My Jawan Didi Part 2

दीदी ने हल्का सा मेकअप किया था जिसमें वो बहुत सुंदर लग रही थी।

मैं.,,–दीदी आला समीर भैया कब से इंतजार कर रहे हैं.

दीदी,– हम्म चलो नहीं तो आने में देर हो जाएगी।

हम दोनों आगे आए तो देखा समीर भैया एक ऑडी के पास खड़े हुए तो उनसे पूछा कि तुम चले लोगे।

मैं.,,–पर रात मुझे आपने मारुति बयार की चाबी दी थी.

समीर भैया, — हम्म ये मेरे फ्लैट में चाचा रहते हैं उन्हें उधर ली है। सोना को इसके हिसाब की गाड़ी में बिठाना पड़ेगा ना।

समीर की बात सुनकर दीदी मुस्कुरा दी और मैंने भी मुस्कुरा दिया। फिर अमित भैया ने मुझे रिमोट टिप की चाभी दी और बोले कि तुम चलो मुझे पीछे बुलाओ।

मैं गाड़ी चला रहा हूं तो वो दोनों पीछे बैठ गए और फिर गाड़ी में लोकेशन सेट करके कहा अब तुम गाड़ी को मैप के हिसाब से चलते रहना।

मैंने गाड़ी को कॉलोनी से बाहर निकाला तो मुझे दीदी के हंसने की आवाज आई तो मैंने बैक मिरर से देखा दीदी और समीर भैया बिल्कुल चिपक कर बैठे और उनके बदन पूरे एक दूसरे से चिपक गए। गाड़ी के प्योर ग्लास पर ब्लैक फिल्म लगी हुई थी इसलिए बाहर से कुछ भी नहीं दिख सकता था।

समीर भैया ने दीदी की बगल में उंगली करके उनके कान में कुछ कहा तो दीदी फुसफुसाई,–रोहित देख लगा।

समीर भैया,– उसका ध्यान ड्राइविंग में h वो पीछे कैसे देखेगा।

मैने ये बात सुनी तो अपना ध्यान सामने कर दिया और बैक मिरर से तिरछी नजरों से देखने लगा।

समीर भैया अपना हाथ दीदी के वन पीस की चेन पर रखे हुए थे और दीदी उनका हाथ पकड़े हुए थे तभी समीर भैया बोले।,– रोहित तुम सोना दीदी को हंसते हुए देखना चाहते हो ना।

मैने कहा, बिल्कुल भैया।

समीर भैया, – देखो ना तुम्हारी दीदी को मैं हंसना चाहता हूँ पर ये मान ही नहीं रही।

मैं– दीदी मान जाओ ना

मुझे पता था कि मैं दीदी को किस चीज के लिए बुला रहा हूं। समीर भैया, दीदी का वन पीस खोलकर उसके स्तन पीना चाहते होंगे पर दीदी मेरी वजह से मना कर रही थी।

पहले बॉक्स पर वन पीस का फोटो था जिसे एक मॉडल ने पहन रखा था उसमें उस मॉडल के स्तन और चूत ढकी हुई थी और पीछे फोटो देखी तो उसकी पीठ पर सिर्फ दो रस्सी थी।

दूसरा बॉक्स एक नाइटी का था जिसके सामने से खुलने वाली चेन थी और पूरी नाइटी थी।

तिसरा बॉक्स में पेटी का सेट था जो सिर्फ चूत को कवर किए हुए था उसमें चार पीस थॉग थे।

छोटे बॉक्स में थोंग ब्रा थी जो सिर्फ निपल और एरिओला को कवर किये हुए थी।

मेरा लंड पूरा अकाद चुका था उन मॉडलों को देखकर। मैंने अगला डिब्बा उठाया तो हमारे बराबर लंड की फोटो बनी थी जब मैंने उसे खोला तो एक छह इंच का नकली लंड दिखाया उसके साथ एक रिमोट भी था जिसे मैंने वापस डिब्बे में डाल दिया की जब इसे दीदी इस्तेमाल करेगी तब देखूंगा।

फिर अचानक मुझे दीदी के लैपटॉप की याद आ गई तो मैंने बाकी के डिब्बे इसे ही बिना देखे वापस डाल दिए और उसे दीदी के कमरे में रख कर उनका लैपटॉप उठा लाया

उनके लैपटॉप का पासवर्ड मुझे मालूम नहीं था पर जब मैंने दीदी की जन्मतिथि डाली तो मुझे खुशी से उछलना पड़ा। क्योंकी लैपटॉप खुल चूका था।

मेने सबसे पहले उसकी ब्राउज़र हिस्ट्री निकली तो सबसे ज्यादा मुझे एक्सफोरम और अन्तर्वासना के पेज खुले हुए दिखे।

मैंने उसकी कहानियों की ऐसी देखी तो मेरा दिमाग घूम गया .अनहोन ज्यदातर सेक्स एडवेंचर और डर्टी सेक्स की कहानियां पढ़ी थी। फिर उन्हें गूगल पर देखें जो सबसे ज्यादा वीडियो है, वो बीडीएसएम और टूरचर के अलावा गैंगबेंग के वीडियो देखें। मुझे बताएं कि उसने ऐसी ही कहानी पढ़ी थी जिसमें कुंवारी लड़की किसी परिवार के सदस्य की मदद से बॉयफ्रेंड या अंकल से चुदी हो।

फिर मैंने उनकी गैलरी को चेक किया तो उनकी तीन साल पुरानी फोटो लेकर अब तक फोटो खींची थी जिनमें वो कई में नंगी भी थी। तीन साल पहले उनके बोबे अमरुद की तरह थे जो अब पूर्ण विकसित हो चुके थे।

दीदी का लैपटॉप देखकर मुझे समझ आ गया कि दीदी शादी से पहले खुल कर लाइफ एन्जॉय करना चाहती थी तो मैंने भी सोच लिया कि दीदी को पूरा सहयोग करूंगा।

मैंने लैपटॉप वापस बंद किया और उसे दीदी के रूम में रख दिया। दीदी अभी भी वेसे ही सो रही थी तो मैं भी उनके बगल में सो गया।

मेरी नींद चार बजे टूटी जब समीर भैया ने मुझे फोन किया। मैं फोन लेकर अपने कमरे में आ गया ताकि दीदी को डिस्टर्ब ना हो।

फ़ोन पर समीर भैया, — रोहित कहा हो।

मैं.,– जी भैया अपने रूम में.

समीर भैया,– और सोना

समीर भैया, सोनाक्सी दीदी को सोना ही बोलते हैं इसलिए मैंने बोला, — भैया वो सो रही हैं।

समीर भैया, — अच्छा सोने दो। मेने इसलिए फोन किया कि हम तीनो चाहे बाजे खाना-खाने प्रेमियों ने मुझे चुनौती दी मेने टेबल बुक कर दिया।

मैं.,–भैया आप दीदी को लेकर जाओ मैं क्या करूंगा वाह.

समीर भैया, – तुम्हें अच्छा लगेगा जब तुम दीदी को मुस्कुराते हुए देखोगे।

मी.,–टैब टू मी जरूर चालूंगा.

समीर भैया,–दीदी फोन नहीं उठा रही है तुम उनको पांच बजे उठा देना और बोल देना की मेने व्हाट्सएप किया है वो देख ले।

मैं,,–ठीक भैया.

मैंने फोन काटा और पढ़ने लगा एक घंटे बाद मैंने सोचा था दीदी को उठा दूंगा। पर एक पांच बजे दीदी मेरे कमरे में आई और बोली।

दीदी,–रोहित चाय पियोगे।

मैं,– हां दीदी, पी लूंगा। वो समीर भैया का फोन आया था उन्हें आपने व्हाट्सएप भेजा था आप पढ़ लेना।

दीदी किचन में चली गई और फिर मुझे कुछ देर बाद आवाज लगाई तो मेरे बाहर सोफे पर आकर बैठ गया तो दीदी ने मुझे चाय और स्नेक्स दिए तो मैंने कहा दीदी स्नैक्स आप खाओ मैंने नास्ता कर लिया था और अभी डिनर पर खा लूंगा।

दीदी स्नैक्स में साथ चाय पीने लगी तो मैंने दीदी से कहा,–दीदी आपने वो समीर भैया का व्हाट्सएप पढ़ लिया।

दीदी मन ही मन मुस्कुरायी। इनके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान थी और वो सिर्फ हम्म बोली।

मुझे। –दीदी आप का चेहरा मुस्कुराते हुए कितना अच्छा लगता है।

दीदी,–हम्म

मैं.,–दीदी अगर समीर भैया ने कोई मजाक भेजा तो मैं उन्हें बोल दूं कि वो ऐसा मजाक और भेजें.

दीदी,–उन्होनें जोक नहीं भेजा।

मैं किसलिए।

दीदी,–उन्होने खाने पर जेन के लिए ड्रेस के बारे में कहा एच।

मैं.,–ओह, तो आप समीर भैया की लाई हुई कोई ड्रेस पहनोगे या फिर वो नई ला रहे हो।

दीदी,– वो मुंबई से बहुत साड़ी ड्रेस लाएगी वहीं पहनूंगी।

मैं,–समीर भैया भी बहुत खर्चा करते हैं। कल भी इन्होनें कमरा सजाने वाले को मुझे पैसे नहीं देने दिये।

दीदी, –समीर तो रात में आया था ना।

मैं.,– वो चाहे फ्लाइट से सीधे यहीं आए थे मैंने उनको डेकोरेशन देखने को बुलाया था तो उसी समय में डेकोरेशन वाले भैया को पेमेंट दे रहा था तो उन्हें देने नहीं दिया और खुद पेमेंट किया।

दीदी, शैतान.

मैं.,–दीदी आपको डेकोरेशन पसंद नहीं आया था क्या.

दीदी, बहुत अच्छा था।

मैं.,– फिर आपने मुझे शैतान क्यों बोला.

दीदी,– धन्यवाद, अब जाकर तैयार हो जाओ। मुझे भी अभी तैयार होने में समय लगेगा।

मैं उठकर अपने कमरे में आया और नहाकर एक टीशर्ट और पेंट पहन लिया और फिर बाहर आकर सोफे पर दीदी का इंतजार करने लगा।

मेने घड़ी में देखा चाह बज गए तब समीर भैया का भी फोन आ गया। वो हम दोनो आला बुला रहे थे तो मेने उनको कहा कि दीदी तैयार हो रही है मैं उनको लेकर आ रहा हूं।

दस मिनट बाद दीदी के कमरे से निकली तो मैं उन्हें देखता रह गया उन्हें एक वन पीस पहनना था जो घुटनो से थोड़ा ऊपर था और उसके सामने चेन लगी थी जिसका वो पूरा खुल सकता था, स्लिवलेस वन पीस से दीदी का सिर्फ हाथ और घुटनो के आला का हिसा दिख रहा था तो मुझे यार मैंने सोचा कि दीदी हमें समय इतना क्यों मुस्कुरा रही थी क्योंकि मुझे दीदी की ब्रा स्टैप भी दिख रही थी और इस ड्रेस में पेंटी पहननी थी या पहनने में कुछ भी नहीं दिख सकता था।

दीदी ने हल्का सा मेकअप किया था जिसमें वो बहुत सुंदर लग रही थी।

मैं.,,–दीदी आला समीर भैया कब से इंतजार कर रहे हैं.

दीदी,– हम्म चलो नहीं तो आने में देर हो जाएगी।

हम दोनों आगे आए तो देखा समीर भैया एक ऑडी के पास खड़े हुए तो उनसे पूछा कि तुम चले लोगे।

मैं.,,–पर रात मुझे आपने मारुति बयार की चाबी दी थी.

समीर भैया, — हम्म ये मेरे फ्लैट में चाचा रहते हैं उन्हें उधर ली है। सोना को इसके हिसाब की गाड़ी में बिठाना पड़ेगा ना।

समीर की बात सुनकर दीदी मुस्कुरा दी और मैंने भी मुस्कुरा दिया। फिर अमित भैया ने मुझे रिमोट टिप की चाभी दी और बोले कि तुम चलो मुझे पीछे बुलाओ।

मैं गाड़ी चला रहा हूं तो वो दोनों पीछे बैठ गए और फिर गाड़ी में लोकेशन सेट करके कहा अब तुम गाड़ी को मैप के हिसाब से चलते रहना।

मैंने गाड़ी को कॉलोनी से बाहर निकाला तो मुझे दीदी के हंसने की आवाज आई तो मैंने बैक मिरर से देखा दीदी और समीर भैया बिल्कुल चिपक कर बैठे और उनके बदन पूरे एक दूसरे से चिपक गए। गाड़ी के प्योर ग्लास पर ब्लैक फिल्म लगी हुई थी इसलिए बाहर से कुछ भी नहीं दिख सकता था।

समीर भैया ने दीदी की बगल में उंगली करके उनके कान में कुछ कहा तो दीदी फुसफुसाई,–रोहित देख लगा।

समीर भैया,– उसका ध्यान ड्राइविंग में h वो पीछे कैसे देखेगा।

मैने ये बात सुनी तो अपना ध्यान सामने कर दिया और बैक मिरर से तिरछी नजरों से देखने लगा।

समीर भैया अपना हाथ दीदी के वन पीस की चेन पर रखे हुए थे और दीदी उनका हाथ पकड़े हुए थे तभी समीर भैया बोले।,– रोहित तुम सोना दीदी को हंसते हुए देखना चाहते हो ना।

मैने कहा, बिल्कुल भैया।

समीर भैया, – देखो ना तुम्हारी दीदी को मैं हंसना चाहता हूँ पर ये मान ही नहीं रही।

मैं– दीदी मान जाओ ना

मुझे पता था कि मैं दीदी को किस चीज के लिए बुला रहा हूं। समीर भैया, दीदी का वन पीस खोलकर उसके स्तन पीना चाहते होंगे पर दीदी मेरी वजह से मना कर रही थी।

मुझे टीवी पर वॉल्यूम बढ़ाना पड़ा क्योंकि दीदी की सिस्किया बहुत जोर से हाल में आ रही थी। लगभाग साधे ग्यारह बजे दीदी की सिस्किया बंद हुई और थोड़े देर में समीर भैया कपडे पहन कर बाहर आये।

उन्हें मुझे गले लगाया और चार बार धन्यवाद बोला, उन्हें गेट तक छोड़ के आया और गेट बंद करके, जब दीदी के कमरे में देखा तो वो नंगी ही आंखे बंद किये इसलिए रही थी उनकी चूत पूरी लाल हो चुकी थी और थोड़ी सुजान भी लग रही थी.

