मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ PART 2

 

मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ   PART   2

रात हो चुकी थी….अब्बू और मेरी सौतेली अम्मी घर आ चुके थे…मैं अपनी सौतेली माँ नाज़िया से कम ही बात करता था….जब तक ज़रूरी काम ना होता, मैं उनसे बात करने से परहेज करता था…मैं अपने कमरे मे बैठा स्टडी कर रहा था…कि नजीबा मुझे खाने के लिए बुलाने आई….तो मैने उसे ये कह कर मना कर दिया कि, मुझे अभी भूख नही है….जब भूख होगी मैं खुद किचन से खाना लेकर खा लूँगा…. नजीबा वापिस चली गयी….मैं फिर से स्टडी मे लग गया…कल सनडे था….इसीलिए सोने की जल्दी नही थी….अब्बू खन्ना खा कर एक बार मेरे रूम मे आए….

अब्बू: तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है….?

मैं: जी ठीक चल रही है….

अब्बू: देखो समीर इस बार तुम्हारे बोर्ड के एग्ज़ॅम है….अगले साल तुम्हारा अड्मिशन कॉलेज मे होगा…और मे चाहता हूँ कि, तुम्हारा अड्मिशन किसी अच्छे कॉलेज मे हो….

मैं: जी अब्बू कॉसिश तो मेरी भी यही है…

अब्बू: अच्छा ये बताओ कि 12थ के बाद तुमने करने का क्या सोचा है…

मैं: अब्बू मैं सोच रहा हूँ कि, मे 12थ के बाद से गवर्नमेंट जॉब के लिए ट्राइ करना शुरू कर दूं….अगर मिली तो ठीक नही मिली तो स्टडी कंटिन्यू करूँगा..और अगर मिल गये तो, साथ मैं प्राइवेट ग्रॅजुयेशन कर लूँगा…

अब्बू: अच्छा सोच रहे…चलो ठीक है….तुम पढ़ाई करो…

ये कह कर अब्बू बाहर चले गये….अब्बू अपने रूम मे जा चुके थे…नजीबा और अपनी अम्मी के साथ किचन मे बर्तन वग़ैरह सॉफ कर रही थी…करीब आधे घंटे बाद वो दोनो भी काम ख़तम करके अपने रूम मे चली गयी..मैने अपनी बुक्स बंद की और उठ कर किचन मे चला गया….अपने लिए थाली मे खाना डाला और पानी की बॉटल और एक ग्लास लेकर अपने रूम मे आ गया….खन्ना खाने के बाद मे बेड पर लेट गया…दोपहर को भी आज सो गया था….इसलिए नींद का कोई नामो निशान नही था…मैने ऐसे ही ख्यालो मे लेटा हुआ था कि, मुझे वो दिन याद आ गये…जब अब्बू के कहने पर मैन फ़ारूक़ चाचा के घर जाना शुरू किया था…

मुझे फ़ारूक़ चाचा के घर जाते हुए कुछ दिन गुजर चुके थे….तब मे 7थ क्लास मे था….ना सेक्स की कुछ समझ थी…और ना औरत और मर्द के बीच के रिश्ते की, मेरे लिए स्कूल मेरे दोस्त पढ़ाई और क्रिकेट ही मेरी दुनिया थी…रीदा आपी और सुमेरा चाची दोनो ही मुझसे अच्छी तरह पेश आती थी….भले ही हमारी करीबी रिस्तेदारि नही थी….लेकिन मुझे उनके घर पर कभी इस बात का अहसास नही हुआ था कि, मेरे वहाँ आने से उनको किसी तरह की परेशानी पेश आ रही हो…रीदा आपी भी धीरे-2 मेरी मजूदगी से खुश होने लगी थी…अब वो बिना किसी परेशानी या शरम के ही अपने बच्चो को मेरे सामने दूध पिला दिया करती थी…

एक दिन मैं ऐसे ही रीदा आपी के रूम मे बैठा हुआ पढ़ रहा था…मैं उनके साथ ही बेड पर बैठा था..डबल बेड था…इसलिए रीदा आपी अपने दोनो बेटो के साथ बेड पर करवट के बल लेटी हुई थी….उसकी पीठ के पीछे उसके दोनो बेटे सो रहे थे….उसका फेस मेरी तरफ था…और वो अपने सर को हाथ से सहारा दिए…मेरी वर्क बुक मे देख रही थी…तभी डोर बेल सुनाई दी….हम पहली मंज़िल पर थे….जब सुमेरा चाची नीचे ग्राउंड फ्लोर पर थी…बेल की आवाज़ सुन कर रीदा आपी बेड से उतर गयी… और गली वाली साइड जाकर नीचे झाँकने लगी….वो थोड़ी देर वहाँ खड़ी रही…और फिर वापिस आ गयी….

