मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ PART 3
इस बात ने मेरे जेहन मे तूफान उठा रखा था….जब मेरे जेहन मे कल सुमेरा चाची के रूम का वाक़या आया तो, मेरा लंड जो कि उस समय 6 इंच के करीब हो चुका था…वो धीरे-2 मेरी सलवार मे सर उठाने लगा था….मैं अपने खालयों मे खोया हुआ ये सपना देख रहा था कि, मैं और सुमेरा चाची दोनो एक दम नंगे बेड पर लेटे हुए है…और मैं सुमेरा चाची के ऊपेर चढ़ा चाची की फुद्दि मे अपने लंड को तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा हूँ….ये ख़याल मेरे जेहन मे ऐसा समा चुका था.. कि मुझे लग रहा था कि, जैसे सब कुछ मेरे आँखो के सामने हो रहा हो…. ये सब सोचते हुए मेरा लंड पूरी तरह सख़्त हो चुका था….और मुझे पता नही चला कब मैने अपने लंड को सलवार के ऊपेर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया… मैं पता नही कब से यही सब सोच रहा था…लेकिन मेरे ख्वाबी महल उस वक़्त धराशाही हो गये….जब रीदा आपी का एक बेटा एक दम से उठ गया….मैने चोन्कते हुए उसकी तरफ देखा तो, वो हल्का सा रोया और फिर उसने अपनी आँखे धीरे-2 बंद कर ली… तब मैने अपने लंड की ओर गोर किया…जो सलवार को ऊपेर उठाए हुए था…लंड इतना सख़्त खड़ा था कि, अब मुझे उसमे हल्का -2 दर्द होना शुरू हो गया था…मुझे फील हो रहा था…जैसे मुझे तेज पेशाब आ रहा हो…. मैं बड़ी आहिस्ता से बेड से नीचे उतरा…ताकि रीदा आपी के बच्चे उठ ना जाए…बेड से उतरने के बाद मैं रूम से बाहर आया….और बाथरूम की तरफ गया….ऊपेर जो बाथरूम था…उसमे मे एक साइड पर कमोड था….टाय्लेट के लिए अलग से बाथरूम नही था….मैं बाथरूम के डोर पर खड़ा हुआ…तो मेरी नज़र रीदा आपी पर पड़ी.. वो नीचे पैरो के बल बैठी हुई, कपड़ो को रगड़ रही थी…रीदा आपी के बड़े-2 मम्मे आगे की तरफ झुकने की वजह से बाहर आने को उतावले हो रहे थे…. मैं उसके बड़े-2 सफेद मम्मो को सॉफ देख सकता था….रीदा आपी की ब्लॅक कलर की ब्रा की हलकी से झलक भी ऊपेर से सॉफ दिखाई दे रही थी….ये सब देख कर मेरा लंड और ज़यादा सख़्त हो गया….”आपी….” मैने डोर पर खड़े होकर रीदा आपी को पुकारा…तो रीदा आपी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला…”क्या हुआ…?” मैं: आपी वो मुझे बाथरूम जाना है…. रीदा आपी मेरी बात सुन कर खड़ी हो गयी….उन्होने ने कपड़ो को एक साइड किया और बाहर आ गयी…”जाओ…” वो बाहर खड़ी हो गयी…मैं जल्दी से अंदर गया…कमोड के सामने खड़ा होकर मैने आगे से अपनी कमीज़ को ऊपेर उठाया…और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगा…लेकिन जैसे ही मैने सलवार का नाडा खोलना शुरू किया….तो उसमे गाँठ पड़ गयी…मैं सलवार का नाडा खोलने की जितनी कॉसिश करता..गाँठ उतनी टाइट हो जाती…गर्मी की वजह से मे अंदर पसीना पसीना हो रहा था..लेकिन गाँठ खुलने का नाम ही नही ले रही थी…मैं मजीद कॉसिश कर रहा था…. “समीर क्या हुआ…इतनी देर अंदर सो तो नही गये हाहाहा….” बाहर से रीदा आपी के हँसने की आवाज़ आ रही थी….मैं कुछ ना कह पाया…एक मिनट बाद फिर से रीदा आपी ने कहा..”समीर….” मैं: जी आपी…. रीदा: समीर मसला क्या है….? इतना टाइम क्यों लगा रहे हो….? मैं: आपी वो नाडे मे गाँठ पड़ गयी है….खुल नही रहा… मेरे बात सुनते ही रीदा आपी बाथरूम के अंदर आ गयी….और हंसते हुए बोली… “सबाश ओये…सलवार का नाडा नही खुलता तुझसे…आगे चल कर तेरा पता नही क्या बनने है….? “ उस वक़्त मेरी बॅक रीदा आपी की तरफ थी…”अब इसमे गाँठ पड़ गयी तो मेरा क्या कसूर…..खुल ही नही रही….” मेरी बात सुन कर रीदा आपी कहकहा लगा कर हँसने लगी..और मूह से चूचु की आवाज़ करते हुए बोली….”