मैंने टीवी बंद किया और अपने कमरे में आकर एक बार फिर दीदी की पेटी में मुँह लगा कर सो गया।

अगले दिन सुबह उठा तो दीदी ने गाउन पहनना हुआ था और वो थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी तो मैंने पूछा दीदी लंगड़ा कर क्यों चल रही थी तो दीदी मुस्कुराई और फिर बोली कि मैं बाथरूम में फिसल गई थी।

मैं समझ गया कि दीदी मुझे सच नहीं बोलेगी और सच मुझे पता था कि दीदी की चूत में अभी सुजान होगी।

शाम को मैं कॉलेज से घर आया तो दीदी ने फ़िर से सलवार सूट पहन रखा था। मेरे चेहरे पर हताशा देखकर दीदी ने कहा, – रोहित अभी चार दिन मुझे पूरे कपड़े पहनने पड़ेंगे। मुझे समझ आ गया कि दीदी को महवारी आ गई।

चार दिन ऐसे ही बीत गए, मैं भी पढ़ई में लग गया और पांचवे दिन दीदी फिर से छोटी नाइटी पहन कर बुरा दी तो मैं समझ गया कि दीदी अब क्लियर हो चुकी है। दीदी मुझे नास्ता देते हुए मुस्कुरा रही थी। तो मैंने भी उनकी टांग खिंचने की सोची और बोला,–दीदी समीर भाई का फोन मेरे पास नहीं आया।

दीदी,–मैंने ही मन किया था आज आयेगी रात में।

मैं.,–ओह, टैब तो आपका इंतजार रहेगा.

दीदी, चुप शैतान.

मैं नास्ता करके कॉलेज चला गया और शाम में भी कुछ खास बात नहीं हुई।

रात में खाने के समय दीदी मुस्कुरा रही थी तो मैंने पूछ लिया।

मैं.,–दीदी क्या बात है आज मुस्कुरा रही हो. समीर भैया का फ़ोन आया क्या?

दीदी,– तुम मुझे ये बताओ उस दिन तुमने समीर को टैबलेट दी थी वो क्या चीज थी।

मुझे मुस्कुरा कर,– क्यों समीर भैया ने नहीं बताया।

दीदी,– मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहती हूँ।

मैं.,–दीदी मैं आपको नहीं बता सकता आप समीर भैया से ही पूछ लेना.

दीदी,– सोच ले अगर नहीं बताएगा तो मैं भी तुम्हें वो नहीं दूंगी।

मैं,– क्या?

दीदी,–वही जिसे तू रोज गंदी करके छोड़ देता है।

मैं.,,–जब आप खोल कर नहीं बोल सकते तो मैं क्यों बोलू.

दीदी, पेन्टी

मैं.,– अब तो बताना ही पड़ेगा.

दीदी,–बोलना.

मैं,–दीदी वो वियाग्रा की गोली थी।

दीदी, ये आइडिया किसका था।

मैं.,–समीर भैया, ने मुझे कहा था.

दीदी,–कब

मैं.,,–जब हम टॉयलेट गए थे. क्यों

दीदी,– समीर हमें रात बहुत देर तक करता रहा और मुझे बताया भी नहीं कि वो टैबलेट ले लिया है।

मैं.,–मतलब आप इसे ही मुझसे पूरी बात पता कर ली.

दीदी,–बच्चू मैं तेरी दीदी हूं। अब देखो मैं समीर को कैसे सबक सिखाती हूं

दीदी ये बोलकर मुस्कुरा उठी तभी समीर भैया का फोन आ गया तो दीदी अपने रूम में चली गई मैं उनके गेट के पास कान लगाकर सुनने लगा पर कुछ सुनाई नहीं दिया क्योंकि दीदी बहुत धीरे बोल रही थी। थोड़ी देर में समीर भैया ने वीडियो कॉल किया तो भी मुस्कुरा दिया और अपने रूम में आ गया।

मैं थोड़ी देर बाद पानी पीने बाहर आया तो दीदी के कमरे से हंसने की आवाज आ रही थी। दीदी ने मुझे किचन में जाते देखा तो आवाज लगाकर बुलाया और बोली लो बात करो।

मैंने फोन लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो दीदी ने स्पीकर ऑन कर दिया।

समीर, -यार तूने सोना को क्यों बताया कि मैंने वाइग्रा खाई थी।

मैं,– मुझे दीदी ने फुसला कर पूछ लिया और मैंने सोचा आप ने बता दिया होगा।

दीदी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई तो समीर बोला,– समझ गया, सोना को मैंने नहीं बताया तो वो तुमसे उगलवा ली, चल फोन दीदी को दे यार पांच दिन से दीदी को नंगी नहीं…….

तभी दीदी ने स्पीकर बैंड कर दिया और मुझे बाहर जाने का इशारा किया तो मैं बाहर आ गया।

मैं किचन में पानी पीकर आया तो दीदी का वीडियो कॉल चालू था वो टॉपलेस होकर समीर भैया को अपने स्तन दिखा रही थी और फोन पर समीर भैया का लंड दिख रहा था। कुछ देर में वह खड़ा रहा और लंड को मुठियाने लगा तो बहुत जल्दी मुझे झड़ गया और आकार सो गया।

अगले दिन जब मैं उठा और चाय पीना चाहता था तो सोनाक्सी दीदी सिल्की नाइटी पहनती थी और उसकी अंदर ब्रा पेंटी नहीं पहनती थी क्योंकि उसकी निपल सिल्की नाइटी से पूरी क्लियर पता चल रही थी। दीदी मेरी और देखकर मुस्कुराई तो मुझे भी मुस्कुराया।

दीदी,– रोहित आज से तू मेरे कमरे में ही नहा लिया कर।

मैं,–क्यों दीदी?

दीदी,– क्योंकि उसमें वॉशिंग मशीन होगी तो कपड़े धोने के लिए मुझे सुविधा होगी।

मैं, ठीक हूँ दीदी।

दीदी,– आज से तुझे मेरे बाथरूम में तेरे लिए तेरे मतलब की चीज भी पड़ी मिल जाएगी।

दीदी ये बोलकर मुस्कुराई तो मुझे भी मुस्कुरा दिया और जल्दी से चाय खत्म करके दीदी के बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम का गेट लॉक नहीं किया था सिर्फ गेट बंद किया था। मैंने कपड़े खोलकर जब शॉवर का हैंडल देखा तो दीदी की पेंटी उस पर लटक रही थी।

दीदी की पेंटी देखते ही मेरा लंड पूरा हो गया और मैंने पेंटी उठाकर इस्तेमाल किया तो दीदी की पेंटी की पागल खुशबू ने मेरे अंदर पूरी गर्मी पेड़ा कर दी।

मेने दीदी की पेंटी को अपने लंड पर लपेटकर घस्से लगाने शुरू कर दिए और कुछ देर में सारा वीर्य निकला जो मेने दीदी की पेंटी में डालकर नहाया और पेंटी को वेसे ही टांगकर लपेटकर अपने रूम में आ गया।

दीदी ने मुझे अपने कमरे में जाते हुए देखा तो शरारत भरी मुस्कान उनके चेहरे पर दिखी।

मैं कपड़े पहन कर नास्ता करने बैठा तो दीदी भी नास्ता लेकर आ खाने बैठ गई और मुझसे बोली।

दीदी,– रोहित तुम्हें किसी चीज को इस तरह गंदा नहीं करना चाहिए।

मुझे पहले तो समझ नहीं आया, फिर जब समझ आया कि दीदी किस चीज की बात कर रही है तो मुस्कुरा कर बोला।

मुझे। –दीदी जमाना बहुत मतलबी हो गया h ना।

दीदी,–कैसे.

मैं.,– लोग रात भर एन्जॉय करके अपना सामान इधर उधर फेंक देते हैं. वो ये नहीं सोचते कि सामान को कूड़ेदान में डाल दें बल्कि अलग जगह पर डाल दें।

दीदी मेरी बात को समझ गई कि मैं कंडोम की बात कर रही हूं इसलिए उनका चेहरा लाल हो गया और वो चुप हो गई तो मैंने फिर से बोला।

मैं.,–वेसे दीदी मुझे वो समान देखकर पता चल जाता है कि मेरी दीदी को कितनी बार खुशी मिली.

दीदी, बदमाश.

मैं जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और दीदी को मुस्कुरा कर कॉलेज छोड़ दिया। दोपहर में समीर भैया का फोन आया कि दीदी को एक ट्रिमर ला कर दे देना तो मुझे याद आया कि दीदी की चूत पर झांटें दिखने लगी थी जिसे वो साफ करना चाहती थी। पर बाद में मुझे पता चला कि ये सब मुझे ओपन करने का तरीका था..

उन्होंने भी मेरे पास ऑनलाइन मंगाया हुआ ट्रिमर था जो मेरे बैग में था।

कॉलेज से मेरे घर आया तो दीदी ने खाना दिया वो खाकर मेरे अपने कमरे से ट्रिमर लेकर दीदी को दिया तो दीदी ने ट्रिमर देखकर मुझसे पूछा।

दीदी, ये क्या है?

मैं,– ट्रिमर एच दीदी, बालो को ट्रिम कर देता हूं अब आपको इसकी जरूरत पड़ेगी।

दीदी को जब मेरी बात का मतलब समझ आया तो मुस्कुरा कर ट्रिमर ले कर अपने कमरे में चली गई और थोड़ी देर बाद उसने मुझे वापस ट्रिमर लेक दिया तो मेरे पास पंखे से एक बाल को जो आधा इंच का था निकल कर देखने लगा।

दीदी ने मेरे हाथ से वो बाल पकड़कर फेंक दिया। उनके चेहरे पर मुस्कान के साथ शर्म भी दिख रही थी।

मैं ट्रिमर लेकर अपने रूम में आ गया और पढ़ने लगा।

दो दिन बाद शाम को मैं अपने रूम से बाहर आया तो दीदी ने मुझे नहीं देखा तो उन्होंने रूम में देख लिया। दीदी कुर्सी पर बैठ कर समीर भैया से बात कर रही थी उसकी पिथ गेट की तरफ थी और वो वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। मुझे समीर भैया का चेहरा दिख रहा था वो दीदी को बोल रहे थे।

समीर भैया, – सोना तुम्हें रोहित के सामने और ओपन होना पड़ेगा।

दीदी,,–इतना तो हो चुकी।

समीर भैया, – तुम समझ नहीं पा रहे हो हमारे पास तुम्हारे घर के अलावा दूसरी कोई जगह नहीं है चुदाई की

दीदी,–हम्म

समीर भैया, — इसलिए उसके सामने पूरी ओपन ही जाओ उसके सामने कभी कभी ब्रा पेंटी में आ जाओ।

दीदी,– ठीक है।

समीर भैया, अब तो वो तुम्हारे ही बाथरूम में नहाता है। इसलिए कभी-कभी मुझे भी बाहर आ जाओ।

दीदी, — मुझे थोड़ी शरम आती है।

समीर भैया,– सोना तुम्हें अपना एडवेंचर पूरी तरह से करना है तो तुम्हें रोहित को पूरा ओपन करना ही पड़ेगा।

दीदी,– मैं धीरे-धीरे हो रही हूं।

समीर भैया,–, — रोहित बहुत समझदार है देखो तुम्हारे लिए वो क्या नहीं करता उस दिन मैंने ट्रिमर का कहा तो टूरंट लेकर दे दिया।

दीदी,– हम्म, उसने मुझे झांट का बाल भी छोड़ा था जो उसने देख लिया।

समीर भैया,– यूज़ तुम अपनी पर्सनल चीज़ भी मंगवाओ।

दीदी,– वो क्या

समीर भैया,– जैसे संतरी पैड, चूत साफ करने को टिश्यू और तुम्हारी झांट बहुत जल्दी बढ़ जाती है इसलिए अगली बार झांट साफ करने की क्रीम भी उसी से मंगवाना।

दीदी,– ठीक ह.