तकरीबन 15 मिनट बाद रीदा आपी बेड से उठी….और मुझसे बोली….”समीर तुम अपना काम पूरा करो….मैं 15 मिनट मे नीचे से होकर आती हूँ…” रीदा आपी की बात सुन कर मैने हां मे सर हिला दिया…वो उठ कर नीचे चली गयी…आपी के दोनो बेटे सो रहे थे….मैं कुछ देर तो वही बैठा पढ़ता रहा..फिर मुझे पेशाब आने लगा तो, मे उठ कर बाथरूम जाने लगा तो, मैं कमरे से बाहर आया…और गली वाली साइड मे छत पर बाथरूम बना हुआ था…जब मैं बाथरूम के तरफ जाने लगा…तो छत के बीचो बीच लगे हुए जंगले के ऊपेर से गुज़रा…(वहाँ से छत खाली छोड़ी गयी थी…..उस पर लोहे की ग्रिल्स से बना हुआ जंगला लगा हुआ था…. ताकि नीचे रोशनी और ताज़ी हवा जा सके….) जब मे उसके ऊपेर से गुज़रा तो, मेरी नज़र रीदा आपी पर पड़ी…

वो उस समय सुमेरा चाची के रूम की विंडो के पास खड़ी थी…सुमेरा चाची का रूम पीछे की तरफ था…रीदा आपी झुक कर खड़ी अंदर विंडो से अंदर झाँक रही थी….मुझे बड़ा अजीब सा फील हुआ कि, रीदा आपी इस तरह क्यों अपनी अम्मी के रूम मे झाँक रही है….अंदर ऐसा क्या है…जो रीदा आपी इस तरह चोरो की तरह खड़ी अंदर देख रही है…उस समय नज़ाने क्यों मुझे ये ख्वाहिश होने लगी कि, मैं देखु कि, ऐसा क्या हो रहा है कमरे के अंदर जो रीदा आपी इस तरह चोरो के जैसे अंदर झाँक रही थी….तभी मुझे ख़याल आया कि, जब मैं सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपेर आता हूँ…वहाँ सीढ़ियों पर एक रोशनदान है…जो सुमेरा चाची के रूम का है….

 

मैं बिना कुछ सोचे समझे सीढ़ियों की तरफ गया….और जब दो तीन सीढ़ियों को उतर कर उस घुमाव पर पहुचा…यहाँ से सीढ़ियाँ मुड़ती थी…वहाँ रोशनदान था.. और फिर जैसे ही मैने अंदर झाँका तो, मुझे दुनिया का सबसे अजीब नज़ारा दिखाई दिया….क्योंकि मैं रोशनदान से देख रहा था…इसलिए मुझे नीचे बेड पर किसी आदमी की नंगी पीठ दिखाई दे रही थी…और उस आदमी के कंधे के थोड़ा सा ऊपेर सुमेरा चाची का चेहरा दिखाई दे रहा था….

सुमेरा चाची ने अपनी टाँगो को उठा कर उस सख्स की कमर पर लपेट रखा था…और वो सख्श पूरी रफ़्तार से अपनी कमर को हिलाए जा रहा था…तेरी बेहन को चोदु तेरी माँ की फुददी मे लंड ऐसी गालियाँ मैं कई लड़को को निकलते हुए सुन चुका था… लेकिन जो मेरे सामने हो रहा था…उस समय नही जानता था कि, उसे चोदना कहते है..वो सख्स और सुमेरा चाची दोनो पसीने से तरबतर थे….सुमेरा चाची ने अपनी बाजुओं को उस सख्स की पीठ पर कस रखा था…”ओह्ह्ह्ह बिल्लू आज पूरी कसर निकाल दे….बड़े दिनो बाद मौका मिला है…..” बिल्लू नाम सुनते ही मुझे पता चल चुका था कि वो सख्स और कोई नही फ़ारूक़ का छोटा भाई ही था…जिसे गाओं वाले बिल्लू के नाम से पुकारते थे…

“आह भाभी ज़ोर तो पूरा लगा रहा हूँ…लेकिन जैसे -2 तेरी उमर बढ़ रही है…साली तेरी फुददी और टाइट और गरम होती जा रही है….ओह्ह देख मेरा लंड कैसे फस- 2 के अंदर जा रहा है….” बिल्लू ने और रफतार से झटके लगाने शुरू कर दिए….अब तक कुछ कुछ समझ आ चुका था कि, अंदर क्या चल रहा था…लेकिन मैं उस वक़्त तक तो एक दम भोला पंछी था….ये बात भी समझ आ चुकी थी कि, वो दोनो जो भी कर रहे है,….दोनो को मज़ा बहुत आ रहा है….मुझे इस बात का डर था कि, कही आपी ऊपेर आने के लिए सीडयों की तरफ आती तो, उसकी नज़र सीधा मुझ पर पड़ती… मैने वहाँ खड़े रहना मुनासिब नही समझा….और वहाँ से ऊपेर आ गया….और बेड पर बैठ कर फिर से किताब को पढ़ने लगा…. 

15 मिनट बाद आपी ऊपेर आई…उसने डोर पर खड़े होते हुए मुझे देखा और फिर अपने बच्चो की तरफ देखते हुए बोली….”बच्चो मे से कोई उठा तो नही

…” मैने ना मे सर हिला दिया.

.”ठीक है मैं बाथरूम जाकर आती हूँ….” आपी फिर बाथरूम मे चली गयी….फिर वो थोड़ी देर बाद वापिस आई तो, उसके चेहरे पर अजीब सा सकून नज़र आ रहा था…वो बेड पर लेट गयी…” 

तू भी लेट जा…बहुत पढ़ाई कर ली आज….” आपी ने बेड पर लेटते हुए कहा…

.”पर मेरा मन नही कर रहा था कि, मैं वहाँ लेटू….मैं बेमन से लेट गया….आपी तो लेटते ही सो गयी…पर मेरी आँखो से नींद बहुत दूर थी….बार -2 सुमेरा चाची के रूम का नज़ारा मेरी आँखो के सामने आ जाता,…

शाम के 5 बज चुके थे….जब रीदा आपी का बेटा उठ कर रोने लगा…तो वो भी उठ कर बैठ गयी….आपी को जगा देख कर मैं भी उठ कर बैठ गया….आपी मेरी तरफ देख कर मुस्कुराइ…”सो लिया

…” मैने हां मे सर हिला दिया..और बेड से नीचे उतर कर बाहर जाने लगा…

.”समीर कहाँ जा रहे हो….?”