सदके जावां तेरे… तेरे से एक नाडा नही खुलता…शादी के बाद पता नही तेरा क्या बनना है…” “अब इसका मेरी शादी से क्या कनेक्षन…” मैने खीजते हुए कहा…. “चल हट ला मुझे दिखा…” रीदा आपी ने एक दम से मेरे कंधा पकड़ कर मुझे अपनी तरफ घुमा लिया…एक पल के लिए तो मैं इस बात को लेकर सहम गया कि, अगर रीदा आपी ने मेरे लंड को इस तरह खड़े सलवार मे तंबू बनाए देख लिया तो, पता नही क्या सोचेंगे… पर अगले ही पल बिल्लू की बात जेहन मे घूम गये….मैं भी रीदा आपी की तरफ घूम गया….और जैसे ही वो सलवार का नाडा खोलने के लिए पैरो के बल नीचे बैठी…उसने मेरी कमीज़ को आगे से पकड़ कर ऊपेर उठाते हुए कहा….”ले पकड़ इसे…” मैने जैसे ही कमीज़ ऊपेर की..रीदा आपी ने मेरे सलवार का नाडा पकड़ लिया…तभी रीदा आपी को जैसे शॉक लगा हो…उसके हाथो की हरक़त चन्द पलो के लिए रुक गये… वो आँखे फाडे मेरे सलवार मे बने हुए तंबू को देख रही थी…जो उसके हाथो के ठीक 1 आधा इंच ही नीचे था…मैने गोर किया कि, रीदा आपी के हाथ बड़ी स्लोली मूव कर रहे थे….और उसकी नज़र मेरी सलवार मे बने तंबू पर थी…रीदा आपी के आँखे चमक गयी थी…उनके गोरे गाल लाल सुर्ख हो गये….मुझे आज भी याद है…कि मेरे लंड को सलवार के ऊपेर से देख किस क़दर तक गरम हो चुकी थी.. उन्होने ने आपने गले का थूक अंदर निगला….और फिर से मेरे सलवार मे बने हुए तंबू को आँखे फाडे देखने लगी…फिर मुझे पता नही आपी ने जान बुज कर या अंजाने मे अपने हाथो से सलवार के ऊपेर से मेरे लंड को टच किया तो, मेरे लंड ने ज़ोर दार झटका मारा….जो आपी की हथेली पर टकराया…मैने आपी के जिश्म को उस वक़्त काँपता हुआ महसूस किया…”आपी जल्दी करें….बहुत तेज आ रहा है….” मैने आपी की तरफ देखते हुए कहा तो उन्होने हां मे सर हिला दिया….और मेरी सलवार का नाडा खोल दिया…जैसे ही मेरी सलवार का नाडा खुला मैने सलवार की जबरन पकड़ ली. और आपी की तरफ पीठ करके खड़ा हो गया…. मैने कमोड की तरफ फेस कर लिया….मुझे अहसास हुआ कि, रीदा आपी अभी भी वही खड़ी है…मैने थोड़ा सा फेस घुमा कर देखा तो, रीदा आपी मेरे पीछे एक साइड मे खड़ी थी…और तिरछी नज़रों से मुझे देख रही थी…मैने अपने लंड को बाहर निकाला….जो उस वक़्त फुल हार्ड हो चुका था….मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था… ये सोच कर कि रीदा आपी अभी भी मेरे पीछे खड़ी है…मुझे अपने लंड की कॅप पर हल्की-2 सरसराहट महसूस हो रही थी….ऐसा लग रहा था..जैसे जिस्म का सारा खून मजीद लंड की कॅप मे इकट्ठा होता जा रहा हो…मेरे लंड की नसें एक दम फूली हुई थी…. मैं वहाँ खड़ा पेशाब करने की कॉसिश कर रहा था…पर पेशाब बाहर नही निकल रहा था… .”अब क्या मसला है…” रीदा आपी ने पीछे खड़े होते हुए कहा…. ”क्या कुछ नही आप बाहर जाए….मुझे शरम आ रही है…” अभी मैने ये बोला ही था कि, बाहर डोर बेल बजी… .”इस वक़्त कोन आ गया…..” आपी ऐसे खीज कर बोली…जैसे किसी ने उनके हाथ से उनका नीवाला छीन लिया हो….आपी बाथरूम से बाहर चली गयी….उन्होने बाहर नीचे झाँक कर देखा…नीचे सुमेरा चाची थी…वो नीचे चली गयी…बड़ी मुस्किल से थोड़ा पेशाब निकाला…मैने सलवार का नाडा बाँधा और बाहर आ गया….मैं उसके बाद रीदा आपी के रूम मे आ गया….थोड़ी देर बाद रीदा आपी ऊपेर आई…उन्होने ने अपने एक बेटे को गोद मे उठाया और दूसरे को मुझे उठा कर नीचे लाने को कहा…मैं उनके दूसरे बेटे को उठा कर उनके साथ नीचे आ गया…जब मैं नीचे पहुचा तो, देखा कि सुमेरा चाची के साथ उनकी बुआ घर आई हुई थी…मैने उनके पैर छुए…तो चाची ने मेरा तार्रुफ उनसे करवाया….. उस दिन और कुछ ख़ास ना हुआ….मैं थोड़ी देर और वहाँ रुका….शाम के 5 बजे मे वहाँ से निकल कर ग्राउंड की तरफ चला गया….वहाँ दोस्तो के साथ क्रिकेट खेलता रहा…..और फिर शाम को सुमेरा चाची के घर से अपना बॅग लिया और घर वापिस आ गया….उस दिन और कोई ख़ास बात ना हुई…मैं अपने पुराने दिनो के यादो मे खोया हुआ था…तभी लाइट चली गयी….मैं अपने ख्यालो की दुनिया से बाहर आया.. मैं बेड से उठा और टीवी स्विच ऑफ करके बाहर बरामदे मे आ गया…दोपहर के 12 बज रहे थे….