समीर भैया,–, मैं तुम्हारे मोबाइल में कुछ पैसे भेजता हूं तुम उसके साथ जाकर थोड़ी सेक्सी ड्रेस भी खरीद लेना।

दीदी, इतनी तो पड़ी है।

समीर भैया, अब की बार रोहित की पसंद की ही बात लेकर आना।

दीदी,– ठीक ह.

समीर भैया, अब ये गाउन खोल दो और मुझे ब्रा पेंटी में अपना बदन दिखाओ।

दीदी ने अपना मोबाइल पलंग पर रखा और खादी होकर गाउन निकल दिया जब वो वापस बैठने लगी तो उसकी नजर मुझ पर पड़ी और वो जल्दी से अपना बदन चादर खींचकर ढक ली और मुस्कुराने लगी।

तभी उसने फोन उठाया तो समीर भैया की नजर मुझ पर पड़ गई तो बोले,– हेलो रोहित।

मैं,– जी समीर भैया

समीर भैया,–, यार तुम अपनी दीदी का ध्यान नहीं रखते देखो कितनी मेहनत हो गई है। जाओ उसके लिए जूस बनाकर पिलाओ।

मैं अभी बनकर लाता हूं।

मैं किचन में गया और दो ग्लास जूस बनाया और कमरे में आया तो दीदी ने अपना बदन ढक रखा था और उसकी ब्रा पेंटी सामने पड़ी थी।

मतलब वो चादर के अंदर पूरी नंगी थी।

समीर भैया ने मुझे देख लिया था तो वो बोले,– रोहित तू अपने हाथ से दीदी को जूस पिलाते हुए मुझे दिखा।

मैंने ग्लास को दीदी के मुंह से लगाया और जूस पिलाया तो समीर भैया बोले.,– बढ़िया रोहित तो अब रोज दिन में दो बार अपनी दीदी को जूस पिलाया कर.

मैं–जी भैया.

समीर भैया,– तुम्हें पता है ना दीदी रोज कितना पानी बनाती है अगर जूस नहीं पिलाया तो कमजोरी आ जाएगी।

मैं.,– जी भैया, अब मैं ध्यान रखूंगा और दीदी के साथ चाय की जगह जूस ही पीऊंगा.

उसके बाद समीर भैया ने दीदी से कहा,–सोना रोहित को वो दे दो।

दीदी ने मुझे अपनी पेंटी उठाकर पकड़ा तो मैं उसे लेकर बाहर आ गया। दीदी ने गेट बंद नहीं किया था और उसने मुझे बाहर आकर अपनी चादर हटा दी।

मेने गेट पर खड़ा रहना ठीक नहीं समझा और खिड़की के पास जाकर पर्दे की ऑट से उनको देखने लगा।

दीदी अब पूरी नंगी थी और फोन पर देखते हुए अपने बोबे मसल कर समीर भैया को दिखा रही थी।

समीर भैया, – सोना तेरे स्तन दिन बी दिन सुंदर होते जा रहे हैं।

दीदी, — कैसे.

समीर भैया,– देखो ना पहले जब तुम्हें पहली बार छोड़ा था तब अमरुद से थे अब अनार से भी बड़े लगने लगे।

दीदी,–हम्म,

समीर भैया,–,–वेसे बड़े बोबे वाली लड़कियाँ सबको सुंदर लगती है।

दीदी,– अब तुम जल्दी से मुझे झड़वाओ मुझे खाना बनाना है।

समीर भैया,–, सोना अगली बार मैं आऊंगा तो तुझे पूरे फ्लैट में हर जगह पर चोदूंगा।

दीदी,– आह्ह .. चोद लेना अब रोहित भी हमारी पूरी मदद करेगा।

समीर भैया,–तुझे रोहित के सामने ही चोदूंगा मेरी जान।

दीदी,– आहह….

मैंने देखा कि दीदी की चूत से पानी निकल कर बेडसीट पर गिर रहा है उसने फोन काट दिया और फिर वो उठाकर अपना गाउन पहन ने लगी तो मैंने भी उनकी पेंटी को रस से भर दिया।

अगले दिन में कॉलेज से घर आया तो देखा समीर भैया का संदेश आया था। अन्होने मुझे एक पता भेजा था जिसमें एक दुकान का पता था जो मॉल में था।

मैंने दुकान को मैप पर डाला और सिरच किया तो वो घर से बहुत दूर थी और बाइक से एक घंटे की सवारी दिखा रही थी।

मैंने खाना खाया तो दीदी रूम में चली गई और थोड़ी देर बाद त्यार होकर आई उसने सलवार सूट पहनना हुआ था वो बोली,– रोहित मुझे बाजार से कुछ कपड़े लेने हैं।

मैंने खाना खा चुका था इसलिए बोला,–चलो दीदी।

मेने बाइक ली और मैप के नक्शे के हिसाब से एक घंटे में मॉल पर पहुंच गए और फिर छठी मंजिल पर गए तो वहां पर पीछे की तरफ एक दुकान थी। जिस पैट बोर्ड लगा था लड़कियों के लिए नई शॉर्ट ड्रेस।

हम दुकान में पहुंचें तो वहां पर सिर्फ दो ही सेल्समैन थे एक लड़का और एक लड़की।

हमें देखते ही लड़के ने लड़की से कहा,– बोर्ड लगा दो।

लड़की ने गेट के बाहर बंद का बोर्ड लगा दिया तो लड़का बोला, – हम एक बार में एक ही ग्राहक को ड्रेस दिखाते हैं।

लड़की,– बोलिए सर किस टाइप का ड्रेस लेना है आपको अपनी गर्लफ्रेंड के लिए।

दीदी ने मुझे एक तरफ खींचा और धीरे से बोली, – रोहित हम लोग ऐसी जगह आ गए जो कपल या नवविवाहित लोग के लिए चुप चाप रहना।

मैं.,– चिंता मत करो दीदी मैं उनको कैसे बोल सकता हूं कि ये मेरी दीदी है.

लड़की ने जब ये कहा तो मैंने दीदी की तरफ देखा और मुस्कुराया तो दीदी भी मुस्कुरा कर बोली, — मुझे मॉडर्न और सेक्सी ड्रेस लेनी चाहिए जो मेरे बॉयफ्रेंड को पसंद आए।

लड़की,– जी सर आप जो डिस्प्ले में लगी थी उसे मुझसे देख लीजिये।

मुझे बड़ी सी दुकान के साथ दस बारह ड्रेस पसंद आई तो लड़की बोली,–सर अगर आप नहीं चाहते तो मैडम का नाप लेना पड़ेगा।

मैं,–हम्म ले लिजिये।

लड़की,- सर नाप इस तरह से नहीं हो पाएगा मैडम को सलवार सूट खोलना पड़ेगा तभी ठीक से नाप ले पाएंगे वरना फिटिंग सही नहीं हुई तो ड्रेस अच्छी नहीं लगेगी।

मैं,– यहां पर कोई कैमरा नहीं है तो नहीं लगेगा।

लड़का,– सर, इतना बड़ा निवेश करके हम यहां केमरा लगवाएंगे तो फिर चल जाएगा हमारा काम। हने तो फ़िर पोर्न मूवीज़ बनाने का काम करना होगा। हमारे यहां पर मोबाइल से फोटो लेने की भी अनुमति नहीं है

मैं, सोना दे दो नाप

पहली बार दीदी को जिंदगी में उनके नाम से पुकारा तो दीदी के बदन में झुरझुरी सी हुई और वो मुस्कुराने लगी।

लड़की,– मैडम अगर आप ऐसा ही टाइम लगाएंगी तो हम सुबह से शाम तक आप ही अटेंड कर लेंगी। प्लीज जल्दी करो.

दीदी ने फिर कुछ सोचा और अपना कुर्ता निकाल दिया तो दीदी ब्रा में आ गई। दीदी ने आज अपनी पुरानी ब्रा पहनी थी जिसे देखकर मुझे हेरानी हुई कि दीदी ने तो ये कब की पहननी छोड़ दी फिर आज कैसे पहनी। तभी मेरे दिमाग की घंटी बजती है, शायद दीदी को मालूम था कि हम जिस जगह जा रहे हैं वहां ऐसा ही होगा।

दीदी ने फिर सलवार भी खोल दी और वो पुरानी पेंटी में नजर आईं तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि ये समीर भैया की प्लानिंग थी कि मुझे ओपन करना है।

लड़की ने फूटा लिया और फटाफट बोलने लगी .जैसे स्तन 34 कप सी. कमर 32 .हिप्स 33 और फिर उसने जंघ और दूसरे नाप लिखने लगी तो मुझे बोला।

मैं.,– सोना मैंने कहा था ना कप साइज सी हो जाएगी.

दीदी मेरी बात पर शर्मीले और मुस्कुराने लगी तो लड़की बोली,– सर कप साइज बी से थोड़ा बड़ा एच और बी से सी ही होगा इसलिए मैडम को सी साइज की हाई ड्रेस डांगे नहीं तो फिर कुछ दिन में पूरी फिट नहीं आएगी। क्योंकी हमारी फिटिंग बिल्कुल टाइट होती है।

लड़की ने दीदी को कपड़े पहनने को कहा तो मैंने बोला कि इनमें से कोई मॉडर्न ड्रेस दे दीजिए वही पहन लेगी।

लड़की, — सर इनमें से कोई ड्रेस ऐसी नहीं है जो ब्रा पेंटी के ऊपर पहन सके।

मैं,– तब तो रहने दीजिए।

दीदी ने वापस सलवार कुर्ता पहन लिया।

लड़के ने मेरी पसंद की हुई ड्रेस को नाप के हिसाब से निकालना शुरू किया। पहली ड्रेस ऐसी थी जैसे तोलिया लपेटा जाता है। स्तन से शुरू होकर कुल्हो से थोड़ी नीचे जाकर खत्म। उसके ऊपर इलासिक था रोकने के लिए और कपडे ईएसए था जो चिपक कर रहे।

दूसरी ड्रेस भी लगभग वेसी ही थी बस हमें नीचे दोनो साइड में कट था जिसकी साइड से जोड़ी गांड की शुरुआत तक खुले दिखे वेसी थी।

तीसरी ड्रेस एक क्रॉप टॉप टिप की थी बॉब्स को कवर करके कंधे पर पहनने की फिर पेट खुला रहे और गांड पूरी कवर हो जाए।

दस की दस ड्रेस एक दम सेक्सी थी और उन्हें भी किसी के सामने पहनने से सोचना पड़े।

ड्रेस लेकर दीदी ने बिल का ऑनलाइन पेमेंट दिया और हम कैरीबैग लेकर बाहर आए तो मैंने बाहर आते ही दीदी से कहा।

मैं,–दीदी सॉरी, आज मैंने आपको पहली बार आपके नाम से बुलाया।

दीदी,–रोहित, तुम सच में बहुत बुद्धिमान हो। अगर तुम मुझे वहा दीदी बोल देते तो मुझे झपकी नहीं दे पाती।

मैं.,– आप मेरी प्यारी दीदी हैं, मैं आपको कभी भी शर्मिन्दा नहीं होने दूंगा। बस आप को खुश रखने की खातिर खुद अपनी नजरों से गिर सकता हूं।

दीदी मेरे गाल पर चुम्बन लेकर,–मेरा सोना भाई।

मैं– धन्यवाद दीदी.

दीदी,– रोहित मुझे ड्रेस को घर पे पहनूं तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा।

मैं—दीदी मुझे आप की खुशी चाहिए, वरना मैं आपको समीर भैया के साथ सोने देता क्या, आप को समीर भैया से वीडियो कॉल करने से रोकता नहीं क्या।

दीदी,– रोहित तुम्हारे मन में मेरे लिए कुछ गलत फिलिंग तो नहीं है ना।

मैं,– गलत कैसे दीदी।

दीदी,– यहीं तुम मेरे साथ सेक्स करने की सोच रहे हो।

मैं.,–दीदी आप कभी मत सोचना .मैं आप के बारे में सोच ही नहीं सकती बस आप को कपड़ो में दिखता हूं तो मुझे अच्छा लगता है.

दीदी, मेरा सोना भाई.

मैं– मेरी सोनी दीदी।

हम दोनो घर आये और दीदी अपने कमरे में जाकर जल्दी से नंगी हुई और उनमें से एक ड्रेस पहन कर बाहर आई तब तक मैं भी अपने कमरे में जाकर पेंट शर्ट खोल कर आ चुका था।

दीदी मुझे बाहर ही खादी मिली और बोली,–रोहित देखो मेरी ड्रेस कैसी है।

मैने दीदी की ड्रेस को ऊपर से नीचे तक देखा। उनकी ड्रेस एक ब्रा पेंटी जैसी थी और शुद्ध बदन पर रसिया सी थी जी उसी रंग की थी। दीदी का पूरा बदन रसियों से लिपटा था और उनके स्तन बड़े साइज की चोली और खास हॉटपेंट साइज की पेंटी थी जो पूरी चिपकी हुई थी।

मैं,–वाह दीदी, आप तो बिल्कुल अभिनेत्री की तरह लग रही हो।

दीदी, मुझे सच बताओ।

मुझे। — हां चलो समीर भैया को दिखाते हैं।

दीदी,– वो समय फोन नहीं उठा सकता।

मैं,,–क्यो.