मैं: जी आपी बाहर जा रहा हूँ खेलने…..

रीदा: अच्छा जाते जाते अम्मी को कहना कि फीडर मे दूध डाल कर ऊपेर दे जाए….

मैं: जी कह दूँगा…

मैं वहाँ से नीचे आने लगा…जब मैं नीचे पहुचा तो, देखा कि सुमेरा चाची के रूम का डोर खुला था…मैं अंदर गया तो, वहाँ कोई ना था…मैने बाहर निकल कर किचन मे देखा तो, वहाँ भी कोई नज़र नही आया..तब मुझे बाहर गेट की तरफ जो कमरा था…उधेर से सुमेरा चाची की आवाज़ आई…मैं उस कमरे की तरफ गया… और जैसे ही मैं उस कमरे के अंदर पहुचा तो, देखा सुमेरा चाची और बिल्लू दोनो सोफे पर साथ -2 बैठे हुए थे….बिल्लू ने अपना एक बाज़ू सुमेरा चाची के पीछे डाल कर कंधे पर रखा हुआ था…और उसका दूसरा हाथ चाची के लेफ्ट कमीज़ के ऊपेर से लेफ्ट मम्मे पर था…मुझे इस तरह एक दम से अंदर देख कर दोनो हड़बड़ा गये….चाची तो ऐसे उछल कर खड़ी हो गयी…जैसे उसकी गान्ड पर किसी ने बिजली की नंगी तारों को टच करवा दिया हो….

 

चाची: अर्रे समीर पुत्तर तुम नीचे क्यों आए….कुछ चाहिए क्या…?

मैं: नही वो आपी कह रही थी कि आप को बोल दूं कि फीडरर मे दूध डाल कर उन्हे दे आए….

चाची: अच्छा मैं दे आती हूँ….तू यहाँ बैठ….

मैं: नही चाची मे खेलने जा रहा हूँ….

मैं वहाँ से बाहर निकला ही था कि, पीछे बिल्लू की आवाज़ आई….”अच्छा भाभी जान मे भी चलता हूँ….”

मैं गेट खोल कर बाहर निकल आया…और ग्राउंड की तरफ जाने लगा….तो पीछे से बिल्लू ने मुझे आवाज़ दी…मैने पीछे मूड कर देखा तो, वो मेरी तरफ ही आ रहा था….बिल्लू मेरे पास आया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोला….”कहाँ जा रहे हो भतीजे साहब….”

मैं: ग्राउंड मे जा रहा हूँ….

बिल्लू: अच्छा मुझे भी उधर ही जाना था…

वो मेरे साथ चलाने लगा….जैसे ही हम ग्राउंड के पास पहुचे तो, बिल्लू ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे रोड पर हलवाई की दुकान पर ले गया….”चल आ भतीजे तुझे समोशे खिलवाता हूँ…” 

मैं: नही मुझे भूक नही है…मैने नही खाने…

बिल्लू: चल आजा यार….एक दो खा ले….

मैं: नही सच मे चाचा जी…..मेरा खाने का मन नही है…..

बिल्लू: अच्छा भतीज आज तूने जो भी देखा यार देख उस बारे मे किसी से बात नही करना….नही तो मेरे और भाई जान के बीच झगड़ा हो जाना है…

मैं: नही करता….

बिल्लू: पक्का ना…..

मैं: हां नही करता….

बिल्लू: यार तूने मेरे दिमाग़ से बहुत बड़ी टेन्षन निकाल दी….अगर तू थोड़ा बड़ा होता.. तो तुझे भी भाभी जान की फुददी दिलवा देता…लेकिन अभी तेरी उमर बहुत कम है…

मैं बिल्लू की बात पर चुप रहा…

.”अच्छा देख अगर तू ये बात किसी को नही बताएगा तो, कल मैं तुझे सहर से नया बॅट ला दूँगा…लेकिन मुझसे वादा करो कि, ये बात तुम किसी से नही कहोगे…

मैं: मैं नही करता…लेकिन मुझे बॅट भी नही चाहिए….

बिल्लू: अब तुम मेरा इतना बड़ा राज़ छुपा रहे हो तो, मेरा भी फ़र्ज़ बनता है ना अपने राज़दार को कुछ तो तोहफा दूं….

 

मैं बिल्लू की बात सुन कर मुस्कुराने लगा….लेकिन बोला कुछ नही…मे वहाँ से स्कूल की दीवार की तरफ गया….मुझे दोपहर से ही पेशाब लगा था….जो सुमेरा चाची के रूम के ऩज़ारे के चक्कर मे करना भूल गया था….अब मुझे बहुत तेज प्रेशर लगा था..मैने जैसे ही सलवार का नाडा खोल कर अपने लंड को बाहर जो कि प्रेशर से पूरी तरह सख़्त खड़ा था….जैसे ही मैं पेशाब करने लगा….तो मैने नोटीस किया कि, बिल्लू मेरे लंड की तरफ बड़े गोर से देख रहा है…मैने पेशाब किया और फिर अपनी सलवार का नाडा बंद करके जैसे ही ग्राउंड मे जाने लगा…तो बिल्लू मेरे पास आ गया….”कि गल भतीजे अभी से इतना बड़ा हथियार कैसे कर लिया तूने…”

मैं: चाचा जी आप किस हथियार की बात कर रहे है….