और मैं घर पर अकेला था…घर मे ऐसे बैठे-2 मुझे बोरियत सी होने लगी थी….तो सोचा क्यों ना अपने दोस्त फ़ैज़ को मिल कर आऊ…. फ़ैज़ और मैं दोनो बचपन से एक ही स्कूल मे पढ़े थे….फ़ैज़ का परिवार हमारे गाओं मे सबसे ज़्यादा अमीर था…फ़ैज़ की काफ़ी ज़मीन जायदाद थी…कई बाग थे… खेती बाड़ी से बड़ी आमदनी थी उनको….पर उसके घर फ़ैज़ के इलावा उन पैसो को खरच करने वाला और कोई ना था…जब फ़ैज़ दो साल का हुआ था…तब उसके अब्बू की मौत हो गयी थी…फ़ैज़ के दादा दादी बड़े सख़्त किस्म के लोग थे…उनके दब दबे और रुतबे के चलते ही, उन्होने ने फ़ैज़ की अम्मी की दूसरी शादी नही होने दी थी… फ़ैज़ की अम्मी सबा के मायके वालो ने बड़ा ज़ोर लगाया था कि, सबा की दूसरी शादी हो जाए….पर फ़ैज़ के दादा दादी ने ऐसा होने नही दिया….फ़ैज़ के अब्बू के दो भाई और थे.. जो काफ़ी अरसा पहले अपने हिस्से की ज़मीन बेच बाच कर सहरो मे जाकर अपना बिजनेस करने लगे थे… अब फ़ैज़ अपने दादा दादी और अम्मी सबा के साथ रहता था…फ़ैज़ ने मुझे कुछ दिनो पहले कार चलाना सिखाया था…क्योंकि उसके पास दो-2 कार थी…एक दिन मैं और रीदा आपी ऐसे ही बातें कर रहे थे कि, बातों बातों मे फ़ैज़ की बात चल निकली… उस दिन रीदा आपी की मैने जबरदस्त तरीके से चुदाई की थी…”जब फ़ैज़ के घर के बातो का जिकर शुरू हुआ तो, मैने रीदा आपी से ऐसे पूछ लिया… मैं: रीदा एक बात बताए….ये फ़ैज़ की अम्मी ने दूसरी शादी क्यों नही की…. रीदा: कैसे करती बेचारी…तुम्हे नही पता उसके सास ससुर कितने जालिम है…. मैं: कभी -2 तो मुझे तरस आता है ऐसे लोगो पर हम 21वी सदी मे जी रहे है.. और हमारे ख्यालात कितने पिछड़े हुए है…. रीदा: ह्म्म्मह ये गाँव है…पहले ऐसे ही होता था…. मैं: रीदा आपी आप तो औरत हो…आप मुझसे बेहतर जानती होंगी…..फ़ैज़ की अम्मी इतने सालो तक कैसे बिना साथ रहे होगी…. रीदा: हाहाहा सीधे सीधे क्यों नही कहते कि, उसकी अम्मी इतने साल बिना लंड को अपनी फुद्दि मे लिए कैसे रही हो गी… मैं: क्या औरत को मर्द की ज़रूरत इसी लिए होती है….? रीदा: नही सिर्फ़ इसीलिए तो नही…पर समीर सेक्स ऐसी चीज़ है…जो इंसान को ग़लत सही मे फ़र्क करने के लिए नकारा कर देता है…उसकी अम्मी भी कहाँ रह पाई थी…. मैं: मतलब मैं कुछ समझा नही…. रीदा: अब ये तो खुदा ही जाने…कि बात सच्ची है या झूठी….लेकिन गाँव के लोग दबी ज़ुबान मे बात करते है कि, फ़ैज़ की अम्मी सबा का अपने ससुर के साथ चक्कर था… मैं: था मतलब…. रीदा: (हंसते हुए) हा हाहाहा तुमने जमानेल की उमेर नही देखी अब…70 के ऊपेर का हो गया है….ऊपेर से दिन रात शराब के नशे मे डूबा रहता है…पहले शायद होगा उनके बीच मे चक्कर….लेकिन अब वो बूढ़ा कहाँ अपनी बहू को चोद पाता होगा…. मैं: हाहः कह तो तुम ठीक रही हो…. ऐसे ही ख्यालो मे डूबे हुए मैने घर को लॉक किया और फ़ैज़ के घर की तरफ चल पड़ा…जब मैं अपनी गली क्रॉस करके फ़ैज़ के घर के करीब पहुचा तो, मैने देखा बिल्लू चाचा फ़ैज़ के घर के सामने पीपल के पेड़ के नीचे बने थडे पर बैठा हुआ था…और फ़ैज़ के घर की तरफ देख रहा था…..जब मैने बिल्लू चाचा की नजरो का पीछा किया तो, देखा कि सामने छत पर चौबारे के पास फ़ैज़ की अम्मी सबा खड़ी थी….उसके बाल खुले हुए थे…शायद वो नहा कर बाहर आई थी… वो अपने हाथो से बालो को सेट कर रही थी…और नीचे बैठे बिल्लू की तरफ देख रही थी.. बिल्लू चाचा जो कि पुर गाओं मे अपनी आशिक मिज़ाजी के लिए मशहूर था…वो सबा को लाइन मार रहा था….और मुझे ये देख कर और भी ज़यादा हैरत हुई कि, सबा भी उसे लाइन दे रही थी…किसी ने सच ही कहा है….औरत अन्न और धन के बिना तो रह सकती है….पर लंड के बिना नही रही सकती…सबा जिसे मैं चाची कहता था…वो भी बिल्लू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी….मैं सीधा बिल्लू के पास चला गया…” और चाचा जी की हाल है…? “ मैने बिल्लू के पास खड़े होते हुए पूछा…” ओये समीर तुम इधर कहाँ….