दीदी,–उनकी कल की फ्लाइट एच इसलिए वो आज मीटिंग में बिजी रहेंगे और कल रात तक वापस आएंगे। इसलिए कल आने पर ही बात होगी।

मैं,– ओह.

उसके बाद दीदी ने खाना बनाया और हम खाना खाने लगे तो मम्मी का फोन आया और वो बोली कि पापा का शुगर लेवल बहुत बढ़ गया है इसलिए वो कल सुबह दिल्ली आ रहे हैं। जब मैंने ये बात दीदी को बताई तो दीदी का चेहरा उदास हो गया और वो रनवासी सी हो गई।

मुझे। –दीदी यार उदास मत हो मम्मी पापा कितने दिन रहेंगे। और अगर राह भी गई तो मैं हूं ना। तुम्हारी खुशी के लिए मैं सब कुछ करूंगा।

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर थोड़ी रौनक आई और वो बोली,– धन्यवाद रोहित, तुम मम्मी पापा को बोल देना कि अभी मेरी शादी की बात नहीं करनी।

मैं.,–पर दीदी शादी तो आपको एक ना एक दिन करनी ही पड़ेगी.

दीदी,– हम्म पर मैं शादी से पहले जवानी के सारे एडवेंचर करना चाहती हूं।

मैं.,–दीदी आप जीजू के साथ भी तो कर सकती हो.

दीदी,– रोहित मेरी 50 से ज्यादा सहेलियां ह जिनकी शादी हो गई। मैंने उनसे किसी से भी ये नहीं सुना कि वो ठीक से हनीमून पर भी गई है। सब को शादी के एक साल के भीतर उनके पति मां बना देते हैं और फिर वो चूल्हा चोकी में लग जाती हैं। इसलिए कृपया तुम मम्मी पापा को बोलना कि तीन साल तक किसी तरह से शादी को रोक दे।

मैं.,– ठीक है दीदी, मैं आपके साथ हूं आप तीन साल खुल कर मजा करो. मैं आपकी जितनी मदद करूंगा वो करूंगा।

दीदी,– तुम पापा को समझा लेना मम्मी को तो मुझे समझा लूंगी।

मैं.,– ठीक है. हमें अभी से पूरा रूम क्लियर करना होगा।

दीदी,– वो क्यों.

मैं.,– अगर मम्मी पापा ने आपके ये कपड़े और सामान देख लिया तो.

दीदी, ठीक है. मैं एक काम करती हूं मेरे कमरे में जो छोटा सा स्टोर है उसमें एक कार्टून में सब पच कर देती हूं। मम्मी पापा पूछेंगे तो बोल देना कि ये मकान मालिक का सामान है।

मैं,– ठीक हूँ।

उसके बाद हमने मकान को पूरा ठीक किया और मेरे कमरे का सामान भी दीदी के कमरे में छान कर लिया ताकि सुबह मम्मी पापा आए तो उन्हें आते ही आराम करने को मिल जाए।

आज मैं दीदी के कमरे में ही सोने चला गया तो दीदी ने कहा,–रोहित अब मुझे इतने कपड़ों में नींद नहीं आएगी।

मैं।–तो दीदी नाइटी पहन लो उसे तुम दिन में छुपा देना।

दीदी,–मेने तीन नाइटी बाहर राखी ह।

मैं.,– कोई नहीं रात में आकर पहन कर सो जाना और सुबह फिर सलवार कुर्ता पहन लेना.

दीदी,– धन्यवाद रोहित।

फिर दीदी बिस्टर से उठी और मुझसे बोली,– रोहित तुम उधर मुंह कर लो मैं नाइटी पहन लेती हूं।

मैं.,–दीदी आप नाइटी में कुछ नहीं पहनोगी.

दीदी,–शैतान, ब्रा पेंटी तो पहनूंगी हाय।

दीदी अब आराम से मेरे सामने ब्रा पेंटी जैसा शब्द बोल लेती थी। उनकी शर्म अब धीरे-धीरे कम हो गई थी और वो समय भी कुछ नहीं रिएक्ट करती थी जैसे कि ये सामान्य बात है।

मुझे। –दीदी जब आप ब्रा पेंटी के ऊपर ही नाइटी पहनेंगी तो फिर मुझे मुंह क्यों फेरने को बोल रही हो।

दीदी,–मेने वो जाली वाली ब्रा पेंटी पहननी है।

मैं,–तो मुंह घुमा कर पहन लो पीछे से क्या दिखेगा।

दीदी मेरी बात सुनकर मुस्कुरा उठी तो मैं भी मुस्कुराया और दीदी बोली.,–शैतान

दीदी फिर खड़ी हुई और मेरी तरफ पीठ करके अपना सलवार कुर्ता खोल दिया। मुझे उनकी पीठ पर कुछ खास नहीं लगा पर जब उनकी गांड को देखा तो उनकी गोरी गांड पूरी नंगी दिख रही थी। दीदी ने जल्दी से अपनी नाइटी पहन ली और फिर वो मुदकर मुस्कुरा दी तो मुझे भी मुस्कुरा दिया।

दीदी फिर मेरी बगल में आकर सो गई तो मैं भी सो गई।

अगले दिन मम्मी पापा आने वाले थे इसलिए दीदी जल्दी उठ गई और मुझे भी उठा दिया और वो नहाने चली गई। उन्होंने गेट बंद नहीं किया था। आधे घंटे बाद उन्हें आवाज लगाई रोहित में कपड़े लाना भूल गई प्लीज दे दो।

मैंने उनकी अलमारी से ब्रा पेंटी और टोलिया दिया तो उन्हें बाहर करके ले लिया मैंने भी देखने की कोशिश नहीं की। थोड़ी देर बाद वो बहार आई तो उन्हें थोड़ा लपेट कर रखा था और मुझे पता था कि उन्हें अलग ब्रा पेंटी पहननी पड़ी और फिर भी लंड खड़ा हो गया। दीदी अपने बाल सुखाने लगी और फिर मुझसे बोली।

दीदी,–जा नहा ले. तेरे लिए नहाने से पहले हल्का होने की चीज़ राखी अंदर। मशीन का प्रयोग करो मुझे दाल देना

वो ये बोलकर मुस्कुराई तो मुझे भी मुस्कुरा कर अंदर गया मुझे सामने ही दीदी की ब्रा पेंटी टांगी दिखी हो उनको रात को नहीं पहनना था।

मेने पेंटी को हाथ लगाया तो वो चूत के सामने से गिली थी। मैंने उसे सुंघकर देखा तो उसमें दीदी के रस की मदक खुशबू आई।

मुझे नंगा होकर उनकी पेंटी को सुनने लगा जो ताजा रस से सनी थी शायद उन्हें मुंह मारी होगी। थोड़ी देर लंड से उनकी ब्रा घिसी तो लंड से ढेर सारा पानी निकला और मैंने ब्रा का इस्तेमाल करके उसे वॉशिंग मशीन में डाल दिया।

मैं नहाकर बाहर आया तो पापा का फोन आया कि वो लोग कॉलोनी में आ गए और जल्दी से नीचे आ गए। मैं बाहर गया और उनका सामान लेकर मेरे कमरे में रख कर आराम करने को कहा।

मैं,,–पापा मैं आपको दोपहर में कॉलेज से आकर डॉक्टर को दिखा दूंगा।

पापा, ठीक है बेटा हम भी तब तक आराम कर लेते हैं। रात भर ट्रेन के इंतजार में नींद नहीं आई।

मैं नास्ता करके कॉलेज चला गया और फिर दोपहर को पापा को दिखाकर आया तो शाम हो गई।

पापा आराम करने लगे तो दीदी ने मुझे इशारे से अपने कमरे में बुलाया और कहा समीर मुझे ऊपर बुला रहा है आज उसके चाचा देर से आएंगे। प्लीज कुछ कर ना।

मैं,– कुछ सोचने दो।

दीदी, प्लीज जल्दी सोचो ना फिर खाना बनाने का टाइम हो जाएगा।

मैं.,–दीदी आप भी ना टाइम ही नहीं देती सोचने का

दीदी, चलो मैंने सोच लिया

मैं दीदी को बोला ठीक हूँ आओ. दीदी मेरे साथ आईं तो मैंने मम्मी से कहा मम्मी में और दीदी घर के लिए कुछ समान लेकर आ जाते हैं।

मम्मी,– तो तू अकेले ही ले आ.

मैं.,– मम्मी बाइक पर मैं अकेला कैसे पकड़ूंगा और फिर दीदी को मेरी महंगी हुई सब्जियां पसंद नहीं आती वो बोलती हूं कि साडी गली ले आता हूं.

मम्मी,– ठीक हो ले आ .कितनी देर लगेगी।

मैं.,– ठीक है. अभी एक घंटे में आ जायेंगे

मम्मी की बार सुनकर दीदी उछल पड़ी और बोली,–चलो जल्दी नहीं तो आने में देर हो जाएगी।

दीदी के चेहरे पर ख़ुशी देखकर मुझे अच्छा लगा और मैं मुस्कुरा उठा।

मैंने गेट खोला और फ्लैट को बाहर से लॉक कर दिया और जल्दी से समीर के फ्लैट में पहुंच गया तो समीर भैया गेट पर खड़े हुए थे।

उन्हें पहले मुझे गले लगाया और फिर सोनाक्सी दीदी को बाहों में भर लिया और उनके होठों को चूसने लगे। दीदी भी उनका साथ देने लगी तो मैंने कहा,

मैं.,,–दीदी मैं सामान ले आता हूं आप लोग आधे घंटे में निपटना.

दीदी मेरी बात पर मुस्कुराई और समीर के सीने में मुंह छुपा ली तो समीर भैया बोले।

समीर भैया,–, तुम एक काम करो फ्लैट की चाबी ले जाओ ताकि हमें डिस्टर्ब ना हो।

मैं.,– ठीक है आओ लोग अंदर जाओ मुझे गेट लॉक कर देता हूं.

डोनो अंदर गए तो मैंने उन्हें एन्जॉय कहा तो दीदी मुस्कुरा दी और समीर भैया ने थैंक्स कहा।

मैं गेट खोलकर जल्दी से कॉलोनी के गेट पर से सब्जी और एक आटे का बैग लेकर आया और उन्हें अपने फ्लैट के बाहर रख कर समीर भैया के फ्लैट में पाहुंचा फिर धीरे से गेट खोला तो मुझे गेट के पास ही दीदी का सलवार कुर्ता और ब्रा पेंटी बिखरा मिले। उनके थोड़े आगे समीर भैया का शर्ट पेंट, बनिया और चड्ढी पड़े दिखे।

समीर भैया का फ्लैट भी हमारी तरह ही बना था मुझे एक कमरे से, दीदी के कमरे की आवाज आई जो अंदर से बंद थी। तो मेरे दूसरे कमरे में घुस कर देखने लगा। मुझे दूसरे कमरे में समीर भैया की फोटो लगी दिखी तो मैं समझ गया कि समीर भैया, दीदी को उनके चाचा के रूम में चोद रहे हैं।

तभी मुझे समीर भैया का फोन दिखा जो टेबल पर पड़ा था मैं इसे ही इस्तेमाल देखने लगा और फिर गैलरी को खोलकर देखा तो मेरे होश उड़ गए। समीर भैया की फोन गैलरी में तीन चार लड़कियों की नंगी फोटो थी।

लेकिन दीदी की जो फोटो थी वो साफ सुथरी थी। फिर मैंने उनका व्हाट्सएप खोला तो मुझे और भी ताज्जुब हुआ उनके व्हाट्सएप पर अजीब अजीब नाम के ग्रुप द जिनमें हार्डकोर चुदाई, गैंगबेंग सेक्स, इंसेंट लवर, बीडीएसएम स्लेव जैसे ग्रुप द उनको से मेने जाब एक ग्रुप को खोला तो वही लड़की दिखी जो फोटो में थी।

फिर मैंने एक ग्रुप देखा जिसका सिरशाक था, एक वेश्या बनाओ तो मुझे झटका सा लगा उसमें समीर भैया ने लिखा था, — लड़की को जबरदस्त रंडी नहीं बनाया जा सकता।

फिर मैंने उसे ऊपर पढ़ा। ऊपर किसी ने लिखा था,– एक लड़की को प्रेम से पूरी तरह रंडी बनाने में काम से कम एक साल लगता है।

फिर मेरा दिमाग घूम गया कि कहीं दीदी को समीर भैया रंडी तो नहीं बना देंगे।

उसने मुझे किसी लड़की ने ऊपर लिखा था, हाउसवाइफ बनकर लड़की क्या करेगी असली मजा तो रंडी बन जाऊंगी।

इसी तरह के कई लड़कियाँ के हमसे जुड़ें थे और जब मैंने ग्रुप की डिटेल देखी तो उसमें पांच तो सदस्य थे जिनमें सिर्फ सात आदमी थे बाकी सब लड़कियाँ ही थीं। लेकिन दीदी किसी ग्रुप में नहीं थीं।

मैंने मोबाइल को वापस रखा और सोचने लगा कि अगर दीदी रंडी बन गई तो क्या होगा। फिर मुझे याद आया कि दीदी तीन साल एक ही आदमी से थोड़े ही चुदेगी और फिर मेरे कहने से रुकेगी नहीं इसलिए मैंने दीदी से ही पूछने का सोचा।

मैं अभी सोच ही रहा था कि मुझे दीदी गेट के पास से अपने कपड़े उठाते दिखे। मैंने घड़ी देखी तो 40 मिनट तक हो चुके थे। दीदी संपूर्ण नंगी थी और समीर भैया उसे पीछे भाग कर पकड़ना चाहते थे तभी दीदी की नजर मुझ पर पड़ी तो वो समीर भैया को धक्का देकर मेरे बारे में बोलकर अंदर भाग गई।

समीर भैया ने मुझे देखा तो वो भी साइड हो गए और थोड़ी देर बाद चड्ढी पहन कर मेरे पास मुस्कुराए आए तो मुझे भी मुस्कुरा दिया। अन्होन दीदी की पेंटी मुझे दी और बोले।

समीर भैया,– रोहित यार कोई जुगाड़ लगाओ इसे कैसे काम चलेगा।

मैंने पेंटी को जब रखना चाहा तो समीर भैया ने पेंटी को मेरे नाक से लगाया जिसमें से वही पागल खुशबू मेरे अंदर समा गई।

मैं.,– भैया मैं कोशिश करूंगा.

