मां का प्यार

 

                            मां का प्यार




सादिया लाहौर मे अपने शौहर और इकलौते बेटे के साथ रहती है. सादिया की एज हे 38 और वो एक हाउस वाइफ हे.

सादिया के हज़्बेंड 50 ईयर्स ओल्ड हैं और प्राइवेट कंपनी मैं सेल्स मॅनेजर हैं. सादिया का एक ही बेटा हे अली जो 18 साल का हे और फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हे.

सादिया बहुत ही सिंपल शरमाने वाली लकिन लुक बहुत सेक्सी ऐंड पर्फेक्ट फिगर की मालिक हे और अपनी लाइफ मैं बहुत खुश हे. सादिया का फिगर 34 28 36 हे कलर वाइट हे लोंग ब्राउन हेर.

सादिया के हिप्स उभरे हुए और बहुत सॉफ्ट हैं. बूब्स बहुत मुलायम हैं निपल्स मीडियम और ब्राउन हैं.

सादिया बहुत ही हॉट न हॉर्नी हे और जब उस के सेक्सी जज़्बात जागते हैं तक वो बहुत गीली हो जाती हे नॉर्मल गर्ल्स/लॅडीस से कहीं ज़ियादा.

अली इस 18 ईयर्स ओल्ड अली छोटी उमर से ही बहुत ही सेक्स लवर लड़का था उस का जिस्म बहुत सेक्सी ऐंड क्यूट हे और लंड 7″ लोंग ऐंड काफ़ी मोटा हे. ये सब दो साल पहले शुरू हुआ था.

अली के डैड अक्सर काम के सिलसिले मैं आउट ऑफ सिटी रहते हैं इस लिए ज़ियादा टाइम अली अपनी मों सादिया के साथ रहता हे.

अली का अपना बेड रूम हे जहाँ वो स्टडी करता हे कंप्यूटर यूज़ करता हे रेस्ट करता हे सोता हे लकिन सादिया अक्सर अकेले होने की वज़ह से अक्सर अली को अपने रूम मैं सुलाती अपने बेड पे.

क़रीब दो महीने पहले अली अपनी मा के साथ उन के बेड पे सो रहा था के अचानक पियास की वज़ह से सादिया की आँख खुली और उस ने अली का हॅंड अपने हिप्स पे फील किया लकिन उस ने इस बात को फील नही किया और अली का हॅंड अपने हिप्स से हटा दिया उठ के पानी पीया और फिर सो गए.

सुबह सादिया उठी तो देख अली बिस्तर मैं नही था उस ने टाइम देखा तो फ़ौरन खड़ी हुई और ब्रेकफास्ट बनाना की तयारी करने लगी क्यों के अली ने कॉलेज जाना था.

अली अपने रूम से तैयार हो कर बाहर आया और डाइनिंग टेबल पे ब्रेकफास्ट का वेट करने लगा. अली की नज़र किचन मैं गयी जहाँ सादिया उस के लिए ब्रेकफास्ट बना रही थी.

सादिया की बॅक अली की तरफ थी और अली अपनी मा को देख के हार्ड होने लगा क्यों के एक तो सादिया रफ कंडीशन मैं खड़ी थी और उस के हेयर खुले हुए थे और जल्दी मैं ब्रेकफास्ट बनाने की वज़ह से सादिया की कमीज़ उस के गांड़ मैं फसी हुई थी जिस से सादिया की गांड़ का नज़ारा बहुत सेक्सी दिखाए दे रहा था.

सादिया ब्रेकफास्ट बनाने के साथ साथ किचन के और काम भी कर रही थी इस लिए उस की गांड़ मैं फसी कमीज़ उसकी गांड़ की शेप को क्लियर दिखा रही थी.

जैसे जैसे सादिया मूव करती इधर उधर होती अली का लंड और टाइट होता और हार्ड होता उसे बहुत अच्छा फील हो रहा था और अली स्लो स्लो अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से रब कर रहा था मसल रहा था.

अचानक अली की जान निकल गयी जब सादिया ने अचानक अली की तरफ देखा…

सादिया: अली बेटा बस ब्रेकफास्ट तैयार है मैं अभी लाती हूँ सॉरी आज मेरी आँख नही खुली इस लिए देर हो गयी.

अली की जान मैं जान आ गयी क्यों के वो बाल बाल बचा था और फ़ौरन अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया था.

अली: इट्स OK मा अभी टाइम है कॉलेज जाने मैं.

सादिया: बेटा जब तुम जल्दी उठ गये थे तो मुझे भी जगा देते.

अली: मा आप मज़े की नींद कर रही थीं इस लिए नही जगाया सॉरी.

सादिया ब्रेकफास्ट ले के अली के साथ चेयर पे बैठ गयी और दोनो ने नाश्ता किया फिर अली खुदा हाफ़िज़ कह के कॉलेज रवाना हो गया और सादिया फ्रेश हो के घर के काम करने लगी.

अली अपनी मा सादिया के लिए हॉट तो था लकिन सिर्फ़ देखने की हद तक उस से ज़ियादा नही. बस कभी कभी जाने अंजाने अली अपनी मा की गांड़ को या मम्मों को टच कर लेता वो भी आक्सिडेंटली.

अली ने कई बार कोशिश की लकिन आज तक वो अपनी मा को नंगा नही देख सका था ना ही कभी उस ने अपनी मा सादिया की ब्रा देखी ना अंडरवेर बस सिर्फ़ 1, 2 बार बिना दुपट्टे देखा या कमीज़ सादिया की गांड़ मैं फसी देखा उस से ज़ियादा नही क्यों के सादिया इन चीज़ों का बहुत ख़याल करती थी शुरू से कोई घर मैं हो या ना हो उस की आदत थी खुद को ढांप के रखना.

अली जब कॉलेज से वापस आया तो सादिया अपने रूम मैं अपने बेड पे सो रही थी. अली ने कपडे चेंज किए और शलवार कमीज़ पह्न के अपनी मा के रूम मैं गया और बेड पे जा के लेट गया.

काफ़ी देर बाद अली ने करवट ली तो सादिया की बॅक उसकी तरफ थी और अली ने अपना हाथ अपनी मा के गांड़ पे रखा और आँखें क्लोज़ कर दी.

सादिया की आँख खुल गयी जब अली ने अपना हाथ उस के गांड़ पे रखा लकिन सादिया ने कुछ नही कहा वो उसी तरह आराम से बिना मूव किए लेटी रही क्यों के सादिया दिल मैं सोच रही थी के कहीं अली उस के साथ अपनी मा के साथ कुछ गलत करने के इरादे से तो नही टच कर रहा?

फिर वो सोचती के नही सादिया तुम्हारा बेटा ऐसा नही है वो ऐसी हरकत कभी नही कर सकता वो भी अपनी मा के साथ वो तो बहुत शरीफ है इनोसेंट है. और अभी उस के ऐज भी नही है ऐसा कुछ सोचने की.. करने की.. नही नही ये मेरा वहम है मेरा बेटा ऐसा नही है.

फिर ख़याल आता के सादिया आज कल जो ज़माना है इस ऐज के बचे भी सब जानते हैं और कुछ भी कर सकते हैं खैर उसे कुछ समझ नही आ रहा था के अली ने अपना हाथ उस के गांड़ पे क्यों रखा.

काफ़ी देर वो सोचती रही फिर उसे यक़ीन हो गया के अली ने नींद मैं अपना हाथ रखा हो गा क्यों के अली ने अपना हाथ बिल्कुल भी मूव नही किया जहाँ रखा था वहीं रखे रहा और अगर वो फील कर रहा होता तो लाज़मी मूव करता खैर ऐसा सोच के सादिया को तसली हुई और वो कुछ देर बाद उठ के बाहर चली गयी.

उधर अली सच मैं अपनी मा सादिया को फील करने के लिए मज़ा करने के लिए टच कर रहा था लकिन उस मैं इस से ज़ियादा हिम्मत नही थी जिस की वज़ह से उस ने सिर्फ़ अपना हाथ अपनी मा सादिया के गांड़ पे रख दिया और ज़रा भी मूव नही किया.

रात को अली स्टडी कर के अपनी मा के रूम मैं आया तो देखा उसकी मा बेड पे लेटी हुई थी और टीवी देख रही थी.

अली: मा आप सोई नही अभी तक?

सादिया: नही बेटा मुझे नींद नही आ रही थी इस लिए टीवी देख रही हूँ. तुम ने स्टडी कर ली?

अली: जी मा मैं ने कर ली. चलें टीवी देखते हैं.

अली अब बेड पी आ गया और अपनी मा के साथ लेट के टीवी देखने लगा.

कुछ ही देर मैं अली की आँख लग गयी फिर सादिया ने टीवी ऑफ किया और सोने के लिए लेट गयी. सादिया ने करवट ली और अपनी बॅक अली की तरफ कर के सोने लगी के अचानक अली का हाथ दोबारा उस के गांड़ पे आया लकिन इस बार गांड़ के ऊपर नही सीधा सादिया की गांड़ के बीच की लें मैं गया.

सादिया को झटका लगा क्यों के अली का हाथ बिल्कुल उस की सॉफ्ट गांड़ के बीच मैं था गांड़ के सुराख पे. अली का हाथ अपनी गांड़ और गांड़ के सुराख पे टच होते ही सादिया ने गांड़ को टाइट किया फिर जल्दी से अपनी गांड़ को मूव किया जिस से अली का हाथ बेड पे आ गया.

अली जाग रहा था और उसे बहुत मज़ा आया जब उस ने अपनी मा की गांड़ मैं अपना हाथ रखा क्यों के वो जगह बहुत गरम थी बहुत हीट थी वहाँ और बहुत सॉफ्ट भी फिर वैसे ही अचानक उसका मज़ा खराब भी हो गया जब सादिया ने अपनी गांड़ आगे मूव कर के उस का हाथ वहाँ से हटा दिया. वो डर भी गया था लकिन वो सोने की आक्टिंग करने लगा.

सादिया ने आराम से अपना सिर उठा के अली की तरफ देखा जो सकूँ से सो रहा था. सादिया को दोबारा वही सोच आने लगीं उसे कुछ समझ नही आ रहा था के ऐसा क्यों हो रहा है और अगर अली जान बूझ के ऐसा कर रहा है तो उसकी किया वज़ह है वो ऐसा क्यों कर रहा है वो भी उस के साथ अपनी मा के साथ.

सादिया काफ़ी देर सोचती रही और जागती रही लकिन उसे कोई जवाब ना मिला उसे कुछ समझ नही आया और उस के बाद अली का हाथ भी दोबारा उसे टच नही हुआ खैर वो फिर सो गयी.

सुबह सादिया जल्दी उठी और अली को उठा के ब्रेकफास्ट बनाने चली गयी.

डाइनिंग टेबल पे दोनो मा बेटा नाश्ता कर रहे थे बिल्कुल खामोश के अचानक सादिया ने कहा.

सादिया: अली बेटा रात तुम ने नींद मैं अचानक मुझ पे अपना हाथ रखा और मैं डर गयी.

अली: अच्छा सच मैं मुझे तो याद नही है शायद मैं नींद मैं था सॉरी मा बट आप डर क्यों गयी थीं?

सादिया: बेटा मेरी अभी आँख नही लगी थी और तुम्हारा हाथ अचानक मेरे ऊपर आ गया इस लिए मैं डर गयी थी.

अली: ओह सॉरी मा मैं नींद मैं हूँ गा वरना जागते मैं ऐसा कभी नही करता.

सादिया: इट्स ओके बेटा मैं जानती हूँ तुम सो रहे थे.

अली के डैड उसी वक़्त घर आ गये फिर उन्हों ने खैर खेरियत पूछी और अली के डैड फ्रेश होने चले गयी सादिया किचन मैं अली के डैड के लिए ब्रेकफास्ट बनाने चली गईं और अली अपना ब्रेकफास्ट फिनिश कर के अपने हाथ वॉश करने किचन मैं एंटर हुआ.

किचन मैं सादिया अपने खुले बालों के साथ खड़ी थी अली जैसे से अपनी मा की बॅक से गुज़र रहा था सादिया कुछ उठाने के लिए नीचे झुकी जिस से अली का हाथ सादिया की गांड़ पे लगा.

अली को दोबारा बहुत मज़ा आया लकिन सादिया को एक दम झटका लगा और वो जल्दी से सीधी खड़ी हुई जिस से उस के सिर सामने ओपन शेल्फ से जा लगा.

सादिया की धीमी लकिन सेक्सी आह निकली दर्द से. फिर फ़ौरन सादिया ने अपना हाथ अपने सिर पे रखा और बेधीयानी मैं पीछे हुई और इस बार अपनी गांड़ अपने बेटे अली के हाथ पे प्रेस की वो भी ज़ोर से.

अली ने अपना राईट हाथ वहीं अपनी मा की गांड़ मैं प्रेस किए रखा और लेफ्ट हाथ को अपनी मा के सिर पे जहाँ उसकी मा का हाथ था उस पे रख के पूछा किया हुआ मा सब ठीक तो है आपको ज़ोर की तो नही लगी?

ये सब अचानक और इतनी जल्दी मैं हुआ के सादिया को समझ ही नही आया के ये किया और कैसे हो गया और अभी तक उस के बेटे अली का राईट हाथ उस के गांड़ मैं ही था लकिन उस ने अपना सिर ज़ोर से दबाया हुआ था के कहीं कट ना लग गया हो.

अली इस मौके का बहुत फ़ायदा उठा रहा था उस ने अपना हाथ अपनी मा के गांड़ मैं ही दबाए रखा उसे बहुत मज़ा आ रहा था उस का लंड फुल हार्ड था.

अली वैसे ही सादिया को वहाँ से बाहर ले आया और चेयर पे बिठाने लगा अभी तक अली का हाथ उसकी मा की गांड़ मैं था और उस ने वैसे ही अपनी मा को चेयर पे बिठा दिया.

नीचे अली का हाथ उस पे उसकी मा की गांड़ के. अचानक सादिया को होश आ गया.

सादिया: अली बेटा अपना हाथ तो निकालो मेरे नीचे से.

सादिया की आवाज़ मैं गुस्सा भी था जिस से अली डर गया और जल्दी से अपना हाथ अपनी मा के नीचे से हटा लिया और साथ वाली चेयर पे बैठा गया सादिया का सिर दबाने.

अली: सॉरी मा मैं परेशां हो गया था इस लिए नोटीस नही किया.

सादिया: इट्स ओके बेटा आई आम फाइन नाउ यू मे लीव नाउ यू विल बे लेट फॉर योर क्लास.

अली: ओके मा बट आर यू श्योर देत यू अर फाइन?

सादिया: हाँ बेटा मैं ठीक हूँ.

 

 

कुछ दिन बाद अली के फादर उसकी मों टीवी देख रहे थे टीवी लाउंज मैं के अली अपनी स्टडी ख़तम कर के टीवी लाउंज मैं आ गया.

अली के फादर अपनी चेयर पे बैठे टीवी देख रहे थे साथ साथ ऑफीस वर्क भी कर रहे थे. सादिया सोफा पे बैटी हुई थी सर्दी की वज़ह से ब्लैंकेट डाली हुई थी अपने ऊपर. अली सोफा के क़रीब आ के नीचे बैठ गया अपनी मा के पास.

सादिया: बेटा पढ़ लिया तुम ने?

अली: जी मा मैं ने पढ़ लिया है. मा आज ठंड कुछ ज़ियादा है या मुझे फील हो रही है?

सादिया: ठंड है बेटा इसी लिए तो मैं ने ब्लैंकेट ली हुई है जाओ तुम भी ले आओ.

अली: अब मैं नही जा रहा मैं थका हुआ हूँ मैं आपके साथ शेयर कर लेता हूँ.

सादिया: अच्छा माई लेज़ी सोन यू कॅन हॅव इट.

अली मुस्करा के थोडा और क़रीब हुआ और ब्लैंकेट लेने लगा. मा कोई फिल्म लगाएं ना.

सादिया: वेट तुम्हारे पापा न्यूज़ देख लें फिर चॅनेल चेंज करें गे. बेटा तुम सोफा पी आ जाओ उस साइड पे बैठ जाओ ब्लैंकेट छोटी पड़ती है तुम्हारे नीचे बैठने की वज़ह से.

अली: मा सोफा पे स्पेस कम है आप नीचे आ जाएँ ना प्लीज़.

सादिया ने OK कहा और उठ के नीचे अली की साइड पे बैठ गयी और टीवी देखने लगी.

दोनो मा बेटा चिपक के बैठे थे और अली को बहुत मज़ा आ रहा था क्यों के उसे उस के गांड़ की साइड अपनी मा के सॉफ्ट गांड़ की साइड पे फील कर के अच्छा लग रहा था और वो हार्ड भी हो गया था.

अली ने राईट साइड पे बैठी अपनी मा के शोल्डर पे अपना सिर रख दिया और टीवी देखने लगा कुछ देर बाद सादिया ने अपने हाथ ब्लैंकेट मैं डाल लिए और उस के ऐसा करने से अली को अपना सिर उठना परा और दोबारा जब अली अपना सिर अपने मा के शोल्डर पे रखने लगा तो वो थोडा नीचे हुआ और शोल्डर की बजाए अपना सिर अपनी मा की आर्म पे रख दिया जो उसकी मों के लेफ्ट मम्मे के बहुत क्लोज़ था.

सादिया ने दुपट्टा भी लिया हुआ था. उसे अपने लेफ्ट मम्मे पे हीट फील होने लगी जब उस ने आँखें नीचे के के देख तो अली का फेस बिल्कुल उस के लेफ्ट मम्मे के सामने था और जब जब अली सांस छोड़ता उस की गरम सांस सादिया के दुपट्टे से हो के कमीज़ के अंदर और वहाँ से उस के ब्रा तक जा रही थी. उस की सांस की हीट उसे अपने लेफ्ट मम्मे पे फील हो रही थी.

सादिया ने कुछ नही कहा और दोबारा टीवी देखने लगी कुछ देर बार सादिया को मज़ा आने लगा क्यों के सर्दी मैं गरम सांस वो भी मम्मे पे उसे कुछ अजीब लकिन अच्छा फील हो रहा था उधर उसे उसका निपल भी हार्ड होता फील हुआ जो अब तक फुल हार्ड हो चुका था.

सादिया हैरान थी जब उसे फील हुआ के सिर्फ़ गरम सांस अपने मम्मे पे फील कर के उसका सिर्फ़ निपल ही हार्ड नही हुआ था बलके उसकी चूत भी गीली होना शुरू हो गयी थी वो एक अजीब कशमकश मैं थी लकिन उसे बहुत अच्छा फील हो रहा था उधर अली इस बात से अंजान आराम से टीवी देख रहा था.

सादिया ने अपने हज़्बेंड की तरफ देखा जो अब तक सो चुका था वहीं बैठे बैठे जो उनकी शुरू से आदत थी टीवी देखते देखते अक्सर उनको वहीं नींद आ जाती.

सादिया जो लास्ट 3 दिन से डेली एक बार दिन मैं एक बार रात मैं अपने हज़्बेंड से चुदवा रही थी जिसे सेक्स नीड भी नही थी फिर भी सिर्फ़ गरम सांस फील कर के खुद बहुत गरम हो रही थी. परेशां सादिया सोच रही थी के ऐसा आज तक कभी नही हुआ लकिन आज ऐसा क्यों हो रहा है.

खैर फिर सादिया ने आराम से अपना शोल्डर ऊपर किया अली ने समझा के सादिया थक गयी हो गी उस ने अपना सिर वहाँ से मूव किया लकिन वो हैरान हुआ क्यों के सादिया ने अपना दुपट्टा उतार के साइड पे रखा ये कहते हुए के मुझे गर्मी लग रही है. पहली बार अली अपनी मा को बिना किसी वज़ह दुपट्टा उतारते देख रहा था.

