लोग घर निकलो और टाइम से खाना खा लेना, ओके…फोन कट करके मैंने शालिनी से पूछा- कुछ और लेना है अभी या फिर घर चलें।शालिनी- जी… जी भाई.. लेना… नहीं नहीं.. कुछ नहींमैं और शालिनी काफी समय से माल में थे अब हमे घर निकलना था तो हम लोग पार्किंग मे जाने के लिए एस्केलेटर पर आ गए जो बेसमेंट पार्किंग में जाता था, मैं और शालिनी साथ ही एस्केलेटर पर चढ़े, पता नहीं कैसे शालिनी का बैलेंस बिगड़ा और वह आगे की ओर गिरने ही वाली थी कि उसने मेरी बायीं कोहनी पकड़ ली और साथ ही मैंने उसे कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींचा ।। ये सब एक दो सेकेंड मे ही हुआ और हम एस्केलेटर से नीचे पार्किंग में आ गए, शालिनी बहुत डर गई थी और जैसे ही मैंने अपने साथ उसे एस्केलेटर से उतारकर खड़ा किया, इस समय हमारे साथ कोई पार्किंग में नहीं आया था और न ही आस पास कोई दिख रहा था, अमूमन आज माल मे ही भीड़ कम थी,शालिनी जो मुझसे सट के खड़ी थी, अचानक से मुझे पकड़ कर अपने साथ चिपका लिया और सिसकते हुए बोली – भाईजी आप ने मुझे बचा लिया , और एक बार फिर मुझे कस कर अपने से चिपका लिया । शालिनी और मेरी हाईट मे जरा सा ही अंतर है उसने अपना चेहरा मेरे सीने मे छुपा लिया था और फिर बोली – आपके साथ मैं सेफ फील करती हूं भाईजी(मैने भी शालिनी के पीछे हाथ ले जाकर उसको बाहोँ मे भर लिया )मै- मेरे होते तुम्हें कुछ नहीं होगा बेटा, और छोटी सी चीज से ऐसे डरते नहीं हैं, तुम्हें तो अब अकेले ही यहाँ कालेज भी आना जाना है… बी ब्रेव गर्ल बेटा….और प्यार से मैंने उसकी पीठ को हल्का सा सहलाया और उसके गालों पर हल्का सा हाथ लगाकर उसे हंसाने की कोशिश की,मैं- चलो बेटा अब घर चलते हैं,,,,(हम दोनों अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे, तभी अचानक से सामने से आता एक सिक्योरिटी गार्ड दिखा जो हमारी ही तरफ आ रहा था, मैंने जल्दी से शालिनी को अपने से अलग किया और उसका एक हाथ पकड़कर अपनी बाईक की ओर चल दिया)गार्ड- जरा भी शरम हया नहीं है तुम लोगों को, यहीं पार्किंग में ही चुम्मा चाटी शुरू कर दी, बेशरम हो रहे हैं लोग …मैं- रुकते हुए, जी वो ऐसी बात नहीं है ये तो मेरी छोटी बहन है।गार्ड- (हंसते हुए) हां हां यहाँ सब भाई बहन ही बताते हैं पकड़े जाने पर,शालिनी- आप बिना बात के बदतमीजी कर रहे हैं हम लोग भाई बहन ही हैं वो भी सगे…।गार्ड- अरे बहनजी, तो मैं कब कह रहा हूं कि तुम लोग भाई बहन नहीं हो, मगर अभी जो गले मिलन हो रहा था उसे देखकर मुझे लगा कि जल्दी चलो नहीं तो पूरी पिक्चर यहीं पार्किंग में बन जायेगी,,,, ऐसा तो यहां रोज होता है अपना क्या .. अपनी तो ड्यूटी है… जिनके पास गाड़ी है वो तो गाड़ी में निपट लेते हैं…. आप जैसे बाहर ही शुरू हो जाते हैं… भाईजी माफ करना… आप जाओ .. अपना क्या… ड्यूटी है ।।वो कमीना गार्ड लगातार बोले ही जा रहा था और हाथ जोड़ कर माफी वाले अंदाज में बक बक कर रहा था ।मैं- (बात को खत्म करने के इरादे से) ठीक है कोई बात नहीं…गार्ड- ठीक है भाई… बेस्ट आफ लक… गुड लक.. गुड कपल… लवली कपल…वो बोलता रहा और मैं शालिनी के साथ अपनी बाइक के पास आ गया, अब मुझे लगा कि वो गार्ड नशे मे बड़बडा़ रहा है…   खैर .. मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और शालिनी पीछे बैठ गई, उसके हाथों में काफी बैग थे जिससे पता चलता था कि वह शापिंग करके आ रही है ।।हम दोनों घर की ओर चल दिए, रास्ते में शालिनी और मेरे बीच कोई बात नहीं हो रही थी, शायद वो गार्ड वाली घटना की वजह से,घर के पास आकर किरानास्टोर वाले से सामान लेते हुए हम घर आ गए , मैंने बाइक बाहर ही रखी और हम अंदर आ गए, कमरे मे आते ही मैंने कूलर चलाया और फटाफट अपने कपड़े निकालकर मैं अपनी आरामदायक पोजीशन यानी चढ्ढी बनयान मे आ गया और शालिनी पीछे कमरे में जाकर सारे बैग रखकर मेरे पास आकर बेड पर बैठ गई, कूलर की हवा ठंडी थी, पांच मिनट ऐसे ही बैठे रहते हुए हो गए थे पर हम लोग कोई बात नहीं किए थे, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था…मै- शालिनी, नौ बज रहे हैं, खाने का क्या करना है।शालिनी- जी, भाईजी, मैं अभी कुछ बनाती हूं,मैं- ह़ां , चेंज कर लो फिर आराम से बनाना कोई जल्दी नहीं हैऔर कल से मुझे जाब पर भी जाना है…. इस बीच देखते हैं एडमिशन की लिस्ट जारी हो जायेगी तो फिर एक दो दिन की छुट्टी लेकर काम हो जायेगा।।शालिनी- जी भाईजीमैं- और हां, तुम आज इसी बेड पर सो जाना क्योंकि तुम्हारे रूम में तो अभी कूलर नहीं लग पाया है,, कल लगवा लेंगे।।शालिनी- जी, यहीं सो जाऊंगी वैसे भी मैं कभी अकेली नहीं सोती…मैंने टीवी चला दी और शालिनी चेंज करके नये कपड़ों मे से ही एक ब्लैक शार्ट निक्कर और व्हाइट टी पहनकर आयी और कूलर के आगे खड़ी हो गई, तो मैंने देखा कि शालिनी पूरी तरह पसीने मे भीगी हुई है,,,,मैं- अरे तुम तो पूरा पसीने से नहाई लग रही हो, क्या हुआ ।।शालिनी- वो कमरे में पंखा नहीं है तो बहुत गर्मी लग रही थी और मुझसे जींस भी जल्दी निकल नहीं रही थी ।मै- ओ हो… इतनी गर्मी थी तो तुम यहीं चेंज कर लेती..और पसीने से नहाई हो फिर भी कपड़े पहन लिए ।।शालिनी- जी… भाईजी… वो यहां आप थे इसलिए मैं पीछे चली गई थी….मै- (थोड़ा सोच कर) हां, हां मैं यहां था तो… कौनसा तुम्हें सारे कपड़े निकालने थे,,, अब यहाँ हम ही दोनों को रहना है… इतनी शरम ठीक नहीं… और तुम अपने भाई के साथ ही अनकम्फरटेबल हो… ऐसे कैसे रहेंगे हम साथ में … मुझे देखो मैं जैसे रहता था तुम्हारे आने से पहले वैसे ही हूं।।शालिनी– सारी भाईजी,,, मेरा वो मतलब नहीं था, पर मुझे लगा आपके सामने चेंज नहीं करना चाहिए, ,,,(शालिनी का हाथ पकड़ कर अपने पास बेड पर बिठाते हुये)मैं- देखो बेटा… बिल्कुल फ्री होकर रहो… हम लोग अब बड़े हो गए हैं और एक दूसरे के सामने चेंज नहीं करना चाहिए लेकिन कभी इस तरह की सिचुएशन हो तो कर सकते हैं और करना ही चाहिए, हम भाई बहन हैं और यहां इस शहर मे हमे ही एक दूसरे का खयाल रखना है… लड़ाई के लिए भी मैं ही हूँ और प्यार के लिए भी मैं ही मिलूंगा…, सो रिलैक्सशालिनी – जी भाई , अब कुछ खाने को बना लिया जाए ।शालिनी किचन में चली गई और मैं टीवी देखने लगा ।।शालिनी खाना बनाने लगी, खाना बनाते समय भी उसे काफी गर्मी लगी और वो कई बार कूलर के सामने आ कर दो मिनट खड़ी होती फिर किचन में जाकर खाना बनाती । मैं आराम से लेटकर अपने कुछ फोन काल्स निपटा रहा था,,शालिनी- भाईजी खाना रेडी हैमैं- ठीक है तुम पांच मिनट आराम कर लो फिर खा लेते हैं और मैं उठकर टायलेट करने गया ।हम लोगों के पास कोई डायनिंग टेबल तो था नहीं , हमने बेड पर ही खाना खाया और बातें करतें करतेशालिनी- भाईजी, थैक्स फार शापिंग, और आपके साथ शापिंग मे मजा आ गया.. लव यू भाई….और हां नेक्स्ट टाइम से अब जब भी शापिंग जायेंगे आप भी अपने लिए भी शापिंग करेंगे… प्रामिस करो भाई…मैं – ठीक है चलो सोते हैं सुबह से अगले छह दिन मुझे फिर से गधे की तरह फील्ड में घूमना है ।मैंने कपडे डाल कर बाइक अंदर रखी और गेट लाक करके कपड़े फिर से निकाल कर शालिनी के पास लेट गया, गेट लाक होने के बाद मैं घर का कोई दरवाजा बंद नहीं करता, लाईट आन थी, हम दोनों को उजाले में सोने की आदत है।।हम लोग बराबर मे लेटे थे लेकिन दूर दूर और टीवी चल रहा था। हम लोग इधर उधर की बातें कर रहे थे, कल क्या करना है वगैरह वगैरह ।शालिनी- भाईजी , वो गार्ड क्या उल्टा सीधा बक रहा था , बदतमीज को हम कपल दिखाई दे रहे थे।।मैं – अरे कोई नहीं , ऐसे बदतमीज मिलते ही रहते हैं, असल मे वहाँ ज्यादातर कपल ही जाते हैं और गलत काम करते हैं मौका देखकर…शालिनी- ओ हो… ,भाई अब सोते हैं, गुडनाइट…मैं- गुड नाईट…और थोड़ा पास जाकर मैंने उसे माथे पर किस किया तो शालिनी ने अपनी बड़ी बडी आंखें अचानक से मेरी आँखों से मिलाई और एकटक मेरी आंखों में देखने लगी फिर ….वापस सीधे लेट गई, हम दोनों ऐसे ही सो गए ।।सुबह जब मेरी आंख खुली तो देखा अभी साढ़े पांच बजे हैं मतलब आधे घंटे और सोया जा सकता था मेरे रूटीन से,,, मैं लेटा रहा फिर अचानक शालिनी की ओर देखा तो वह पैर फैलाये बेसुध सो रही है और उसकी शार्ट निक्कर सिमटकर उसकी जांघों मे चिपकी थी और ऊपर उसकी टीशर्ट समीज सहित उसकी नाभि के काफी उपर तक उठी थी,,,, और उसके नंगी जांघों सहित पैर दूधिया रोशनी में चमक रहे थे …. मैंने तुरंत नजर दूसरी तरफ कर ली और ध्यान हटाने के लिए मोबाइल उठा लिया, कुछ देर बाद मेरी नजर फिर शालिनी पर चली गई,,, अब वह मेरी ओर करवट हुई जिससे उसके स्तनों ने वी गले की टी मे गहरी घाटी जैसी बना ली और उसके गोरे गुदाज सीने को देखकर मुझे पता नहीं क्या हो गया कि मैं शालिनी के पूरे शरीर को देखने लगा और एक अजीब सी सुरसुरी छा गई पूरे बदन मे और चढ्ढी मे मेरा लंड खड़ा हो गया…कहाँ जरा सी चूंची की झलक पाने के लिए हम जैसे लडके तरसते थे, मार्केट में हल्की सी चूंची दिख जाये किसी सेक्सी भाभी/आंटी/लड़की की तो लंड तुरंत सलामी देता था,,,हस्थमैथुन से ही काम चल रहा था,,कभी किसी को छूने का मौका नहीं मिला था।।मेरा एक हाथ मेरी चड्ढी मे मेरा लंड सहला रहा था और एक फीट दूर मेरी जवान ,मादकता से भरी हुई मांसल शरीर वाली बहन सो रही थी,, शालिनी की हर सांस के साथ उसकी चूंची ऊपर नीचे हो रही थीं और मैं हाथ से अपने लंड को और तेज मसलने लगा,,,शालिनी की चूंची बहुत ही शानदार और बड़ी थी, नाभि भी बहुत गहरी , और उसकी जांघों की मांसलता को देखकर मैं एक नयी दुनिया में विचरण कर रहा था,,, कि अचानक बाहर पेपर फेंकने की आवाज आई…और मैं हड़बड़ा गया, अचानक से बेड से उतरकर मैं बाहर बरामदे में भाग आया…। मुझे बहुत ही आत्मग्लानि हो रही थी..मैं बाहर आकर जीने पर बैठ गया और अपने कांपते हुए शरीर को संयमित करने लगा, मेरे दिमाग में कोई एक खयाल रुक नहीं रहा था कभी शालिनी की बड़ी बड़ी चूंची मेरे सामने आ रही थी और साथ ही एक खयाल मुझे धिक्कार रहा था कि तुम इतना गंदा कैसे सोचने लगे अपनी ही बहन के बारे मे …रह रह कर मुझे ऐसे ही खयाल आते जा रहे थे और मुझे शालिनी की मासूमियत और मां का मुझ पर भरोसा सब याद आने लगा,आज तो ये पहला दिन ही था शालिनी का मेरे साथ,,,, हमें तो अब आनेवाले काफी सालों तक साथ रहना है, ऐसे कैसे रह पायेंगे हम साथ में…मैंने फ्रेश होकर कपड़े डाले और शालिनी को बिना जगाए गेट बाहर से लाक करके दूध और ब्रेड लेने आ गया ।मैं कुछ देर बाद लौटा और गेट खोल ही रहा था कि बगल वाली सुनीता भाभीजी अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी औरसुनीता भाभी- सागर भैया कैसे हो, और आपके साथ कौन आया है।मैं- भाभी मैं ठीक हूं, वो मेरी छोटी बहन शालिनी है अब यहीं रह कर पढ़ाई करेगी।।सुनीता भाभी – इसीलिये मैं कहूँ मेरे देवर राजा कल से बहुत बिजी दिख रहे हैं…. एक बार हमसे हेल्लो हाय नहीं और अभी भी चोरी से मेरी नंदरानी के पास जा रहे हो… हां हां… अब हम जैसी बुढ़िया को कौन पूछेगा…. नया माल जो ले आये हो….और वो हंसती रही ।मैं- अरे अरे, नहीं भाभीसा, ऐसी कोई बात नहीं है, आज आपको मिलाता अपनी बहन से,,,,थोड़ा बिजी था ।