तभी दीदी भी आ गई और मेरे हाथ में अपनी पेंटी देखकर मुस्कुराती हुई बोली, — चलो रोहित।

मुझे उथकर दीदी की पेंटी को जब मैंने डाला और बाहर आया तो दीदी भी बाहर आ गई और समीर भैया ने बे किया तो हम नीचे उतरे।

फ्लैट के बाहर सामान देखकर दीदी खुश हो गई तो मेरी नजर उनके चेहरे पर आ गई। दीदी मम्मी पापा को वजह से बिना मेकअप के गई थी। इसलीये मेकप बिगडने का तो स्वल ही नहीं था पर उनके चेहरे पर सफेद सा कुछ लगा था जो शायद समीर भैया का कम था।

मैंने उन्हें इशारों से बताया तो उन्हें अपने गाल के नीचे अपनी उंगली फिराई तो उनकी उंगली पर वो कम लग गया। दीदी ने पोंछा और शर्मिंदा हो गई तो मुझसे मुस्कुरा कर नो टेंशन का इशारा किया और गेट खोलकर अंदर आए तो दीदी सब्जी लेकर किचन में चली गई और मेरे कमरे के बाथरूम में आ गई और दीदी की पेंटी निकाल कर लंड पर लपेट कर मुठ मरने लगा.

मेरे दिमाग में वही बात चल रही थी कि लड़की को एक साल लगता है रंडी बनने में नहीं समीर भैया दीदी को रंडी तो नहीं बना देंगे।

इस बात में मेरे लंड पर बहुत असर किया और मैं झड़ गया। मैंने दीदी की पेंटी में अपना कम छोड़ा और वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल किया, मुझे अंदर बाहर आया और पढ़ने लगा। फिर कुछ देर बाद दीदी ने आवाज लगाई और हमने खाना खाया।

पापा को डॉक्टर ने अभी कुछ दिन पहले ही रिजल्ट देखने के लिए रोक लिया था, क्योंकि अभी उनका जेन का प्रोग्राम नहीं था।

मुझे रात को कमरे में आकर अपनी रात में पहन ने का बरमूडा पहनना और फिर पैडने लगा तो रात में ग्यारह बजे दीदी आई और उन्हें गेट बंद करके बाथरूम में जाकर अपनी नाइट ड्रेस पहन ली। बाथरूम का गेट लॉक नहीं किया था पर पेंटी लेस होने से मेरे सामने नाइटी नहीं पहनी थी।दीदी के आते ही मैं बिस्टर पर सोने चला गया तो दीदी भी मेरे बगल में आकर सो गई।

मेरे चेहरे पर तनाव था कि ये गलत हो रहा है। जबकी दीदी के चेहरे पर मुस्कुराहट थी .उसने मुझे तनाव में देखा तो मेरा चेहरा पकड़ कर मेरी आंखों में देखकर बोली,– मेरा सोना भाई उदास क्यों एच.

मैं– दीदी को नहीं।

दीदी,– मैं तेरी बहन हूं और मुझे पता है कि मैं तनाव में हूं

मैं,,–सच में दीदी।

दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने सर के ऊपर रखवा कर बोली,–अब बोल।

मैंने अपना हाथ छुड़ा लिया और कुछ नहीं बोला तो दीदी रोने लगी। मैंने उनकी आंखों से आंसू पोंछा और बोला।

मैं.,,–प्लीज दीदी रोना नहीं.

दीदी,,– तू मेरा भाई ही नहीं मेरा दोस्त भी है। और तू मुझे अपना दर्द नहीं बताएगा तो किसे बताएगा।

मैं,– सॉरी दीदी, मुझे समीर भैया ठीक नहीं लगे।

दीदी,–क्यों.

मैं.,,–आज मैंने उनका मोबाइल देखा था.

मेरी बात सुनकर दीदी जोर जोर से हंसने लगी और पांच मिनट तक हंसती रही। मैं उनके हंसने से परेशान होकर बोला।

मुझे । –दीदी इतना हंस क्यों रही हो.

दीदी,–तूने समीर के मोबाइल में उनकी गैलरी दिल्ली।

मैं.,,–हाँ

दीदी,–और व्हाट्सएप भी देखा होगा।

मैं,– हाँ दीदी,तभी तो।

दीदी,–मैं तेरे से कितने साल बड़ी हूँ।

मैं,–चाह साले

दीदी,–तो फिर मैंने उसका मोबाइल कभी नहीं देखा होगा।

मैं– मुझे क्या पता।

दीदी,–आज से तीन साल पहले वो मेरा सीनियर था। और फिर वो नोकरी करने लग गया।

मुझे ।

दीदी,–उसने तीन साल पहले मुझसे बड़ी मुश्किल से दोस्ती की थी।

मैं.,–वो क्यों आप से तो कोई भी दूसरी कर लेता.

दीदी,–लेकिन वो मेरी सहेली नाजनीन का भाई था इसलिए दोस्ती नहीं करना चाहता था।

मैं,,–वो क्यों.

दीदी,– उसका कहना था कि वो मुझसे शादी नहीं कर सकता इसलिए उसने मना किया था।

मैं.,– पर वो आप जैसी सुंदर लड़की का फ़ायदा तो उठा ही सकता था.

दीदी,– तूने उसके मोबाइल में लड़कियों की नंगी तस्वीरें नहीं देखीं

मैने देखा था

दीदी,– मेरी,

मैं– आपकी नहीं थी एक फोटो थी वो भी मेरी भेजी हुई।

मैं दीदी को बोला ठीक हूँ आओ. दीदी मेरे साथ आईं तो मैंने मम्मी से कहा मम्मी में और दीदी घर के लिए कुछ समान लेकर आ जाते हैं।

मम्मी,– तो तू अकेले ही ले आ.

मैं.,– मम्मी बाइक पर मैं अकेला कैसे पकड़ूंगा और फिर दीदी को मेरी महंगी हुई सब्जियां पसंद नहीं आती वो बोलती हूं कि साडी गली ले आता हूं.

मम्मी,– ठीक हो ले आ .कितनी देर लगेगी।

मैं.,– ठीक है. अभी एक घंटे में आ जायेंगे

मम्मी की बार सुनकर दीदी उछल पड़ी और बोली,–चलो जल्दी नहीं तो आने में देर हो जाएगी।

दीदी के चेहरे पर ख़ुशी देखकर मुझे अच्छा लगा और मैं मुस्कुरा उठा।

मैंने गेट खोला और फ्लैट को बाहर से लॉक कर दिया और जल्दी से समीर के फ्लैट में पहुंच गया तो समीर भैया गेट पर खड़े हुए थे।

उन्हें पहले मुझे गले लगाया और फिर सोनाक्सी दीदी को बाहों में भर लिया और उनके होठों को चूसने लगे। दीदी भी उनका साथ देने लगी तो मैंने कहा,

मैं.,,–दीदी मैं सामान ले आता हूं आप लोग आधे घंटे में निपटना.

दीदी मेरी बात पर मुस्कुराई और समीर के सीने में मुंह छुपा ली तो समीर भैया बोले।

समीर भैया,–, तुम एक काम करो फ्लैट की चाबी ले जाओ ताकि हमें डिस्टर्ब ना हो।

मैं.,– ठीक है आओ लोग अंदर जाओ मुझे गेट लॉक कर देता हूं.

डोनो अंदर गए तो मैंने उन्हें एन्जॉय कहा तो दीदी मुस्कुरा दी और समीर भैया ने थैंक्स कहा।

मैं गेट खोलकर जल्दी से कॉलोनी के गेट पर से सब्जी और एक आटे का बैग लेकर आया और उन्हें अपने फ्लैट के बाहर रख कर समीर भैया के फ्लैट में पाहुंचा फिर धीरे से गेट खोला तो मुझे गेट के पास ही दीदी का सलवार कुर्ता और ब्रा पेंटी बिखरा मिले। उनके थोड़े आगे समीर भैया का शर्ट पेंट, बनिया और चड्ढी पड़े दिखे।

समीर भैया का फ्लैट भी हमारी तरह ही बना था मुझे एक कमरे से, दीदी के कमरे की आवाज आई जो अंदर से बंद थी। तो मेरे दूसरे कमरे में घुस कर देखने लगा। मुझे दूसरे कमरे में समीर भैया की फोटो लगी दिखी तो मैं समझ गया कि समीर भैया, दीदी को उनके चाचा के रूम में चोद रहे हैं।

तभी मुझे समीर भैया का फोन दिखा जो टेबल पर पड़ा था मैं इसे ही इस्तेमाल देखने लगा और फिर गैलरी को खोलकर देखा तो मेरे होश उड़ गए। समीर भैया की फोन गैलरी में तीन चार लड़कियों की नंगी फोटो थी।

लेकिन दीदी की जो फोटो थी वो साफ सुथरी थी। फिर मैंने उनका व्हाट्सएप खोला तो मुझे और भी ताज्जुब हुआ उनके व्हाट्सएप पर अजीब अजीब नाम के ग्रुप द जिनमें हार्डकोर चुदाई, गैंगबेंग सेक्स, इंसेंट लवर, बीडीएसएम स्लेव जैसे ग्रुप द उनको से मेने जाब एक ग्रुप को खोला तो वही लड़की दिखी जो फोटो में थी।

फिर मैंने एक ग्रुप देखा जिसका सिरशाक था, एक वेश्या बनाओ तो मुझे झटका सा लगा उसमें समीर भैया ने लिखा था, — लड़की को जबरदस्त रंडी नहीं बनाया जा सकता।

फिर मैंने उसे ऊपर पढ़ा। ऊपर किसी ने लिखा था,– एक लड़की को प्रेम से पूरी तरह रंडी बनाने में काम से कम एक साल लगता है।

फिर मेरा दिमाग घूम गया कि कहीं दीदी को समीर भैया रंडी तो नहीं बना देंगे।

उसने मुझे किसी लड़की ने ऊपर लिखा था, हाउसवाइफ बनकर लड़की क्या करेगी असली मजा तो रंडी बन जाऊंगी।

इसी तरह के कई लड़कियाँ के हमसे जुड़ें थे और जब मैंने ग्रुप की डिटेल देखी तो उसमें पांच तो सदस्य थे जिनमें सिर्फ सात आदमी थे बाकी सब लड़कियाँ ही थीं। लेकिन दीदी किसी ग्रुप में नहीं थीं।

मैंने मोबाइल को वापस रखा और सोचने लगा कि अगर दीदी रंडी बन गई तो क्या होगा। फिर मुझे याद आया कि दीदी तीन साल एक ही आदमी से थोड़े ही चुदेगी और फिर मेरे कहने से रुकेगी नहीं इसलिए मैंने दीदी से ही पूछने का सोचा।

मैं अभी सोच ही रहा था कि मुझे दीदी गेट के पास से अपने कपड़े उठाते दिखे। मैंने घड़ी देखी तो 40 मिनट तक हो चुके थे। दीदी संपूर्ण नंगी थी और समीर भैया उसे पीछे भाग कर पकड़ना चाहते थे तभी दीदी की नजर मुझ पर पड़ी तो वो समीर भैया को धक्का देकर मेरे बारे में बोलकर अंदर भाग गई।

समीर भैया ने मुझे देखा तो वो भी साइड हो गए और थोड़ी देर बाद चड्ढी पहन कर मेरे पास मुस्कुराए आए तो मुझे भी मुस्कुरा दिया। अन्होन दीदी की पेंटी मुझे दी और बोले।

समीर भैया,– रोहित यार कोई जुगाड़ लगाओ इसे कैसे काम चलेगा।

मैंने पेंटी को जब रखना चाहा तो समीर भैया ने पेंटी को मेरे नाक से लगाया जिसमें से वही पागल खुशबू मेरे अंदर समा गई।

मैं.,– भैया मैं कोशिश करूंगा.