सादिया ने अली का सिर पाकर के दोबारा उसे अपने बाज़ू पे रख दिया लकिन इस बार वो थोडा अली की साइड पे मूव कर आए थी जिस की वज़ह से अब अली का सिर हाफ उस की मा के बाज़ू पे था और हाफ उस के मम्मे पे. अली के लिप्स ऐंड नोस उसकी मा के मम्मों पे थे.

अली को कुछ समझ नही आ रहा था खैर वो दोबारा टीवी देखने लगा. अब अली की सांस उसकी मा को पहले से ज़ियादा गरम ज़ियादा आसानी और ज़ियादा तेज़ी से फील हो रही थी जिस की वज़ह से सादिया को अब पहले से ज़ियादा मज़ा आ रहा था.

सादिया मज़ा भी कर रही थी और बहुत शर्मा भी रही थी अपनी इस हरकत पर ओ सोच रही थी के अगर अली को शक हो गया तो वो किया सोचे गा अपनी मा के बारे मैं.

सादिया तुम्हें ये किया हो गया है अपने बेटे की हेल्प से तुम हॉट हो रही हो वो भी उस वक़्त जब तुम्हारा हज़्बेंड तुम्हारे पास है शरम करो लानत है तुम पे तुम ज़रा सी देर के मज़े के लिए अपने बेटे को यूज़ कर रही हो एक मासूम को जिस के ज़रा से टच ने तुम्हें परेशानी मैं डाल दिया था जब के वो इनोसेंट था उस वक़्त गुस्सा कर रही थी जब के वो ऐसा कुछ नही कर रहा था ऑर ब जब खुद को अच्छा फील हो रहा है अपने हवस के लिए ऐसा कर रही हो किया ये ठीक है तुम तो ऐसी नही थी आख़िर किया हो गया है तुम्हें.

फिर उसी वक़्त सोच आती के इस मैं ऐसा किया है मैं कौन सा अपने बेटे के साथ कुछ गलत कर रही हूँ सिर्फ़ उसकी सांस ही तो फील कर रही हूँ इस मैं तो कुछ गलत नही…

कुछ देर बाद सादिया के हज़्बेंड जागे और चेयर से उठ के अपने रूम की तरफ चले गये फिर सादिया की आवाज़ दी के आ जाओ सोने.

सादिया फुल हॉट एंड गीली वहाँ से मुश्किल से उठी अली को गुड नाइट कहा और उसे गाल पे किस किया जो के 10 साल बाद पहली बार था और अपने रूम मैं एंटर हुई डोर लॉक किया कपडे उतरे बिस्तर मैं गयी और मज़े से अपने हज़्बेंड से खूब चुदवाया…

नेक्स्ट दे सादिया ने खुद को बहुत बुरा भला कहा और तौबा भी की के आइन्दा ना कभी ऐसा करूँ गी ना ही सोचूँ गी.

शाम को सादिया घर के काम से फ्री हो के अपने हज़्बेंड और बेटे के साथ टीवी देखने रूम मैं आए तो अली कल वाली जगह पेर बैठा था अपनी मा की ब्लैंकेट अपने ऊपर डाले.

सादिया को पता नही किया हुआ के वो दिन मैं खुद से किए प्रॉमिस को भुला के सीधा अली के पास आ के ब्लैंकेट अपने ऊपर डाल के बैठ गयी लकिन इस बार थोडा फासला था.

कुछ देर बाद अचानक सादिया ने फील किया के उसका बेटा अपना हाथ ब्लैंकेट मैं मूव कर रहा है जो सीधा सादिया की लेग्स पे आया. पहले तो सादिया को गुस्सा आया लकिन फिर वो खामोश हो गयी क्यों के वो अपने हज़्बेंड के सामने तमाशा नही करना चाहती थी दूसरा वो इतनी ब्रेव नही थी शरम की वज़ह और बेटे की लाइफ खड़ाब ना हो इस लिए वो चुपके से बिना कुछ कहे और किए बैठी रही.

अली ने अपनी अम्मी की लेग को टच करते ही बहाने से कहा के अम्मी ड्रामा वाली इस ऐक्ट्रेस का नाम किया है?

सादिया ये सुनते ही बहुत शर्मिंदा हुई के वो अपने बेटे के बारे मैं कितना गलत सोच रही थी शेम ऑन यू सादिया…

फिर कुछ दिन नॉर्मल गुज़र गये और अली के फादर दोबारा किसी काम से आउट ऑफ सिटी जा रहे थे. शाम को अली और उसकी अम्मी अकेले बैठे टीवी देख रहे थे के अली दोबारा बिना कुछ कहे अपनी अम्मी की ब्लैंकेट मैं आ गया और उन के साथ लेट गया.

अली: अम्मी एक बात पूछनी है लकिन अगर आप गुस्सा ना करें तो???

सादिया: किया बात है बेटा पूछ मैं बुरा नही मानूं गी.

अली: प्रॉमिस मी मा.

सादिया: बेटा ऐसी किया बात है OK आई प्रॉमिस गुस्सा नही करूँ गी पूछ किया पूछना है.

अली: अम्मी जब हम घर पे अकेले होते हैं तो सिर्फ़ मेन डोर बाहर वाला ही लॉक करते हैं ना?

सादिया: हाँ बेटा. क्यों?

अली: फिर अम्मी जब डैड घर होते हैं तो आप लोग अपने रूम का डोर क्यों लॉक करते हैं.

सादिया: (विद स्माइल) बेटा आप के डैड कहते हैं सेफ्टी अच्छी बात है और कोई डिस्टर्ब ना करे इस लिए भी.

अली: पेर अम्मी सेफ्टी तो मेन डोर लॉक से होती है और फिर डैड जब यहाँ नही होते किया तब सेफ्टी की ज़रूरत नही होती और डैड मुझे भी तो नही कहते के अपने रूम का डोर भी लॉक किया करो? और अम्मी जब डैड यहाँ होते हैं तब तो मैं आप के रूम मैं आता ही नही हूँ फिर कौन और क्यों कोई डिस्टर्ब करे गा डैड को? बताएं ना सही सही क्यों के आप खुद तो कहती हैं के झूट बोलना अच्छी बात नही है फिर आप भी सच बताएं ना मा.

सादिया: बेटा ऐसी बात नही है अभी तुम बच्चे हो जब बड़े हो जाओ गे तुम्हें खुद पता चल जाए गा सो लीव दिस टॉपिक.

अली: लकिन अम्मी आप क्यों नही बता देती हैं?

सादिया: बेटा कहा नही अभी नही दैट्स इट नो मोरे क्वेस्चन ओक?

अली: OK मा

कुछ देर दोनो अम्मी बेटा खामोशी से टीवी देखते रहे.

अली: अम्मी मेरी फ्रेंड है ना मिसबा वो भी बता रही थी के उस के अम्मी ऐंड डैड भी डोर लॉक करते हैं वो भी सिर्फ़ रात मैं लकिन दिन मैं कभी नही.

सादिया: बेटा फिर वही बात और ये बातें फ्रेंड्स के साथ शेयर नही करते पता नही कब अक़ल आए गी तुम्हें कितना समझती हूँ के घर की बातें ना किसी से पूछा करो ना बताया करो.

अली: अम्मी मैं ने नही पूछा उसी ने बताया फिर मेरे दिमाग मैं आया के आप भी लॉक करते हैं रात को बस इस लिए पूछ रहा हूँ अब बता भी दें ना आप खुद तो कहती हैं कोई भी बात हो आप से किया करूँ ऑर ब आप ही नही बता रही हैं दैट्स नोट फेर.

सादिया: अच्छा देर हो गयी है अब सो जाओ.

सादिया ने टीवी ऑफ किया और करवट ले के अपने बैक अली की तरफ कर के लेट गयी अली भी मूँह बना के सोने लगा.

काफ़ी देर बाद रात को अली की आँख खुली तो उस ने अपना हाथ अपनी अम्मी की गांड़ की दरार मैं रखा और हीट फील कर के मज़ा करने लगा.

सादिया की गांड़ टाइट नही थी क्यों के उसकी नीचे वाली लेग सीधी थी और ऊपर वाली लेग बेंड थी उसकी चेस्ट की तरफ इस लिए सादिया की गांड़ खुली हुई थी दरार टाइट नही थी पहले की तरह.

अली को मज़ा आ रहा था फिर उस ने अपना हाथ स्लो स्लो मूव किया अपनी अम्मी की गांड़ के बीच मैं उसे बहुत मज़ा आ रहा था बहुत ही सॉफ्ट गरम मुलायम गांड़ को टच करने मैं.

फिर उस ने अपनी फोर फिंगर्स को अपनी अम्मी सादिया की गांड़ की दरार मैं रक्खा और उन्हें स्लो स्लो मूव करने लगा जैसे ही वो थोडा नीचे ले जाता तो गांड़ की दरार मैं उसे हीट फील होती वी सोचने लगा के ये किया हो गा फिर उसे याद आया के ये तो उसकी अम्मी सादिया की गांड़ का सुराख है और वहाँ से बहुत हीट निकल रही थी वो जगह बाकी गांड़ से ज़ियादा गरम जो थी.

अली ने अब अपनी अम्मी सादिया की बाकी गांड़ को छोड़ के सिर्फ़ एक फिंगर से अपनी अम्मी की गांड़ के सुराख को टच करना शुरू कर दिया अब अली अपनी अम्मी की गांड़ के सुराख के साथ खेल रहा था उसे टच कर रहा था फील कर रहा था और जब वो अपनी अम्मी की गांड़ के सुराख को टच करता तो सादिया नींद मैं या वैसे ही सुराख को टाइट करती.

अली को अपनी अम्मी सादिया की गांड़ के सुराख का खुलना औट टाइट होना फील कर के बहुत मज़ा आ रहा था वो काफ़ी देर तक अपनी अम्मी सादिया की गांड़ के साथ उस की गांड़ के सुराख के साथ खेलता रहा उधर उसका लंड बहुत हार्ड था.

अली के दिल की धरकन अब बहुत तेज़ चल रही थी उसे डर भी लग रहा था लकिन उस से ज़ियादा उसे मज़ा आ रहा था.

कुछ देर बाद अली ने अपनी फिंगर अपनी अम्मी की गांड़ के सुराख से थोडा नीचे की तो वो परेशां हो गया क्यों के सादिया की शलवार वहाँ से बहुत गीली थी. सादिया की चूत पानी छोड़ रही थी लकिन अभी तक वो नींद मैं ही थी शायद कोई खवाब देख रही थी या जो भी ही था लकिन उसकी शलवार काफ़ी गीली हो गयी थी.

अली ने अब सादिया की गांड़ के सुराख को छोड़ दिया और उसी गीली जगह पर फिंगर स्लो स्लो मूव करने लगा उसे बहुत अच्छा फील हो रहा था चिप चिपा वो सोच रहा था के ये किया है क्यों के वो कन्फर्म हो गया था के ये उसकी अम्मी का पेशाब तो बिल्कुल नही है क्यों के पेशाब ऐसा चिप चिपा नही होता पेर ये जो भी ही है उसे अच्छा लग रहा था.

कुछ देर बाद अली ने दोबारा अपनी अम्मी सादिया की गांड़ के सुराख के साथ खेलना चाहा और अपने फिंगर रगड़ता हुआ अपनी अम्मी सादिया की गांड़ के सुराख तक ले आया.

अब अली का मज़ा दुगना हो गया था क्यों के उसकी अम्मी की चूत से निकला हुआ पानी जो शलवार पे लगा हुआ था वो हिस्सा अली की फिंगर की रगड़ के साथ सादिया की गांड़ के सुराख पे आ गया था अब अली फिंगर को पहले से ज़रा तेज़ और थोडा ज़ियादा पुश कर के अपनी अम्मी सादिया की गांड़ के सुराख के साथ खेलने लगा और जैसे ही अली की फिंगर उसकी अम्मी की गांड़ के सुराख पे आती तब वो थोडा फिंगर को पुश करता और ऐसा करने से उसकी फिंगर थोड़ी सी सादिया की गांड़ मैं जाने लगती लकिन वो फ़ौरन फिंगर पीछे मूव कर लेता.

 

अली डर रहा था इस लिए अपनी फिंगर अंदर नही डाल रहा था और डालना भी नही चाहता था क्यों के उसे सिर्फ़ इतना करने मैं बड़ा मज़ा आ रहा था.

सादिया सकूँ से सो रही थी उसे पता ही नही था के उसका बेटा उसकी गांड़ के साथ खेल रहा है उसकी चूत के पानी से उस की गांड़ के सुराख को मसल रहा है.

सादिया की गांड़ भी अली का साथ दे रही थी फिंगर जब गांड़ मैं जाने लगती तो सादिया की गांड़ मज़े से स्लोली टाइट हो जाती और जब अली की फिंगर बैक होने लगती तो सादिया की गांड़ खुशी से खुलती और आराम से बिना दर्द महसूस किए बिना सादिया की जगाए बाहर निकल देती.

सादिया की गांड़ वैसे बहुत टाइट थी और प्योर वर्जिन. सादिया के हज़्बेंड ने आज तक उसकी गांड़ के सुराख तो टच नही किया था सिर्फ़ गांड़ को रब करता मसलता चूतड़ के साथ खेलता था लकिन कभी गांड़ के सुराख को टच नही किया.

सादिया ने गांड़ मरवाने के बारे मैं सुना हुआ था उस का दिल भी करता था ट्राइ करने का लकिन वो शर्मीली थी इस लिए कभी हिम्मत कर के शरम ख़तम कर के हज़्बेंड से नही कहा लकिन उसका कम से कम ट्राइ करने का बहुत दिल करता था.

खैर अली को मज़ा करते करते सुबह हो चुकी थी उस ने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया जब उस ने अज़ान की आवाज़ सुनी क्यों के अब अली की अम्मी कभी भी जाग सकती थीं.

अभी अली की आँख नही लगी थी के सादिया जाग गयी और जागते ही सादिया को गीला पन फील हुआ और उस ने फ़ौरन अली की तरफ देखा जिस की आँखें उस वक़्त क्लोज़ थीं.

सादिया परेशां थी के पहली बार उस के साथ ऐसा कैसे हुआ फिर सादिया ने अपना हाथ नीचे ले जा के चेक किया तो वो और परेशां हुई हैरान हुई क्यों के उसकी ऑलमोस्ट हाफ शलवार उस की चूत के पानी से गीली हो चुकी थी.

सादिया फ़ौरन उठी और वॉशरूम चली गयी और जाते ही अपनी शलवार उतेरी और चूत को चेक किया जो बिल्कुल ठीक नज़र आ रही थी जिस से सादिया मुतमईन हो गयी

सादिया जब अपनी टांगें और चूत वॉश करने लगी जो शलवार उसकी चूत के पानी से गीली होने की वज़ह से खड़ाब हो गयी थीं.

टांगें धोने के बाद उस ने चूत को अच्छी तरह वॉश किया फिर उस का हाथ जब थोडा नीचे गया तो उसे पता चला के उसकी गांड़ तक उसकी चूत का पानी लगा हुआ थॉ ओ अपनी गांड़ को वॉश करने लगी जब सादिया ने अपनी गांड़ के सुराख को टच किया वो चूत का पानी वहाँ भी था खैर उसे कुछ समझ नही आ रहा था और वो अपने आप को क्लीन कर के ड्रेस चेंज कर के बाहर आ गयी.

अली अभी तक बिस्तर मैं था फिर सादिया ने लाईट ऑन की और अपनी साइड पी आ के ब्लैंकेट उठा के बेड शीट देखने लगी जो गीली थी. सादिया को बहुत शरम आ रही थी वो शर्मा रही थी के अगर अली ने देख लिया तो किया सोचे गा अब कैसे चेंज करूँ खैर कुछ समझ मैं नही आया और वो मजबूरन दोबारा गीली जगह पर लेट गयी और अली के जागने का इंतज़ार करने लगी…

सादिया काफ़ी देर अपने बेड पे बैठी सोच रही थी के आख़िर ऐसी किया वज़ह है जो वो इतनी गीली हो गयी और उसे पता ही नही चला.

सोचने के साथ साथ वो अपने बेटे अली की तरफ भी देखती के वो नींद से जागा या नही बट स्टिल अली वाज़ स्लीपिंग.

कुछ देर बाद अली उठा और अपने रूम मैं चला गया अली के जाते ही उसकी अम्मी ने बेड शीट चेंज कर दी और बिना कुछ कहे ब्रेकफास्ट किया और अली को कॉलेज के लिए रवाना कर दिया.

सादिया अपने रूम मैं गयी फिर मिरर के सामने खड़ी हो के अपने आप को देखने लगी और सोचने लगी – वैसे मैं अभी तक हूँ तो जवान लकिन मैं ऐसा क्यों सोच रही हूँ??? जब भी सेक्स के बारे मैं सोचती हूँ या करती हूँ तब काफ़ी गीली हो जाती हूँ लकिन ऐसा आज तक नही हुआ के बिना कुछ सोचे या किए मैं गीली और सिर्फ़ गीली नही बहुत ज़ियादा गीली कैसे हो गयी?

फिर सादिया ने आराम से अपने कपडे उतरे स्टिल वो अपने आप को अपने पूरे जिस्म को बड़े ध्यान से देख रही थी और खुद का नंगा सेक्सी जिस्म लाइफ मैं पहली बार नोटीस कर रही थी.

सादिया खुद भी हैरान थी क्यों के खुद को नंगा देख के वो गीली होना शुरू हो गयी थी.

मेरी चूत से पानी क्यों निकल रहा है ये मुझे किया हो गया है? शायद मुझे डॉक्टर के पास जाना चाहिए. हाँ ये ठीक है मैं आज ही चेकप करती हूँ.

सादिया खुद से बातें कर के बहुत हॉट हो रही थी फिर वो बिल्कुल नंगी अपने वॉशरूम मैं एंटर हुई और शवर ऑन कर के नहाने लगी अपने जिस्म को वॉश करने लगी उस को आज बहुत मज़ा आ रहा था.

सादिया अपने मम्मों को रगड़ रही थी उन्हें मसल रही थी फिर उस ने चूत को टच किया जो अभी भी गीली थी और पानी निकाल रही थी.

सादिया की हवस बढ़ रही थी उस से अब कंट्रोल नही हो रहा था लकिन सादिया ने हिम्मत कर के खुद पे कंट्रोल किया और नहा के बाहर आ गयी.

सादिया ने फ़ौरन अपने कपडे पहने और घर के काम करने लगी. दोपहर को अली घर आया तो सादिया ने उस से कहा के चेंज कर लो और उसे डॉक्टर के पास ले जाओ.

अली: अम्मी किया हुआ आप को सब ठीक तो है ना?

सादिया: हाँ सब ठीक है बस चेकप करना है तुम चेंज कर लो फ्रेश हो के फिर चलते हैं.

अली अपनी अम्मी के अपनी बाइक पे डॉक्टर के पास ले गया और सादिया ने अपना चेकप कराया.

सादिया परेशां हो गयी जब डॉक्टर ने उसे बताया के ये सेक्स नीड है और कुछ नही कोई परेशानी वाली बात नही है बस आज रात को और कल सेक्स कर लो फिर तुम नॉर्मल फील करने लागो गी.

सादिया: लकिन ऐसा तो पहले कभी नही हुआ दूसरा मेरे हज़्बेंड भी यहाँ नही हैं तो फिर कैसे?

डॉक्टर: कोई बात नही ऐसा कभी कभी हो जाता है. आप के हज़्बेंड नही हैं तो किया हुआ आप खुद रब्बिंग न फिंगरिंग कर के खुद को 2, 3 मर्तबा रिलीस कर लें इट्स नोट आ बिग प्राब्लम मेनी गर्ल्स ऐंड विमन डू इट…

सादिया बाहर आए और अली अपनी अम्मी को देख के उठा फिर दोनो घर की तरफ रवाना हो गये रास्ते मैं अली ने अपनी अम्मी से पूछा के किया कहा डॉक्टर ने सब ठीक तो है ना?

सादिया ने कहा हाँ सब ठीक है बस रुटीन चेकप करना था जो करा लिया एवेरी थिंग इस फाइन ऐंड शी इस ऑलराइट.