सुनीता भाभी- मैं काम करके आ जाऊंगी मिलने, चलो अच्छा है अब आपके खाने पीने की सहूलियत हो जाऐगी ।

सुनीता भाभी मेरे बगल वाले मकान में रहती हैं और पूरे मोहल्ले में मेरी बात उनके ही परिवार से होती है, वो 40 साल की भरे बदन की सुंदर संस्कारी महिला हैं, उनके दो बच्चे हैं वो अपने बच्चों के ही स्कूल मे टीचर हैं,, अक्सर सुबह सुबह वो झाड़ू लगाते हुए अपनी चूंची दिखा देती थी तो मेरा दिन बन जाता था । खैर हम लोगों मे हंसी मजाक चलता रहता था ।।

सुनीता भाभी की चूंची देखने के लिए मैं अक्सर उसी समय अपनी बाइक साफ करता था घर के बाहर , आज भी बड़े गले के कुर्ते से उनकी बडी़ बडी़ चूंची लटकती हुई दिख रही थी, अंदर वो हमेशा ब्रा पहनती हैं। मुझे जाने क्यों आज उनकी चूंचियां आकर्षक नहीं लगी.। एक सीमित मजाक से ज्यादा कुछ नहीं होता था हम दोनों में, शायद उनकी चूंचियां देखने की मेरी आदत के बारे मे वो जानती थी पर कभी जाहिर नहीं किया ।

गेट खोल कर मै अंदर आया तो देखा, शालिनी अभी सो रही थी, एक बार फिर मेरी नजर शालिनी के सीने पर पड़ी, वह सीधे लेटी थी और उसके दूध के निप्पल जाहिर हो रहे थे, इतने से ही मेरा लंड फिर झटके खाने लगा,….

सुबह के सात बज चुके थे और मैंने शालिनी को कंधे से हिला कर जगाया..

शालिनी ने थोड़ा कुनमुनाते हुए हाथ ऊपर करके अंगड़ाई ली और अपने बालो की पोनीटेल बनाते हुए गुडमार्निंग बोल कर वह बेड से उतरकर सीधे फ्रेश होने गई,,,

शालिनी का ये अंगड़ाई लेता हुआ बदन देखकर मुझे फिर से झुरझुरी होने लगी ।।

मैं पिछले दो घंटों से कई बार उत्तेजित हुआ था और सैकड़ों बार अपने आप को अपनी ही बहन के बदन को ना देखने का प्रयास कर चुका था ।

मैं सही गलत मर्यादा जिम्मेदारी आदि सब चीजों के बारे में सोच रहा था कि तब तक शालिनी बाथरुम से निकल कर कमरे से होते हुये सीधा किचन मे चली गई ।

शालिनी- भाईजी आप ये दूध और ब्रेड कब ले आये।

मैं-मैं बाहर से अभी लेकर आया हूं तुम्हे सोता देखा तो सोचा वापस आकर जगाऊँ ।

(उसे क्या पता कि उसके यौवन ने उसके बड़े भाईजी की ऐसी हालत करदी थी कि उसे भागना पड़ा )

शालिनी- भाई काफी या चाय

मैं- कुछ भी चलेगा, मैं तो सुबह ऐसे निकल लेता था, बाहर ही चाय पानी होता था ।

शालिनी- पहले की बात और थी,अब तो आप नाश्ता भी करेंगे और खाना भी खाकर जायेंगे ।

(मुझे शालिनी की केयरिंग बातें सुनकर बहुत अच्छा लगा और मैं अपने आप को उसके शरीर के प्रति आकर्षण के लिये और धिक्कारने लगा )

मैं- हां हां खिला खिला कर मोटा कर दो ।

मैं बेड पर ही बैठा था और शालिनी के साथ नाश्ता करने के बाद हम लोग बातें करने लगे ।

मैंने शालिनी को घर को लाक करना और आस पास के बारे में बताया, सुनीता भाभी के बारे में बताया कि वो अच्छी महिला हैं बाकी आस पास मैं किसी से मतलब नहीं रखता…

मैं- शालिनी, मैं अब साढ़े नौ बजे वर्किंग के लिए निकलूंगा और चार बजे आ गया तो ठीक नहीं तो रात के आठ बजने हैं, यही मेरा रूटीन है ।