बिल्लू: तेरी लंड की बात कर रहा हूँ…. अगर इस उमर मे तेरा लंड इतना बड़ा है तो 3-4 साल बाद तो और बढ़ा हो जाना है इसने…तेरी तो ऐश है…(मुझे बिल्लू से ऐसे बातें सुन कर अजीब सा लग रहा था…इससे पहले मेरे दोस्तो के बीच मे ऐसी बात नही हुई थी…लेकिन कहते है ना…. ”नेसेसिटी ईज़ दा मदर ऑफ इन्वेन्षन” ज़रूरत और ख्वाहिश ही इंसान की माँ होती है….वैसे ही हाल उस वक़्त मेरा हो चुका था…. इसलिए मैं झीजकते और शरमाते हुए भी बिल्लू से पूछने से रोक ना पाया….)

मैं: वो कैसे…

बिल्लू: यार देख तेरा लंड तेरी उमर के बच्चो के हिसाब से कही बड़ा है…..और जब कोई सेक्स की भूखी औरत ऐसे तगड़े लंड को देख ले तो, वो जल्द ही उस सख्स पर आशिक हो जाती है..और बड़े प्यार से अपनी फुददी मरवाती है….

मैं: चाचा एक बात पूछूँ….?

बिल्लू: हां पूछ भतीजे….

मैं: क्या सच मे मेरा हथियार तगड़ा है…..

बिल्लू: और नही तो क्या…मैं क्या झूट बोल रहा हूँ….मेरे जैसे आदमयों का लंड भी 5-6 इंच के बीच मे होता है…तेरा तो अभी से 6 इंच लंबा लग रहा है….कभी नापा है तूने….

मैं: नही….

बिल्लू: लेकिन है तेरा 6 इंच के करीब……अच्छा जा अब तू खेल मुझे भी ज़रूरी काम याद आ गया है….

मैं वहाँ से ग्राउंड मे चला गया….और वहाँ अपने दोस्तो के साथ क्रिकेट खेलने लगा…शाम को अब्बू के घर आने से पहले मे वहाँ से फारिघ् होकर घर वापिस आ गया…वो सारी रात मेरे दिमाग़ मे बिल्लू की कही बातें और सुमेरा चाची के रूम का नज़ारा घूमता रहा…अगले दिन सुबह तक मेरे दिमाग़ मे सनक बैठ चुकी थी…

 

 

उस रात मैं अपने गुज़रे हुए दिनो की यादो मे खोया कब सो गया पता नही चला…अगली सुबह मुझे बाहर से आवाज़ आई तो मेरी आँख खुल गयी…मैने उठ कर टाइम देखा तो सुबह के 5:30 बजे थे….रूम मे उस वक्त ज़ीरो वाट का बल्ब जल रहा था..बाहर अब्बू नजीबा से बात कर रहे थे….शायद वो और मेरी सौतेली अम्मी कही जा रहे थे….उनकी बातों से मैं अंदाज़ा नही लगा पाया कि, वो इतनी सुबह-2 कहाँ जा रहे है…मैं रज़ाई के अंदर लेटा हुआ था…फिर थोड़ी देर बाद मुझे गेट खुलने और बंद होने की आवाज़ आई….इसका मतलब कि मे और नजीबा दोनो घर मे अकेले थे…ऐसा नही था कि, पहले कभी हम घर पर अकेले नही होते थे….लेकिन पिछले कुछ दिनो के हादसों ने मेरे सोचने समझने का रवैया और बदल दिया था…

मैं बेड से नीचे उतरा और बाहर आया…बाहर बेहद ठंड थी…हल्की-2 धुन्ध छाई हुई थी…बरामदे मे एक लाइट जल रही थी….किचन और अब्बू के रूम का डोर बंद था…आगे वाले कमरो के डोर भी बंद थे…..नजीबा अपने रूम मे जा चुकी थी….मुझे पता नही उस वक़्त क्या सूझा..मे नजीबा के रूम की तरफ बढ़ने लगा….मैने नजीबा के रूम के डोर के सामने जाकर देखा तो, अंदर लाइट ऑफ थी….मैने डोर नॉक किया तो, अंदर से नजीबा की आवाज़ आई…”कॉन है…”

मैं: मे हूँ समीर…..

फिर खामोशी छा गयी….थोड़ी देर बाद डोर खुला तो, नजीबा सामने खड़ी थी…उसने येल्लो कलर का पतला सा सलवार सूट पहना हुआ था…”जी…कुछ चाहिए….” नजीबा ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा…

”वो अम्मी और अब्बू सुबह -2 कहाँ गये है….?’

नजीबा: उनके एक दोस्त के बेटे के शादी है….वही पर गये है…जहाँ जाना था….वो जगह दूर है…इसलिए सुबह-2 ही निकल गये…

मैं सिर्फ़ टी-शर्ट और पाजामा पहने खड़ा था…और बाहर मौसम बहुत सर्द था…. “मैं आपके लिए चाइ बना दूं….” नजीबा ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा… 

“नही तुम सो जाओ….मेरे ख़याल से तुम्हारी नींद अभी पूरी नही हुई होगी….वैसे भी बाहर बहुत ठंड है….” मैने इधर उधर देखते हुए कहा तो, नजीबा ने सर झुकाते हुए मुस्कुरा कर कहा…”हां ठंड तो है…आप अंदर आ जाएँ…”

मैं: नही तुम परेशान हो जाओ गी….