बेटा मैं ने मार्केट से कुछ समान लाना है घर के लिए तो मार्केट चलो और अली अपनी अम्मी को मार्केट ले गया और बाइक एक साइड पे लॉक की के अम्मी के साथ सब्ज़ी लेने साथ जाऊं लकिन सादिया ने कहा बेटा तुम बाइक के पास रहो मैं सामने वाली शॉप से सब्ज़ी ले कर अभी वापस आती हूँ.

अली बाइक पे बैठ गया और सामने अपनी अम्मी को देख रहा था अली की नज़र उस की अम्मी की गांड़ पे थी. सादिया सब्ज़ी ले रही थी के इतने मैं वहाँ कुछ कस्टमर भी आ गये जिन मैं एक लड़का था क़रीब 20, 22 ईयर का वो सादिया के पीछे खड़ा हो गया और बहाने बहाने से सादिया की गांड़ को टच करने लगा.

सादिया को उस लड़के का हाथ अपनी गांड़ पे फील हुआ लकिन जैसा के आप को बताया वो बहुत शर्मीली थी इस लिए वो खामोश रही बस थोडा इधर उधर मूव कर रही थी क्यों के वो तमाशा नही करना चाहती थी.

अली ये सब मज़े से देख रहा था उसे गुस्सा भी आ रहा था लकिन साथ मज़ा भी आने लगा इस लिए वो अपनी अम्मी को किसी अजनबी के साथ ये सब होता देख रहा था.

अली से कंट्रोल नही हुआ तो वो बाइक से उठा और सीधा उसी शॉप पे आ गया और आते ही सीधा अपनी अम्मी की गांड़ पे अपना लेफ्ट हाथ टच कर के साइड पे खड़ा हो गया. इस से पहले के अली अपनी अम्मी की गांड़ का मज़ा करता सादिया ने शॉप वाले को पैसे दिए और अली से चलने को कहा.

सादिया उस लड़के और फिर अपने बेटे की अपनी गांड़ पे टच से गीली हो गयी थी. सादिया की चूत दोबारा गीली होना शुरू हो गयी.

सादिया का दिल कर रहा था के उस का हज़्बेंड जल्दी से आ जाए और उसे खूब मज़ा दे और बहुत चोदे लाइक अनिमल. लकिन फिर सोचा के उस का हज़्बेंड उस के साथ सेक्स तो बहुत करता है लकिन हार्ड ऐंड रफ कभी नही करता.

सादिया का हज़्बेंड कुछ किसस के बाद अपना लंड सादिया की चूत मैं डालता है नॉर्मल झटके मरता है और कुछ ही टाइम मैं लाइक 2 तो 3 मिनिट्स मैं सादिया की चूत मैं रिलीस हो जाता है बस सिर्फ़ इतना उस से ज़ियादा कुछ नही लकिन शायद यही वज़ह थी के सादिया की चूत बात बात पे बहुत गीली हो जाती.

खैर घर पहुँच के सादिया ने सब्ज़ी किचन मैं ले जा के वॉश कर के फ्रिज मैं रख दी और टीवी लाउंज मैं बैठ के टीवी देखने लगी. अली अपने रूम मैं चला गया अपनी स्टडी करने.

शाम को अली अपने रूम से बाहर आ गया तब सादिया खाना बना रही थी फिर दोनो अम्मी बेटे ने डिन्नर किया और टीवी देखने लगे.

मा आप को किया हो गया है कुछ दिन से आप मैं काफ़ी चेंज है और सच बताएं डॉक्टर ने किया कहा?

बेटा मैं ठीक हूँ कुछ भी नही हुआ मुझे डॉक्टर ने भी यही कहा के आई आम फाइन.

 

अली को उदास देख के सादिया ने उसे अपने पास बुला लिया अब अली और सादिया एक ही ब्लैंकेट मैं थे सादिया ने अपने बेटे अली को हग किया हुआ था लकिन वो साइड पे बैठा था और सादिया का लेफ्ट मम्मे अली के शोल्डर पे टच हो रहा था.

अली को अच्छा लग रहा था उस ने हिम्मत कर के अपना लेफ्ट हाथ अपनी अम्मी की टाँगों पे रख दिया क्यों के उस का राईट हाथ नीचे था उसकी अम्मी की साइड पे.

अली थोडा नीचे हुआ अब अली का फेस उसकी अम्मी के लेफ्ट मम्मे के बिल्कुल क़रीब था और इस तरह दोबारा अली की गरम सांस उसकी अम्मी के लेफ्ट मम्मे पे जाने लगी और कुछ ही मिनिट्स मैं सादिया का मम्मे हॉट निपल हार्ड और चूत गीली हो शुरू हो गये.

सादिया ने अली को अपने से अलग कर के अपना दुपट्टा उतार के साइड पे रख दिया और दोबारा अली को उसी पोज़िशन मैं कर लिया.

अली की गरम सांस अब पहले से ज़ियादा तेज़ और ज़ियादा गरम फील कर के सादिया भी ज़ियादा हॉट हॉर्नी ऐंड गीली होने लगी जिस की वज़ह से सादिया ने अपने बेटे को कस के पकड़ रखा था.

सादिया के अली को कस के पकड़ने से अली का फेस उसकी अम्मी के लेफ्ट मम्मे के और पास आ गया अब अली का मुंह उसकी अम्मी के लेफ्ट निपल पे था जो अब तक फुल हार्ड हो चुका था जो अब अली को क्लियर दिखाए दे रहा था.

अली से कंट्रोल ना हुआ तो उस ने अपनी आँखें क्लोज़ कर लीं और ना चाहते हुए भी अपनी ज़ुबान बाहर निकल के अपनी अम्मी के लेफ्ट निपल पेर टच कर दी.

अली के ऐसा करने से उसकी अम्मी सादिया को अचानक झटका लगा और उस ने फ़ौरन अली की तरफ देखा अली की आँखें क्लोज़ थीं तो सादिया समझी के उसका वहम है क्यों के अली तो सो गया है.

खैर जो भी था मुझे बहुत अच्छा लगा सादिया को.

सादिया ने अली को अपने से अलग किया और कहा उठो अली बेटा रूम मैं चलो तुम्हें नींद आ रही है और अली भी ड्रामा कर के आराम से उठा और अपनी अम्मी के बेड रूम मैं चला गया और सो गया.

कुछ देर बाद अली की अम्मी भी रूम मैं आ गयी तब तक अली गहरी नींद मैं था क्यों के लास्ट नाइट अली सारी रात जागता रहा था इस लिए उसे जल्दी और मज़े की नींद आ गयी.

सादिया बेड पे अपने बेटे के पास आ के लेट गयी और बहुत कोशिश की सोने की लकिन नींद का नाम ही नही था उसकी आँखों मैं.

नेक्स्ट दिन ऐसे ही नॉर्मल गुज़र गया लकिन रात को सादिया जल्दी सो गयी क्यों के लास्ट नाइट वो सारी रात नही सो सकी थी. सादिया ने खुद पे बहुत कंट्रोल किया हुआ था और सोचा जब हज़्बेंड आए गा तब ही उन्ही के साथ सेक्स करूँ गी इस लिए वो अपने आप पे कंट्रोल करने लगी थी बर्दाश्त कर रही थी.

अली अपनी अम्मी के रूम मैं आया तो देखा के उसकी अम्मी सो गयी थी वो लाईट ऑफ कर के बेड पेर आया और अपनी अम्मी के साथ लेट गया.

कुछ देर बाद जब अली ने अपनी अम्मी की तरफ देखा तो वो बेहोशी की हालत मैं सो रही थी. पहले कभी भी सादिया सोते वक़्त अपना दुपट्टा नही उतरती लकिन आज उस ने खुद या नींद मैं उस का दुपट्टा उतरा हुआ था.

अली उठा रूम की लाईट ऑन की और टीवी भी ऑन कर दिया फिर अपनी जगह पेर आ के लेट गया और अपनी अम्मी को देखने लगा. काफ़ी देर देखने के बाद अली डरते डरते अपनी अम्मी के गले मैं झाँकने लगा लकिन उसे कुछ नज़र नही आ रहा था तो अली ने पहली बार थोड़ी हिम्मत कर के अपनी अम्मी की कमीज़ के गले को अपनी फिंगर से थोडा ओपन किया और अंदर झाँकने लगा.

सादिया की कमीज़ का गला स्माल था लकिन किसी तरह अली को उसकी अम्मी के हाफ मिल्की वाइट मम्मों नज़र आ रहे थे.

अली हाफ अवर तक अपनी अम्मी के मम्मों को देखता रहा सादिया ने ब्लॅक ब्रा पहन रखी थी फिर अचानक सादिया ने करवट की और अपनी बैक अली की तरफ कर दी.

अली पहले तो डर गया लकिन जब उसने देखा के उसकी अम्मी गहरी नींद मैं है तो उसकी जान मैं जान आ गयी और अली भी लाईट ऐंड टीवी ऑफ कर के अपनी अम्मी के साथ उसके पीछे लेट गया कुछ देर बाद अली ने भी करवट ली और सोने लगा.

अली को नींद नही आ रही थी काफ़ी देर उसने कोशिश की लकिन उस का हार्ड लंड उसे सोने नही दे रहा था फिर अली ने सोचा क्यों ना अम्मी की गांड़ का मज़ा करूँ और उस ने दोबारा हिम्मत की और अपना राईट हाथ अपनी अम्मी की गांड़ पे रखा कुछ देर अली अपनी अम्मी की गांड़ को सहलाता रहा फिर अपने हाथ वहाँ से मूव कर के अपनी अम्मी की गांड़ की दरार मे ले आया.

सादिया की गांड़ बहुत गरम थी अली को मज़ा आने लगा और वो अपनी अम्मी की गांड़ से खेलता रहा अपना हाथ अपनी अम्मी की गांड़ की दरार मैं रगड़ता रहा लकिन वेरी सॉफ्ट्ली ऐंड स्लो स्लो.

अली ने अपना हाथ जब अपनी सेक्सी अम्मी की शलवार मैं ले जाना चाहा तो नाकाम हो गया क्यों के सादिया एलास्टिक यूज़ नही करती थी तो अली दोबारा कपड़ों के ऊपर से ही अपनी अम्मी की गांड़ को सहलाता रहा वो अपना हाथ कमर से मूव करता हुआ बिल्कुल अपनी अम्मी की चूत तक ले जाता.

अली ने अपनी फिंगर अब अपनी अम्मी की चूत पे रखी जहाँ जगह गीली थी और फिंगर को चूत के लिप्स मैं स्लो स्लो मूव करने लगा कुछ ही सेकेंड्स मैं वो जगह ज़ियादा गीली हो गयी अली को बहुत मज़ा आने लगा और वो अपनी अम्मी की चूत के साथ खेलता रहा मज़ा करता रहा.

अली की पता नही किस वक़्त आँख लग गयी सुबह जब सादिया की आँख खुली तो उसे फील हुआ के उस की चूत दोबारा गीली थी और फिर अचानक उसे अपनी चूत के लिप्स मैं कुछ फील हुआ और जब उस ने अपना हाथ अपनी चूत पे ले जा के देखा तो वहाँ उस के बेटे अली का हाथ था और उस की फिंगर सादिया की चूत के लिप्स मैं थी.

सादिया ने अली का हाथ वहाँ से हटाने के लिए अपना हाथ अपनी लेग्स के दरमियाँ ले गयी और ऐसा करने से उस की टांगें ओपन हुई जिस से अली की फिंगर उसकी चूत मैं बिल्कुल उसके सुराख पी आ गयी और सादिया को अचानक मज़े का झटका लगा तो उस ने अली के हाथ वहाँ से नही हटाया बलके अपनी टांगें और ज़ियादा खोल दी.

सादिया ये तुम्हें किया हो गया है वो तुम्हारा बेटा है और तुम्हें अपने बेटे की फिंगर अपनी चूत पे फील कर के मज़ा आ रहा है???

सादिया ये बहुत गलत है वो तुम्हारा बेटा है और अगर नींद मैं उस का हाथ तुम्हारी चूत पे आ गया तो किया तुम उसे वहीं रहने दो गी और अगर तुम्हारा बेटा जाग गया तो किया सोचे गा के उसकी अम्मी उस की फिंगर को अपनी चूत पे रखे मज़े कर रही है पागल हो गयी हो तुम?

ये ख़याल सादिया के माइंड मैं थे फिर सादिया को भी गिल्ट फील हुआ और वो दोबारा अपने बेटे के हाथ को वहाँ से हटाने लगी तो फिर सोचने लगी.

सादिया वैसे मज़ा तो आ रहा है और अभी तो अली सो रहा है इतनी जल्दी नही उठे गा थोडा मज़ा करने से कुछ नही हो जाए गा.

सादिया शरम से पानी पानी होने लगी फिर हिम्मत कर के वो अली के हाथ को पकड़ के अपनी गीली चूत से हटाने लगी लकिन अली का हाथ अपनी चूत से हटाने से पहले सादिया ने उस की फिंगर जो उसकी चूत के लिप्स मैं थी को ज़ोर से दबा के रगड़ा और वहीं फारिघ हो गयी अब सादिया की सांस तेज़ चल रही थी उसकी चूत तेज़ी से पानी छोड़ रही थी उसे बहुत मज़ा आ रहा था उस ने अली की फिंगर को अपनी चूत के लिप्स मैं चूत के सुराख पे ज़ोर दिया हुआ था और जब वो रिलॅक्स हुई तो उस ने अली का हाथ हटा के वहाँ से उठी और वॉशरूम चली गयी वहाँ उस ने खुद को बहुत बुरा भला कहा वो बहुत शर्मिंदा थी सेम टाइम शर्मा भी रही थी अंदर से खुश भी थी और पहले से काफ़ी रिलॅक्स भी थी.

 

सादिया ने सोचा चलो जो होना था हो गया लकिन अब ऐसा कभी नही करूँ गी फिर सोचती कभी कभी इतना करने से कुछ नही होता खैर कुछ देर बार सादिया उठी और वॉशरूम चली गयी फ्रेश हो के रूम मैं आ के अली को उठाया और ब्रेकफास्ट बनाने चली गयी.

सादिया के हज़्बेंड घर वापस आ गये जब अली डाइनिंग टेबल पे बैठा ब्रेकफास्ट का इंतज़ार कर रहा था वो अली से मिले फिर सादिया से सलाम दुआ की हाल पूछा और रूम मैं चले गये फ्रेश होने.

अली उठा और किचन मैं गया जब उस के फादर रूम मैं जा चुके थे वहाँ किचन मैं सादिया डिशस वॉश कर रही थी के अली उस के पीछे खड़ा हो गया.

अली डाइनिंग टेबल पे बैठा किचन मैं अपनी अम्मी की गांड़ को देख रहा था तो उस से रहा नही गया और वो करीब से देखने के लिए किचन मैं चला गया था.

सादिया डिशस भी वॉश कर रही थी और रोटी भी बना रही थी जब अली अपनी अम्मी के पीछे जा के खड़ा हो गया तो उसी वक़्त उस की अम्मी घूम के चूल्हे के पास आ गयी रोटी को देखने वो धीमी आग पे रोटी पका रही थी.

अली बहुत भूक लगी है किया सादिया ने अपने बेटे से पूछा.

नही अम्मी बस ऐसे ही आ गया सोचा आप की हेल्प कर दूँ अगर ज़रूरत है तो?

नो बेटा बस थोडा सा काम रह गया है मैं कर लूँ गी ये कह के सादिया सिंक की तरफ गयी और डिशस वॉश करने लगी के अचानक अली आगे हुआ और अपनी अम्मी सादिया के बहुत क़रीब हो गया लकिन टच नही हुआ अपनी अम्मी की सेक्सी बॉडी से.

अली ने अजीब हरकत की जिस से उसकी अम्मी सादिया बहुत हैरान हुई.

अली ने अपनी अम्मी के सिर से दुपट्टा उतार दिया और उस के हेयर मैं अपनी फिंगर्स घूमने लगा और साथ से अपना फेस पास कर के हेयर की खुशबू को सूंघने लगा जो बहुत मीठी और फ्रेश थी सादिया के सुबह सुबह नहाने की वज़ह से.

सादिया के जिस्म मैं करेंट दौरने लगा उसे समझ नही आया के उस का बेटा ऐसा क्यों कर रहा है लकिन उसे अच्छी लग रहा था.

मा आप के हेयर बहुत अच्छे हैं इन की खुशबू भी बहुत मीठी है फ्रेश है मुझे आप के लंबे हेयर बहुत अच्छे लगते हैं. बातें करने के साथ साथ अली आगे मूव करने लगा अब अली का फ्रंट उसकी अम्मी की बैक को टच हो रहा था.

सादिया प्लेट हाथ मैं लिए वहीं खड़ी रही बिना कुछ कहे और किए जिस से अली की हिम्मत बढ़ गयी और उस ने अपनी अम्मी सादिया के शोल्डर ऐंड बैक नेक पे अपने लिप्स लगा दिए.

अली किस नही कर रहा था बस अपने लिप्स आराम आराम से टच कर रहा था और उसकी गरम सांस फील कर के सादिया को मदहोशी छाने लगी सादिया की चूत दोबारा गीली होना शुरू हो गयी उसकी सांस भी गरम हो गयी उसका जिस्म कांप रहा था टांगें कांप रही थी.

सादिया को तभी होश आया और उस ने अली को पीछे कर दिया और कहा बेटा तुम्हारा अबू आ रहा है जब उस ने अपने रूम के डोर के खुलने की आवाज़ सुनी.

अली भी साइड पे हो के फ्रिज खोल के उस मैं देखने लगा. उस वक़्त ना तो अली का दिल कर रहा था अपनी अम्मी से अलग होने का ना ही सादिया का दिल कर रहा था के अली उस से अलग हो.

अली ने फ्रिज का डोर क्लोज़ किया और बाहर आ गया लकिन उस का फादर दोबारा रूम मैं चला गया था तो अली भी जल्दी से वापस किचन मैं चला गया और जाते ही अपनी अम्मी को पीछे से चिपक गया.

अली: अबू वापस रूम मैं चले गये हैं.

सादिया: अली छोड़ो मुझे ये ठीक नही है बेटा मैं तुम्हारी अम्मी हूँ और अम्मी बेटा इस तरह नही चिपकते तुम चलो मैं ब्रेकफास्ट ला रही हूँ और सादिया ने ज़बरदस्ती खुद को अली से छुड़ा लिया.

अली किचन से बाहर आ गया फिर उस के फादर भी आ गये और सब ने एक साथ ब्रेकफास्ट किया और अली कॉलेज रवाना हो गया.

दोपहर को अली घर वापस आया और अपने रूम मैं जा के फ्रेश हो के स्टडी करने लगा फिर शाम को सब ने एक साथ डिन्नर किया और अली दोबारा अपने रूम मैं आ गया और कंप्यूटर पे ग़मे खेलने लगा. रात को 10 बजे सादिया अली के रूम मैं आई और कहा बेटा ग़मे खेल के मेरे रूम मैं आ जाना सोने.

अली: अबू दोबारा चले गये किया?

सादिया: हाँ वो इस्लामाबाद गये हैं कोई ज़रूरी काम था कंपनी से कॉल आ गयी इस लिए उन्हें जाना परा उन्हें देर हो रही थी इस लिए वो तुम से मिले बगैर चले गये.

रात को 11 बजे अली ने कंप्यूटर ऑफ किया और अपनी अम्मी के रूम मैं गया रूम मैं उसकी अम्मी बेड पे लेटी टीवी देख रही थी अली भी पास जा के लेट गया. दोनो अम्मी बेटे का दिमाग एक दूसेरे पे था लकिन नज़रें टीवी पे थी.

अली: अम्मी एक बात करनी थी आप से?

सादिया: किया बात है?

अली: अम्मी आप मुझे बहुत प्यारी लगती हैं इस लिए मेरा बहुत दिल करता है आप के करीब रहने का लकिन आप माना करती हैं किया अम्मी बेटा एक दूसेरे के करीब नही रह सकते?