शालिनी- ठीक है भाई मैं कुछ खाने के लिए बनाती हूं आप तैयार हो जाइए, मैं बाद मे नहाऊंगी ।

मैं नहा धोकर तैयार हुआ, इतनी देर मे मेरा दिमाग थोड़ा संतुलित हुआ था और मैं फिर से शालिनी को अपनी भोली बहन के जैसे देख रहा था,

शालिनी ने मुझे पराठे खिलाए और मैं फ्रेश मूड से अपना बैग लेकर शालिनी को किसी के लिए भी गेट ना खोलने की हिदायत देते हुए मैं निकल आया।।

सोमवार होने से मुझे वर्किंग के बाद डिपो जाना पड़ा और इसकी वजह से शाम के छह बजे मुझे फुरसत मिली, दिन भर मे मेरे दिमाग में बार बार शालिनी की ही बातें और यादें आ रही थीं । दिन में कई बार मन किया कि शालिनी से बात करूँ वो क्या कर रही है, कैसी है, अकेले बोर तो नहीं हो रही है,,, बट कैसे… शालिनी के पास मोबाइल नहीं था,,

मैं घर के लिए निकला और सोचा नाश्ते के लिए कुछ ले लूं ।
नाश्ता लेकर मेरी नजर सामने की मोबाइल शाप पर पड़ी और मेरे कदम उधर बढ़ चले,,

मैं घर आया और गेट खोलकर जैसे ही मेरी नजर बरामदे में चारों तरफ पड़ी, मैं हैरान हो गया, हर चीज करीने से रखी है और साफ-सुथरी, मैंने आगे कमरे में कदम रखते ही शालिनी को आवाज लगाई.. शालिनी….

कमरा भी बहुत ढंग से सजाया था ।

शालिनी पीछे कमरे में साफ़ सफाई में लगी थी और वह तेज चलती हुई मेरे पास आई और मुझे ऐसा लगा कि वो मेरे गले लगने वाली है पर वो ठिठक कर खड़ी हो गई ।

शालिनी- जी भाई आप आ गए ।

मैं- हां, क्या हो रहा है सुबह से, तुमने तो एक दिन में ही घर को बदल दिया है।

शालिनी (फ्रिज से पानी निकाल कर मुझे देते हुए)- वो भाई , मैं आपके जाने के बाद बोर हो रही थी तो मैंने थोड़ी सफाई कर डाली।

मैं- इधर आओ बैठो देखो कितना पसीने से नहाई हुई हो , और सारी सफाई क्या एक ही दिन में करनी है।

वो कूलर के सामने बेड पर बैठ गई । इस समय शालिनी ने लाइट यलो कलर का सलवार सूट पहन रखा था और अपना दुपट्टा सर में बांध रखा था ,कुर्ते के अंदर से उसकी सफ़ेद समीज पूरी तरह दिख रही थी, निप्पल भी जाहिर हो रहे थे…. ब्रा तो वह पहनती ही नहीं है, इससे शालिनी के बड़े स्तनों में उभरे उसके निप्पल नुमायां हो रहे थे । मैं फिर से शालिनी के मादक उन्नत उरोजों को देखने से अपने आप को रोक नहीं पाया ।

शालिनी- भाई आपके लिए काफी बनाऊं ।

मैं- हां, हां ऐसा करो तुम भी नहा लो फिर साथ में काफी पीते हैं, मैं कुछ स्नैक्स लाया हूं और तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है,,

शालिनी ने घर को बहुत अच्छा सेट किया था, अब हमारा ये कमरा बेडरूम और पीछे वाला स्टडी/स्टोर रूम जैसे था, शालिनी ने सारे कपड़े और फालतू चीजों को पीछे कमरे में रख दिया था और वहीं से वो अपने लिए स्लीवलेस टी-शर्ट और निक्कर निकाल कर मेरे सामने से निकल कर बाथरूम में चली गई ।।

मैं कपड़े बदल कर बरमूडा और बनियान में लेट गया आंखें बंद करके। और सोचने लगा कि अभी अभी शालिनी को देखकर मुझे कोई सेक्सुअल ख्याल नहीं आया जबकि इस दौरान भी उसके उन्नत उरोजों की झलकियां कई बार दिखीं । मुझे लगा कि ये सब नेचुरल है और मुझे अपनी बहन के साथ प्यार से रहना है । मैं अपने आप को फिर से सही ग़लत के दोराहे पर ले आया । जाने कितनी उधेड़ बुन के बाद आखिर मैंने ये सोच लिया कि

“मेरी बहन यदि सुंदर है या साफ़ लफ़्ज़ों में सेक्सी है तो सब उसे देखेंगे ही और मैं भी उसके रूप को थोड़ा निहार लूं तो इससे किसी का क्या बिगड़ जायेगा, और मैं इससे बच भी नहीं सकता क्योंकि मुझे उसके साथ ही रहना है ।।”

मैंने सोच लिया कि अब से शालिनी को देखने की कोशिश मैं नहीं करूंगा पर जो दिखाई दे रहा होगा उसको देख कर उसके युवा बदन का दीदार करने से अपने आप को रोकूंगा भी नहीं । और कौन सा हम लोग फिजिकल होने जा रहे हैं, थोड़ा सा आंखें ही तो सेंक रहा हूं। यही सब सोचते हुए मेरी नाक में एक महक सी आई और साथ में शालिनी कमरे में आ गई तो मैंने आंखें खोली और मैं उसे देखता ही रह गया ।

निक्कर शालिनी की सुडौल जांघों में चिपका हुआ था जो उसके घुटनों से काफी ऊपर तक ही था, एकदम टाइट लग रहा था, और उपर स्लीवलेस बनयान टाइप ढीली टी-शर्ट में वह बहुत ही गजब लग रही थी । उसके पूरे खुले हुए कंधे और सुंदर हाथ बड़े ही आकर्षक लग रहे थे। उसके पैर की नंगी पिंडलियों पर पानी की कुछ बूंदें उपर से नीचे लुढ़क रहीं थी । शालिनी अलमारी के आईने में अपने बाल ठीक करने लगी ।।

काफी टाइम से मैं पोर्न देखता आया हु, और कभी कभी नोवेल्स भी पढ़ता था, फैन्टेसी सेक्सी कहानियों वाली। मैं शुरु से ही कम बोलने वाले टाइप का रहा हूं। अपने ही धुन में रहता हूं। कोई मुझे देख कर नही कह सकता था कि मैं सेक्स का इतना भूखा हूं ।
मैं जब भी किसी सेक्सी लड़की को देखता था तो उसको इमैजिन करता था की उसकी बाडी अंदर से कैसी दिखती होगी, उसका फिगर क्या होगा। सब कुछ मेरे दिमाग मे चलता रहता था आम लड़कों की तरह।
और यहां कमसिन जवानी की दहलीज पर खड़ी मेरी सगी बहन ऐसे सेक्सी कपड़ों में मेरे आस पास घूम रही है, मैं उसे कैसे ना देखूं , और क्यों न देखूं ।।

शालिनी ने बाल बनाकर पोनीटेल बना ली और चाय बनाई , हम दोनों ने नाश्ता किया, इस बीच मैंने गौर किया कि शालिनी के कंधों और बगल के हिस्से में उसकी सफ़ेद समीज दिखाई दे रही है क्योंकि शायद उसकी समीज बड़ी थी, असल में ऐसी टी-शर्ट के अन्दर लड़कियां ब्रा पहनती हैं ना कि समीज ।

मैंने अपनी नजरों को वहां से हटाया और फिर मैंने शालिनी से अपनी आंखें बंद करने को कहा , और मैंने बैग से निकालकर सैमसंग का एंड्रॉयड मोबाइल उसके हाथों पर रख दिया, और उसने आंखें खोली ।।

शालिनी- वाव….. फोन मेरे लिए भाईजी, और ये कहकर वो मेरे गले लग गई…..

हम दोनों खड़े थे और इस बार माल की तरह किसी के देखने का डर भी नहीं था, तो मैंने भी शालिनी को कस कर अपने सीने से चिपका लिया और उसकी पीठ पर मेरा हाथ खुद ब खुद सरकने लगा ।
मैं उसकी पीठ सहलाते सहलाते हुए उसके बालों में भी उंगली घुमाने लगा,और शालिनी ने भी मुझसे अलग होने की कोशिश नहीं की । कुछ देर में ही मुझे लगा जैसे मेरे लिंग में तनाव आने लगा है और मैं ये सोचने लगा कहीं शालिनी इसे महसूस ना कर ले, मैं हल्का सा पीछे होकर उसके गुदाज स्तनों की गर्मी महसूस कर रहा था।

शालिनी के बदन की खुशबू से मैं मदहोश होने लगा । मैंने मादा खुशबू के बारे में सुना था और आज मैं उसे महसूस भी कर रहा था, जाने कितनी देर बाद शालिनी ने अपना चेहरा थोड़ा अलग करते हुए कहा, भाईजी हमारी पहली सेल्फी हो जाए और हल्का सा सीधे होकर वो कैमरा आन करके सेल्फी लेने लगी,,,

शालिनी की दाहिनी चूंची अब भी मेरे सीने से बायी ओर से दबी थी। उसने बहुत सारे फोटो खींच डाले फिर अलग होकर वो फोटो देखने लगी ।

फोटो देख कर उसने कहा भाईजी फोन बहुत ही अच्छा है और फोटो क्वालिटी भी अच्छी है, उसने कहा भाई मम्मी को वीडियो काल करते हैं । और वो मम्मी का फोन नं मिलाने लगी, मुझे लगा कि मां के साथ वीडियो काल के लिए शालिनी के कपड़े कुछ ज्यादा ही खुले हैं कहीं मां ने देख लिया कि बगलों के साइड से शालिनी की समीज और उसके कांख के बाल साफ़ न होने से दिखाई दे रहे थे ।

मैंने शालिनी से कहा- वो … वो शालिनी मम्मी को अभी वीडियो काल मत करो, नार्मल काल कर लो बेटा ।

शालिनी- क्यों भाईजी, क्या हुआ ?