मैं वहाँ से अपने रूम मे आ गया…और बेड पर चढ़ कर रज़ाई के अंदर घुस गया….मेरी फिर से हल्की सी आँख लग गयी….फिर जब आँख खुली तो, किचन से आवाज़ आ रही थी…शायद नजीबा उठ चुकी थी…और चाइ बना रही थी….मैने लेटे-2 टाइम देखा तो, सुबह के 6:15 हो रहे थे…और लाइट बंद थी…सुबह-2 ही कट लग चुका था…मैं बेड से उतरा और रूम से बाहर आकर बाथरूम की तरफ जाने लगा तो देखा नजीबा चाइ बना रही थी….मेरे कदमो की आवाज़ सुन कर उसने पीछे मूड कर देखा…लेकिन मुझे जल्दी थी बाथरूम जाने की, इसीलिए मे बाथरूम मे चला गया…जब फ्रेश होकर बाहर आया तो, सीधा किचन मे चला गया…चाइ बन चुकी थी….मैने देखा कि, नजीबा के बाल खुले हुए थे…और गीले थे….शायद उसने आज सुबह-2 ही नहा लिया था…

“चाइ बन गयी….?” मैने उसके पास खड़े होते हुए पूछा….”जी….” जैसे ही नजीबा बोली तो मुझे अहसास हुआ कि वो ठंड के कारण काँप रही थी….सर्दी ज़यादा थी…इसलिए मैने कोई ख़ास गोर नही किया….नजीबा चाइ कप मे डाली और मैं वहाँ से कप उठा कर अपने रूम मे आ गया…और चाइ पीने लगा….

चाइ पीते हुए मेरे दिमाग़ मे आया कि, लाइट तो पता नही कब से कट है….तो फिर कहीं नजीबा ने सुबह-2 ठंडे पानी से तो नही नहा लिया…जैसे ही मेरे मन मे ये ख़याल आया…मेने चाइ के कप को वही रखा और नजीबा के रूम की तरफ चला गया.. जब मैने रूम के डोर को नॉक करने के लिए हाथ बढ़ाया तो, रूम का डोर खुल गया….जब मे अंदर दाखिल हुआ था..तब नजीबा रज़ाई मे लेटी हुई थी….उसके रूम के विंडोस के आगे से पर्दे हटे हुए थे….जिससे अब बाहर की हल्की रोशनी अंदर आ रही थी…उसने मेरी तरफ देखा और कापती हुई आवाज़ मे बोली…”कुछ चाहिए था,…..” उसकी आवाज़ सुन कर मुझे उसकी हालत का अंदाज़ा हुआ….

मैं उसके पास जाकर बेड पर बैठा तो, मैने महसूस किया कि वो बुरी तरह से काँप रही थी….”क्या हुआ तुम्हे….ऐसे काँप क्यों रही हो….?” मैने उसके माथे पर हाथ लगा कर चेक करते हुए कहा…” उसने कहा कुछ नही वो सुबह-2 नहा लिया इसीलिए….” 

मैं: तो तुम्हे किसने कहा था सुबह-2 नहाने के लिए ऊपेर से लाइट भी नही है… फिर ठंडे पानी से नहाने की क्या ज़रूरत थी…

क्योंकि जब मैं बाथरूम मे गया था….तो मुझे टंकी के अंदर के पानी की ठंडक के बारे मे पता था….हमारी पानी की टंकी छत पर खुले मे है…तो जाहिर से बात थी कि, रात को बाहर सर्दी मे होने की वजह से पानी कितना ठंडा होता है… “ मजबूरी थी….?” नजीबा ने काँपते हुए कहा….”

मैं: ऐसी भी क्या मजबूरी थी…..जो सुबह-2 ठंडे पानी से नहा लिया वो भी इतनी सर्दी मे…

नजीबा: वो वो जब नहाने गयी थी…तब लाइट थी…गीजेर ऑन किया…थोड़ा सा पानी गरम हुआ तो नहाना शुरू कर दिया…बीच मे लाइट चली गयी…बदन पर साबुन लगा हुआ था…तो फिर मजबूरन ठंडे पानी से नहाना पड़ा….

मैं: तुम्हारा भी कोई हल नही है….

मैं बात को बड़ी आसानी से ले रहा था…मुझे उस वक़्त तक नजीबा की हालात का कोई अंदाज़ा नही था कि, उसे किस क़दर सर्दी लग रही है….उसने करवट बदली और मेरी तरफ पीठ कर ली….और अपने ऊपेर ओढ़ रखी रज़ाई को कस्के पकड़ लिया….मैने रज़ाई के ऊपेर से जैसे ही उसके कंधे पर हाथ रखा तो, उसके बदन को बुरी तरह काँपते हुए महसूस करके मेरे होश एक दम से उड़ गये…”नजीबा तुम्हारा बदन तो बहुत ज़यादा काँप रहा है…” मैने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा…

“आप फिकर ना करें थोड़ी देर मे ठीक हो जाएगा….”