तभी दीदी भी आ गई और मेरे हाथ में अपनी पेंटी देखकर मुस्कुराती हुई बोली, — चलो रोहित।

मुझे उथकर दीदी की पेंटी को जब मैंने डाला और बाहर आया तो दीदी भी बाहर आ गई और समीर भैया ने बे किया तो हम नीचे उतरे।

फ्लैट के बाहर सामान देखकर दीदी खुश हो गई तो मेरी नजर उनके चेहरे पर आ गई। दीदी मम्मी पापा को वजह से बिना मेकअप के गई थी। इसलीये मेकप बिगडने का तो स्वल ही नहीं था पर उनके चेहरे पर सफेद सा कुछ लगा था जो शायद समीर भैया का कम था।

मैंने उन्हें इशारों से बताया तो उन्हें अपने गाल के नीचे अपनी उंगली फिराई तो उनकी उंगली पर वो कम लग गया। दीदी ने पोंछा और शर्मिंदा हो गई तो मुझसे मुस्कुरा कर नो टेंशन का इशारा किया और गेट खोलकर अंदर आए तो दीदी सब्जी लेकर किचन में चली गई और मेरे कमरे के बाथरूम में आ गई और दीदी की पेंटी निकाल कर लंड पर लपेट कर मुठ मरने लगा.

मेरे दिमाग में वही बात चल रही थी कि लड़की को एक साल लगता है रंडी बनने में नहीं समीर भैया दीदी को रंडी तो नहीं बना देंगे।

इस बात में मेरे लंड पर बहुत असर किया और मैं झड़ गया। मैंने दीदी की पेंटी में अपना कम छोड़ा और वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल किया, मुझे अंदर बाहर आया और पढ़ने लगा। फिर कुछ देर बाद दीदी ने आवाज लगाई और हमने खाना खाया।

पापा को डॉक्टर ने अभी कुछ दिन पहले ही रिजल्ट देखने के लिए रोक लिया था, क्योंकि अभी उनका जेन का प्रोग्राम नहीं था।

मुझे रात को कमरे में आकर अपनी रात में पहन ने का बरमूडा पहनना और फिर पैडने लगा तो रात में ग्यारह बजे दीदी आई और उन्हें गेट बंद करके बाथरूम में जाकर अपनी नाइट ड्रेस पहन ली। बाथरूम का गेट लॉक नहीं किया था पर पेंटी लेस होने से मेरे सामने नाइटी नहीं पहनी थी।दीदी के आते ही मैं बिस्टर पर सोने चला गया तो दीदी भी मेरे बगल में आकर सो गई।

मेरे चेहरे पर तनाव था कि ये गलत हो रहा है। जबकी दीदी के चेहरे पर मुस्कुराहट थी .उसने मुझे तनाव में देखा तो मेरा चेहरा पकड़ कर मेरी आंखों में देखकर बोली,– मेरा सोना भाई उदास क्यों एच.

मैं– दीदी को नहीं।

दीदी,– मैं तेरी बहन हूं और मुझे पता है कि मैं तनाव में हूं

मैं,,–सच में दीदी।

दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने सर के ऊपर रखवा कर बोली,–अब बोल।

मैंने अपना हाथ छुड़ा लिया और कुछ नहीं बोला तो दीदी रोने लगी। मैंने उनकी आंखों से आंसू पोंछा और बोला।

मैं.,,–प्लीज दीदी रोना नहीं.

दीदी,,– तू मेरा भाई ही नहीं मेरा दोस्त भी है। और तू मुझे अपना दर्द नहीं बताएगा तो किसे बताएगा।

मैं,– सॉरी दीदी, मुझे समीर भैया ठीक नहीं लगे।

दीदी,–क्यों.

मैं.,,–आज मैंने उनका मोबाइल देखा था.

मेरी बात सुनकर दीदी जोर जोर से हंसने लगी और पांच मिनट तक हंसती रही। मैं उनके हंसने से परेशान होकर बोला।

मुझे । –दीदी इतना हंस क्यों रही हो.

दीदी,–तूने समीर के मोबाइल में उनकी गैलरी दिल्ली।

मैं.,,–हाँ

दीदी,–और व्हाट्सएप भी देखा होगा।

मैं,– हाँ दीदी,तभी तो।

दीदी,–मैं तेरे से कितने साल बड़ी हूँ।

मैं,–चाह साले

दीदी,–तो फिर मैंने उसका मोबाइल कभी नहीं देखा होगा।

मैं– मुझे क्या पता।

दीदी,–आज से तीन साल पहले वो मेरा सीनियर था। और फिर वो नोकरी करने लग गया।

मुझे ।

दीदी,–उसने तीन साल पहले मुझसे बड़ी मुश्किल से दोस्ती की थी।

मैं.,–वो क्यों आप से तो कोई भी दूसरी कर लेता.

दीदी,–लेकिन वो मेरी सहेली नाजनीन का भाई था इसलिए दोस्ती नहीं करना चाहता था।

मैं,,–वो क्यों.

दीदी,– उसका कहना था कि वो मुझसे शादी नहीं कर सकता इसलिए उसने मना किया था।

मैं.,– पर वो आप जैसी सुंदर लड़की का फ़ायदा तो उठा ही सकता था.

दीदी,– तूने उसके मोबाइल में लड़कियों की नंगी तस्वीरें नहीं देखीं

मैने देखा था

दीदी,– मेरी,

मैं– आपकी नहीं थी एक फोटो थी वो भी मेरी भेजी हुई।

दीदी, अगर वो गलत आदमी होता तो तीन साल पहले मुझे मिला था उसी दिन मेरी न्यूड फोटो ले लेता। और फिर मुझे ब्लैकमेल करने लगता है।

मैं.,– पर उसके मोबाइल में इतने ग्रुप और नंगी लड़कियों को फोटो

दीदी,– वो उसे उन लड़कियों ने नहीं भेजी होगी।

मैं.,– हां भेजी तो लड़कियों ने ही थी.

दीदी,– तुम इतना जान लो कि वो मेरी सहेली नाजनीन के मामा का बेटा है और मेरी सबसे अच्छी दोस्त है नाजनीन उसका पति भी है। मुझे नाजनीन से काफी रिक्वेस्ट है कि तब उसने दोस्ती की मुझसे और साफ बोला कि वो मुझसे शादी नहीं कर सकता। शादी तो मेरे भी पापा जहां कहेंगे वहीं करूंगी पर शादी से पहले मैं जो चाहती हूं वो समीर ही मुझे दे सकता है।

मैं– आपको क्या चाहिए?

दीदी,– जो एक पति नहीं दे सकता और ना ही बॉयफ्रेंड दे सकता वो समीर मुझे दे सकता है।

मैं.,,–क्या

दीदी,– वही अनुभव जिसके बारे में मेरी एक पत्नी कभी सोच ही नहीं सकती क्योंकि अगर वो कर ले तो लोग उसे समझेंगे।

मैं.,–मतलब समीर भैया के साथ आप सुरक्षित हैं.

दीदी, बिल्कुल, रुको मैं तुम्हें नाजनीन की बात सुनती हूं।

दीदी ने अपने फोन से नाजनीन को फोन लगाया और मुझे चुप रहने को कहा।

फ़ोन प्रति नाजनीन, — कैसा हो सोना

दीदी, मस्त, तू बता।

नाज़नीन, – तू बहुत तकदीर वाली है जो तुझे तीन साल जिंदगी जीने का मोका मिल गया।

दीदी, –हम्म.

नाज़नीन, — और सबसे बड़ी बात ये है कि तेरा भाई तुझे पूरा स्पोर्ट कर रहा है। काश मेरा भी ईएसए कोई भाई होता तो मैं भी तेरी तरह आज समीर का बच्चा नहीं खिला रही होती बल्कि ऐश कर रही होती।

दीदी,–बच्चे तो यार बाद में ही खिला लेंगे।

नाजनीन,–समीर बोल रहा था कि तुम्हारे भाई के खेल की वजह से तुम तीन साल में पूरी जिंदगी का आनंद ले लोगी। और तुम्हें ये अनुभव अच्छा पीए की नोकरी भी दिलवा देगा

दीदी,’– रोहित मेरा भाई बहुत समझदार है यार।

नाजनीन, – समीर तुम्हें जिस स्पीड से चला रहा है, उससे ही चलना। ज्यादा तेज स्पीड होगी तो ये आनंद दोबारा नहीं आएगा। बाकी तो तुम व्हाट्सएप पर पढ़ ही रही हो।

दीदी, धन्यवाद नाजनीन, शुभ रात्रि।

फ़ोन काट कर दीदी ने मुझे अपना व्हाट्सएप खोलकर दिखाया तो हमें वो सब ग्रुप हाय द जो समीर के फ़ोन किया।

मेरा सर घूम गया तो दीदी बोली,– ज्यादा सोच मत, मेरे पास दो सिम है जिसमें एक को मैं डीएक्टिवेट रखती हूं और जब मुझे टाइम होता है तो एक्टिवेट करके व्हाट्सएप पढ़ लेती हूं।

दीदी की बात सुनकर मेरे चेहरे पर हंसी आ गई तो दीदी ने मुझे अपनी सीने से लगा लिया और मेरे माथे पर किस करके बोली,– मैं जो कुछ करूंगा सब तेरे सामने आ जाएगा।

मेरे दिमाग से सारी शंकाएं ख़तम हो गई थी और मैं सो गया।

अगला दिन सामान्य गुजरा और रात में समीर भैया का फोन आया तो दीदी ने ईयर फोन कान में घुसा लिया। मुझे समीर भैया की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी और दीदी भी फुसफुसा कर बोल रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरे दीदी की आवाज मेरे कान में सुनाई पड़ी जिसे वो दो तीन बार दोहराते हैं,–रोहित बगल में सो रहा हूं।

समीर भैया शायद दीदी को ब्रा पेंटी में देखना चाहते थे इसलिए दीदी न नुकर कर रही थी

थोड़ी देर बहस के बाद दीदी बाथरूम में चली गई और गेट साटा लिया तो मुझे उठकर चुपके से गेट के पास पहूंचा और फिर मैंने देखा दीदी ने नाइटी खोल दी और ब्रा पेंटी में बात करने लगी।

दीदी ने अब हेड फोन भी हटा दिया, फोन को सबुन रखने के लिए स्टैंड पर रखा और बोली।

दीदी,– अब ठीक है

समीर भैया, – सोना अब तुम्हें रोहित से खुलना पड़ेगा वरना आगे नहीं बढ़ पाओगी।

दीदी,–समीर आज मेरी नजरों से बात हुई थी कि स्पीड कम ही रखना।

समीर भैया,–वो तो मैं भी समझता हूं पर ये अच्छा मोका है इसका फायदा उठाए ठीक रहेगा नहीं तो रोहित अपने रूम में सोने लग गया तो तुम्हें खुलने का मोका नहीं मिलेगा।

दीदी, अभी मम्मी पापा यहीं रहेंगे कुछ दिन इसलिए हो जायेंगे।

समीर, –तुमने बाथरूम का गेट बंद नहीं किया ना।

दीदी,– बाथरूम का गेट तो मुझे बंद किये पंद्रह दिन होने को आये। महवारी के समय किया था।

समीर,’- चलो अब स्तन दिखा कर कुछ बोलो मैं झड़ने के करीब हूं।

दीदी,–समीर अब हमें कब मोका मिलेगा खुल कर चुदाई करने का।

समीर,– बहुत जल्दी मिलेगा सोना, मैं और रोहित कोई ना कोई तरक्की निकाल लेंगे।

दीदी,–जल्दी निकालो समीर इससे मुझे मजा नहीं आएगा।

उसके बाद दोनों ने एक दो डेलीगे बोले और झड़ गए। दीदी ने पूरा कम अपनी पेंटी से पूछा और मेरे लिए टांग दिया तो मैं भी अपनी चड्ढी में ही झड़ गया और आकार पलंग पर लंबा हो गया।

थोड़ी देर बाद दीदी आई और मुझे देखकर मुस्कुरा दी।

मैं.,– हो गई दीदी समीर भैया से बात.