मैं- (कुछ सोच कर) – वो… वो … बेटा..

शालिनी- क्या भाई जी ….

मैं- (हिम्मत करके) वो तुम्हारी समीज दिखाई दे रही है ना… शायद मम्मी को ठीक ना लगे!

शालिनी – (अपने उपरी शरीर को देखते हुए) ओह… स्वारी भाई, मैंने ध्यान नहीं दिया… और वो नीचे देखने लगी ।

मैं- कोई बात नहीं बेटा…. यहां अपने घर के अंदर तो चाहे जैसे रहो बट बाहर निकलते हुए थोड़ा ध्यान रखना बस ।

शालिनी मोबाइल में फीचर्स देखने लगी और हम बातें करते रहे ।

मैं- शालिनी, एक बात पूछूं??

शालिनी-जी…

मैं- तुम ब्रा क्यों नहीं पहनती ?

शालिनी (मोबाइल में देखते हुए) – वो भाईजी, मुझे स्किन पर रैशेज हो जाते हैं ब्रा पहनने से, हाईस्कूल के बाद मां लायी थी…. …बट रैशेज हो गये और मम्मी ने कहा कि समीज ही पहनो ।

(शालिनी के इतने आराम से बोलने से मुझको अच्छा लगा कि वो मेरे साथ खुलकर अपने अंत: वस्त्रों के बारे में बात कर रही है)

मैं- वो अच्छी क्वालिटी के नहीं होंगे, इसीलिए रैशेज हो गए होंगे,प्योर काटन कपड़े से रैशेज नही होंगे।

शालिनी- जी भाईजी, ब्रा ना पहनने से कभी कभी अजीब लगता है।

मैं- हां, और सलवार सूट में समीज चल जाती है बट इन सब स्टाइलिश कपड़ों के लिए ब्रा ही ठीक रहती है ।

मैंने घड़ी की ओर देखा और कहा- शालिनी चलो, ऐसा करते हैं मार्केट चलते हैं और तुम्हारे लिए काटन मेटेरियल की ब्रा ले लेते हैं, वापसी में तुमसे तुम्हारे नये मोबाइल की ट्रीट भी ले लूंगा ।

शालिनी-( हंसते हुए) – जी भाईजी, ये ठीक रहेगा यहां तो अच्छी क्वालिटी की मिल ही जायेगी, मैं चेंज कर लेती हूं आप भी रेडी हो जाईए ।

शालिनी पीछे कमरे में जाकर चेंज करने लगी मगर उसने दरवाजा सिर्फ ढलका दिया, लाक नहीं किया । मैं भी शालिनी के निकलने के बाद कमरे में जाकर चेंज करने लगा ।

शालिनी ने जींस और टॉप पहना था, कपड़े पहनते पहनते मैं अभी अभी हम दोनों के बीच हुई बातचीत के बारे में सोच रहा था और मेरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई । तभी मुझे अचानक सेक्सी कहानियों में अपनी बहन को ब्रा खरीदवाने के सेक्सी वाकये मेरे दिमाग में फ्लैश करने लगे ।

हम दोनों घर से निकले और मैं बाइक चलाते हुए सोच रहा था कि अब शालिनी के बदन को ठीक से देखने का शायद मौका मिल जाए और उसके साथ थोडा़ खुलकर बात हो जाये। मैं पास के ही एक शोरूम में शालिनी के साथ आ गया, संयोग से यहां एक भाभी टाइप की औरत सेल्सगर्ल थी ।

मैं- जी, इनरवियर दिखाइये ?

लेडी- जी किसके लिए ?

शालिनी- जी हम दोनों के लिए ।

मैं- (धीरे से शालिनी के कान में)- अरे, मेरे लिए नहीं।।

शालिनी- मैंने कहा था ना कि अब से शापिंग दोनों लोगों की होगी…… है ना, ।

मैं- ठीक है , ले लो जो लेना है ।।

और लेडी ने ओके बोलकर साइड के दूसरे काउंटर पर ब्रा पैंटी का एक रेड कलर का सेट निकाल कर रख दिया।

लेडी- मैम आप डिजाइन देखते जाओ, पसंद आने पर आप अपने साइज का ट्रायल कर लीजिएगा।

मैं- जी, असल में इसको थोड़ी स्किन मे प्राब्लम है उसकी वजह से आप फुल काटन मेटेरियल ही दिखाईये प्लीज़ ।

लेडी- सर फुल काटन कपड़े में तो व्हाइट कलर ही आयेगा, हां स्विस काटन मेटेरियल में कलर भी मिल जाएंगे, और वो सेफ भी रहेंगे।

मैं- जी , आप दोनों दिखाईये ।

वो लेडी एक एक करके काउंटर पर ब्रा पैंटी के सेट रखती जा रही थी, रात होने के कारण उसकी शाप पर एक गार्ड जो बाहर बैठा था उसके सिवा और कोई नहीं था।

मैं और शालिनी बराबर में सट कर खड़े थे काउंटर के इस पार, शालिनी ने एक सफेद रंग की ब्रा हाथ में लेकर उसे देखते हुए मेरी ओर देखा, मैंने आंखों आंखों में उसे ओ के का इशारा कर दिया, उसके साथ एक छोटी सी पैंटी भी थी, सफेद रंग की ही।

उसको साइड में रख कर शालिनी ने एक ब्लैक ब्रा हाथ में लेकर उसी तरह मेरी ओर देखा और मैंने भी उसे इस बार हल्की सी आंख दबाकर मुस्कुरा के ओके का इशारा किया, उसने लेडी से कहा – मेरा हो गया इनके लिए दिखाईये।

मैं- एक दो और लेलो ।

शालिनी- नहीं, पहले चेक कर लूं कि कोई प्राब्लम न हो, फिर बाद में और ले लूंगी ।

मैं शालिनी की समझदारी और भोलेपन पर फिदा हो रहा था और साथ ही साथ मेरा लन्ड भी ,,,

लेडी- जी , और उसने काफी सारे कलर में वी शेप फ्रेन्ची निकाल कर रख दिया,,

शालिनी ने उसमें से एक व्हाइट और एक ब्लैक फ्रेन्ची निकाल कर साइड में रख दिया अपनी ब्रा पैंटी के साथ। मैंने साथ में व्हाइट बनयान ले ली अपना साइज बताकर ।

लेडी- जी, मैम आप इधर आकर ट्रायल रूम में जाकर चेक कर लें मैंने आपके साइज ३४ के दोनों सेट ट्रायल रूम में रख दिये हैं ।

शालिनी- (धीरे से) आपको कैसे पता कि मुझे ३४ साइज ही आयेगा

लेडी- हंसते हुए ,,जी वो कहते हैं ना ” पारखी नजर…निरमा सुपर… मैम हमारा रोज का काम है …

शालिनी भी हल्का सा मुस्कुराई और मेरी ओर देख कर कहा – ओके , और वो ट्रायल रूम में चली गई,

और पांच मिनट बाद ही बाहर निकल कर आ गई और बोली- फिटिंग ठीक है आप पैक कर दो ।

लेडी- जी, वैसे आपने जो दोनों सेट लिए है वो काटन में बेस्ट है हमारे पास
और वो लेडी और सेल्स के लिए मक्खन लगाने लगी आप डेली लाइट मेकअप आइटम भी ले सकती है और डियो, परफ्यूम भी , सारी चीज़ें हैं हमारे पास डेली यूज टू ब्राइडल मेकअप तक ।।

मैं- हां, शालिनी देख लो,

शालिनी उस लेडी से काफी बातें कर रही थी और वो चतुर सेल्सगर्ल की तरह उसे बालों में लगाने वाले क्लेचर ,क्रीम वगैरह पसंद कराती जा रही थी।

फिर शालिनी ने काफी सारे साज-सज्जा के आइटम लिए ।

अचानक उस लेडी ने शालिनी से कहा- आप ये भी ले लीजिए, यू नीड इट, ये कहकर उसने एक वीट क्रीम (हेयर रिमूवर) शालिनी को पकड़ाई। शालिनी ने उसे भी रख लिया । हम बिल पे करके बाहर आ गए और
मैं अब तक लगातार शालिनी को उन दोनों ब्रा में इमैजिन कर रहा था और इधर उधर की बातें कर रहा था ,,

मैं- हां तो शापिंग हो गई, अब ट्रीट कहां देनी है मुझे मोबाइल वाली

शालिनी- भाई मुझे कहां पता है यहां का कुछ भी, आप ही ले चलो।

मैं- ठीक है!

मैं फिर से बाइक चलाते हुए सोच रहा था कि जैसे सेक्सी कहानियों में पढ़ता हूं कि बहन ने ब्रा पहनकर दिखाई और उसकी ब्रा में कसी हुई चूचियों को देख कर भाई का लन्ड खड़ा हो जाता है ….ऐसा कुछ भी मेरे साथ नहीं हुआ…क्यों ???

……………
मैं शालिनी को एक अच्छे रेस्तरां में लेकर गया, रात होने से शादी शुदा जोड़े भी थे और कुछ यंग कपल्स,। कुछ लड़कियां बहुत ही एक्सपोज कर रही थी पर मैं एक बार देखकर दूसरी तरफ देखने लगता कि कहीं शालिनी मुझे ना देख ले… लौंडिया ताड़ते हुए!