मैं उसकी बात सुन कर चुप हो गया… और वही बैठा रहा…मजीद 5 मिनट गुजर चुके थे…लेकिन नजीबा का कांपना कम ना हुआ….वो पहले से ज़्यादा काँप रही थी….

मैं बहुत डरा हुआ महसूस कर रहा था…इससे पहले आज तक मैने कभी ऐसे हालात का सामना नही किया था….”नजीबा…” मैने सहमे हुए लहजे मे कहा… 

“जी….” नजीबा ने बड़ी मुस्किल से जवाब दिया…”

सर्दी बहुत ज़यादा लग रही है….” इस बार नजीबा ने थोड़ी देर रुक कर जवाब दिया….”जी….आप फिकर ना करें…थोड़ी देर मे ठीक हो जाएगा….”

मैं: ऐसे कैसे ठीक हो जाएगा….कब से यही सुन रहा हूँ….

अब तो मेरे दिमाग़ ने भी काम करना बंद कर दिया था….मुझे और कुछ तो ना सूझा पर रीदा आपी के साथ बिताई हुई एक सर्द रात याद आ गयी….जब मैं और रीदा आपी उनके घर की छत पर खुले मे सोए थे…उस वक़्त जोरो की सर्दी पड़ रही थी…मैं और रीदा आपी रज़ाई के अंदर नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए थे…और ठंड का नामो निशान नही था….जैसे ही वो बात मुझे याद आई..मैने एक पल के लिए क्या सही क्या ग़लत कुछ ना सोचा…और एक साइड से रज़ाई उठा कर अंदर घुस गया….नजीबा की पीठ मेरी तरफ थी….जैसे ही उसे इस बात का अहसास हुआ तो, वो एक दम से चोंक गयी….

“ये यी आप क्या कर रहे है….” लेकिन तब तक मे उसके पीछे लेट चुका था…मेरा पूरा बदन फ्रंट साइड से उसकी बॅक साइड से चिपका हुआ था…

मैने नजीबा की बात की परवाह ना करते हुए, एक राइट बाज़ू उसकी कमर के ऊपेर से गुजार कर उसके पेट पर रख लिया….और उसे कस्के अपने से चिपका लिया…

.”ये आप क्या कर रहे है…?” नजीबा की आवाज़ मे अब कंपन के साथ-2 सरगोशी भी थी…

.”कुछ नही ऐसे तुम्हे गरमी मिलेगी….मुझे ग़लत मत समझना…लेकिन अभी मैं जो कर रहा हूँ….वही ठीक है….मुझ पर भरोसा है ना…..? “ मैने नजीबा के बदन को पीछे से अपने साथ और दबा लिया….

नजीबा बोली तो कुछ नही लेकिन उसने हां मे सर हिला दिया….हम दोनो के बदन एक दूसरे से पूरी तरह चिपके हुए थी…..रूम मे खामोशी छाई हुई थी…तकरीबन 6-7 मिनट बाद नजीबा का कांपना कम होने लगा…

लेकिन अब एक और नयी प्राब्लम हो चुकी थी…मेरे बदन की फ्रंट साइड जो कि नजीबा के बॅक से पूरी तरह टच हो रही थी…उससे उठती गरमी के कारण मेरा लंड जो नजीबा की गोल मटोल गान्ड पर दबा हुआ था..वो अब धीरे-2 सख़्त होने लगा था….मुझे डर लगने लगा था कि, कही नजीबा मेरे लंड को अपनी गान्ड पर महसूस ना कर ले. और कही मुझे ग़लत ना समझ बैठे….मैं वहाँ से उठने ही वाला था कि, फिर कुछ सोच कर रुक गया…मैने मन ही मन सोचा क्यों ना आज अपनी किस्मत को आज़मा कर देखूं….कि नजीबा का क्या रियेक्शन होता है…

पहले जहन मे नजीबा के बदन को गरमी देने के कारण उससे चिपका हुआ था…और मेरे जेहन मे डर बैठा हुआ था कि, कही नजीबा को कुछ हो ना जाए…लेकिन अब डर की जगह हवस ने ले ली थी…मेरा लंड जो कि नजीबा की गान्ड की लाइन के बीच मे था..वो अब पूरी तरह सख़्त हो चुका था…मेरे लंड और नजीबा की गान्ड के बीच नजीबा की पतली सी सलवार और मेरा पायज़मा ही था….क्योंकि मैं अक्सर रात को सोने से पहले से अंडरवेर उतार देता हूँ….उस समय नजीबा ना तो कुछ बोल रही थी और ना ही काँप रही थी…लेकिन जब मेरा लंड उसकी गान्ड से रगड़ ख़ाता हुआ, जैसे ही उसके गान्ड की लाइन मे घुसा तो, उसके बदन ने एक तेज झटका खाया…

 

मैने अपनी सांसो को रोक लिया….और नजीबा के रियेक्शन का इंतजार करने लगा…लेकिन नजीबा की तरफ से कोई रियेक्शन नही हुआ…मुझे अपने लंड का टोपा बहुत ही गरम भट्टी मे धंसता हुआ महसूस हो रहा था…मैं सॉफ तोर पर महसूस कर पा रहा था कि, नजीबा भी मुझसे चिपकती जा रही है…मेरा लंड पाजामे को फाड़ कर बाहर आने वाला हो गया था….”नजीबा….?” मैने खामोशी तोड़ते हुए कहा…

.”जी….” नजीबा की आवाज़ मे सरोगशी सॉफ महसूस हो रही थी…”

अब कैसा फील कर रही हो…” मैने उसके पैट को सहलाते हुए कहा….तो उसका जिस्म फिर से काँप गया….