सादिया: बेटा वो बात नही है अम्मी बेटा करीब रह सकते हैं लकिन वैसे नही जैसे सुबह तुम मेरे करीब आ गये थे ये गलत है बेटा इस से गुनाह मिलता है अम्मी बेटा ऐसे नही करते.

अली: लकिन अम्मी ज़ियादा करीब आने से गुनाह क्यों होता है? मेरे बहुत फ्रेंड्स हैं जो अपनी अम्मी को हग करते हैं किस करते हैं उनकी अम्मी तो उन्हें नही रोकती हैं फिर आप ऐसा क्यों नही करने देती हैं?

सादिया: बेटा अम्मी बेटे को किस भी करती है हग भी और बेटा भी करता है लकिन इस तरह नही जैसे तुम करते हो वो अलग होता है.

अली: अच्छा जैसे नॉर्मल अम्मी बेटा हग करते हैं और किस करते हैं आप वो करें मेरे साथ मेरा बहुत दिल करता है मा.

सादिया ने अली की तरफ देखा और उस वक़्त उस के चेहरे पे मासूमियत देखी तो उस से रहा नही गया और उस ने अली को अपनी तरफ करवट कर के आराम से अपने गले से लगा लिया और अली के फोर्हेड पे किस भी किया.

अली ने भी अपनी अम्मी को हग किया और गाल पे किस भी किया फिर अपना सिर अपनी अम्मी की चेस्ट मैं रख लिया जिस से सादिया को अपने बेटे की गरम सांस अपनी चेस्ट पी ची लगने लगी और उस ने अली को अपने से अलग नही किया.

काफ़ी देर वो उसी पोज़िशन मैं रहे फिर सादिया ने अपने बेटे का सिर उठा के अपना दुपट्टा उतार के साइड पे रख दिया और दोबारा अली का सिर अपनी चेस्ट मैं कर दिया.

अब अली की गरम सांस डाइरेक्ट उसकी अम्मी की चेस्ट पे मम्मों पे जाने लगी और सादिया मज़े से गरम होने लगी उसकी चूत गीली होना शुरू हो गयी.

कुछ मिनिट्स बाद अली ने अपनी ज़ुबान बाहर निकल के अपनी अम्मी की नेक से थोडा नीचे फेरने लगा अली के ऐसा करने से उसकी अम्मी को पहले से ज़ियादा अच्छा फील होने लगा तो सादिया ने अपने बेटे को दबा लिया और अपनी लेफ्ट लेग अपने बेटे की राईट लेग पे रख दी.

सादिया की चूत बहुत गीली हो चुकी थी एक तो उसे बहुत मज़ा आ रहा था आज वो अपने हज़्बेंड से चुदवाने के लिए तरस रही थी जो अचानक दोबारा आउट ऑफ सिटी जाने की वज़ह से नही हो सका.

अब अली अपनी अम्मी की कमर पे अपना हाथ रब कर रहा था लेकिन शलवार और ब्रा के बीच मैं उसे बहुत मज़ा आ रहा था फिर अली अपना हाथ ज़रा ऊपर ले गया और अब वो अपनी अम्मी की ब्रा को फील कर रहा था.

अली: अम्मी ये किया है आप की कमीज़ के नीचे?

सादिया: कुछ नही तुम आराम से लेटे रहो वरना मैं हग नही करूँ गी.

सादिया की आवाज़ मैं थर थराहत थी उसकी सांस गरम और तेज़ थी उस के दिल की धड़कन बहुत तेज़ चल रही थी वो मज़ा भी कर रही थी और सोच भी रही थी के अब किया करूँ यहीं रोक दूँ या जो होना है होने दूँ? सादिया बहुत शर्मा भी रही थी लकिन अपने हवस पे काबू भी नही कर पा रही थी.

तभी अली थोडा और आगे हुआ जिस से अब अली का फुल हार्ड लंड उसकी अम्मी को अपनी लेग्स पे चूत से ऊपर टच हुआ.

लंड को फील करते ही सादिया भी थोडा आगे हुई और अपनी लेग उठा के पहले से ज़ियादा आगे कर दी और उसकी इस मूव्मेंट से अब अली का हार्ड लंड उसकी अम्मी की चूत के लिप्स पे आ गया.

सादिया अब अपने बेटे का हार्ड ऐंड लोंग लंड अपनी चूत के लिप्स मैं फील कर के मज़ा कर रही थी वो स्लो स्लो आगे पीछे मूव भी कर रही थी जिस से उस के बेटे का लंड उसकी चूत के लिप्स मैं रगड़ ख़ाता और उसे मज़ा आने लगता.

अली को भी मज़ा आ रहा था क्यों के उसकी शलवार उसकी अम्मी की चूत के गरम पानी से गीली हो गयी थी और उसे अपनी अम्मी की चूत को अपने लंड से मसलने से अच्छा फील हो रहा था अब उसका लंड स्लिप हो रहा था और चूत वाली जगह बहुत गरम थी अली को अपने लंड पे हीट महसूस हो रही थी.

अली भी मज़े मैं अपनी अम्मी का साथ दे रहा था वो भी अपने लंड को ज़ोर देने लगा. सादिया मज़े से अपनी लेग को और आगे करने लगी कुछ देर ऐसे ही चलता रहा फिर अचानक अली का लंड उसकी अम्मी की चूत के सुराख पी आ गया.

क्यों के दोनो स्लो स्लो मूव कर रहे थे जिस से अली का लंड अब उसकी अम्मी की चूत के सुराख मैं जाने की कोशिश करने लगा.

अगर दोनो अम्मी बेटा नंगे होते तो अब तक अली का पूरा लंड आराम से स्लिप हो के सादिया की चूत मैं जा चुका होता लकिन दोनों ने कपडे पहन रखे थे फिर भी अली के लंड की कॅप उसकी अम्मी की चूत मैं जा रही थी रगड़ रही थी दोनो फुल हॉट हो चुके थे बहुत मज़ा कर रहे थे.

 

काफ़ी देर ऐसे करने से सादिया रिलीस हो गयी उसकी चूत आज पहली बार इतना पानी निकल रही थी उसे झटके लग रहे थे वो आज तक इतनी ज़ियादा रिलीस नही हुई थी उसे बहुत मज़ा आ रहा था उसकी सांस तेज़ चल रही थी और कुछ देर बाद जब सादिया होश मैं आए तो उस ने अपने बेटे को अपने से अलग कर दिया और उठ के वॉशरूम चली गयी वो शरम से पानी पानी हो रही थी.

अली वहीं बेड पे अपने हार्ड लंड के साथ लेता रहा और सादिया वॉशरूम मैं खुद को बुरा भला भी कह रही थी और अपनी चूत को भी वॉश कर रही थी साथ साथ गुस्से मैं अपनी चूत को मार भी रही थी.

सादिया वॉशरूम से बाहर आ के लेट और टीवी ऑफ कर के बेड पे अली तरफ तरफ अपनी बैक कर के लाते गयी वो अपने बेटे से नज़रें नही मिला सकती थी वो बहुत शर्मिंदा थी उधर अली अभी तक हार्ड था और सोच रहा था के अचानक अम्मी को किया हुआ के ऐसे उठ के चली गयी और वापस आ के कोई बात भी नही की.

कुछ देर मैं सादिया की आँख लग गयी और अली भी इंतज़ार करते करते सो गया और सुबह सादिया उठी तब अली सो रहा थॉ ओ वॉशरूम गयी फ्रेश हो के अली को जगा के रूम से बाहर आ गयी.

अली अपने रूम मैं गया फिर फ्रेश हो के बाहर आ के डाइनिंग टेबल पे बैठ गया वो किचन मैं अपनी अम्मी को देख रहा था.

सादिया बहुत सेक्सी लग रही थी उस के कपडे भी चेंज थे आज सादिया ने दुपट्टा भी नही लिया हुआ था. अली से बर्दाश्त नही हुआ और वो किचन मैं चला गया.

अली: अम्मी रात आप को किया हो गया था के आप अचानक बिना कुछ कहे वॉशरूम चली गईं और वापस आ के भी कोई बात नही की?

सादिया: अली मैं उस टॉपिक पे कोई बात नही करना चाहती तुम जाओ मैं अभी ब्रेकफास्ट ले कर आ रही हूँ.

अली अपनी अम्मी को चिपकने ही वाला था के डोर रिंग बजी तो वो बाहर चला गया उस के डैड वापस आ गये थे वो सलाम दुआ कर के रूम मैं चले गये और अली ब्रेकफास्ट कर के कॉलेज चला गया.

रात को जब अली की अम्मी और डैड टीवी देख रहे थे तो अली अपनी अम्मी के पास आ के बैठा और ब्लैंकेट भी शेयर की. कुछ देर इंतज़ार करने के बाद अली ने अपना हाथ अपनी अम्मी की लेग्स पे रखा तो उसकी अम्मी ने फ़ौरन अपने हज़्बेंड की तरफ देखा जो टीवी देख रहे थे फिर सादिया ने अली की तरफ देख लकिन गुस्से मैं.

अली रुका नही वो स्लो स्लो अपनी अम्मी की लेग को सहलाने लगा और अपना हाथ ऊपर करता आया अब अली का हाथ उसकी अम्मी की चूत के बहुत करीब था सादिया भी हज़्बेंड के वहाँ होने से चुप थी और टीवी देखने लगी.

अली की हिम्मत बढ़ गयी और उस ने अपनी अम्मी की दोनो लेग्स के दरमियाँ अपना हाथ पुश किया तो सादिया ने वेरी स्लोली अपने टांगें खोल दी लकिन थोड़ी सी जिस से अली की हिम्मत और बढ़ गयी अब अली ने स्लो मूव कर के अपना हाथ लेग्स मैं डाला और अपनी फिंगर्स से अपनी अम्मी की चूत को जो अब तक गीली होना शुरू हो चुकी थी टच किया.

अली के टच करते ही सादिया ने अपनी टांगें थोड़ी और ओपन कर दी अब अली का हाथ और अंदर आ गया और फिंगर्स डाइरेक्ट चूत पे थीं और वो अपनी अम्मी की चूत के साथ खेलने लगा उसकी फिंगर्स सादिया की चूत के लिप्स मैं थीं.

सादिया को मज़ा आ रहा था के तभी अली ने अपने हाथ वहाँ से रिमूव कर लिया और सादिया सोचने लगी के वो क्यों रुक गया…

अली ने अपना हाथ वहाँ से सीधा ऊपर ले जा के अपनी अम्मी की शलवार मैं डाल के उसका नाला पकरा और स्लोली वो अपनी अम्मी की शलवार का नाल खोलने लगा जब सादिया को एहसास हुआ के अली किया कर रहा है उस ने अपना हाथ वहीं ले जा के अली को रोकना चाहा.

सादिया ने अली का हाथ मज़बूती से पकड़ रखा था और वहाँ से हटाने लगी लकिन अली ने फोर्स किया और कुछ सेकेंड मैं अपनी अम्मी का नाला खोल दिया. नाला खोलते ही अली ने अपनी अम्मी की अब खुली शलवार को ढीला कर के अपना हाथ अंदर डाल दिया जो सीधा सादिया की चूत पी आ गया सादिया ने अपना हाथ साइड पे कर के टांगें और खोल दीं और अब अली सकूँ से अपनी अम्मी की चूत को उस के लिप्स को फील कर रहा था.

सादिया की चूत उस वक़्त बहुत गीली थी उसकी चूत से गरम पानी बाहर निकल रहा था फिर अपने बेटे का हाथ अपनी चूत पे फील कर के सादिया को बहुत मज़ा आने लगा उसकी आँखें मज़े से बंद हो गईं और टांगें थोड़ी और खुल गईं.

 

अली मज़े से अपनी अम्मी कि चूत को रगड़ रहा था मसल रहा था उसे अपनी अम्मी की गीली चूत के साथ खेलने मैं बहुत मज़ा आ रहा था. अली अपनी अम्मी की चूत के लिप्स के बीच मैं अपनी मिड्ल फिंगर रब कर रहा था साथ साथ कभी अपने अब्बू कभी अपनी अम्मी की तरफ देखता उसका अब्बू सो रहा था और उसकी अम्मी की आँखें क्लोज़ थीं और सांस तेज़ चल रही थी.

सादिया मज़े मैं अपने हज़्बेंड को भूल गयी थी उसे अपने बेटे का उसकी चूत के साथ खेलना बहुत अच्छा लग रहा था वो मदहोश हो गयी थी. सादिया का दिल कर रहा था के अब वो खूब मज़े से काफ़ी देर तक हार्ड लंड से चुडवाए लकिन अपने हज़्बेंड से या बेटे से ये फ़ैसला नही हो रहा था उस से.

तभी चेयर की आवाज़ हुई तो दोनो अम्मी बेटा डर गयी और फ़ौरन नॉर्मल बैठ गये. सादिया टीवी देखने लगी और अली भी टीवी देखने लगा लकिन अली का हाथ अभी तक उसकी अम्मी की टाँगों मैं चूत के बिल्कुल ऊपर था. सादिया ने अपने हज़्बेंड की तरफ देखा जो चेयर से उठ के अपने रूम की तरफ जाने लगे तो सादिया ने फ़ौरन अली का हाथ अपनी चूत और टाँगों से रिमूव किया और अपनी शलवार ओँची कर के नाला बँधा फिर बिना कुछ कहे वहाँ से उठ के अपने रूम मैं चली गयी और अली वहीं अपने हार्ड लंड के साथ बैठा रहा.

नेक्स्ट दे वाज़ सनडे तो सब उठे और नाश्ता किया फिर अली अपने अब्बू के साथ अपने अंकल के घर गया और सादिया घर मैं अकेली थी.

सादिया घर के काम करने लगी लकिन उसका माइंड रात अपने बेटे के साथ की गयी हरकत पर था. एक लम्हे मैं सादिया को खुद पे गुस्सा आता और एक लम्हे मैं उसे अपने बेटे का उसकी चूत के साथ खेलना अच्छा लगने लगता वो डबल माइंडेड थी उसे समझ नही आ रहा था के वो किया करे.

सादिया से अब कंट्रोल नही हो रहा था लकिन वो आगे भी नही बढ़ना चाहती थी वो सोच सोच के पागल हो रही थी. सादिया अपने बेटे के ये सब करने से रोकना भी चाहती थी सेम टाइम उसका दिल कहता था के इतना सब करने मैं किया है बस इस से ज़ियादा कुछ नही करना लकिन फिर भी वो किसी फ़ैसले पे नही पहुँच पा रही थी.

खैर शाम को अली और उसके अब्बू घर वापस आ गये फिर सब ने खाना खाया और सादिया किचन मैं चली गयी और बाप बेटा टीवी देखने लगे.

सादिया कुछ देर बाद वहीं आ गयी लकिन आज वो बिना टीवी देखे अपने रूम मैं चली गयी.

रात को सादिया अपने हज़्बेंड से चुदवा रही थी लकिन उसका माइंड अपने बेटे अली पर था जब वो आँखें क्लोज़ करती तो ऐसा लगता जैसे उसे उसका बेटा अली चोद रहा हो तो वो फ़ौरन आँखें खोलती और सामने अपने हज़्बेंड को देखती.

वो पहली रात थी के सादिया अपने हज़्बेंड से चुदवाने मैं रिलीस नही हुई क्यों के उसका माइंड अपने बेटे की हरकतों पर था खैर फिर वो सो गयी.

सुबह सादिया किचन मैं थी उसका हज़्बेंड रूम मैं था और अली अपने रूम मैं. कुछ देर बाद अली अपने रूम से बाहर आ गया और सीधा किचन मैं चला गया.

अली ने अपनी अम्मी को सलाम किया फिर रात टीवी ना देखने की वज़ह पूछी ओ सादिया ने कहा मुझे नींद आ रही थी इस लिए मैं जल्दी सो गयी. सादिया ने इतना कहा ही था के अली आगे हुआ और अपना एक हाथ अपनी अम्मी की गांड़ पर टच किया और दूसरा हाथ सीधा राईट मम्मे पेर.

सादिया को झटका लगा उस ने अपने बेटे को पीछे किया.

सादिया: अली शरम करो मैं तुम्हारी अम्मी हूँ और अम्मी बेटा ऐसी हरकतईं नही करते प्लीज़ कंट्रोल !!

अली: लकिन अमि इस मैं ऐसा किया है मुझे आप को फील करना अच्छा लगता है.

सादिया: बेटा लुक अभी तुम बाहर जाओ तुम क्यों नही समझते ये ठीक नही है ये गलत है बहुत गलत.

अली: अच्छा अमि ठीक है लकिन हम बातें तो कर सकते हैं सिर्फ़ बातें अमि प्ल्ज़.

सादिया: कैसी बातें बेटा किया हम बातें नही करते?

अली: करते हैं बातें अमि लकिन जो आप मुझे करने से रोक रही हैं कुछ पर्सनल बातें प्ल्ज़ अमि मैं आप से हर बात शेयर करना चाहता हूँ आप के अपने पर्सनल मॅटर शेयर करना चाहता हूँ अगर आप प्रॉमिस करें तो मैं ये सब नही करूँ गा वरना जो मेरा दिल चाहे गा मैं वो सब करूँ गा.

सादिया: ओके ठीक है जब मौका हो गा हम जो बातें तुम कहो गे वो करें गे अब ठीक है ना जाओ अब.

अली: वाउ थॅंक्स अमि और साइड से अपनी अम्मी को गाल पर किस कर के बाहर आ गया.

कुछ दिन तो उन्हें बात करने का मौका नही मिला और अली भी कंट्रोल मैं रहा उस ने कोई टच नही किया अपनी अम्मी को.

सादिया खुश भी थी सेम टाइम उसका दिल भी करता था के अली उको टच करे छेड़े. सादिया कभी कभी तो खुद अली को मौका देती के वो उसे टच करे फील करे लकिन अली ने खुद पर बहुत कंट्रोल किए रखा.

कुछ दिन बाद अली के अब्बू कंपनी के काम से आउट ऑफ सिटी चले गये. अली जब कॉलेज से वापस आया तो उसे पता चला तो वो बहुत खुश हुआ.

दिन तो उस ने किसी तरह गुज़र लिया और रात को स्टडी करने के बाद वो अपनी अम्मी के रूम मैं गया. अली जब रूम मैं एंटर हुआ तो देखा सादिया सो चुकी थी वो बहुत उदास हो गया लकिन बिना कुछ बोले बेड पर लाते गया और गुस्से से टीवी ऑन कर के वॉल्यूम हाइ कर के देखने लगा.

अली कभी टीवी की तरफ देखता तो कभी अपनी अम्मी की तरफ जो खामोशी से सो रही थी. सादिया सोने की आक्टिंग कर रही थी कुछ देर बाद सादिया ने करवट ली और अपने बैक अली की तरफ कर दी. अली ने अपनी अम्मी की बैक अपने तरफ होते ही अपना हाथ अपनी अम्मी की गांड़ पर रख दिया.

अली ने जब कोई मूव्मेंट नही देखी तो वो अपनी अम्मी की गांड़ को रब करने लगा प्रेस करने लगा मसलने लगा लकिन सादिया भी खामोशी से चुप कर के लेटी रही. सादिया ने सोचा के उस के ऐसा करने से अली सो जाए गा लकिन अली भी कम नही था कुछ देर ऐसा करने के बाद अली अपना हाथ अपनी अम्मी की फ्रंट पे ले गया और शलवार का नाला खोलने लगा.

अली ने अपनी अम्मी की शलवार का नाल खोला ही था के सादिया ने जल्दी से अपने साइड चेंज कर दी अब सादिया का फेस अली की तरफ था और आँखें भी खुली थीं.

सादिया: अली बेटा मैं ने मना किया के मुझे टच नही करो गे तो फिर ये किया है.

अली: अमि आप ने भी कहा था के हम जब मौका हो गा बातें करें गे और आप जान के क्यों सो गयी थीं?