खैर… हमने खाना खाया और काफी बातें की और घर की ओर चल दिए, रात के साढ़े दस बज रहे थे और सड़क पर भीड़ कम थी, शालिनी काफी खुश थी और बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठी थी, उसकी चूचियों की नरमाहट का मुझे बीच-बीच में अपनी पीठ पर एहसास होता तो मैं गनगना उठता, घर आकर बाइक अन्दर करके गेट लाक किया।

मैं – शालिनी, चेंज कर लो,अब सोते हैं, काफी टाइम हो गया है।

शालिनी- जी , करती हूं

और वो पीछे कमरे में जाकर चेंज करने लगी। मैं अपने कपड़े उतार कर बनयान और चढ्ढी में आ गया और बेड पर एक साइड लेट गया । शालिनी भी निक्कर और स्लीवलेस टी-शर्ट पहन कर आई और साथ में ही लेट गई। उसने टी-शर्ट के अन्दर समीज भी नहीं पहनी थी और उसके उन्नत उरोज गजब ढा रहे थे ,,, हम लोग बातें करते रहे।

मैं- ऐसे तो रात में टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए पर तुम ऐसा करो कि आज ब्रा पहनकर सो जाओ जिससे ये पता चल जाएगा कि अब तुम्हारी बाडी पर रैशेज तो नहीं हो रहे हैं ।

शालिनी- जी, मैं वो सुबह पहन लूंगी

मैं- ओके, और मन मारकर मैं सोने लगा, साथ में लो वोल्यूम पर टी वी चला दी, हम दोनों ऐसे ही थोड़ी बातें कर रहे थे।

अचानक टी वी पर सनी लियोनी का कांडोम का विज्ञापन आने लगा और मैं अचानक से बोल पड़ा- तुम्हारी ब्रा भी तो इसी तरह की है ना….

ये बोल कर मैंने शालिनी की तरफ देखा और मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ कि मैं ये क्या बोल गया अपनी ही सगी बहन से …. और वो भी सनी लियोनी का कांडोम एड देखते हुए….
कुछ सेकंड बाद एड खत्म हो गया और

शालिनी- नहीं भाई…. वो जो हम लोग लाए हैं वो डिफरेंट है ।

मैं- (हिम्मत करके) अरे नहीं… इसी तरह की तो है ।

शालिनी- (थोड़ा मुस्कुरा कर) भाई वो कलर दोनों का ब्लैक है पर डिजाइन डिफरेंट है …. और मेरी छोटी भी…

मैं- नहीं , मैंने देखा था इसी तरह की तो है।

शालिनी- ठीक है भाई, आप नहीं मानते हैं तो सुबह जब पहनूंगी तो देख लेना कि एड वाली से डिफरेंट है ।

इतना सुनते ही मेरी हार्टबीट बढ़ गई और मैं जल्दी से बोला – ठीक है, सुबह देखते हैं,,,, गुडनाईट और मैं टीवी आफ करके करवट बदल कर सोने की कोशिश करने लगा ।

आंखें बन्द करके मैं सनी लियोनी और शालिनी की चूचियों की तुलना करने लगा…. और और शालिनी ने लास्ट में वो क्या बोला था – मेरी छोटी है…. हाय रब्बा…. शालिनी मुझे कैसे दिखायेगी सुबह ब्रा पहनकर…. कैसी दिखेगी उसकी चूचियां… इन्हीं हसीन खयालों में खड़े लन्ड के साथ मैं सो गया ।।

मेरी रात जैसे-तैसे कट गई, रात में कई बार मेरी नजरों में शालिनी के बदन को देखकर सनसनी हुई, उसकेे दूध थोड़े-थोड़े दिख रहे थे मेरा मन तो कई बार किया कि थोड़ा सा छू लूं, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, मैंने फैसला किया कि मैं पहले शालिनीे के मन की तो जान लूं। शालिनी को शायद लड़के-लड़की का शारीरिक आकर्षण क्या है, पता नहीं था ।

सुबह मैं जल्दी ही उठ गया और बाहर जाकर दूध ले आया,वापस आ कर गेट खोलकर अंदर आया तब तक शालिनी भी उठ कर फ्रेश होने के लिए बाथरूम में जा चुकी थी,,, मैं पेपर पढ़ रहा था, और कुछ देर बाद शालिनी कमरे में आई और अपने साथ वही खुशबू पूरे कमरे में फैला दी ,,,

शालिनी- भाई …

सागर- (मैं अब तक पेपर में ही आंख गड़ाए हुए था) हां,

और शालिनी की तरफ देखा,,,, मैं तो दंग रह गया,, शालिनी ने नीचे निक्कर पहनी थी और ऊपर सिर्फ गुलाबी रंग की टावेल लपेट रखी थी,,, कंधों पर दो काली ब्रा की स्ट्रिप दिख रही थी,,, मैं एक टक उसे देखता रह गया….

शालिनी- कल आप कह रहे थे कि मेरी ब्रा उस एड वाली जैसी है, देखिऐ ये वैसी नहीं है।

इतना बोल कर उसने एक झटके से आगे से टावेल खोलकर मेरी ओर उछाल कर बेड पर फेंक दी।

मैं कुछ सेकंड तक तो उसे देखता ही रह गया पर वो एक दम से पीछे कमरे में चली गई….

जीवन में पहली बार मैंने किसी को ब्रा में देखा था इस तरह इतने करीब से,,,,

मैं कुछ बोल ही नहीं पाया उसकी शानदार चूचियों को काली ब्रा में देखना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था… एक झटके में शालिनी की उन्नत गोरी गुदाज चूचियों को देख कर मेरे शरीर में अजीब सी हलचल मचा दी, कमरे में जाते हुए उसकी पीठ पर ब्रा की स्ट्रिप कयामत ढा रही थी । सच में गोरे बदन पर काला रंग बहुत ही सेक्सी लग रहा था ।

शालिनी टी-शर्ट पहन कर किचन में आ गई।

मैने सोच लिया था कि बहन के साथ बातचीत में खुलने का ये अच्छा मौका है ।

सागर- क्या बना रही हो।

शालिनी- जी,,, ब्लैक काफी।

सागर- क्यों भई, आज सबकुछ ब्लैक- ब्लैक…

शालिनी- हंसते हुए,,, क्या… और क्या ब्लैक है??

सागर- अरे है ना… ब्लैक काफी,,, ब्लैक ब्रा,,, और ब्लैक पैंटी…

शालिनी- भाई ईईईईईईईईई…प्लीज़ ,अब आप मेरी खिंचाई ना करो..!

सागर- अरे,,, इसमें खिंचाई वाली कौन सी बात है,,, और हां, तुम्हारी ब्रा का डिजाइन उस ऐड वाली से अच्छा है, उसके जैसा नहीं है,,,,

शालिनी- हां, मैं तो रात में ही कह रही थी।

सागर- हां, भई, तुम जीती… मैं हारा… बट तुमने कहा था कि….

शालिनी- और क्या कहा था…

सागर- यही कि… कि.. तुम्हारी छोटी है,,,, मुझे ऐसा लगा कि उस एड वाली के बराबर ही हैं।।

शालिनी- भाई, प्लीज़,,,,

शालिनी और मैं एक दूसरे को देखें बिना ये सब बातें कर रहे थे,, तब तक शालिनी काफी लेकर मेरे पास आई और मुझे काफी देकर मेरे पास बैठ गई ।

मैने टीवी आन कर दी और काफी पीकर फ्रेश होकर अपनी तैयारी करने लगा… आज मैने भी पहली बार काली फ्रेन्ची अंडरवियर पहनी थी, इसी लिए मैंने टावेल लपेट रखी थी,,,, नहीं तो मैं अंडरवियर में ही रहता था घर में…
मैने शालिनी को बताया कि शायद आज अवध कालेज का कटआफ आ जायेगा,, ।।
और मैं आने वाले और हसीन पलों को सोचते हुए अपने काम पर निकल गया ।।

मेरा काम में जरा सा भी मन नहीं लग रहा था, रह रह कर शालिनी के सेक्सी बदन का खयाल आ रहा था मैंने दो तीन बार फोन करके उससे बात की, और शाम को जल्दी घर आने को बोला । तभी मुझे पता चला अवध कॉलेज का कटआफ आ गया है, मैंने जाकर लिस्ट देखी,,, शालिनी का एडमिशन ओके हो गया था, मैंने फोन निकाला उसे बताने के लिए,, फिर सोचा घर चलकर शालिनी को सरप्राइज देता हूं ।

दोपहर के 3: 00 बज रहे थे और मैं जल्दी जल्दी घर की ओर चला जा रहा था रास्ते में मैंने नाश्ते के लिए नमकीन और कुछ मिठाई ले ली । घर आकर मैंने अपनी चाभी से गेट खोला, कूलर चल रहा था और कमरे का दरवाजा ऐसे ही ढलका हुआ था, मैंने दरवाजे को खोलकर जैसे ही अंदर देखा तो मेरे हाथ से नाश्ते का पैकेट छूटते- छूटते बचा….

कूलर की तेज आवाज से शालिनी को मेरे आने की आहट सुनाई नहीं पड़ी थी, मुझसे चार फुट की दूरी पर बेड के उपर दूध से गोरे बदन की मालकिन, मेरी बहन सिर्फ काली ब्रा और पैंटी पहन कर बिंदास सो रही थी । सीधे लेटने के कारण हर सांस के साथ उसकी चूचियां उठ बैठ रहीं थीं और ऐसा लग रहा था कि उसकी ब्रा कहीं फट ना जाए, सुबह मैं ठीक से देख भी नहीं पाया था तो मैं बिना कोई आवाज किए उसके सेक्सी बदन को देखने लगा और पता नहीं कब मेरा दूसरा हाथ मेरे लिंग पर आ गया और मैं पैंट के ऊपर से ही अपना लौड़ा सहलाने लगा ।

अब मैंने गौर से देखा तो शालिनी ने अपनी बगल के बाल साफ़ कर दिये थे, ये देखते ही मुझे खयाल आया कि इसका मतलब इसने अपने नीचे के बाल यानि झांटे भी साफ़ करी होंगी, ये सोच कर ही मैं बिना कुछ किए खड़े खड़े ही उसकी काली पैंटी में फूले हुए हिस्से को घूरने लगा । शालिनी के ब्रा से नीचे का पेट एक दम सपाट और चिकना था, उसकी नाभि काफी गहरी थी, और नाभि के नीचे उसकी काली पैंटी में बंद चूत…आह…..