नजीबा: जी पहले से बेहतर है….

मैं: अच्छा ठीक है ….मैं तुम्हारे लिए चाइ बना लाता हूँ….फिर तुम्हे और अच्छा लगेगा….(मैं अभी उठने ही वाला था कि, नजीबा ने मेरा वो हाथ पकड़ लिया जो मैने उसके पेट पर रखा हुआ था….)

नजीबा: मुझे चाइ नही चाहिए….

मैं: तो फिर क्या चाहिए…(मैं मन ही मन सोच रहा था कि, काश नजीबा कह दे कि मुझे सिर्फ़ आप चाहिए….)

नजीबा: कुछ नही मैं अब ठीक हूँ….(लेकिन नजीबा ने मेरे हाथ को कस्के पकड़ लिया था….जैसे कहना चाहती हो कि, मेरे साथ ऐसे ही लेटे रहो….) 

मे: अच्छा ठीक है तो फिर मे चलता हूँ….

नजीबा: (जब मैने जाने का कहा तो, उसने मेरा हाथ और ज़ोर से पकड़ लिया….) रुक जाओ प्लीज़….थोड़ी देर और….

नजीबा की आवाज़ मे वासना की खुमारी छाई हुई थी….मैं भी वहाँ से जाना नही चाहता था….इसलिए मैने भी अपनी कमर को नीचे से पुश किया तो, मेरा लंड उसकी सलवार के ऊपेर से उसकी गान्ड के मोरी पर जा लगा…उसका पूरा बदन मस्ती मे काँप गया…”सीईईई उसके मूह से हलकी से सिसकारी भी निकल गयी….” तभी बाहर डोर बेल बजी…हम दोनो हड़बड़ा गये…मैं जल्दी से उठा और टाइम देखा तो 7 बज रहे थे….

”दूध ले लो शाह जी….” बाहर से हमारे दूध वाले की आवाज़ आई…तो मुझे ख़याल आया कि दूध वाला है…मैं किचन मे गया…और वहाँ से बर्तन उठा कर बाहर आकर गेट खोला….दूध वाले ने दूध बर्तन मे डाला और चला गया….मैने गेट बंद किया और दूध के बर्तन को किचन मे रख कर फिर से नजीबा के रूम मे चला गया… जब मैं वहाँ पहुचा तो नजीबा ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी अपने बालो मे कंघी कर रही थी……

जैसे ही उसने मेरा अक्श आयने मे देखा तो, उसने शरमा कर नज़रें झुका ली…”अब कैसी हो….?” मैने डोर पर खड़े-2 पूछा…

.”जी अब बेहतर हूँ..”

मैं: दूध किचन मे रख दिया है…मैं दुकान से ब्रेड और अंडे ले आता हूँ…

मैने बाहर का गेट खोला और दुकान की तरफ चला गया….आज तो लग रहा था कि, सर्दी पूरे जोरो पर है…गली मे इतनी धुन्ध छाई हुई थी कि, सामने कुछ भी नज़र नही आ रहा था….

 

गली मे धुन्ध छाई हुई थी…..जिसके कारण थोड़ी दूर तक ही नज़र आ रहा था… मे अभी दुकान से कुछ दूर था…और जैसे ही मे सुमेरा चाची के घर के सामने से गुज़रा तो, ठीक उसी वक़्त सुमेरा चाची हाथ मे बाल्टी लिए बाहर आए…. सुमेरा चाची भैंस का दूध निकालने जा रही थी….उनके घर के ठीक सामने ही उनका एक छोटा सा प्लॉट था…जिसके चारो तरफ बड़ी-2 बौंड्री थी…और सामने एक लकड़ी का दरवाजा था….जैसे ही सुमेरा चाची की नज़र मुझ पर पड़ी….तो वो मुस्कुराते हुए बोली….”सवेरे सवेरे किधर दी सैर हो रही है….?” (सुबह सुबह कहाँ घूमने जा रहे हो….) मैं उसके पास रुक गया….”वो दुकान से ब्रेड और अंडे लेने जा रहा था…”

सुमेरा चाची ने गेट बंद किया और गाली मे इधर उधर नज़र मारी….सर्दी की वजह से कोई दिखाई नही दे रहा था…अगर गली मे कोई होता भी तो, धुन्ध के कारण हमे देख नही पाता…सुमेरा चाची मेरे पास आई और धीरे से बोली…”हवेली मे चल….” लेकिन मैने सॉफ मना कर दिया…कह दिया कि, नजीबा घर पर अकेली है… मे दुकान पर गया….वहाँ से दूध और अंडे खरीदे और घर के तरफ चल पड़ा….जब मे घर के पास पहुँचा तो, मैने देखा कि हमारे घर के बाहर एक मोटर साइकल खड़ी है…फिर जब और पास पहुचा तो मोटर साइकल देख कर पता चला कि, ये बाइक तो नजीबा के मामा की है…

मैने गेट को धकेला तो, गेट खुल गया….सामने बरामदे मे नजीबा के मामा और मामी जी बैठे हुए थे….मैं अंदर गया तो नजीबा किचन से बाहर आ गयी.. मैने उसको ब्रेड और अंडे पकड़ाए…..और फिर नजीबा के मामा मामी के पैर छुए…दुआ सलाम के बाद मे उनके पास ही बैठ गया…नजीबा चाइ बना कर ले आई…”आप इतनी सुबह-2 सब ख़ैरियत तो है ना….?” मैने नजीबा के मामा से पूछा….