मैं तो ठीक हूँ…लेकिन तुम ईद का चाँद हो गये हो….” मैने एक बार मूड कर छत पर खड़ी सबा की तरफ देखा…तो बिल्लू चाचा ने भी मेरी नजरो का पीछा किया… और फिर जैसे ही मैने बिल्लू चाचा की तरफ देखा तो, वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा…”क्यों चाचा नया शिकार फँसा लिया लगता है….” बिल्लू मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगा….”यही समझ ले भतीजे……साली पर बड़े दिनो से ट्राइ मार रहा हूँ…आज जाकर स्माइल दी है… बिल्लू ने सलवार के ऊपेर से अपने लंड को मसलते हुए कहा …” मतलब अभी तक बात आँखो आँखो से हो रही है….क्यों चाचा….” बिल्लू: हहा भतीजे जी….पर लगता है अपना मामला सेट हो गया….अब किसी तरह एक बार इसकी फुद्दि मिल जाए बस…फिर तो खुद ही वही आ जाएगे….जहा पर इसको बुलाउन्गा… मैं: तुम्हारी तो मोज हो गयी चाचा…..क्या माल फँसाया है…. बिल्लू: यार पूछ कुछ ना….साली जब चलती है…तो इसकी गान्ड ऐसे हिलती है…जैसे तरबूज हिल रहे हो…इसको तो खड़ा करके पीछे से अपना लंड इसकी गान्ड के बीच रगड़ने का बड़ा मन कर रहा है….साली दी बूँद दे बड़ा गोश्त चढ़ हुआ है… मैं: चाचा माल तुम्हारा है….जैसे चाहे मर्ज़ी करना… मैने मूड कर देख तो सबा अभी भी वही खड़ी थी…और हम दोनो को देख रही थी…”और तुम सूनाओ….तुम इधर कहाँ घूम रहे हो….?” मैं: चाचा मैं तो फ़ैज़ से मिलने आया था…. बिल्लू: ओये ख़याल रखी….फ़ैज़ को ग़लती से कुछ बता ना देना.. मैं: नही बताता चाचा…मैने बता कर क्या करना है…और सूनाओ सुमेरा चाची की तो रोज मारते होगे….. बिल्लू: कहाँ यार…पता नही साली को क्या हो गया….दो साल हो गये उसकी फुददी मारे …पैन्चोद अब तो हाथ भी रखने नही देती अपने ऊपेर…. मैने मन ही मन सोचा चाचा हाथ तुझे सबा भी नही रखने देगी… अब इस पर मेरी भी आँख आ गयी है….देखता हूँ कि , कोन इसे पहले चोदता है….” अच्छा चाचा मैं ज़रा फ़ैज़ से मिल कर आता हूँ….. बिल्लू: अच्छा जा…. मैं वहाँ से मुड़ा तो देखा कि सबा अब वहाँ नही खड़ी थी…मैं फ़ैज़ के घर अंदर दाखिल हुआ तो, सामने बरामदे मे फ़ैज़ की दादी बैठी हुई थी…जो काफ़ी बूढ़ी हो गयी थी…आँखो पर नज़र वाला मोटा चस्मा लगा हुआ था…मैने जाकर उनके पैर छुए….”वे कॉन है तूँ…..की काम है…” मैं: दादी जी मैं समीर….बॅंक वाले फ़ैसल का बेटा…. दादी: ओह्ह अच्छा अच्छा….बेटा अब इन बूढ़ी आँखो को दिखाई कम देता है ना… मैं: कोई बात नही दादी जी….मैं फ़ैज़ से मिलने आया था… दादी: ऊपर ही होना है…जाकर मिल लये मैं सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपेर चला गया….जब मैं ऊपेर पहुचा तो देखा सबा चारपाई पर धूप मे बैठी हुई थी….”सलाम चाची जी…” मैने मुस्कुराते हुए कहा…”सलाम आ समीर पुत्तर आज इधर का रास्ता कैसे भूल गये….?” सबा ने भी मुस्कुरा कर कहा…”जी मैं फ़ैज़ से मिलने आया था….आज सनडे था तो सोचा फ़ैज़ के साथ कही घूम फिर आउ…..” सबा चाची: पर वो तो अपने दोस्तो के साथ सहर गया है…. मैं: अच्छा कोई बात नही….फिर कभी उससे मिल लूँगा…मैं चलता हूँ… सबा: अर्रे अभी तो आए हो….रुक कर दम तो ले लो…मैं तुम्हारे लिए चाइ बनाती हूँ.. मैं: रहने दें चाची…मैं इस वक़्त चाइ नही पीता…. सबा: तो क्या हुआ आज चाची के हाथ की चाइ पी लो…वैसे भी सर्दी है… मैं: ठीक है…चाची जी जैसे आप कहें…. सबा अंदर चली गयी…थोड़ी देर बाद वो चाइ बना कर ले आई…एक कप उन्होने मुझे दिया…”और सूनाओ समीर तुम्हारी स्टडी कैसी चल रही है…?” सबा चाची ने मेरे पास चारपाई पर बैठते हुए कहा… मैं: जी ठीक चल रही है….(मैने नोटीस किया कि सबा चाची किसी बात को लेकर परेशान हो रही थी….मुझे ऐसा लग रहा था….जैसे वो मुझसे कुछ पूछना चाहती हो….