सादिया: मुझे नींद आ गयी थी बेटा प्ल्ज़ ऐसा ना किया करो मुझे मजबूर ना करो मैं तुम्हारे अब्बू से कह दूँ गी फिर पता है ना के किया हो गा?

अली: तो कह दें वैसे आज तक क्यों नही कहा आप ने? अमि मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ मैं नही रह सकता आप के बगैर आप बे शक किसी से भी कह दें लकिन मेरे दिल मैं आप के लिए जो प्यार है व नआ तो ख़तम हो गा ना ही कम हो गा बाकी आप की मर्ज़ी.

सादिया ये सुन के परेशां हो गयी और उठी के बैठ गयी. अली भी उठ के बैठ गया और उस वक़्त अली की आँखों मैं आँसू थे.

सादिया ने अपने बेटे को गले से लगा के चुप करा दिया फिर कहा अच्छा करो जो बातें करनी हैं.

अली खुश हो गया पहले तो उस ने अपनी अम्मी को गाल पर किस किया फिर बातें पूछने लगा.

अली: आप मुझ से प्यार करती हैं?

सादिया: हाँ बहुत ज़ियादा सब से ज़ियादा खुद से भी ज़ियादा क्यों के तुम मेरे बहुत प्यारे इक्लोटे बेटे हो. तुम्हें नही लगता किया ऐसा सवाल जो पूछ रहे हो?

अली: नही अम्मी मैं जनता हूँ लकिन कनफ़रम कर रहा था बस. अच्छा आप डैड से भी बहुत प्यार करती हैं?

सादिया: हाँ मैं उन से भी बहुत प्यार करती हूँ लकिन उन से ज़ियादा तुम मुझे प्यारे लगते हो.

अली: आप की और डैड की अरेंज मॅरेज थी ना तो किया आप शादी से पहले किसी और से प्यार करती थीं?

सादिया: ये कैसा सवाल है? हाँ हुमारी अरेंज मॅरेज थी.

अली: जैसा भी सवाल है आप बस सच सच जवाब दें आप ने प्रॉमिस किया था के हम पर्सनल मॅटर शेयर करें गे सो डोन्ट बे शाइ ऐंड प्ल्ज़ डोन्ट हाइड अन्य थिंग फ्रॉम मे प्लीज़ अमि ऐंड नाउ टेल मे शादी से पहले आप किसी और से प्यार करती थी आप का कोई BF था?

सादिया: हाँ मेरा एक BFBF था जिस से मैं बहुत प्यार करती थी. अली ये बातें सिर्फ़ हुमारे बीच रहनी चाहियाइन वरना मेरी लाइफ बर्बाद हो जाए गी प्रॉमिस मे बेटा.

अली: आई प्रॉमिस अमि डोन्ट वरी मैं पागल नही हूँ जो अपनी अम्मी के सीक्रेट क्सिी और के साथ शेयर करूँ. अच्छा कैसा था आप का BF कभी मिली थीं आप उस से आई डेट पे?

सादिया: वो बहुत प्यारा था मेरा बहुत ख़याल रखता था और हाँ मैं उस से मिलती भी थी हम डेट पर भी जाते थे.

अली: आप ने उस से शादी क्यों नही की?

सादिया: किस्मट मैं नही था वैसे तुम्हारे नाना अब्बू नही माने थे क्यों के वो दूसेरे सिटी का था और मेरे अब्बू मेरी शादी अपने ही सिटी मैं करना चाहते थे.

अली: वो आप को किस करता था?

सादिया: अली बेटा ऐसे सवाल नही करो अपनी अम्मी के साथ प्लीज़ मैं ऐसे सवालों के जवाब नही दे सकती ना ही देना चाहती हूँ ना ही दूँ गी सो लीव दिस टॉपिक प्ल्ज़.

अली: प्लीज़ अमि मैं ने कहा ना ये हुमारा सीक्रेट है मैं किसी को नही बतौन गा प्लीज़ अम्मी आप मेरे हर सवाल का सच सच जवाब दें गी प्लीज़ मा.

सादिया: हाँ वो मुझे किस करता था मैं भी उसे किस करती थी हम एक दूसेरे से बहुत प्यार करते थे. सादिया की पुरानी यादान ताज़ा हो रही थीं वो दुखी भी थी अंदर से लकिन साथ साथ अच्छा भी लग रहा था के वो अपनी लाइफ का बिग सीक्रेट पहली बार किसी के साथ शेयर कर रही थी वो भी अपने बेटे के साथ.

 

अली: वो आप को टच करता था लाइक मे जैसे मैं करता था?

सादिया: बेटा किसी और टॉपिक पर बात नही कर सकते किया हम? प्लीज़ मुझे अच्छा नही लग रहा बहुत शरम आ रही है तुम्हारे साथ ऐसी बातें करने मैं.

अली: अम्मी किया है सिर्फ़ बातें हैं और बातें करने से तो कुछ नही होता प्लीज़ अम्मी फॉर मे प्लीज़…

सादिया: ओक. हाँ वो मुझे टच करता था फील करता था जैसे तुम करते थे. सादिया की चूत गीली होना शुरू हो गयी उसे अब अपने बेटे के साथ ये बातें करे मैं मज़ा आने लगा वो अब स्लो स्लो एंजाय करने लगी और अब सादिया खुद अपनी शरम को ख़तम करने लगी.

अली: अमि किया वो आप के लिप्स पर किस करता था सक करता था?

सादिया: हाँ वो मेरे लिप्स को बहुत किस करता था भौत सक करता था.

अली: किया आप भी उसका साथ देती थीं?

सादिया: हाँ मैं भी उसे लिप्स पे किस करती थी उसके लिप्स सक करती थी उसका भरपूर साथ देती थी मुझे फ्रेंच किस बहुत अच्छा लगता है.

अली: कॅन वी ट्राइ जस्ट वन्स प्लीज़ मैं भी देखना चाहता हूँ के फ्रेंच किस कैसा होता है प्लीज़ अमि?

सादिया: बेटा दिस इस आउट ऑफ क्वेस्चन हम ने सिर्फ़ बातें करनी हैं रिमेंबर? सादिया अन्दर से ललचा रही थी उसका भी दिल कर रहा था अपने बेटे को होंठों पर किस करने का लकिन वो अपने बेटे के बस एक बार फिर कहने के इंतेज़ार मैं थी इस बार अगर अली ने दोबारा कहा तो वो माना नही करे गी ( सादिया दिल मैं सोच रही थी )

अली: OK अमि मैं तो सिर्फ़ एक बार का कह रहा था सिर्फ़ ट्राइ करना चाहत था फील करना चाहता था सिर्फ़ देखना…… अली ने अभी अपनी बात ख़तम नही कीट ही के उसकी अम्मी ने अपने होन्ट अपने बेटे के होंठों पे रख दिए और अली के लिप्स को सक करने लगी.

जब तक अली को समझ आती सादिया किस कर चुकी थी वो किस सिर्फ़ 15 सेकेंड का था जिस ने अली के होश उड़ा दिए थे.

सादिया: मैं उसे ऐसे किस करती थी. डिड यू लाइक इट?

अली: अरे मैं तो खुद करना चाहता था लकिन आप ने कर लिया और मुझे बहुत अच्छा लगा लकिन मैं ने भी करना है अमि प्लीज़ मुझे भी एक चान्स दें ना.

सादिया: OK लकिन ज़ियादा लंबी किस ना करना सिर्फ़ 2 सेकेंड.

अली: अमि 2 सेक तो मुझे आप के लिप्स को अपने लिप्स से टच करने मैं लग जाएँ गे तो फ़्रेच किस कब और कैसे करूँ गा?

सादिया: अच्छा फिर 5 सेकेंड बोलो मंज़ूर?

अली: नही अमि अच्छा प्ल्ज़ 10 सेकेंड अब माना नही करना प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़.

सादिया: OK कर लो लकिन सिर्फ़ 10 सेकेंड. सादिया ये कह के अली के फेस के सामने हुई और अली ने फ़ौरन अपनी अम्मी को हेयर से पकड़ के अपने लिप्स अपनी अम्मी के लिप्स पर टच किए और उन्हें सक करने लगा सादिया की मज़े से आँखें क्लोज़ हो गईं और अली ये देख के अब ज़ोर से अपनी अम्मी के लिप्स को चूसने लगा.

अली अब फुल हार्ड सकिंग करने लगा जिस से उसकी अम्मी को मज़ा आने लगा अब सादिया ने अपना हाथ अली के सिर की बैक पर रख के उसे अपने मुंह मैं दबा दिया और अपने बेटे का किस्सिंग मैं साथ देने लगी.

दोनो की सांस तेज़ और गरम चलने लगी. सादिया को बहुत मज़ा आ रहा था उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी उसे अपनी जवानी के दिन जो उस ने अपने BF के साथ गुज़रे थे वो याद आ गये उसे अपना लवर याद आ गया था.

दोनो अम्मी बेटे का किस 10 मिनिट तक चलता रहा दोनो को टाइम का एहसास नही हुआ लकिन सादिया को तब होश आया जब उस ने अपने बेटे अली का हाथ अपनी बीब्स पर फील किया उस ने आँखें खोलीं तो देखा के वो अपने लवर को नही अपने बेटे को किस कर रही थी और वो फ़ौरन पीछे हो गयी और सिर झुका के तेज़ साँसें ले रही थी अली की साँसें तेज़ थीं लकिन वो अपनी अम्मी की तरफ देख रहा था.

कुछ देर दोनो खामोश बैठे रहे दोनो की कंडीशन खड़ाब थी दोनो फूल हॉट ऐंड हॉर्नी थे.

अली: अमि किया उस ने आप को बिना कपड़ों के बिल्कुल नंगा देखा था?

सादिया: हाँ

अली: एक बार या…

सादिया: बहुत दफा

अली: पहली डेट पर भी?

सादिया: नही पहली डेट पब्लिक प्लेस पर थी.

अली: सेकेंड टाइम?

सादिया: हाँ

अली: सिर्फ़ देखा था या…

सादिया: अली बेटा प्लीज़.

अली: अमि…

सादिया: नही सिर्फ़ देखा नही था उस ने.

अली: टच किया था?

सादिया: हाँ

अली: किस्सिंग की थी?

सादिया: हाँ

अली: वही पहली किस्सिंग थी आप की लाइफ की या उस के साथ?

सादिया: नही किस्सिंग उसने पहली डेट पर की थी तब सेकेंड टाइम था.

अली: पहली बार तो पब्लिक प्लेस थी ना तब कैसे?

सादिया: वी वर इन आ मिल्क बार. सामने परदा था तो उस ने वक़फे वक़फे से 3 किस किए थे लिप्स पेर.

अली: सेकेंड डेट पर उसने सिर्फ़ आप को नंगा देखा टच किया किस्सिंग की? किया आप ने भी उसे नंगा देखा था?

सादिया: नही और हाँ.

अली: आप ने अपने कपडे खुद उतरे थे?

सादिया: नही उस ने मैं तो…

अली: आप तो किया?

सादिया: उस ने मेरे हाथ बाँध रखे थे.

अली: किया? उसने ज़बरदस्ती की थी आप के साथ?

सादिया: नही वैसे ही बँधा हुआ था मैं ने कहा था.

अली: लकिन ऐसा क्यों कहा आप ने प्ल्ज़ बताएं ना डीटेल मुझे.

सादिया: वो मेरी कमीज़ उँची कर के मेरे जिस्म पर किस करता तो मुझे गुदगुदी होती और मैं उसे रोक देती फिर उस ने कहा के उसे ना रोकून तो मैं ने कहा मेरे हाथ बाँध दो फिर जैसे दिल करे किस्सिंग करना तो उस ने मेरे दुपट्टे से मेरे हाथ बेड के साथ बाँध दिए.

अली: वाउ फिर उस ने आप को बाँध के फ़ौरन नंगा कर दिया?

 

सादिया: हाँ लकिन फ़ौरन नही स्लो स्लो काफ़ी देर बाद.

अली: वो कैसे?

सादिया: पहले उस ने मेरी कमीज़ उँची की फिर मेरे पेट पर किस्सिंग की काफ़ी देर फिर मुझे उल्टा लिटा दिया और मेरी पूरी कमर पर किस्सिंग की गांड़ से ऊपेर नेक तक बहुत किस्सिंग की लाइक मैड .

फिर उस ने मुझे दोबारा सीधा किया और मेरे पेट पर किस्सिंग करने लगा सकिंग करने लगा फिर स्लो स्लो मेरी कमीज़ और उँची की और मेरी गरदन तक ले आया और मेरी चेस्ट पर किस्सिंग करने लगा साथ ही अपना एक हाथ मेरी शलवार मैं डाल दिया.

अली: ब्रा के ऊपर से किस्सिंग करता रहा आप को चेस्ट पर और शलवार मैं हाथ क्यों डाला?

सादिया: नही पहले ब्रा नही उतरी और मेरी ऊपर चेस्ट पर किस्सिंग करता रहा कुछ देर बाद मेरी ब्रा भी ऊपर कर दी और चेस्ट पे किस्सिंग करने लगा. शलवार मैं हाथ उस लिए डाला जिस लिए तुम ने उस रात डाला था.

अली: कॅन वी ट्राइ द सेम यू डिड विद हिम प्लीज़?

सादिया: नो वे. कभी सोचना भी मत.

अली: OK मा. अच्छा वो सिर्फ़ इतना ही करता रहा या और कुछ भी किया?

सादिया: फिर उस ने तुम्हारी अम्मी को खूब फिंगरिंग की फिर उसने तुम्हारी अम्मी को खूब मज़े से चोदा और बहुत चोदा बस अब खुश.

अली: सॉरी अम्मी मेरा ये मतलब नही था मैं तो सिर्फ़ पूछ रहा हूँ आप प्लीज़ नाराज़ तो ना हूँ गुस्सा तो ना करें प्लीज़ मा.

सादिया: बेटा ना याद दिलाओ मुझे वो सब पता नही कितनी मुश्किल से मैं ने खुद को संभाला है मैं वो सब भूलना चाहती हूँ और तुम हो के सब याद दिला रहे हो प्लीज़ लीव दिस टॉपिक बेटा.

अली: सॉरी अमि लकिन मैं सिर्फ़ जानना चाहता हूँ प्लीज़ शेयर विद मे आप का गम आप का दर्द कम हो गा प्लीज़ मा.

सादिया: OK और किया पूछना है पूछो?

अली: आप का वो सब से पहला सेक्स कैसा था?

सादिया: वो मेरा दिल से तो पहला सेक्स था लकिन वैसे पहला नई था.

अली: किया मतलब उस से पहले भी आप ने किसी और के साथ सेक्स किया हुआ था?

सादिया: मैं ने नही किया था बस हो गया था.

अली: प्लीज़ अम्मी बताएं ना पूरी बात.

सादिया: मेरे पापा के बिज़्नेस पार्ट्नर थे मुझ से तक़रीबन 10 साल बड़े तब मैं बारह साल की थी. वो हुमारे घर आते जाते थे तब उन्हों तुम्हारी बड़ी आंटी के रिश्ता की बात की लकिन उसका रिश्ता मेरे कज़िन के साथ किया हुआ था.

कुछ टाइम बाद तुम्हारी खाला ने मुझे बताया के वो तुम मैं इंट्रेस्टेड हैं रिश्ते की बात भी करें गे अब्बू अम्मी से तुम्हारे लिए.

मैं ने कंप्यूटर लाना था तो अबू ने उन के ज़िमा लगाया और एक दिन वो कंप्यूटर देने घर आए उस दिन मैं घर मैं अकेली थी मैं ने उन्हें अंदर बुलाया उन्हों ने मुझे कंप्यूटर सेट कर दिया फिर मुझ से कहने लगे के मैं उन्हें अच्छी लगती हूँ और अचानक मेरा हाथ पकड़ के मुझे अपने क़रीब किया और मेरे लिप्स पर किस्सिंग करने लगे मैं ने खुद को उन से अलग किया और वहाँ से चली गयी तो वो मेरे पीछे आए और सॉरी कह के चले गये.

कुछ दिन बाद उन्हों ने मुझे कॉल की और सॉरी कहा के वो अपनी हरकत पर शर्मिंदा हैं और आइन्दा ऐसा कुछ नही करें गे लकिन मैं उन्हें बहुत अच्छी लगती हूँ वो मुझ से शादी करें गे.

फिर एक दिन वो लाहोर जा रहे थे अपनी अम्मी के साथ तो पापा ने मुझे उन के साथ भेज दिया के तुम्हारी खाला के घर चक्कर लगाती आना.

फिर वो बंदा उसकी अमि और मैं उसकी कार मैं लाहोर चले गये उस ने मुझे तुम्हारी खाला के घर ड्रॉप किया और 2 दिन बाद मुझे लेने आया के वापसी है मैं जब कार मैं बैठी तो देखा उस मैं उसकी अमि नही थी.

मैं ने पूछा के आंटी कहाँ हैं तो उन्हों ने कहा उन्हें रास्ते से पिक करना है फिर वो एक होटेल पे आ गये और मुझे कहा चलो अमि को बुला लें फिर रवाना होते हैं और मैं उन के साथ होटेल मैं एंटर हुई जब मैं रूम मैं एंटर हुई तो रूम खाली था मैं समझी आंटी वॉशरूम मैं हूँ गी.

इतने मैं वो भी अंदर आ गया और डोर लॉक कर के मेरे साथ बेड पे बैठ गया फिर मेरा हाथ पकड़ के कहने लगा के वो मुझ से बहुत प्यार करता है मेरे बगैर नही रह सकता फिर आहिस्ता आहिस्ता मुझे बेड पे लिटा दिया और खुद साथ लेट गया फिर उस ने बातों बातों मैं मेरी शलवार नीचे की मेरी चेस्ट को दबाने लगा और कुछ देर बाद अपनी पैंट की ज़िप खोल के मेरे ऊपर लाते गया.

फिर स्लो स्लो उस ए मेरे अंदर डालना शुरू किया मुझे दर्द होने लगा मैं उन से खुद को छुड़ाने लगी लकिन उन्हों ने मुझे नही छोड़ा उल्टा और अंदर ज़ोर दे के डालने लगा और झटके से काफ़ी अंदर डाल दिया. मेरी दर्द से चीख निकल गयी और वो वहीं मेरे अंदर रिलीस हो गया.

फिर मैं ने उसे साइड पे किया और वॉशरूम चली गयी वहाँ मैं बहुत रोए फिर मैं बाहर आए और हम वापस आ गये.

अली: आप ने नाना अबू को नही बताया ये सब?

सादिया: नही मैं डर गयी थी और ये बात उस के मेरे और अब तुम्हारे सिवाए कोई भी नही जनता है.

अली: वही लास्ट था या उस ने दोबारा भी कभी किया था?

सादिया: नही सेक्स वही था उस के बाद एक दफ़ा वो मुझे स्कूल से पिक करने आ गये और रास्ते मैं अपना हाथ मेरी शलवार मैं डाल के घर आने तक मुझे फील करते रब करते आए.

अली: अमि किया आप के BF को पता नही चला के आप ने पहले भी सेक्स किया हुआ है और किया अबू को भी पता नही चला?

सादिया: मेरा BF तो बहुत एक्सपर्ट था उसे फ़ौरन पता चल गया था लकिन मैं ने उसे कहा था के फिंगरिंग करती थी इस लिए सील नही है लकिन वो मानता नही था और तुम्हारे अब्बू उन्हों ने जब पूछा तो मैं ने कहा मुझे किया पता क्यों नही है उन्हें आज तक पता नही है.

अली: अमि अभी भी आप को डर है किसी से इस लिए आप एलास्टिक की जगह नाल यूज़ करती हैं?

सादिया: नाल तो मैं ने अबू के पार्ट्नर के बाद से यूज़ करता शुरू कर दिया था और अब तुम से डर के यूज़ करती हूँ.

अली: किस के साथ आप ने ज़ियादा एंजाय किया ज़ियादा?