दीदी,–हम्म

उसके बाद दोनो सो गये।

हम दोनो रूम में रहने से काफी फ्रेंडली हो चुके थे और अब दीदी को मेरे सामने ब्रा पेंटी में रहने से भी शर्म नहीं आती थी क्योंकि हमारे सुबह का रुटिन पूरा चेंज हो चुका था और दीदी सुबह मुझे नहाकर ब्रा पेंटी में बाहर आती थी और मेरे समान ही ब्रा पेंटी में अपनी बॉल बनाकर हल्का फुल्का मेकअप करती हूं और फिर सलवार कुर्ता पहन कर मुझे अपनी पेंटी को वॉशिंग मशीन में डालने का बोलकर जाती हूं।

एक दिन दीदी ने मुझे कहा कि रोहित आते समय कुछ चीजें लेते आना। तो मैंने उनसे पूछा कि बताओ क्या क्या लाना है। दीदी ने मुझे कहा कि तुम कॉलेज से निकलोगे समय व्हाट्सएप कर दूंगी।

मैं कॉलेज से निकला तो दीदी ने मुझे व्हाट्सएप किया हुआ था उसने तीन चीजें लिखी थीं जिन्हें लेने के लिए प्रोविजन स्टोर पर गया और बोला,– एक सैनिटरी नैपकिन का पैकेट दे दीजिए।

सेल्समैन, — अपने आकार को मापो

मैं सोच में पड़ गया कि अब क्या बोलूं तो मैंने दीदी को साइज पूछने के लिए व्हाट्सएप किया पर दीदी ने देखा नहीं तो मैंने थोड़ा सा साइड होकर दीदी को पैड का साइज पूछा तो दीदी बोली मीडियम।

फिर मैंने दुकंदर से पैड के साथ, एक वीट क्रीम ली, एक टिश्यू का पैकर और उसके साथ दूसरी क्रीम ली हेयर रिमूव होने के बाद सॉफ्ट नेस के लिए होती है।

मैं उन्हें घर लेकर आया और दीदी को दिया तो दीदी ने अपना बैग में रख दिया।

मैं,–दीदी आपके बाल बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं।

दीदी मुस्कुरा कर बोली,–लड़कियों के ज्यादा जल्दी बड़े होते हैं।

रात को समीर भैया का वीडियो कॉल आया तो दीदी फोन उठाकर कुछ देर बात करके मुझसे बोली,– रोहित तुम उधर मुंह कर लो मेरी तरफ मत घूमना। मैं घूम गया तो दीदी ने पहले मेरी तरफ ब्रा फेंकी और फिर उनकी पेंटी मेरे मुंह पर आकार गिरी तो मैंने उन्हें वेसे ही पड़े रहने दिया और सुंघता रहा। दीदी ने काफी देर तक समीर भैया से बात की और फिर हल्के से बोलने लगी तो मुझे समझ आ गया कि दीदी समीर भैया को अपनी चूत और बोबे दिखा कर उंगली डाली हुई है। पांच सात मिनट बाद दीदी की जोर से सिस्की निकली और वो शांत हो गई।

कुछ देर बाद दीदी ने मुझे घूमने को कहा और मेरे मुँह पर पेंटी देखकर बोली।

दीदी,–नालायक मेरी पेंटी को मुंह पर क्यों रख रखा है।

मैं,–दीदी मैंने नहीं रखा आप ने फेंकी थी वेसे ही पड़ी एच।

दीदी,–तो तुमने हटाया क्यों नहीं।

मैं.,–दीदी आप डिस्टर्ब हो जाती हैं इसलिए मुझे नहीं हटाई.

दीदी मुस्कुरा कर अपनी पेंटी को मेरे मुंह से हटकर बोली, -तुझे तो इसके मुंह पर रख कर मजा आ रहा होगा।

मैं.,–दीदी चित भी मेरी पैट भी, जोश जोश में आपको खुद तो पता नहीं कि कौन सी चीज कहां फेंकती हो और फिर मेरी ही गलती निकलती हो.

दीदी, — और तुझे मेरी गलती में मज़ा आ जाता है।

मैं, — कैसी दीदी?

दीदी,–रहने दे,

उसके बाद दीदी मुस्कुरा कर वेसे ही सो गई तो मैं उनकी पेंटी बाथरूम में ले जाकर हमसे मुंह मारी और सो गई।

अगले दिन दीदी रात में जल्दी रूम में आ गई क्योंकि रोज वो ग्यारह बजे आती थी पर मैंने घड़ी देखी तो दस ही बजे।

उसने रूम लॉक करके मुझे मुस्कुरा कर देखा और फिर बैग में से वीट क्रीम और सॉफ्टनेस क्रीम निकाली और मुझे देखकर मुस्कुरा ते हुई बाथरूम में चली गई। आज भी उसने बाथरूम का गेट बंद नहीं किया था। मैं उनको चुपके से देखने गया तो उन्हें समीर भैया ने वीडियो कॉल करके फोन को स्पीकर मॉड पर करके फ्लैश पर रखा और बोली,– समीर देख लो मैं कैसी झांट और बगल साफ करती हूं।

समीर भैया, – हां सोना, आज तुम्हें सही समय पर फोन किया है और मैं भी अपनी झांट साफ कर लेता हूं।

उधर से शायद समीर भैया ने भी फोन स्टैंड पर रख दिया था।

दीदी ने फिर अपने कपड़े खोलने शुरू किये और सलवार कुर्ता खोलकर, वॉशिंग मशीन में डाल दिया और ब्रा पेंटी को सामने खड़ा कर दिया। फिर दीदी कमोड पर बेथकर पेशब की और अपनी चूत को हैंड शॉवर से धोकर टॉवल से पोंछा और वीट का डिब्बा लेकर उसमें से क्रीम निकल कर अपनी झांट पर लगाने लगी। दीदी की झांट एक इंच बड़ी हो चुकी थी।

दीदी ने पूरी झांट को क्रीम से ढक दिया और फिर अपनी एक कंख में क्रीम लगाई और उसके बाल को क्रीम लगाकर दूसरी कंख को हाथ उठाकर क्रीम लगाई फिर वो मोबाइल के सामने आकर समीर भैया को दिखाने लगी तो समीर भैया का लंड भी पूरा क्रीम लगा हुआ दिखा.

दीदी,–समीर अब कितनी देर में झांट साफ हो जाएगी

समीर भैया, बस पांच मिनट बाद साफ कर लेना।

दीदी,– प्योर बाल निकल जायेंगे।

समीर भैया,– हम्म, चूत एक दम चिकनी हो जायेगी।

दीदी,– तुम तो फिर दो तीन दिन में आ जाओगे।

समीर भैया,– हम्म, पर कल मुझे इसे चुमना है न इसलिए आज जरूरी है

दीदी,– तुमने रोहित से बात कर ली।

समीर भैया,– वो सुबह तुम्हें लेकर आ जाएगा।

दीदी,–कहा

समीर भैया,–, मुझसे चुदवाने।

दीदी,–हे…हे…सच मुझे।

समीर भैया,- सच में सोना

उसके बाद समीर भैया अपने लंड के आस पास स्टिक से बाल हटाने लगे तो दीदी ने भी स्टिक उठाई और अपनी चूत की क्रीम हटाने लगी तो उनके बाल भी साथ में हटने लगे कुछ देर में चूत पूरी साफ हो गई तो दीदी ने अपनी कंख भी साफ की और नहाने लगी फिर मुझे आवाज लगाई,–रोहित जरा टोलिया पकड़ा देना।

मैं पिछे जाकर, –लाया दीदी।

मेने टोलिया बाथरूम के पास लेकर गया तो दीदी ने गेट के पीछे से हाथ बढ़ा कर ले लिया। हाथ के साथ मुझे दीदी की हल्की सी चुची भी दिखाई दी।

मेने वापस पीछे होने के लिए कदमो की आहट की और वापस दरर में से देखने लगा तो दीदी ने अपने बदन को टोलिया से साफ किया और फिर दूसरी क्रीम पहले अपनी दोनों कनख में लगाई और फिर अपनी चूत पर लगाई तो सिसक पड़ी।

समीर भैया,- सोना लग गई क्या क्रीम

दीदी,–हाँ

समीर भैया,– तो अपनी चूत में उंगली डालकर दिखाओ ना।

दीदी ने अपना एक जोड़ा ऊपर किया और अपनी उंगली चुत में डालकर मोबाइल में देखने लगी। मोबाइल में समीर भैया अपने लंड को मुंह मारते दिखे। फिर दोनों के सिसकने की आवाज आई और धीरे-धीरे तेज होने लगी तो मुझे समझ आ गया कि दीदी अब झड़ने वाली है।

मेरा लंड भी पूरा झड़ने को बेताब था पर मुझे मालूम था कि दीदी मुझे खुद ही मोका दे देगी।

कुछ देर में दीदी जोर से चिल्लाई और अपनी पेंटी को स्टैंड से उतार कर अपनी चूत के ऊपर लगा लिया और फिर उसे चूत को पोंछ कर वापस तंग दिया तो मेरे पलंग पर आकर पसर गया और लंड को बारमूडा में एडजस्ट कर लिया।

कुछ देर में दीदी तोलिया लपेट कर बाहर आई और मुझसे बोली,–रोहित मुंह उधर घुमा ले .मुझे कपड़े पहनने हैं।

मैंने मुंह दूसरी तरफ कर लिया और सोचने लगा कि दीदी अब पूरी नंगी होकर अपने कपड़े पहनेगी। दीदी ने आलमारी खोली और कुछ देर बाद बोली।

दीदी, अब घूम सकता है।

दीदी ने एक छोटी नाइटी पहन ली थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी फिर दीदी बोली

दीदी,–जा बाथरूम में जाकर हल्का हो ले।

मैंने बाथरूम में भागा और दीदी की पेंटी को सुंघ कर बरमूडा को अलग किया और ब्रा को लंड से लपेट कर मुंह मारने लगा। कुछ ही घस्से लगते ही मेरा लंड जवाब दे दिया और ढेर सारा वीर्य दीदी की ब्रा के कप में समा गया।

मैंने कुछ देर बाद आपको नॉर्मल किया और फिर ब्रा पेंटी टांगकर बाहर आया।

मेरे बाहर आते ही दीदी का फोन बजा और दीदी ने फोन उठाया तो दीदी ने फोन स्पीकर पर डाला और बोली,–लो तुम खुद ही बात कर लो।

मैं,–नमस्ते समीर भैया,

समीर भैया, नमस्ते रोहित, कल तुम्हें दस बजे, दीदी को लेकर आदर्श कॉलोनी आना, मैं तुम्हें लोकेशन भेज दूंगा।

मैं.,,–पर मम्मी पापा को क्या बोलूंगा और मेरी कॉलेज.

समीर भैया,– यार कॉलेज का तो ईएसए एच की मेने भी कॉलेज में पढ़ाई की एच .एक दिन नहीं जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

मैं.,- पर मम्मी पापा को क्या बोलूंगा.

समीर भैया, – उन्हें बोलना कि तुम्हारे कॉलेज में माता-पिता मिट रहे हैं और वे भी पापा की तबीयत खराब हैं तो मम्मी जाएंगी नहीं क्योंकि वो इतनी पड़ी लिखी नहीं।

मैं.,–हम्म ये तो हो सकता है पर आदर्श कॉलोनी में जगह तो सुरक्षित है ना.

समीर भैया, टेंशन मत लो यार, अगर ऐसी बात होती तो मैं होटल में होता या किसी पार्क की नहीं बोलता। पर मुझे भी पता है कि सोना की इज्जत मेरी इज्जत है।

मैं,– मुझे पता है भैया, आप तीन साल से दीदी के साथ संपर्क करें।

समीर भैया,– देखो वहा एक नई बिल्डिंग बनी, जिसमें सेकेंड फ्लोर पर मेरे चाचा का फ्लैट था, जिसमें फर्नीचर का काम चल रहा था, बाकी अभी कंस्ट्रक्शन में था, इसलिए हम लोग वहां फ्लैट देखने के बहाने चैलेंज कर रहे थे, क्योंकि कल अमावस था और कल उसमें कोई था। भी नहीं मिलेगा.

मैं,– मुझे आप पर पूरा भरोसा है भैया आप दीदी को किसी भी फ़ेसने वाली जगह पर नहीं लेकर जाओगे।

समीर भैया,– तो कल फिर सुबह ग्यारह बजे से पहले वहां पहुंच जाना मैं तुम्हें वही मलिंगा।

मैं, ठीक भैया.

मैंने फोन काटा, दीदी को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी तो मैंने भी मुस्कुरा दिया

दीदी, धन्यवाद रोहित।

मैं,– किसलिये

दीदी, — ये भी बताना पड़ेगा अब

मैं.,– बता देती तो मुझे अच्छा लगता वरना आप की खुशी के लिए तो मैं हमेशा तैयार ही हूं।

दीदी मुस्कुरा कर,– कल हमारा मिलन करवाने के लिए।

इतना बोलकर दीदी थोड़ा सा सरमाई तो मुझे मुस्कुरा दिया।

फिर हम दोनो सो गये।

अगले दिन में सुबह नास्ता करके पापा से बोला,–पापा आज हमारे कॉलेज में माता-पिता की मुलाकात होगी और आपको चलना पड़ेगा।

पापा,–मेरा चलना जरूरी है क्या।

मैं.,– नहीं पापा कोई भी जा सकता है

पापा,–मुझसे इतनी गर्मी में मोटर साइकिल पर नहीं बैठा जाएगा।

दीदी सामने बेटी मंद मंद मुस्कुरा रही थी तो मुझे बोला, ठीक है मैं फिर दीदी को ले जाता हूं क्योंकि वहां पर सब अंग्रेजी में बोलेंगे तो मम्मी को कुछ समझ नहीं आएगा।

पापा,– हा ये ठीक रहेगा, दीदी को ले जाओ।

मैं.,–दीदी तैयार हो जाओ मुझे आधे घंटे में निकलना है.