आख़िर कार थोड़ी देर बाद उन्होने ने मुझसे पूछ ही लिया….) सबा चाची: तुम बिल्लू के पास खड़े होकर क्या बात कर रहे थे….? मैं: कुछ नही ऐसे ही इधर उधर की बातें कर रहे थे…. सबा चाची: इधर उधर की या कुछ और बात हो रही थी…..? मैं: नही तो बस ऐसे ही गाओं की बातें कर रहे थे….. सबा: समीर देख मैने देखा था…जब तुम दोनो बात कर रहे थे…तो बार -2 मूड कर मेरी तरफ देख रहे थे…. मैं: चाची जी भला मैने आपके बारे मे क्या बात करनी है….आप को ऐसे ही वेहम हो रहा है…. सबा चाची: और वो बिल्लू वो तो मेरे बारे मे नही बात कर रहा था…. मैं सबा चाची की बात सुन कर चुप हो गया…मैने जान बुझ कर उनकी बात का कोई जवाब ना दिया…ताकि सबा चाची का शक और पक्का हो जाए कि, हम दोनो उसके बारे मे ही बात कर रहे थे… .”क्या हुआ चुप क्यों हो गये…वो ज़रूर मेरे बारे मे ही बात कर रहा होगा….आवारागर्द कही का…सारा दिन घर के सामने डेरा जमाए रहता है….” सबा चाची मुझे ये सब इस लिए सुना रही थी कि, मैं उनके बारे मे कुछ ग़लत ना सोचूँ…और ये सोचूँ कि वो भी गाओं की बाकी औरतों की तरह बिल्लू को आवारागर्द किस्म का इंसान मानती है…. सबा चाची: समीर बोल ना क्या कह रहा था…. मैं: जाने दें ना चाची….वो तो है ही ऐसा गंदा इंसान…तो उसकी सोच भी तो गंदी होगी ना…. सबा चाची: तू मुझे बता तो सही कि वो क्या कह रहा था…. मैं: चाची जी वो कह रहा था… जाने दें ना चाची….मुझे तो कहते हुए भी शरम आती है…..और आप कही मुझ पर ही गुस्सा ना हो जाए….. सबा चाची: तू बता मैने तुम पर क्यों गुस्सा करना है….तुम थोड़ा ना मेरे बारे मे कुछ ग़लत कह रहे हो….. मैं: चाची जी वो बोल रहा था कि, साली क्या माल है….बस एक बार हाथ लग जाए तो मज़ा आ जाए… मैने देखा कि, मेरे बात सुन कर चाची के चेहरे का रंग लाल होने लगा था..”बड़ा कमीना इंसान है वो तो…” चाची ने मेरी तरफ देखते हुए कहा… मैं: ये तो कुछ भी नही चाची जी….जो उसने आगे कहा….उसे सुन कर तो मेरे होश उड़ गये…. चाची: अच्छा सुना क्या कहा उसने…मैं भी तो सुनू उसकी करतूतो के बारे मे…. मैं: चाची जी वो कह रहा था कि…. चाची: बोल ना क्या कह रहा था…. मैं: जाने दें चाची आप मुझे पर ही गुस्सा करेंगे…. चाची: मैने कहा ना मैं तुम पर गुस्सा नही करूँगी… मैं: वो कह रहा था कि, आप की उस पर बहुत गोश्त चढ़ गया है…मेरा बड़ा मन करता है कि, मैं सबा के उसको हाथ मे लेकर ज़ोर-2 से दबाऊ… चाची: क्या कहा….कैसा जॅलील इंसान है….मुझे कहाँ गोश्त चढ़ गया…. मैं: चाची जी वो आपकी बूँद की बात कर रहा था…. चाची: ये क्या बदतमीज़ी है समीर…तुमने ऐसे वर्ड कहाँ से सीख लिए… मैं: देखा चाची जी मैने कहा था ना….आप सुन नही पाएँगे और मुझ पर गुस्स करेंगे…. चाची: सॉरी बेटा….वो मुझे गुस्सा आ गया था…लेकिन इसमे तुम्हारी क्या ग़लती… तुम तो वही कह रहे हो जो वो हरामजादा कह रहा था….आने दो फ़ैज़ के दादा को… इसकी खबर तो मे लेती हूँ..उनको कह कर….. मैं: जाने दें चाची…क्यों ऐसे लोगो के मूह लगना…वैसे एक बात कहूँ चाची जी…(मैने चाइ का खाली कप नीचे रखते हुए कहा…) चाची: हां बोलो…. मैं: चाची जी आप भी तो उसे मुस्कुरा कर लाइन मार रही थी… चाची: तुमसे किसने कहा….वो झूठ बोलता है…. मैं: उसने नही कहा चाची….मैने खुद अपनी आँखो से देखा है…वैसे उसने आपके बारे मे एक बात सच कही…. चाची: (थोड़ा सा गुस्से से बोलते हुए…) क्या….. मैं: आपकी बूँद पर सच मे बहुत गोश्त चढ़ गया है…जब आप अंदर गयी थी..तब मैने देखा था….सच मे चाची जी….उसे देख कर दिल करता ही है दबाने को…. चाची: अपनी हद मे रह लड़के…मैने तुम्हे थोड़ी से ढील क्या दे दी…तुम तो बदतमीज़ी पर ही उतर आए हो….मूह पर दाढ़ी मूच्छे आई नही…और अभी से इतनी बड़ी-2 बातें करने लगे हो….(जिस तरह चाची रिएक्ट कर रही थी…उससे सॉफ पता चल रहा था…कि उनका गुसा बनावटी है…) मैं: चाची जी दाढ़ी मूछ का क्या करोगे….असली चीज़ तो अभी आप ने देखी ही नही… चाची: चल दफ्फा हो जा यहाँ से आया बड़ा….