सादिया: बेटा एंजाय तो लव मेकिंग मैं होता है जो मैं अपने BF के साथ करती थी और फिर तुम्हारे अब्बू के साथ लकिन शुरू मैं नही अब करती हूँ बाकी अबू के पार्ट्नर के साथ किया हुआ तो सेक्स था रेप था लव मेकिंग नही.

अली: अमि आप का अभी तक कॉंटॅक्ट है अपने BF के साथ?

सादिया: अब तो ना होने के बराबर है लकिन तब तक था जब तुम पाँच साल के थे तब तक मैं उस से मिलती भी थी कभी कभी जब मौका होता.

अली: कहीं मैं उनका बेटा तो नही हूँ?

सादिया: नही पागल मेरी शादी के बाद 4 साल तक तो हम मैं कोई कॉंटॅक्ट नही था उस के बाद हुआ था जो अब बहुत कम है.

अली: पापा के और आपके BF के प्यार मैं किया फ़र्क़ है?

सादिया: तुम्हारे पापा बस अपने मतलब तक थे जब दिल करता जैसे दिल करता मैं सो रही होती तो जगा के शुरू हो जाते मेरा एहसास नही करते लकिन मेरा BF पहले मुझे बहुत प्यार करता मुझे तैयार करता फिर लव मेकिंग करता और उस के प्यार का स्टाइल तरीका सब हट के है.

अली: अमि सेक्स मैं सब से ज़ियादा किया पसंद है आप को?

सादिया: हाँ मुझे पहले लिप्स पर किस्सिंग पहले स्लो फिर हार्ड उस के बाद चेस्ट रब्बिंग देन किस्सिंग देन बाइटिंग मुझे पागल कर देते हैं.

अली: पोज़िशन कौन सी पसंद है सब से ज़ियादा?

सादिया: हाँ मुझे ऊपेर बैठ के और डॉगी स्टाइल मैं बहुत मज़ा आता है.

अली: अमि डिड यू सक योर BF ओर पापा?

सादिया: हाँ यस आई डिड विद बोथ बट मोस्ट्ली आई लाइक इट विद माई BF क्यों के वो फोर्स नही करता कभी भी जैसा मैं चाहों वो वही करता है लकिन तुम्हारे डैड बस अपनी मर्ज़ी करते हैं हमेशा जो मुझे पसंद नही.

अली: किया दोनो ने आप को लिक किया?

सादिया: हाँ

अली: वॉट अबाउट एनल मा?

सादिया: हाँ बस एक बार तुम्हारे डैड ने कोशिश की थी लकिन मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं ने नही करने दिया.

अली: सकिंग मैं किस के साथ ज़ियादा मज़ा आता है आप को और क्यों और कैसे दिल करता है आप का?

सादिया: सकिंग करने का दिल नही करता लकिन जब करती थी तब अपने BF के साथ और मज़ा भी तब आता था बाकी अगर मैं ज़ियादा हॉट हो जाऊं तो खूब मज़े से करूँ सकिंग.

अली: BF के साथ और किया किया किया आप ने और किया किया नही किया जो वो करना चाहता हो?

सादिया: वो तो सब कुछ और बहुत कुछ करना चाहता था लकिन मैं अक्सर माना कर देती थी. उस के साथ मैं ने बात मैं लव मेकिंग की था नहाते हुए और बहुत स्टाइल मैं लव मेकिंग की लकिन वो तो मुझे मुंह फक्किंग करना चाहता था मेरे मुंह मैं मेरे गले मैं रिलीस होने का कहता था मेरी गांड मैं हार्ड फक और उस मैं रिलीस होने का कहता था लकिन कभी मैं नही मानती कभी मौका ना मिलता कभी टाइम ना होता.

अली: अमि कॅन वी ट्राइ जो आप कर चुकी हैं जो आप ने नही की जो आप करना चाहती हैं प्लीज़ अमि मुझे प्यार करने दें मैं भी आप के साथ लव मेकिंग करना चाहता हूँ प्लीज़.

सादिया: बेटा मैं कैसे समझाऊं तुम्हें के अम्मी बेटा ऐसे काम नही करते क्यों नही समझते हो तुम ये ना मुमकिन है.

अली: लकिन अमि आप ने उन के साथ भी तो किया है तो मेरे साथ करने से किया हो जाए गा अच्छा हम सिर्फ़ एक बार करते हैं अगर आप को अच्छा लगा और आप का दिल करे गा तो दोबारा भी करें गे वरना नही. मैं आप को खुश करना चाहता हूँ आप को मज़ा देना चाहता हूँ अम्मी प्लीज़ डोंट से नो लेट्स हॅव सम फन लेट्स मेक लव अम्मी प्लीज़.

पर सादिया नहीं मानी और अली के साथ साथ हम सबकी KLPD हो गयी … LOL

THE END

 

माँ का प्यार-1

दोस्तो छुट्टियाँ ख़तम हो गई और मैं वापस अपने घर आ गया. अरे यार मैं अपने घर के बारे मे तो बताना ही भूल गया. मेरे पिता मिल में काम करने वाले एक सीधे साधे आदमी थे उनमें बस एक खराबी थी, वे बहुत शराब पीते थे अक्सर रात को बेहोशी की हालत में उन्हें उठा कर बिस्तर पर लिटाना पड़ता था पर माँ के प्रति उनका व्यवहार बहुत अच्छा था और माँ भी उन्हें बहुत चाहती थी और उनका आदर करती थी

मैंने बहुत पहले माँ पर हमेशा छाई उदासी महसूस कर ली थी पर बचपन में इस उदासी का कारण मैं नहीं जान पाया था मैं माँ की हमेशा सहायता करता था सच बात तो यह है कि माँ मुझे बहुत अच्छी लगती थी और इसलिए मैं हमेशा उसके पास रहने की कोशिश करता था माँ को मेरा बहुत आसरा था और उसका मन बहलाने के लिए मैं उससे हमेशा तरह तरह की गप्पें लडाया करता था उसे भी यह अच्छा लगता था क्योंकि उसकी उदासी और बोरियत इससे काफ़ी कम हो जाती थी

मेरे पिता सुबह जल्दी घर से निकल जाते थे और देर रात लौटते फिर पीना शुरू करते और ढेर हो जाते उनकी शादी अब नाम मात्र को रह गई थी, ऐसा लगता था बस काम और शराब में ही उनकी जिंदगी गुजर रही थी और माँ की बाकी ज़रूरतों को वे नज़रअंदाज करने लगे थे दोनों अभी भी बातें करते, हँसते पर उनकी जिंदगी में अब प्यार के लिए जैसे कोई स्थान नहीं था

मैने पढने के साथ साथ पार्ट-टाइम काम करना शुरू कर दिया था इससे कुछ और आमदनी हो जाती थी पर यार दोस्तों में उठने बैठने का मुझे समय ही नहीं मिलता था, प्यार व्यार तो दूर रहा जब सब सो जाते थे तो मैं और माँ किचन में टेबल के पास बैठ कर गप्पें लडाते माँ को यह बहुत अच्छा लगता था उसे अब बस मेरा ही सहारा था और अक्सर वह मुझे प्यार से बाँहों में भर लेती और कहती कि मैं उसकी जिंदगी का चिराग हूँ

बचपन से मैं काफ़ी समझदार था और दूसरों से पहले ही जवान भी हो गया था सोलह साल का होने पर आपको तो मालूम ही है शन्नो मौसी ने और रवि मौसा जी , ललिता रश्मि डॉली की सारी कहानी पहले ही बता चुका हूँ . अब मैं धीरे धीरे माँ को दूसरी नज़रों से देखने लगा किशोरावस्था में प्रवेश के साथ ही मैं यह जान गया था कि माँ बहुत आकर्षक और मादक नारी थी उसके लंबे घने बाल उसकी कमर तक आते थे और तीन बच्चे होने के बावजूद उसका शरीर बड़ा कसा हुआ और जवान औरतों सा था अपनी बड़ी काली आँखों से जब वह मुझे देखती तो मेरा दिल धडकने लगता था

हम हर विषय पर बात करते यहाँ तक कि व्यक्तिगत बातें भी एक दूसरे को बताते मैं उसे अपनी प्रिय अभिनेत्रियों के बारे में बताता वह शादी के पहले के अपने जीवन के बारे में बात करती वह कभी मेरे पिता के खिलाफ नहीं बोलती क्योंकि शादी से उसे काफ़ी मधुर चीज़ें भी मिली थीं जैसे कि उसके बच्चे

माँ के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण मैं अब इसी प्रतीक्षा में रहता कि कैसे उसे खुश करूँ ताकि वह मुझे बाँहों में भरकर लाड दुलार करे और प्यार से चूमे जब वह ऐसा करती तो उसके उन्नत स्तनों का दबाव मेरी छाती पर महसूस करते हुए मुझे एक अजीब गुदगुदी होने लगती थी मैं उसने पहनी हुई साड़ी की और उसकी तारीफ़ करता जिससे वह कई बार शरमा कर लाल हो जाती काम से वापस आते समय मैं उसके लिए अक्सर चॉकलेट और फूलों की वेणी ले आता हर रविवार को मैं उसे सिनेमा और फिर होटल ले जाता

सिनेमा देखते हुए अक्सर मैं बड़े मासूम अंदाज में उससे सट कर बैठ जाता और उसके हाथ अपने हाथों में ले लेता जब उसने कभी इसके बारे में कुछ नहीं कहा तो हिम्मत कर के मैं अक्सर अपना हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे पास खींच लेता और वह भी मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर पिक्चर देखती अब वह हमेशा रविवार की राह देखती खुद ही अपनी पसंद की पिक्चर भी चुन लेती

पिक्चर के बाद अक्सर हम एक बगीचे में गप्पें मारते हुए बैठ जाते एक दूसरे से मज़ाक करते और खिलखिलाते एक दिन माँ बोली “राज अब तू बड़ा हो गया है, जल्द ही शादी के लायक हो जाएगा तेरे लिए अब एक लड़की ढूँढना शुरू करती हूँ”

मैंने उसका हाथ पकडते हुए तुरंत जवाब दिया “अम्मा, मुझे शादी वादी नहीं करनी मैं तो बस तुम्हारे साथ ही रहना चाहता हूँ” मेरी बात सुनकर वह आश्चर्य चकित हो गई और अपना हाथ खींच कर सहसा चुप हो गई “क्या हुआ अम्मा? मैंने कुछ ग़लत कहा?” मैंने घबरा कर पूछा वह चुप रही और कुछ देर बाद रूखे स्वरों में बोली “चलो, घर चलते हैं, बहुत देर हो गई है”

मैंने मन ही मन अपने आप को ऐसा कहने के लिए कोसा पर अब जब बात निकल ही चुकी थी तो साहस करके आगे की बात भी मैंने कह डाली “अम्मा, तुम्हें ग़लत लगा तो क्षमा करो पर सच तो यही है कि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ तुम्हारी खुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ” काफ़ी देर माँ चुप रही और फिर उदासी के स्वर में बोली “ग़लती मेरी है बेटे यहा सब पहले ही मुझे बंद कर देना था लगता है की अकेलेपना के अहसास से बचाने के लिए मैंने तुझे ज़्यादा छूट दे दी इसलिए तेरे मन में ऐसे विचार आते हैं”

 

मैं बोला “ग़लत हो या सही, मैं तो यही जानता हूँ कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो” वह थोड़ा नाराज़ हो कर बोली “पागलपन की बातें मत करो सच तो यह है कि तू मेरा बेटा है, मेरी कोख से जनमा है” मैंने अधीर होकर कहा “अम्मा, जो हुआ सो हुआ, पर मुझसे नाराज़ मत हो मैं अपना प्यार नहीं दबा सकता तुम भी ठंडे दिमाग़ से सोचो और फिर बोलो”

माँ बहुत देर चुप रही और फिर रोने लगी मेरा भी दिल भर आया और मैंने उसे सांत्वना देने को खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया वह छूट कर बोली “चलो, रात बहुत हो गयी है, अब घर चलते हैं”

इसके बाद हमारा घूमने जाना बंद हो गया मेरे बहुत आग्रह करने पर भी वह मेरे साथ नहीं आती थी और कहती थी कि मैं किसी अपनी उम्र की लड़की के साथ पिक्चर देखने जाऊ मुझसे वह अभी भी दूर रहती थी और बोलती कम थी पर जैसे मेरे मन में हलचल थी वैसी ही उसके भी मन में होती मुझे सॉफ दिखती थी

एक दो माह ऐसे ही गुजर गये इस बीच मेरा एक छोटा बिज्निस था, वह काफ़ी सफल हुआ और मैं पैसा कमाने लगा एक कार भी खरीद ली माँ मुझ से दूर ही रहती थी मेरे पिता ने भी एक बार उससे पूछा कि अब वह क्यों मेरे साथ बाहर नहीं जाती तो वह टाल गयी एक बार उसने उनसे ही कहा कि वे क्यों नहीं उसे घुमाने ले जाते तो काम ज़्यादा होने का बहाना कर के वे मुकर गये शराब पीना उनका वैसे ही चालू था उस दिन उनमें खूब झगड़ा हुआ और आख़िर माँ रोते हुए अपने कमरे में गई और धाड से दरवाजा लगा लिया

दूसरे दिन बुधवार को जब मेरे भाई बहन बाहर गये थे, मैंने एक बार फिर साहस करके उसे रविवार को पिक्चर चलने को कहा तो वह चुपचाप मान गई मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा और मैं उससे लिपट गया उसने भी मेरे सीने पर सिर टिकाकर आँखें बंद कर लीं मैंने उसे कस कर बाँहों में भर लिया

यह बड़ा मधुर क्षण था हमारा संबंध गहरा होने का और पूरा बदल जाने का यह चिन्ह था मैंने प्यार से उसकी पीठ और कंधे पर हाथ फेरे और धीरे से उसके नितंबों को सहलाया वह कुछ ना बोली और मुझसे और कस कर लिपट गयी मैंने उसकी ठुड्डी पकड़ कर उसका सिर उठाया और उसकी आँखों में झाँकता हुआ बोला “अम्मा, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ, जो भी हो, मैं तुझे अकेला नहीं रहने दूँगा”

फिर झुक कर मैंने उसके गाल और आँखें चूमी और साहस करके अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए माँ बिलकुल नहीं विचलित हुई बल्कि मेरे चुंबन का मीठा प्रतिसाद उसने मुझे दिया मेरी माँ का वह पहला चुंबन मेरे लिए अमृत से ज़्यादा मीठा था

उसके बाद तो उसमें बहुत बदलाव आ गया हमेशा वह मेरी राह देखा करती थी और लाई हुई वेणी बड़े प्यार से अपने बालों में पहन लेती थी जब भी हम अकेले होते, एक दूसरे के आलिंगन में बँध जाते और मैं उसके शरीर को सहलाकार अपनी कुछ प्यास बुझा लेता माँ का यह बदला रूप सबने देखा और खुश हुए कि माँ अब कितनी खुश दिखती है मेरी बहन ने तो मज़ाक में यह भी कहा कि इतना बड़ा और जवान होने पर भी मैं छोटे बच्चे जैसा माँ के पीछे घूमता हूँ मैंने जवाब दिया की आख़िर अम्मा का अकेलापन कुछ तो दूर करना हमारा कर्तव्य है

उस रविवार को अम्मा ने एक बहुत बारीक शिफान की साड़ी और एकदम तंग ब्लओज़ पहना उसके स्तनो का उभार और नितंबों की गोलाई उनमें निखार आया था वह बिलकुल जवान लग रही थी और सिनेमा हाल में काफ़ी लोग उसकी ओर देख रहे थे वह मुझसे बस सात आठ साल बड़ी लग रही थी इसलिए लोगों को यही लगा होगा कि हमारी जोड़ी है

पिक्चर बड़ी रोमान्टिक थी माँ ने हमेशा की तरह मेरे कंधे पर सिर रख दिया और मैंने उसके कंधों को अपनी बाँह में घेरकर उसे पास खींच लिया पिक्चर के बाद हम पार्क में गये रात काफ़ी सुहानी थी माँ ने मेरी ओर देखकर कहा “राज बेटे, तू ने मुझे बहुत सुख दिया है इतने दिन तूने धीरज रखा आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है”

मैंने माँ की ओर देख कर कहा “अम्मा, आज तुम बहुत हसीन लग रही हो और सिर्फ़ सुंदर ही नहीं, बल्कि बहुत सेक्सी भी” अम्मा शरमा गयी और हँस कर बोली “राज, अगर तू मेरा बेटा ना होता तो मैं यही समझती कि तू मुझ पर डोरे डाल रहा है”

मैंने उसकी आँखों में आँखें डाल कर कहा “हाँ अम्मा, मैं यही कर रहा हूँ” माँ थोड़ा पीछे हटी और काँपते स्वर में बोली “यह क्या कह रहा है बेटा, मैं तुम्हारी माँ हूँ, तू मेरी कोख से जन्मा है और फिर मेरी शादी हुई है तेरे पिता से”

मैं बोला “अम्मा, उन्होंने तुम्हें जो सुख देना चाहिए वह नहीं दिया है, मुझे आजमा कर देखो, मैं तुम्हे बहुत प्यार और सुख दूँगा” माँ काफ़ी देर चुप रही और फिर बोली “राज, घर चलना चाहिए नहीं तो हम कुछ ऐसा कर बैठेंगे जो एक माँ बेटे को नहीं करना चाहिए तो जिंदगी भर हमें पछताना पड़ेगा”

मैं तडप कर बोला “अम्मा, मैं तुम्हे दुख नहीं पहुँचाना चाहता पर तुम इतनी सुंदर हो कि कभी कभी मुझे लगता है कि काश तुम मेरी माँ ना होतीं तो मैं फिर तुम्हारे साथ चाहे जो कर सकता था” मेरे इस प्यार और चाहत भरे कथन पर माँ खिल उठी और मेरे गालों को सहलाते हुए बोली “मेरे बच्चे, तू भी मुझे बहुत प्यारा लगता है, मैं तो बहुत खुश हूँ कि तेरे जैसा बेटा मुझे मिला है क्या सच में मैं इतनी सुंदर हूँ कि मेरे जवान बेटे को मुझ पर प्रेम आ गया है?” मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा “हाँ अम्मा, तुम सच में बहुत सुंदर और सेक्सी हो”

अचानक मेरे सब्र का बाँध टूट गया और मैंने झुक कर माँ का चुंबन ले लिया माँ ने प्रतिकार तो नहीं किया पर एक बुत जैसी चुपचाप मेरी बाँहों में बँधी रही अब मैं और ज़ोर से उसे चूमने लगा सहसा माँ ने भी मेरे चुंबन का जवाब देना शुरू करा दिया उसका सम्यम भी कमजोर हो गया था अब मैं उसके पूरे चेहरे को, गालों को, आँखों को और बालों को बार बार चूमने लगा अपने होंठ फिर माँ के कोमल होंठों पर रख कर जब मैंने अपनी जीभ उनपर लगाई तो उसने मुँह खोल कर अपने मुख का मीठा खजाना मेरे लिए खुला कर दिया

काफ़ी देर की चूमाचाटी के बाद माँ अलग हुई और बोली “राज, बहुत देर हो गयी बेटे, अब घर चलना चाहिए” घर जाते समय जब मैं कार चला रहा था तो माँ मुझ से सट कर मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी थी मैंने कनखियों से देखा कि उस के होंठों पर एक बड़ी मधुर मुस्कान थी

बीच में ही मैंने एक गली में कार रोक कर आश्चर्यचकित हुई माँ को फिर आलिंगन में भर लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा इस बार मैंने अपना हाथ उसके स्तनों पर रखा और उन्हें प्यार से टटोलने लगा माँ थोड़ी घबराई और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी “राज, हमें यह नहीं करना चाहिए बेटे”

मैंने अपने होंठों से उसका मुँहा बंद कर दिया और उसका गहरा चुंबन लेते हुए उन कोमल भरे हुए स्तनों को हाथ में लेकर हल्के हल्के दबाने लगा बड़े बड़े मांसल उन उरोजो का मेरे हाथ में स्पर्श मुझे बड़ा मादक लग रहा था इन्हीं से मैंने बचपन में दूध पिया था माँ भी अब उत्तेजित हो चली थी और सिसकारियाँ भरते हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चूमने लगी थी फिर किसी तरह से उसने मेरे आलिंगन को तोड़ा और बोली “अब घर चल बेटा”

मैंने चुपचाप कार स्टार्ट की और हम घर आ गये घर में अंधेरा था और शायद सब सो गये थे मुझे मालूम था कि मेरे पिता अपने कमरे में नशे में धुत पड़े होंगे घर में अंदर आ कर वहीं ड्राइंग रूम में मैं फिर माँ को चूमने लगा

उसने इस बार विरोध किया कि कोई आ जाएगा और देख लेगा मैं धीरे से बोला “अम्मा, मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ, ऐसा मैंने किसी और औरत या लड़की को नहीं किया मुझसे नहीं रहा जाता, सारे समय तुम्हारे इन रसीले होंठों का चुंबन लेने की इच्छा होती रहती है और फिर सब सो गये हैं, कोई नहीं आएगा”

माँ बोली “मैं जानती हूम बेटे, मैं भी तुझे बहुत प्यार करती हूँ पर आख़िर मैं तुम्हारे पिता की पत्नी हूँ, उनका बाँधा मंगल सूत्र अभी भी मेरे गले में है” मैं धीरे से बोला “अम्मा, हम तो सिर्फ़ चुंबन ले रहे हैं, इसमें क्या परेशानी है?”