”हां सब ठीक है…हम नजीबा को लेने आए थे….इसकी मामी ने आज सहर मे शॉपिंग के लिए जाना है…ये कह रही थी कि, नजीबा को साथ लेकर जाउन्गि.. कि नजीबा की चाय्स बहुत अच्छी है….

मैं: ओह्ह अच्छा….ज़रूर ले जाए….

मैने नजीबा की ओर देखते हुए कहा….उसके आँखे मानो मुझे थॅंक्स बोल रही थी… कि मैने ख़ुसी-2 उसे उसके मामा मामी के साथ जाने के लिए हां कह दी…

मामी: चल बेटा तैयार हो जा फटाफट…

नजीबा: मामी से बस 15 मिनट बैठिए….मे नाश्ता बना लाउ…फिर चलते है….

उसके बाद नजीबा नाश्ता बनाने लगी….मे उसके मामा मामी से इधर उधर के बातें करने लगा….नजीबा ने नाश्ता बनाया और मुझसे पूछा…मैने कहा कि, मैं बाद मे खा लूँगा..तुम जाकर तैयार हो जाओ….नजीबा तैयार होने चली गयी,…..मुझे ख़याल आया कि, नजीबा भी जा रही है…और मे घर पर अकेला हो जाउन्गा…क्यों ना सुमेरा चाची या रीदा को अपने घर पर अकेले होने के बारे मे बता दूं…आज घर बुला कर दोनो मे से किसी एक की अच्छी तरह फुद्दि मारूँगा….अब मैं मन ही मन दुआ कर रहा था की, नजीबा के मामा मामी नजीबा को जल्दी से लेकर घर से चले जाए…

करीब 15 मिनट बाद नजीबा तैयार होकर बाहर आई…..उसने महरूण कलर का सलवार कमीज़ पहन रखा था…आज तो वो गजब ढा रही थी….उसके मामा मामी उसे साथ लेकर चले गये….उनके जाने के बाद मे घर से निकला और गेट को ताला लगा कर सुमेरा चाची के घर की तरफ चल पड़ा…लेकिन शायद आज मेरी किस्मत ही खराब थी…सुमेरा चाची रीदा और फ़ारूक़ चाचा तीनो घर के बाहर खड़ी टॅक्सी मे बैठ रहे थे…शायद वो भी कही जा रहे थे….इसलिए मैं पीछे से ही मूड आया…घर पहुचा गेट का ताला खोल अंदर गया…और नाश्ता प्लेट मे डाल कर खाने लगा…नाश्ते के बाद मैने बर्तन किचन मे रखे…और अपने रूम मे आकर टीवी ऑन किया और बेड पर रज़ाई ओढ़ कर बैठ गया….

 

मैं मन ही मन अपने आप को कोस रहा था…थोड़ी देर पहले कितना अच्छा मोका था…सुमेरा चाची को चोदने का…जो मैने गवा दिया था…बेड पर बैठे-2 एक बार फिर से वही यादें ताज़ा होने लगी……………………….

.उससे अगले दिन जब मे स्कूल से आने के बाद सुमेरा चाची के घर गया तो, रीदा आपी उस दिन घर पर अकेली थी…सुमेरा चाची फ़ारूक़ चाचा के साथ किसी रिस्तेदार के घर गयी हुई थी…उस दिन भी मेरे दिमाग़ मे कल वाला वाक़या और बिल्लू की कही हुई बातें घूम रही थी….जब मे रीदा आपी के साथ ऊपेर आया तो, हम उनके कमरे मे चले गये….रीदा आपी ने मुझसे मेरा स्कूल बॅग खोलने को कहा…मैने बॅग खोला तो, उन्होने ने मेरी स्कूल डाइयरी निकाल कर चेक की..और फिर मुझे होम वर्क करने को कहा….मैं अपना होम वर्क करने लगा….

रीदा आपी ने बच्चो को चेक किया…जब उन्हे इतमीनान हो गया कि, बचे सो रहे है तो, वो मुझसे बोली…”समीर मे कपड़े धोने जा रही हूँ…तुम होम वर्क करो… और हां आवाज़ मत करना…नही तो बच्चे उठ गये तो, मेरा काम बीच मे ही रह जायगा….आज अम्मी भी घर पर नही है…”

मैने रीदा आपी की बात सुन कर हाँ मे सर हिला दिया…रीदा आपी बाहर चली गयी…और कपड़े धोने के लिए बाथरूम मे चली गयी…..मैं अपनी बुक्स निकाल कर बैठ तो गया था…लेकिन मेरा मन पड़ाई मे नही लग रहा था….बार-2 मेरा ध्यान बिल्लू चाचा की कही बातो की तरफ जाता…मेरे जेहन मे यही चल रहा था कि क्या सच मे फुददी मारने से इतना मज़ा आता है…मैं शुरू से ही दिलेर किस्म का सख्स था….इसलिए कुछ भी करने से डरता नही था….बिल्लू की एक बात मेरे जेहन मे बस चुकी थी….कि अगर कोई औरत जो चुदवाने के लिए तरस रही हो…अगर वो किसी का सख़्त और तगड़ा लंड देख ले तो, वो खुद उसके आगे पीछे घूमने लगती है..

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