(मैने देखा चाची के होंटो पर मुस्कान थी…) लगता है तुमने फ़ैज़ के दादा की बंदूक के बारे मे सुना नही है…. मैं: मैने तो बड़ा सुना है…..लेकिन शायद आप ने मेरी बंदूक नही देखी…. (मेरा इशारा अपने लंड की तरफ था…) अच्छा अगर बिल्लू के लिए कोई पेगाम भिजवाना है तो, मुझे बता दो….मैं बिल्लू को बता दूँगा…..आप मुझ पर भरोसा रखे….ये बात मे किसी को नही कहूँगा…. चाची: मुझे नही कोई पेगाम वेगाम भिजवाना…. मैं: अच्छा फिर तो मे चलता हूँ….. मैं वहाँ से निकल कर अपने घर की तरफ चल पड़ा….जब मे बाहर निकला तो, देखा बिल्लू अभी भी वही थडे पर बैठा था….”क्यों भतीजे मिल आया अपने दोस्त से….” मैने स्माइल करते हुए हां मे सर हिलाया और घर की तरफ चल दिया… मैं घर पहुचा और गेट पर लगा ताला खोला और घर के अंदर दाखिल हो गया….दोपहर के 12 बज चुके थे….मैं फिर से अपने रूम मे चला गया… लाइट आ चुकी थी….मैने टीवी ऑन किया और फिर से रज़ाई मे घुस कर बेड पर बैठ गया….और फिर से पुराने दिनो के यादो मे खो गया……………………… उससे अगले दिन जब मे स्कूल से आने के बाद सुमेरा चाची के घर गया तो, उस दिन सुमेरा चाची घर पर ही थी…बिल्लू भी वही बैठा हुआ था….और रीदा आपी किचन मे खाना बना रही थी… पास ही रीदा आपी के दोनो बेटे लेटे हुए थे…मैने स्कूल बॅग नीचे रखा और पलंग पर बैठ गया…और रीदा आपी के बच्चो को खेलने लगा…..”आज कैसा रहा स्कूल…” रीदा आपी ने किचन के डोर पर आकर कहा….”जी अच्छा था….” रीदा आपी ने सब को खाना दिया.. और खुद भी खाना खाने लगी…. खाना खाते हुए बार-2 मेरी नज़र कभी सुमेरा चाची तो, कभी बिल्लू की तरफ जाती.. और जब बिल्लू की मेरी नज़रें मुझसे मिलती तो वो मुस्कुरा देता…और साथ ही सुमेरा चाची की तरफ देख कर इशारा कर देता…रीदा आपी ने जल्दी -2 खाना खाया….और अपने बच्चो को लेकर ऊपेर चली गयी…और जाते जाते मुझे बोली कि खाना खा कर मैं भी ऊपेर आ जाउ…मैने हां मे सर हिला दिया…बिल्लू बार-2 मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था …”तुम क्या दाँत निकाल रहे हो बार-2 चुप चाप खाना नही खाया जाता तुमसे…..” सुमेरा चाची ने बिल्लू को झिड़कते हुए कहा…सुमेरा चाची परसो की बात से खोफ़जदा थी…उन्हे डर था कि, मेने जो उस दिन देखा था….किसी को बता ना दूं… .”भतीजे कीड़ा फिर….लोगे चाची दी….” बिल्लू ने पहले मेरी तरफ देखा और फिर हंसते हुए सुमेरा चाचा की तरफ…. मेरा तो गला सुख गया था…बिल्लू की बात सुन कर…मैने अपनी नज़रें झुका ली…. “की बकवास करी जा रहा है…कंज़र ना होवे तां….” सुमेरा चाची ने बिल्लू को झिड़कते हुए कहा….तो बिल्लू भी चुप हो गया…बिल्लू ने खाना खाया और प्लेट को किचन मे रखने चला गया…मैने सर उठा कर सुमेरा चाची की तरफ देखा तो, वो मुझे ही देख रही थी….जैसे ही हमारी नज़रें मिली मैने फॉरन अपने सर को झुका लिया और जल्दी-2 खाना खा कर वहाँ से उठा और अपना बॅग उठा कर ऊपेर चला गया…फ़ारूक़ चाचा रोज की तरह खेतों मे थे….उनके खेत गाओं मे सबसे ज़यादा दूर पड़ते थे…इसलिए फ़ारूक़ चाचा जब खेतो मे जाते तो, शाम को घर वापिस आते थे….सुमेरा चाची बिल्लू के हाथ फ़ारूक़ चाचा का खाना भिजवा दिया करती थी….मैं जैसे ही ऊपेर रीदा आपी के रूम मे पहुचा तो, नीचे से सुमेरा चाची की आवाज़ आई… चाची रीदा आपी को बुला रही थी….रीदा आपी रूम से बाहर आई और सीढ़ियो पर खड़े होकर नीचे आवाज़ देकर पूछा..”क्या हुआ अम्मी….?” चाची: उज़मा आई है….तुझे खानो के घर जाना नही है क्या…? रीदा: ओह्ह्ह मे तो भूल ही गयी थी….मैं अभी तैयार होकर आती हूँ…. इतने मे उज़मा जो कि फ़ारूक़ चाचा के घर के पास वाले घर मे रहती थी… वो ऊपेर आ गयी….आज गाओं मे किसी के घर शादी थी…..उनकी बेटी की, इसलिए रीदा आपी ने भी जाना था…मैं अभी रूम मे बेड पर बैठा ही था कि, दोनो अंदर आ गये…रीदा आपी ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोली….”