माँ बोली “पर राज, कोई अगर नीचे आ गया तो देख लेगा” मुझे एक तरकीब सूझी “अम्मा, मेरे कमरे में चलें? अंदर से बंद करके सिटकनी लगा लेंगे बापू तो नशे में सोए हैं, उन्हें खबर तक नहीं होगी”

माँ कुछ देर सोचती रही सॉफ दिख रहा था कि उसके मन में बड़ी हलचला मची हुई थी पर जीत आख़िर मेरे प्यार की हुई वह सिर डुला कर बोली “ठीक है बेटा, तू अपने कमरे में चल कर मेरी राह देख, मैं अभी देख कर आती हूँ कि सब सो रहे हैं या नहीं”

मेरी खुशी का अब अंत ना था अपने कमरे में जाकर मैं इधर उधर घूमता हुआ बेचैनी से माँ का इंतजार करने लगा कुछ देर में दरवाजा खुला और माँ अंदर आई उसने दरवाजा बंद किया और सिटकनी लगा ली

मेरे पास आकर वह काँपती आवाज़ में बोली “तेरे पिता हमेशा जैसे पी कर सो रहे हैं पर राज, शायद हमें यह सब नहीं करना चाहिए इसका अंत कहाँ होगा, क्या पता मुझे डर भी लग रहा है”

मैंने उसका हाथ पकडकर उसे दिलासा दिया “डर मत अम्मा, मैं जो हूँ तेरा बेटा, तुझ पर आँच ना आने दूँगा मेरा विश्वास करो किसी को पता नहीं चलेगा” माँ धीमी आवाज़ में बोली “ठीक है राज बेटे” और उसने सिर उठाकर मेरा गाल प्यार से चूम लिया

मैंने अपनी कमीज़ उतारी और अम्मा को बाँहों में भरकर बिस्तर पर बैठ गया और उसके होम्ठ चूमने लगा हमारे चुंबनो ने जल्द ही तीव्र स्वरूप ले लिया और ज़ोर से चलती साँसों से माँ की उत्तेजना भी स्पष्ट हो गई मेरे हाथ अब उसके पूरे बदन पर घूम रहे थे मैंने उसके उरोज दबाए और नितंबों को सहलाया आख़िर मुझ से और ना रहा गया और मैंने माँ के ब्लओज़ के बटन खोलने शुरू कर दिए

एक क्षण को माँ का शरीर सहसा कड़ा हो गया और फिर उसका आखरी संयम भी टूट गया अपने शरीर को ढीला छोड़कर उसने अपने आप को मेरे हवाले कर दिया इसके पहले कि वह फिर कुछ आनाकानी करे, मैंने जल्दी से बटन खोल कर उसका ब्लओज़ उतार दिया इस सारे समय मैं लगातार उसके कोमल मुख को चूम रहा था

ब्लओज़ उतरने पर माँ फिर थोड़ा हिचकिचाई और बोलने लगी “ठहर बेटे, सोच यह ठीक है या नहीं ” अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं था इसलिए मैंने उसका मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया और उसे आलिंगन में भर लिया अब मैंने उसकी ब्रेसियार के हुक खोलकर उसे भी निकाल दिया माँ ने चुपचाप हाथ उपर करके ब्रा निकालने में मेरी सहायता की

उसके नग्न स्तन अब मेरी छाती पर सटे थे और उसके उभरे निपलो का स्पर्श मुझे मदहोश कर रहा था उरोजो को हाथ में लेकर मैं उनसे खेलने लगा बड़े मुलायम और मांसल थे वे झुक कर मैंने एक निपल मुँह में ले लिया और चूसने लगा माँ उत्तेजना से सिसक उठी उसके निपल बड़े और लंबे थे और जल्द ही मेरे चूसने से कड़े हो गये “अम्मा, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ मुझे मालूम है कि अपने ही माँ के साथ रति करना ठीक नहीं है, पर मैं क्या करूँ, मैं अब नहीं रह सकता”

उसके शरीर को चूमते हुए मैं नीचे की ओर बढ़ा और अपनी जीभ से उसकी नाभि चाटने लगा वहाँ का थोड़ा खारा स्वाद मुझे बहुत मादक लग रहा था माँ भी अब मस्ती से हुंकार रही थी और मेरे सिर को अपने पेट पर दबाए हुई थी उसकी नाभि में जीभ चलाते हुए मैंने उसके पैर सहलाना शुरू कर दिए उसके पैर बड़े चिकने और भरे हुए थे अपना हाथ अब मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट के नीचे डाल कर उसकी मांसल मोटी जांघें रगडना शुरू कर दीं

 

मेरा हाथ जब जांघों के बीच पहुँचा तो माँ फिर से थोड़ी सिमट सी गयी और जांघों में मेरे हाथ को पकड़ लिया कि और आगे ना जाऊ मैंने अपनी जीभ उसके होंठों पर लगा कर उसका मुँह खोला और जीभ अंदर डाल दी अम्मा मेरे मुँह में ही थोड़ी सिसकी और फिर मेरी जीभ को चूसने लगी अपनी जांघें भी उसने अलग कर के मेरे हाथ को खुला छोड़ दिया

मेरा रास्ता अब खुला था मुझे कुछ देर तक तो यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मेरी माँ, मेरे सपनों की रानी, वह औरत जिसने मुझे और मेरे भाई बहनों को अपनी कोख से जन्मा था, वह आज मुझसे, अपने बेटे को अपने साथ रति क्रीडा करने की अनुमति दे रही है

माँ के पेटीकोट के उपर से ही मैंने उसके फूले गुप्ताँग को रगडना शुरू कर दिया अम्मा अब कामवासना से कराह उठी उसकी योनि का गीलापन अब पेटीकोट को भी भिगो रहा था मैंने हाथ निकाल कर उसकी साड़ी पकडकर उतार दी और फिर खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा कपड़ों से छूटते ही मेरा बुरी तरह से तन्नाया हुआ लोहे के डंडे जैसा शिश्न उछल कर खड़ा हो गया

मैं फिर पलंग पर लेट कर अम्मा की कमर से लिपट गया और उसके पेटीकोट के उपर से ही उसके पेट के निचले भाग में अपना मुँहा दबा दिया अब उसके गुप्ताँग और मेरे मुँह के बीच सिर्फ़ वह पेटीकोट था जिसमें से माँ की योनि के रस की भीनी भीनी मादक खुशबू मेरी नाक में जा रही थी अपना सिर उसके पेट में घुसाकर रगडते हुए मैं उस सुगंध का आनंद उठाने लगा और पेटीकोट के उपर से ही उसके गुप्ताँग को चूमने लगा

मेरे होंठों को पेटीकोट के कपड़े में से माँ के गुप्ताँग पर उगे घने बालों का भी अनुभव हो रहा था उस मादक रस का स्वाद लेने को मचलते हुए मेरे मन की सांत्वना के लिए मैंने उस कपड़े को ही चूसना और चाटना शुरू कर दिया

आख़िर उतावला होकर मैंने अम्मा के पेटीकोट की नाडी खोली और उसे खींच कर उतारने लगा माँ एक बार फिर कुछ हिचकिचाई “ओ मेरे प्यारे बेटे, शायद हमें यह नहीं करना चाहिए, रुक जा मेरे लाल मैं तेरी माँ हूँ, प्रेमिका या पत्नी नहीं हूँ”

मैंने उसका पेट चूमते हुए कहा “अम्मा, मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूँ, तुम मेरे लिए संसार की सबसे सुंदर औरत हो माँ और बेटे के बीच काम संबंध अनुचित है यह मैं जानता हूँ पर दो लोग अगर एक दूसरे को बहुत चाहते हों तो उनमें रति क्रीडा में क्या हर्ज है?”

तृप्त होने के बाद वह कुछ संभली और मुझे उठाकर अपने उपर लिटा लिया मेरे सीने में मुँह छूपाकर वह शरमाती हुई बोली “राज बेटे, निहाल हो गयी आज मैं, कितने दिनों के बाद पहली बार इस मस्ती से मैं झडी हूँ”

“अम्मा, तुमसे सुंदर और सेक्सी कोई नहीं है इस संसार में कितने दिनों से मेरा यह सपना था तुमसे मैथुन करने का जो आज पूरा हो रहा है” माँ मुझे चूमते हुए बोली “सच में मैं इतनी सुंदर हूँ बेटे कि अपने ही बेटे को रिझा लिया?” मैं उसके स्तन दबाता हुआ बोला “हाँ माँ, तुम इन सब अभिनेत्रियों से भी सुंदर हो”

माँ ने मेरी इस बात पर सुख से विभोर होते हुए मुझे अपने उपर खींच कर मेरे मुँह पर अपने होंठ रख दिए और मेरे मुँह में जीभ डाल कर उसे घुमाने लगी; साथ ही साथ उसने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और अपनी योनि पर उसे रगडने लगी उसकी चुनमूनियाँ बिलकुल गीली थी वह अब कामवासना से सिसक उठी और मेरी आँखों में आँखें डाल कर मुझ से मूक याचना करने लगी मैंने माँ के कानों में कहा “अम्मा, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ, अब तुझे चोदना चाहता हूँ”

अम्मा ने अपनी टाँगें पसार दीं यह उसकी मूक सहमति थी साथ ही उसने मेरा लंड हाथ में लेकर सुपाडा खुद ही अपनी चुनमूनियाँ के मुँह पर जमा दिया उसका मुँह चूसते हुए और उसकी काली मदभरी आँखों में झाँकते हुए मैंने लंड पेलना शुरू किया मेरा लंड काफ़ी मोटा और तगडा हो गया था इसलिए धीरे धीरे अंदर गया उसकी चुनमूनियाँ किसी गुलाब के फूल की पंखुड़ियों जैसी चौडी होकर मेरा लंड अंदर लेने लगी

अम्मा अब इतनी कामातूर हो गई थी कि उससे यह धीमी गति का शिश्न प्रवेश सहन नहीं हुआ और मचल कर सहसा उसने अपने नितंब उछाल कर एक धक्का दिया और मेरा लंड जड तक उसकी चुनमूनियाँ में समा गया माँ की चुनमूनियाँ बड़ी टाइट थी मुझे अचरज हुआ कि तीन बच्चों के बाद भी मेरी जननी की योनि इतनी संकरी कैसे है उसकी योनि की शक्तिशाली पेशियों ने मेरे शिश्न को घूँसे जैसा पकड़ रखा था मैंने लंड आधा बाहर निकाला और फिर पूरा अंदर पेल दिया गीली तपी उस चुनमूनियाँ में लंड ऐसा मस्त सरक रहा था जैसे उसमें मक्खन लगा हो

इसके बाद मैं पूरे ज़ोर से माँ को चोदने में लग गया मैं इतना उत्तेजित था कि जितना कभी जिंदगी में नहीं हुआ मेरे तन कर खड़े लंड में बहुत सुखद अनुभूति हो रही थी और मैं उसका मज़ा लेता हुआ अम्मा को ऐसे हचक हचक कर चोद रहा था कि हर धक्के से उसका शरीर हिल जाता माँ की चुनमूनियाँ के रस में सराबोर मेरा शिश्न बहुत आसानी से अंदर बाहर हो रहा था

हम दोनों मदहोश होकर ऐसे चोद रहे थे जैसे हमें इसी काम एक लिए बनाया गया हो माँ ने मेरी पीठ को अपनी बाँहों में कस रखा था और मेरे हर धक्के पर वह नीचे से अपने नितंब उछाल कर धक्का लगा रही थी हर बार जब मैं अपना शिश्न अम्मा की योनि में घुसाता तो वह उसके गर्भाशय के मुँह पर पहुँच जाता, उस मुलायम अंदर के मुँह का स्पर्श मुझे अपने सुपाडे पर सॉफ महसूस होता अम्मा अब ज़ोर ज़ोर से साँसें लेते हुए झडने के करीब थी जानवरों की तरह हमने पंद्रह मिनट जोरदार संभोग किया फिर एकाएक माँ का शरीर जकड गया और वह काँपने लगी

माँ के इस तीव्र स्खलन के कारण उसकी योनि मेरे लंड को अब पकड़ने छोड़ने लगी और उसी समय मैं भी कसमसा कर झड गया इतना वीर्य मेरे लंड ने उसकी चुनमूनियाँ में उगला कि वह बाहर निकल कर बहने लगा काफ़ी देर हम एक दूसरे को चूमते हुए उस स्वर्गिक आनंद को भोगते हुए वैसे ही लिपटे पड़े रहे

माँ के मीठे चुंबनो से और मेरी छाती पर दबे उसके कोमल उरोजो और उनके बीच के कड़े निपलो की चुभन से अब भी योनि में घुसा हुआ मेरा शिश्न फिर धीरे धीरे खड़ा हो गया जल्द ही हमारा संभोग फिर शुरू हो गया इस बार हमने मज़े ले लेकर बहुत देर कामक्रीडा की माँ को मैंने बहुत प्यार से हौले हौले उसके चुंबन लेते हुए करीब आधे घंटे तक चोदा हम दोनों एक साथ स्खलित हुए अम्मा की आँखों में एक पूर्ण तृप्ति के भाव थे मुझे प्यार करती हुई वह बोली “राज, तेरा बहुत बड़ा है बेटे, बिलकुल मुझे पूरा भर दिया तूने”

मैं बहुत खुश था और गर्व महसूस कर रहा था कि पहले ही मैथुन में मैंने अम्मा को वह सुख दिया जो आज तक कोई उसे नहीं दे पाया था मैं भरे स्वर में बोला “यह इसलिए माँ कि मैं तुझपर मरता हूँ और बहुत प्यार करता हूँ” माँ सिहर कर बोली “इतना आनंद मुझे कभी नहीं आया मैं तो भूल ही गई थी कि स्खलन किसे कहते हैं” मैं माँ से लिपटा रहा और हम प्यार से एक दूसरे के बदन सहलाते हुए चूमते रहे “राज, मेरे राजा, मेरे लाल, अब मैं जाती हूँ हमें सावधान रहना चाहिए, किसी को शक ना हो जाए”

उठ कर उसने अपना बदन पोंच्छा और कपड़े पहनने लगी मैंने उससे धीमे स्वर में पूछा “अम्मा, मैं तुम्हारा पेटीकोट रख लूँ? अपनी पहली रात की निशानी?” वह मुस्करा कर बोली “रख ले राजा, पर छुपा कर रखना” उसने साड़ी पहनी और मुझे एक आखरी चुंबन देकर बाहर चली गई

मैं जल्द ही सो गया, सोते समय मैंने अपनी माँ का पेटीकोट अपने तकिये पर रखा था उसमें से आ रही माँ के बदन और उसके रस की खुशबू सूँघते हुए कब मेरी आँख लग गयी, पता ही नहीं चला

अगले दिन नाश्ते पर जब सब इकट्ठा हुए तो माँ चुप थी, मुझसे बिलकुल नहीं बोली मुझे लगा कि लो, हो गई नाराज़, कल शायद मुझसे ज़्यादती हो गई जब मैं काम पर जा रहा था तो अम्मा मेरे कमरे में आई “बात करना है तुझसे” गंभीर स्वर में वह बोली

“क्या बात है अम्मा? क्या हुआ? मैंने कुछ ग़लती की?” मैंने डरते हुए पूछा “नहीं बेटे” वह बोली “पर कल रात जो हुआ, वह अब कभी नहीं होना चाहिए” मैंने कुछ कहने के लिए मुँहा खोला तो उसने मुझे चुप कर दिया

“कल की रात मेरे लिए बहुत मतवाली थी राज और हमेशा याद रहेगी पर यह मत भूलो कि मैं शादी शुदा हूँ और तेरी माँ हूँ यह संबंध ग़लत है” मैंने तुरंत इसका विरोध किया “अम्मा, रूको” उसकी ओर बढकर उसे बाँहों में भरते हुए मैं बोला “तुम्हे मालूम है कि मैं तुम्हे कितना प्यार करता हूँ और यह भी जानता हूँ कि तुम भी मुझे इतना ही चाहती हो इस प्यार को ऐसी आसानी से नहीं समाप्त किया जा सकता”

मैंने उसका चुंबन लेने की कोशिश की तो उसने अपना सिर हिलाकर नहीं कहते हुए मेरी बाँहों से अपने आप को छुडा लिया मैंने पीछे से आवाज़ दी “तू कुछ भी कह माँ, मैं तो तुझे छोड़ने वाला नहीं हूँ और ऐसे ही प्यार करता रहूँगा” रोती हुई माँ कमरे से चली गई

इसके बाद हमारा संबंध टूट सा गया मुझे सॉफ दिखता था कि वह बहुत दुखी है फिर भी उसने मेरी बात नहीं सुनी और मुझे टालती रही मैंने भी उसके पीछे लगाना छोड़ दिया क्योंकि इससे उसे और दुख होता था

माँ अब मेरे लिए एक लड़की की तलाश करने लगी कि मेरी शादी कर दी जाए उसने सब संबंधियों से पूछताछ शुरू कर दी दिन भर अब वह बैठ कर आए हुए रिश्तों की कुंडलियाँ मुझसे मिलाया करती थी ज़बरदस्ती उसने मुझे कुछ लड़कियों से मिलवाया भी मैं बहुत दुखी था कि मेरी माँ ही मेरे उस प्यार को हमेशा के लिए खतम करने के लिए मुझपर शादी की ज़बरदस्ती कर रही है

आख़िर मैंने हार मान ली और एक लड़की पसंद कर ली वह कुछ कुछ माँ जैसी ही दिखती थी पर जब शादी की तारीख पक्की करने का समय आया तो माँ में अचानक एक परिवर्तन आया वह बात बात में झल्लाती और मुझ पर बरस पड़ती उसकी यह चिडचिडाहट बढ़ती ही गई मुझे लगा कि जैसे वह मेरी होने वाली पत्नी से बहुत जल रही है

आख़िर एक दिन अकेले में उसने मुझसे कहा “राज, बहुत दिन से पिक्चर नहीं देखी, चल इस रविवार को चलते हैं” मुझे खुशी भी हुई और अचरज भी हुआ “हाँ माँ, जैसा तुम कहो” मैंने कहा मैं इतना उत्तेजित था कि बाकी दिन काटना मेरे लिए कठिन हो गया यही सोचता रहा कि मालूम नहीं अम्मा के मन में क्या है शायद उसने सिर्फ़ मेरा दिल बहलाने को यह कहा हो