मेरे अंदर का भाई ये मानने को तैयार ना था कि मेरी बेहन चुदाई की उमर पर पहुँच चुकी है, लेकिन मेरे अंदर का मर्द सॉफ देख रहा था कि मेरी बहन पर जवानी एक तूफान की तरह चढ़ चुकी थी।
वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में पड़ी थी।

दूधिया बदन, सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उसके 34 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्ती कैद कर दिया हो।
उसकी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उसका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा छोटा कुँआ हो। उसकी कमर ऐसी जैसे दोनों पंजों में समा जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख रहा था ।

शालिनी के चूतड़ों का साइज़ भी जबरदस्त था । बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…

मुझे ऐसा लगा कि एक दो मिनट अगर मैं इसे ऐसे ही देखते रहा तो मैं अभी खड़े खड़े ही झड़ जाऊंगा । मगर मैं अब करूं क्या?

मैं सोचने लगा कि अगर मैं शालिनी को इस हालत में जगाता हूं, तो कहीं वो बुरा ना मान जाए और इस कमसिन जवानी को भोगने की इच्छा अभी खत्म हो जाए । फिर मुझे लगा कि यही वो मौका है जो आगे कि राह और आसान कर सकता है… रिस्क लो और मज़ा या सजा जो मिले,
ये तो शालिनी को जगाने के बाद ही पता चल पाएगा ।

मैंने सारी हिम्मत बटोर कर शालिनी के दाहिने पैर को छूकर उसे हिलाया और आवाज भी दी… शालिनी शालिनी….उठो…

एक झटके से शालिनी बेड पर उठ कर बैठ गई और सामने मुझे देखकर चौंक गई,,, कुछ सेकंड बाद उसे अपने शरीर की अर्धनग्न अवस्था का आभास हुआ और उसने पास में पड़ी हुई चादर खींच कर अपने आप को सीने से ढक लिया,,,, और हकलाते हुए बोली….

शालिनी- आप कब आये भाई ।

सागर- बस, अभी-अभी आया और तुम्हे जगाया ।

शालिनी- (उसकी आवाज कांप रही थी) जी…जी आप इतनी जल्दी, आप तो शाम को आनेवाले थे ।

(मन में सोचते हुए कि अगर मैं शाम को आता, तो तुम्हारे कातिल हुस्न का दीदार कहां होता )

सागर- वो तुम्हे खुशखबरी देनी थी, इसलिए सारा काम छोड़कर मैं जल्दी आ गया।

शालिनी- ( चादर से अपने को ढकते हुए) खुशखबरी,,,, कैसी खुशखबरी।

सागर- मेरी प्यारी बहना… तुम्हारा एडमिशन शहर के टाप के अ्वध गर्ल कालेज में हो जायेगा, आज लिस्ट जारी हो गई है और मैं देख भी आया हूं, कल चलकर तुम्हारा एडमिशन करा देंगे और अगले वीक से क्लासेज़ शुरू।।

शालिनी- वाऊ… थैंक यू भाईजी,,,, माम को बताया।

सागर- नहीं, अभी नहीं।

शालिनी चादर लपेट कर ही बेड से उठ कर मेरे पास से होती हुई पीछे कमरे में चली गई और कपड़े पहन कर बाहर आई।

मैंने तब तक नाश्ता एक प्लेट में निकाल कर रख दिया।। शालिनी से मैंने चाय बनाने को कहा,,, और चाय नाश्ता करने के बाद..

शालिनी- भाईजी,, स्वारी।

सागर- किसलिए

शालिनी- वो.. वो मैं इस तरह सो रही थी,,, और उसने नज़रें नीची कर ली।

सागर- अरे, तो इसमें क्या हुआ, मैं भी तो चढ्ढी बनयान में ही रहता हूं और यहां कौन आने वाला है मेरे सिवा।

शालिनी- नहीं, मुझे ऐसे नहीं सोना चाहिए था, प्लीज़, आप माम से मत कहना ।

सागर- अरे पागल,,, तुम फालतू में परेशान हो रही हो, मैंने पहले ही कहा था कि यहां जैसे मन हो वैसे रहो,,, घर के अंदर,,, हां बाहर निकलते हुए थोड़ा ध्यान रखना बस। और तुम ऐसा करोगी तो हम लोग कैसे रहेंगे साथ में।

शालिनी- बट भाई, किसी को पता चला कि मैं घर में ऐसे…

सागर- बच्चे, तुम क्यों ऐसे सोच रही हो कि बाहर किसी को पता चलेगा, अरे इस गेट के अंदर की दुनिया सिर्फ हम दोनों की है, किसी को कैसे पता चलेगा कि हम घर में क्या करते हैं, कैसे रहते है। और तुम्हारे आने से पहले मैं तो घर में ज्यादातर बिना कपड़ों के ही रहता था,,, सो बी हैप्पी एंड इंज्वाय योर लाइफ।

शालिनी- जी, ठीक है।

सागर- और हां , तुमने सुबह से ब्रा पहनी है ना,, तो कोई रैशेज वगैरह तो नहीं हुए तुम्हें।

शालिनी- नहीं, बिल्कुल भी नही, इसका फैब्रिक अच्छा है, कम्फ़र्टेबल है…

सागर- और क्या किया आज दिन भर में,

शालिनी- आपके जाने के बाद मैंने साफ सफाई करने के बाद थोड़ी देर टी वी देखी, फिर खाना खाकर आराम कर रही थी… फिर आप आ गये….

सागर- हां, साफ-सफाई तो अच्छी हुई है घर की भी और तुम्हारे जंगल की भी…

शालिनी- मेरे जंगल की ???

सागर- अरे, मैं वो तुम्हारे अंडरआर्म वाले जंगल की बात कर रहा हूं… और मैं हंसने लगा ।

तभी शालिनी जोर से चिल्लाई … भाईईईईईई ,आप फिर मेरे मज़े ले रहे हैं ,प्लीज़….

सागर- अच्छा ,चलो अब मजाक बंद,,,, अभी मुझे कुछ काम से बाहर जाना है, कुछ चाहिए हो तो बोलो..

रात को आठ बजे मैं वापस आया तब तक शालिनी ने खाना बना लिया था और हमने कुछ देर तक टीवी देखी फिर मैंने शालिनी से कहा, मैं नहा लूं फिर खाना खाते हैं और मैं नहाने के लिए बाथरूम में आ गया। पिछले दिनों से लगातार शालिनी के सेक्सी बदन को देखने से सैकड़ों बार मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था, और इस समय भी मैंने जैसे ही अपनी बनयान और चढ्ढी उतार कर पानी डाला, तो लन्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि अब हस्तमैथुन करने से ही आराम मिलेगा , आज के पहले मैंने हजारों बार मुठ मारी थी अलग अलग भाभियों, आंटियों, फिल्म की हीरोइनों को याद करते हुए, आज भी मैं पड़ोस वाली सुनीता भाभी को याद करके मुठ मारने लगा। पर पता नहीं कब मेरी बंद आंखों में शालिनी का चेहरा आया और मैं दोपहर में देखे नजारे को सोचते हुए झड़ गया,

झड़ने के बाद मैं जल्दी से नहाया और सिर्फ टावेल लपेट कर बाहर आ गया । अंजाने में ही सही शालिनी के नाम ये मेरा पहला हस्तमैथुन था ।

कमरे में आ कर मैंने सिर्फ बरमूडा पहना बिना अंडरवियर के और उपर बनयान भी नहीं पहनी, बहाना गर्मी का था पर मेरे दिमाग में कुछ और खुराफात चल रही थी।

सागर- शालिनी तुम भी नहा लो फिर खाना खाते हैं ।

शालिनी- जी, भाई मैं भी यही सोच रही थी, यहां शहर में गर्मी कुछ ज्यादा ही होती है, खाना बनाने में पसीना पसीना हो जाता है पूरा। अगर कूलर ना हो तब तो यहां रहना मुश्किल है।

सागर- हां, यहां गर्मी थोड़ी ज्यादा होती है गांव से,,,

और शालिनी पीछे कमरे में जाकर अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई।

थोड़ी देर बाद कमरे में फिर से मादा महक फैल गई, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, मैंने नज़रें उठा कर देखा तो शालिनी ने दूसरी टी-शर्ट और निक्कर पहनी हुई थी और वह आईने के सामने अपने बाल संवार रही थी ।
क्या गजब ढा रही थी वो ….