समीर नीचे जाओ…मुझे कपड़े चेंज करने है….” मैं: जी आपी…. रीदा: अपना ये बॅग भी ले जाओ…मैने रूम को बंद करके जाना है…. मैं: जी…. रीदा: तुम चलोगे साथ मे…. मैं: जी नही….मैने वहाँ क्या करना है…. मैने बॅग उठाया और नीचे आ गया…जब नीचे पहुचा तो, नीचे उज़मा की छोटी बेहन चेअर पर बैठी थी….मैने नीचे बॅग रखा और पलंग पर बैठ गया..सुमेरा चाची किचन मे थी… .मैं अभी वहाँ बैठा ही था कि, बाथरूम का डोर खुला और बिल्लू बाहर आया…”परजाई चाय बनी कि नही….?” बिल्लू ने बाहर आकर टवल से हाथ पोन्छते हुए कहा… इतने मे सुमेरा चाची चाइ का बड़ा सा स्टील का ग्लास लेकर बाहर आ गयी…उसने बिल्लू को ग्लास पकड़ाया और मेरी तरफ देखते हुए बोली.. “समीर पुत्तर तूँ चाय पीएगा….” पर मैने मना कर दिया… .”अब जल्दी चाय पी और अपने भाई साहब को खाना दे आ…वहाँ वो मुझे गालियाँ निकाल रहा होगा….” सुमेरा चाची ने मेरे पास पलंग पर बैठते हुए कहा….बिल्लू चाइ पीने लगा…इतने मे रीदा आपी तैयार होकर उज़मा के साथ नीचे आ गयी…उज़मा और रीदा आपी दोनो ने एक एक बच्चे को उठाया हुआ था…आज तो रीदा आपी कहर ढा रही थी…मुझे इस बात का बड़ा अफ़सोस हो रहा था कि, आज मैं रीदा आपी के साथ वक़्त नही बिता पाउन्गा…..वो उज़मा और उसकी छोटी बेहन के साथ चली गयी…. ”उफ़फ्फ़ गरमी की तो हद है….दो मिनट गॅस के सामने खड़े होना भी मुस्किल कर दिया गरमी ने….” सुमेरा चाची ने अपने दुपट्टे से पसीना सॉफ करते हुए कहा… .”लाओ भाभी खाने का डिब्बा दो…” बिल्लू ने पलंग से उठते हुए कहा…और ग्लास सुमेरा चाची को पकड़ा दिया..सुमेरा चाची उठी और किचन मे चली गयी…वहाँ से लंच बॉक्स लाकर बिल्लू को दिया… बिल्लू ने लंच बॉक्स लिया और गेट के पास खड़ी अपनी साइकल के पीछे टाँग कर एक बार मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा…और फिर सुमेरा चाची को अपने पास बुला लिया… सुमेरा चाची उसके पास चली गयी….वो दोनो पता नही क्या बात कर रहे थे… लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि, शायद वो मेरे बारे मे यही बात कर रहे होंगे… अब इस कान्टो को बीच मे से कैसा निकाला जाए…क्यों कि आज ऊपेर रूम बंद था…और मैं नीचे बैठा हुआ था…इतनी धूप मे सुमेरा चाची मुझे बाहर जाने को भी नही कह सकती थी….मैने उन दोनो की तरफ देखा तो, चाची मुस्कुराते हुए बिल्लू के कंधे पर मुक्का मार रही थी….”चल पागल…” मुझे सुमेरा चाची की यही बात सुनाई दी….फिर चाची ने मेरी तरफ देखा तो उसके होंटो पर मजीद मुस्कान छाई हुई थी…. फिर चाची ने गेट खोला और बिल्लू अपने साइकल लेकर बाहर चला गया…उसने बाहर से थोड़ा उँची आवाज़ मे चाची को कहा….”भाभी मे शाम को ही वापिस आउन्गा…” उसके जाने के बाद सुमेरा चाची ने गेट बंद किया और जब वो अंदर की तरफ आ रही थी…तो वो बड़ी अजीब सी नज़रो से मेरी तरफ देख रही थी…वो मेरी तरफ देखते हुए किचन मे चली गये.,…और अंदर जाकर बर्तन सॉफ करने लगी…”समीर…” मैं: हंजी चाची जी…. चाची: पुत्तर जा मेरे कमरे मे जाके लेट जा….यहा बाहर तो गरमी है….अंदर से कूलर ऑन कर लेना…. मैं: नही चाची जी मैं यही ठीक हूँ… चाची: समीर तुम ना शरमाया ना करो….इसे अपना ही घर समझो…. मैं: नही चाची ऐसी कोई बात नही है…मैं यही ठीक हूँ….. चाची के रूम के बाहर विंडो पर कूलर लगा हुआ था….मन तो कर रहा था कि, कूलर चला कर अंदर जाके आराम से ठंडी हवा मे लाइट जाउ…पर मैं उस वक़्त किसी और घर मे था…और मैं झीजक भी रहा था… थोड़ी देर बाद चाची बाहर आई…”यहा क्यों ख्वार हो रहा है….जा अंदर जाके लेट जा….” चाची ने कमरे के बाहर लगे हुए स्विच को ऑन किया तो कूलर चल पड़ा…”जा अंदर जाके लेट जा… मैं नहा कर आती हूँ…इस पसीने ने तो मत मार कर रखी है….” मैं बिना कुछ बोले कमरे मे चला गया…क्योंकि चाची ने कूलर चला दिया था…इसलिए मैं उनकी बात ना टाल सका…मैं अंदर जाकर बेड पर बैठ गया…अंदर लाइट ऑफ थी…पूरा घर छत से कवर था….