दीदी, ठीक है मैं तेयर होकर आती हूं।

दीदी तैयार हो गए रूम में चली गई तो मेरे पापा मम्मी से बात करने लगा।

आधे घंटे में दीदी एक हाफ कट वाला सलवार सूट पहन के आई जो उनकी गांड तक ही पहुंच रहा था। मैंने दीदी को चलो बोला और मम्मी पापा को बाय बोलकर नीचे आया तो दीदी बोली।

दीदी,–अगर पापा तैयार हो जायेंगे तो।

मैं,–फिर प्रोग्राम कैंसिल थोड़े देर बाद पापा को बोलता की मीटिंग रद्द हो गई।

दीदी,–बहुत दिमाग लगाते हो तुम

फिर मैंने दीदी को अमित भैया की लोकेशन मोबाइल में डालने को कहा और बाइक को लोकेशन के हिसाब से चलने लगा।

लगभाग पोने ग्यारह बजे हम लोकेशन पर पहुंचें तो हमें समीर भैया की गाड़ी एक नए निर्माण भवन के सामने खड़ी दिखी।

उसके पास ही समीर भैया किसी से बात कर रहे थे। हमें देखकर हमें उस आदमी को कहा कि आ गई पार्टी।

आदमी,– आराम से दिखा दीजिए अभी तीन फ्लैट बिकने बाकी है। और इसमें नहीं पसंद आए तो मुझे कॉल कर लेना।

समीर भैया,– हां जरूर मेरे पास आपका नंबर है।

ये बोलकर वो आदमी अपनी गाड़ी लेकर निकल गया तो अमित भैया ने बिल्डिंग के बाहर का गेट खोला और मुझे बाइक अंदर लगाने को कहा। मैं बाइक अन्दर लेकर आया तो समीर भैया ने गेट अन्दर से बंद कर दिया और बोले।

समीर भैया, आओ मेरे साथ।

हम समीर भैया के पीछे-पीछे दूसरी मंजिल पर पहुंचें तो समीर भैया बोले कि यहीं फ्लैट मेरे अंकल ने खरीदा एच अभी गेट खिड़की बन रहा है

हम फ्लैट में अंदर गए तो देखा सब रूम बिना गेट के ही थे अंदर एक रूम में गद्दे बिछाए जो शायद लेबर के आराम के लिए थे और एक टेबल फैन पड़ा था जिसे अमित भैया ने चालू कर दिया तो मुझे बोला।

मैं।,,–अमित भैया मैं बाहर खड़ा हूं आप लोग मजा लीजिए।

मुझे पूर्ववत को दिखाने की खातिर बाहर आ गया और चिपककर देखने लगा। मुझे निकलते देखते ही डोनो ने एक दूसरे को खड़े खड़े ही किस करना शुरू कर दिया और किस करते-करते ही डोनो नंगे हो गए।

उनके कपड़े एक दूसरे में मिक्स हो गए थे। तभी समीर भैया नीचे बैठे और दीदी की चिकनी चूत को बाहर निकल कर चटने लगे।

समीर भैया,– सोना तुम्हारी चूत कितनी मुलायम और छोटी सी है।

दीदी,—आ…ह नाजनीन की नहीं ह क्या।

समीर भैया,– अब उसे चोदते तीन साल से ज्यादा हो गए और दो बच्चे भी निकल गए इसलिए पूरी फेल हो गई।

दीदी.,-आ…..ह और मेरी.

समीर भैया,–तुम्हारी चूत बहुत मुलायम है और तुम्हारी चूत का टेस्ट नाजनीन से ज्यादा नमकीन है।

दीदी,–आआआह……

समीर भैया ने दीदी को पांच मिनट में ही झड़ा दिया और उनकी चूत का रस पी गई।

मेरे गेट के पास से अपनी दीदी को चूत चटवाती देख रहा था और मैंने भी लोडा बाहर निकाल लिया था ताकि चड्ढी प्रीकम से ख़राब ना हो। मेरा लोडा फुल फोरम में था पर मैंने उसे हाथ नहीं लगाया था। क्योंकि मुझे अभी लंबा सेक्स देखना था और झड़ने के बाद चुदाई देखने का मजा नहीं आता।

दीदी जब झड़ गई तो समीर भैया खड़े हुए और उनको अपने घुटनों पर बैठकर लंड चूसने को कहा तो दीदी समीर भैया के कटे हुए लोडे का सुपाड़े पर जिभ फिराई और फिर उसे प्यार से चूसने लगी।

दो मिनट में समीर भैया का लौड़ा पूरा सख्त हो गया तो उन्हें दीदी को गड्डे पर गिरा दिया और उनकी टाँगों के बीच में लंड को चूत पर घिसने लगे।

दीदी,–अब डाल दो समीर अंदर

समीर,– क्या डाल दू सोना, अब तुम्हें इसे कोड वार्ड नहीं बोलना चाहिए।

दीदी,– अपना लंड डाल दो मेरी चूत में और मुझे चोदो।

समीर भैया ने दीदी की चूत में जोर का धक्का लगाया तो दीदी चिल्ला पड़ी।

दीदी,–समीर तुम्हें इसे जोर से धक्का नहीं लगाना चाहिए।

समीर भैया,– और तुम्हें इतना जोर से नहीं दिखना चाहिए बाहर रोहित उसे पता चलेगा।

दीदी,–आ..ह तो पता नहीं कि अंदर उसकी दीदी चुद रही है और वो मुझसे चुदवाने ही लगी है।

समीर भैया,– रोहित बहुत अच्छा लड़का है वो तुम्हारी ख़ुशी के लिए क्या नहीं करता।

दीदी,– हम्म, …..उसे मैंने अपना लक्ष्य बता दिया है और वो मेरे साथ रहेगा।

समीर भैया, अभी तो चुदाई का मजा लो पता नहीं आगे जाकर रोहित क्या कहेगा।

दीदी,– ऐश… चोदो मुझे समीर, जोर से चोदो।

समीर भैया पांच मिनट तक दीदी को चोदते रहे फिर उन्हें चोदने के लिए दीदी को ऊपर आकर चोदने को कहा।

समीर भैया गड्डे पर पीठ के बल लेट गये और दीदी उनके ऊपर आकर उनके लंड पर उछलने लगी और सिसकियाँ छोड़ने लगी तो समीर भैया भी उसके स्तन से खेलने लगे।

समीर भैया मुझे देख रहे थे और उन्हें पता था कि मैं उन्हें देख रहा हूं।

दीदी,–आ…आ…समीर नोच दो मेरी चूची को

समीर भैया दीदी की मुंगफी के दाने की तरह लम्बी हो चुकी निपल को मरोड़ने लगे। दीदी पांच मिनट में थक गई तो समीर भैया ने पॉकेट से कंडोम निकाला और लंड पर चढ़कर दीदी को घोड़ी बनाने को कहा।

दीदी चोपया बन गई तो समीर भैया ने दीदी की चूत पर लंड लगाया और एक शॉट लगाया तो दीदी फिर से चिल्लाई और बोली।

दीदी,—ऊओ…….समीर तुम हर बार इसे ही मेरी चूत में लंड डाल कर मेरी चीख निकाल देते हो।

समीर भैया,– मुझे तेरी चीख सुनकर ही तो आइडिया लगेगा कि तुझे दूसरे लेवल पर कब लेकर जाना है।

दीदी,–ओ…ह…ह..हा समीर मैंने व्हाट्सएप ग्रुप में पढ़ी थी ये बात, सॉरी…छोड़ो मुझे जल्दी से दूसरे लेवल पर जाना है।

समीर भैया,– आ….ह ….दूसरा नहीं तू सातवे लेवल तक आ चुका है अभी तुझे 25 लेवल पर करना है।

दीदी,–आह…ह्म्म…ह्म्म्म मैं हर लेवल का मजा लूंगी

समीर भैया अब तेजी से शॉट मारने लगे थे और उनकी स्पीड से पता चल रहा था कि वो झड़ने वाले थे।

उनकी नजर गेट पर भी थी और वो देख रहे थे कि मैं उन्हें देख रहा हूं या नहीं। दीदी आंखे बंद करके चुदने में मस्त थी इसलिए मैं बिंदास होकर आगे आ गया। तब तक दीदी ने एक बार आंखे खोल ली तो मेरी नजर समीर भैया से टकरा गई तो उन्हें मेरी आंख मारी।

मैं भी उनको एन्जॉय करने का बोलकर पीछे हो गया।

मेरा लंड भी झड़ने को तैयार था और समीर भैया ने आंख मारी तो मेरे पीछे हुआ और मेरा हाथ लंड से टकरा गया तो मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी जो काफी दूर जाकर गिरी।

अंदर डोनो झड़ चुके थे समीर भैया अपने लंड से कंडोम को उतार कर खिड़की से फेंक गए थे तो दीदी अपने पैर से टिश्यू निकाल कर चूत को साफ कर रही थीं और टिश्यू समीर को दे दिया जिसे उन्होंने वहीं फेंक दिया जहां कंडोम फेंका था।

मैंने पेंट को बंद किया और लकड़ी का बुरा लेकर वीर्य पर फेला दिया। थोड़ी देर में दीदी और समीर भैया भी कपड़े पहने दिखे। मुझे उनके कपड़े पहनने तक रुका और अंदर गया तो देखा कि वो दोनों कपड़े पहन कर एक बार फिर से किस करने में लगे थे।

मुझे देखकर दोनों अलग हुए और फिर हम सब नीचे आए तो समीर भैया ने दीदी को गाड़ी में बिठाने को कहा और मुझसे बोले

समीर भैया,– रोहित मैं दीदी को लेकर चल रहा हूँ तुम पीछे-पीछे आ जाओ। मैं उनकी गाड़ी के साथ-साथ ही घर पहुंच गया।

पार्किंग से समीर भैया थोड़ी देर बाद निकले और दीदी पहले तो मैं दीदी को लेकर फ्लैट में आ गया।

घर में घुसे तो पापा बोले, हो गई बेटा मीटिंग।

मैं,– हाँ पापा.

पापा,–वेसे किसलिए बुलाई थी मीटिंग।

मैं,,–पापा वो मेरी परफोमेंस और घर पर मेरा कितना सहयोग करता है हम उसके बारे में जानते हैं।

पापा,– के लिए.

मुझे। –दीदी ने बोल दिया कि रोहित मेरी बहुत मदद करता है और मेरे को बहुत मदद करता है।

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और उसे समझ में आ गया कि मैं उसे चोदने में कितनी मदद करता हूं।

पापा,– बेटा बहन की मदद तो करनी ही चाहिए आखिर तुम्हारी एक ही दीदी है।

मैं.,,–पापा सैप दीदी से पूछिए कि मैं उनकी कितनी मदद करता हूं उन्हें जूस बनाकर पिलाया करता हूं और उनको पढ़ने में टाइम भी देता हूं.

दीदी ने मेरी बात सुनी तो मेरी तरफ आंखे तरेरी और बोली।

दीदी,–पापा आप लोग चाय पियेंगे या खाना ही खायेंगे।

मम्मी,– हमने तो खाना खा लिया, मैंने बना दिया, तुम दोनों खा लो।

हम दोनों ने फिर खाना खाया तो मैं खाना खाकर पढ़ने बैठ गया और दीदी मम्मी से गप्पे लगाने लगी।

शाम को खाना खाकर सब सो गए क्योंकि आज समीर भैया का फोन नहीं आने वाला था।

अगले दिन सब कुछ सामान्य रहा और मैं कॉलेज गया और रात में ग्यारह बजे समीर भैया का फोन आ गया।

डोनो ने पहले तो नॉर्मल बात ही की। समीर भैया बोल रहे थे वो मुझे भी सुना दे रहा था क्योंकि दीदी ने हेड फोन नहीं लगाया था। दीदी हेड फोन तभी लगाती थी जब वीडियो कॉल करनी हो।

मैं दीदी के कान के पास ही था इसलिए उनकी बाते मुझे क्लियर सुनाई दे रही थी।

समीर भैया,– सोना इस तरह तो तुम्हें गोल करने में कोई साल निकलेगा।

दीदी,–हम्म. पर क्या करूं मम्मी पापा की वजह से गड़बड़ हो रही है।

समीर भैया,– ये तो प्रॉब्लम है अभी मैं यहां हूं तो तुम फंस गई हो और रोज-रोज बाहर भी नहीं मिल सकते।

दीदी,–अब तुम ही कोई रास्ता बताओ

समीर भैया,– तुम मम्मी पापा को नींद की गोलियाँ दे दो तो काम हो सकता है।

दीदी,– पर उनको नुक्सान कर दिया तो

समीर भैया,– सोना, नींद की गोलियों से कोई नुक्सान नहीं होता।

दीदी, ठीक है कल मंगवा कर दूंगी।

समीर भैया, अब मेरे लंड को शांत करो मुझे वीडियो कॉल करो।

दीदी ने हां कहा और ईयरफोन कान में घुसा लिया तभी दीदी मुझसे बोली,– रोहित तुम मुंह उधर करोगे या मैं बाथरूम में जाऊं।

मैं.,–क्यों दीदी, समीर भैया वीडियो कॉल करने वाले हैं क्या.

दीदी,–हम्म

मैं.,–आप मेरी आंखों पर पट्टी बंद दीजिए, फिर से वीडियो कॉल कीजिए।

दीदी,– मुझे तुम पर विश्वास हो तुम मुंह उधर कर लो।

मैंने मुंह घुमा लिया तो दीदी को मुस्कुरा कर समीर भैया को वीडियो कॉल की।

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