हम लोगों ने खाना खाया और फिर मैंने शालिनी से कहा कि अगर तुम बोर हो गई हो दिन भर घर में तो चलो थोड़ा सा बाहर वाक करके आते हैं, शालिनी ने मना कर दिया बाहर जाने को,,,

आज मौसम में उमस और गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, हम लोग बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे, और सुबह शालिनी के एडमिशन के बारे में बात कर रहे थे ।

शालिनी- भाई जी आज गर्मी बहुत है, ऐसा लग रहा है कि नींद नहीं आयेगी ।

सागर- हां,,,, है तो,,, और उपर से तुमने इतने कपड़े भी लाद रखें हैं ।

शालिनी- हां, बट हम लड़कियों को आप लोगों जैसी लिबर्टी कहां,,,

सागर- क्यों , किसने तुम्हारी लिबर्टी पे रोक लगा रखी है, कम से कम मैंने तो नहीं…

शालिनी- नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था, बट मैं कपड़े निकाल कर भी तो नहीं रह सकती,,,, आप की तरह

सागर- हां, निकाल कर नहीं रह सकती बट कम तो कर सकती हो,,, जब भी ज्यादा गर्म हो। तुम ऐसा करो कि अपनी पुरानी वाली समीज और निक्कर पहन लो, अंडरगार्मेंट टाइट होने से गर्मी ज्यादा ही लगती है , मैंने भी नहीं पहने हैं ।

शालिनी- नहीं नहीं भाई, मुझे ठीक नहीं लगेगा,,,, ऐसे मैं कभी रही नहीं ।

सागर- क्या ठीक नहीं लगेगा, तुम मेरे साथ भी कम्फ़र्टेबल नहीं हो तो बाहर कैसे निकलोगी अकेले माडर्न कपड़ों में,

मैंने उसे काफी समझाया तब उसने कहा कि ठीक है मैं ट्राई करती हूं, और वो उठकर पीछे रूम में चली गई।

मैं लेटे लेटे अपने प्लान की कामयाबी पर खुश हो रहा था और अब मुझे यकीन हो रहा था कि मैं शालिनी को धीरे धीरे अपनी लिव इन गर्ल फ्रेंड बना ही लूंगा बस मुझे थोड़ी होशियारी से काम लेना होगा, अब तक मैंने शालिनी को छुआ भी नहीं था ना ही मुझे इसकी कोई जल्दी थी… इतने में शालिनी आकर मेरे पास लेट गई।

सागर- दैट्स गुड,,,, अब कुछ गर्मी कम लगेगी।

शालिनी- जी,

वो अब भी मेरे तरफ देख नहीं रही थी, सीधे टीवी स्क्रीन पर ही नजर गड़ाए थी।

उसकी समीज सफेद रंग की थी और उसके उन्नत उरोजों से कुछ नीचे उसकी नाभि के ऊपर तक थी, मैंने थोड़ा सा आंखें घुमाकर देखा तो उसके निप्पल अलग से नुमायां हो रहे थे, मैंने तुरंत अपनी आंखें हटाई क्योंकि मुझे लगा कि मेरा लन्ड ने फिर से जागने लगा है और नीचे मैंने चढ्ढी भी नहीं पहनी हुई थी ।

मैं सोच रहा था कि जल्दी से जल्दी शालिनी सो जाये, जिससे मैं बिना डर के उसके शरीर को देखूं, शायद छू भी लूं।

हम ऐसे ही बातें करते हुए टीवी आफ करके सो गए।

मैं तो सोने का नाटक ही कर रहा था करीब एक घंटे तक मेरे मन में फिर से…
खुद के सवाल और खुद के ही जवाब….

वासना तो किसी रिश्ते को नही मानती, फिर ये उधेड़बुन क्यूँ?

कहीं ऐसा तो नही जो चाहत जिस्म की प्यास ने शुरू की थी वो आत्मा की प्यास में बदल गयी है।

मेरे दिलोदिमाग में आँधियाँ चल रही थी, मेरा जिस्म जैसे एक सूखे पत्ते की तरह फड़फडा रहा था. ये क्या हो रहा है, क्या ये समाज भाई बहन के प्यार को इज़ाज़त देगा अपनी ही बहन से प्यार करने के लिए.

क्या ये प्यार कभी परवान चढ़ पाएगा. अगर ये प्यार ही है तो इसमे वासना कहाँ से आ गयी। क्यूँ मेरा जिस्म शालिनी के जिस्म में समाने के लिए बेताब है. क्यूँ उसके जिस्म से भड़की हुई प्यास को मैं उसी के बदन से बुझाने की आस लगाए बैठा हूं ।

कैसे बेशर्मो की तरह अपनी बहन की लाज के टुकड़े टुकड़े कर रहा हूं उसके अर्ध नग्न बदन को घूरते हुए।

उफफफफफफ्फ़ ये क्या हो रहा है ये किस दलदल की ओर बढ़ रहा हूँ मैं,

क्या माँ के विश्वास को उसके निश्चल प्रेम को वासना की बलि चढ़ाना ठीक होगा? क्या शालिनी कभी दिल से उसके साथ ऐसा संबंध बनाएगी – नही…. क्या शालिनी कभी उसे एक मर्द के रूप में देखेगी – शायद नही ।

तो फिर क्यूँ ये गंदे ख़यालात मेरे मन से क्यूं नही जा रहे. इसी उधेड़बुन में मैं यूँ ही जागता रहा ।

कमरे की लाइट जल रही थी और मैं दूसरी तरफ करवट बदल कर लेटा हुआ था, अंत में जैसे ही मुझे लगा कि शालिनी सो गयी है, बस एक झटके में ही सारी नैतिकता गायब हो गई और मैं शालिनी के एकदम करीब आकर उसे सूंघने लगा, क्या मदहोश करने वाली महक आ रही थी उसके कामुक बदन से,,, मैं उठकर बैठ गया और उसके यौवन को जीभर कर देखने लगा ।

मेरा उसको समीज पहनाना अब काम में आ रहा था, अब तक मैंने शालिनी के दूध ब्रा में कैद हुए ही देखें थे,

अब समीज इतनी ढीली थी कि शायद नंगी चूचियों के दर्शन हो जाए,
धीरे धीरे मैंने शालिनी की समीज को आधी चूचियों तक उठा डाला ।

मैंने बहुत कोशिश की उसकी समीज को गर्दन तक उठाने की पर उसकी पीठ से दबी हुई थी, मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियों पर हाथ रखकर हल्का सा दबाव बनाया तो ऐसा लगा जैसे रूई का नरम गोला हो, मैं डर भी रहा था कि अगर शालिनी जाग गई और अपने आप को इस हालत में देखेगी, और कहीं मेरे खड़े लौड़े को देख लिया तो आज ही मेरे लौड़े लग जाने हैं,।

करीब दो घंटे तक मैं जागता रहा और बिना ज्यादा छूए शालिनी के बदन को देख कर धीरे-धीरे अपने लौड़े को सहलाते सहलाते मुठ मार कर , वही पास में पड़े कपड़े में अपना वीर्य पोंछ कर सो गया, मुठ मारने में आज जैसा आनंद कभी नहीं आया था ।।

सुबह मैं जानबूझकर देर तक लेटा रहा और शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया, मेरा लन्ड अभी सुबह वाले रेगुलर हार्ड कंडीशन में खड़ा था, मुझे पक्का यकीन था कि शालिनी ने चाय पकड़ाते हुए उसे देखा जरूर था , मैं इतने से ही गनगना उठा, शालिनी ने टी-शर्ट पहन ली थी, और हम लोग बातें करते हुए कालेज जाने की तैयारी करने लगे ।

मैं रूम में कपड़े पहन रहा था और शालिनी पीछे कमरे में ।

करीब 5 मिनट के बाद जब शालिनी बाहर निकल कर आई तो मैं उसे देखता रह गया, शालिनी ने जो कपड़े पहने हुए थे उनमे मैने उसे पहली बार देखा था,

उसने एक वाइट कलर की टी शर्ट पहनी हुई थी जो उसके बदन से बुरी तरह चिपकी हुई थी, और वो इतनी टाइट थी कि उसकी ब्लैक ब्रा की पूरी रूपरेखा मुझे दिखाई दे रही थी, और उसमे उसके बूब्स काफ़ी बड़े लग रहे थे, मैं तो रात को उसके बूब्स को अधनंगा देख चुका था इसलिए मुझे उनका असली साइज़ पता था, वरना इस वाली ब्रा मे उसके बूब्स देख कर मैं तो बेहोश ही हो जाता ।

और नीचे उसने जींस पहनी हुई थी, जो उसकी जाँघो पर चिपकी थी, वो भी काफ़ी टाइट थी, और उसे पहन कर चलने मे उसे शायद हल्की परेशानी हो रही थी..साथ मे उसने हाइ हील के सेंडिल पहने हुए थे..

कुल मिलाकर वो देखने मे एक कड़क पटाखा माल लग रही थी, वो अगर मेरी बहन ना भी होती तो इस वक़्त मैं उसे देख कर मर मिट ता..

मैने उसे देख कर हल्की सी सीटी मारी और वो शर्मा गयी,
शालिनी ने मुझे मुक्का दिखाकर मारने का इशारा किया, जो मुझे बहुत अच्छा लगा, हमारे बीच अब थोड़ी थोड़ी चुहलबाज़ी शुरू हो गई थी ।

उसके सीने का उभार देख कर मेरे दिल की धडकन तेज़ हो गयी. ब्रा में चूचियां और बड़ी हो जाती हैं, शालिनी बिलकुल किसी हिरोईन जैसी दिख रही थी. उसकी चुची किसी पहाड़ी की चोटी की माफ़िक खड़ी थी ।

मुझे लगा की शालिनी ने मुझे उसकी चूंची को घूरते हुये देख लिया है. मै शरम के मारे चुप रहा. और हम लोग बाइक से कालेज के लिए निकल पड़े ।

रास्ते मे बाईक पर जब मै ब्रेक मारता तो शालिनी का सीना मेरी पीठ से टकराता और मेरी पैंट मे तम्बू बन रहा था, मुझे महसूस हो रह था की शालिनी भी शरारती ढन्ग से मुस्कुरा रही थी.

“मुझे अच्ही तरह से पकड कर रखो, कही गिर ना जाना !” मैने कहा तो शालिनी ने मुझे कमर से कस के पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लन्ड से अधिक दूर नही था. उसकी सांस मेरी गर्दन से टकरा रही थी. उत्तेजना की हालत मे हम कालेज पहुंच गये.