इसलिए कमरे मे बहुत हल्की रोशनी थी….मुझे वहाँ बैठे हुए बड़ा अजीब सा फील हो रहा था…मुझे अजीब-2 तरह के ख़याल आ रहे थे…जैसे कि कही चाची मुझे कुछ कर ना दें…अपना गुनाह छुपाने के लिए….मैं अपने ही ख़याली पुलाओ पका रहा था कि, 10 मिनट बाद चाची रूम मे एंटर हुई….अंदर आकर उन्होने लाइट ऑन कर दी…” ये क्या समीर…तुम तो ऐसे बैठे हो….जैसे किसी ने सज़ा दी हो हाहाहा…. आराम से लेट जाओ…” चाची ने अपने खुले हुए बालो को हाथो से सेट करते हुए कहा….मैं बेड के किनारे पर बैठा हुआ था… और मेरे से 2 फुट के फाँसले पर ड्रेसिंग टेबल था…. सुमेरा चाची ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर खड़ी हो गयी….जैसे ही वो मेरे सामने पीठ करके खड़ी हुई….तो अपने सामने का मंज़र देख कर मेरा पूरा जिस्म काँप गया….सुमेरा चाची ने बड़ा ही पतला सा पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था….उसमे से उसका पूरा जिस्म नुमाया हो रहा था….मुझे पीछे उनकी पूरी पीठ इस कदर तक सॉफ दिखाई दे रही थी…मानो जैसे उन्होने कमीज़ पहनी ही ना हो….ऊपेर से कमीज़ उनके गीले बदन से चिपकी हुई थी….अपने सामने का नज़ारा देख मेरा लंड मेरी सलवार मे शख्त होने लगा…मेरी नज़र चाची सुमेरा के पीछे की तरफ निकली हुई मोटी से बूँद पर अटकी हुई थी… उस वक़्त मुझे ये मालूम नही था कि, सेक्स के दोरान बूँद को मसला भी जाता है…. फिर भी मेरा मन उस वक़्त यही कर रहा था….कि मे पीछे से चाची सुमेरा की बूँद को अपने दोनो हाथो मे लेकर दबा दूं…मैं अपने ही ख्यालो मे चाची सुमेरा की बाहर को निकली हुई बूँद की तरफ देख रहा था कि, चाची सुमेरा एक दम से सीधी हो गयी…..मैं चाची के ऐसे मुड़ने से घबरा गया….और अपनी नज़रें नीचे कर ली..चाची सुमेरा मेरे पास बेड पर बैठ गयी… “क्या सोच रहे हो…?” चाची सुमेरा ने मेरी थाइ पर हाथ रखते हुए कहा…चाची के नरम हाथ को अपनी थाइ पर महसूस करके मुझे झटका सा लगा….जिसे शायद चाची सुमेरा ने भी महसूस किया.. “कुछ नही ऐसे ही….” मैं इससे ज़्यादा ना बोल पाया….. सुमेरा: तुमने कल बिल्लू को क्या कहा था….? चाची के बात सुन कर मैं हैरत से उनकी तरफ देखने लगा…फिर सोचने लगा कि, कल मैने बिल्लू को क्या कहा था…जब कोई बात जेहन मे नही आई तो, मैने ना मे सर हिलाते हुए कहा…”मैने तो कुछ भी नही कहा….” चाची सुमेरा मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगी…”बड़े चालाक हो….अब मुकर क्यों रहे हो….” मैं: सच मे चाची मैने तो बिल्लू चाचा से कुछ भी नही कहा है…. चाची: अच्छा पर वो तो कह रहा था कि, तुमने उससे कहा कि तुम भी मेरी लेना चाहते हो….. मैं: नही चाची मैने ऐसा कुछ भी नही कहा…कसम से…. चाची: तो फिर क्या वो झूट बोल रहा था…. मैं: जी चाची…. चाची: पर उसने मुझसे झूट क्यों बोलना…तुमने ज़रूर उसे कहा होगा…नही तो वो ऐसी बात क्यों करता…. मैं: चाची जी सच मैने ऐसा कुछ नही कहा….आप मेरा यकीन करें…. चाची:देखो समीर मैं तुम पर गुस्सा नही करूँगी….पर सच बोलो…तुमने बिल्लू से नही कहा था कि, तुमने मेरी लेनी है…. मैं: नही चाची जी सच मे मैने नही कहा…..मुझे तो याद भी नही मैने कब उससे ये कह दिया कि, मैने आपकी फुद्दि लेनी है… उस समय मैं इतना घबरा गया था कि, मुझे ध्यान ही नही रहा कि, मैने चाची सुमेरा के सामने फुददी जैसे वर्ड का इस्तेमाल कर दिया है…पर जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ तो, मेरी ऐसी फटी कि पूछो मत….मुझे ऐसा लग रहा था कि, चाची अभी मुझे घर से धक्के देकर बाहर निकाल देंगी….मैने सहमे हुए चाची की तरफ देखा तो, उसके होंटो पर मजीद मुस्कान फैली हुई थी…. ”मैने कब कहा कि वो फुद्दि की बात कर रहा था….” चाची ने मुस्कुराते हुए कहा…और धीरे-2 मेरी थाइ के ऊपेर हाथ फेरने लगी….मेरा लंड जो कि पहले डर की वजह से बैठ गया था.. चाची के इस तरह हाथ फेरने से फिर से खड़ा होने लगा था…