 

रविवार को माँ ने फिर ठीक वही शिफान की सेक्सी साड़ी पहनी खूब बनठन कर वह तैयार हुई थी मैं भी उसका वह मादक रूप देखता रहा गया कोई कह नहीं सकता था कि मेरे पास बैठ कर पिक्चर देखती वह मेरी माँ है पिक्चर के बाद हम उसी बगीचे में अपने प्रिय स्थान पर गये

मैंने माँ को बाँहों में खींच लिया मेरी खुशी का पारावार ना रहा जब उसने कोई विरोध नहीं किया और चुपचाप मेरे आलिंगन में समा गई मैंने उसके चुंबन पर चुंबन लेना शुरू कर दिए मेरे हाथ उसके पूरे बदन को सहला और दबा रहे थे माँ भी उत्तेजित थी और इस चूमाचाटी में पूरा सहयोग दे रही थी

आख़िर हम घर लौटे आधी रात हो जाने से सन्नाटा था माँ बोली “तू अपने कमरे में जा, मैं देख कर आती हूँ कि तेरे बापू सो गये या नहीं” मैंने अपने पूरे कपड़े निकाले और बिस्तर में लेट कर उसका इंतजार करने लगा दस मिनट बाद माँ अंदर आई और दरवाजा अंदर से बंद करके दौड कर मेरी बाँहों में आ समाई

एक दूसरे के चुंबन लेते हुए हम बिस्तर में लेट गये मैंने जल्दी अम्मा के कपड़े निकाले और उसके नग्न मोहक शरीर को प्यार करने लगा मैंने उसके अंग अंग को चूमा, एक इंच भी जगहा कहीं नहीं छोडी उसके मांसल चिकने नितंब पकडकर मैं उसके गुप्ताँग पर टूट पड़ा और मन भर कर उसमें से रसते अमृत को पिया

दो बार माँ को स्खलित करा के उसके रस का माँ भर कर पान करके आख़िर मैंने उसे नीचे लिटाया और उसपर चढ बैठा अम्मा ने खुद ही अपनी टाँगें फैला कर मेरा लोहे जैसा कड़ा शिश्न अपनी योनि के भगोष्ठो में जमा लिया मैंने बस ज़रा सा पेला और उस चिकनी कोमल चुनमूनियाँ में मेरा लंड पूरा समा गया माँ को बाँहों में भर कर अब मैं चोदने लगा

अम्मा मेरे हर वार पर आनंद से सिसकती हम एक दूसरे को पकड़ कर पलंग पर लोट पोट होते हुए मैथुन करते रहे कभी वह नीचे होती, कभी मैं इस बार हमने संयमा रख कर खूब जमकर बहुत देर कामक्रीडा की आख़िर जब मैं और वह एक साथ झडे तो उस स्खलन की मीठी तीव्रता इतनी थी कि माँ रो पडी “ओहा राज बेटे, मर गयी” वह बोली “तूने तो मुझे जीते जागते स्वर्ग पहुँचा दिया मेरे लाल”

मैंने उसे कस कर पकडते हुए पूछा “अम्मा, मेरी शादी के बारे में क्या तुमने इरादा बदल दिया है?” “हाँ बेटा” वह मेरे गालों को चूमते हुए बोली “तुझे नहीं पता, यह महीना कैसे गुज़रा मेरे लिए जैसे तेरी शादी की बात पक्की करने का दिन पास आता गया, मैं तो पागल सी हो गयी आख़िर मुझसे नहीं रहा गया, मैं इतनी जलती थी तेरी होने वाली पत्नी से मुझे अहसास हो गया कि मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ, सिर्फ़ बेटे की तरह नहीं, एक नारी की तरह जो अपने प्रेमी की दीवानी है”

मैने भी उसके बालों का चुंबन लेते हुए कहा “हाँ माँ, मैं भी तुझे अपनी माँ जैसे नहीं, एक अभिसारिका के रूप में प्यार करता हूँ, मैं तुझसे अलग नहीं रह सकता” माँ बोली “मैं जानती हूँ राज, तेरी बाँहों में नंगी होकर ही मैंने जाना कि प्यार क्या है अब मैं सॉफ तुझे कहती हूँ, मैं तेरी पत्नी बनकर जीना चाहती हूँ, बोल, मुझसे शादी करेगा?”

मैं आनंद के कारण कुछ देर बोल भी नहीं पाया फिर उसे बाँहों में भींचते हुए बोला “अम्मा, तूने तो मुझे संसार का सबसे खुश आदमी बना दिया, तू सिर्फ़ मेरी है, और किसीकी नहीं, तुम्हारा यहा मादक खूबसूरत शरीर मेरा है, मैं चाहता हूँ कि तुम नंगी होकर हमेशा मेरे आगोश में रहो और मैं तुम्हें भोगता रहूं”

“ओह मेरे बेटे, मैं भी यही चाहती हन, पर तुमसे शादी करके मैं और कहीं जा कर रहना चाहती हूँ जहाँ हमें कोई ना पहचानता हो तू बाहर दूर कहीं नौकरी ढूँढ ले या बिज़ीनेस कर ले मैं तेरी पत्नी बनकर तेरे साथ चलूंगी यहाँ हमें बहुत सावधान रहना पड़ेगा राज पूरा आनंद हम नहीं उठा पाएँगे”

माँ की बात सच थी मैं उसे बोला “हाँ अम्मा, तू सच कहती है, मैं कल से ही प्रयत्न शुरू कर देता हूँ”

हम फिर से संभोग के लिए उतावले हो गये थे माँ मेरी गोद में थी और मैंने उसके खूबसूरत निपल, जो कड़े होकर काले अंगूर जैसे हो गये थे, उन्हें मुंह में लेकर चूसने लगा अम्मा ने मुझे नीचे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे उपर चढ कर मेरा लंड अपनी चुनमूनियाँ के मुँह पर रख कर नीचे होते हुए उसे पूरा अंदर ले लिया फिर वह झुककर मुझे चूमते हुए उछल उछल कर मुझे चोदने लगी मैं भी उसके नितंब पकड़े हुए था उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी और सहसा वह मेरे मुँह में ही एक दबी चीख के साथ स्खलित हो गयी

 

अब मैं उसे पटक कर उस पर चढ बैठा और पूरे ज़ोर के साथ उसे चोद डाला झडने के बाद भी मैं अपना लंड उसकी चुनमूनियाँ में घुसेडे हुए उसपर पड़ा पड़ा उसके होंठों को चूमता रहा और उसके शरीर के साथ खेलता रहा अम्मा अब तृप्त हो गई थी पर मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा था माँ ने हँस कर लाड से कहा “तू आदमी है या सांड़?” और फिर झुककर मेरा शिश्न मुँह में लेकर चूसने लगी

पहली बार माँ के कोमल तपते मुँह को अपने लंड पर पाकर मैं ज़्यादा देर नहीं रह पाया और उसके मुँह में ही स्खलित हो गया माँ ने झडते शिश्न को मुँह से निकालने की ज़रा भी कोशिश नहीं की बल्कि पूरा वीर्य पी गयी

दूसरे ही दिन मैं एक सराफ़ के यहाँ से एक मंगल सूत्र ले आया सबसे छुपा कर रखा और साथ ही एक अच्छी रेशम की साड़ी भी ले आया मौका देखकर एक दिन हम पास के दूसरे शहर में शापिंग का बहाना बना कर गये माँ ने वही नयी साड़ी पहनी थी

वहाँ एक छोटे मंदिर में जाकर मैंने पुजारी से कहा कि हमारी शादी कर दे पुजारी को कुछ गैर नहीं लगा क्योंकि अम्मा इतनी सुंदर और जवान लग रही थी कि किसी को यह विश्वास ही नहीं होता कि वह मेरी माँ है माँ शरमा कर मेरे सामने खडी थी जब मैंने हार उसके गले में डाला फिर मैंने अपने नाम का मंगल सूत्र उसे पहना दिया एक अच्छे होटल में खाना खाकर हम घर आ गये

रात को सब सो जाने के बाद अम्मा वही साड़ी पहने मेरे कमरे में आई आज वह दुल्हन जैसी शरमा रही थी मुझसे लिपट कर बोली “राज, आज यह मेरे लिए बड़ी सुहानी रात है, ऐसा प्रेम कर बेटे कि मुझे हमेशा याद रहे आख़िर आज से मैं तेरी पत्नी भी हूँ” मैंने उसके रूप को आँखें भर कर देखते हुए कहा “अम्मा, आज से मैं तुम्हे तुम्हारे नामा से बुलाना चाहता हूँ, कमला अकेले में मैं यही कहूँगा सबके सामने माँ कहूँगा” माँ ने लज्जा से लाल हुए अपने मुखडे को दुलाकर स्वीकृति दे दी

फिर मैं माँ की आँखों में झाँकता हुआ बोला “कमला रानी, आज मैं तुम्हें इतना भोगुँगा कि जैसा एक पति को सुहागरात में करना चाहिए आज मैं तुम्हें अपने बच्चे की माँ बना कर रहूँगा तू फिकर मत कर, अगले माह तक हम दूसरी जगह चले जाएँगे”

अम्मा ने अपना सिर मेरी छाती में छुपाते हुए कहा “ओहा राज, हर पत्नी की यही चाह होती है कि वह अपने पति से गर्भवती हो आज मेरा ठीक बीच का दिन है मेरी कोख तैयार है तेरे बीज के लिए मेरे राजा”

उस रात मैंने अम्मा को मन भर कर भोगा उसके कपड़े धीरे धीरे निकाले और उसके पल पल होते नग्न शरीर को मन भर कर देखा और प्यार किया पहले घंटे भर उसके चुनमूनियाँ के रस का पान किया और फिर उस पर चढ बैठा

उस रात माँ को मैंने चार बार चोदा एक क्षण भी अपना लंड उसकी चुनमूनियाँ से बाहर नहीं निकाला सोने में हमें सुबह के तीन बज गये इतना वीर्य मैंने उसके गर्भ में छोड़ा क़ि उसका गर्भवती होना तय था

उसके बाद मैं इसी ताक में रहता कि कब घर में कोई ना हो और मैं अम्मा पर चढ जाऊ माँ भी हमेशा संभोग की उत्सुक रहती थी पहल हमेशा वही करती थी वह इतनी उत्तेजित रहती थी कि जब भी मैं उसका पेटीकोट उतारता, उसकी चुनमूनियाँ को गीला पाता जब उसने एक दिन चुदते हुए मुझे थोड़ी लजा कर यह बताया कि सिर्फ़ मेरी याद से ही उसकी योनि में से पानी टपकने लगता था, मुझे अपनी जवानी पर बड़ा गर्व महसूस हुआ

कभी कभी हम ऐसे गरम जाते कि सावधानी भी ताक पर रख देते एक दिन जब सब नीचे बैठ कर गप्पें मार रहे थे, मैंने देखा कि अम्मा उपर वाले बाथरूम में गयी मैं भी चुपचाप पीछे हो लिया और दरवाजा खोल कर अंदर चला गया माँ सिटकनी लगाना भूल गयी थी मैं जब अंदर गया तो वह पॉट पर बैठकर मूत रही थी मुझे देखकर उसकी काली आँखें आश्चर्य से फैल गईं

उसके कुछ कहने के पहले ही मैंने उसे उठाया, घुमा कर उसे झुकने को कहा और साड़ी व पेटीकोट उपर करके पीछे से उसकी चुनमूनियाँ में लंड डाल दिया “बेटे कोई आ जाएगा” वह कहती रह गयी पर मैंने उसकी एक ना सुनी और वैसे ही पीछे से उसे चोदने लगा पाँच मिनट में मैं ही झड गया पर वे इतने मीठे पाँच मिनट थे कि घंटे भर के संभोग के बराबर थे

मेरे शक्तिशाली धक्कों से उसका झुका शरीर हिल जाता और उसका लटकता मंगलसूत्र पेम्डुलम जैसा हिलने लगता झड कर मैंने उसके पेटीकोट से ही वीर्य सॉफ किया और हम बाहर आ गये माँ पेटीकोट बदलना चाहती थी पर मैंने मना कर दिया दिन भर मुझे इस विचार से बहुत उत्तेजना हुई कि माँ के पेटीकोट पर मेरा वीर्य लगा है और उसकी चुनमूनियाँ से भी मेरा वीर्य टपक रहा है

हमारा संभोग इसी तरह चलता रहा एक बार दो दिन तक हमें मैथुन का मौका नहीं मिला तो उस रात वासना से व्याकुल होकर आख़िर मैं माँ और बापू के कमरे में धीरे से गया बापू नशे में धुत सो रहे थे और माँ भी वहीं बाजू में सो रही थी

सोते समय उसकी साड़ी उसके वक्षस्थल से हट गयी थी और उसके उन्नत उरोजो का पूरा उभार दिख रहा था साँस के साथ वे उपर नीचे हो रहे थे मैं तो मानों प्यार और चाहत से पागल हो गया माँ को नींद में से उठाया और जब वह घबरा कर उठी तो उसे चुप रहने का इशारा कर के अपने कमरे में आने को कहा कर मैं वापस आ गया

दो मिनट बाद ही वह मेरे कमरे में थी मैं उसके कपड़े उतारने लगा और वह बेचारी तंग हो कर मुझे डाँटने लगी “राज, मैं जानती हूँ की मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और जब भी तुम बुलाओ, आना मेरा कर्तव्य है, पर ऐसी जोखिम मत उठा बेटे, किसी ने देख लिया तो गडबड हो जाएगा”

मैंने अपने मुँह से उसका मुँह बंद कर दिया और साड़ी उतारना छोड़ सिर्फ़ उसे उपर कर के उसके सामने बैठ कर उसकी चुनमूनियाँ चूसने लगा क्षण भर में उसका गुस्सा उतर गया और वह मेरे सिर को अपनी जांघों में जकड कर कराहते हुए अपनी योनि में घुसी मेरी जीभ का आनंद उठाने लगी इसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा कर उसे चोद डाला

मन भर कर चुदने के बाद माँ जब अपने कमरे में वापस जा रही थी तो बहुत खुश थी मुझे बोली “राज, जब भी तू चाहे, ऐसे ही बुला लिया कर मैं आ जाऊन्गि”

अगली रात को तो माँ खुले आम अपना तकिया लेकर मेरे कमरे में आ गयी मैंने पूछा तो हँसते हुए उसने बताया ” राज, तेरे बापू को मैंने आज बता दिया कि उनकी शराब की दुर्गंध की वजह से मुझे नींद नहीं आती इसलिए आज से मैं तुम्हारे कमरे में सोया करूंगी उन्हें कोई आपत्ति नहीं है इसलिए मेरे राजा, मेरे लाल, आज से मैं खुले आम तेरे पास सो सकती हू”

मैंने उसे भींच कर उसपर चुंबनो की बरसात करते ऊए कहा “सच अम्मा? आज से तो फिर हम बिलकुल पति पत्नी जैसे एक साथ सो सकेंगे” उस रात के मैथुन में कुछ और ही मधुरता थी क्योंकि माँ को उठ कर वापस जाने की ज़रूरत नहीं थी और मन भर कर आपस में भोगने के बाद हम एक दूसरे की बाँहों में ही सो गये अब सुबह उठ कर मैं माँ को चोद लेता था और फिर ही वह उठ कर नीचे जाती थी

कुछ ही दिन बाद एक रात संभोग के बाद जब माँ मेरी बाँहों में लिपटी पडी थी तब उसने शरमाते हुए मुझे बताया कि वह गर्भवती है मैं खुशी से उछल पड़ा आज माँ का रूप कुछ और ही था लाज से गुलाबी हुए चेहरे पर एक निखार सा आ गया था

 

मुझे खुशी के साथ कुछ चिंता ही हुई दूर कहीं जाकर घर बसाना अब ज़रूरी था साथ ही बापू और भाई बहन के पालन का भी इंतज़ाम करना था

शायद कामदेव की ही मुझपर कृपा हो गयी एक यह कि अचानक बापू एक केस जीत गये जो तीस साल से चल रहा था इतनी बड़ी प्रॉपर्टी आख़िर हमारे नाम हो गयी आधी बेचकर मैंने बैंक में रख दी कि सिर्फ़ ब्याज से ही घर आराम से चलता साथ ही घर की देख भाल को एक विधवा बुआ को बुला लिया इस तरफ से अब मैं निश्चिंत था

दूसरे यह कि मुझे अचानक आसाम में दूर पर एक नौकरी मिली मैंने झट से अपना और माँ का टिकट निकाला और जाने की तारीख तय कर ली माँ ने भी सभी को बता दिया कि वह नहीं सह सकती कि उसका बड़ा बेटा इतनी दूर जाकर अकेला रहे यहाँ तो बुआ थी हीं सबकी देखभाल करने के लिए इस सब बीच माँ का रूप दिन-बा-दिन निखर रहा था ख़ास कर इस भावना से उसके पेट में उसी के बेटे का बीज पल रहा है, माँ बहुत भाव विभोर थी

हम आख़िर आकर नई जगह बस गये यहाँ मैंने सभी को यही बताया कि मैं अपनी पत्नी के साथ हू हमारा संभोग तो अब ऐसा बढ़ा कि रुकता ही नहीं था सुबह उठ कर, फिर काम पर जाने से पहले, दोपहर में खाने पर घर आने के बाद, शाम को लौटकर और फिर रात को जब मौका मिले, मैं बस अम्मा से लिपटा रहता था, उस पर चढा रहता था

माँ की वासना भी शांत ही नहीं होती थी कुछ माह हमने बहुत मज़े लिए फिर आठवें माह से मैंने उसे चोदना बंद कर दिया मैं उसकी चुनमूनियाँ चूस कर उसे झडा देता था और वह भी मेरा लंड चूस देती थी घरवालों को मैंने अपना पता नहीं दिया था, बस कभी कभी फ़ोन पर बात कर लेता था

आख़िर एक दिन माँ को अस्पताल में भरती किया दूसरे ही दिन चाँद सी गुडिया को उसने जन्म दिया माँ तो खुशी से रो रही थी, अपने ही बेटे की बेटी उसने अपनी कोख से जनी थी वह बच्ची मेरी बेटी भी थी और बहन भी माँ ने उसका नाम मेरे नाम पर राज़ी रखा

इस बात को बहुत दिन बीत गये हैं अब तो हम मानों स्वर्ग में हैं माँ के प्रति मेरे प्यार और वासना में ज़रा भी कमी नही हुई है, बल्कि और बढ़ गई है एक उदाहरण यह है कि हमारी बच्ची अब एक साल की हो गयी है और अब माँ का दूध नहीं पीती पर मैं पीता हू माँ के गर्भवती होने का यह सबसे बड़ा लाभ मुझे हुआ है कि अब मैं अपनी माँ का दूध पी सकता हू

इसकी शुरूवात माँ ने राज़ी छह माह की होने के बाद ही की एक दिन जब वह मुझे लिटा कर उपर चढ कर चोद रही थी तो झुककर उसने अपना निपल मेरे मुँह में देकर मुझे दूध पिलाना शुरू कर दिया था उस मीठे अमृत को पाकर मैं बहुत खुश था पर फिर भी माँ को पूछ बैठा कि बच्ची को तो कम नहीं पड़ेगा वह बोली “नहीं मेरे लाल, वह अब धीरे धीरे यह छोड़ देगी पर जब तूने पहली बार मेरे निपल चूसे थे तो मैं यही सोच रही थी कि काश, मेरे इस जवान मस्त बेटे को फिर से पिलाने को मेरे स्तनों में दूध होता आज वह इच्छा पूरी हो गयी”

माँ ने बताया कि अब दो तीन साल भी उसके स्तनों से दूध आता रहेगा बशर्ते मैं उसे लगातार पीऊँ अंधे को चाहिए क्या, दो आँखें, मैं तो दिन में तीन चार बार अम्मा का दूध पी लेता हू ख़ास कर उसे चोदते हुए पीना तो मुझे बहुत अच्छा लगता है

समाप्त

 

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