कालेज में आ कर हम लोगों ने एडमिशन की फार्मेलिटीज पूरी की, और क्लासेज़ शुरू होने के लिए पता करके हम लोग कालेज घूमते रहे.. काफी पैरेंट्स और कुछ लड़कियों के ब्वायफ्रेन्ड भी साथ में थे वहां पर, सभी लोग अपने अपने काम में बिजी थे, इस कालेज की खासियत यह थी कि यहां अपर मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां ज्यादा पढ़ती थी, शहर की सबसे माडर्न लड़कियों में से कुछ एक यहां भी घूम रहीं थीं, सीनियर लड़कियों में कुछ ने बहुत ही सेक्सी कपड़े पहन रखे थे, किसी के दूध दिख रहे थे तो किसी की लो वेस्ट जींस के ऊपर पैंटी… और किसी की ब्रा नुमाइश कर रही थी कपड़ों के ऊपर से …

लड़कियों का कालेज होने से खुलापन या कहें नंगापन कुछ ज्यादा ही था।

कुछ लड़कियां नये एडमिशन वाली भी गजब अंग प्रदर्शन कर रहीं थीं… मुझे लगा साला यहां तो एक से एक खूबसूरत आईटम हैं और चंचल भी,,,, कहीं शालिनी इन सब के चक्कर में ना आ जाए।। आज कल मैं सिटी का माहौल देख ही रहा था, पहले लड़कियां सिर्फ प्यार करतीं थीं और आज कल चुदाई और शापिंग ….

मैंने तो पहले से ही सोच लिया था कि मुझे शालिनी को ब्वायफ्रेन्ड के चक्कर में पड़ने से पहले ही अपना हमबिस्तर बना लेना है, और अब मैं ये जल्दी करना चाह रहा था ।

खैर,,, मैं और शालिनी लाईब्रेरी का कार्ड बनवाने के बाद बाहर बड़े ग्राउंड में आकर घास पर एक पेड़ की छांव में बैठ गये ।

सागर- तो तुम्हारे तो सारे काम हो गए, अब दस मिनट आराम कर लें फिर घर चलें । और कालेज कैंपस कैसा लगा।

शालिनी- बहुत जबरदस्त… बस पढ़ाई भी ऐसी ही जबरदस्त हो…
वह बहुत ही एक्साइटेड थी

सागर- हां, यहां पढ़ाई भी टापक्लास है और बाकी सब भी

शालिनी थोड़ा हंसने के बाद बोली हां वो तो दिख रहा है।

सागर- हां, दिख तो रहा ही है, यहां की लड़कियों का कान्फीडेन्स देखा… बोल्ड ब्यूटीज…

शालिनी- बोल्ड भी और बेशर्म भी…

सागर- अरे, यहां मुझे तो कोई बेशर्म नही दिखाई देता है…

शालिनी- वो सामने ही देखिए, वो लड़की की शर्म।

सागर- नहीं, वो क्या बेशर्मी कर रही है, वो तो अपने साथ आए लड़के से बात कर रही है।

शालिनी- नहीं,मेरा वो मतलब नहीं है, आप वो…. वो उसके कपड़े देखिए कितना एक्सपोज हो रहा है।

सामने कुछ दूर पर जो लड़की खड़ी थी, उसने खुले कन्धों वाली ड्रेस पहनी थी जिससे उसकी लाल रंग की ब्रा की पट्टियां पूरी दिखाई दे रही थी, और अंदर से उसकी लाल ब्रा का शेप पूरी तरह से सफेद रंग के झीने टाप से नुमायां हो रहा था, उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी थी, नीचे उसने शार्ट जींस पहनी थी जो उसके घुटनों से कुछ ऊपर ही थी और उसके गोरे मांसल पैरों को देखकर किसी का भी लन्ड खड़ा हो जाता….

सागर- कम आन… यार इतना सब चलता है यहां सिटी में, किसी के पास इतना टाइम नहीं है कि वो ये सब देखें… बहुत बिजी हैं लोग और माडर्न भी ।

मैंने पहली बार शालिनी को यार कहकर बात की थी, और शायद उसे अच्छा ही लगा था

शालिनी- ओके .. ओके,भाई …अब मुझे भी यहीं आना है , इन्हीं के साथ पढ़ना है,,,

सागर- हां भई, और एक तुम हो कि घर के अंदर भी तुम्हे शर्म आती है वो भी मेरे साथ, इन लड़कियों का कान्फीडेन्स देखो,,,,

शालिनी- ऐसा कुछ नहीं है वो आप के साथ थोडा़ ध्यान रखना जरूरी रहता है, आफ्टरआल, यू आर माई एल्डर ब्रदर, और मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी ना हो, बस …. वैसे मैं भी इस तरह के कपड़े पहनना पसंद करूंगी, बट कालेज में नहीं, कोई पार्टी वगैरह हो तो….

सागर- कोई नहीं, जब तुम्हारे अंदर कान्फीडेन्स आ जायेगा तो तुम भी पहनोगी कालेज हो या पार्टी… इट्स आल अबाउट कान्फीडेन्स ।

शालिनी- ओके, देखते हैं, अब घर चलें,या और किसी की बेशर्मी देखनी है… हंसते हुए

सागर- हां, चलो, आज के लिए इतनी काफी है अब तो हर रोज तुम्हें जब कालेज छोड़ने आऊंगा तो ऐसी बेशरमियां हर रोज देखने को मिलेंगी .. ही ही हंसते हुए …

मुझे तुमको घर पहुंचाकर काम पर भी जाना है,

कालेज की एक से एक जबरदस्त माल आईटम को देखकर मेरा लन्ड कई बार हरकत में आया था और बाईक पर वापसी के समय शालिनी भी कुछ ज्यादा ही सटकर बैठी थी, मैंने कई बार उसकी गुदाज चुचियों को अपनी पीठ पर महसूस किया, और बातें करते हुए हम घर आ गए । इस थोड़ी चुहलबाज़ी से मुझे थोड़ी हिम्मत और बढ़ी कि शालिनी को जल्दी ही मैं लाइन पर ले आऊंगा ।

शालिनी को घर छोड़ कर मैं अपना बैग लेकर घर से निकल लिया, मन में सारी पढ़ी हुई सेक्स कहानियों के किरदार नजर के सामने आ रहे थे, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं शालिनी के साथ बातचीत में थोड़ा सा फ्री हो पाया हूं अब उसके शरीर के साथ अपने आप को कैसे फ्री करूं ,,, कालेज में लड़कियों के नंगेपन ने मेरी कुछ मदद तो कर दी थी, मगर इसके आगे क्या ??

शाम को सात बजे मैं वापस घर आया और आते ही मैंने कपड़े बदले और नहाने लगा,,, नहाकर मैंने फिर से बिना अंडरवियर के बरमूडा पहन लिया।।

शालिनी मेरे लिए नाश्ता बनाकर ले आई और मेरे सामने रख दिया और रखते हुए जब वो झुकी तो मेरी गंदी नज़रों ने पहली बार, जान बूझकर, उसकी टी-शर्ट के खुल्ले हुए गले के अन्दर की तरफ देखा…

और जो मुझे दिखा, उसके बाद तो मेरे लंड का बैठे रहना दुश्वार हो गया.. गला नीचे करने की वजह से उसके गले की गहरी घाटियाँ अंदर तक मुझे दिखाई दे गयी… दो पके हुए मोटे तरबूज ठीक मेरी नज़रों के सामने थे…

उनकी कसावट का अंदाज़ा मैं थोड़ा थोड़ा ले ही चूका था, काली ब्रा में कसे हुए ऐसे थे कि वो हिल भी नही रहे थे, एकदम किसी पत्थर की तरह जम कर चिपके हुए थे वो उसकी छाती से..

पर यहाँ मेरी गंदी नज़रों की चोरी पकड़ी गयी।

मैं उसके बूब्स को देख रहा था और वो मुझे

शालिनी- भाई कहां हो तुम, चाय ठंडी हो जायेगी ।

और एक कातिलाना स्माइल देकर वो अपनी गान्ड मटकाती हुई फिर से किचन मे चली गयी..

मेरा मुँह खुल्ला का खुल्ला रह गया, शालिनी ने कुछ नही कहा… एक तरह से देखा जाए तो मैने आज ही पहली बार शालिनी के ऑलमोस्ट नंगे बूब्स देखे उसकी जानकारी में, और उसने मुझे देखते हुए पकड़ा भी और मुस्कुराइ भी.. यानी उसे इस बात मे मज़ा आ रहा है क्या ??

शालिनी ने आज वीशेप गले की टी-शर्ट और निक्कर पहनी थी, इन कपड़ो मे उसके शरीर का एक एक उभार खुल कर दिखाई दे रहा था, मैं अभी लेटकर टीवी देखने लगा । शालिनी को खाना बनाने की तैयारी के लिए बार बार मेरे सामने से गुज़रना पड़ रहा था उसके मादक बदन और मस्त चाल को देख देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं अपनी बहन की मस्त जवानी का नयन सुख ले रहा था मुझे पता ही नही चला कि कब मेरे बरमूडा मे बड़ा सा टेंट बन गया था तभी शालिनी मेरे पास आई और बोली-भाई खाना कब खायेंगे ?

सागर- थोड़ी देर में,,

इतना कहकर शालिनी वहाँ से नही हटी और एक टक मेरे बरमूडे मे बने तम्बू को देखने लगी मुझे समझ नही आया कि वो ऐसे क्या देख रही है जब मैने उसकी नज़रो का पीछा किया और अपने तम्बू को देखा तो झट से अपने हाथ से अपने लंड को दबा दिया और वो झट से बाहर बरामदे में चली गई ।

कुछ देर बाद वो अंदर आई और

हम लोगों ने खाना खाया और शालिनी ने साफ सफाई करने के बाद कहा, भाई मैं नहाने जा रही हूं, बहुत पसीना हो रहा है ऐसे तो नींद नहीं आयेगी, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, कुछ देर बाद शालिनी नहाकर कमरे में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, आज उसने बिना कहे समीज और निक्कर पहन ली थी, ब्रा तो पक्का नहीं पहनी थी और शायद पैंटी भी नहीं ।

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